रायपुर
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना: जमुना पाण्डे का घर सौर ऊर्जा से हो रहा रोशन
रायपुर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप प्रत्येक घरों में छत पर सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाकर आमजनों को ऊर्जा के लिए आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का संचालन किया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से मुंगेली जिले के अनेक घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहे हैं और लोग बिजली खर्च से मुक्त होकर ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। यह योजना न केवल नागरिकों को आर्थिक राहत प्रदान कर रही है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक मजबूत कदम साबित हो रही है।
नगर पंचायत सरगॉव की जमुना पाण्डे ने अपने आवास पर 02 किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित कराया है। सोलर संयंत्र के चालू होते ही उनका घर सौर ऊर्जा से रोशन हो रहा है। जमुना पाण्डे ने बताया कि सोलर पैनल स्थापना होने से बिजली बिल से राहत मिली है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के तहत सरल प्रक्रिया और सब्सिडी सुविधा ने उन्हें सोलर सिस्टम अपनाने के लिए प्रेरित किया। 02 किलोवाट सोलर सिस्टम स्थापित होने के बाद न केवल उनके घर के बिजली बिल में कमी आई है, बल्कि वे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में भी अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने इस योजना को आम आदमी के लिए राहत और भविष्य के लिए निवेश बताते हुए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अन्य नागरिकों से भी अपील की कि वे सौर ऊर्जा को अपनाकर न केवल आर्थिक लाभ प्राप्त करें, बल्कि ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में सहभागी बनें।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापना पर केन्द्र और राज्य शासन द्वारा 30 हजार रूपए से 78 हजार रुपये तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। 01 किलोवाट क्षमता पर 45 हजार रुपये, 02 किलोवाट पर 90 हजार रुपये तथा 03 किलोवाट क्षमता के सोलर सिस्टम पर 01 लाख 08 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। यह प्रावधान सोलर ऊर्जा को आम नागरिकों के लिए सुलभ और किफायती बना रहा है। आमजनों को योजना के लिए प्रोत्साहित करने शासन के निर्देशानुसार बैंकों द्वारा कम ब्याज दर पर आसान किश्तों में ऋण की सुविधा प्रदान की जा रही है। इससे आमजनों को योजना का लाभ लेना आसान हो गया है।
महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल जानकी
रायपुर : जब महिलाएं सशक्त होती हैं, तो वे अद्भुत काम कर सकती हैं। वे शिक्षा प्राप्त कर सकती हैं, किसी भी क्षेत्र में काम कर सकती हैं और अपने लिए निर्णय ले सकती हैं। इससे न केवल उन्हें लाभ होता है, बल्कि परिवार और समुदाय भी मजबूत होते हैं। महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसालें यह दर्शाती हैं कि शिक्षा, दृढ़ संकल्प और आर्थिक स्वतंत्रता से महिलाएं न केवल अपना भाग्य बदल सकती हैं, बल्कि समाज में भी क्रांतिकारी परिवर्तन ला सकती हैं।
धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम खर्रा की निवासी जानकी की सफलता की कहानी आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बन चुकी है। कभी एक साधारण गृहिणी के रूप में खेती-बाड़ी में परिवार का सहयोग करने वाली जानकी आज एक सफल व्यवसायी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। उनकी इस उपलब्धि के पीछे ग्रामीण आजीविका मिशन की ‘बिहान’ योजना से मिला मार्गदर्शन और उनकी निरंतर मेहनत है।
जानकी ने जय मां गायत्री महिला स्व-सहायता समूह से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों के बारे में जानकारी प्राप्त की। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, बैंकिंग और स्व-रोजगार के अवसरों के बारे में जागरूकता मिली। इसके बाद उन्होंने सामुदायिक निवेश निधि (सीआईएफ) से प्राप्त ऋण की सहायता से कपड़ा व्यवसाय की शुरुआत की। मेहनत और ग्राहकों के विश्वास से उनका व्यवसाय धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया।
