रायपुर
रायपुर में मोहर्रम ताजिया जुलूस आज, शहर में ट्रैफिक डायवर्सन लागू
ताजिया जुलूस के दौरान जीई रोड पर आजाद चौक से आश्रम तिराहा और चौबे कॉलोनी टर्निंग तक सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पूरी तरह प्रभावित रहेगी। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक इस मार्ग का उपयोग न करें और वैकल्पिक मार्गों का ही उपयोग करें। पुलिस और प्रशासन ने यह भी कहा है कि पूरे जुलूस मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहेगी और जगह-जगह पुलिस बल की तैनाती की जाएगी ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। साथ ही यातायात पुलिस लगातार निगरानी रखेगी और आवश्यकता अनुसार ट्रैफिक को नियंत्रित करेगी। शहर प्रशासन ने नागरिकों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि धार्मिक आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रूप से संपन्न कराने में सभी लोग सहयोग करें ताकि किसी को असुविधा न हो।
परमहंस राजयोगी प्रभु बा के सानिध्य में '‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ महामंत्र' का अखंड जाप 28 से
रायपुर। परमहंस राजयोगी प्रभु बा के सानिध्य में ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ महामंत्र के अखंड जाप का आठ दिवसीय आयोजन 28 जून से 5 जुलाई तक किया गया है। इस दौरान प्रभु बा अपने भक्तों व अनुयायियों को दिव्य दर्शन देने के साथ उन्हें शक्तिपात दीक्षा भी देंगी। गुरुदेव के दर्शन और सत्संग का समय रात्रि 11 बजे के बाद निर्धारित किया गया है। यह कार्यक्रम राजीव नगर स्थित विनीत गुप्ता के निवास तृप्ति, द्वितीय तल, एच-3 फर्स्ट लेन में आयोजित किया गया है।
बताते चलें कि परम पूज्य परमहंस स्वामी सुगंधेश्वरानंद राजयोगी प्रभु "बा" एक प्रतिष्ठित आध्यात्मिक गुरु हैं। उन्हें "शक्तिपात दीक्षा" का आशीर्वाद पूज्य योगीराज गुलवणी जी महाराज से प्राप्त हुआ।जीवनकाल में कई दिनों की समाधि लेने के अनुभव के कारण अध्यात्म जगत ने उन्हें 'परमहंस' पद से विभूषित किया है। भक्तों द्वारा प्रेम से उन्हें "प्रभु बा" (मां) कहकर पुकारा जाता है।
छत्तीसगढ़़ के युवाओं की सेहत पर मंडरा रहा जंक फूड का खतरा
- राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की ताजा रिपोर्ट छत्तीसगढ़ के लिए चौंकाने वाले....
रायपुर। इस समय हम दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले देश के नागरिक हैं, लेकिन इस आबादी की सेहत पर 'जंक फूड' का गहरा साया मंडरा रहा है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एचएफएचएस-6) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय किशोरों के खान-पान की आदतों में आया बदलाव एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। इस मामले में छत्तीसगढ़ की ताजा रिपोर्ट चिंताजनक तो है ही, साथ ही कुछ बिंदु ध्यान देने योग्य हैं:-
एचएफएचएस-6 के आंकड़े बताते हैं घर के भोजन का स्थान पैकेटबंद स्नैक्स ने ले लिया है। डिजिटल विज्ञापनों, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट के चलते किशोरों में प्रोसेस्ड फूड के प्रति आकर्षण खतरनाक स्तर तक बढ़ गया है। शहरी ही नहीं, ग्रामीण इलाकों के किशोर भी सप्ताह में कई बार इंस्टेंट नूडल्स, आलू के चिप्स, नमकीन, पिज्जा, बर्गर और कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक्स (सॉफ्ट ड्रिंक्स) का सेवन कर रहे हैं। जंक फूड के बढ़ते चलन के कारण किशोरों की थाली से दाल, हरी पत्तेदार सब्जियां, मोटे अनाज और फल गायब हो रहे हैं। ये खाली कैलोरी (Empty Calories) किशोरों का पेट तो भर रही हैं, लेकिन उनके शरीर को जरूरी पोषक तत्व नहीं दे पा रही है।
एचएफएचएस-6 के आंकड़ों के अनुसार सर्वेक्षण के आंकडे़ शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं। एचएफएचएस-5 से एचएफएचएस-6 की तुलना करें तो पता चलता है की 15 से 49 वर्ष के शहरी और ग्रामीण युवाओं में मोटापे की दर पहले से बढ़ी हुई है। इसी प्रकार महिलाओं के मोटापे की दर 14 से बढ़ाकर 20.3 हुई है। विशेष रूप से अस्वास्थ्यकर खान-पान और शारीरिक रूप से निष्क्रिय जीवनशैली, स्क्रीन टाइम बढ़ने का सीधा नतीजा वजन बढ़ने के रूप में सामने आया है। शहरों के संपन्न परिवारों के किशोरों में ओवरवेट (ज्यादा वजन) और मोटापे की दर में पिछले सर्वेक्षणों की तुलना में काफी तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। पहले मोटापा केवल अमीर या शहरी बच्चों की समस्या माना जाता था। लेकिन एचएफएचएस-6 के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते और कम गुणवत्ता वाले पैकेटबंद स्नैक्स की आसान पहुंच होने के कारण ग्रामीण किशोर भी अब तेजी से मोटापे की चपेट में आ रहे हैं।
