रायपुर
प्रदेश की औद्योगिक परियोजनाओं के लिए सुदृढ़ हुई विद्युत पारेषण व्यवस्था
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेश की पारेषण अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला के करकमलों द्वारा 220/132 केवी लिटिया सेमरिया उपकेंद्र में स्थापित 160-160 एमवीए क्षमता के दो 220/132 केवी पावर ट्रांसफार्मरों का सफलतापूर्वक ऊर्जीकरण किया गया। प्रथम ट्रांसफार्मर का ऊर्जीकरण सायं 5:22 बजे तथा द्वितीय ट्रांसफार्मर का ऊर्जीकरण सायं 5:27 बजे किया गया। दोनों ट्रांसफार्मरों के सफल ऊर्जीकरण से उपकेंद्र में 320 एमवीए की अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी उपलब्ध हो गई है।
इस परियोजना से राजनांदगांव एवं दुर्ग क्षेत्र की पारेषण व्यवस्था को उल्लेखनीय मजबूती मिलेगी। बढ़ती विद्युत मांग के अनुरूप विद्युत भार का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा तथा क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण एवं विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित होगी। साथ ही भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पारेषण तंत्र भी अधिक सक्षम बनेगा।
प्रबंध निदेशक राजेश कुमार शुक्ला ने इस उपलब्धि पर परियोजना से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि राज्य में औद्योगिक विकास एवं उपभोक्ताओं को विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए पारेषण नेटवर्क का निरंतर विस्तार और आधुनिकीकरण किया जा रहा है। लिटिया सेमरिया उपकेंद्र में उपलब्ध हुई अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मेशन कैपेसिटी से न केवल वर्तमान विद्युत मांग को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप भी पर्याप्त क्षमता उपलब्ध रहेगी।
उन्होंने बताया कि 220/132 केवी लिटिया सेमरिया उपकेंद्र से 132 केवी वोल्टेज स्तर पर राजनांदगांव जिले के पटेवा में प्रस्तावित इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी-2.0/सेमीकंडक्टर पार्क) तथा राजनांदगांव जिले के बिजेभाट में प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र को विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त होगा। इसके साथ ही इस परियोजना का लाभ दुर्ग जिले से लेकर राजनांदगांव तक प्राप्त होगा। इससे क्षेत्र में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ घरेलू, कृषि एवं अन्य उपभोक्ताओं को भी अधिक विश्वसनीय विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
इस अवसर पर कार्यपालक निदेशक (लाइन) संजय पटेल, कार्यपालक निदेशक (पीसी एंड आरए) केएस मिनोठिया, कार्यपालक निदेशक (ट्रांसमिशन) वीके दीक्षित, डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के कार्यपालक निदेशक (ओ एंड एम) संजय आर. बी. खंडेलवाल, कार्यपालक निदेशक, दुर्ग क्षेत्र शिरीष सालेट, ट्रांसमिशन कंपनी के मुख्य अभियंता (सब-स्टेशन) अब्राहम वर्गीज, मुख्य अभियंता (परियोजना) प्रसन्ना गोसावी, अतिरिक्त मुख्य अभियंता पीपी सिंह, आरके तिवारी एवं आरके. मिश्रा, अधीक्षण अभियंता करुणेश यादव एवं सुनील भुआर्य सहित कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता तथा परियोजना से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को विधानसभा में दी भावभीनी श्रद्धांजलि
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। निधन उल्लेख के दौरान मुख्यमंत्री साय ने कहा कि डॉ. तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ने अपनी लोकसंस्कृति का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके जाने से कला एवं सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी गायन की कापालिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया और अपनी विलक्षण प्रतिभा से लोककला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनकी प्रस्तुतियों में गायन और अभिनय का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता था। पात्रों का सजीव चित्रण, ओजपूर्ण वाणी और प्रभावशाली प्रस्तुति श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. तीजन बाई का जीवन संघर्ष, साधना और समर्पण का प्रेरक उदाहरण है। जिस दौर में महिलाओं की पंडवानी गायन में भागीदारी अत्यंत सीमित थी, उस समय उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देते हुए अपनी अलग पहचान बनाई और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनीं। उन्होंने कहा कि डॉ. तीजन बाई ने एशिया, यूरोप सहित विश्व के अनेक देशों में अपनी प्रभावशाली प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्मभूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया गया। वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत किया। यह गौरव प्राप्त करने वाली वे छत्तीसगढ़ की एकमात्र विभूति हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय मंत्रियों ने भी डॉ. तीजन बाई के कला क्षेत्र में अतुलनीय योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्योत्सव के अवसर पर रायपुर प्रवास पर आए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष पर बातचीत कर उनका कुशलक्षेम जाना था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अनेक विश्वविद्यालयों द्वारा डॉ. तीजन बाई को डी.