समूह के बैंक लिंकेज के माध्यम से अतिरिक्त ऋण प्राप्त कर उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए फैंसी स्टोर की शुरुआत की। इसके बाद मुद्रा योजना के तहत ऋण लेकर उन्होंने जूते-चप्पल की दुकान भी खोल ली। वर्तमान में उनके व्यवसाय में कपड़े, फैंसी सामग्री और जूते-चप्पल की बिक्री होती है, जिससे उन्हें हर माह अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।
जानकी केवल स्वयं ही आत्मनिर्भर नहीं बनीं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन गई हैं। वे खेती-बाड़ी समूह की अध्यक्ष, ग्राम संगठन (वीओ) की अध्यक्ष तथा बीआरसी सदस्य के रूप में सक्रिय भूमिका निभाते हुए महिलाओं को बचत, स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनके प्रयासों से गांव की कई महिलाएं स्व-सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी कर रही हैं।
जानकी की सफलता यह दर्शाती है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, प्रशिक्षण और सहयोग मिले तो वे न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधार सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत मिसाल भी बन सकती हैं।
डॉ. कुलदीप सोलंकी ‘बेस्ट आईएमए प्रेसिडेंट’ अवार्ड से मुख्यमंत्री साय के हाथों होंगे सम्मानित
रायपुर। चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवाओं और कुशल नेतृत्व के लिए रायपुर के सुप्रसिद्ध गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्टि और आईएमए रायपुर ब्रांच के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप सोलंकी को ‘सर्वश्रेष्ठ लोकल ब्रांच प्रेसिडेंट’ के सम्मान से नवाजा जाएगा। 7 मार्च को आयोजित आईएमए कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय डॉ. सोलंकी को यह पुरस्कार प्रदान करेंगे।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) छत्तीसगढ़ इकाई ने डॉ. सोलंकी का चयन उनके कार्यकाल के दौरान किए गए अभूतपूर्व कार्यों के लिए किया है। पेट, लिवर और आंतों की बीमारियों के विशेषज्ञ डॉ. सोलंकी ने रायपुर शाखा के अध्यक्ष के रूप में संगठन को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया है। डॉ. सोलंकी के नेतृत्व में चिकित्सा और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में कई बड़े आयोजन हुए।
डॉ. सोलंकी के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए आईएमए ग्रैंड मैराथन का सफल आयोजन हुआ। वहीं : चिकित्सकों के बीच खेल भावना और फिटनेस को बढ़ावा देने के लिए आईएमए क्रिकेट लीग का आयोजन हुआ। उन्होंने सांस्कृतिक व सामाजिक गतिविधियों के तहत भव्य सांस्कृतिक संध्या के साथ-साथ विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों का सफल क्रियान्वयन किया। आईएमए रायपुर का भूमिपूजन एवं भवन निर्माण कार्य शुरू करवाना। डॉ. सोलंकी को आधुनिक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी में उनकी विशेषज्ञता के लिए जाना जाता है। इस सम्मान की घोषणा के बाद चिकित्सा जगत में हर्ष का माहौल है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लोकतंत्र सेनानी महावीर प्रसाद जैन के निधन पर जताया शोक
मजबूत इरादों और सरकारी योजनाओं के सहयोग से सपना हुआ साकार-चित्ररेखा
रायपुर : मजबूत इरादों और सरकारी योजनाओं के तालमेल से जीवन में सकारात्मक बदलाव आता है और हर सपना साकार करना संभव है। सरकार की विभिन्न योजनाएं जैसे कि सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा, समावेशी विकास सुनिश्चित करती हैं और हाशिए पर पड़े समूहों को सशक्त बनाती हैं। बिलासपुर जिले के जनपद पंचायत बिल्हा के भैंसबोड क्लस्टर के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत नगपुरा की संस्कार समूह से जुड़ी बिहान दीदी चित्ररेखा धुरी ने यह साबित कर दिया कि मजबूत इरादों और सरकारी योजनाओं के सहयोग से हर सपना साकार किया जा सकता है। सीमित संसाधनों के बीच जीवनयापन कर रहीं चित्र रेखा ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने की राह चुनी और आज वे “लखपति दीदी” के रूप में पहचानी जा रही हैं।
