दिव्य महाराष्ट्र मंडल
‘जय-जय महाराष्ट्र माझा’ ने श्रोताओं में भरा जोश... मुंबई के सुप्रसिद्ध संगीतकार ऋषिकेश रानाडे ग्रुप ने अविस्मरणीय संगीतमय कार्यक्रम किया प्रस्तुत

बृहन्महाराष्ट्र मंडल की 'झेप' में रोचक जानकारियों के लेख, कविताएं व गजल भी
महाराष्ट्र मंडल के सभासदों को रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल देगा कई सुविधाएं
कामगर मजदूरों और उनके बच्चों को पानी की बाॅटल किया दान
युवा टीम की मेहनत का प्रतिफल... सफल रहा बृहन्महाराष्ट्र मंडल का राष्ट्रीय अधिवेशन

संक्राति पर काला परिधान... मराठा रणबाकुरों को सच्ची श्रद्धांजिल
लेखक- प्रसन्न निमोणकर
भगवान श्री सूर्यनारायण 14 जनवरी से उत्तरायण को प्रवेश कर जाएंगे। संपूर्ण भारत वर्ष में इस अवसर पर मकर संक्रांति मनाई जाएगी। अलग-अलग प्रांतों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। जैसे लोहड़ी, बिहू, पोंगल, खिचड़ी पर्व, मकर चौला, उत्तरायण आदि। महाभारत काल में पितामह भीष्ण ने अपनी इच्छा मृत्यु के वरण के लिए इसी मकर संक्रांति की परीक्षा की थी। सनातन परंपरा में उत्सव के दौरान परिधान भी सुनिश्चित है। काले रंग के परिधान को सामान्यतः उत्सवों में वर्जित माना जाता है। अपितु मकर संक्रांति के उत्सव पर संपूर्ण महाराष्ट्र की महिलाएं और पुरुष काले रंग के परिधान में उत्सव मनाते है। आज हम इन्हीं काले परिधानों पर चर्चा करेंगे।
महाराष्ट्र की महिलाएं आज के दिन काले रंग के परिधानों का इस्तेमाल अपने पूर्वजों को नमन करने के लिए करती है। जिन्होंने आज से ठीक 261 वर्ष पहले 17 जनवरी 1761 के दिन अहमद शाह अब्दाली के साथ हुए पानीपत के तृतीय युद्ध में अपने प्राणों की आहुति दी थी। सदाशिव राव भाऊ के नेतृत्व में मराठों की सेना ने 14 मार्च 1760 को पुणे से उत्तर की ओर कूच किया था। मराठों का अंतिम लक्ष्य दिल्ली पर विजय पाना था। इस कूच को रायल मराठा मार्च भी कहा जाता है। इस कूच में 45 हजार मराठा सैनिक 10 हजार मारदी सैनिक और लगभग 2 लाख गैरसैनिक एवं तीर्थयात्री शामिल थे। उधर उत्तर में आक्रमणकारी अहमद शाह अब्दाली अपनी सामरिक क्षमता का विस्तार कर रहा था। मार्ग में सभी राजे-रजवाड़े को अपने अभियान में सम्मिलित करते और मुगलों से अलग-अलग स्थानों पर युद्ध लड़ते और उन्हें पराजित करते हुए सदाशिव राव भाऊ ने अपने भतीजे विश्वास राव और मल्हाराव होल्कर, महादजी शिंदे, रानोजी भोइते, इब्राहिम खान गादरी, जनकोजी शिंदे, शमशेर बहादूर, दामाजी गायकवाड़, यशवंतराव पवार जैसै शौर्यवान योद्धाओं के साथ 14 जनवरी 1761 को पानीपत में अहमद शाह अब्दाली को ललकारा। पानीपत की तीसरी लड़ाई के नाम से प्रसिद्ध इस युद्ध में रोहिंग्या नजीब उद्रौला और अवध के नवाब शुजा-उद-दौला ने अफगानों को साथ दिया।

