दिव्य महाराष्ट्र मंडल
महाराष्ट्र मंडल नारी सशक्तीकरण की दिशा में करे उल्लेखनीय काम
मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव के दूसरे दिन परिचर्चा में वक्ताओं ने अगले दशक का महाराष्ट्र मंडल का खींचा खाका
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में ये क्षमता है कि वो नारी सशक्तीकरण की दिशा में बहुत कुछ कर सकता है। जरूरतमंद व प्रतिभाशाली बच्चियों की पढ़ाई की खर्च जिस तरह महाराष्ट्र मंडल संत ज्ञानेश्वर स्कूल के माध्यम से उठाता है, उसी तरह उनकी उच्च शिक्षा का खर्च भी महाराष्ट्र मंडल उठाने की व्यवस्था करें, ताकि उनकी शिक्षा स्वावलंबन की दृष्टि से सार्थक अंजाम तक पहुंच सके। डॉ. कमल वर्मा ने इस आशय के विचार महाराष्ट्र मंडल के शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव के दूसरे दिन आयोजित परिचर्चा में व्यक्त किए।
परिचर्चा में तमाम वक्ताओं ने अगले 10 वर्षों में महाराष्ट्र मंडल की योजनाओं व कार्यों का खाका खींचा। डॉ. वर्मा ने कहा कि महिलाओं की तरह ही बच्चियों को भी सशक्त बनाने के लिए महाराष्ट्र मंडल को कराते- कुंग फू प्रशिक्षण कक्षाएं लगानी चाहिए। इससे उनमें असुरक्षा की भावना खत्म होगी और आत्मविश्वास बढेगा। डॉ. वर्मा के मुताबिक दिव्यांग बालिका गृह के लिए वे ग्रामीण अंचल में दिव्यांग बच्चियों को तलाशने के लिए तैयार हैं। यदि हम अभिभावकों का भरोसा जीत पाए तो हमें और भी दिव्यांग बच्चियां मिलेंगी।
मंडल उपाध्यक्ष गीता दलाल ने कहा कि केरला समाज, आंध्रा समाज, सिख समाज, बंगाली समाज की तर्ज पर महाराष्ट्र मंडल को भी अपने परिसर में एक मंदिर शुरू करना चाहिए। इससे दूसरे समाज के श्रद्धालुओं को भी महाराष्ट्र मंडल आने और उसे जानने का मौका मिलेगा। जरूरत पडे तो इसके लिए वार्षिक सामान्य सभा में एक विशेष संविधान बनाना चाहिए। इससे हमारे समाज की भावी पीढी को भी आध्यात्म से जुडने का एक मौका जरूर मिलेगा।
स्वास्थ्यजन सेवा समिति के पूर्व प्रभारी अरविंद जोशी ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल के सामने इस समय सदस्यता का बढ़ती उम्र का होना, युवाओं का घटता जुड़ाव, एक कमजोर डिजिटल उपस्थिति और वित्तीय अस्थिरता गंभीर चुनौती है। ये मुद्दे मंडल की भविष्य की प्रासंगिकता के लिए गंभीर जोखिम प्रस्तुत करते हैं। जोशी के मुताबिक महाराष्ट्र मंडल में पारदर्शी और जवाबदेह नेतृत्व को बढ़ावा देने की जरूरत है। साथ ही अगली पीढ़ी के नेताओं को सक्रिय रूप से विकसित करना भी मंडल के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है।
जोशी के विचारों में पारंपरिक त्योहारों में नवाचार लाना और मराठी कला व भाषा को आधुनिक तरीकों से बढ़ावा देना महाराष्ट्र मंडल की जिम्मेदारी है और अगले दशक इसका निर्वहन होना चाहिए। सामुदायिक और सामाजिक प्रभाव को गहरा करने के लिए युवाओं पर केंद्रित पहल की जानी चाहिए। मंडल में महिला सशक्तीकरण कार्यक्रम और सामाजिकता को और भी बढावा देने की जरूरत है।
पर्यावरण समिति के समन्वयक अभय भागवतकर ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल को एमएमवायडीपी (महाराष्ट्र मंडल यूथ डेवलपमेंट प्रोग्राम) को शुरू कर एक नई दिशा की ओर से कदम बढ़ाना चाहिए। युवा स्वावलंबन योजना के तहत स्व रोजगार को प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करना चाहिए। भागवतकर के अनुसार नारी सशक्तीकरण के लिए मंडल को दुर्गा वाहिनी, रानी लक्ष्मीबाई वाहिनी, रानी अहिल्या बाई वाहिनी या दामिनी योजना बनानी चाहिए, ताकि हमारे समाज और आसपास नारी पर अत्याचार न हो।