चित्ररेखा ने आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए सरकारी योजनाओं को बड़ा संबल बताया उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का जन हितैषी योजनाओं के लिए आभार जताया है, जिससे हर वर्ग लाभान्वित हो रहा है। समूह में जुड़ने से पूर्व बिहान दीदी चित्रेखा धुरी के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य थी। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ परिवार के लिए आय के सीमित साधन होने के कारण अक्सर चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। ऐसे समय में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की बिहान योजना के तहत संस्कार समूह ने उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग दिया, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ाया। समूह से ऋण प्राप्त कर उन्होंने ई-रिक्शा खरीदा और संचालन की जिम्मेदारी अपने पति को दी।
चित्ररेखा का यह कदम उनके जीवन में एक बड़ा बदलाव लेकर आया। ई-रिक्शा संचालन से नियमित आय होने लगी तो उन्होंने सिलाई कार्य भी शुरू की। गांव की महिलाओं और बच्चों के कपड़े सिलाई कर अतिरिक्त आमदनी अर्जित करने लगीं। इसके साथ ही घर के पास सब्जी बाड़ी तैयार कर मौसमी सब्जियों का उत्पादन भी शुरू की, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी होने के साथ बाजार में बिक्री से लाभ भी मिलने लगी। तीनों कार्यों से आय के स्रोत मजबूत हुए और धीरे-धीरे उनकी वार्षिक आय लाख रुपये से अधिक हो गई। आज चित्ररेखा धुरी आर्थिक रूप से सशक्त हंर और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं।
चित्ररेखा की सफलता ने गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित किया है कि वे स्व- सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकें। वे खुश होकर बताती हैं कि उन्हें महतारी वंदन योजना का भी मिलता है, जिससे उन्हें अपनी छोटी छोटी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है। वे कहती है कि मुख्यमंत्री की संवेदनशील पहल का ही परिणाम है कि महिलाओं के हाथ में उनका अपना पैसा है और शासन की अनेक कल्याणकारी योजनाओं से जुड़कर उन जैसी अनेक महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त बनने की दिशा में अग्रसर हो रही हैं।
राज्यपाल रमेन डेका ने बैगा-बिरहोर आदिवासियों की संस्कृति को सहेजने की दी सीख
रायपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने बैगा-बिरहोर आदिवासियों से कहा कि अपनी समृद्ध, पारंपरिक संस्कृति को सहेजने के लिए स्थानीय भाषाओं, लोकगीतों, कलाओं और रीति-रिवाजों को संरक्षित रखना आवश्यक है। उन्होंने समृद्ध संस्कृति ओर परंपरा को सहेजकर रखने का आग्रह करते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ते हुए भी अपनी परंपराओं को विलुप्त न होने दें। राज्यपाल रमेन डेका आज अपने बिलासपुर प्रवास के दौरान कोटा विकासखंड के शिवतराई पहुंचकर बैगा और बिरहोर आदिवासियों से शासन की योजनाओं से मिल रहे लाभ की जानकारी ली। राज्यपाल ने कहा कि बैगा और बिरहोर समाज की समृद्ध संस्कृति और परंपराएं उनकी पहचान हैं। इस अवसर पर राज्यपाल ने आर्चरी के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए प्रत्येक खिलाड़ी को 5-5 हजार रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने खिलाड़ियों को लोकभवन रायपुर आने का निमंत्रण दिया तथा कलेक्टर को उनके आवागमन सहित आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
राज्यपाल डेका ने लखपति दीदी प्रमिला बैगा से चर्चा की। उन्होंने बताया कि वे गोंदा स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह की रश्मि मरावी ने बताया कि उनके समूह द्वारा सिलाई-मशीन का काम, अचार-पापड़ निर्माण सहित अन्य आजीविका गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। बैगा महिलाओं द्वारा बांस से विभिन्न उपयोगी उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। राज्यपाल ने आयुष्मान कार्ड, महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास
योजना(ग्रामीण), राशन की उपलब्धता, पीएम जनमन योजना सहित अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी भी ली। औरापानी की मंगली ने बताया कि उन्हें आवास योजना का लाभ मिला है। शिवतराई की ममता खुसरो ने बताया कि उन्हें आयुष्मान कार्ड के साथ महतारी वंदन योजना का भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने आयुष्मान कार्ड से अपना अल्सर का ऑपरेशन भी कराया है।
दीर्घकालिक विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा राज्य नीति आयोग : मुख्यमंत्री