लिट्. की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। भारतीय लोकसंगीत और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनका योगदान सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। उनकी कला, साधना और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता रहेगा।
मुख्यमंत्री ने सदन की ओर से दिवंगत पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि परमात्मा इस कठिन समय में शोकाकुल परिजनों, उनके असंख्य प्रशंसकों और कला जगत को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
छत्तीसगढ़ को बड़ी सौगात: पांच नए मेडिकल कॉलेजों को NMC की मंजूरी
सरकारी मेडिकल कॉलेजों को केंद्र सरकार की नीति और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार एमबीबीएस सीटों का 15 प्रतिशत हिस्सा ऑल इंडिया कोटा के लिए देना होगा। वहीं, स्नातकोत्तर ब्रॉड स्पेशियलिटी पाठ्यक्रमों (MD/MS) की 50 प्रतिशत सीटें भी ऑल इंडिया कोटा के तहत उपलब्ध करानी होंगी। वेबसाइट पर देनी होगी पूरी जानकारी एनएमसी ने मेडिकल कॉलेजों को अपनी आधिकारिक वेबसाइट तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं। वेबसाइट पर कॉलेज से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण जानकारियां उपलब्ध करानी होंगी। इसमें प्रस्तावित पाठ्यक्रम, स्वीकृत सीटें, शिक्षकों की योग्यता और अनुभव, छात्र प्रवेश, संबद्ध विश्वविद्यालय, अस्पताल की सुविधाएं, विभागीय ढांचा, उपकरण, ओपीडी और आईपीडी आंकड़े सहित अन्य जानकारी शामिल करनी होगी। प्रदेश में बढ़ेगा मेडिकल शिक्षा का दायरा पांच नए मेडिकल कॉलेजों की मंजूरी से छत्तीसगढ़ में मेडिकल शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे। खासतौर पर दंतेवाड़ा, जांजगीर, मनेंद्रगढ़, जशपुर और कबीरधाम जैसे क्षेत्रों में चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने की संभावना है। राज्य सरकार की ओर से इन मेडिकल कॉलेजों को जल्द शुरू करने के लिए आवश्यक तैयारियां तेज की जाएंगी, ताकि 2026-27 सत्र से विद्यार्थियों को प्रवेश मिल सके।
उद्योगों के साथ पर्यावरण संरक्षण की नई साझेदारी: मंत्री ओ.पी. चौधरी
रायपुर। राज्य में मानसून-2026 के दौरान औद्योगिक इकाइयों द्वारा संचालित वृक्षारोपण कार्यक्रमों की समीक्षा के लिए आज आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी की मुख्य आतिथ्य में बेबीलॉन कैपिटल, रायपुर में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में राज्य की प्रमुख मीडियम एवं लार्ज स्केल औद्योगिक इकाइयों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों, आवास एवं पर्यावरण विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार विकसित भारत-2047 के विजन के अनुरूप विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। राज्य सरकार निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार कर रही है, लेकिन पर्यावरणीय मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल लक्ष्य पूरा करने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि लगाए गए पौधों का जीवित रहना सबसे महत्वपूर्ण है। सही समय पर, उपयुक्त प्रजाति के स्वस्थ पौधों का रोपण तथा उनकी नियमित देखभाल और सिंचाई सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने उद्योगों से पीपल, शिरीष, नीम, आम, कटहल सहित स्थानीय एवं दीर्घायु प्रजातियों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ‘मन की बात’ कार्यक्रम में मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक वृक्षारोपण तकनीकों का उल्लेख किया है और ऐसे नवाचारों को अपनाने से हरित आवरण तेजी से बढ़ाया जा सकता है।
मंत्री श्री चौधरी ने सभी उद्योगों से अपने परिसर तथा आसपास हरित वातावरण विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने निर्देश दिए कि 31 जुलाई तक वृक्षारोपण का निर्धारित लक्ष्य पूरा किया जाए तथा 15 अगस्त तक गुणवत्तापूर्ण पौधरोपण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी तथा पोर्टल पर समयबद्ध प्रविष्टि अनिवार्य होगी।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल कानूनी दायित्व नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और सुरक्षित पर्यावरण आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उद्योगों को उत्पादन के साथ-साथ पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का भी पूरी गंभीरता से पालन करना चाहिए। उन्होंने उद्योगों से अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के माध्यम से भी व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाने तथा अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