हिडन हंगर: मोटे लेकिन एनीमिकजंक फूड कैलोरी से भरपूर होते हैं, लेकिन इसमें विटामिन और मिनरल्स शून्य होते हैं। इस वजह से भारतीय किशोरों में एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। देश की 50 फीसदी से अधिक किशोरियां एनीमिया (खून की कमी) की शिकार हैं और किशोरों में भी यह दर ऊंची है। इस स्थिति को चिकित्सा विज्ञान में 'हिडन हंगर' (छिपी हुई भूख) कहा जाता है, जहां एक किशोर देखने में भारी-भरकम या मोटा लग सकता है, लेकिन आंतरिक रूप से वह गंभीर कुपोषण और आयरन की कमी से जूझ रहा होता है।
0 एचएफएचएस-6 का सबसे चिंताजनक संकेत यह है कि जो बीमारियां पहले 40 साल की उम्र के बाद होती थीं, वे अब 15 से 19 साल के किशोरों में पैर पसार रही हैं। मीठे पेय पदार्थों (सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस) के अत्यधिक सेवन के कारण किशोरों में इंसुलिन रेजिस्टेंस बढ़ रहा है, जिससे वे कम उम्र में ही डायबिटीज के मुहाने पर खड़े हैं। पैकेटबंद चिप्स, सॉस और नूडल्स में सोडियम (नमक) की मात्रा बहुत अधिक होती है। इसके नियमित सेवन से किशोरों में हाइपर टेंशन के लक्षण देखे जा रहे हैं।
0- जंक फूड और किशोर स्वास्थ्य संकेतक युवाओं में मुख्य रुझान एचएफएचएस-6 स्वास्थ्य पर प्रभाव खान-पान का तरीका एचएफएसएस (हाई फैट, शुगर, साल्ट) और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अत्यधिक सेवन। शरीर में सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, कमजोर इम्युनिटी। मोटापा किशोरों और युवाओं में ओवरवेट होने की दर में निरंतर उछाल। भविष्य में दिल की बीमारियों और स्ट्रोक का खतरा: ब्लड, शुगर का स्तर 15 साल के किशोरों और युवाओं में खाली पेट ग्लूकोज का स्तर एक बढ़ा हुआ पाया गया।
एचएफएचएस-6 के इन चौंकाने वाले आंकड़ों के बाद नीति निर्माताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कड़े कदम उठाने की मांग की है। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) अब पैकेट के आगे 'रेड वॉर्निंग साइन' लगाने पर विचार कर रहा है, ताकि यह साफ दिखे कि भोजन में नमक, चीनी या फैट कितना ज्यादा है। इसी तरह स्कूल परिसरों और उनके 50 मीटर के दायरे में अस्वास्थ्यकर भोजन और कोल्ड ड्रिंक्स की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की नीतियों को सख्ती से लागू करने की जरूरत है। 'ईट राइट इंडिया' और 'पोषण अभियान' के जरिए अब स्कूलों और कॉलेजों में किशोरों को सीधे टारगेट कर काउंसलिंग की जा रही है, ताकि वे पारंपरिक और सेहतमंद भारतीय भोजन (जैसे बाजरा, रागी, छाछ, फल) की तरफ वापस लौट सकें।
... तो बीमार हो जाएगी युवा पीढ़ी
यदि समय रहते किशोरों की इस 'जंक फूड' संस्कृति पर लगाम नहीं कसी गई, तो भारत का 'डेमोग्राफिक यूथ डिविडेंड' बीमारियों के बोझ तले दब जाएगा। इस कार्य के लिए भी सरकार की ओर इशारा करने से कुछ नहीं होगा। परिवार के सदस्यों, विशेष रूप से माता- पिता को अपने बच्चों के लिए समय निकलना पड़ेगा। अगर घर पर स्वच्छ और पौष्टिक भोजन बनेगा, तो बच्चे भी उसका सेवन करेंगे। परिवार दिन में एक बार साथ में बैठकर खाना खाएं।
डॉ. अभया जोगलेकर
डायटिशियन व प्राचार्य
बद्री प्रसाद लोधी गवर्नमेंट कॉलेज, आरंग
भाठागांव के पाइपलाइन लीकेज, रायपुर के कई इलाकों में गुरुवार शाम जलापूर्ति रहेगी प्रभावित
रायपुर।भाठागांव रोड में दतरेंगा मोड पर 750 एमएम पाईप लाईन में लीकेज की जानकारी मिलते ही नगर निगम जलविभाग की टीम द्वारा संबंधित स्थल पर तत्काल पहुंचकर पाईप लाईन लीकेज मरम्मत का कार्य प्रारंभ किया गया। इसके पूर्व आज सुबह 10 बजे रावणभाठा फिल्टरप्लांट 80 एमएलडी पुराने प्लांट से जलापूर्ति रोककर पाईप लाईन लीकेज मरम्मत का कार्य प्रारंभ करवाया गया।
