रायपुर
सेवा संकल्प अभियान : स्वच्छता एक आदत है जो धीरे-धीरे संस्कार बनेगी - मंत्री टंक राम वर्मा
रायपुर : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के ऐतिहासिक 25 वर्ष पूर्ण होने के सुअवसर पर जारी 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत जिले भर में विविध जनसेवा कार्यक्रमों की धूम है। इसी कड़ी में 'सेवा मेरा योगदान' कार्यक्रम के अंतर्गत सोमवार को राज्य के राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा की अगुवाई में बलौदाबाजार स्थित ऐतिहासिक षष्ठी मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में वृहद स्वच्छता अभियान चलाया गया।
अभियान के दौरान राजस्व मंत्री वर्मा, प्रशासनिक अधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों ने स्वयं हाथों में झाड़ू थामकर सड़कों पर बिखरे कचरे को साफ किया और उसे डस्टबिन में एकत्रित किया।
मंत्री वर्मा के इस प्रतीकात्मक पहल ने आमजनों को स्वच्छता को जीवनशैली का हिस्सा बनाने और सार्वजनिक स्थानों को साफ-सुथरा रखने का एक सशक्त संदेश दिया।
राजस्व मंत्री वर्मा ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए राजस्व मंत्री कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनसेवा के 25 सफल वर्षों के उपलक्ष्य में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक 'सेवा संकल्प अभियान' चलाया जा रहा है। स्वच्छता केवल एक दिवस का कार्य नहीं, बल्कि एक आदत है जो धीरे-धीरे हमारे व्यवहार का हिस्सा बनती है। हर्ष का विषय है कि आज इस अभियान के माध्यम से जन-जन में स्वच्छता के प्रति अभूतपूर्व जागरूकता देखने को मिल रही है।
स्वच्छता के इस महाअभियान में कलेक्टर , भारत स्काउट एवं गाइड के राज्य उपाध्यक्ष, नगर पालिका उपाध्यक्ष सहित विभिन्न वार्डों के पार्षदगण एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में शामिल होकर अपना श्रमदान दिया।
ताइक्वांडो में राजकुमार कॉलेज के विद्यार्थियों ने लहराया परचम
रायपुर। राजधानी रायपुर के राजकुमार कॉलेज की बालिका खिलाड़ियों ने अखिल भारतीय आईपीएससी बालिका ताइक्वांडो चैम्पियनशिप 2026 (अंडर-14 एवं अंडर-17) में शानदार प्रदर्शन करते हुए विद्यालय का नाम रोशन किया। प्रतियोगिता का आयोजन 1 से 3 अक्टूबर 2026 तक एमराल्ड हाइट्स इंटरनेशनल स्कूल, इंदौर में किया गया, जिसमें कुल 20 बालिका खिलाड़ियों ने भाग लिया।
प्रतियोगिता में खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल 14 पदक अर्जित किए। इनमें 4 स्वर्ण, 5 रजत और 5 कांस्य पदक शामिल हैं। खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन के दम पर अंडर- 14 बालिका वर्ग में राजकुमार कॉलेज ने ओवरऑल चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि के साथ राजकुमार कॉलेज की चार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का चयन 70वें राष्ट्रीय स्कूल गेम्स 2026 (SGFI) के लिए हुआ है। चयनित खिलाड़ियों में अर्पण कुर्रे, पूजा मीनपाल, स्वस्तिका अग्रवाल और दिशा शर्मा, सभी कक्षा 6वीं, शामिल हैं।
विद्यालय की इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर प्राचार्य कर्नल अविनाश सिंह ने सभी विजेता खिलाड़ियों को बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की यह सफलता उनकी कड़ी मेहनत, अनुशासन, समर्पण और निरंतर अभ्यास का परिणाम है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए चयनित चारों खिलाड़ियों को विशेष रूप से शुभकामनाएँ देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे आगामी प्रतियोगिताओं में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर राजकुमार कॉलेज एवं
छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करेंगी। विद्यालय परिवार ने सभी खिलाड़ियों एवं प्रशिक्षकों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव सड़क एवं राष्ट्रीय राजमार्ग पर राष्ट्रीय चिंतन शिविर में हुए शामिल
रायपुर : उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री अरुण साव गुजरात के नर्मदा में आज से शुरू हुए सड़क एवं राष्ट्रीय राजमार्ग पर दो दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर में शामिल हुए। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा “गतिशक्ति से प्रगति” थीम पर इसका आयोजन किया गया है। केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने चिंतन शिविर का शुभारंभ किया। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा भी इस दौरान मौजूद थे।
देश के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सड़क निर्माण से जुड़े विभागों के मंत्री, अधिकारी, विशेषज्ञ एवं नीति निर्माता इस राष्ट्रीय चिंतन शिविर में भागीदारी कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की ओर से उप मुख्यमंत्री साव के साथ लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता वी.के. भतपहरी, अपर सचिव एस.एन. श्रीवास्तव और राष्ट्रीय राजमार्ग परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता ज्ञानेश्वर कश्यप भी चिंतन शिविर में हिस्सा ले रहे हैं।