भागवतकर ने कहा कि मंडल को स्वामी विवेकानंद, छत्रपति शिवाजी, संभाजी महाराज, स्वातंत्र्य वीर विनायक सावरकर के नामों से ‘संस्कार योजना शुरू करना चाहिए। इसी तरह अगले 10 वर्षों में महाराष्ट्र मंडल संत ज्ञानेश्वर स्कूल की दो और शाखाएं शुरू करें। इससे गरीब परिवारों के लाभार्थी बच्चों की संख्या बढेगी। महाराष्ट्र मंडल खेल अकादमी की स्थापना भी हमारे समाज के प्रतिभावान खिलाड़ियों को अवसर प्रदान करेगी। इसी तरह महाराष्ट्र मंडल को संगीत प्रशिक्षण अकादमी की स्थापना करनी चाहिए। मंडल को ‘मेरी सेना मेरा देश’ गौरव योजना के माध्यम से युवाओं को सशस्त्र बल में सेवाओं के अवसर दिलाने के लिए कार्यशाला आयोजित करना चाहिए।
सचेतक रविंद्र ठेंगडी ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल की पहचान मूलत: सामाजिक संस्था के रूप में है इसलिए यहां के सेवाभावी कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर बड़े पैमाने पर करना चाहिए। इसमें दिव्यांग बच्चियों की संख्या बढ़ाने, संत ज्ञानेश्वर स्कूल की कम से कम तीन शाखाएं खोलकर अधिकाधिक गरीब परिवार के बच्चों के लिए सस्ती व निशुल्क शिक्षा देने, बड़ी संख्या में कामकाजी महिलाओं व छात्राओं को सखी निवास में लाभान्वित करने और शहर में कम से कम 10 स्थानों पर लगातार संस्कार शिविर लगाने जैसे काम करने चाहिए।
ठेंगडी के अनुसार इस सब कामों के लिए बड़े पैमाने पर फंडिंग की जरूरत होगी। उसके लिए महाराष्ट्र मंडल और मेस को बडे पैमाने पर लगातार प्रचारित करने की जरूरत होगी। इसी तरह अपुलकी योजना, पालना घर योजना, गोशाला, गुरुकुल जैसी मंडल की भावी योजनाओं को यथाशीघ्र शुरू करने की जरूरत है। इनसे मंडल की पहचान राजधानी रायपुर में एक अनिवार्य जरूरत के रूप में हो सके। सखी निवास प्रभारी नमिता शेष ने परिचर्चा की शुरुआत में सभी वक्ताओं का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने सभी वक्ताओं का आभार माना और भरोसा दिलाया कि इन सुझावों को भविष्य में धरातल पर लाया जाएगा।
महाराष्ट्र मंडल में 30 अगस्त को हिंदी नाटक ‘शिखंडी’ का मंचन
रायपुर। साहित्य और समाज का संबंध होता है। समाज की सच्चाई को साहित्य अपने भीतर समेटकर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है। ऐसे ही समाज की एक सच्चाई को शनिवार शाम 7 बजे महाराष्ट्र मंडल के शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में देखने को मिलेगी। टीम रंगभूमि के कलाकार ‘किन्नर व्यथा शिखंड़ी’ का मंचन किया जाएगा।
आचार्य रंजन मोड़क ने बताया कि इस नाटक का मुख्य उद्देश्य समाज के हाशिए पर पड़े थर्ड जेंडर समुदाय की जीवन स्थितियों और संघर्षों को मुख्यधारा में लाना है। कार्यक्रम में लेखक भरत वेद द्वारा लिखित नाटक ‘शिखंडी’ का मंचन थर्ड जेंडरों के संघर्ष और उनकी मानसिक स्थिति को बेहद प्रभावशाली तरीके से दर्शाया नजर आएगा।
नाटक के माध्यम से लेखक भरत वेद ने किन्नरों की कठिनाइयों, उनके अधिकारों की लड़ाई और समाज में उन्हें मिलने वाले असमान व्यवहार को गहरे और संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत किया। 2014 में माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने किन्नरों को ‘थर्ड जेंडर’ का दर्जा प्रदान किया था, और तब से यह समुदाय अपने अधिकारों को लेकर सजग और जागरूक हो गया है। अब वे अपनी पहचान और अधिकारों के लिए सक्रिय रूप से संघर्ष कर रहे हैं, और समाज में समानता की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से रंगभूमि ने इस समुदाय की मानसिकता, संघर्ष, और बदलाव की इच्छा को समाज के सामने रखा।
यादें...... ताई चली गई अनंत यात्रा पर...