अब्दाली के 45 हजार आक्रमणकारी अफगानों की क्रूरता और 30 हजार रोहिग्यों एवं 10 हजार अवध के देशद्रोह पर मराठों का देशप्रेम और शौर्य भारी पड़ने लगा। मुगल सेना को मराठों की अश्वसेना और तोफदल ने भारी नुकसान पहुंचाया। 50 हजार से अधिक मुगल सैनिक युद्ध में मारे गए। मराठों की सैन्य सहायता और रसद आपूर्ति के मार्ग को रोहिल्लों ने अवरूद्ध कर दिया। परिणामतः युद्ध में मराठों की पराजय हुई। लगभग 40 हजार मराठा सैनिक युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए। क्रूर अफगानों ने 50 हजार गैर सैनिकों एवं कूच में साथ चलते सहायकों तथा तीर्थयात्रियों का नरसंहार किया। हजारों मराठा लापता हो गए। सदाशिव राव भाऊ एवं विश्वास राव ने भी अपने प्राणों की आहूति दी। किसी युद्ध में एक दिन में 1 लाख से अधिक सैनिकों की मृत्यु का यह एकमेव उदाहरण है। पेशवा बालाजी बाजीराव का पैठन से युद्ध में सम्मिलित होने के लिए देर से प्रस्थान करना, मराठों की सेना में सम्मिलित कुछ मुसलमान सैनिकों (गादरी) का स्वरक्षा के लिए अपनी पगड़ी बदल लेना और तोफदल को अवध सैनिकों द्वारा निष्क्रिय कर दिया जाना तथा रसद व सैन्य सहायत का अवरूद्ध होना इस पराजय के प्रमुख कारण बने। युद्ध जीतकर भी अब्दाली भारत पर शासन करने के लिए अपने मंसूबे को पूरा न कर सका। इस युद्ध से हुई आर्थिक और सामरिक क्षति से वह कभी उबर न सका और हमेशा कि लिए अफगानिस्तान लौट गया मराठा हारकर भी जीत गए।
मातृभूमि की रक्षा के लिए आक्रमणकारियों के विरुद्ध भारत के इतिहास की सबसे बड़ी लड़ाई थी। उन रणबाकुरों को शत-शत नमन। काला परिधान इस उत्सव के अवसर पर 14 जनवरी 1761 को स्मरण करने का यथोचित प्रतीक है।
संत ज्ञानेश्वर स्कूल में मनाया गया छेरछेरा.. बच्चों ने जाना अपने संस्कार और इसके महत्व को
रायपुर। छत्तीसगढ़ के तीज त्योहारों का अपने अलग ही महत्व है। खेती प्रधान इस राज्य में त्योहारों की सीधा केंद्र किसानों द्वारा खेतों में लगाई फसल से होता है। पौष माह की पुर्णिमा को छत्तीसगढ़ में छेरछेरा पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसे दान का पर्व भी कहते है। पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी। छेरछेरा पर्व में दान की गई वस्तुओं का उपयोग जनकल्याण के कार्यों में किया जाता है।

यह पर्व किसानों की मेहनत और उनकी फसल की खुशियों का प्रतीक है। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में छेरछेरा पर्व सुबह की प्रार्थन सभा में मनाया गया।
शिक्षिका आराधना लाल ने प्रार्थना सभा में बच्चों को छेरछेरा पर्व के महत्व और उसे मनाए जाने के काऱण के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि महादान और फसल उत्सव के रूप मनाया जाने वाला छेरछेरा पर्व छत्तीसगढ़ के सामाजिक समरसता और समृद्ध दानशीलता का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन दान करने से घरों में धन-धान्य की कोई कमी नहीं होती है।

स्कूल के उपप्राचार्य राहुल वोडीतेलवार ने बताया कि इस दिन बच्चे एकत्र होकर घर-घर जाकर दान मांगते हैं। बच्चे छत्तीसगढ़ी लोकगीत ‘छेर-छेरा, छेरी के छेरा छेर बरतनीन छेर-छेरा’ गाते गए सभी के घर जाते है और दान मांगते है। ग्रामीण क्षेत्रों में धान दान करने की परंपरा है।