चिंतन शिविर में भाग ले रहे विभिन्न राज्यों के मंत्रियों, अधिकारियों, विशेषज्ञों एवं नीति निर्माताओं ने आज तीन सत्रों में भविष्य में बनने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों की डिजाइन, गुणवत्ता, रोड सेफ्टी और परियोजना प्रबंधन पर विस्तार से चर्चा की। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में रायपुर से जगदलपुर, बिलासपुर से रायगढ़, कटघोरा से अंबिकापुर और रायपुर से सारंगढ़ तक फोरलेन राष्ट्रीय राजमार्गों की कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है। चिंतन शिविर में निर्धारित किए जाने वाले फ्रेमवर्क्स से इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।
राष्ट्रीय चिंतन शिविर के पहले दिन आज विभिन्न सत्रों में “पीएम गतिशक्तिकृसमन्वित और प्रभावी परियोजना क्रियान्वयन के लिए एकीकृत अधोसंरचना नियोजन”, “भूमि अधिग्रहण में तेजी और भूमि राशि का प्रभावी उपयोग” तथा “सुदृढ़ परियोजना क्रियान्वयन और रेटिंग के लिए मॉडल कंसेशन एग्रीमेंट फ्रेमवर्क” पर गहन विचार-विमर्श किया गया। चिंतन शिविर के दूसरे दिन 6 अक्टूबर को “सुरक्षित राजमार्गों का डिजाइनकृमानकों से क्रियान्वयन तक” और “गुणवत्ता आश्वासन एवं परियोजना मॉनिटरिंग” पर मंथन किया जाएगा।
योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की संतुलित कला है: कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ला
रायपुर। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर के मालवीय मिशन टीचर ट्रेनिंग सेंटर द्वारा आयोजित 6 दिवसीय शॉर्ट-टर्म प्रोग्राम "Rejuvenation and Holistic Well-being through Yoga" का औपचारिक उद्घाटन सोमवार को भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस राष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों से आए लगभग 30 सहायक प्राध्यापक (Assistant Professors) प्रतिभागी के रूप में हिस्सा ले रहे हैं।
उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि एवं पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. शुक्ला ने योग के बहुआयामी महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि "आधुनिक समय में मानसिक तनाव, भागदौड़ और अनियमित जीवनशैली के बीच योग केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक वैज्ञानिक एवं संतुलित कला है। शिक्षकों का मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि एक ऊर्जावान और तनावमुक्त शिक्षक ही समाज और युवाओं को सही दिशा प्रदान कर सकता है। योग के माध्यम से ही हम सर्वांगीण स्वास्थ्य (Holistic Health) और आंतरिक शांति प्राप्त कर सकते हैं।"
कार्यक्रम की शुरुआत में मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर की निदेशिका प्रो. प्रीति के. सुरेश ने स्वागत वक्तव्य प्रस्तुत किया। उन्होंने अतिथियों का आत्मीय अभिनंदन करते हुए MMTTC के विजन तथा योग के वैश्विक महत्व के विषय में विस्तृत जानकारी दी। प्रो. प्रीति के. सुरेश ने कहा कि "योग हमारे भारतीय ऋषियों की वह अनमोल देन है, जो मन, मस्तिष्क और शरीर में पूर्ण सामंजस्य स्थापित करती है। यह 6 दिवसीय आवासीय कार्यक्रम शिक्षकों के कायाकल्प (Rejuvenation) तथा दैनिक जीवन में योग पद्धतियों को आत्मसात करने का एक अनुपम अवसर है।"
कोर्स कोऑर्डिनेटर प्रो. राजीव चौधरी ने योग के महत्व तथा इस 6 दिवसीय अल्पकालिक पाठ्यक्रम के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने आगामी 6 दिनों में होने वाले सत्रों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि "इस कार्यक्रम में प्रतिदिन चार तकनीकी सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें देश भर के ख्यातिलब्ध योग विशेषज्ञ, चिकित्सक और विषय-विद्वान व्याख्यान एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण देंगे। यह कार्यक्रम तनाव प्रबंधन, एकाग्रता में वृद्धि, योग के वैज्ञानिक आधार और दैनिक जीवन में योग के व्यावहारिक अनुप्रयोग पर पूरी तरह केंद्रित है।"
उद्घाटन समारोह के संपूर्ण मंच का गरिमामय एवं कुशल संचालन प्रो. बृजेन्द्र पाण्डेय द्वारा किया गया। कार्यक्रम के समापन अवसर पर औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन भी प्रो. बृजेन्द्र पाण्डेय (कोर्स कोऑर्डिनेटर, MMTTC) द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन, समस्त मंचासीन अतिथियों एवं देश भर के विभिन्न प्रांतों से पधारे प्रतिभागी प्राध्यापकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता से कर रहा साकार - मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
रायपुर : आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों को किफायती एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए जा रहे नवाचारों और प्रभावी कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है।
ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण तथा एएचपी (Affordable Housing in Partnership) के माध्यम से आवास उपलब्ध कराने की उत्कृष्ट कार्यप्रणाली (Best Practice) के लिए भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया है।
