रायपुर
जहां कभी नक्सलवाद का था बोलबाला, वहां अब खेलों का हो रहा उदय
रसनी में उद्योग के लिए जमीन देने पर भड़के ग्रामीण, उग्र आंदोलन की दी चेतावनी, वतन चंद्राकर ने कलेक्टर को लिखा पत्र
CG-बी.एड. एवं डी.एल.एड. (दूरवर्ती) पाठ्यक्रमों में सत्र 2026–27 हेतु प्रवेश परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित
अभ्यर्थियों को निर्देशित किया जाता है कि वे आवेदन करने से पूर्व संबंधित नियमों एवं दिशा-निर्देशों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें तथा ऑनलाइन आवेदन पत्र में सभी जानकारी सही एवं स्पष्ट रूप से भरें। यह आवेदन पत्र काउंसलिंग पंजीयन हेतु भी मान्य होगा, अतः अलग से काउंसलिंग फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया (ऑनलाइन/ऑफलाइन) की जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।
आरंग में अवैध खनन पर बड़ी कार्रवाई, 4 क्रशर प्लांट सील
सामूहिक लेखन से छात्राओं का व्यक्तित्व विकास होता हैः डॉ प्रीति मिश्रा
रायपुर। डॉ राधाबाई शासकीय नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर छत्तीसगढ़ में प्राचार्य डॉ प्रीति मिश्रा के संरक्षण एवं राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ मनीषा शर्मा के मार्गदर्शन में राजनीति विज्ञान विभाग की चतुर्थ सेमेस्टर की छात्राओं ने समसामयिक घटनाओं पर आधारित स्वलिखित ज्ञानवर्धक पत्रिका का लेखन किया गया।
जिसमें आपरेशन सिन्दूर, नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़, मतदाता सूची विशेष गहन पुनरानिक्षण तथा बस्तर पण्डूम 2026 सांस्कृतिक महोत्सव का विस्तार से उल्लेख किया है।इसी तरह से द्वितीय सेमेस्टर की छात्राओं ने छत्तीसगढ़ का बजट, अमेरिका टैरिफ युद्ध, अफीम की अवैध खेती, महिला खिलाडियों द्वारा विश्व कप विजेता,साहित्यकार विनोद कुमार शुक्ल की स्मृति, अमेरिका -ईरान युद्ध, भारत में एआई मिशन तथा भारत टी-20 विश्व कप विजेता जैसे घटनाओं पर संकल्प निर्माण किया गया।
महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ प्रीति मिश्रा ने विमोचन करते हुए कहा कि विभाग की छात्राओं द्वारा निर्मित दोनों पत्रिकाएं शिक्षा के लिए नवाचार की आधार है।इससे छात्राओं में समसामयिक घटनाओं के प्रति रुचि पैदा होती है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में सहायक होता है। छात्राओं में सामूहिक लेखन को बढ़ावा मिलता है।धन्यवाद ज्ञापित डॉ मनीषा शर्मा तथा कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ भूपेंद्र कुमार साहू ने किया।
विमोचन के आयोजन में डॉ कंचन गिलहरे की महत्वपूर्ण भूमिका रही।इस अवसर विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष,वरिष्ठ प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, अतिथि व्याख्याता तथा बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रही।
हर नागरिक तक त्वरित स्वास्थ्य सेवा पहुँचाना हमारी प्राथमिकता : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बुधवार को सूरजपुर ज़िले में स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए 9 अत्याधुनिक ‘108 संजीवनी एक्सप्रेस’ एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
जिला चिकित्सालय सूरजपुर से शुरू की गई यह सेवा अब दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराएगी। इस अवसर पर मंत्री राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रत्येक नागरिक को गुणवत्तापूर्ण एवं शीघ्र स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सूरजपुर की बेटी होने के नाते यह मेरे लिए गौरव का क्षण है कि मैं अपने ज़िलेवासियों को यह जीवनरक्षक सुविधा समर्पित कर रही हूँ।