पाईप लाईन लीकेज मरम्मत कार्य के दौरान 80 एमएलडी पुराने फिल्टर प्लांट से संबंधित राजेन्द्र नगर, तेलीबांधा, श्यामानगर, शंकरनगर, खमतराई, भनपुरी, पुराना डंगनिया, गंज और गुढियारी जलागारो से संबंधित क्षेत्र में आज दिनांक 25 जून को संध्याकालीन जलापूर्ति आंशिक प्रभावित रहेगी। पाईप लाईन लीकेज का कार्य पूर्ण होते ही दिनांक 26 जून से प्रातःकालीन जलापूर्ति सामान्य रूप से प्रारंभ कर दी जायेगी।
युवा शक्ति की सफलता विकसित छत्तीसगढ़ की नई पहचान - मुख्यमंत्री साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सदन में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए ट्राइबल यूथ हॉस्टल, द्वारका के विद्यार्थियों से आत्मीय मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के मेहनतकश परिवारों के सपनों और संघर्ष का सम्मान भी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन विद्यार्थियों की सफलता इस बात का सशक्त प्रमाण है कि प्रतिभा कभी भी आर्थिक संसाधनों या पारिवारिक पृष्ठभूमि की मोहताज नहीं होती। किसी के पिता राजमिस्त्री हैं, कोई किसान परिवार से है तो कोई शिक्षक का बेटा है, लेकिन इन सभी ने अपनी मेहनत, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के बल पर देश की सबसे प्रतिष्ठित प्रतियोगी परीक्षा के प्रथम चरण में सफलता प्राप्त की है। यह पूरे प्रदेश, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणादायी उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से उनकी तैयारी, अध्ययन पद्धति, संघर्ष और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। विद्यार्थियों ने ट्राइबल यूथ हॉस्टल में उपलब्ध अध्ययन वातावरण, मार्गदर्शन और सुविधाओं के अनुभव साझा किए तथा बताया कि राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए अनुकूल माहौल ने उन्हें बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने का आत्मविश्वास दिया।
मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से कहा कि प्रारंभिक परीक्षा की सफलता एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन वास्तविक लक्ष्य मुख्य परीक्षा और उसके बाद साक्षात्कार में उत्कृष्ट प्रदर्शन करना है। उन्होंने विद्यार्थियों को पूरी निष्ठा, अनुशासन, समय प्रबंधन और सकारात्मक सोच के साथ तैयारी करने की सलाह देते हुए कहा कि कठिन परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता और निरंतर प्रयास ही सफलता का सबसे बड़ा आधार है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक सेवाएं केवल एक प्रतिष्ठित करियर नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की कि वे भविष्य में प्रशासनिक दायित्व निभाते समय संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जनसेवा की भावना को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे तथा अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं की तैयारी और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विशेष रूप से दूरस्थ एवं आदिवासी अंचलों के प्रतिभाशाली युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए अनेक पहल की जा रही हैं, ताकि प्रतिभा संसाधनों के अभाव में कभी पीछे न रह जाए।
उन्होंने कहा कि द्वारका स्थित ट्राइबल यूथ हॉस्टल इसी सोच का परिणाम है, जहां प्रदेश के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिभाशाली विद्यार्थी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। यहां उपलब्ध शैक्षणिक वातावरण, मार्गदर्शन और आवश्यक सुविधाओं का सकारात्मक परिणाम अब यूपीएससी जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में विद्यार्थियों की लगातार बढ़ती सफलता के रूप में सामने आने लगा है।
छत्तीसगढ़ में आज गरज-चमक के साथ होगी बारिश, कई जिलों में भारी वर्षा और वज्रपात का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, अगले 48 घंटों तक प्रदेश में मानसूनी गतिविधियां जारी रहेंगी। कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, जबकि कुछ स्थानों पर भारी बारिश और वज्रपात की संभावना बनी रहेगी।
भारतमाला परियोजना के दो राष्ट्रीय राजमार्गों के काम मार्च-2027 तक होंगे पूरे
