रायपुर
सुशासन तिहार में विधायक के सामने जनता से अशिष्ट व्यवहार करने वाले दुर्ग जनपद सीईओ निलंबित
रायपुर। सुशासन तिहार 2026 के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में आम जनता से अशिष्ट व्यवहार और कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत दुर्ग के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दुर्ग संभागायुक्त को दिए थे। मुख्यमंत्री साय के निर्देशों के परिपालन में कमिश्नर दुर्ग ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत दुर्ग, रूपेश कुमार पाण्डेय को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
संभागायुक्त दुर्ग द्वारा जारी निलंबन आदेश में उल्लेखित है कि कलेक्टर दुर्ग से प्राप्त प्रस्ताव एवं ग्राम थनौद में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में पाण्डेय द्वारा आम जनता से अशिष्ट व्यवहार संबंधी वीडियो क्लीप के अवलोकन से प्रथम दृष्टया यह स्पष्ट हुआ कि उन्होंने शासन द्वारा आयोजित सुशासन तिहार एवं शिविर में कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही तथा अशिष्टतापूर्ण व्यवहार किया। यह आचरण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत है। इस संबंध में आयुक्त दुर्ग द्वारा पाण्डेय को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, किंतु उनके द्वारा प्रस्तुत जवाब समाधानकारक नहीं पाया गया।
छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के तहत प्रत्येक शासकीय सेवक को सदैव पूर्ण रूप से सत्यनिष्ठ एवं कर्तव्यपरायण रहना है तथा ऐसा कोई कार्य नहीं करना है, जो शासकीय सेवक के लिए अशोभनीय हो। नियम 3-क के खण्ड (क) के अनुसार, कोई भी शासकीय सेवक अपने पदीय कृत्यों के पालन में अशिष्टता से कार्य नहीं करेगा। लोकतांत्रिक व्यवस्था में शासन तंत्र आम नागरिकों के प्रति उत्तरदायी होता है, इसलिए प्रत्येक लोकसेवक द्वारा आम नागरिकों से शिष्ट व्यवहार को आचरण संहिता का महत्वपूर्ण घटक माना गया है। तदनुसार रूपेश कुमार पाण्डेय को कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही एवं कदाचरण के आरोप में तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।
राष्ट्रीय स्तर का "खेत बचाओ अभियान" आज से हो गया शुरू
रायपुर। भारत सरकार के केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने वैज्ञानिक समुदाय से बड़े पैमाने पर प्रदर्शनों और प्रभावी विस्तार तंत्र के माध्यम से नई विकसित कृषि प्रौद्योगिकियों को खेतों तक स्थानांतरित करने के प्रयासों को तेज करने का आग्रह किया है।
नवा रायपुर के सर्किट हाउस में आयोजित एक बैठक के दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद –राष्ट्रीय जैविक स्ट्रैस प्रबंधन संस्थान की गतिविधियों और उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए, ठाकुर ने इस बात पर जोर दिया कि जलवायु-अनुकूल खेती को मजबूत करने और आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक सफलताओं को जमीनी स्तर पर ठोस लाभों में बदलना चाहिए। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान, आईसीएआर-एनआईबीएसएम के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने संस्थान के चल रहे विशिष्ट अनुसंधान कार्यक्रमों और केंद्र सरकार के एससीएसपी (SCSP), टीएसपी (TSP) और एनईएच (NEH) कार्यक्रमों के तहत संचालित लक्षित सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण पहलों का एक व्यापक अवलोकन प्रस्तुत किया।