अजय मधुकर काले, अध्यक्ष महाराष्ट्र मंडल रायपुर
छत्तीसगढ़ की पहली महिला विधायक रजनी ताई उपासने 93 वर्ष की आयु में अनंत यात्रा में निकल गई। तात्यापारा राजिमवाले बाड़े के ऊपर का मकान ओर उसमें ताई का परिवार रहता था। मुझे तो जगदीश भैया ओर नंदू भैया का साथ मिला जब तात्यापारा डबरी में शाखा में हम जाते थे। उस समय मेरी उम्र 7 साल थी गली में खेलते थे। अचानक पुलिस वाले आए और उपासने परिवार से भैया लोगों को ले गए। आसपास के लोग मुझे भी डराते थे तुमको भी ले जाएंगे। अभय गोडसे जी को ले गए, बंडू पुराणिक को ले गए, अब तुमको भी ले जाएंगे। तब समझ भी नही थीं लेकिन काकू के शब्द आज भी याद हैं बच्चो तुम लोग डरो मत कुछ नहीं होगा। चंदू भैया (सुहास देशपांडे जी) बुड़ुक भैया (शरद देशपांडे) हमारे शाखा के शिक्षक गण की उपस्थिति में लगातार तात्यापारा के सारे बच्चो का गैंग बन गया था। फ़िर आया 1977 का चुनाव ताई को टिकिट मिल गई थी और हम जोर-शोर से प्रचार में जुट गए। रिक्शा में ताई को वोट दो के नारे लगाते थे घूमने का भी मजा ओर ताई का प्रचार। कौन सामने था मतलब नहीं था, बस ताई जितना चाहिए ये ही धुन। सप्रे स्कूल का मैदान पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी जी की सभा और पहली बार भीड़ कह रही थी, ताई जीतेगी हम बहुत खुश। रिजल्ट आया तो सभी घर में जमा हुए ताई व्यक्तिगत सभी को पूछ पूछकर पेढ़े खिला रही थी। मुझे कहा था बहुत रिक्शे में घूम घूमकर मेहनत किए तुम 2 पेड़े खाओ। इतनी सरल, सभी का ध्यान रखने वाली ओर सभी बातों को स्मरण रखने वाली ताई ने जितनी कठिनाई के साथ पूरे प्रतिबध्दता के साथ अपनी विधायकी का सफर पूर्ण किया वो प्रेरणास्पद रहा।
महाराष्ट्र् मंडल की आजीवन सभासद ताई हमेशा मंडळ के कार्यो की प्रशंसक रही है। मंडल की परंपरा रही कि 80वें जन्मदिन के बाद हर साल जन्मदिन पर महिला केंद्र की सदस्याएं उनका सन्मान करने घर जाती थीं तो उन्हें सामाजिक कार्यो के विषय में बताते रहती थी। ऐसी हम सबकी प्रिय ताई अब दुनिया से जा रही लेकिंन अपने व्यवहार के कारण लोगो के दिल मे हमेशा रहेगी। बता दें कि छत्तीसगढ़ में रायपुर की पूर्व विधायक रजनी ताई उपासने का बुधवार शाम रायपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।
महाराष्ट्र मंडल में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रीगणेश प्रतिमा स्थापित



'चूक- भूल द्यावी- घ्यावी’ में नजर आएगा एक वयोवृद्ध दंपती का वैवाहिक समर्पण
‘अगले 10 वर्षों में महाराष्ट्र मंडल’ पर खुली परिचर्चा 28 अगस्त को
0 कार्यकारिणी सदस्यों, समितियों के पदाधिकारियों, महिला केंद्रों की संयोजिकाओं- सह संयोजिकाओं सहित सभासद भी परिचर्चा में आमंत्रित
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में गुरुवार, 28 अगस्त को सुबह 10:30 बजे खुली परिचर्चा का आयोजन किया गया है। परिचर्चा का विषय ‘अगले 10 वर्षों में महाराष्ट्र मंडल’ रखा गया है। परिचर्चा में कार्यकारिणी सदस्यों, विभिन्न समितियों के पदाधिकारियों, महिला केंद्रों की संयोजिकाओं व सह संयोजिकाओं के साथ- साथ आजीवन सभासद भी शामिल होकर महाराष्ट्र मंडल को लेकर अपनी परिकल्पनाओं को साझा कर सकते हैं।
मंडल के मुख्य समन्वयक व परिचर्चा के संयोजक श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि इससे पहले भी करीब 10 साल पहले महाराष्ट्र मंडल में ‘विजन 2020’ परिचर्चा आयोजित की गई थी। उसमें तमाम पदाधिकारियों, सभासदों के साथ कार्यकारिणी सदस्यों की ओर से मिले सुझावों में अधिकांश सुझावों पर अमल किया भी जा चुका है। महाराष्ट्र मंडल के लिए अगले 10 साल बेहद महत्वपूर्ण हैं क्योंकि एक दशक के बाद साल 2035 में महाराष्ट्र मंडल अपना शताब्दी वर्ष मनाएगा।