मंत्री श्री चौधरी ने बताया कि नवा रायपुर को “पीपल सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। शहर में पूर्व में लगाए गए लगभग 70 हजार पौधों के अतिरिक्त आगामी पांच वर्षों में एक लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने बताया कि नवा रायपुर की पहचान बन चुकी सेंध लेक का गहरीकरण एवं सौंदर्यीकरण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इससे लगभग 12 लाख घन मीटर अतिरिक्त जल भंडारण क्षमता विकसित होगी तथा झील का क्षेत्रफल भी बढ़ेगा। झील के मध्य स्थित लगभग तीन एकड़ के द्वीप पर मियावाकी पद्धति से लगभग 25 हजार पौधे लगाए गए हैं, जिससे प्रवासी पक्षियों के लिए प्राकृतिक “बर्ड आइलैंड” (ईको-हब) विकसित किया जा रहा है।
आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव तथा छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अध्यक्ष अंकित आनंद ने कहा कि पिछले एक वर्ष में मंडल ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक लगभग 22 लाख पौधों का रोपण किया जा चुका है, जो निर्धारित लक्ष्य का लगभग 90 प्रतिशत है। इस वर्ष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को ही अंतिम माना जाएगा तथा सभी उद्योगों को समय पर ऑनलाइन प्रविष्टि सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने बताया कि इस वर्ष 25 लाख पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है, जो उद्योगों की सक्रिय सहभागिता से 30 लाख से अधिक तक पहुंच सकता है।
सचिव श्री आनंद ने बताया कि 320 से अधिक उद्योगों में ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली के माध्यम से निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है। प्रारंभिक चरण में नियमों के उल्लंघन पर नोटिस जारी किए गए हैं, लेकिन मंडल का उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि प्रदूषण कम करते हुए पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने उद्योगों से पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) जल के अधिकतम उपयोग तथा देशी एवं पर्यावरण-अनुकूल वृक्ष प्रजातियों के रोपण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव राजू अगसिमनी ने उद्योगों को निर्देश दिए कि प्रत्येक हेक्टेयर में न्यूनतम 2,500 पौधे लगाए जाएं तथा त्रि-स्तरीय (थ्री-लेयर) पौधरोपण के माध्यम से सघन ग्रीन बेल्ट विकसित की जाए। सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत क्षेत्र में हरित क्षेत्र विकसित करने, केवल स्वीकृत पौध प्रजातियों का रोपण करने तथा पौधों की सिंचाई के लिए पुनर्चक्रित जल का उपयोग करने के निर्देश दिए गए।
पत्नी संग कथा श्रवण करने पहुंचे सांसद बृजमोहन अग्रवाल
रायपुर। राजधानी रायपुर के इंडोर स्टेडियम में 'अन्तर्राष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन, छत्तीसगढ़' और 'विश्व शान्ति सेवा चेरिटेबल ट्रस्ट' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पावन श्रीमद् भागवत कथा में रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल अपनी पत्नी के साथ कथा सुनने पहुंचे।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि कथा व्यास, परम पूज्य श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के मुखारविंद से अमृतमयी कथा श्रवण कर मन भक्ति-भाव से सराबोर हो गया। महाराज जी ने जीवन को सार्थक बनाने वाले जो भक्ति के दिव्य सूत्र दिए, वे वास्तव में हम सभी के लिए अनुकरणीय हैं। जीवन में परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, हमें अपनी साधुता (सरलता और सज्जनता) का त्याग कभी नहीं करना चाहिए। कोई हमारे साथ कितना भी बुरा क्यों न करे, हमारी सोच कभी किसी का बुरा करने की नहीं होनी चाहिए। कर्म अपना फल स्वयं तय करता है।
कथा प्रसंग के दौरान पावन गिरिराज महाराज जी की परिक्रमा का अलौकिक लाभ भी मिला। इस भक्तिमय वातावरण में महाराज जी का मंगल आशीर्वाद प्राप्त कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और जन-कल्याण की कामना की। श्रीमद् भागवत महापुराण की यह कथा हम सभी के जीवन में सकारात्मकता और सनातन धर्म के प्रति अटूट श्रद्धा का संचार करे, यही प्रार्थना है।
रायपुर राउंड टेबल 169 ने किया छह कक्षाओं के भवन का लोकार्पण