ठाकुर ने 1 जून 2026 से शुरू होने वाले आगामी राष्ट्रीय अभियान "खेत बचाओ अभियान" का भी विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने वैज्ञानिकों और मुख्य अधिकारियों को जमीन पर किसान समुदाय के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने और देश भर में इसका व्यापक और सफल कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए अभियान के बारे में व्यापक जागरूकता पैदा करने के लिए प्रेरित किया।
वैज्ञानिकों के साथ आयोजित संवादात्मक सत्र मुख्य रूप से उभरती कृषि चुनौतियों से निपटने और सतत कृषि प्रणालियों को बढ़ावा देने पर केंद्रित था। निदेशक डॉ. पी.के. राय ने मंत्री महोदय को संस्थान के वर्तमान तकनीकी हस्तक्षेपों, क्षमता निर्माण, कौशल विकास व्यवस्थाओं और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए तैयार किए गए महत्वपूर्ण कृषि इनपुट और उपकरणों के संगठित वितरण के बारे में जानकारी दी।
आईसीएआर-एनआईबीएसएम के प्रभावशाली अनुसंधान और विस्तार पोर्टफोलियो की सराहना करते हुए, श्री रामनाथ ठाकुर ने रेखांकित किया कि फसलों में जैविक तनावों का मुकाबला करने और क्षेत्र के किसान समुदायों के लिए स्थायी कृषि स्थिरता का निर्माण करने के लिए स्थानीय और जमीनी स्तर के हस्तक्षेप बेहद अनिवार्य हैं।
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एनआईटी रायपुर में नवाचार, अनुसंधान, स्टार्टअप की नई परियोजनाओं का शुभारंभ
रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में गुरुवार को शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार, उद्यमिता तथा सतत विकास से जुड़ी सात महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं के उद्घाटन एवं शिलान्यास समारोह आयोजित किए गए। इन परियोजनाओं के माध्यम से संस्थान की शैक्षणिक, अनुसंधान एवं नवाचार संबंधी क्षमताओं को नई मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे ने की। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव, डीन, प्राध्यापकगण, कर्मचारी, छात्र, पूर्व छात्र एवं अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
समारोह में चार नई सुविधाओं का उद्घाटन तथा तीन प्रमुख परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 तथा ‘विकसित भारत-2047’ की परिकल्पना के अनुरूप उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
कार्यक्रम के दौरान गोल्डन टॉवर की दूसरी मंजिल पर लगभग 5,500 वर्गफुट क्षेत्र में विकसित एनआईटी रायपुर एफआईई इनक्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन किया गया। लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से स्थापित यह छत्तीसगढ़ का पहला विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) समर्थित टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर है। वर्तमान में यह केंद्र क्लीन-टेक, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी तथा बहुविषयक तकनीकी एकीकरण से जुड़े 50 से अधिक स्टार्टअप्स को सहयोग प्रदान कर रहा है।
इसके साथ ही गोल्डन टॉवर के सामने सार्वजनिक इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन का शुभारंभ भी किया गया। विद्युत मंत्रालय की रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल योजना के अंतर्गत स्थापित इस सुविधा में 60 किलोवाट क्षमता तक के दो एसी/डीसी चार्जर लगाए गए हैं। यह परियोजना स्वच्छ एवं पर्यावरण-अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।
समारोह में गोल्डन टॉवर के समीप उच्च-वोल्टेज इम्पल्स परीक्षण प्रयोगशाला की आधारशिला भी रखी गई। लगभग 9.12 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस जी+2 परियोजना के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीटीसीएल) द्वारा एक करोड़ रुपये की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) सहायता प्रदान की गई है। प्रस्तावित प्रयोगशाला विद्युत प्रणाली अभियांत्रिकी एवं उच्च-वोल्टेज अनुप्रयोगों में अनुसंधान, परीक्षण एवं प्रशिक्षण को नई दिशा देगी। परियोजना के अगले 15 माह में पूर्ण होने की संभावना है।