विश्व पर्यावास दिवस के अवसर पर आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार प्रदान किया। राज्य की ओर से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी-सह-राज्य मिशन संचालक, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) सुमित अग्रवाल ने सम्मान ग्रहण किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास की उपलब्धता बढ़ाने के साथ ही उन्हें बेहतर नागरिक सुविधाओं से युक्त सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा आवासीय परियोजनाओं की स्वीकृति, भूमि की उपलब्धता, निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता तक प्रत्येक स्तर पर प्रभावी निगरानी की जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय उपलब्धि के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, SUDA तथा नगरीय निकायों की पूरी टीम को बधाई दी है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में छत्तीसगढ़ की कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए भूमि आरक्षण तथा एएचपी के माध्यम से किफायती आवास उपलब्ध कराने की हमारी पहल को मिली यह पहचान राज्य सरकार की जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता और परिणामोन्मुख कार्यशैली का प्रमाण है।
‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता से कर रहा साकारः मुख्यमंत्री साय
रायपुर। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और निम्न आय वर्ग (LIG) के परिवारों को किफायती एवं सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किए जा रहे नवाचारों और प्रभावी कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान मिली है।
ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण तथा एएचपी (Affordable Housing in Partnership) के माध्यम से आवास उपलब्ध कराने की उत्कृष्ट कार्यप्रणाली (Best Practice) के लिए भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कृत किया है।
विश्व पर्यावास दिवस के अवसर पर आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित समारोह में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने छत्तीसगढ़ को यह पुरस्कार प्रदान किया। राज्य की ओर से नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा तथा राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी-सह-राज्य मिशन संचालक, प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) श्री सुमित अग्रवाल ने सम्मान ग्रहण किया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास की उपलब्धता बढ़ाने के साथ ही उन्हें बेहतर नागरिक सुविधाओं से युक्त सम्मानजनक जीवन प्रदान करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उप मुख्यमंत्री एवं नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा आवासीय परियोजनाओं की स्वीकृति, भूमि की उपलब्धता, निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता तक प्रत्येक स्तर पर प्रभावी निगरानी की जा रही है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस राष्ट्रीय उपलब्धि के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, SUDA तथा नगरीय निकायों की पूरी टीम को बधाई दी है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) में छत्तीसगढ़ की कार्यप्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। आर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए भूमि आरक्षण तथा एएचपी के माध्यम से किफायती आवास उपलब्ध कराने की हमारी पहल को मिली यह पहचान राज्य सरकार की जनकल्याण के प्रति प्रतिबद्धता और परिणामोन्मुख कार्यशैली का प्रमाण है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘सबके लिए आवास’ के संकल्प को छत्तीसगढ़ पूरी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ा रहा है। पक्का घर केवल चार दीवारें और छत नहीं, बल्कि एक परिवार की सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य का आधार है। राज्य सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी पात्र परिवार पक्के आवास से वंचित न रहे और जरूरतमंद परिवारों को मूलभूत सुविधाओं से युक्त बेहतर आवास उपलब्ध हो।
शहरी क्षेत्रों में गरीब और निम्न आय वर्ग के लिए आवास निर्माण की सबसे बड़ी चुनौतियों में भूमि की उपलब्धता प्रमुख रही है। छत्तीसगढ़ सरकार ने इस चुनौती के समाधान के लिए निजी कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस और एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण के प्रावधान को प्रभावी ढंग से लागू किया है।
इस व्यवस्था के परिणामस्वरूप राज्य में 25 हजार 413 आवासों के निर्माण के लिए बिना सरकारी खर्च के भूमि उपलब्ध हुई है। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के अंतर्गत 17 हजार 790 और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 2.0 के अंतर्गत 7 हजार 623 आवास शामिल हैं।
इस पहल की विशेषता यह है कि कमजोर एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए आवास केवल शहरों के बाहरी क्षेत्रों तक सीमित न रहकर नियोजित कॉलोनियों और विकसित शहरी क्षेत्रों का हिस्सा बन रहे हैं। इससे लाभार्थी परिवारों को सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा सहित अन्य आवश्यक शहरी सुविधाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत एएचपी मॉडल के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया है। भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ ही परियोजनाओं की स्वीकृति, निर्माण की प्रगति, गुणवत्ता और समयबद्ध पूर्णता की नियमित निगरानी की जा रही है।
उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने राष्ट्रीय सम्मान के लिए विभागीय अधिकारियों-कर्मचारियों और नगरीय निकायों की टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि शहरी गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को किफायती आवास उपलब्ध कराने की दिशा में छत्तीसगढ़ द्वारा किए जा रहे ठोस प्रयासों की पहचान है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ने शहरी गरीबों के आवास के लिए केवल योजना बनाने तक स्वयं को सीमित नहीं रखा, बल्कि जमीन की उपलब्धता से लेकर किफायती घर के निर्माण तक प्रभावी व्यवस्था विकसित की है। ईडब्ल्यूएस-एलआईजी वर्ग के लिए भूमि आरक्षण और एएचपी मॉडल को राष्ट्रीय सम्मान मिलना इसी कार्य का परिणाम है।
साव ने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि शहरों में जरूरतमंद परिवारों को तेजी से सम्मानजनक और किफायती आवास उपलब्ध हों। यह राष्ट्रीय सम्मान पूरी टीम को और बेहतर परिणाम देने के लिए प्रेरित करने के साथ हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ाता है।
राज्य सरकार की इस पहल से 25 हजार से अधिक शहरी गरीब एवं निम्न आय वर्ग के परिवारों के पक्के घर का सपना साकार होने की दिशा में आगे बढ़ा है। निजी कॉलोनियों में भूमि आरक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन ने एक ओर आवास निर्माण के लिए जमीन की उपलब्धता की बड़ी चुनौती का समाधान किया है, वहीं दूसरी ओर समाज के कमजोर वर्गों को विकसित शहरी क्षेत्रों और बेहतर नागरिक सुविधाओं से जोड़ने का रास्ता भी बनाया है।
रायपुर के इंडोर स्टेडियम में राज्य स्तरीय रोजगार मेला 7-8 अक्टूबर को
रायपुर। प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा 7 एवं 8 अक्टूबर 2026 को राजधानी रायपुर के बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में राज्य स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में और कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग मंत्री गुरु खुशवंत साहेब की अध्यक्षता में आयोजित इस रोजगार मेले में तकनीकी एवं गैर-तकनीकी क्षेत्रों के 8 हजार से अधिक रिक्त पदों पर युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे।
सचिव कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग ड. बसवराजू एस. ने बताया कि द्वारा रोजगार मेले में प्रदेश के वृहद उद्योगों एवं निजी प्रतिष्ठानों की अधिकाधिक सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है, ताकि विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध रिक्त पदों के लिए युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। इच्छुक युवा erojgar.cg.gov.in (ई-रोजगार पोर्टल) पर उपलब्ध रिक्तियों की जानकारी प्राप्त करने के साथ रोजगार मेले के लिए अपना पंजीयन भी करा सकते हैं। राज्य एवं जिला स्तरीय रोजगार मेलों में चयनित आवेदकों को कार्यक्रम के दौरान ऑफर लेटर प्रदान किए जाने की भी तैयारी की गई है।
इसके साथ ही रोजगार मेले में आने वाले युवाओं को विभिन्न प्रतिष्ठानों एवं उद्योगों में उपलब्ध रोजगार के अवसरों की जानकारी प्राप्त करने और अपनी योग्यता के अनुरूप रोजगार के लिए आवेदन करने का अवसर मिलेगा। रोजगार मेले में अधिकाधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों सहित विभिन्न माध्यमों से व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। संबंधित विभागों एवं जिलों को भी युवाओं तक रोजगार मेले की जानकारी पहुंचाने और उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
राज्य शासन द्वारा आयोजित यह रोजगार मेला प्रदेश के युवाओं को निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठित संस्थानों एवं उद्योगों से सीधे जुड़ने का अवसर प्रदान करेगा। शासन ने आयोजन को सफल बनाने तथा अधिकाधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज के तहत ‘कोडउत्सव 10.0’ का शुभारंभ
रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के ट्यूरिंग क्लब ऑफ प्रोग्रामर्स (टीसीपी) द्वारा आयोजित दो दिवसीय कोडिंग हैकाथॉन ‘कोडउत्सव 10.0’ का आज शुभारंभ हुआ। जिला प्रशासन रायपुर के ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत ‘सेवा फर्स्ट इनोवेशन चैलेंज’ के तहत आयोजित इस 28 घंटे की हैकाथॉन में देशभर के विभिन्न तकनीकी संस्थानों की 41 टीमें हिस्सा ले रही हैं। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में नवाचार, व्यावहारिक समस्या-समाधान, टीमवर्क और तकनीकी कौशल को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर के प्रभारी निदेशक डॉ. समीर बाजपेयी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। निको ग्रुप के प्रमुख श्री कुमार संभव नामदेव, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांकर पांडेय तथा कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप सिसोदिया विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। हैकाथॉन का आयोजन ट्यूरिंग क्लब ऑफ प्रोग्रामर्स के फैकल्टी इन-चार्ज डॉ. पवन कुमार मिश्रा के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।
इस अवसर पर डॉ. दिलीप सिसोदिया ने कहा कि ‘कोडउत्सव’ में प्रतिभागियों के सामने रखी जाने वाली चुनौतीपूर्ण समस्याएं उन्हें वास्तविक परिस्थितियों में समस्या-समाधान के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने का अवसर प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान तकनीकी और औद्योगिक परिदृश्य में कंपनियां केवल सैद्धांतिक ज्ञान के बजाय व्यावहारिक समस्या-समाधान क्षमता को भी महत्वपूर्ण मानती हैं।