खंगन ने कहा कि पिछली परिचर्चा के अनुरूप इस बार भी सभी वक्ताओं की ओर मिलने वाले विचारों को संकलित किया जाएगा। उन सुझावों पर कब और कैसे अमल किया जाएगा, इस पर कार्यकारिणी सदस्यों की बैठक में चर्चा भी की जाएगी। मुख्य समन्वयक के अनुसार करीब नौ करोड़ की लागत से महाराष्ट्र मंडल का नवनिर्मित सर्वसुविधायुक्त भवन लोकार्पित किया जा चुका है। इसके साथ ही पिछले तीन वर्षों में मंडल ने अपना फिजियोथैरेपी सेंटर और दिव्य महाराष्ट्र मंडल न्यूज पोर्टल शुरू किया है।
श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि इस समय सखी निवास को आधुनिक बनाने की दिशा में सतत कार्य जारी है। जहां अतिशीघ्र 'पालना घर' भी शुरू किया जाएगा। इसी तरह समता कॉलोनी स्थित दिव्यांग बालिका विकास गृह के भी नवीनीकरण व आधुनिकीकरण का कार्य जारी है। यहां पर काम खत्म होते ही न केवल दिव्यांग बच्चियों को आज की जरूरत के अनुरूप सभी सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि बुजुर्गों के लिए ‘आपुलकी योजना’ के अंतर्गत डे केयर सेंटर भी अस्तित्व में आ जाएगा। इसके बाद भी परिचर्चा में महाराष्ट्र मंडल के विकास कार्यों को लेकर सभासदों से मिलने वाले सुझावों का स्वागत किया जाएगा और उन्हें यथासंभव धरातल पर लाने का प्रयास किया जाएगा।
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महाराष्ट्र मंडल गणेशोत्सवः 90 साल पुरानी परंपरा आज भी कायम.... पूरे 10 दिन होंगे विविध कार्यक्रम
गणेश स्थापना के लिए नहीं मिल रहे पुरोहित तो इन मंत्रों के साथ खुद करें स्थापना
पं. चेतन दंडवते ( 8319598505)
रायपुर। घर-घर में 27 अगस्त को भगवान श्रीगणेश की स्थापना होगी। बड़ी संख्या में लोगों को श्री गणेश की स्थापना के लिए पुरोहित नहीं मिल पाते है। ऐसे में महाराष्ट्र मंडल के सचिव और आचार्य चेतन दंडवते ने पूजन की पूरी विधि दिव्य महाराष्ट्र मंडल के पाठकों के साथ शेयर की। ताकि वे पुरोहित नहीं मिलने की स्थिति में खुद से इन मंत्रों के साथ श्री गणेश की स्थापना करें।
श्री पार्थिव गणेश प्राणप्रतिष्ठा पूजन विधि
प्रथम कपाळी तिलक धारण करून आचमन करावे
ऊँ केशवाय नमः ऊँ नारायणाय नमः ऊँ माधवाय नमः ऊँ गोविंदाय नमः
पुन्हा आचमन करावे
ऊँ केशवाय नमः ऊँ नारायणाय नमः ऊँ माधवाय नमः ऊँ गोविंदाय नमः ऊँ विष्णवे नमः ऊँ मधुसूदनाय नमः ऊँ त्रिविक्रमाय नमः ऊँ वामनाय नमः ऊँ श्रीधराय नमः ऊँ ह्यषीकेशाय नमः ऊँ पद्मनाभाय नमः ऊँ दामोदराय नमः ऊँ संकर्षणाय नमः ऊँ वासुदेवाय नमः ऊँ प्रद्युम्नाय नमः ऊँ अनिरूद्धाय नमः ऊँ पुरूषोत्तमाय नमः ऊँ अधोक्षजाय नमः ऊँ नारसिंहाय नमः ऊँ अच्युताय नमः ऊँ जनार्दनाय नमः ऊँ उपेंद्राय नमः ऊँ हरये नमः ऊँ श्री कृष्णाय नमः
देवापुढे पानसुपारीचा विडा ठेवावा देवास नमस्कार करून मोठ्या मंडळीनचे आशीर्वाद घ्यावेत आणि पुजेला प्रारंभ करावा।।
खालीलप्रमाणे प्रत्येक देवतेचे स्मरण करून नमस्कार करावा
ॐ श्रीमन्महागणपतये नम:॥ ॐ इष्ट देवताभ्यो नमः ॐ कुल देवताभ्यो नमः
ॐ ग्राम देवताभ्यो नमः ॐ वास्तु देवताभ्यो नमःॐ गुरू देवताभ्यो नम॥
नंतर हातात अक्षता घेऊन श्रीगणेशाचे मनात स्मरण करावे आणि खालीलप्रमाणे मंत्र म्हणावेत
सुमुखश्च एकदंतश्च कपिलो गजकर्णकःलंबोदरश्च विकटो विघ्ननाशो गणाधिपः
धुम्रकेतुर् गणाध्यक्षो भालचंद्रो गजाननःद्वादशैतानि नामानी यःपठेद् शृणुयादपि
विद्यारंभे विवाहेच प्रवेशे निर्गमे तथा संग्रामे संकटे चैव विघ्नस्तस्य न जायते......
