रायपुर
राज्यपाल डेका से फिल परमार्थ आश्रम के संस्थापक ने की भेंट
रायपुर : रमेन डेका से आज फिल परमार्थ आश्रम, भिलाई के संस्थापक अमित राज ने सौजन्य मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आश्रम की गतिविधियों एवं समाजसेवा से जुड़े कार्यों की जानकारी राज्यपाल को दी।
आश्रम द्वारा सड़कों पर लावारिस अवस्था में घूम रहे बुजुर्गों तथा मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों का रेस्क्यू कर उन्हें आश्रम में आश्रय दिया जाता है। वहां उनके उपचार, देखभाल, भोजन तथा आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था की जाती है।
उन्होंने बताया कि अब तक आश्रम के माध्यम से 208 लोगों को राहत एवं पुनर्वास उपलब्ध कराया जा चुका है। वर्तमान में आश्रम में 94 लोग निवास कर रहे हैं, जिनकी नियमित देखरेख की जा रही है।उन्होंने राज्यपाल से आश्रम का भ्रमण करने का आग्रह भी किया।
राज्यपाल ने आश्रम द्वारा किए जा रहे मानवीय एवं सेवा कार्यों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी पहल बताया।
उल्लेखनीय की राज्यपाल द्वारा इस संस्था को पूर्व में 2 लाख रुपए का स्वेछानुदान भी प्रदान किया गया है।
इस अवसर पर आश्रम के अन्य कार्यकर्ता भी उपस्थित थे।
एम्स रायपुर के डॉक्टरों ने 70 वर्षीय बुजुर्ग का कटा हुआ हाथ सफलतापूर्वक जोड़ा
रायपुर। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर के डॉक्टरों ने एक 70 वर्षीय बुजुर्ग व्यक्ति का कटा हुआ हाथ सफलतापूर्वक जोड़कर चिकित्सा क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मरीज का बायां हाथ धान की भूसी (पैडी हस्क) मशीन के चलती बेल्ट में फंस जाने से कोहनी के नीचे से कट गया था। घटना के लगभग दो घंटे के भीतर मरीज को अस्पताल लाया गया। कटा हुआ हाथ सही तरीके से बर्फ वाले डिब्बे में सुरक्षित रखा गया था, जिससे सर्जरी सफल होने की संभावना बढ़ गई।
प्रारंभिक उपचार के बाद मरीज को तुरंत ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। लगभग 8 घंटे चली इस जटिल सर्जरी का नेतृत्व Dr Jiten Kumar Mishra (प्लास्टिक सर्जरी विभागाध्यक्ष) ने किया। चोट गंभीर होने के कारण सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण थी। ऑर्थोपेडिक टीम, जिसका नेतृत्व Dr Sandeep Nema ने किया, ने हड्डी को छोटा कर उसे ठीक से जोड़ा। एनेस्थीसिया टीम ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर बनाए रखा। प्लास्टिक सर्जरी टीम के अन्य सदस्यों ने मिलकर हाथ में दोबारा रक्त प्रवाह शुरू किया और उसे सुरक्षित रूप से जोड़ने में सफलता पाई। मरीज को बाद में दो और सर्जरी से गुजरना पड़ा और लगातार निगरानी में रखा गया।
एक महीने बाद, मरीज का हाथ ठीक तरह से रक्त प्रवाह के साथ काम कर रहा है और घाव लगभग भर चुका है। हड्डी को पूरी तरह जुड़ने में लगभग 2 महीने और लग सकते हैं, जबकि हाथ की पूरी कार्यक्षमता लौटने में अधिक समय लग सकता है। डॉक्टरों ने बताया कि ऐसी स्थिति में मरीज और कटा हुआ अंग 6 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचना और अंग को बर्फ में सही तरीके से सुरक्षित रखना बेहद जरूरी होता है। ऐम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ Lt Gen Ashok Jindal (सेवानिवृत्त) ने पूरी टीम की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी आपात स्थितियों में टीमवर्क की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
भीषण गर्मी में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
रायपुर :प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग ने बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए त्वरित और संवेदनशील निर्णय लिया है। महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के स्पष्ट निर्देश पर ग्रीष्मकाल के दौरान आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन समय में बदलाव करते हुए इसे 6 घंटे से घटाकर 4 घंटे कर दिया गया है।