डॉ. सुधांकर पांडेय ने कहा कि देश तकनीकी प्रगति के दौर से गुजर रहा है, ऐसे में अर्जित ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रतिभागियों से हैकाथॉन के अवसर का अधिकतम लाभ उठाने और अपने तकनीकी ज्ञान एवं कौशल का प्रभावी उपयोग करते हुए नवीन समाधान विकसित करने का आह्वान किया।
कुमार संभव नामदेव ने प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए पहले समस्या की वास्तविक प्रकृति और उसके प्रभाव को समझना आवश्यक है। उन्होंने प्रतिभागियों से ऐसी कार्यशील प्रोटोटाइप विकसित करने का आग्रह किया, जो न केवल तकनीकी रूप से प्रभावी हों, बल्कि वास्तविक जीवन में उपयोगी और व्यवहार्य भी हों। उन्होंने कहा कि हैकाथॉन विद्यार्थियों को अपनी तकनीकी क्षमताओं को वास्तविक समस्याओं के समाधान में लागू करने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है।
प्रभारी निदेशक डॉ. समीर बाजपेयी ने कहा कि कोडिंग विद्यार्थियों की तार्किक सोच और समस्या-समाधान क्षमता को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि किसी भी तकनीकी समाधान को विकसित करते समय उपयोगकर्ताओं की आवश्यकताओं, सुरक्षा और उपयोग में सहजता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने प्रभावी टीमवर्क, टीम सदस्यों के समन्वय और बेहतर संचार को सफल समाधान विकसित करने के लिए आवश्यक बताया।
‘कोडउत्सव 10.0’ में प्रतिभागी 28 घंटे तक लगातार विभिन्न वास्तविक एवं चुनौतीपूर्ण समस्याओं पर काम करते हुए नवीन तकनीकी समाधान और कार्यशील प्रोटोटाइप विकसित करेंगे। आयोजन में तकनीकी नवाचार, रचनात्मकता और सहयोगात्मक समस्या-समाधान पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
फिर घर-घर पहुंचेंगे BLO, मतदाता सूची पर बड़ा अपडेट
अब अनुपस्थित और स्थानांतरित पाए गए लोगों के घर BLO के दोबारा पहुंचने से मतदाता सूची को लेकर स्थिति और साफ होने की उम्मीद है। इस प्रक्रिया के जरिए यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में बने रहें और गलत या अपात्र नामों की पहचान हो सके।
मानसून की विदाई के बीच छत्तीसगढ़ में बढ़ी गर्मी, जल्द रातें होंगी और ठंडी
मौसम विभाग ने जानकारी दी कि अगले 2-3 दिनों में महाराष्ट्र मराठवाड़ा, विदर्भ के अधिकांश हिस्सों के साथ छत्तीसगढ़ के कुछ और हिस्सों से मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल होने की संभावना है. दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की वापसी की रेखा सुपौल, रांची, रायपुर, ब्रह्मपुरी, परभणी, बारामती, हरनाई से होकर गुजर रही है. वहीं पूर्वी मध्य प्रदेश से होते हुए दक्षिण बिहार से विदर्भ तक एक द्रोणिका बनी हुई है.
राष्ट्रीय अधिवेशन में सामाजिक एकजुटता और समाज हित पर हुआ मंथन
अखिल भारतीय तैलिक साहू महासभा की सामान्य सभा में साव ने वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों के साथ सहभागिता की। इस दौरान समाज के विकास और सामाजिक हित के विभिन्न विषयों पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई। साथ ही सामाजिक एकजुटता और समाज के उत्थान के लिए मिलकर कार्य करने पर विचार मंथन किया गया।
वैश्विक निवेश मानचित्र पर छत्तीसगढ़ की मजबूत पहचान बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राज्य में निवेश की नई संभावनाओं को विस्तार देने के उद्देश्य से आज सिंगापुर पहुंचे। सिंगापुर पहुंचने पर भारत के उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले ने मुख्यमंत्री साय का आत्मीय स्वागत किया। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा प्रथम SING फोरम 2026 में सहभागिता के लिए छत्तीसगढ़ को नमित किया गया है। सिंगापुर बिजनेस फेडरेशन द्वारा आयोजित इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ को अपनी उपलब्धियों, विकास की अपार संभावनाओं और निवेश के आकर्षक अवसरों को वैश्विक निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
मुख्यमंत्री साय SING फोरम 2026 में छत्तीसगढ़ की ओर से सहभागिता करेंगे। फोरम के दौरान आयोजित CEO राउंडटेबल में वे सिंगापुर के प्रमुख निवेशकों एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से विस्तृत चर्चा करेंगे। इस दौरान प्रदेश में निवेश की संभावनाओं और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों को प्रमुखता से रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार का दृढ़ प्रयास है कि नई औद्योगिक नीति, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन, सुदृढ़ अधोसंरचना, कुशल मानव संसाधन तथा उभरते क्षेत्रों में उपलब्ध संभावनाओं के माध्यम से छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख निवेश गंतव्यों में स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि वैश्विक निवेश मानचित्र पर छत्तीसगढ़ की मजबूत पहचान बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री की SING फोरम 2026 में सहभागिता वैश्विक निवेशकों के समक्ष छत्तीसगढ़ की विकास संभावनाओं और निवेश अवसरों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण अवसर होगी।
बातें बीते समय की..... फोटोकॉपी मशीन आने से पहले लोग सर्टिफिकेट का डुप्लीकेट कैसे बनवाते थे ?
गोकुल सोनी वरिष्ठ छायाकार
डेस्क। आज किसी दस्तावेज की फोटोकॉपी चाहिए तो बस दुकान पर जाइए, मूल कागज दुकानदार को दीजिए और कुछ ही सेकंड में उसकी कई प्रतियां आपके हाथ में होती हैं। न कोई झंझट, न ज्यादा इंतजार। लेकिन जरा सोचिए, जब फोटोकॉपी मशीन ही नहीं थी, तब लोग अपने जरूरी कागजों की दूसरी प्रति कैसे बनवाते होंगे?