उन्होंने कहा कि ये एम्बुलेंस केवल वाहन नहीं, बल्कि जीवन बचाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। सरकार का उद्देश्य है कि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली माताएँ, बहनें और बच्चों को आपातकालीन स्थिति में समय पर उपचार मिल सके और ‘गोल्डन ऑवर’ में चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो।
मंत्री राजवाड़े ने यह भी कहा कि एम्बुलेंस संचालन एजेंसी के साथ बेहतर समन्वय स्थापित कर सेवाओं की गुणवत्ता एवं प्रतिक्रिया समय (Response Time) में निरंतर सुधार किया जाएगा। उन्होंने स्वयं इन सेवाओं की नियमित निगरानी करने की बात कही, ताकि पारदर्शिता और प्रभावशीलता बनी रहे।
ज़िले में आवंटित 9 एम्बुलेंसों में से 2 को जिला चिकित्सालय सूरजपुर में स्थायी रूप से तैनात किया गया है, जबकि शेष एम्बुलेंसों को विभिन्न सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में रणनीतिक रूप से तैनात किया गया है, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक त्वरित चिकित्सा सहायता सुनिश्चित हो सके।
दूध बेचने से लेकर पहला करियर गोल्ड जीतने तकः जम्मू-कश्मीर के हमाम हुसैन की प्रेरणादायक कहानी
रायपुर। जब जम्मू-कश्मीर के हमाम हुसैन कुश्ती का अभ्यास नहीं कर रहे होते, तो वे अपने बड़े भाई के साथ घर-घर जाकर दूध पहुंचाने का काम करते हैं। जम्मू के जोरावर गांव के रहने वाले 28 वर्षीय हमाम के लिए जिंदगी और खेल हमेशा साथ-साथ चले हैं। पांच साल पहले पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके और उनके बड़े भाई के कंधों पर आ गई। दोनों ने मिलकर दूध बेचकर घर चलाया और इसी के साथ हमाम ने अपने कुश्ती के सपने को जिंदा रखा।
यह संघर्ष आखिरकार खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स- 2026 में रंग लाया, जहां हमाम ने पुरुषों के 79 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में हिमाचल प्रदेश के मोहित कुमार को हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह उनके 14 साल के कुश्ती करियर का पहला राष्ट्रीय स्तर का स्वर्ण पदक है। हमाम ने साई मीडिया से कहा, “मेरे बड़े भाई भी पहलवान थे और राज्य स्तर पर खेल चुके हैं। पिता के निधन के बाद सारी जिम्मेदारी हम पर आ गई। मेरे भाई को कुश्ती छोड़नी पड़ी और उन्होंने दूध बेचना शुरू कर दिया। मैं भी उनके साथ दूध देने जाता था क्योंकि परिवार चलाना जरूरी था।लेकिन मेरे भाई ने मुझे हमेशा कुश्ती जारी रखने के लिए प्रेरित किया और मुझे दंगलों में लेकर जाते थे।”
हमाम ने बताया कि उनके पिता की छोड़ी हुई भैंसें ही परिवार की आजीविका का साधन बनीं। एक बच्चे के पिता हमाम ने कहा, “मेरे भाई ने दूध बेचकर घर चलाया और मैं उनकी मदद करता था। लेकिन जब मैंने मिट्टी के अखाड़े में कदम रखा, तो इस खेल से मुझे लगाव हो गया।” सीमित संसाधनों के बावजूद हमाम ने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी। वे अपने गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर मिट्टी के अखाड़े में अभ्यास करते हैं और मैट पर ट्रेनिंग के लिए लगभग 40 किलोमीटर दूर जम्मू तक का सफर तय करते हैं। वह भी अपने काम की जिम्मेदारियों के साथ। उन्होंने कहा, “साई सेंटर जम्मू में है और हम निचले इलाके में रहते हैं, इसलिए वहां नियमित रूप से जाना मुश्किल होता है। हम आमतौर पर प्रतियोगिताओं के दौरान ही वहां जाते हैं, वरना गांव के अखाड़ों में ही अभ्यास करते हैं।”
हमाम आगे कहते हैं, “मेरे पास कोई व्यक्तिगत कोच नहीं है। अखाड़े में सीनियर पहलवान हमें मार्गदर्शन देते हैं। जब हम मैट पर अभ्यास करते हैं, तब वहां कोच होते हैं। गांवों में हमें शहरों जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं। अगर बेहतर सुविधाएं मिलें, तो हमारे क्षेत्र के पहलवान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पदक जीत सकते हैंl हमाम के लिए यह स्वर्ण पदक सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने अंत में कहा, “यहां आकर बहुत अच्छा लगा। यहां की सुविधाएं बहुत अच्छी थीं। हम एक पिछड़े इलाके से आते हैं, जहां कुश्ती के लिए ज्यादा समर्थन नहीं है, इसलिए हमें दूर-दूर तक जाना पड़ता है। यह पहली बार है जब हमारे लिए इस तरह की प्रतियोगिता आयोजित की गई है। अगर ऐसे और आयोजन होते रहें, तो हम और पदक जीत सकते हैं।”