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज नवा रायपुर स्थित नीति भवन में छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा के पदभार ग्रहण समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने उन्हें इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य नीति आयोग प्रदेश के दीर्घकालिक विकास विज़न, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के माध्यम से छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा और गति देने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है। उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकास की योजनाएँ और रणनीतियाँ तैयार करने में आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी दृष्टि को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में भी छत्तीसगढ़ विज़न डॉक्युमेंट 2047 तैयार किया गया है, जिससे प्रदेश के समग्र और दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा तय की जा रही है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग के गठन का निर्णय दूरदर्शी सोच का परिणाम था। आज नीति आयोग द्वारा संचालित आकांक्षी जिलों का कार्यक्रम देश के पिछड़े क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों में भी देखने को मिला है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि नीति आयोग की विशेषता यह है कि यह क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीति और योजना निर्माण को बढ़ावा देता है। इसी सोच के साथ राज्यों में भी राज्य नीति आयोग का गठन किया गया है, जो विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनभागीदारी के साथ प्रदेश में विकास को नई गति देने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि गणेश शंकर मिश्रा के प्रशासनिक अनुभव से राज्य नीति आयोग को नई दिशा और गति मिलेगी। आयोग की ओर से प्राप्त अच्छे सुझावों को राज्य सरकार गंभीरता से लेकर प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास करेगी।
राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर और भविष्योन्मुखी नीतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को अधिक समृद्ध और विकसित बनाने की दिशा में सभी के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा।
इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक लता उसेंडी, विधायक अमर अग्रवाल, महापौर धमतरी रामू रोहरा, राज्य नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रह्मण्यम, सदस्य सचिव आशीष भट्ट, सचिव भुवनेश यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
राज्यपाल रमेन डेका ने एम्स रायपुर में अत्याधुनिक 12-बेडेड रेस्पिरेटरी आईसीयू का किया उद्घाटन
रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने आज अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर में 12-बेडेड अत्याधुनिक रेस्पिरेटरी इंटेंसिव केयर यूनिट (आईसीयू) का उद्घाटन किया। यह नवीन स्थापित सुविधा, पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के अंतर्गत संचालित होगी तथा इसे छत्तीसगढ़ की जनता को समर्पित किया गया है।
रेस्पिरेटरी आईसीयू उन्नत सुविधाओं से सुसज्जित है, जिनमें बेडसाइड ब्रोंकोस्कोपी, डायलिसिस समर्थन, एक्स्ट्राकॉर्पोरियल मेम्ब्रेन ऑक्सीजनशन (ECMO) सेवाएँ, आधुनिक वेंटिलेटर प्रणाली तथा सुदृढ़ संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था शामिल हैं। यह इकाई गंभीर श्वसन रोगों से पीड़ित मरीजों को समग्र तृतीयक स्तर की चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करने हेतु विशेष रूप से डिज़ाइन की गई है।
इस अवसर पर माननीय राज्यपाल ने तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने में संस्थान के निरंतर प्रयासों की सराहना की। उन्होंने चिकित्सक समुदाय की समर्पण भावना एवं प्रतिबद्धता की प्रशंसा करते हुए उन्हें अधिक उत्साह और करुणा के साथ अपनी सेवा जारी रखने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्वतंत्रता के पश्चात स्वास्थ्य अवसंरचना में हुए उल्लेखनीय विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के कारण मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि देश स्वास्थ्य, इंजीनियरिंग एवं अंतरिक्ष सहित विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर प्रगति कर रहा है और राष्ट्र निर्माण में चिकित्सकों की महत्वपूर्ण भूमिका तथा राष्ट्रीय विकास के लिए उत्तम स्वास्थ्य की आवश्यकता पर बल दिया।