आज की नई पीढ़ी के लिए शायद यह बात किसी किस्से जैसी लगे, लेकिन 70-80 के दशक तक मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट या किसी दूसरे जरूरी दस्तावेज की प्रतिलिपि बनवाना अपने आप में एक पूरा काम हुआ करता था। आइए, आज उसी दौर की एक छोटी-सी यात्रा करते हैं।
जब फोटोकॉपी मशीन का नहीं था नामोनिशान
70-80 के दशक में यदि स्कूल में एडमिशन लेना हो, नौकरी के लिए आवेदन करना हो या किसी सरकारी काम के लिए मार्कशीट अथवा ट्रांसफर सर्टिफिकेट की दूसरी प्रति जमा करनी हो, तो आज की तरह सीधे फोटोकॉपी नहीं करवाई जा सकती थी। क्योंकि तब यह मशीन थी ही नहीं। शहरों में स्टेशनरी की दुकानों पर मार्कशीट और ट्रांसफर सर्टिफिकेट के कोरे डुप्लीकेट फार्म मिला करते थे। इन फार्मों पर ऊपर “डुप्लीकेट” लिखा रहता था। अपनी असली मार्कशीट सामने रखकर उसमें लिखे अंक, स्कूल का नाम, जिला और दूसरी तमाम जानकारियां उस फार्म में सावधानी से लिखनी पड़ती थीं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती थी।
डुप्लीकेट पर अधिकारी की मुहर जरूरी
फार्म भरने के बाद उसे किसी सरकारी दफ्तर के प्रथम श्रेणी अधिकारी यानी राजपत्रित अधिकारी—Gazetted Officer के पास ले जाना पड़ता था। दफ्तर में अधिकारी या उनके बाबू मूल दस्तावेज और तैयार किए गए डुप्लीकेट का मिलान करते थे। सब कुछ सही पाए जाने पर अधिकारी उस प्रतिलिपि पर अपने हस्ताक्षर करते और सरकारी मुहर लगाते। और हां, उस पर “सत्यप्रतिलिपि” भी लिखा जाता था। यानी आज जिस काम के लिए हम चंद सेकंड में फोटोकॉपी करवा लेते हैं, उसके लिए तब कागज तैयार करने से लेकर अधिकारी के हस्ताक्षर और मुहर तक कई चरणों से गुजरना पड़ता था।
शहर में फिर भी सुविधा थी… गांव में क्या होता था ?
अब जरा गांव की कल्पना कीजिए। शहर में तो स्टेशनरी की दुकान से डुप्लीकेट फार्म मिल जाता था, लेकिन हमारे जैसे गांव-देहात में रहने वालों के लिए वह भी आसान नहीं था। वहां कोई तैयार डुप्लीकेट फार्म नहीं मिलता था। इसलिए लोग अपनी मार्कशीट या ट्रांसफर सर्टिफिकेट को देखकर पेन या पेंसिल से हूबहू उसकी दूसरी प्रति तैयार करते थे।
कहां कितने अंक हैं, स्कूल का नाम क्या है, रोल नंबर क्या है, जिला कौन-सा है, हर जानकारी को बहुत सावधानी से उतारना पड़ता था। फिर इस तैयार किए गए कागज पर गांव के स्कूल के हेडमास्टर, प्राचार्य, ग्रामसेवक या किसी अधिकृत अधिकारी से हस्ताक्षर करवाए जाते थे। तब जाकर वह डुप्लीकेट दस्तावेज किसी काम लायक बनता था। आज की पीढ़ी को यह सब सुनकर शायद विश्वास ही न हो कि एक कागज की दूसरी प्रति तैयार करने के लिए भी इतना कुछ करना पड़ता था।
फिर आया फोटोकॉपी मशीन का जमाना
इसके बाद 80 और 90 के दशक में धीरे-धीरे फोटोकॉपी मशीनों का आगमन हुआ और कागज की प्रतिलिपि बनाने का तरीका ही बदल गया। लेकिन उस समय की फोटोकॉपी मशीनें आज जैसी छोटी और आसान नहीं थीं। वे इतनी बड़ी हुआ करती थीं कि उन्हें देखकर लगता था जैसे कमरे में कोई छोटी-मोटी मशीनरी खड़ी कर दी गई हो। कई मशीनें लगभग ऑटो, मेटाडोर या छोटी कार के आकार की लगती थीं और उनके लिए बाकायदा एक पूरा कमरा चाहिए होता था।
उस जमाने की फोटोकॉपी भी एक अजूबा थी