संस्थान के प्लेटिनम जुबली वर्ष के उपलक्ष्य में प्लेटिनम अतिथि गृह का भी शिलान्यास किया गया। लगभग 13.27 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह जी+5 भवन 20 सुसज्जित कमरों, सम्मेलन कक्ष तथा आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा। इससे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय अतिथियों, विशेषज्ञों तथा गणमान्य व्यक्तियों के स्वागत एवं आवास की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। परियोजना के 18 माह में पूर्ण होने की संभावना है।
इसके अतिरिक्त लगभग 25.57 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नए जी+6 अकादमिक एनेक्स-I भवन का उद्घाटन किया गया। लगभग 4,800 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र वाले इस भवन में 35 कक्ष बनाए गए हैं, जिनमें विभिन्न विभागों की कक्षाएँ एवं एनआईटीआरआर-एफआईई इनक्यूबेशन सेंटर संचालित होंगे।
समारोह के दौरान अकादमिक एनेक्स-I के पीछे प्रस्तावित मेकर्स्पेस एवं अनुसंधान सुविधा भवन की आधारशिला भी रखी गई। लगभग 16.91 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस जी+2 भवन में मेकर्स्पेस एवं टिंकरिंग प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी, जिससे नवाचार एवं प्रोटोटाइप विकास को प्रोत्साहन मिलेगा। इसके साथ ही उन्नत अनुसंधान कार्यों के लिए समर्पित अनुसंधान परियोजना ब्लॉक भी विकसित किया जाएगा। यह परियोजना अगले 12 माह में पूर्ण होने की संभावना है।
कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण आकर्षण केंद्रीय पुस्तकालय में भारतीय ज्ञान परंपरा अनुभाग का शुभारंभ रहा। भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र द्वारा स्थापित इस पुस्तकालय में भारतीय दर्शन, विज्ञान, साहित्य, गणित, आयुर्वेद, वास्तु, योग एवं अन्य पारंपरिक ज्ञान-विषयों से संबंधित पुस्तकें, पांडुलिपियाँ, जर्नल एवं संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराई गई हैं। इसका उद्देश्य पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा एवं अनुसंधान से जोड़ना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण एवं अकादमिक अध्ययन को प्रोत्साहित करना है।
इस अवसर पर बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हावरे ने संस्थान की योजना एवं विकास टीम की समयबद्ध कार्यान्वयन क्षमता की सराहना करते हुए कहा कि एनआईटी रायपुर नवाचार, समावेशिता, सतत विकास एवं वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर आधारित आधुनिक परिसर के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।
संस्थान के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव ने कहा कि स्टार्टअप इनक्यूबेशन, सतत परिवहन, उच्च-वोल्टेज अनुसंधान, अतिथि-सत्कार, शैक्षणिक अधोसंरचना, मेकरस्पेस आधारित नवाचार तथा भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी नई सुविधाएँ संस्थान की दूरदर्शी एवं समग्र विकास नीति को प्रतिबिंबित करती हैं। उन्होंने इन परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन में योगदान देने वाले सभी हितधारकों को बधाई दी।
प्रदेश के स्वामी आत्मानंद स्कूलों की संविदा भर्ती पर लगी रोक
रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में चल रही संविदा भर्ती प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया गया है। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी आदेश में सभी कलेक्टरों एवं स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय समिति के अध्यक्षों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं।