माननीय राज्यपाल ने यह भी कहा कि नवा रायपुर में एक अतिरिक्त एम्स स्थापित करने की संभावना पर प्रशासन के साथ विचार-विमर्श चल रहा है। साथ ही, उन्होंने छत्तीसगढ़ में एक समर्पित कार्डियक केयर सेंटर की आवश्यकता पर भी बल दिया। सद्भावना के प्रतीक स्वरूप रमेन डेका ने एम्स रायपुर को 42 मल्टीफंक्शनल प्रिंटर भेंट किए। ये प्रिंटर संस्थान के विभिन्न विभागों में मरीज पंजीकरण, ओपीडी सेवाओं, नियमित रोगी देखभाल एवं प्रशासनिक कार्यों की दक्षता बढ़ाने में सहायक होंगे।
एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) अशोक जिंदल ने माननीय राज्यपाल के गरिमामय आगमन के लिए हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि नव स्थापित रेस्पिरेटरी आईसीयू लंबे समय से अनुभव की जा रही आवश्यकता की पूर्ति करता है तथा क्षेत्र में पल्मोनरी क्रिटिकल केयर सेवाओं को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने प्रिंटरों के उदार योगदान के लिए भी आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे संस्थान की संचालन एवं प्रशासनिक दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
इस कार्यक्रम में एम्स रायपुर के वरिष्ठ संकाय सदस्य, प्रशासनिक अधिकारी, पैरामेडिकल कर्मी एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। यह उद्घाटन छत्तीसगढ़ राज्य में उन्नत एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
डिजिटल कनेक्टिविटी बनेगी विकसित छत्तीसगढ़ की नई जीवनरेखाः मुख्यमंत्री साय
बीजेपी ने लक्ष्मी वर्मा को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार, केंद्रीय चुनाव समिति ने जारी की सूची
रायपुर। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की केंद्रीय चुनाव समिति ने मंगलवार, 3 मार्च 2026 को राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव हेतु विभिन्न राज्यों के उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। छत्तीसगढ़ से पार्टी ने लक्ष्मी वर्मा के नाम पर अपनी स्वीकृति प्रदान की है।
लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा भेजने का निर्णय छत्तीसगढ़ भाजपा की क्षेत्रीय और जातिगत समीकरणों को साधने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। एक महिला नेत्री को उच्च सदन में प्रतिनिधित्व देकर पार्टी ने महिला सशक्तिकरण और जमीनी कार्यकर्ताओं को तवज्जो देने का बड़ा संदेश दिया है। लक्ष्मी वर्मा छत्तीसगढ़ भाजपा की एक सक्रिय नेता रही हैं। उनकी उम्मीदवारी से प्रदेश भाजपा के कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है। छत्तीसगढ़ की रिक्त सीट पर होने वाले इस चुनाव में भाजपा की जीत सुनिश्चित मानी जा रही है।
बीजेपी द्वारा जारी सूची में बिहार से नितिन नबीन और शिवेश कुमार, असम से तेराश गोवाला और जोगेन मोहन के नाम शामिल हैं। इसके अलावा हरियाणा से संजय भाटिया, ओडिशा से मनमोहन सामल और सुजीत कुमार तथा पश्चिम बंगाल से राहुल सिन्हा को उम्मीदवार बनाया गया है।
होली खुशियों और जुड़ाव का अवसर, किसानों की समृद्धि से बढ़ा उत्साहः मुख्यमंत्री साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय धरसींवा विधानसभा क्षेत्र में विधायक अनुज शर्मा द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह में शामिल हुए और क्षेत्रवासियों के साथ होली की खुशियाँ साझा कीं। मुख्यमंत्री ने आयोजन में आमंत्रित किए जाने पर विधायक अनुज शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए सभी उपस्थितजनों को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और भाईचारे को मजबूत करने का पर्व है। यह हमें मन-मुटाव भुलाकर एक-दूसरे के साथ मिलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा कि होलिका बुराई का प्रतीक है, जिसका दहन कर हमें जीवन में अच्छाई, सकारात्मकता और खुशहाली को अपनाना है तथा सबके सहयोग से छत्तीसगढ़ को विकास के पथ पर आगे बढ़ाना है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष 4 मार्च को होली का पर्व है और इसका उत्साह अभी से दिखाई देने लगा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत किसानों के खातों में राशि अंतरित की गई है, जिससे किसानों में विशेष उत्साह है और इस बार प्रदेश में होली का पर्व और अधिक उल्लासपूर्ण माहौल में मनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि होली सामाजिक और पारिवारिक जुड़ाव का अवसर भी है, जो समाज में आत्मीयता और विश्वास को मजबूत करता है।