उन शुरुआती मशीनों की कार्यप्रणाली आज की मशीनों से बिल्कुल अलग और काफी जटिल थी। लकड़ी और एल्युमिनियम के फ्रेम वाली मशीन के अंदर एक चमकदार प्लेट होती थी। मूल दस्तावेज को मशीन में रखा जाता और उसके ऊपर से तेज रोशनी गुजरती। इस प्रक्रिया के बाद चमकदार प्लेट पर मूल दस्तावेज की आकृति उभरती थी। फिर उस प्लेट पर काले रंग का विशेष पाउडर डाला जाता। यह पाउडर दस्तावेज की बनी आकृति पर चिपक जाता, जबकि अतिरिक्त पाउडर नीचे ट्रे में गिर जाता। इसके बाद उस प्लेट पर कोरा कागज रखकर हल्का दबाव दिया जाता और दस्तावेज की आकृति कागज पर उभर आती। यानी एक फोटोकॉपी तैयार और अगर दस प्रतियां चाहिएं, तो यही प्रक्रिया बार-बार दोहरानी पड़ती थी। आज हम एक बटन दबाकर दस, बीस या पचास प्रतियां निकाल लेते हैं। उस समय एक-एक प्रति तैयार करना भी अपने आप में मेहनत का काम था।
“ यहां फोटो कॉपी होती है…”
उस दौर में फोटो कॉपी की दुकान पहचानने का भी अपना मजा था। दुकानों के सामने बड़े-बड़े बोर्ड लगे होते थे—
“यहां फोटोकॉपी की जाती है, कहीं लिखा होता था—“यहां जिरॉक्स होता है
कहीं “झीरॉक्स” लिखा मिलता था और कहीं सिर्फ “XERO”
हम जैसे गांव-देहात से आने वाले लोगों के लिए तो यह भी एक पहेली थी कि आखिर जिरॉक्स, झीरॉक्स और XERO में फर्क क्या है और इनमें से फोटोकॉपी कौन करता है ? बाद में समझ आया कि “Xerox” एक ब्रांड नाम था, लेकिन आम बोलचाल में फोटोकॉपी के लिए ही “जिरॉक्स” शब्द इस्तेमाल होने लगा।
रायपुर की शांति फोटोकॉपी
उस जमाने में रायपुर के तात्यापारा चौक में “शांति फोटोकॉपी” नाम की एक दुकान हुआ करती थी। वहां सामान्य A4 कागज से भी बड़े आकार की फोटोकॉपी हुआ करती थी। काम इतना ज्यादा था कि दिन-रात मशीन चलती रहती थी। सरकारी दफ्तरों के दस्तावेजों की फोटोकॉपी का काम भी वहां आया करता था। उस दौर में ऐसी दुकानें सिर्फ दुकान नहीं थीं, बल्कि धीरे-धीरे लोगों की जरूरत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही थीं।
फिर छोटी होती गईं मशीनें
समय के साथ फोटोकॉपी मशीनों का आकार छोटा होता गया। बड़ी-बड़ी मशीनों की जगह टेबल पर रखी जाने वाली मशीनें आ गयी। फिर तकनीक और आगे बढ़ी और छोटी, तेज तथा पोर्टेबल मशीनों का दौर शुरू हुआ। आज स्थिति यह है कि आप दुकानदार को एक हाथ से अपना कागज देते हैं और वह दूसरे हाथ से उसकी फोटोकॉपी करके आपको वापस कर देता है। कुछ सेकंड में काम खत्म। जिस काम के लिए कभी पूरा दिन लग सकता था, वह आज पलक झपकते हो जाता है।
एक मशीन ने सिर्फ कागज नहीं बदले, हमारी जिंदगी बदल दी
फोटोकॉपी मशीन की कहानी सिर्फ एक मशीन के विकसित होने की कहानी नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है जिसमें तकनीक ने हमारे रोजमर्रा के जीवन को धीरे-धीरे आसान बनाया। एक समय था जब किसी दस्तावेज की दूसरी प्रति तैयार करने के लिए उसे देखकर हाथ से लिखना पड़ता था, अधिकारी से सत्यापित करवाना पड़ता था और फिर उसे लेकर दफ्तर-दफ्तर जाना पड़ता था। फिर फोटोकॉपी मशीन आयी और वही काम आसान हो गया। आज तो मोबाइल से दस्तावेज की फोटो खींचकर, उसे स्कैन करके, पीडीएफ बनाकर और व्हाट्सऐप या ई-मेल से भेजकर हम कुछ ही मिनटों में वह काम कर लेते हैं, जिसके लिए कभी लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। यानी तकनीक सिर्फ मशीनें छोटी नहीं करती, वह हमारे इंतजार को भी छोटा करती जाती है।
आपको फोटोकॉपी का पहला अनुभव कब हुआ ?