जारी आदेश के अनुसार विद्यालयों में शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों पर वर्तमान में चल रही संविदा भर्ती की प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है। अब इन पदों पर भर्ती केंद्रीयकृत परीक्षा के माध्यम से की जाएगी, जिसका आयोजन लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा कराया जाएगा।
संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि केंद्रीयकृत परीक्षा के बाद चयनित अभ्यर्थियों की सूची जिलों को भेजी जाएगी और उसी आधार पर नियुक्तियां की जाएंगी। परीक्षा संबंधी विस्तृत दिशा-निर्देश अलग से जारी किए जाएंगे। इस आदेश के बाद प्रदेशभर में स्वामी आत्मानंद विद्यालयों की जारी भर्ती प्रक्रिया फिलहाल थम गई है।
छत्तीसगढ़ में नौतपा का कहर जारी, प्रदेश के मध्य क्षेत्र में ऑरेंज अलर्ट जारी
रायपुर। छत्तीसगढ़ में नौतपा के छठवें दिन भी भीषण गर्मी का असर देखने को मिला। मौसम विभाग ने मध्य छत्तीसगढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। राजधानी रायपुर में शनिवार का पारा 43 डिग्री तक दोपहर में दर्ज किया गया। हालांकि शाम के समय हल्की बारिश से कुछ राहत मिलने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है। मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश के मध्य हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी अधिक रहने की संभावना है। स्थिति को देखते हुए मध्य छत्तीसगढ़ के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार गर्म हवाएं लगातार सक्रिय बनी हुई हैं, जिससे दिन के समय तेज लू चलने की संभावना है। दोपहर के समय घर से बाहर निकलना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। मौसम विभाग ने नागरिकों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, धूप में निकलने से बचने और हीटवेव से सावधानी बरतने की सलाह दी है। बढ़ती गर्मी का असर आम जनजीवन पर साफ दिखाई दे रहा है। दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आ रही हैं और लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं। भीषण गर्मी के कारण बिजली और पानी की मांग भी तेजी से बढ़ गई है।
राजधानी रायपुर में भी गर्मी से राहत मिलने के आसार फिलहाल कम दिखाई दे रहे हैं। मौसम विभाग के अनुसार रायपुर में आज अधिकतम तापमान 43.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हालांकि शाम के समय हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है, जिससे तापमान में मामूली गिरावट आ सकती है और लोगों को कुछ राहत मिल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ने के कारण तापमान में तेजी से वृद्धि होती है। इस दौरान लू लगने का खतरा सबसे अधिक रहता है। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। डॉक्टरों का कहना है कि तेज धूप में लंबे समय तक रहने से डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
प्रशासन भी लगातार लोगों को सतर्क रहने की अपील कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए विशेष तैयारी रखने के निर्देश दिए हैं। वहीं नगर निगम और स्थानीय निकायों को सार्वजनिक स्थानों पर पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।
तीजन बाई के स्वास्थ्य को लेकर साय सरकार सजग, परिजनों को हर संभव सहायता का भरोसा