निर्देशानुसार 01 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक आंगनबाड़ी केंद्र प्रतिदिन प्रातः 7:00 बजे से 11:00 बजे तक संचालित होंगे। विशेष रूप से 23 अप्रैल से 30 जून 2026 तक बच्चों की उपस्थिति का समय केवल सुबह 7:00 बजे से 9:00 बजे तक निर्धारित किया गया है, ताकि वे भीषण गर्मी और लू के प्रभाव से सुरक्षित रह सकें।
इस निर्धारित अवधि में बच्चों को पूर्व तय समय-सारिणी के अनुसार प्रारंभिक बाल्यावस्था देखरेख एवं शिक्षा (ECCE गतिविधियां) के साथ-साथ पूरक पोषण आहार का नियमित वितरण सुनिश्चित किया जाएगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों की शिक्षा और पोषण सेवाओं की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी नहीं आने दी जाएगी।
आंगनबाड़ी केंद्रों में अन्य आवश्यक सेवाएं प्रातः 11:00 बजे तक जारी रहेंगी। इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं अपने निर्धारित जॉब चार्ट के अनुसार शेष कार्यों का निष्पादन करेंगी। साथ ही, गृहभेंट के माध्यम से पोषण परामर्श देने की महत्वपूर्ण सेवा को और अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके तहत कार्यकर्ता केंद्र बंद होने के बाद घर-घर जाकर माताओं को जागरूक करेंगी।
बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। गर्म हवाओं और उच्च तापमान के बीच बच्चों को सुरक्षित रूप से घर पहुंचाने की जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार की लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी।
इसके साथ ही, सभी जिला अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इन व्यवस्थाओं की सतत निगरानी करें और जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों में इसकी प्रगति की नियमित समीक्षा करें, ताकि जमीनी स्तर पर निर्देशों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
ग्रीष्मकाल समाप्त होने के बाद 01 जुलाई से आंगनबाड़ी केंद्र पुनः अपने सामान्य समय प्रातः 9:30 बजे से 3:30 बजे तक (6 घंटे) संचालित होंगे।
बी.टेक चोर : इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर राहुल बन गया चोर, बाइक को पलक झपकाते कर देता था पार,
पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे अपने वाहनों की सुरक्षा के प्रति सतर्क रहें। वाहन को हमेशा सुरक्षित स्थान पर खड़ा करें और लॉकिंग सिस्टम का सही तरीके से उपयोग करें। साथ ही संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
मॉल में पार्किंग शुल्क वसूली अवैध, जिला उपभोक्ता आयोग ने दिया बड़ा आदेश…
न्यायालय ने प्रस्तुत तर्कों और विधिक दृष्टांतों का संज्ञान लेते हुए उन्हें विधिसम्मत माना और मॉल को वाहनों से पार्किंग शुल्क वसूली को अवैध घोषित करते हुए निशुल्क पार्किंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने को निर्देशित किया है.
पाॅवर कंपनी डंगनिया औषधालय में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर
पक्षियों के लिए दाने पानी की व्यवस्था
रायपुर। डॉ राधाबाई शासकीय नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रायपुर छत्तीसगढ़ में प्राचार्य एवं अर्थशास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ विनोद कुमार जोशी के मार्गदर्शन एवं सहयोग से विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी लगातार बढ़ रही तेज गर्मी को महसूस करते हुए बेजूबान पक्षियों के लिए महाविद्यालय में अर्थशास्त्र विभाग द्वारा दाने पानी की व्यवस्था की गई।
साथ ही छात्राओं को सकोरा तथा दाने का वितरण किया गया। ताकि छात्राएं अपने घरों के छतों पर रखें जिससे आसपास के पक्षियों को दाना पानी मिल सके।प्राचार्य ने छात्राओं को प्रेरित करतें हुए कहा कि भीषण गर्मी में बेजुबान पक्षियों के लिए छत या बालकनी में मिट्टी के सकोरों में दाना-पानी रखना एक मानवीय पहल है,जो उनका जीवन बचा सकती है।
इस नेक काम के लिए पानी के मटके का उपयोग करें और पानी को नियमित रूप से बदलें, ताकि वे प्यास से न मरें।सकोरों को ऐसी जगह छत, बालकनी, खिड़की में रखें जहाँ बिल्ली या अन्य शिकारी जानवरों का खतरा न हो।प्लास्टिक की जगह मिट्टी के बर्तनों सकोरे का उपयोग करें,क्योंकि इनमें पानी ज्यादा समय तक ठंडा रहता है। सकोरों को रोज साफ करें और ताज़ा पानी भरें।पक्षियों के लिए बाजरा,चावल,गेहूँ या मिश्रित अनाज का उपयोग किया जा सकता है।