तो साथियो, यह थी फोटोकॉपी मशीन की कहानी। हाथ से तैयार की जाने वाली डुप्लीकेट मार्कशीट से लेकर सेकंडों में निकलने वाली डिजिटल फोटोकॉपी तक की कहानी। आज की पीढ़ी के लिए शायद यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि कभी एक कागज की दूसरी प्रति बनाने के लिए इतना समय, इतनी मेहनत और इतनी औपचारिकता करनी पड़ती थी। लेकिन हममें से जिन लोगों ने वह दौर देखा है, उनके लिए यह सिर्फ इतिहास नहीं, अपनी जिंदगी का एक हिस्सा है।
क्या आपको याद है कि आपने पहली बार फोटोकॉपी कब करवाई थी ? क्या आपने कभी हाथ से डुप्लीकेट मार्कशीट या ट्रांसफर सर्टिफिकेट बनाया है ? क्या कभी किसी गजेटेड ऑफिसर से उस पर हस्ताक्षर और मुहर लगवाई है ? क्योंकि पुरानी चीजों की सबसे खूबसूरत बात यही है वे सिर्फ बीते हुए समय की कहानी नहीं सुनातीं, वे हमें यह भी याद दिलाती हैं कि हम कितनी दूर आ चुके हैं।
साभारः (इंटरनेट मीडिया)
अवैध परिवहन का खुलासा, 7 ड्रम डीजल के साथ आरोपी गिरफ्तार
उन्नत टमाटर की खेती से शाहिद की मेहनत लाई रंग, 2 एकड़ में कमाए 1.20 लाख रुपए
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों को परंपरागत खेती के साथ उद्यानिकी एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के प्रयासों के बीच शाहिद जमा खान जैसे किसान उन्नत तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उनकी सफलता बताती है कि वैज्ञानिक कृषि तकनीक, बेहतर फसल प्रबंधन और समय पर मिलने वाले तकनीकी मार्गदर्शन का समुचित उपयोग खेती को अधिक लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। टमाटर की उन्नत खेती से मिली सफलता ने शाहिद जमा खान को उद्यानिकी फसलों के माध्यम से अपनी आय को और बेहतर करने के लिए प्रोत्साहित किया है। उनकी यह पहल क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी आधुनिक एवं व्यावसायिक खेती की संभावनाओं को सामने रखती है।
रविवि से सेवानिवृत्ति पर विवि अधीक्षक अमरनाथ पाठ को विदाई
रायपुर। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के अधीक्षक अमरनाथ पाठक को सेवानिवृत्ति पर विदाई दी गई। वे 30 सितंबर को विवि के वित्त विभाग से रिटायर हुए। इस अवसर पर विवि के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उनके लिए विदाई समारोह का आयोजन किया। बिदाई समारोह में अमरनाथ पाठक की पत्नी प्रतिभा पाठक, पुत्र अभिषेक पाठक, पुत्रवधु अंजली पाठक और अनुज पाठक शामिल हुए। उपस्थित कर्मचारियों और वित्त विभाग के द्वारा अमरनाथ पाठक को बुके, शाल, श्रीफल, मोमेंटों आदि देकर उन्हें बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। बिदाई समारोह का संचालन वित्त विभाग की सेक्शन आफिसर दुलारी ठाकुर ने किया।
छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालयीन पेंशनर्स कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रदीप मिश्र ने बताया कि अमरनाथ पाठक के विदाई समारोह में पेंशनर्स कल्याण संघ के पदाधिकारी भी शामिल हुए। संघ ने उन्हें सम्मान किय और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। इस अवसर पर संघ के सचिव शिरीष त्रिवेदी, कुलसचिव डा शैलेंद्र पटेल, वित्त नियंत्रक अखिलेश्वर तंवर, सेक्शन आफिसर दुलारी ठाकुर, डा राजीव चौधरी, प्रभात झा, गिरीश सेन, डा अशोक देवांगन, डा अर्चना शर्मा, अलका लकड़ा, श्याम सोनेकर, विवेक शर्मा, सहायक कुलसचिव खेमन सिंह कश्यप ,डा नरेंद्र वर्मा उप कुलसचिव, डा नितेश मिश्रा, डा भेखलाल सोनेकर, अनुसूचित जाति जनजाति परिषद के अध्यक्ष जीवन लाल सिदार, दीपेंद्र दुबे, माया चौधरी, थानेश्वेर इंगले, यज्ञवल साहू, पुष्कर दीवान, नरेश बंजारे, आदि उपस्थित थे।
संगीत विवि से सेवानिवृत्ति पर विभाष मालवीय को भावभिनी विदाई
रायपुर। इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के कई विभागों में अपनी सेवाएं देने के बाद विवि के सामान्य प्रशासन विभाग से विभाष मालवीय सेवानिवृत्त हुए। मालवीय को सेवानिवृत्ति पर विवि की कुलपति डा. लवली शर्मा ने उनका सम्मान कर उन्हें विदाई दी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालयीन पेंशनर्स कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रदीप मिश्रा, सचिव शिरीष त्रिवेदी, संघ के पूर्व सचिव तीर्थ राम यादव और सक्रिय सदस्य अलख राम साहू विशेष रुप से उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालयीन पेंशनर्स कल्याण संघ के अध्यक्ष प्रदीप मिश्रा ने बताया कि संगीत विवि के सेवानिवृत्ति पर कुलपति ने उनका अभिनंदन किया। इस दौरान विभाष मालवीय ने अपनी इनते वर्षों की सेवा और विवि परिवार के सदभाव को लेकर विवि प्रबंधन का शुक्रिया कहा। कुलपित डा. लवली शर्मा ने कहा कि सेवानिवृत के बाद जीवन के एक नए पक्ष का प्रारंभ होता है। आज से आपकी दिनचर्या बदल जाएगा। आपने विवि द्वारा आवंटित कार्यों और दायित्वों का पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निर्वहन किया, यह प्रशंसनीय है।
इस अवसर पर खैरागढ़ विवि के सेवानिवृत्त कर्मचारियों में सुरेश दुबे संगतकार, विवेक देशमुख संगतकार , प्रखर शरण सिंह अध्यक्ष गैर शिक्षक कर्मचारी संघ, राजू कश्यप अध्यक्ष कर्मचारी कल्याण संघ, चन्द्र प्रकाश गायकवाड़ कार्यालय अधीक्षक, नवीन महोबे सहा ग्रेड-3, दीपक जतेरे सहा ग्रेड-3, मुकेश यादव सहा ग्रेड-3, ओम हिरवानी स्टेनो आदि उपस्थित थे।