उनकी उपलब्धियां और कला यात्रा देशभर के कलाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने लोककला को जिस ऊंचाई तक पहुंचाया है, वह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। मंत्री अग्रवाल ने ईश्वर से उनके शीघ्र स्वास्थ्य लाभ और पूर्ण स्वस्थ होने की कामना की और कहा कि पूरा छत्तीसगढ़ आज उनकी कुशलता के लिए प्रार्थना कर रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि अपनी अदम्य इच्छाशक्ति और चिकित्सकों के प्रयासों से श्रीमती तीजन बाई जल्द स्वस्थ होकर पुनः अपनी कला के माध्यम से लोगों को प्रेरित करेंगी।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के कर्मचारियों को मिली बड़ी सौगात, मिलेगा 6 लाख रुपये का फ्री लाइफ इंश्योरेंश
रायपुर। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कार्यरत अधिकारियों एवं कर्मचारियों के हित में स्वास्थ्य विभाग ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शासन द्वारा बैंक ऑफ इंडिया के साथ एम.ओ.यू. (MOU) निष्पादित किए जाने की अनुमति प्रदान की गई है, जिसके तहत एनएचएम के उन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को, जिनका वेतन खाता बैंक ऑफ इंडिया में संचालित है, ₹6 लाख का निःशुल्क लाइफ टर्म इंश्योरेंस कवर उपलब्ध कराया जाएगा।
यह बीमा कवर सामान्य मृत्यु की स्थिति में प्रदान किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था के लिए राज्य सरकार या राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा। साथ ही, बैंक ऑफ इंडिया द्वारा प्रस्तावित समस्त सुविधाएं कर्मचारियों को उपलब्ध कराई जाएंगी।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा है कि इस पहल से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के हजारों अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा का अतिरिक्त लाभ मिलेगा तथा उनके परिवारों को आर्थिक संबल प्राप्त होगा।
आनंद यात्री: डॉ. रामचंद्र और डॉ. सुनीता गोडबोले ने वनवासियों की सेवा में समर्पित कर दिया जीवन
लेखकः अजय बाविस्कर
अपनी शादी के ठीक दस दिन बाद वर्ष 1990 में महाराष्ट्र के एक नवविवाहित जोड़े डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले ने वनवासी कल्याण आश्रम के ज़रिए बस्तर की यात्रा पर निकल पड़े। यह यात्रा सिर्फ भौगोलिक नहीं थी, यह एक लक्ष्य मानव सेवा और मानवता की निरंतर साधना की यात्रा थी।
उस समय बस्तर घने जंगलों, दुर्गम रास्तों और नक्सलवाद के साये में जी रहे अनगिनत आदिवासी भाईयों की दुनिया थी। न आने-जाने का कोई साधन था, न बिजली, न संचार व्यवस्था; लेकिन इन कमियों के अंधेरे में भी, उन दोनों के दिलों में सेवा की एक अखंड ज्योति जल रही थी। उन्होंने अपनी आँखों से आदिवासी समुदाय के उत्थान और उनकी स्वास्थ्य सेवा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित करने का सपना देखा था।
जवानी की उम्मीद में ज़्यादातर लोग अपने ही सपनों का पिछा करते हैं; लेकिन इस जोड़े ने अपनी खुशियों को कुर्बान करके दूसरों की ज़िंदगी में खुशियाँ लाने का रास्ता चुना। इसीलिए उनकी ज़िंदगी का सफ़र आम नहीं बल्कि बहुत खास है।
आज पीछे मुड़कर देखें तो डॉ. रामचंद्र गोडबोले बहुत ही आसानी से कहते हैं, “बस्तर में मेरा रहना हमारी खुशियों का सफ़र है।” हर किसी की खुशी की अलग-अलग परिभाषा होती है; लेकिन इस जोड़े ने अपनी ज़िंदगी से दिखा दिया है कि असली खुशी दूसरों का दर्द कम करने, उनकी आंखों में उम्मीद की किरण बनाए रखने और उनकी ज़िंदगी में मुस्कान लाने में मिलने वाली खुशी है।
रायपुर के महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने इस जोड़े को “आज के ज़माने के सावरकर” की जो उपमा दी है, वह सच लगती है। क्योंकि अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों के लिए मुश्किल रास्ता चुनना, मुश्किलों को गले लगाना और इन सबके बीच सेवा का झंडा ऊँचा रखना, एक ऐसा काम है जिसके लिए बहुत हिम्मत और बड़ा दिल चाहिए।