विधायक अनुज शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा किसानों के खातों में सहायता राशि अंतरित किए जाने से किसानों में खुशी का माहौल है और वे इस वर्ष होली का त्योहार अधिक आनंद और उत्साह के साथ मना रहे हैं। उन्होंने कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक फाग गीत प्रस्तुत कर वातावरण को उत्सवमय बना दिया, जिससे पूरा परिसर होली के रंग में सराबोर हो गया। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी क्षेत्रवासियों को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
होलिका-दहन 2 मार्च को... 3 को ग्रहण और 4 मार्च को खेली जाएगी रंगों की होली
रायपुर। देशभर में होलिका दहन की तिथि और होली खेलने के दिन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 2 मार्च को होलिका-दहन किया जाएगा। 3 मार्च को ग्रहण के बाद 4 मार्च को होली खेली जाएगी। शास्त्र सम्मत गणना के आधार पर बताया कि 2 और 3 मार्च की मध्यरात्रि का समय होलिका दहन के लिए श्रेष्ठ रहेगा।
होलिका दहन पूर्णिमा तिथि में, सूर्यास्त के बाद और भद्राकाल रहित समय में किया जाता है। इस साल 2 मार्च की शाम 5:45 बजे से भद्राकाल प्रारंभ होगा, जो 3 मार्च सुबह 5:23 बजे तक रहेगा। 4 मार्च को रंगों की होली खेली जाएगी।
3 मार्च को चंद्रग्रहण भारत में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। ग्रहण दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:47 बजे तक रहेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार चंद्रग्रहण का सूतक ग्रहण से 9 घंटे पहले प्रारंभ होता है। इस आधार पर 3 मार्च सुबह लगभग 6:21 बजे से सूतक प्रभावी माना जाएगा। सूतक लगने के साथ ही मंदिरों के कपाट बंद किए जा सकते हैं। इस दौरान पूजा-पाठ, मूर्ति स्पर्श, भोजन को वर्जित माना जाता है। सूतक और ग्रहण के प्रभाव में रंग-गुलाल खेलना शुभ नहीं माना जाता, इसलिए 3 मार्च को रंगों की होली नहीं खेली जाएगी।
होलिका दहन के 24 घंटे बाद होली खेली जाएगी। यह बहुत दुर्लभ स्थिति है। लोकाचार में होलिका दहन के अगले दिन रंग उत्सव मनाया जाता था, लेकिन इस बार परिस्थितियां अलग है। होलिका दहन की राख को लेकर भी लोगों में जिज्ञासा बनी रहती है। विद्वानों के मुताबिक, कई धार्मिक मान्यताओं में होलिका की राख को घर लाना शुभ माना गया है। मान्यता है कि इसे घर में रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में सकारात्मक वातावरण बना रहता है। हालांकि, इसे श्रद्धा और आस्था के भाव से ही ग्रहण करना चाहिए।
माय भारत युवा संसद 2026: रायपुर में युवाओं ने की लोकतंत्र पर सार्थक मंथन
रायपुर। माय भारत, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा माय भारत–एनएसएस के संयुक्त तत्वावधान में पं रविशंकर शुक्ल विश्वविध्यालय में “विकसित भारत युवा संसद 2026” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय था “आपातकाल के 50 वर्ष: भारतीय लोकतंत्र के लिए सीख”। इस अवसर पर युवाओं ने लोकतंत्र की मजबूती, संवैधानिक मूल्यों एवं नागरिक दायित्वों पर अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए।
उद्घाटन सत्र में ए.के. श्रीवास्तव (प्रॉक्टर–कुल अनुशासक), प्रो. अशोक प्रधान (डीन, जीवन विज्ञान विभाग एवं कार्यपरिषद सदस्य), प्रो. सुनीता सनवारिया (साइंस कॉलेज) एवं अर्पित तिवारी, स्टेट डायरेक्टर, माय भारत उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में अर्पित तिवारी ने कहा कि युवा संसद का उद्देश्य युवाओं को नीति-निर्माण की प्रक्रिया से जोड़ना है, ताकि वे लोकतंत्र की मजबूती में सक्रिय भूमिका निभा सकें। उन्होंने बताया कि जिला स्तर से चयनित शीर्ष 5 प्रतिभागियों को राज्य स्तर पर प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा।