लोक निर्माण विभाग के सचिव बंसल ने राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण कर रहे ठेकेदारों की बैठक लेकर कार्य एवं कार्यस्थलों पर आ रही समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने अनुबंध के अनुसार निर्माण कार्यों में अपेक्षित प्रगति सुनिश्चित करने के साथ ही गुणवत्ता और समय पर कार्य पूर्णता में कोई समझौता नही करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण से राज्य की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। इनके निर्माण में किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार्य नहीं है। निर्धारित समायवधि में अच्छा काम होना चाहिए।
रायपुर में नियम उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई, ब्लिंकिट भवन सील
नगर निगम अधिकारियों के अनुसार, शहर में भवन निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन को लेकर निर्धारित नियमों का पालन अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की लापरवाही या नियम उल्लंघन पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि संबंधित भवन में न तो पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था थी और न ही अग्निशमन सुरक्षा के मानक पूरे किए गए थे। इसके अलावा भवन का संचालन बिना आवश्यक अनुमति और पूर्णता प्रमाणपत्र के किया जा रहा था, जो नियमों का उल्लंघन है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अन्य व्यावसायिक भवनों और संस्थानों में भी सतर्कता बढ़ गई है। नगर निगम की टीम द्वारा आगे भी इसी तरह के औचक निरीक्षण किए जाने की संभावना जताई जा रही है। प्रशासन का कहना है कि शहर में सुरक्षा और नियमानुसार निर्माण व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा।
स्टेट जीएसटी की बड़ी कार्रवाई : राजनांदगांव में 76 करोड़ रुपए की फर्जी बिल ट्रेडिंग का खुलासा, संचालक गिरफ्तार
प्रकरण में पर्याप्त साक्ष्य प्राप्त होने के बाद राज्य कर विभाग ने आदेश्वर चौरड़िया को गिरफ्तार कर लिया है। मामले की विस्तृत जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में कई अन्य व्यक्तियों एवं फर्मों के भी इस नेटवर्क से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। विभाग बैंक खातों, ई-वे बिल, परिवहन दस्तावेजों तथा संबंधित व्यापारिक इकाइयों की भूमिका की गहन जांच कर रहा है। राज्य कर विभाग का मानना है कि आगे की जांच में इस फर्जी बिलिंग नेटवर्क से जुड़े और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ईमानदार करदाताओं के हितों की रक्षा तथा फर्जी बिलिंग और बोगस आईटीसी जैसे अवैध कृत्यों पर प्रभावी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।
’विशेष लेख’ : ’कोदो-कुटकी की खेती अपनाएं, पोषण और समृद्धि दोनों पाएं’
रायपुर %छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि परंपरा में कोदो और कुटकी का विशेष महत्व रहा है। सदियों से आदिवासी और ग्रामीण समुदायों के भोजन का अभिन्न हिस्सा रहे ये लघु धान्य आज एक बार फिर किसानों, कृषि वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। बदलती जलवायु परिस्थितियों, पोषण संबंधी चुनौतियों और बेहतर कृषि की आवश्यकता के बीच कोदो-कुटकी जैसी मिलेट फसलें भविष्य की खेती का मजबूत आधार बनकर उभर रही हैं।
कोदो ¼पास्पलम स्क्रोबिकुलेटम½ और कुटकी ¼पैनिकम सुमाट्रेंस½ ऐसी फसलें हैं जिन्हें कम पानी] कम लागत और सीमित संसाधनों में भी सफलतापूर्वक उगाया जा सकता है। यही कारण है कि ये छोटे और सीमांत किसानों के लिए आर्थिक सुरक्षा का माध्यम बन रही हैं। कम उपजाऊ] पथरीली और ढालू भूमि में भी इनकी खेती संभव है] जहां अन्य फसलें अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पातीं। ^ये फसलें प्रायः हर एक प्रकार की भूमि में पैदा की जा सकती है। जिस भूमि में अन्य कोई धान्य फसल उगाना सम्भव नहीं होता वहाँ भी ये फसलें सफलता पूर्वक उगाई जा सकती है। हल्की भूमि में जिसमें पानी का निकास अच्छा हो इनकी खेती के लिए उपयुक्त होती है।*