जब डॉ. गोडबोले डाक्टरी की पढ़ाई कर रहे थे, तो उन्हें यूरोप के एक महान मानवतावादी डॉक्टर डॉ. अल्बर्ट श्वाइट्ज़र के बारे में एक संडे सप्लीमेंट मिला। उस महान व्यक्ति की जीवन कहानी, जिसने 32 साल की उम्र में अपनी मेडिकल की पढ़ाई पूरी की और अपनी पूरी ज़िंदगी अफ्रीका के आदिवासी लोगों की सेवा में लगा दी, यह कहानी रामचंद्र गोडबाले के दिल को छू गई। वहीं से उनके दिल में आदिवासी इलाकों में जाकर काम करने का पक्का इरादा हो गया।
बीएएमएस की डिग्री पूरी करने के बाद, उन्होंने वनवासी कल्याण आश्रम से संपर्क किया और सेवा के सफर पर निकल पड़े। उन्हें सुनीता गोडबोले का साथ मिला। ‘मास्टर ऑफ़ सोशल वर्क’ की पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री पूरी करने के बाद, वह भी वनवासी कल्याण आश्रम के साथ काम कर रही थीं। एक ही लक्ष्य, एक ही सोच और एक ही एहसास वाले इन दोनों लोगों की ज़िंदगी एक साथ आई और सेवा की अखंड ज्योति जल उठी।
शुरुआती साल बहुत मुश्किल थे। वहां के खान-पान में ढलते-ढलते दोनों की हालत बिगड़ गई; लेकिन ये मुश्किलें लक्ष्य के सामने छोटी थीं। रायपुर में डॉक्टरी सलाह, दवा और खान-पान में बदलाव की मदद से, उन्होंने नए जोश के साथ अपना काम फिर से शुरू कर दिया। उन्होंने उनकी दो लोकल भाषाएं भी सीखीं ताकि वे अपने आदिवासी भाइयों से अपनेपन से बात कर सकें।
इस सेवा यात्रा के दौरान कई रोमांचक और दिल को छू लेने वाली घटनाएं हुईं। उन्होंने एक गांव के 25 जवानों के नक्सल हमले में शहीद होने की दर्दनाक घटना को खुद महसूस किया। जब वे कुपोषण के बारे में जानकारी देने के लिए एक साथी के साथ गए, तो उन्होंने पाया कि वह इलाका नक्सलियों के कब्ज़े में था; लेकिन खुशकिस्मती से, वे वहाँ से सुरक्षित लौट पाए। इन अनुभवों के बारे में बताते हुए वे कहते हैं, “जो लोग सच्चे दिल से काम करते हैं, उन्हें किसी का डर नहीं होता, और भगवान उनकी रक्षा करते हैं।”
आज पद्मश्री जैसे राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित यह जोड़ा बहुत सादा जीवन जीता हुआ दिखता है। जब भी मैं उनसे मिला तो मुझे डॉ. प्रकाश आमटे और डॉ. साधना आमटे के काम की याद आ ही जाता है। कोई इन्वेस्टमेंट नहीं, कोई शोहरत की उम्मीद नहीं; बस सेवा धर्म का पक्का पालन और उनके चेहरों पर हमेशा मुस्कान। बस्तर के जंगलों में शुरू हुई यह सेवा 35 साल से भी ज़्यादा समय से बिना रुके चल रही है। हज़ारों आदिवासियों की ज़िंदगी में उम्मीद, सेहत और भरोसा जगाने वाले इस कपल की ज़िंदगी की कहानी आज के ज़माने में प्रेरणा की किरण है।
डॉ. रामचंद्र गोडबोले के शब्दों में – “यही मेरी खुशी का सच्चा सफ़र है।”
वे जंगल के रास्ते पर दीयों की तरह चले,
दुखी के आंसुओं में खुशी के फूल खिले।
सेवा ही उनकी साधना है और इंसानियत ही उनका धर्म,
बस्तर के कर्म धर्म को गोडबोले कपल ने रोशन किया।
प्रभात के सभी पढ़ने वालों को इस खुशी के सफ़र और इस सेवा के लिए दिल से बधाई, हार्दिक बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं!
(नोटः लेखक छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के एडीसी ओम बाविस्कर के पिता अजय बाविस्कर है। )
टिकट महंगी हुई नंदनवन जू और जंगल सफारी की
हालांकि सुविधा यह वीकेंड, सार्वजनिक अवकाश और सरकारी छुट्टियों पर लागू नहीं होगी. सफारी के लिए 6 से 12 वर्ष के बच्चों का टिकट सामान्य बस में 100 रुपये, एसी बस में 150 रुपये और इलेक्ट्रिक बस में 175 रुपये लगेंगे. वयस्कों के लिए यह 150, 200 और 250 रुपये होगा. विदेशी पर्यटकों के लिए सफारी के लिए 750 रुपये से 1250 रुपये तक के रेट तय किए गए हैं.