निर्णायक मंडल में प्रो. सुनीता चंसोरिया (दुर्गा कॉलेज), प्रो. अमन झा (दुर्गा कॉलेज), प्रो. अलेख साहू (स्कूल ऑफ लॉ, पीआरएसयू), प्रो. अशोक प्रधान (डीन, जीवन विज्ञान एवं प्रोफेसर, मानवविज्ञान विभाग) तथा प्रो. कमलेश शुक्ला (प्रोफेसर, बायोटेक्नोलॉजी, पीटीआरयू) शामिल रहे। निर्णायकों ने सभी प्रतिभागियों की तार्किक क्षमता एवं प्रस्तुति कौशल की सराहना की और उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम में सोमेश्वर प्रसाद गंजीर ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने कहा कि देश की मजबूती उसका सशक्त लोकतंत्र है, इसलिए आपातकाल के 50 वर्ष बाद हमें लोकतंत्र के मूल स्तंभों को और मजबूत करना चाहिए। द्वितीय स्थान पर डी. ज्ञानेश कुमार, तृतीय स्थान पर देवाशीष पटेल, चतुर्थ स्थान पर अवनी तथा पंचम स्थान पर अनुश्रुति कुम्भलकर रहीं। माय भारत पोर्टल के माध्यम से 195 से अधिक युवाओं ने पंजीकरण कर इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया। यह आयोजन लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति युवाओं की जागरूकता, सहभागिता और सकारात्मक सोच का प्रतीक बनकर उभरा।
जनसंपर्क विभाग के अपर संचालक दरियो को सेवानिवृत्ति पर दी गई विदाई
रायपुर। जनसंपर्क विभाग में 36 वर्षों तक अपनी उत्कृष्ट सेवाएं देने के बाद अपर संचालक जवाहर लाल दरियो के सेवानिवृत्ति अवसर पर नवा रायपुर स्थित संवाद के ऑडिटोरियम में एक गरिमामय विदाई समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयुक्त जनसंपर्क डॉ. रवि मित्तल सहित जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने दरियो को विदाई दी।
कार्यक्रम में आयुक्त जनसंपर्क डॉ. रवि मित्तल ने श्री दरियो की सेवा, समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा की प्रशंसा की। उन्होंने श्री दरियो को शॉल, श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वस्थ, सुदीर्घ और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। अपर संचालक उमेश मिश्रा ने उनके साथ कार्य के अपने अनुभव को शेयर करते हुए कहा कि अविभाजित मध्य प्रदेश के इंदौर से जब उनका स्थानांतरण हुआ तो उन्होंने ही कार्यभार ग्रहण किया। अपर संचालक संजीव तिवारी ने दरियो की सरलता और दायित्वों के प्रति समर्पण की प्रशंसा की।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए अपर संचालक आलोक देव ने श्री दरियो की जीवनी पर प्रकाश डाला। दरियो ने इस मौके पर विभाग के सभी वरिष्ठ अधिकारियों से प्राप्त मार्गदर्शन और सहकर्मियों से मिले सहयोग के लिए आभार जताते हुए कहा कि आप सभी लोगों के सहयोग से ही वह अपने दायित्वों के निर्वहन में सफल रहे हैं।
ग्रामीण विद्युतीकरण को नई दिशा देने पहुंचे सीएसपीडीसीएल प्रबंध निदेशक
रायपुर। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (सीएसपीडीसीएल) के प्रबंध निदेशक एवं छत्तीसगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी (क्रेडा) के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी का पेंड्रा जिले का दौरा ग्रामीण विद्युतीकरण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण एवं जन-केंद्रित पहल साबित हुआ। इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर विद्युत आपूर्ति संबंधी सुधारों पर चर्चा की।
प्रबंध निदेशक एवं प्रभारी सीईओ, क्रेडा ने इस दौरान प्रसिद्ध वैद्य ननकू वैद से भेंट की तथा हाल ही में स्थापित विद्युत लाइन का निरीक्षण किया। इस अवसर पर उन्होंने ग्रामीणों से सीधे संवाद कर विद्युत आपूर्ति संबंधी सुधारों पर चर्चा की। साथ ही, क्षेत्र में चंदन खेती सहित अपनाई जा रही उन्नत एवं उच्च-मूल्य कृषि पद्धतियों का अवलोकन भी किया। ठठपथरा के दौरे के दौरान हाल ही में प्रारंभ की गई नियमित विद्युत लाइन की स्थिति का जायजा लिया गया। क्रेडा अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि पूर्व में स्थापित सौर आधारित व्यवस्था को निकट भविष्य में किसी अधिक आवश्यक स्थान पर स्थानांतरित किया जाए, ताकि अक्षय ऊर्जा संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग सुनिश्चित हो सके।
पेंड्रा विश्राम गृह में विभागीय अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्रचलित कार्यों के संचालन संबंधी चुनौतियों एवं आगामी योजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में उन्होंने सभी अधिकारियों को जनता के प्रति अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, जिम्मेदारी और शुद्ध भावना से करने का स्पष्ट संदेश दिया। सीएसपीडीसीएल संभागीय कार्यालय में भी व्यापक समीक्षा बैठक आयोजित कर चल रही परियोजनाओं, परिचालन चुनौतियों एवं भावी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श किया गया। स्थानीय नागरिकों के साथ संवाद के माध्यम से ग्रामीण विद्युतीकरण को सुदृढ़ बनाने हेतु सामूहिक समाधान एवं सहयोगात्मक प्रयासों पर बल दिया गया। इस अवसर पर विभिन्न जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।