राजधानी रायपुर में जल संकट पर महापौर अलर्ट मोड पर.... बनाई मॉनिटरिंग टीम
रायपुर। भीषण गर्मी में राजधानी रायपुर में हर वर्ष होने वाले जलसंकट को लेकर रायपुर महापौ अलर्ट मोड पर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्मी में शहर में नागरिकों को पानी की समस्या नहीं आनी चाहिए। इसके लिए तैयारी पुख्ता रखी जाए। महापौर ने नगर निगम जलबोर्ड एवं जलविभाग के संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए है कि नगर निगम के सभी जोनो में आने वाली प्रतिदिन की जलसंबंधी समस्याओं को दैनिक नियमित मॉनिटरिंग कर त्वरित निदान हर संभव तरीके से करवाने के लिए नगर निगम मुख्यालय स्तर पर एक एमआईसी सदस्य के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम गठित करने का कार्य तत्काल किया जाये।
यह टीम प्रतिदिन की जल समस्याओं की जानकारी लेकर उसका त्वरित निदान स्थल निरीक्षण संबंधित जोन अधिकारियों के साथ करके तकनीकी सुझाव मार्गदर्शन देकर कर सके। ताकि नागरिको को पेयजल के लिए इधर उधर ना भटकना पड़े।
महापौर मीनल चौबे ने जलबोर्ड एवं जलविभाग के अधिकारियों को चंगोराभाठा पानी टंकी एवं खम्हारडीह पानी टंकी से संबंधित जलकार्यों को त्वरित रूप से करवाने स्पष्ट निर्देश दिये ताकि वहां जलसंकट का त्वरित समाधान जनहित में शीघ्र किया जा सके। अन्य क्षेत्रों में दैनिक रूप से आ रही जल समस्याओ की जानकारी लेकर जोनो से पार्षदो से समन्वय कर जल संकट का स्थल निरीक्षण कर त्वरित निदान करने के कार्य गर्मी के मौसम में प्राथमिकता से करवाने के निर्देश दिए गए है।
महापौर मीनल चौबे द्वारा नगर निगम मुख्यालय महापौर कक्ष में नगर निगम जलबोर्ड एवं जलविभाग की बैठक में जलविभाग अध्यक्ष संतोष सीमा साहू की विशेष उपस्थिति एवं मुख्यअभियंता संजय बागडे, अधीक्षण अभियंता राजेश राठौर, कार्यपालन अभियंता नरसिंह फरेन्द्र, कार्यपालन अभियंता अंशुल शर्मा जुनियर, उपअभियंता सर्वश्री रमेश पटेल, शुभम तिवारी, योगेन्द्र साहू की उपस्थिति रही।
बीएड एवं डीएलएड पाठ्यक्रमों में सत्र 2026–27 हेतु प्रवेश परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित
रायपुर। विश्वविद्यालय द्वारा सत्र 2026–27 हेतु द्विवर्षीय बी.एड. एवं डी.एल.एड. (दूरवर्ती) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए प्री. बीएड एवं प्रीडीएलएड प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस हेतु इच्छुक अभ्यर्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 25 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुकी है और 12 जून 2026 (रात्रि 12 बजे तक) जारी रहेगी। प्रीबीएड एवं प्रीडीएलएड प्रवेश के अभ्यर्थी 13 जून से 15 जून 2026 के बीच 100 रुपए शुल्क के साथ आवेदन में आवश्यक संशोधन कर सकेंगे। प्रवेश पत्र 23 जून 2026 से डाउनलोड किए जा सकेंगे तथा प्रवेश परीक्षा 28 जून 2026 (संभावित) को आयोजित की जाएगी।
परीक्षा के पश्चात 29 जून 2026 को मॉडल उत्तर जारी किए जाएंगे, जिन पर अभ्यर्थी 29 जून से 03 जुलाई 2026 तक आपत्ति दर्ज कर सकेंगे। परीक्षा परिणाम (अनंतिम सूची) 10 जुलाई 2026 (संभावित) को घोषित किया जाएगा, जिस पर 10 से 12 जुलाई 2026 तक आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। सभी प्राप्त आपत्तियों के निराकरण के बाद अंतिम प्रावीण्यता सूची 21 जुलाई 2026 (संभावित) को प्रकाशित की जाएगी।