आज जब दुनिया स्वास्थ्यवर्धक भोजन की ओर लौट रही है, तब कोदो और कुटकी का महत्व और बढ़ गया है। कोदो में प्रोटीन] कार्बाेहाइड्रेट, आयरन और कैल्शियम प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं]जबकि कुटकी फाइबर] प्रोटीन] फास्फोरस तथा अन्य खनिज तत्वों से भरपूर होती है। विशेषज्ञों के अनुसार इनका नियमित सेवन मधुमेह] उच्च रक्तचाप] मोटापा और एनीमिया जैसी समस्याओं के नियंत्रण में सहायक हो सकता है। यही वजह है कि आज इन्हें ‘^सुपर फूड* के रूप में पहचान मिल रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार भी मिलेट फसलों को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। वर्ष 2026 में कोदो का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3]200 रुपये प्रति क्विंटल तथा कुटकी का 3]350 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इससे किसानों को बेहतर मूल्य मिलने के साथ इन फसलों की खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है। विभागीय जानकारी के अनुसार खरीफ वर्ष 2025 में प्रदेश में कोदो फसल 39-02 हेक्टेयर और कुटकी फसल 38-03 हेक्टेयर रकबे में लगाए गए थे। वैसे विगत खरीफ वर्ष में प्रति हेक्टेयर कोदो की उत्पादन 550 किलोग्राम तथा कुटकी की उत्पादन 675 किलोग्राम दर्ज की गई है। यानी कोदो की उत्पादन 21-46 टन थी] वहीं 25-67 टन कुटकी का उत्पादन हुआ था।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी किसानों से धान के साथ-साथ कोदो, कुटकी और रागी जैसी फसलों की खेती अपनाने व उत्पादन बढ़ाने की अपील की है।
कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्नत तकनीकों को अपनाकर कोदो-कुटकी की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। ^मानसून की शुरुआत के साथ जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई के प्रथम पखवाड़े तक बुवाई, बीजोपचार, कतार पद्धति, संतुलित उर्वरक प्रबंधन तथा समय पर खरपतवार नियंत्रण जैसे उपाय किसानों को बेहतर उत्पादन दिला सकते हैं।*
राज्यपाल ने दिव्यांग पुनर्वास केंद्र माना कैंप का किया अवलोकन
रायपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने आज समाज कल्याण विभाग द्वारा माना कैंप मे स्थापित फिजिकल रेफरल रिहैबिलिटेशन सेंटर]सेरेब्रल पाल्सी गेट लैब तथा दिव्यांगजनों के लिए संचालित महाविद्यालय का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने दिव्यांगजनों को ट्राईसाइकिल वितरित कर उनका उत्साहवर्धन भी किया। भ्रमण के दौरान राज्यपाल ने पुनर्वास केन्द्र परिसर में वृक्षारोपण भी किया।
राज्यपाल के साथ समाज कल्याण विभाग के संचालक रणवीर शर्मा सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। राज्यपाल ने सेरेब्रल पाल्सी गेट लैब में स्थापित अत्याधुनिक उपकरणों का अवलोकन कर उनके उपयोग और कार्यप्रणाली की जानकारी प्राप्त की। उन्हें बताया गया कि यहां इंटरफेरेंशियल थेरेपी यूनिट] शॉर्ट वेव डायथर्मी] माइक्रो मोशन सिस्टम] गेट लैब] अल्ट्रासाउंड थेरेपी] गेट ट्रेनर]आइसोकाइनेटिक यूनिट] ट्रैक्शन यूनिट] मोटामेड तथा मसल्स स्टिम्युलेटर जैसे आधुनिक उपकरण स्थापित हैं] जिनका उपयोग दिव्यांगजनों के उपचार और पुनर्वास में किया जाता है।
राज्यपाल ने केंद्र में उपलब्ध चिकित्सा एवं पुनर्वास सुविधाओं की सराहना की। निरीक्षण के दौरान राज्यपाल ने दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए संचालित महाविद्यालय का भी अवलोकन किया। महाविद्यालय में वर्तमान में 140 दृष्टिबाधित] मूक एवं बधिर विद्यार्थी अध्ययनरत हैं] जो ब्रेल लिपि सहित विभिन्न माध्यमों से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई हस्तशिल्प सामग्री] ड्राइंग और पेंटिंग का अवलोकन कर राज्यपाल ने उनकी प्रतिभा की सराहना की तथा उन्हें निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसके पश्चात राज्यपाल ने कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण निर्माण कार्यशाला का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां संचालित विभिन्न इकाइयों एवं दिव्यांगजनों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं की जानकारी ली तथा अधिकारियों को इन सुविधाओं का अधिकाधिक लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने के निर्देश दिए।
राज्यपाल रमेन डेका ने “प्रारंभ” पत्रिका के विशेषांक का किया विमोचन
jk;iqj % राज्यपाल रमेन डेका द्वारा “सोसायटी फॉर एम्पावरमेंट” द्वारा प्रकाशित पत्रिका “प्रारंभ” का आज विमोचन किया गया। इस विशेषांक का संपादन डॉ. रूपेन्द्र कवी, उपसचिव (संवैधानिक प्रकोष्ठ), लोकभवन, रायपुर द्वारा किया गया है।