रायपुर। रायपुर राउंड टेबल 169 (आरआरटी 169) द्वारा शासकीय उच्च विद्यालय, रावाभाठा में नवनिर्मित छह कक्षाओं वाले भवन का लोकार्पण किया गया। लगभग 50 लाख रुपये की लागत से बने इस भवन का निर्माण पूरी तरह विभिन्न प्रायोजकों से प्राप्त सीएसआर दान से किया गया है। यह परियोजना मात्र नौ महीनों में पूर्ण की गई।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में राउंड टेबल इंडिया के एरिया 3 चेयरमैन गगन अरोरा उपस्थित रहे। आरआरटी 169 के चेयरमैन बिट्ठल पासरी ने बताया कि यह पहल राउंड टेबल इंडिया के "फ्रीडम थ्रू एजुकेशन" अभियान के अंतर्गत शिक्षा के बुनियादी ढांचे को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सभी प्रायोजक संस्थाओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके उदार सीएसआर सहयोग और सदस्यों की कड़ी मेहनत से यह भवन इतने कम समय में तैयार हो सका, जिससे सैकड़ों विद्यार्थियों को बेहतर एवं सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।
विधानसभा कार्यमंत्रणा समिति की बैठक शुरू
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पावस सत्र के अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की अध्यक्षता में कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आज विधानसभा के समिति कक्ष में आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, संसदीय कार्य मंत्री केदार कश्यप, कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वित्त मंत्री ओपी चौधरी सहित समिति के अन्य सदस्यगण उपस्थित थे।
आज विधानसभा में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने षष्ठम विधानसभा के मानसून सत्र में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह से सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सिंह को पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
रायपुर में नाइटलाइफ पर पुलिस की सख्ती : पब, बार, होटल और ढाबा संचालकों को सख्त चेतावनी, नियम तोड़े पर लाइसेंस रद्द तक की होगी कार्रवाई
श्रीमद्भागवत कथा समाज को संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने का सशक्त माध्यम: CM साय
केवल पौधे लगाना नहीं, उन्हें जीवित रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी: मंत्री ओ.पी. चौधरी
रायपुर में होगा 'विद्यावंशी चतुर्मास 2026' का आयोजन... 19 जुलाई को होगा भव्य मंगल प्रवेश
रायपुर। रायपुरवासियों को मुनि संघ सानिध्य का पावन वर्षायोग विद्यावंशी चातुर्मास 2026 के रूप में प्राप्त होने जा रहा है। यह गौरवशाली क्षण 18 वर्षों के लंबे अंतरात के बाद मिल रहा है। परम पूज्य आचार्य भगवन 108 श्री विद्यासागर महाराज की प्रेरणा और वर्तमान आचार्य श्री समय सागर महाराज के मंगल आशीर्वाद से 108 मुनि श्री आगम सागर महाराज ससंघ सानिध्य का 'विद्यावंशी चतुर्मास 2026' अब श्री आदिनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर, मालवीय रोड, रायपुर में सुनिश्चित हो गया है।
श्री दिगम्बर जैन बड़ा मंदिर के मैनेजिंग ट्रस्टी श्री नरेंद्र जैन गुरुकृपा एवं अध्यक्ष संजय नायक जैन ने संयुक्त रूप से बताया कि इस ऐतिहासिक आयोजन के अंतर्गत, मुनि श्री 108 आगम सागर महाराज जी का भव्य मंगल प्रवेश आगामी 19 जुलाई 2026 को संपन्न होगा। इस अविस्मरणीय दिन को भव्य रूप देने हेतु समाज द्वारा व्यापक तैयारियां की जा रही हैं।
इस विद्यावंशी चतुर्मास 2026 महा-अनुष्ठान को व्यवस्थित रूप देने हेतु आज रविवार, 12 जुलाई को सुबह 9 बजे श्री विद्यासागर हॉल, मालवीय रोड में सकल दिगंबर जैन समाज की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस 'भगीरथी प्रयास' को सफल बनाने के लिए बैठक में नगर के सभी दिगंबर जैन मंदिरों के प्रमुख, समाज के वरिष्ठ सदस्यों एवं महिला मंडल की पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
बैठक में चातुर्मास की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए विभिन्न उप-समितियों का गठन किया गया है। समाज के सक्रिय सदस्यों को उनकी रुचि और दक्षता के अनुसार दायित्व सौंपे गए हैं, ताकि गुरुदेव के स्वागत और पूरे चतुर्मास के दौरान आने वाले भक्तों के लिए उत्तम व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
सकल समाज से भागीदारी का विनम्र आग्रह आयोजक 'श्री विद्यावंशी चतुर्मास समिति वर्ष 2026' और 'श्री दिगंबर जैन मंदिर पंचायत ट्रस्ट, मालवीय रोड' ने समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं से तन-मन-धन से समर्पित होकर गुरुदेव के भव्य स्वागत और चातुर्मास के कार्यक्रमों में सहभागी बनने का विनम्र आग्रह किया है। यह चातुर्मास किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि संपूर्ण रायपुर समाज का गौरव है।
छात्रों को शिक्षा के साथ संस्कार अवश्य दें : मुरारी काबरा