अभ्यर्थियों को निर्देशित किया जाता है कि वे आवेदन करने से पूर्व संबंधित नियमों एवं दिशा-निर्देशों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें तथा ऑनलाइन आवेदन पत्र में सभी जानकारी सही एवं स्पष्ट रूप से भरें। यह आवेदन पत्र काउंसलिंग पंजीयन हेतु भी मान्य होगा, अतः अलग से काउंसलिंग फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं होगी। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया (ऑनलाइन/ऑफलाइन) की जानकारी विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी।
दावा-आपत्ति केवल निर्धारित तिथि एवं समय के भीतर ईमेल edu.pssou@gmail.com के माध्यम से ही स्वीकार की जाएगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे नवीनतम जानकारी एवं संभावित तिथियों में किसी भी परिवर्तन के लिए नियमित रूप से विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट www.pssou.ac.in एवं www.pssou.net/portal का अवलोकन करते रहें।
कुम्हारी खारून ब्रिज आज से एक महीने के लिए बंद, परेशानियों से बचने इन रास्तों का करें इस्तेमाल…
धरसीवां में आधुनिक तहसील कार्यालय का लोकार्पण: सुगम, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित प्रशासन की दिशा में बड़ा कदम – मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री ने 370 नई एम्बुलेंस को दिखाई हरी झंडी, शहर में 15 और गांव में 30 मिनट में पहुंचेगी 108 सेवा
निगम ने टैक्स बकाया होने पर हॉलीक्रास स्कूल के दो शाखाओं पर जड़ा था ताला, भुगतान के बाद खुली सील
जानकारी के मुताबिक, बैरन बाजार शाखा पर करीब 34 लाख रुपये और शैलेंद्र नगर शाखा पर लगभग 24 लाख रुपये का संपत्ति कर बकाया था. कार्रवाई के बाद स्कूल प्रबंधन ने आरटीजीएस के जरिए पूरा बकाया टैक्स जमा कर दिया. भुगतान की पुष्टि होने के बाद नगर निगम ने दोनों शाखाओं को फिर से खोल दिया.
केआईटीजी 2026: कप्तान किरण ने छत्तीसगढ़ को फुटबॉल फाइनल में पहुंचाया
कम जगह में सुंदर दिखेंगे बिजली के हाईटेंशन टावर... राजधानी में विशाल टावर की जगह लगाना शुरू किया मोनो पोल
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने राजधानी में जमीन की कमी को देखते हुए अब नई पारेषण लाइनों के विस्तार का काम मोनो पोल से करना आरंभ कर दिया है। इन मोनो पोल के माध्यम से अतिउच्च दाब लाइनों के केबल लगाए जाते हैं, जिसमें बहुत कम जमीन की आवश्यकता होती है और यह देखने में भी सुंदर होते हैं। राजधानी से लगे मेटल पार्क में 250 मीटर नई 132/33 केवी लाइन को मोनोपोल से विस्तारित करने का पहला प्रयोग किया गया, जिसे आज ऊर्जीकृत करके विद्युत सप्लाई आरंभ की गई।
इस उपलब्धि के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री के सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह एवं ऊर्जा सचिव डॉ. रोहित यादव के निर्देशन में यह कार्य संपादित किया गया। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी के प्रबंध निदेशक श्री राजेश कुमार शुक्ला ने बताया कि शहरों में सघन आबादी होने के कारण अतिउच्चदाब की लाइनें बिछाने में समस्या रहती है। लगातार शहर के विस्तार से जमीन की कमी रहती है। पुरानी पद्धति से ईएचटी टावर लगाने पर प्रति टावर एक से दो हजार वर्गफीट जगह जमीन की आवश्यकता होती है, जबकि मोनो पोल के लिए केवल 50 वर्गफीट जमीन की जरूरत पड़ती है। शहरी क्षेत्रों में टावर लगाने के लिए जमीन नहीं मिलती। इसके विकल्प के रूप में मोनोपोल तकनीक से अतिउच्च दाब लाइनों का विस्तार किया जाता है। यह सुंदर दिखने के साथ अधिक सुरक्षित भी होता है। इसमें सामान्य लोग चढ़ भी नहीं सकेंगे, जिससे टावर में चढ़ने जैसी घटनाएं नहीं होंगी।