स्कूल के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान शंकर ने माता अन्नपूर्णा से भिक्षा मांगी थी, इसलिए लोग धान के साथ साग-भाजी, फल का दान भी करते हैं। देश के अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नाम से जैसे असम में बिहू, दक्षिण में पोंगल, उत्तर भारत में संक्रांति के रुप में मनाया जाता है।
मुख्यमंत्री साय ने किया ‘झेप’ का विमोचन... पुस्तक में दिखा मराठी और छत्तीसगढ़ी प्रेम
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में आयोजित तीन दिवसीय बृहनमहराष्ट्र मंडल के 73वें राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान बतौर मुख्यअतिथि पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने अधिवेशन की स्मारिका ‘झेप’ का विमोचन किया। झेप का अर्थ सरल शब्दों में ऊंची उड़ान से। स्मारिका के संपादक रामदास यशवंत जोगळेकर ने कहा कि यह स्मारिक बृहन्महाराष्ट्र मंडल और रायपुर महाराष्ट्र मंडल के सामाजिक प्रगति की परिचायक है। इसमें समाज के कवियों और लेखकों के विचारों को स्थान देने के साथ महाराष्ट्र मंडल रायपुर के निरंतर प्रगति को सारगर्भित शब्दों में पिरोया गया है।
90 वर्षीय सामाजिक संस्था महाराष्ट्र मंडल रायपुर के स्वर्णीम इतिहास का उल्लेख करते हुए मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले यह बताया कि कैसे 1935 में आरएसएस के संस्थापक गुरुवर केशव बलीराम हेगडेवार के कहने पर महाराष्ट्र मंडल ने सभी समाजों के लिए सेवाभावी कार्य शुरू किया। 1935 में बोया गया समाजसेवा रुपी पौधों का बीज और विशाल वटवृक्ष की भांति स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक क्षेत्रों में अपने सेवाएं दे रहा है।
बृहन्महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष मिलिंद महाजन ने अपने अध्यक्षीय मनोगत में लिखा कि इस अधिवेशन के साथ बृहन्महाराष्ट्र मंडळ अपने स्थापना का शताब्दी महोत्सव शुरू करने जा रहा है। 5 अप्रैल 2025 से शताब्दी महोत्सव का शुभारंभ होगा। 100 वर्ष पहले जब बृहन्महाराष्ट्र मंडल की स्थापना हुई तब हमारे मराठी या अन्य मराठी भाषी आंतरिक प्रवासियों का एक समूह के बीच बुनियादी जरूरतों - संपर्क, संचार और सहचर्य के लिए मंडल अस्तित्व में आया। विभिन्न त्योहारों और परंपराओं को मनाते हुए हमारी मराठी संस्कारों को संजोए रखने का बीड़ा उठाय़ा। आज हमारी तीसरी और चौथी पीढ़ी इससे जुड़कर हमारे संस्कारों को संयोए रखने मे जुटी है।
बृहन्महाराष्ट्र मंडल की टीम ने की महाराष्ट्र मंडल रायपुर की प्रशंसा
युवाओं की पसंद को महत्व दें तो जुड़ेगे समाज सेः अजय काले
हमारे संस्कारों की वजह से ही बच्चे हमसे दूरः माधुरी नंदन कुलकर्णी
रायपुर। आधुनिक काल में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और हाथ से निकलते बच्चे विषय पर बुरहानपुर से यहां आई माधुरी नंदन कुलकर्णी ने कई महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि बचपन से ही हम बच्चों को बड़ी नौकरी करने ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने के लिए प्रेरित करते है। इसमें न केवल हम उन्हें संस्कारिक कर पाते है और न ही परिवार की आत्मीयता का बोध करा पाते है।