छत्तीसगढ़ में मैंगों टूरिज्म की है अपार संभावनाएः राज्यपाल रमेन डेका
रायपुर। आम केवल एक फल नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है। किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीकों को अपनाकर आम उत्पादों को बडे रूप में विकसित करने के लिए आगे बढ़ना चाहिए। राज्यपाल रमेन डेका आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय आम महोत्सव के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। समारोह की अध्यक्षता मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने की।
राज्यपाल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत विश्व में आम उत्पादन में अग्रणी है और देश में एक हजार से अधिक किस्मों के आम पाए जाते है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के स्थानीय आमों की विशेषताओें का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों के उत्पादन से अपनी अलग पहचान बनानी चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनियां और महोत्सव देश के विभिन्न राज्यों से आए आम उत्पादकों को एक-दूसरे की उन्नत खेती पद्धतियों, नई किस्मों और नवाचारों की जानकारी प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि बस्तर, कोण्डागांव, कांकेर और सरगुजा जैसे क्षेत्रों में आम उत्पादन की बहुत संभावनाएं है। महिला स्व-सहायता समूहों के लिए भी इस क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के व्यापक अवसर मौजूद है। मैंगों टूरिज्म की भी छत्तीसगढ़ में अपार संभावनाएं है।
राज्यपाल ने कहा कि आम उत्पादन के साथ-साथ इसके वैल्यू एडिशन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। इसके लिए कृषि विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम को मिलकर कार्य करना चाहिए। श्री डेका ने कहा कि हमारे जीवन को ईको फैंडली बनाना आज की आवश्यकता है। जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न उपायों को अपनाना होगा। उन्होंने एक पेड़ मां के नाम पर लगाने और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर विशेष जोर दिया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आम फलों का राजा है। आम की पत्तियों और लकड़ियों का भी हमारे जीवन में अत्यधिक महत्व है। हमारे घरों में मांगलिक कार्य होने पर हम आम की पत्तियों से तोरण बनाते है एवं आम की सूखी लकड़ियों का उपयोग हवन एवं पूजा में करते है।
इस महोत्सव में 250 से अधिक किस्मों के आम प्रदर्शित किए गए है। मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियोें को इस महोत्सव का लाभ लेने हेतु प्रेरित किया। प्रदर्शनी मे बेर के आकार से लेकर बीजापुर के हाथीझुल जैसे बड़े किस्मों के आम भी उपलब्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधामंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मंशानुरूप किसानों की आय दुगुनी करने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है और आम की खेती भी इस संकल्प को पूरा करने के लिए सहायक सिद्ध होगी। आम महोत्सव के उद्घाटन पश्चात राज्यपाल डेका और मुख्यमंत्री साय ने आम उत्पादकों द्वारा लगाए गए प्रदर्शनी में आम के विभिन्न किस्मों का अवलोकन किया ।
रायपुर में ड्रंक एंड ड्राइव पर सख्ती, 3356 वाहन चालकों पर कार्रवाई
उरला मैटल पार्क में फैक्ट्री में भीषण आग, कई लोगों के फंसे होने की आशंका
राजधानी को मिलेगी नई रेलवे लाइनः जमीन लेने की प्रक्रिया शुरू, कुछ जिलों से होगी कनेक्टिविटी मजबूत, दावा आपत्ति के लिए 30 दिन का समय
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक नवा रायपुर-खरसिया-परमालकसा रेल परियोजना को पांचवीं और छठवीं लाइन के तौर पर डेवलप किया जाएगा। इससे दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के व्यस्त रेल नेटवर्क पर दबाव कम होगा और नई राजधानी क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी पहले से ज्यादा मजबूत होगी। फिलहाल नवा रायपुर को राजिम रेल कॉरिडोर से जोड़ने की योजना पर भी काम चल रहा है। वहीं अब रायगढ़ की दिशा में नई रेल लाइन बनने से राजधानी क्षेत्र के विस्तार को भी रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