राजधानी से लगे औद्योगिक क्षेत्र उरला-सिलतरा में मेटलपार्क स्थित 132/33 केवी सब-स्टेशन से नई लाइन खींची गई है, इसमें मोनोपोल का इस्तेमाल किया गया है। लगभग 100 फीट ऊंचे पोल से ईएचटी लाइन खींची गई है। ट्रांसमिशन कंपनी ने कैपिटल इंवेस्टमेंट प्लान के तहत अपने वित्त प्रबंधन से इसे तैयार किया है। इसमें 8 करोड़ रुपए की लागत आई है।
इसे मेटलपार्क सिलतरा में नवनिर्मित 132/33 केवी के उपकेन्द्र से जोड़ दिया गया है, जिससे विद्युत आपूर्ति शुरू हो गई है। इस अवसर पर मुख्य कार्यपालक निदेशक केएस मनोठिया, संजय पटेल, एमएस चौहान, वीके दीक्षित, मुख्य अभियंता अब्राहम वर्गीश, प्रसन्ना गोसावी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बताया कि भविष्य में शहरी क्षेत्रों में इसी तरह के मोनो पोल लगाए जाएंगे। ताकि कम जगह में सुंदरता के साथ अतिउच्चदाब लाइनों का विस्तार किया जा सके।
राजकुमार कॉलेज में कॉफ़ी एंड कनेक्ट... बढ़ता स्क्रीन टाईम छीनता बच्चों की मुस्कुराहट पर चर्चा
रायपुर। राजकुमार कॉलेज रायपुर के मनोविज्ञान विभाग द्वारा एक पैनल डिस्कशन एवं कक्षा छठवीं के अभिभावकों के लिए पीटीएम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था "बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाईम के कारण उनकी मुस्कुराहट छिन रही है, उन्हें पुनः सीखने के लिए कैसे प्रेरित करें?" कार्यक्रम का आरंभ कक्षा बारहवीं की छात्रा हरसिफत कौर ने पैनल के विशेषज्ञों और अभिभावकों के स्वागत से किया।
पैनल डिस्कशन के संचालक बीएमएल मुंजाल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अरिंदम बैनर्जी थे। पैनल के विशेषज्ञों में डॉ.मनोज पांडे ने बताया कि तकनीक का उपयोग करना समस्या नहीं है बल्कि उस पर निर्भरता एक समस्या है, जब हम पर्यावरण से दूर हो जाते हैं तब मानव मस्तिष्क की सामान्य गतिविधियों में बाधा उत्पन्न होती है।
दंत रोग विशेषज्ञ डॉ. नकुल उप्पल ने बताया आज से 10 साल पहले उनके पास इलाज के लिए आने वाले अभिभावक और बच्चे अपनी बारी आने तक आराम से प्रतीक्षा करते थे या आपस में बातचीत करते थे पर आज वे प्रतीक्षा का समय अपने फोन पर बिताते हैं। उन्होंने ये भी बताया कि फोन का अधिक उपयोग करने वालों के साथ दुर्घटनाएं भी अधिक होती हैं और वे जंक फूड का सेवन भी अधिक करते हैं जिसके कारण मोटापा, फैटी लीवर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप हो सकता है।
राजकुमार कॉलेज के प्राचार्य लेफ्टिनेंट कर्नल अविनाश सिंह ने कहा कि तकनीक का प्रयोग हमें अपने ज्ञान के विकास के लिए करना चाहिए न कि हमें उसकी लत होनी चाहिए, आज का युवा वर्ग सोशल मीडिया से अत्यधिक प्रभावित है।
डॉ. बाती पांडे ने अपने उद्बोधन में बताया कि डोपामाइन एक न्यूरो ट्रांसमीटर हॉर्मोन है, जब हम अपनी खुशी के लिए कोई कार्य करते हैं तब यह निकलता है और जब हम मोबाइल का उपयोग करते हैं तब ये हमारे मस्तिष्क में से बार बार निकलता है और व्यक्ति को इसके बार-बार उपयोग की लत लग जाती है परंतु इससे आपसी बातचीत, एकाग्रता कम होती जाती है। हमारे मस्तिष्क की संरचना एक समय में एक कार्य करने के लिए है और हम 60-60 सेकंड की रील देखकर अपने मस्तिष्क पर अनावश्यक दबाव डालते हैं और उसे भ्रमित कर देते हैं।
डॉ. सोनल शुक्ला ने बताया कि मोबाइल की नीली लाइट हमारी नींद के चक्र को भी बाधित करती है और विद्यालय में भी इसके कारण सिर दर्द, डिप्रेशन और पैनिक अटैक आ सकते हैं इसलिए इस समस्या के हल के रूप में 7-7-7 रूल अपनाना चाहिए, इसमें जब बच्चा सोकर उठता है तो उसे 7 मिनट तक अलग-अलग कामों में व्यस्त रखें फिर स्कूल के काम के बाद 7 मिनट उसके दिन के बारे में पूछें और रात को सोने से पहले 7 मिनट किताबें पढ़ने या दिन भर की बातें शेयर करने दें। केवल 30 मिनट का स्क्रीन टाईम दें और उसके बाद टहलना या किसी चीज़ को 30 फीट की दूरी से देखने जैसी गतिविधियाँ करवाएँ।