महाराष्ट्र मंडल में आयोजित बृहन्महाराष्ट्र मंडल के राष्ट्रीय अधिवेशन में महिला सत्र के दौरान परिसंवाद पर बोलते हुए माधुरी कुलकर्णी ने कहा कि जब मासूम सा बच्चा हमारे पास आना चाहता है तो हम ही कभी उसे ट्यूशन के नाम पर, कभी होमवर्क के नाम पर अपने से दूर करते हैं। पढ़ लिखकर वहीं बच्चा जब हमारे पास आता है तो भी हमारा आग्रह थोड़ी देर और पढ़ाई करने को लेकर रहता है। माधुरी ने कहा कि कितना आसान है यह कहना कि बच्चे विदेश में पढ़ाई करने गए। वहीं नौकरी में लग गए और बस गए। हमसे दूर हो गए। जबकि सच्चाई यह है कि बचपन में जब उन्हें हमारे गोद की, लाड प्यार की जरूरत थी तो हमने ही उन्हें अपने से दूर किया और भविष्य के लिए यही भाव सिखाए भी। कम से कम अब हमें अपनी गलती का एहसास होना चाहिए और उसे सुधारना चाहिए।

विलुप्त होते संस्कार व कुटुंब पर चर्चा करते हुए अनुश्री अरोणकर ने कहा कि बड़े-बड़े पैकेज में 12-14 घंटे नौकरी करने वाले एकल परिवार वाले अभिभावक जब आपस में ही संवाद नहीं कर पाते तो बच्चों को वो संस्कार के नाम पर क्या सीखा पाएंगे। व्यावसायिक व्यवस्ता के चलते दो चार बड़े त्योहारों को छोड़ भी दो तो लगभग सभी त्योहार विलुप्त होने की कगार पर है। कुटुंब का अर्थ बताते हुए अनुश्री ने कहा कि कुटुंब परिवार व एकता का संयुक्त शब्द है। जब परिवार ही बिखर रहे हैं तो एकता की क्या बात करें।
शोभा परांजपे ने पति के रिटायरमेंट पर व्यंग्यात्मक लेख का पठन कर लोगों को खूब हंसाया। उन्होंने कहा कि शादी के समय मुझे नहीं मालूम था कि इन (पति) से मेरी यह दूसरी शादी है। इनकी पहली शादी तो नौकरी से हो चुकी है। जिसे ये रोज 10-12 घंटे का समय देते है। और मुझे यानी दूसरी पत्नी को बमुश्किल तीन घंटे का समय। जब ये रिटायर हुए तो मैं बहुत खुश थी कि कम से कम पहली पत्नी से इनका तलाक हो रहा है,और मुझे भरपूर समय मिलेगा। नई नवेली दुल्हन की भावनाओं के साथ रिटायरमेंट के बाद इनके साथ समय बीताने की कोशिश करती मैं और ये अपने ससुराल वालों (रिटायर्ड बैंक कर्मियों) के बीच ही ज्यादा वक्त गुजारने लगी। घर पर रहते हुए फोन काल के जरिए आपकी पेंशन कितनी बनी, कब शुरू हुई, कोई समस्या तो नहीं है, मैं क्या कर सकता हूं जैसी बातों के पीछे ही समय निकल जाता है। यही कारण है कि मैं बृहन्महाराष्ट्र मंडल के अधिवेशन में आती हूं और ये मेरे पीछे-पीछे।

इनके अलावा पूर्णिमा केलकर ने पर्यावरण में महिलाओं की भूमिका, स्मिता नागरिकर ने पढ़े लिखे युवा विदेशों की ओर की क्यों भागते है, विषय पर, स्वाती पाठक ने वर्तमान युग में वृद्धाश्रम की आवश्यकता पर, कुमुद लाड ने पर्यावरण, संस्कृति और महाराष्ट्र मंडल की आध्यामिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने महिलाओं के लिए योग व स्वास्थ्य विषय पर चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन गोवा की चित्रा क्षीरसागर ने किया। विशेष अतिथि के रुप में आहार विशेषज्ञ डा अभया जोगळेकर ने कहा कि सांस्कारिक जीवन में खुशियों के साथ चुनौतियां भी आएंगी, संघर्ष भी करना पड़ेगा। लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि हम अपने खान-पान के प्रति लापरवाह हो जाए। आपकी खऱाब सेहत आपके पूरे परिवार को प्रभावित करती है।