शोधकर्ताओं ने मौखिक दवाओं को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने के लिए विकसित की 'स्मार्ट' दवा-वितरण तकनीक
रायपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) भिलाई के शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य सामग्री (हेल्थकेयर मैटेरियल्स) के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक नई 'स्मार्ट' दवा-वितरण (ड्रग-डिलिवरी) सामग्री विकसित की है। डॉ. संजीब बैनर्जी के नेतृत्व में शोधकर्ता स्वरूप माईती, सुदीप्त पॉल, संदीपन घोष और डॉ. संजय कुमार गुप्ता की टीम द्वारा तैयार की गई यह अनूठी तकनीक दवाओं को पेट के तेज एसिड से सुरक्षित रखते हुए आंत में नियंत्रित तरीके से छोड़ने में पूरी तरह सक्षम है। यह नवाचार भविष्य में मुंह से ली जाने वाली (मौखिक) दवाओं को अधिक सुरक्षित, सटीक और अत्यधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित हो सकता है।
आमतौर पर मुंह से ली जाने वाली कई महत्वपूर्ण दवाएं पेट के अत्यधिक अम्लीय (एसिडिक) वातावरण के कारण आंत तक पहुंचने से पहले ही अपनी प्रभावशीलता खो देती हैं। पेट का एसिड दवा के लक्षित स्थान पर पहुंचने से पहले ही उसके सक्रिय तत्वों को नुकसान पहुंचा देता है, जिससे दवा का असर काफी कम हो जाता है और मरीजों को बीमारी के इलाज के लिए बार-बार या अधिक मात्रा में दवा लेने की आवश्यकता पड़ती है। इस गंभीर चिकित्सा चुनौती का दीर्घकालिक समाधान खोजने के लिए आईआईटी भिलाई की टीम ने एक ऐसा 'स्मार्ट वाहक' (स्मार्ट कैरियर) विकसित किया है, जो दवा के ऊपर एक मजबूत सुरक्षात्मक कवच की तरह काम करता है। यह उन्नत सामग्री पेट के तीव्र अम्लीय वातावरण में पूरी तरह स्थिर रहती है और जैसे ही यह आंत के अनुकूल वातावरण में पहुंचती है, यह अपने-आप सक्रिय होकर दवा को धीरे-धीरे व आवश्यकतानुसार नियंत्रित तरीके से छोड़ती है।
इस अभूतपूर्व शोध की सबसे बड़ी विशेषता इस सामग्री का "स्मार्ट" और संवेदनशील होना है, जो मानव शरीर के आंतरिक बदलावों व जैविक संकेतों को महसूस कर उसी के अनुरूप सटीक प्रतिक्रिया देती है। इसके अतिरिक्त, इस सामग्री में शोधकर्ताओं द्वारा एक 'इनबिल्ट चमक' (फ्लोरोसेंस) भी शामिल की गई है, जिसकी मदद से वैज्ञानिक शरीर के भीतर दवा की सुरक्षित आवाजाही और उसकी सटीक गतिशीलता को आसानी से ट्रैक (निगरानी) कर सकते हैं। प्रयोगशाला और पशुओं पर किए गए शुरुआती अध्ययनों (प्री-क्लीनिकल ट्रायल्स) में इस तकनीक के बेहद उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं, जहाँ इस सामग्री ने पेट जैसी कठिन परिस्थितियों में भी दवा की सफलतापूर्वक रक्षा की, जिससे भविष्य में दवाओं के दुष्प्रभाव (साइड इफेक्ट्स) कम होने और चिकित्सीय प्रभाव में भारी सुधार होने की प्रबल संभावना है।
आईआईटी भिलाई के मुख्य शोधकर्ता डॉ. संजीब बैनर्जी ने इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह शोध चिकित्सा जगत को अधिक स्मार्ट, सटीक और लक्षित दवाओं (टारगेटेड मेडिसिन) की दिशा में एक कदम आगे ले जाता है। संस्थान का मुख्य उद्देश्य ऐसी उन्नत प्रणालियां विकसित करना है जो दवाओं की बर्बादी को रोकें, उन्हें शरीर के सही स्थान पर पहुंचाएं और वैश्विक स्तर पर मरीजों की सुरक्षा व चिकित्सा सुविधा को और बेहतर बना सकें। उल्लेखनीय है कि यह महत्वपूर्ण शोध कार्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अत्यधिक प्रतिष्ठित और मान्यता प्राप्त जर्नल 'एसीएस एप्लाइड मैटेरियल्स एंड इंटरफेसेज' (ACS Applied Materials & Interfaces) में भी प्रकाशित हुआ है, जो भविष्य की स्मार्ट दवा-वितरण तकनीकों में भारत के बढ़ते कदमों और इस नवाचार की वैश्विक प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।