यदि संभव हो तो आसपास छायादार पेड़ लगाएं,जहाँ पक्षी आराम कर सकें।इस अवसर डॉ श्रद्धा मिश्रा,डॉ दीपा गोस्वामी,डॉ भूपेंद्र कुमार साहू,आशीष यादव,अविनाश शर्मा,अभिलाषा श्रीवास्तव तथा शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रही।
विधानसभा ब्रेकिंग : इस दिन आयोजित होगा छत्तीसगढ़ विधानसभा एक दिवसीय विशेष सत्र
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र 30 अप्रैल को आहूत किया गया है। राज्य सरकार के आग्रह पर राज्यपाल ने अपनी मंजूरी दे दी है।
इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण को लेकर विपक्ष की भूमिका को लेकर सत्ता रूढ़ भाजपा निंदा प्रस्ताव पारित करेगी। वहीं कांग्रेस ने कहा है कि वह सदन में पुरजोर तरीके से प्रस्ताव के विरोध में अपने तथ्य रखेगी।
मुख्यमंत्री साय की बड़ी पहल: मुख्यधारा में लौटे युवाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा और नई उम्मीद
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में माओवाद छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटे पुनर्वासित युवाओं को अब शासन की विभिन्न योजनाओं का व्यापक लाभ मिल रहा है। प्रशासन द्वारा इन युवाओं को नई शुरुआत देने के लिए जरूरी दस्तावेजों और सुविधाओं को प्राथमिकता के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है। पुनर्वासित युवाओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से उन्हें राशन कार्ड, आधार कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज सुगमता से उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसी क्रम में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने के लिए आयुष्मान कार्ड भी बनाए जा रहे हैं, जिससे वे आर्थिक चिंता के बिना इलाज करा सकें।
जिला चिकित्सालय बीजापुर में आयोजित कार्यक्रम में पुनर्वासित युवाओं को आयुष्मान कार्ड प्रदान किए गए। इस कार्ड के माध्यम से विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं के तहत उन्हें बड़ा लाभ मिलेगा—
प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना एवं शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना के अंतर्गत
बीपीएल परिवारों को 5 लाख रुपये तक का निशुल्क इलाज
एपीएल परिवारों को 50 हजार रुपये तक का इलाज लाभ
मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना के अंतर्गत
दुर्लभ एवं गंभीर बीमारियों के लिए 25 लाख रुपये तक की मुफ्त चिकित्सा सहायता
साथ ही लाभार्थियों को योजनाओं के उपयोग और प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी भी दी गई।
युवाओं में दिखा नया आत्मविश्वासः
समावेशी विकास की ओर मजबूत कदमः यह पहल न केवल पुनर्वासित युवाओं को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने के लिए भी प्रेरित कर रही है। प्रशासन का लक्ष्य है कि ऐसे सभी युवाओं को योजनाओं से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाए।
“विश्व पृथ्वी दिवस पर विज्ञान, कौशल और उद्यमिता का प्रेरक संगम”
रायपुर। रायपुर विश्व पृथ्वी दिवस (World Earth Day) के अवसर पर पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के भूविज्ञान एवं जल संसाधन प्रबंधन अध्ययनशाला में 22 अप्रैल को उत्साह, ज्ञानवर्धन और रचनात्मक ऊर्जा के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। विभागीय शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लेते हुए अपनी शैक्षणिक एवं व्यावसायिक दक्षता का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के साथ-साथ अन्य संस्थानों के विद्यार्थी, शोधार्थी एवं आम नागरिक भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और प्रदर्शनी का लाभ उठाया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र पटेल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्राध्यापकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विद्यार्थियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विद्यार्थियों की व्यावसायिक दक्षता पर संतोष व्यक्त करते हुए उन्हें उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने तथा विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेंटर के माध्यम से स्वयं का व्यवसाय प्रारंभ करने हेतु प्रेरित किया।
कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने पृथ्वी के भूवैज्ञानिक इतिहास, आंतरिक संरचना तथा मानव समाज के लिए उपयोगी संसाधनों का सजीव एवं वैज्ञानिक प्रस्तुतीकरण किया। इसमें औद्योगिक खनिज, रत्न खनिज, जल संपदा, भूजल संरक्षण, पर्यावरण भूविज्ञान तथा खनिज एवं भूजल सर्वेक्षण में GIS के उपयोग को सरल रूप में समझाया गया। साथ ही भूभौतिकी तकनीकों, शोध उपकरणों, आधुनिक स्वचालित यंत्रों एवं उपग्रह आधारित भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण विधियों का प्रभावी प्रदर्शन किया गया।
भूविज्ञान म्यूजियम में भारत के विभिन्न चट्टानों, खनिजों एवं महत्वपूर्ण जीवाश्मों के समृद्ध नमूनों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया। रॉक वर्कशॉप के माध्यम से चट्टानों की पहचान एवं अध्ययन की व्यावहारिक प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई, जिससे आगंतुकों को विषय की गहन समझ प्राप्त हुई।
विशेष आकर्षण के रूप में विभाग के B.Voc. Gem & Jewellery Industry Professional कार्यक्रम के विद्यार्थियों ने अपनी व्यावसायिक दक्षता का जीवंत प्रदर्शन किया। इस दौरान रत्न तराश (Gem Cutting) की लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन, आधुनिक उपकरणों द्वारा रत्नों की पहचान, आभूषण निर्माण कला (Jewellery Making) की प्रक्रिया का प्रदर्शन तथा बहुमूल्य एवं अर्द्ध-कीमती रत्नों के नमूनों का प्रदर्शन किया गया। साथ ही विभिन्न पारंपरिक आभूषण निर्माण कलाओं-जैसे कुंदन, पोलकी, मीनाकारी, थीवा, टेंपल ज्वेलरी एवं पारंपरिक छत्तीसगढ़ी आभूषण-का परिचय एवं उनकी निर्माण तकनीकी विशेषताओं को बताते हुए रत्न-आभूषण उद्योग में रोजगार एवं स्वरोजगार के व्यापक अवसरों की जानकारी भी प्रदान की गई।
यह आयोजन पृथ्वी एवं उसके संसाधनों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने वाली एक प्रेरणादायक पहल सिद्ध हुआ।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन में विभागाध्यक्ष डॉ. के. आर. हरी, डॉ. निनाद बोधंकर, डॉ. विकास स्वर्णकार, डॉ. कोरसा मुन्ना, श्री अंशुमन बेहेरा एवं B.Voc. कार्यक्रम के प्रभारी फैकल्टी श्री एस. एस. पंडित सहित विभाग के समस्त कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं का अभूतपूर्व योगदान रहा।
साकेत भवन में कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय ने लगाया विशेष स्वास्थ्य जागरूकता व जांच शिविर
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के निर्देशानुसार प्रदेश के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों एवं उनके परिवारजनों के स्वास्थ्य की जांच व स्वास्थ्य जागरूकता हेतु आयोजित किये जा रहे शिविरों की कड़ी में कल बुधवार को कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय कोरबा द्वारा निगम कार्यालय साकेत में विशेष स्वास्थ्य जागरूकता व जांच शिविर लगाया गया। महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने शिविर का समापन किया तथा मुख्यमंत्री सायं व श्रम मंत्री देवांगन के प्रति आभार व्यक्त करते हुये कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय के कार्यो की सराहना की।