अक्षता श्रीगणेशाच्या पायांवर वहाव्यातण्नंतर उजव्या हातात दोन पळ्या पाणी घेऊन त्यात गंध अक्षता फुले घेऊन खालीलप्रमाणे संकल्प म्हणावा रिकाम्या जागी आपल्या नाव गोत्राचा उच्चार करावा
श्रीमद्भगवतो महापुरुषस्य शालिवाहनशके विश्वावसु नाम संवत्सरे दक्षिणायने वर्षा ऋतौ भाद्रपद मासे शुक्लपक्षे चतुर्थ्यां तिथौ बुध वासरे वर्तमाने कन्या स्थिते श्री चन्द्रे, हस्त नक्षत्रे, सिंह स्थिते श्रीसूर्ये, शेषेशु शुभ योगे, विष्टि करणे शुभपुण्यतिथौ्॥
मम आत्मनः श्रुतिस्मृति. पुराणोक्त फलप्राप्त्यर्थं श्रीपरमेश्वर प्रीत्यर्थं ......... गोत्रोत्पन्ना...........शर्माणं अहं अस्माकं सकलकुटुंबानां सपरिवाराणां समस्त शुभफल प्राप्त्यर्थं प्रतिवार्षिक विहितं पार्थिवसिद्धिविनायक देवता प्रीत्यर्थं यथाज्ञानेन यथामिलित उपचार द्रव्यै: प्राणप्रतिष्ठापन पूर्वक ध्यानआवाहनादि षोडश उपचार पूजन अहं करिष्ये॥
पाणी ताह्मणात सोडावे, पुन्हा पाणी हातात घेऊन खालील प्रमाणे उच्चार करावा।
आदौ निर्विघ्नता सिद्ध्यर्थं महागणपति स्मरणं शरीर शुद्ध्यर्थं षडंगन्यासं कलश शंख, घंटा, दीप पूजनं च करिष्ये॥
ताह्मणात पाणी सोडावेण्नंतर श्रीगणेशाचे स्मरण करून कलश,शंख,घंटा,दिवा समई यांची पूजा करावी गंध अक्षता,फुले,हळद,कुंकू वहावे
*॥प्राणप्रतिष्ठा॥*
पुढीलप्रमाणे उच्चार करून मुर्तीच्या नेत्रांना दुर्वांनी तूप लावावे दोन्हीही हातांनी मूर्ती वर छाया करावी
अस्यां मृन्मयमूर्तौ प्राणप्रतिष्ठापने विनियोगरू॥
॥ॐ आं .हीं क्रों॥ अं यं रं लं वं शं षं सं हं ळं क्षं अरू॥ क्रों .हीं आं हंस: सोहं॥
अस्यां मूर्तौ १ प्राण २ जीव ३ सर्वेंद्रियाणि वाङ् मनरूत्वक् चक्षु श्रोत्र जिव्हा घ्राण पाणि पाद पायूपस्थानि इहैवागत्य सुखं चिरं तिष्ठंतु स्वाहा॥
नमस्कार करून उजवा हात मूर्ती वर ठेवावा डावा हात स्वतःच्या हृदयास स्पर्श करून खालीलप्रमाणे उच्चार करावा
गर्भाधानादि पंचदश संस्कार सिद्ध्यर्थं पंचदश प्रणवावृती करिष्ये ॥
आणि श्री गणेशास स्पर्श करून मनात 15 वेळा ॐ म्हणावे नंतर श्रीगणेशाच्या नेत्रांना तूप लावावे।
ॐ अस्यै प्राणा: प्रतिष्ठंतु अस्यै प्राणा:क्षरंतु च।
अस्यै देवत्वमर्चायै मामहेति च कश्चन॥
*श्री गणेशाचे ध्यानं करावे*
ॐ एकदंतं शूर्पकर्णं गजवक्त्रं चतुर्भुजं।
पाशांकुशधरं देवं ध्यायेत्सिद्धिविनायकं॥
श्री गणेशाच्या पायांवर अक्षता वहाव्यात
ॐआवाहयामि विघ्नेश सुरराजार्चितेश्वर।
अनाथनाथ सर्वज्ञ पूजार्थं गणनायक॥
श्री गणेशास अक्षता वाहून सिंहासन अर्पण करत आहोत अशी कल्पना करावी
ॐ नानारत्न समायुक्तं कार्तस्वरविभूषितम्।
आसनं देवदेवेश प्रीत्यर्थं प्रतिगृह्यताम्॥
श्री गणेशाच्या चरणांवर दुर्वा किंवा फुलाने पाणी शिंपावे
ॐ पाद्यं गृहाण देवेश सर्वक्षेमसमर्थ भो।
भक्त्या समर्पितं तुभ्यं लोकनाथ नमोस्तु ते॥