यह विशेषांक “प्राकृतिक एवं पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान में जनजातीय ज्ञान की प्रासंगिकता” विषय पर आधारित है, जिसमें जनजातीय ज्ञान एवं पर्यावरण संरक्षण के परंपरागत दृष्टिकोणों को समाहित किया गया है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने पत्रिका की विषयवस्तु की सराहना करते हुए कहा कि यह अंक वर्तमान पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान हेतु महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। उन्होंने संपादकीय टीम को बधाई एवं शुभकामनाएँ प्रदान की।
राज्यपाल डेका ने सक्ती जिले के अधिकारियों से की चर्चा
रायपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने आज लोकभवन में वीडियों कांफ्रेसिंग के माध्यम से सक्ती जिला एवं ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों के साथ चर्चा कर जनकल्याणकारी योजनाओं के 22 प्रमुख बिन्दुओं पर विस्तृत जानकारी ली। राज्यपाल ने जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन को सर्वाेच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छोटे कर्मचारी से लेकर वरिष्ठ अधिकारी सभी शासकीय कर्मचारी एक पेड़ मां के नाम अभियान में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें व अपने कार्यालय एवं निवास में पेड़ लगाकर हरियाली प्रसार में योगदान करें।
राज्यपाल ने अधिकारियों से कहा कि जिले में प्री मानसून, पोस्ट मानसून जल स्तर का आकंलन किया जाए। प्रधानमंत्री आवासों में वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण भविष्य की सबसे बड़ी आवश्यकता है और इसके लिए अभी से प्रभावी कदम उठाया जाएं। उन्होंने सभी शासकीय भवनों एवं निवास स्थान के परिसर के कवर्ड एरिया में हरियाली प्रसार के लिए अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने के निर्देश दिए। जनजातीय एवं वन क्षेत्रों में पुराने वेटलैड, तालाब, कुंआ आदि जलस्त्रोतों के पुर्नजीवन के लिए ‘‘वीबी-जी राम जी‘‘ के तहत कार्य कराने के निर्देश भी दिए।
राज्यपाल ने कहा कि महिला स्व सहायता समूहों की आय बढ़ाने के लिए नवाचार आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। केवल परंपरागत कार्यो तक सीमित रहने के बजाए ऐसे व्यवसायों को बढ़ावा दिया जाए जिनमें संभावनाएं ज्यादा हो। महिलाओं को नए एवं अधिक लाभकारी उद्यमों से जोड़ने की आवश्यकता है। उन्होंने लखपति दीदीयों को हाइड्रोपोनिक्स एवं प्राकृतिक खेती की दिशा में प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया।
राज्यपाल ने बेहतर स्वास्थ के लिए योग को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जो लोग नियमित रूप से योग कर रहे है उनको सम्मानित किया जाए जिससे दूसरे लोग भी प्रेरित हो। ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाएं एवं बच्चों को योग से जोड़ने के लिए प्रयास किए जाए। टी.बी. उन्मूलन संबंधी कार्यक्रम की जानकारी लेते हुए डेका ने कहा कि ऐसे मरीज जो टी.बी के साथ-साथ अन्य बीमारियों से पीड़ित है उन पर प्राथमिकता से ध्यान दिया जाए। ऐसे मरीजों को मेडिकल कॉलेज एवं एम्स जैसे संस्थानों में रेफर किया जाए। राज्यपाल ने जैविक खेती में वैल्यु एडिशन के द्वारा लाभप्रद खेती हेतु भी आवश्यक दिशा निर्देश दिए। बैठक मे जिला प्रशासन सक्ती के वरिष्ठ अधिकारियों ने विभिन्न योजनाओं की प्रगति की जानकारी प्रस्तुत की। राज्यपाल ने जनहित से जुड़े विषयों में परिणाम मूलक दृष्टिकोण के साथ कार्य करने कहा।
वीरांगना रानी दुर्गावती का शौर्य और बलिदान राष्ट्र की प्रेरणा का अमर स्रोत : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित केनाल लिंकिंग रोड पर वीरांगना रानी दुर्गावती के बलिदान दिवस के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रानी दुर्गावती का अदम्य साहस, पराक्रम और बलिदान भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर है। उनका जीवन राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण का सर्वाेच्च उदाहरण है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि रानी दुर्गावती का शौर्य और त्याग आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का प्रकाश स्तंभ है। उनकी गौरवगाथा हमें विपरीत परिस्थितियों में भी साहस, आत्मविश्वास और कर्तव्यनिष्ठा के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि समाज द्वारा अपने महान नायकों और गौरवशाली इतिहास का स्मरण करना अत्यंत आवश्यक है। जो समाज अपने इतिहास और विरासत को विस्मृत कर देता है, उसका भविष्य भी संकटग्रस्त हो जाता है, जबकि जो समाज अपने महापुरुषों को कृतज्ञता और सम्मान के साथ याद रखता है, उसका भविष्य सदैव उज्ज्वल होता है।