साइबर क्राइम से सावधानी और सतर्कता ही बचावः पारितोष डोनगांवकर
- बृहनमहाराष्ट्र मंडल के राष्ट्रीय अधिवेशन में परितोष डोनगांवकर ने दिया जागरूकता संदेश
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल रायपुर में आयोजित बृहनमहाराष्ट्र मंडल के 73वें राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन प्रथम सत्र में व्याख्यान माला श्रृंखला की प्रथम कड़ी में महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के प्रभारी परितोष डोनगांवकर ने बढ़ते साइबर क्राइम के तरीकों और बचाव पर महत्वपूर्ण जानकारी सभी से साझा की।
परितोष ने बताया कि हैकिंग, फिशिंग, पहचान की चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर जासूसी, बाल शोषण जैसे और भी प्रकार से साइबर क्राइम इन दिनों लोगों के साथ हो रहे है। कुछ सावधानियों और सतर्कता से इनसे बड़ी आसानी से बचा जा सकता है। कोई अनजान कालर आपको कॉल या मैसेज कर आपकी किसी सर्विस को बंद होने का बात करता है, आनलाइन खरीदी या आपकी व्यक्तिगत जानकारी आपको बताकर आपको विश्वास में लेता है तो सचेत हो जाइए आप साइबर ठगी के शिकार हो सकते है। लुभावना आफर देता है या आपके किसी सर्विस के ब्लॉक होने का भय दिखाता है, आपकी किसी एग्जिस्टिंग सर्विस, ऑनलाइन खरीददारी या व्यक्तिगत जानकारी देकर आपको विश्वास में लेता है तो सचेत हो जाएं आप साइबर ठगी के शिकार हो सकते हैं।
साइबर क्राइम से बचने के लिए कुछ आवश्यक सावधानियाँ
• यदि कोई अनजान व्यक्ति आपको कॉल या मैसेज कर आपको लुभाता है या आपके किसी सर्विस के ब्लॉक होने का भय दिखाता है, आपकी किसी एग्जिस्टिंग सर्विस, ऑनलाइन खरीदारी या व्यक्तिगत जानकारी देकर आपको विश्वास में लेता है तो सचेत हो जाएं आप साइबर ठगी के शिकार हो सकते है।
• अंजान व्यक्ति आपको फोन पर अपनी निजी जानकारी जैसे आधार नंबर, पैन कार्ड का नंबर, एटीएम कार्ड नंबर, ओटीपी साझा करने के लिए प्रलोभित कर सकता है, ऐसे झांसे मे न आये।
• बीमा, फाइनेंस, किश्त, लोन, केवाईसी अपडेट, सिम ब्लॉक होना, लॉटरी या लक्की ड्रा जैसे फोन कॉल/मैसेज के झांसे में न आएं।
• लोन ऐप के झांसे में न आएं, ये बाद में आपको ब्लैकमेल कर सकते हैं।
• अनजान व्यक्ति के कहने पर किसी भी थर्ड पार्टी एप्लीकेशन जैसे क्विक सपोर्ट, एनीडेस्क, टीम विवर को अपने मोबाईल में इंस्टाल ना करें।
• अनजान नंबर से आए लिंक्स को कभी क्लिक ना करें इससे आपका फोन हैंक हो सकता है।
• अनजान नंबर के वीडियो कॉल न उठाएँ, फोन उठाते ही आप ब्लैक मैलिंग के शिकार हो सकते है।
• सोशल मीडिया पर अंनजान व्यक्तियों से दोस्ती करने से बचें।
• ध्यान रखें, क्यूआर कोड पर स्कैन केवल पेमेंट करने के लिए होता हैं, पेमेंट मंगाने के लिए नहीं।
• यूपीआई से पेमेंट रिसीव करते समय पिन एंटर न करें।