काशीराम बने ऊर्जादाता, 3 किलोवाट सोलर प्लांट से बिजली बिल शून्य
रायपुर : शासन की महत्वाकांक्षी योजना पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेकर खैरागढ़,छुईखदान, गंडई जिले के नागरिक अब बिजली बिल के बोझ से मुक्त हो रहे हैं। इतना ही नहीं, वे अतिरिक्त बिजली उत्पादन कर उसे ग्रिड में भेजते हुए “ऊर्जादाता” के रूप में नई पहचान भी बना रहे हैं।
केसीजी जिले के ग्राम टेकापार कला निवासी काशीराम श्रीवास ने इस योजना का लाभ लेते हुए अपने घर की छत पर 3 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल स्थापित कराया है। सोलर पैनल लगने के बाद उनका बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया है। उन्होंने बताया कि केंद्र एवं राज्य सरकार से प्राप्त सब्सिडी के कारण सोलर प्लांट लगवाना पहले की अपेक्षा काफी सरल हो गया है।
3 किलोवाट या उससे अधिक क्षमता के सोलर प्लांट पर केंद्र सरकार द्वारा 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार द्वारा 30 हजार रुपये, कुल 1 लाख 8 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। इस अनुदान के चलते आम नागरिक भी अब आसानी से सौर ऊर्जा को अपना रहे हैं।
श्रीवास ने बताया कि सोलर पैनल लगवाने से पहले उनका मासिक बिजली बिल 1000 से 1500 रुपये के बीच आता था, लेकिन अब जनवरी माह का बिल पूरी तरह शून्य हो गया है। उन्होंने कहा, “पहले हम बिजली के उपभोक्ता थे, अब योजना का लाभ लेकर ऊर्जादाता बन गए हैं।” जनवरी माह में उन्होंने 240 यूनिट बिजली का ग्रिड में एक्सपोर्ट भी किया है।
उन्होंने कहा कि इस योजना के माध्यम से न केवल आर्थिक बचत हो रही है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रदूषणमुक्त वातावरण भी तैयार हो रहा है। पारंपरिक बिजली उत्पादन से होने वाले प्रदूषण और कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन की तुलना में सौर ऊर्जा पूरी तरह स्वच्छ और पर्यावरण हितैषी है। श्रीवास अन्य नागरिकों को भी इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना: मजबूत हुई आजीविका की राह
रायपुर : जिले के विकासखण्ड लोरमी अंतर्गत ग्राम पंचायत औराबांधा में एक छोटी-सी पहल ने ग्रामीण आजीविका को नई दिशा दी है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत हितग्राही किसान किशन सिंह के खेत में निर्मित “आजीविका डबरी” आज जल संरक्षण, सिंचाई और मछली पालन का सशक्त माध्यम बन चुकी है। हितग्राही किशन सिंह ने बताया कि पहले सिंचाई के लिए पानी की कमी बनी रहती थी, लेकिन अब डबरी बनने से खेत में वर्षभर पानी उपलब्ध रहेगा और मछली पालन से आय भी बढ़ेगी।
जिले में कलेक्टर कुन्दन कुमार एवं जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पाण्डेय के मार्गदर्शन में आजीविका डबरी न केवल जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण आजीविका संवर्धन का भी प्रभावी माध्यम बन रहा है। योजना के तहत स्वीकृत 1.94 लाख रुपये की लागत से इस डबरी का निर्माण कराया गया। कार्य के दौरान कुल 792 मानव दिवस सृजित किए गए, जिससे स्थानीय मजदूरों को गांव में ही रोजगार मिला और पलायन में कमी आई। निर्मित डबरी अब खेतों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। वर्षा जल संचयन और भू-जल रिचार्ज के माध्यम से सिंचाई सुविधा सुनिश्चित हुई है, जिससे खरीफ और रबी दोनों मौसमों में फसल उत्पादन की संभावना बढ़ी है। पहले जहां पानी की कमी के कारण फसल प्रभावित होती थी, वहीं अब किसान आत्मविश्वास के साथ बहुफसली खेती की ओर अग्रसर है।
साथ ही, डबरी में मछली पालन की योजना से अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत विकसित हो रहा है, जो परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना रहा है। जिले में आजीविका संवर्धन की दृष्टि से आजीविका डबरी निर्माण की अभिनव पहल व्यापक स्तर पर क्रियान्वित की जा रही है। वर्ष 2025-26 हेतु कुल 285 डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 218 कार्य प्रारंभ हो चुके हैं और 20 पूर्ण किए जा चुके हैं। शेष कार्यों को मार्च 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित है। यह पहल जल संरक्षण के साथ-साथ कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन को एकीकृत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।