श्री गणेशाच्या चरणांवर गंध फुल अक्षता यांनी युक्त पाणी वहावे
ॐ नमस्ते देव देवेश नमस्ते धरणीधर।
नमस्ते जगदाधार अर्घ्यं नरूआ प्रतिगृह्यताम॥
ताह्मणात ४ वेळा पाणी सोडावे
ॐ कर्पूरवासितं वारि मंदाकिन्यारूसमाहृतम्।
आचम्यतां जगन्नाथ मया दत्तं हि भक्तितरू॥
श्रीगणेशाच्या मूर्तीवर पाणी शिंपावे
ॐ गंगादिसर्वतीर्थेभ्यो मया प्रार्थनया हृतम्।
तोयमेतत्सुखस्पर्शं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्॥
श्रीगणेशाच्या चरणांवर पंचामृत वहावे
ॐपंचामृत मयोनीतं पयः दधी घृतं मधु
शर्करा सह संयुक्तं स्नानार्थ प्रतिगृह्यताम्
श्रीगणेशास शुद्धोदक वहावे
ॐ श्रीगणेशाय नमः शुद्धोदकं समर्पयामी
*अथर्वशीर्ष चे अभिषेक करावे, किंवा 21 गणपति चे नाव घेऊन फुलाने अभिषेक करावा*। नंतर
श्रीगणेशास अक्षता वहाव्यात
ॐ श्रीगणेशाय नमः सुप्रतिष्ठितमस्तु॥
श्रीगणेशास वस्त्रे वहावीत
ॐ सर्वभूषाधिके सौम्ये लोकलज्जानिवारणे।
मयोपपादिते तुभ्यं वाससी प्रतिगृह्यताम्।
श्रीगणेशास यज्ञोपवीत वहावे
ॐ देवदेव नमस्तेतु त्राहिमां भवसागरात्।
ब्रह्मसूत्रं सोत्तरीयं गृहाण परमेश्वर॥
श्रीगणेशास गंध लावावे
ॐ श्रीखंडं चंदनं दिव्यं गंधाढ्यं सुमनोहरम्।
विलेपनं सुरश्रेष्ठ चंदनं प्रतिगृह्यताम्॥
श्रीगणेशास अक्षता वहाव्यात
ॐ अक्षतास्तंडुलारूशुभ्रारूकुंकूमेन विराजितारू।
मया निवेदिता भक्त्या गृहाण परमेश्वर॥
श्रीगणेशास हळद वहावी
ॐ हरिद्रा स्वर्णवर्णाभा सर्वसौभाग्यदायिनी।
सर्वालंकारमुख्या हि देवि त्वं प्रतिगृह्यताम्॥
श्रीगणेशास कुंकू वहावे
ॐ हरिद्राचूर्णसंयुक्तं कुंकुमं कामदायकम्।
वस्त्रालंकारणं सर्वं देवि त्वं प्रतिगृह्यताम्॥
श्रीगणेशास शेंदूर वहावा
ॐ उदितारुणसंकाश जपाकुसुमसंनिभम्।
सीमंतभूषणार्थाय सिंदूरं प्रतिगृह्यताम्॥
श्रीगणेशास गुलाल अबीर वहावे
ॐ ज्योत्स्नापते नमस्तुभ्यं नमस्ते विश्वरूपिणे।
नानापरिमलद्रव्यं गृहाण परमेश्वर॥
श्रीगणेशास फुले, हार,कंठी,दुर्वा वहावे
ॐ माल्यादीनि सुगंधीनि मालत्यादीनि वै प्रभो।
मया हृतानि पूजार्थं पुष्पाणि प्रतिगृह्यताम्॥
श्रीगणेशाच्या प्रत्येक अवयवांवर अक्षता वहाव्यात
*॥अथ अंग पूजा॥*
ॐ गणेश्वराय नम: पादौ पूजयामि,
ॐ विघ्नराजाय नम: जानुनी पूजयामि, गुडघे
ॐआखुवाहनाय नम: ऊरू पूजयामि; मांड्या
ॐ हेरंबाय नम: कटिं पूजयामि;कंबर
ॐ लंबोदराय नम: उदरं पूजयामि; पोट
ॐ गौरीसुताय नम: स्तनौ पूजयामि; स्तन
ॐ गणनायकाय नम: हृदयं पूजयामि हृदय
ॐ स्थूलकर्णाय नम: कंठं पूजयामि; कंठ
ॐ स्कंदाग्रजाय नम: स्कंधौ पूजयामि; खांदे
ॐ पाशहस्ताय नम: हस्तौ पूजयामि; हात
ॐ गजवक्त्राय नम: वक्त्रं पूजयामि; मुख
ॐ विघ्नहत्रे नम: ललाटं पूजयामि; कपाळ
ॐ सर्वेश्वराय नम: शिररू पूजयामि; मस्तक
ॐ गणाधिपाय नम: सर्वांगंपूजयामि॥
श्रीगणेशास विविध पत्री अर्पण कराव्यात
*अथ पत्र पूजा*.