• गूगल में कस्टमर केयर का नंबर सर्च करते वक्त सावधानी बरते, कस्टमर केयर नंबर के लिए हमेशा संबंधित कंपनी के वेबसाइट पर जाएं।
• सोशल मीडिया एकाउंट्स पर टू स्टेप वेरीफिकेशन का उपयोग कर प्रोफाइल लॉक रखें।
• सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक सौहार्द्र बिगाड़ने वाली खबरों से बचे व बिना जांचे फॉरवर्ड न करें।
• यदि कोई फोन कॉल के माध्यम से यह बोले कि आपका बच्चा रेप केस में फंस गया है तो हो जाए सावधान। घबराएं नहीं नजदीक पुलिस या साइबर सेल से संपर्क करें।
• किसी अनजान व्यक्ति द्वारा आपका परिचित बनकर आपके खाते में राशि भेजने का झांसा देकर ठगी कर सकता है। सोशल साईट में पार्ट-टाइम नौकरी, घर बैठे काम, पैंसिल पैकिंग जैसे झांसे में ना आए। किसी भी वाट्सएप या टैलीग्राम गु्रप से जुड़कर शेयर में निवेश करने से बचे।
• वाट्सएप पर आए किसी अन्य प्रकार के एप्लीकेशन (एपीके फाईल) को डाउनलोड या इंस्टाल न करें।
किसी कारणवश यदि आप साइबर क्राइम के शिकार होतें है तो घबराएं नहीं सावधानी से और शांति पूर्वक समस्या का समाधान निकालने का प्रयास करें और शीघ्र ही Help Line Number 1930 में कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करें। आज का डिजिटल युग आपकी सुविधा के लिए है अतः सावधानीपूर्वक सुरक्षा संसाधनों एवं प्रणालियों का उपयोग करते हुए अपनी दैनिक कार्यप्रणाली आसान बनाएं।
कंपनी को मैं क्या दे सकता हूं पर करें विचार, बेहतर अवसर मिलेंगेः शेष
कन्यादान क्यों नहीं कर सकती विधवा, बिटिया क्यों नहीं दे सकती मुखाग्निः चेतन
मराठी भाषा की मिठास का मजा लीजिए, गलती मत निकालिए : फडके
0 - मराठी साहित्य सम्मेलन में जुटे देशभर के साहित्यकार, रिश्ते- नातों पर सुनाई कविताएं
रायपुर। जब भी कोई मराठी बोलता है, तो उसकी भाषा का मजा लेना चाहिए और गलती निकालने ये बचना चाहिए। यह विचार गजानन फडके ने महाराष्ट्र मंडल में चल रहे बृहन्महाराष्ट्र मंडल के राष्ट्रीय अधिवेशन में मराठी साहित्य सम्मेलन के दौरान कही। देशभर से पहुंचे कवियों ने एक से एक कविताएं सुनाकर वर्तमान परिस्थितियों के साथ रिश्ते- नातों की सच्चाई को ईमानदारी से सामने लाया।

बिलासपुर से पहुंचे गजानन फडके ने कहा कि भारत देश में हर 12 कोस में बोली- भाषा बदल जाती है। महाराष्ट्र में भी ऐसी ही स्थिति है, कोल्हापुर की मराठी अलग है, तो जुन्नर घोडेगांव में मराठी बदल जाती है। नासिक की मराठी अलग है, तो उत्तर महाराष्ट्र की मराठी बिल्कुल भिन्न। खानदेशी मराठी अलग है, तो मराठवाडा की अलग। कोंकण की मालवणी मराठी की मिठास भिन्न है, तो हमारे विदर्भ की मराठी निराले अंदाज में बोली जाती है। ऐसे में किसी को मराठी बोलते हुए देखकर यह निष्कर्ष निकालना कि वह गलत बोल रहा है, सर्वथा अनुचित है। बल्कि हमें मराठी भाषा सतत बोलनी चाहिए, उसका संरक्षण करना चाहिए।