रायपुर। अग्रसेन चौक गणेश मंदिर के सामने शाला प्रवेश उत्सव का कार्यक्रम रखा गया. भारत विकास परिषद के प्रांतीय महासचिव मुरारी कांबरा ने शिक्षकों एवं अभिभावकों से कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार अवश्य दें जिससे वह आगे चलकर राष्ट्रहित में एवं सामाजिक कार्यों में बाढ़ चलकर हिस्सा ले सके, यह अकेले शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं है. यह पूरी परिवार का वातावरण ही तय करता है बच्चे का भविष्य. शाला प्रवेश उत्सव के इस कार्यक्रम में 55 से ज्यादा बच्चों और उनके पालकों का एवं मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया ।
कार्यक्रम के प्रारंभ में विशिष्ट अतिथि प्रांत महासचिव मुरारी काबरा जी ने भारत माता के चित्र पर माल्यार्पण कर और कोष सचिव ललित गोलानी जी ने दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम को प्रारंभ किया। बच्चों के राष्ट्र गीत वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का जोरदार शुभारंभ हुआ । इस कार्यक्रम में नए बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता भी उपस्थित रहे । शाला में नए प्रवेश के सभी बच्चों को चंदन वंदन और तिलक लगाकर अभिनंदन किया गया भारत विकास परिषद के सदस्यों द्वारा लाई गई चॉकलेट सभी बच्चों को बांटी गई।
विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रांत महासचिव मुरारी काबरा जी ने अपने उद्बोधनमें बच्चों को अच्छे संस्कारों के लिए प्रेरित किया और माता-पिता को प्रतिदिन प्रणाम करने के लिए सभी बच्चों को अभिप्रेरित किया। संस्कार प्रमुख शशांक शुक्ल जी ने सभी बच्चों को बहुत सुंदर गीत गाकर सुनाया और सभी बच्चों और पालकों ने उनके साथ दिया।
सचिव विनीत शर्मा ने अपने उद्बोधन में गीता के श्लोक से अपनी बात रखी। बच्चों और पालकों को देश भक्ति गीत सामूहिक रूप से गाकर सुनाया और भारत विकास परिषद के बारे में सुंदर सी जानकारी रखी और 64 वें स्थापना दिवस के बारे में बताया। भारत विकास परिषद के गठन और उसकी ऐतिहासिक यात्रा के बारे में संक्षिप्त में बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अध्यक्ष डॉ राकेश मिश्रा जी ने सभी बच्चों को पुनः माता-पिता का सम्मान आदर और सेवा भाव करने के लिए प्रेरित किया। जिसे सुनकर बच्चे बहुत पसंद हुए और मौके पर ही बच्चों ने भी अपने-अपने पालकों को प्रणाम कर बहुत सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया। डॉ मिश्रा ने अपने प्रबोधन में भारत विकास परिषद के सभी पांचों स्तंभ जैसे संपर्क संस्कार सहयोग संस्कार सेवा और समर्पण को विस्तार पूर्वक बच्चों और पालकों को अच्छी तरह समझाया।
स्वागत अभिभाषण मुरारी काबरा जी ने दिया । ज्ञानाश्रय स्कूल के संचालक विजय हिषिकर एवं प्राचार्य वैभवी हिषिकर जी ने आए हुए समस्त अतिथियों के संक्षिप्त परिचय देते हुए सभी को पौधे और मोमेंटो प्रदान कर अधिमान्यता प्रदान की । आज के इस कार्यक्रम में भारत विकास परिषद के प्रांतीय महासचिव मुरारी काबरा , अध्यक्ष डॉ राकेश मिश्रा , उपाध्यक्ष पवन गौड, सचिव विनीत शर्मा, ललित गोलानी शशांक शुक्ल रमाकांत शर्मा जी एसपी साहू डॉ नीरज ए पांडे धीरज शर्मा अशोक सेवा प्रमुख विजय हिषिकर और भारतीय जनता पार्टी के सह संयोजक रवि जी उपस्थित रहे । सभी को ज्ञानाश्रय स्कूल के फैकल्टी द्वारा वृक्ष गुच्छ मोमेंटो देकर प्रत्येक का सम्मानित किया गया। शाला प्रवेश उत्सव के साथ-साथ जिन बच्चों ने पांचवीं से लेकर आठवीं तक की परीक्षाओं में अच्छे नंबर से परीक्षा उत्तीर्ण की उन सभी मेधावी छात्रों को भी मेडल , पदक और चाकलेट देकर सम्मानित किया गया।बच्चों ने अपने अपने पालकों के साथ मेडल और पदक ग्रहण किया।
सेवा प्रकल्प के रायपुर मुख्य शाखा के प्रभारी विजय हिषिकर,प्राचार्या वैभवी हिषिकर ने अच्छी सेवाएं प्रदान करने के लिए डॉक्टर जितेंद्र सराफ और उनकी धर्मपत्नी को भी मोमेंटो और पौधे देकर सम्मानित किया। नए सदस्य गौ संरक्षक एसपी साहू जी ने सभी को मोबाइल की निगेटिव रेडिएशन रोकने वाली स्टीकर देकर सभी का सम्मान किया ।
ज्ञानाश्रय स्कूल के द्वारा शाला प्रवेश उत्सव का कार्यक्रम बहुत ही उत्साह उमंग और रंगारंग रूप मनाया गया। सभी बच्चों में हर्ष और नई उमंग का माहौल देखने को मिला। धन्यवाद ज्ञापन सचिव विनीत शर्मा ने दिया और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ गरिमामय कार्यक्रम का संचालन ज्ञानश्रय स्कूल के संचालक विजय हिषिकर और उनकी टीम ने बहुत ही सफलता पूर्वक किया। इस अवसर पर छात्रों के अभिभावक एवं स्कूल के शिक्षकगण उपस्थित थे।
रायपुर के पं. जेएनएम मेडिकल कॉलेज में 20 एमबीबीएस सीटें बढ़ीं, कुल संख्या हुई 250
रायपुर। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (National Medical Commission - NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने पंडित जवाहरलाल नेहरू मेमोरियल (जेएनएम) मेडिकल कॉलेज, रायपुर में एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। यह कॉलेज पं. दीनदयाल उपाध्याय मेमोरियल हेल्थ साइंसेज एंड आयुष यूनिवर्सिटी, छत्तीसगढ़ से संबद्ध है।