ॐ सुमुखायनम: मालतीपत्रं समर्पयामि ;मधुमालती
ॐ गणाधिपायनम: भृंगराजपत्रं समर्पयामि ;माका
ॐ उमापुत्रायनम: बिल्वपत्रं समर्पयामि ; बेल
ॐ गजाननायनम: श्वेतदूर्वापत्रं समर्पयामि; पांढ-या दूर्वा
ॐ लंबोदरायनम: बदरीपत्रं समर्पयामि ;बोर
ॐ हरसूनवेनम: धत्तूरपत्रं समर्पयामि ; धोत्रा
ॐ गजकर्णकायनम: तुलसीपत्रं समर्पयामि ;तुळस
ॐ वक्रतुंडायनम: शमीपत्रं समर्पयामि ;शमी????
ॐ गुहाग्रजायनम: अपामार्गपत्रं समर्पयामि ;आघाडा
ॐ एकदंतायनम: बृहतीपत्रं समर्पयामि ;डोरली
ॐ विकटायनम: करवीरपत्रं समर्पयामि ;कण्हेरी
ॐ कपिलायनम: अर्कपत्रं समर्पयामि ;मांदार
ॐ गजदंतायनम: अर्जुनपत्रं समर्पयामि ;अर्जुनसादडा
ॐ विघ्नराजायनम: विष्णुक्रांतापत्रं समर्पयामि ;विष्णुक्रांत
ॐ बटवेनम दाडिमपत्रं समर्पयामि ;डाळिंब
ॐ सुराग्रजायनम: देवदारुपत्रं समर्पयामि ;देवदारु
ॐ भालचंद्रायनम: मरुपत्रं समर्पयामि
ॐ हेरंबायनम: अश्वत्थपत्रं समर्पयामि ;पिंपळ
ॐ चतुर्भुजायनम: जातीपत्रं समर्पयामि ;जाई
ॐ विनायकायनम: केतकीपत्रं समर्पयामि ;केवडा
ॐ सर्वेश्वरायनम: अगस्तिपत्रं समर्पयामि।
श्रीगणेशास धूप, अगरबत्ती ओवाळावी
ॐ वनस्पतिरसोद्भूतो गंधाढ्यो गंधउत्तम।
आघ्रेयरूसर्वदेवानां धूपोयं प्रतिगृह्यताम्॥
श्रीगणेशास दीप, निरांजन ओवाळावे
ॐ आज्यंच वर्तिसंयुक्तं वह्निना योजितं मया।
दीपं गृहाण देवेश सर्वक्षेमसमर्थ भो:॥
श्रीगणेशास नैवेद्य प्रसाद समर्पण करावा
ॐ शर्कराखंडखद्यानी दधिक्षीरघृतानिच।
आहारं भक्ष्यभोज्यं च नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम्॥
श्रीगणेशास विडा अर्पण
ॐ करावा, पूगीफलं महद्दिव्यं नागवल्लीदलैर्युतं।
कर्पूरैलासमायुक्तं तांबूलं प्रतिगृह्यताम्॥
श्रीगणेशाच्या समोरील विड्यावर दक्षिणा ठेवावी
ॐ हिरण्यगर्भ गर्भस्थं हेमबीजं विभावसो:।
अनंतपुण्यफलद मतरूशातिं प्रयच्छ मे॥
श्रीगणेशाच्या समोरील नारळावर पळीभर पाणी सोडावे आणि त्यावर एक फुल वहावे
ॐ इदं फलं मयादेव स्थापितं पुरतस्तव।
तेन मे सुफलावाप्तिर्भवेज्जन्मनि जन्मनि॥
खालीलप्रमाणे श्रीगणेशास दोन.दोन दुर्वा वहाव्यात
दूर्वायुग्म पूजा.