राजकुमार कॉलेज के शिक्षक अक्षय पीआर ने बताया कि जब हम सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं तो हमें अपने समय, श्रम और लक्ष्य का संतुलन बनाना आवश्यक है। राजकुमार कॉलेज के बारहवीं कक्षा के विद्यार्थी इवान नरोहा ने कहा- हमारा युग ए.आई. का युग है। आज के बच्चे अंतर्मुखी होते जा रहे हैं, वे अपने अभिभावकों की बात नहीं मानते। इसके लिए उन्हें कुछ रचनात्मक कार्यों से जोड़कर माता-पिता को भी उनकी रुचि को पहचानते हुए उनके साथ सहभागी होने का प्रयास करना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में राजकुमार कॉलेज के प्राचार्य द्वारा सभी विशेषज्ञों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया और मनोविज्ञान विभाग की प्रभारी श्रीमती शीतल सरना द्वारा आभार प्रदर्शन किया गया।
जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ बना देश के लिए मिसाल: कोरिया मॉडल की प्रधानमंत्री ने की सराहना
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री निवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 132वीं कड़ी सुनी और इसे राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम देश के कोने-कोने में हो रहे सकारात्मक नवाचारों और जनभागीदारी को राष्ट्रीय मंच प्रदान कर समाज में नई ऊर्जा और प्रेरणा का संचार करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा कोरिया जिले के किसानों के जल संरक्षण प्रयासों की सराहना छत्तीसगढ़ के लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का विषय है। यह दर्शाता है कि प्रदेश में जमीनी स्तर पर हो रहे कार्य अब राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि ‘आवा पानी झोंकी’ जैसे अभिनव मॉडल के माध्यम से किसानों ने अपने खेतों में रिचार्ज तालाब और सोख्ता गड्ढों का निर्माण कर वर्षा जल को सहेजने का सराहनीय कार्य किया है। यह जनभागीदारी आधारित पहल आज भूजल स्तर में सुधार की एक सशक्त मिसाल बन चुकी है और अन्य क्षेत्रों के लिए भी मार्गदर्शक बन रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल संरक्षण अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है और छत्तीसगढ़ में भी इसे जनभागीदारी से जोड़ते हुए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों से जल संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और इसमें सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा मत्स्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता, फिटनेस को बढ़ावा, शुगर इंटेक में कमी और खेलों के लिए अनुकूल वातावरण निर्माण जैसे विषयों पर दिए गए संदेश अत्यंत उपयोगी और प्रेरणादायी हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने, युवाओं को खेलों से जोड़ने और स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री साय ने पश्चिमी एशिया में उत्पन्न परिस्थितियों के संदर्भ में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए संदेश का उल्लेख करते हुए कहा कि देश हर चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है और केंद्र तथा राज्य सरकारें समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों को आश्वस्त किया कि छत्तीसगढ़ में पेट्रोलियम उत्पादों, रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की पर्याप्त उपलब्धता है तथा आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह सुचारु और सामान्य है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे अफवाहों से दूर रहें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनभागीदारी की शक्ति के साथ जल संरक्षण को और मजबूत कर छत्तीसगढ़ को सुरक्षित, समृद्ध और जल-संपन्न भविष्य की ओर ले जाने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा प्रदेश निरंतर नवाचार, सहभागिता और सुशासन के माध्यम से विकास की नई दिशा तय कर रहा है।