मुख्यमंत्री ने रानी दुर्गावती के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मुगल साम्राज्य की विशाल सेना के सामने अद्वितीय वीरता का परिचय दिया। अंतिम क्षण तक संघर्ष करते हुए उन्होंने मातृभूमि की रक्षा और स्वाभिमान की रक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी तथा वीरगति को प्राप्त हुईं। उनका बलिदान भारतीय इतिहास में साहस और स्वाभिमान के अप्रतिम अध्याय के रूप में सदैव स्मरणीय रहेगा। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश विकास भी, विरासत भी के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। विकास की यात्रा तभी सार्थक होती है, जब हम अपनी सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक चेतना और महान विभूतियों के योगदान को भी समान रूप से संरक्षित करें। रानी दुर्गावती ने जिस राष्ट्रचेतना, स्वाभिमान और संघर्ष की भावना का संचार किया, वह आज भी समाज को दिशा प्रदान कर रही है।
उन्होंने कहा कि रानी दुर्गावती का जीवन केवल इतिहास का विषय नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर हमें विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के संकल्प को और अधिक दृढ़ता के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। इस अवसर पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप, विधायक पुरंदर मिश्रा, विधायक भूलन सिंह मरावी, डॉ. नंदकुमार साय, रायपुर नगर निगम महापौर मीनल चौबे, छत्तीसगढ़ औषधीय पादप बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष रूप सिंह मंडावी सहित जनप्रतिनिधिगण एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
1 जुलाई से लागू होगी वीबी जी राम जी योजना, ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल
रायपुर : प्रदेश के ग्रामीण परिवारों को आजीविका और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य शासन द्वारा आगामी 1 जुलाई 2026 से लागू की जा रही वीबी जी राम जी (विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना को लेकर पूरे प्रदेश में व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायतों, जनपद पंचायतों और जिला स्तर पर लगातार प्रशिक्षण, बैठकें और ग्राम सभाएं आयोजित कर ग्रामीणों को योजना के विभिन्न प्रावधानों एवं लाभों की जानकारी दी जा रही है।
योजना के प्रति ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रदेश के विभिन्न गांवों में आयोजित ग्राम सभाओं में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर योजना की जानकारी प्राप्त की तथा इसके सफल क्रियान्वयन में सहयोग का संकल्प लिया। इसी क्रम में बेमेतरा जिले के जनपद पंचायत बेरला की ग्राम पंचायत सांकरा एवं देवरी में ग्रामीणों ने योजना के प्रचार-प्रसार के लिए अनूठी पहल करते हुए मानव श्रृंखला का निर्माण किया। ग्रामीणों ने हाथों में जागरूकता संबंधी तख्तियां लेकर “वीबी जी राम जी - गांव की प्रगति, हम सबकी जिम्मेदारी”, “रोजगार और आजीविका का नया संबल” तथा “समृद्ध गांव, सशक्त परिवार” जैसे संदेशों के माध्यम से लोगों को योजना से जुड़ने के लिए प्रेरित किया।
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी अपने एक्स अकॉउंट से पोस्ट कर लिखा कि छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले से आई इस तस्वीर को देखकर मन आनंद और उत्साह से भर गया। यह तस्वीर गाँव की जनता के जागरूकता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भी बेमेतरा जिले के इन प्रयासों की सराहना करते हुए अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट कर लिखा कि यह मानव श्रृंखला बन रही है, जो योजना के प्रति जन-जागरूकता का प्रतीक बनी हुई है।
वन मंत्री केदार कश्यप की पहल से उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में शुरू होगी ‘हॉर्नबिल सफारी