MARB की ओर से 10 जुलाई 2026 को जारी अनुमति पत्र (Letter of Permission) के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए कॉलेज की एमबीबीएस सीटों की संख्या 230 से बढ़ाकर 250 कर दी गई है, यानी कुल 20 नई सीटों की बढ़ोतरी हुई है।
वर्ष 1963 में 60 एमबीबीएस सीटों के साथ स्थापित पं. जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय ने समय-समय पर अपनी प्रवेश क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि की है। प्रारंभिक 60 सीटों से बढ़कर यह संख्या 100, वर्ष 2009 में 150, वर्ष 2019 में 180, वर्ष 2023 में 230 तथा अब एनएमसी की नवीनतम स्वीकृति के पश्चात 250 सीटों तक पहुँच गई है।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि सीटों की संख्या बढ़ने से प्रदेश के युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के अधिक अवसर मिलेंगे और वे अपने ही राज्य में एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। स्वास्थ्य मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और प्रयासों के प्रति आभार भी व्यक्त किया गया।
सुशासन का पहिया: सरस्वती सायकल योजना से संवर रहा छत्तीसगढ़ की बेटियों का भविष्य
रायपुर : सरस्वती साइकिल योजना का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा को प्रोत्साहित करना और उन्हें स्कूल तक आवागमन की सुविधा प्रदान करना है। इसके तहत शासकीय और अनुदान प्राप्त स्कूलों में कक्षा 9वीं में पढ़ने वाली अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और गरीबी रेखा (BPL) से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की छात्राओं को निःशुल्क साइकिल दी जाती है l
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सुशासन सरकार ने एक ऐसी पहल की है, जिससे बेटियों के हौसलों को नए पंख मिल गए हैं। शिक्षा सत्र शुरू होने के मात्र एक महीने के भीतर, जुलाई माह में ही, पात्र छात्राओं को सरस्वती सायकल योजना के तहत निशुल्क सायकल का वितरण किया जा रहा है। यह त्वरित फैसला पालकों, शिक्षिकाओं और स्वयं छात्राओं के लिए एक बड़ी सौगात साबित हो रहा है।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सारंगढ़ की कक्षा 9वीं की छात्रा छोटी यादव की कहानी जिले की सैकड़ों बेटियों का प्रतिनिधित्व करती है। छोटी को अपने गांव झरपडीह से 3 किलोमीटर दूर स्कूल आने के लिए हर रोज पैदल सफर तय करना पड़ता था। तपती धूप और बारिश में पैदल चलना थका देने वाला होता था, लेकिन अब उसकी यह परेशानी दूर हो चुकी है। निशुल्क सायकल पाकर छोटी के चेहरे पर आई मुस्कान उसकी खुशी और राहत को साफ बयां करती है।
छोटी की तरह ही ग्राम बासीनबहरा की छात्रा आकांक्षा रात्रे और हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करने वाली दीक्षा सिदार जैसी अनेक बालिकाओं के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है। अब इन्हें 2 से 5 किलोमीटर का सफर पैदल तय नहीं करना पड़ेगा। छात्राओं का कहना है कि सायकल मिलने से समय भी बचेगा और मैं बिना थके अपनी पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगे। सरकार की इस मदद के लिए हम सभी छात्रा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को धन्यवाद देती हूँ।
जुलाई का महीना किसानों के लिए खेती-किसानी और धान बोआई का समय होता है। ऐसे वक्त में गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए बच्चों की पढ़ाई और सायकल खरीदने का अतिरिक्त खर्च उठाना एक बड़ी चिंता होती थी। सरकार द्वारा सत्र के शुरुआत में ही सायकल उपलब्ध करा देने से पालकों को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। अब उन्हें बेटी की पढ़ाई या आवागमन के साधनों के लिए कर्ज लेने या अनावश्यक खर्च करने की चिंता से मुक्ति मिल गई है।
जिला शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में सारंगढ़, बरमकेला और बिलाईगढ़ ब्लॉक में सायकल के पार्ट्स को असेंबल (फिटिंग) कर स्कूलों के माध्यम से सीधे छात्राओं तक पहुँचाया जा रहा है। इसी कड़ी में शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सारंगढ़ में 150 पात्र बालिकाओं को सायकल का वितरण किया जा चुका है।
शासकीय एवं अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों में कक्षा 9 वीं में अध्ययनरत अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और गरीबी रेखा के नीचे (BPL) परिवार की छात्राएं को सायकल वितरण किया जाना है। इसका मुख्य उद्देश्य सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों की बालिकाओं को शाला तक आवागमन की सुगम सुविधा प्रदान करना है। इससे स्कूल ड्रॉप-आउट दर में कमी आएगी और बालिका शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा।
अबूझमाड़ का नया सवेरा: डोंडरीबेड़ा से कटेर की सड़क ने मिटाया दशकों का सन्नाटा