ॐ गणाधिपायनम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि॥
ॐ उमापुत्रायनम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि॥
ॐ अघनाशनायनम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि॥
ॐ विनायकायनम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि॥
ॐ ईशपुत्रायनम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि॥
ॐ सर्वसिद्धिप्रदायकायनम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि॥
ॐ एकदंतायनम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि॥
ॐ इभवक्त्रायनम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि॥
ॐ आखुवाहनायनम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि॥
ॐ कुमारगुरवेनम: दूर्वायुग्मं समर्पयामि॥
श्रीगणेशाची आरती करावी
स्वतः भोवती प्रदक्षिणा करावी
ॐ यानि कानि च पापानि जन्मांतरकृतानि च।
तानि तानि विनश्यंति प्रदक्षिण पदे पदे॥
श्रीगणेशास नमस्कार करावा
ॐ नमस्ते विघ्नसंहर्त्रे नमस्ते ईप्सितप्रद।
नमस्ते देवदेवेश नमस्ते गणनायक॥
श्रीगणेशाची प्रार्थना करावी
ॐ विनायकगणेशान सर्वदेवनमस्कृत।
पार्वतीप्रिय विघ्नेश मम विघ्नान्निवारय॥
एक पळीभर पाणी ताह्मणात सोडावे
ॐ अनेन मया यथाज्ञानेन कृत पूजनेन तेन श्रीसिद्धिविनायक देवताभ्यः प्रीयताम्॥
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तीजहारिन उत्सव में रोहिणीपुरम केंद्र ने जीता सेकंड प्राइज
रायपुर। महाराज अग्रसेन इंटरनेशनल कालेज में 23 अगस्त को ‘तीजहारिन’ तीजा पर्व सांस्कृतिक मिलन 2025 का आयोजन किया गया। जिसमें सभी समाजों की महिला संगठनों ने ग्रुप और सोलो डांस प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में महाराष्ट्र मंडल की रोहिणीपुरम महिला केंद्र की टीम ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि तीजा पर्व सांस्कृतिक मिलन समिति की ओर से आयोजित ‘तीजहारिन’ में महाराष्ट्र मंडल के साथ कई समाज की महिलाओं ने सुंदर और मनोहारी नृत्यों की प्रस्तुति दी। रोहिणीपुरम केंद्र की स्मिता बल्की, प्राची जोशी और रीतु शर्मा ने सावन के रिमिक्स गीतों पर सुंदर नृत्य की प्रस्तुति दी। प्रतियोगिता में इन्हें द्वितीय स्थान मिला। रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा और अन्य अतिथियों ने टीम को मोमेंटो और आठ हजार रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की।
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0- सजे- धजे लकड़ी और मिट्टी के बैलों को लेकर पहुंचे प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र के साथ आकर्षक उपहार देकर किया गया प्रोत्साहित




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डंगनिया केंद्र के हरलालिका तीज में नमिता बनीं सावन क्वीन
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के डंगनिया केंद्र की महिलाओं ने दिलचस्प खेलों के साथ हरतालिका तीज महोत्सव आयोजित किया। डंगनिया केंद्र की चुड़ी को सेफ्टी पिन से उठाने की प्रतियोगिता में भी नमिता शेष प्रतिभागी महिलाओं से आगे रहते हुए एक बार फिर विजेता रहीं और सावन क्वीन चुनी गई।
डंगनिया केंद्र का बीसी और हरतालिका तीज का प्रोग्राम चौबे कॉलोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल भवन में धूमधाम से मनाया गया। अनुभा जाऊलकर ने बताया कि कार्यक्रम में केंद्र की सभी महिलाएं ग्रीन ड्रेसकोड थीम पर सजकर आईं थीं। महिला सभासदों के बीच सावन पर आधारित सावन क्वीन सुनिश्चित करने के लिए रेंडम गेम खेला गया। इसमें सभी प्रतिभागियों को एक- एक चीट उठानी थी। इस में सखी निवास प्रभारी नमिता शेष विजेता रहीं और सावन क्वीन घोषित की गईं।
इधर चुड़ी को सेफ्टी पिन से उठाने के खेल में भी नमिता शेष विजेता रहीं। उन्हें बकायदा पुरस्कृत भी किया गया। इस प्रोग्राम में सहभागी रहीं जया भावे, अंजलि काले, माधुरी इंचुलकर, रंजना राजिमवाले, श्रद्धा मरघड़े, रश्मि डांगे, विजया भाले, अनुजा महाड़िक, अपर्णा दबड़गांव, प्रणिता इंचुलकर, संध्या अनिल, सृष्टि दंडवते, प्रियंका राजपूत, माधवी गिरहे, शैला गायधनी, अनामिका महाजन सहित बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।