रायपुर : ‘हॉर्नबिल सफारी' से तात्पर्य हॉर्नबिल पक्षियों को देखने के लिए की जाने वाली वन्यजीव सफारी या हॉर्नबिल से जुड़े प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों से है। हॉर्नबिल मुख्य रूप से जंगलों, विशेषकर पश्चिमी घाट और मध्य भारत के नम पर्णपाती और सदाबहार वनों में रहना पसंद करता है।
छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण और सामुदायिक विकास को नई दिशा देने वाली एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की जा रही है। वन मंत्री केदार कश्यप की पहल पर रिजर्व प्रबंधन द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) के गांवों ओढ़, अमलोर और आमामोरा में ‘हॉर्नबिल सफारी’ प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। यह पहल दुर्लभ मालाबार पाइड हॉर्नबिल के संरक्षण को मजबूती देने के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी सृजित करेगी।
वन मंत्री केदार कश्यप की सोच के अनुरूप वन विभाग वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण कार्यों को स्थानीय समुदायों की भागीदारी और आजीविका से जोड़ने की दिशा में लगातार कार्य कर रहा है। प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पाण्डेय तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) ओ.पी. यादव के मार्गदर्शन में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में कई नवाचार किए जा रहे हैं, जिनसे वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास को एक साथ बढ़ावा मिल रहा है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले चार वर्षों के दौरान मालाबार पाइड हॉर्नबिल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह सफलता एंटी-पोचिंग अभियान, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, फलदार वृक्षों के संरक्षण एवं रोपण तथा ‘हॉर्नबिल रेस्टोरेंट’ जैसी अभिनव पहल का परिणाम है। स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने भी इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
हॉर्नबिल संरक्षण के लिए गठित विशेष ट्रैकिंग टीम लगातार पक्षियों की गतिविधियों, घोंसलों और आवास क्षेत्रों की निगरानी कर रही है। वन विभाग के कर्मचारियों के साथ स्थानीय ट्रैकर्स भी इस अभियान से जुड़े हुए हैं। उनके सतत प्रयासों से ओढ़, अमलोर और आमामोरा के आसपास का वन क्षेत्र आज हॉर्नबिल के सुरक्षित आवास और आकर्षक बर्डिंग स्थल के रूप में विकसित हो चुका है।
सहकारिता सप्ताह को जनआंदोलन बनाने की तैयारी
रायपुर : भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय की स्थापना के पांच वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 29 जून से 6 जुलाई 2026 तक आयोजित होने वाले सहकारिता सप्ताह की तैयारियों को लेकर नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने विभागीय अधिकारियों तथा विभिन्न सहकारी संस्थाओं एवं महासंघों के प्रतिनिधियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक को संबोधित करते हुए मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में देश में सहकारिता क्षेत्र को नई पहचान मिली है। सहकारिता आज किसानों की समृद्धि, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का प्रभावी माध्यम बन चुकी है।
मंत्री कश्यप ने कहा कि सहकारिता सप्ताह केवल औपचारिक आयोजन न होकर जनभागीदारी का अभियान बने। इसके लिए राज्य के सभी जिलों, विकासखंडों और सहकारी समितियों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएं तथा किसानों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
कश्यप ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सप्ताहभर चलने वाले कार्यक्रमों में जागरूकता, सहभागिता और नवाचार को प्राथमिकता दी जाए। लोगों को सहकारी योजनाओं, उपलब्धियों और लाभों की जानकारी दी जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग सहकारिता से जुड़ सकें।
बैठक में राज्य स्तरीय प्रदर्शनी की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मंत्री कश्यप ने निर्देश दिए कि प्रदर्शनी में केवल आंकड़ों के बजाय सहकारिता से लाभान्वित हितग्राहियों की सफलता की कहानियां, नवाचार और जमीनी उपलब्धियां प्रदर्शित की जाएं, ताकि लोग सहकारिता की वास्तविक ताकत को समझ सकें।