रायपुर : छत्तीसगढ़ के बस्तर (Bastar) अंचल में हुए एक विशिष्ट सड़क विकास से दशकों तक कटा रहा l दुर्गम आदिवासी क्षेत्रों (जैसे डोंडरबेड़ा और कटेर) को मुख्य मार्गों से जोड़कर आवागमन की बाधाओं, पलायन और सामाजिक-आर्थिक पिछड़ेपन के अंधकार को मिटा रही है।
ये पक्की सड़कें न केवल दशकों का सन्नाटा तोड़ती हैं, बल्कि सुदूर इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, और बाज़ार तक पहुंच जैसे मौलिक लाभ भी पहुंचाती हैं।
गहरे जंगलों से घिरा अबूझमाड़... एक ऐसा अंचल, जिसका नाम सुनते ही कभी जेहन में दुर्गम रास्ते, कटी हुई जिंदगी और विकास की अंतहीन प्रतीक्षा की तस्वीर उभरती थी। लेकिन आज इस अबूझमाड़ की फिजा बदल रही है। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के तहत नारायणपुर जिले के अतिदुर्गम इलाके में बनी एक नई सड़क ने यहाँ के ग्रामीणों के जीवन में खुशियों का एक नया अध्याय लिख दिया है।
डोंडरीबेड़ा कैंप से कटेर तक बनी 8.75 किलोमीटर लंबी यह सड़क सिर्फ डामर की पट्टी नहीं है, बल्कि दशकों से मुख्यधारा से कटे जनजातीय गांवों के लिए उम्मीद और भरोसे की एक मजबूत डोर है।
कुछ समय पहले तक, इस इलाके के गांवों तक पहुँचने का एकमात्र जरिया संकरी और पथरीली पगडंडियां थीं। मानसून के आते ही ये रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते थे, जिससे ग्रामीण अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर थे। बच्चों को स्कूल जाने के लिए मीलों पैदल चलना पड़ता था।एम्बुलेंस का गाँवों तक आना नामुमकिन था। कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर अस्पताल न पहुँच पाने के कारण गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को अपनी जान जोखिम में डालनी पड़ती थी। ग्रामीण अपनी कड़ी मेहनत से उगाई गई कृषि और वनोपज को हाट-बाजारों तक नहीं ले जा पाते थे, जिससे उन्हें उनके हक़ की सही कीमत नहीं मिलती थी।
प्रशासन की दृढ़ इच्छाशक्ति और 'पीएम-जनमन' योजना की ताकत से 856.19 लाख रुपये की भारी लागत के साथ इस दुर्गम चुनौती को पार किया गया। डोंडरीबेड़ा कैंप से कटेर तक की इस चमचमाती सड़क ने अब इन गांवों की किस्मत बदल दी है। पहली बार गाँव की चौखट तक पहुँची एम्बुलेंस और विकास।सड़क बनने से पूरे अंचल की सामाजिक और आर्थिक तस्वीर में जादुई बदलाव आया है।
अब 108 एम्बुलेंस, शासकीय वाहन और प्रशासनिक टीमें सीधे ग्रामीणों के घर तक पहुँच रही हैं। रास्तों की सुगमता से अब शिक्षक और विद्यार्थी दोनों नियमित रूप से स्कूल पहुँच रहे हैं, जिससे शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ है। स्थानीय किसान अब अपनी उपज को सीधे और आसानी से बड़े बाजारों तक पहुँचा पा रहे हैं। बिचौलियों का खेल खत्म हो रहा है और ग्रामीणों की जेब में सीधे पैसा आ रहा है।
सड़क बनते ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान बनाने के लिए सीमेंट, छड़ और रेत जैसी निर्माण सामग्रियां बिना किसी बाधा के गाँवों तक पहुँचने लगी हैं। इसके साथ ही बिजली और पेयजल योजनाओं के काम ने भी रफ्तार पकड़ ली है।
गाँव के बुजुर्गों और युवाओं के चेहरे पर अब एक अलग ही चमक है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले जहाँ नारायणपुर या नजदीकी बाजार जाने के लिए हमें घंटों पैदल चलना पड़ता था और पूरा दिन बर्बाद हो जाता था, वहीं अब गाड़ियां सीधे हमारे घरों के सामने आकर रुकती हैं। बच्चों की पढ़ाई और इलाज की चिंता अब पूरी तरह खत्म हो गई है। ऐसा लगता है जैसे हमें एक नई जिंदगी मिल गई है।
पीएम-जनमन योजना के माध्यम से निर्मित यह सड़क इस बात का जीवंत उदाहरण है कि यदि संपर्क (Connectivity) मजबूत हो, तो देश का सबसे दूरस्थ और पिछड़ा क्षेत्र भी सामाजिक और आर्थिक विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकता है। डोंडरीबेड़ा से कटेर तक का यह सफर, अबूझमाड़ के आदिवासियों के आत्मनिर्भर और सशक्त बनने का एक ऐतिहासिक गवाह बन चुका है।
सीएम हेल्पलाइन बनी दिव्यांग प्रफुल्ल बेक के लिए उम्मीद की नई राह
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सीएम हेल्पलाइन प्रदेश के जरूरतमंद नागरिकों के लिए भरोसेमंद सहारा बनकर उभर रही है। जशपुर जिले के बाबू सजबहार निवासी दिव्यांग प्रफुल्ल बेक की समस्या का त्वरित समाधान इसकी संवेदनशील और प्रभावी कार्यप्रणाली का प्रेरक उदाहरण है।
प्रफुल्ल बेक चलने-फिरने में असमर्थ हैं। समाज कल्याण विभाग द्वारा उन्हें गत वर्ष मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गई थी, जिससे उनका दैनिक जीवन काफी आसान हो गया था। लेकिन तकनीकी खराबी के कारण पिछले चार माह से ट्राइसाइकिल बंद पड़ी थी। इससे उनका घर से बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया था और छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था।