फडके ने कहा कि आठ सौ साल के बाद मराठी भाषा को केंद्र सरकार ने अभिजात भाषा का दर्जा दिया है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है। महाराष्ट्र के संत ज्ञानेश्वर, संत तुकोबाराय, संत नामदेव महाराज, संत एकनाथ, संत रामदास स्वामी जैसे अनेकानेक संतों- महात्माओं ने मराठी भाषा को सींचा है। कभी विचार कीजिए कि जब संत ज्ञानेश्वर मुक्ताबाई से या संत नामदेव महाराज एक- दूसरे से मराठी में बातें करते होंगे तब उन्हें आपस में बातचीत करते हुए सुनना ही किसी त्योहार से कम नहीं होतो होगा।
साहित्य सम्मेलन के समन्वयक रामदास यशवंत जोगलेकर ने अपने संक्षिप्त संबोधन में मराठी भाषा को अधिकाधिक बोलने और उसकी मिठास बनाए रखने की बात रखी। इस मौके पर माधुरी नंदन कुलकर्णी बुरहानपुर, चित्रा क्षीरसागर गोवा, चंद्रशेखर गावस गोवा, सुबोध मांडवीकर, रविकांत खांडेकर, शुभदा चारी, गजानन फडके बिलासपुर, कमबेलकर भोपाल, सुमीता रायजादा, सुप्रिया शेष, रंजन मोडक, रामदास जोगलेकर रायपुर ने कविता पाठ किया। पौर्णिमा कलकर ने सुमधुर गजल पेश किया। शशि वरवंडकर पिता की याद में कविता पढते हुए अपने आंसू नहीं रोक पाए।
महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के मध्य है अटूट सांस्कृतिक संबंध : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
सावरकर, शिवाजी महाराज से अहिल्या बाई तक के किरदार मंच पर हुए जीवंत
0 - बृहन्महाराष्ट्र मंडल के राष्ट्रीय अधिवेशन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में छा गए छत्तीसगढ के महाराष्ट्र मंडल
रायपुर। बृहन्महाराष्ट्र मंडल का 73वें राष्ट्रीय अधिवेशन में छत्तीसगढ के महाराष्ट्र मंडलों ने कमाल की प्रस्तुतियां दीं। महाराष्ट्र मंडल रायगढ़ के नृत्य मंजरी ग्रुप का ‘हमारी संस्कृति हमारे त्योहार’ थीम पर मंचन कमाल का रहा। इसमें नीलू बोंडे, सारिका कलमकर, वैशाली मोडक, मीनल देशमुख, रक्षा मोडक, मीनाक्षी आगाशे, नेहा गुडधे, संपदा तामस्कर ने नृत्य कौशल से तीज-त्योहारों के साथ संस्कृति के महत्व को भी मंचित किया।

इसी तरह महाराष्ट्र मंडल भिलाई सेक्टर की ओर से प्रस्तुत ‘अनादि मैं अनंत मैं’ के अंतर्गत विनायक दामोदर सावरकर की जीवनी को पूरी संवेदना के साथ प्रस्तुत किया गया। इसमें अजय डांगे, कवीश गोखले, नीलिमा सगदेव, नीहिरा जोशी बेहतरीन अदाकारी व संवाद अदायगी के साथ अपनी भूमिकाओं जंचे।

महाराष्ट्र मंडल बिलासपुर के माय भवानी ग्रुप की शीतल देवपुजारी, स्वरांगी देवपुजारी, भारती रागिणवार ने जबर्दस्त ऊर्जा के साथ गोधल पेश किया।
रायपुर महाराष्ट्र मंडल की युवा समिति ने छत्रपति शिवाजी महाराज के बचपन से लेकर जवानी तक के विभिन्न प्रसंगों को पूरी शिद्दत के साथ नृत्य नाटिका के रूप में मंच पर जीवंत किया। बाल शिवाजी की भूमिका में अमोघ बाबर और युवा शिवाजी बने शुभम् पुराणिक ने लोगों को प्रभावित किया।
अन्य भूमिकाओं में रीना बाबर, श्रावणी मुकादम, तन्मय बक्षी, विनोद राखुंडे, शिल्पा राखुंडे, शुचिता देशमुख, विशाल डांगे, सोनल पेदे, करिश्मा अंजनकर समेत सभी कलाकारों ने अपनी भूमिकाओं में न्याय किया। महाराष्ट्र मंडल कोरबा के अलावा महाराष्ट्र मंडल रायपुर की महिला समितियों की ओर से विशाखा तोपखानेवाले के निर्देशन व रंजन मोडक के मार्गदर्शन में राजमाता अहिल्या बाई नाटिका की प्रस्तुति सराही गई।