अपनी परेशानी से राहत पाने के लिए प्रफुल्ल बेक ने 28 जून 2026 को सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही समाज कल्याण विभाग ने बिना विलंब कार्रवाई करते हुए संबंधित एजेंसी को उनके घर भेजा। आवश्यक मरम्मत के बाद कुछ ही दिनों में मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल फिर से सुचारु रूप से चलने लगी।
प्रफुल्ल बेक ने बताया कि यह ट्राइसाइकिल उनके लिए केवल एक साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर जीवन का आधार है। इसके बंद होने से उनका दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया था। अब ट्राइसाइकिल ठीक होने के बाद वे फिर से अपने जरूरी कार्य स्वयं कर पा रहे हैं और पहले की तरह स्वतंत्र रूप से आवागमन कर रहे हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज करने के कुछ ही दिनों में मेरी समस्या का समाधान हो गया। अब मेरी मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल फिर से चलने लगी है और मैं दोबारा आत्मनिर्भर महसूस कर रहा हूं। मुख्यमंत्री जी की संवेदनशील पहल और प्रशासन की तत्परता ने मेरी बड़ी परेशानी दूर कर दी।
प्रफुल्ल बेक की यह कहानी बताती है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित सीएम हेल्पलाइन केवल शिकायत निवारण का माध्यम नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रभावी मंच बन चुकी है। समयबद्ध कार्रवाई, संवेदनशील प्रशासन और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता के साथ शासन आम नागरिकों के जीवन को सरल और सम्मानजनक बनाने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है।
बस्तर की जैविक खेती को मिलेगा वैश्विक बाजार, यूरोप तक पहुंचेंगे जैविक उत्पाद: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा
रायपुर : बस्तर संभाग के जैविक उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बड़े बाजारों तक पहुंचाने तथा किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। उप मुख्यमंत्री तथा पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने शुक्रवार को नवा रायपुर अटल नगर स्थित महानदी भवन (मंत्रालय) में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बस्तर के उन गांवों की पहचान कर उनका जैविक प्रमाणन कराने के निर्देश दिए, जहां आज तक किसानों ने रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे गांव छत्तीसगढ़ की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं और इनकी जैविक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित किया जाना चाहिए।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि हाल ही में नारायणपुर और कांकेर के नक्सल मुक्त हुए ग्रामों के अपने बस्तर प्रवास के दौरान अनेक किसानों ने उन्हें जानकारी दी थी कि उन्होंने अपने खेतों में कभी भी रासायनिक उर्वरकों का उपयोग नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ऐसे गांवों को चिन्हित कर राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) से जोड़ा जाए, ताकि उनके उत्पादों का विधिवत जैविक प्रमाणन कराया जा सके और उन्हें देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ यूरोप सहित अन्य विदेशी बाजारों तक पहुंचाया जा सके।
शर्मा ने कहा कि जैविक प्रमाणन के बाद बस्तर के किसानों को उनके उत्पादों का वर्तमान मूल्य की तुलना में तीन से चार गुना अधिक मूल्य प्राप्त हो सकेगा। इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन मिलेगा तथा बस्तर की विशिष्ट कृषि पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
बैठक में बस्तर के जैविक उत्पादों को यूरोप सहित अन्य देशों के बाजारों तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी), सहभागी गारंटी प्रणाली (पीजीएस) के अंतर्गत आवश्यक प्रमाणन प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि गुणवत्ता, प्रमाणन और विपणन की पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए ताकि बस्तर के उत्पाद वैश्विक बाजार में अपनी अलग पहचान बना सकें। इसके लिए ग्राम स्तर पर सहकारी समितियों का निर्माण कर उत्पादन का हर किसी को भागीदार बनाया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संचालक अश्विनी देवांगन के साथ दो संयुक्त दल गठित कर नारायणपुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर और बीजापुर जिलों का दौरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ये दल एपीडा और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर जैविक क्षेत्रों का सर्वेक्षण करेंगे तथा जैविक उत्पादों के लिए आवश्यक परीक्षण और तकनीकी प्रक्रिया पूरी करेंगे। इसके द्वारा पूरे ग्राम पंचायतों को जैविक प्रमाणन दिलाकर बस्तर के उत्पादों को बिहान के छत्तीसकला ब्रांड द्वारा एक्सपोर्ट किया जाएगा।