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन एवं प्रदेश के श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के दिशा निर्देशों के अनुरूप कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के द्वारा सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों एवं उनके परिवारजनों के स्वास्थ्य जांच व स्वास्थ्य जागरूकता के संबंध में स्वास्थ्य व जांच शिविर लगाये जा रहे हैं। इसी कड़ी में नगर पालिक निगम कोरबा के मुख्य प्रशासनिक भवन साकेत में बुधवार को प्रातः 11 बजे से शाम 05 बजे तक विशेष स्वास्थ्य जागरूकता व जांच शिविर का आयोजन किया गया, कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय के द्वारा आयोजित उक्त महत्वपूर्ण शिविर में निगम के 500 से अधिक अधिकारी कर्मचारियों ने अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया। इस दौरान ब्लड प्रेशर, शुगर, जोड़ो का दर्द, सरदर्द, अनिद्रा, हाईपरटेंशन, फीवर, एलर्जी, लीवर, किडनी व हृदय से जुड़ी समस्याओं सहित विविध रोगों की जांच विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा की गई, शिविर में विभिन्न बीमारियों की दवाओं का पर्याप्त स्टाक रखा गया था, अधिकारी कर्मचारियों को चिकित्सकों ने आवश्यकतानुसार दवाईयॉं भी प्रदान की तथा विभिन्न चिकित्सकीय परामर्श व सुझाव दिया। महापौर संजूदेवी राजपूत ने उक्त विशेष स्वास्थ्य जागरूकता व जांच शिविर का समापन किया तथा कर्मचारी राज्य बीमा औषधालय कोरबा के चिकित्सकों व अन्य अधिकारी कर्मचारियों के कार्यो की सराहना करते हुये प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय व उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के प्रति आभार व्यक्त किया। शिविर में नोडल अधिकारी डॉ. दिग्विजय बहादुर सिंह, डॉ.नीरज तिवारी, डॉ.ओमदत्त तिवारी, स्टाफ नर्स मेरी संगीता, अरूणा राय सोने, फार्मासिष्ट उमेश कुमार मनहर, अंजू पटेल व अनिल धु्रव, सहायक ग्रेड-3 ईश्वर प्रसाद सोनी, वार्ड ब्वाय खगेश्वर बेंद्रे, डिगेश कुमार एवं शुभम कर्ष ने अपनी सेवाएं प्रदान की।
शिविर के समापन के दौरान निगम की मेयर इन काउंसिल के सदस्य अजय कुमार चन्द्रा, ममता यादव, फिरत राम साहू, योगेश मिश्रा, पूर्व पार्षद दीपक यादव, रामशंकर साहू, अधीक्षण अभियंता सुरेश बरूआ, लेखाधिकारी भवकांत नायक, स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.संजय तिवारी, अरूण मिश्रा, आनंद दुबे आदि के साथ निगम के अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।
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अपनी ज़िम्मेदारी निभाएं और अपनी बेटियों को सर्वाईकल कैंसर के खतरे से बचाएं
रायपुर : बेटियों की मुस्कान में ही भविष्य की सबसे उजली तस्वीर बसती है-और इसी मुस्कान को सुरक्षित रखने के संकल्प के साथ छत्तीसगढ़ ने एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमा वायरस) टीकाकरण कार्यक्रम की शुरुआत की है। यह पहल केवल एक शासकीय योजना नहीं, बल्कि हर उस माँ-बाप के विश्वास की रक्षा है, जो अपनी बेटी के बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित कल का सपना देखते हैं।
भारत सरकार के नेतृत्व में चल रहे अभियान से जुड़ते हुए छत्तीसगढ़ अब उन सभी राज्यों के साथ कदम से कदम मिला रहा है, जिन्होंने गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर को जड़ से समाप्त करने का बीड़ा उठाया है। गर्भाशय ग्रीवा कैंसर महिलाओ में होने वाले कैंसरों में दूसरा सबसे सामान्य कैंसर है। यह मुख्य रूप से ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण के कारण होता है, गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के प्रारंभिक चरण में सामान्यतः कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देता जिस कारण अक्सर यह गंभीर अवस्था में पहुँच जाता है।
HPV टीकाकरण इस गंभीर कैंसर के खिलाफ एक सशक्त और भरोसेमंद सुरक्षा कवच के रूप में स्थापित हो चुकी है- वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित, पूर्णतः सुरक्षित, अत्यंत प्रभावी है और इसकी सुरक्षा को लेकर कोई गंभीर प्रतिकूल प्रभाव दर्ज नहीं हुआ है-जो इसकी विश्वसनीयता को और भी पुख्ता बनाता है। यह टीका केवल आज की सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों में कैंसर के खतरे को जड़ से कम करने की ठोस और दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करता है।
निजी अस्पतालों में एचपीवी टीके की एक खुराक की कीमत लगभग ₹4,000 तक होती है, जो अनेक परिवारों के लिए वहन करना आसान नहीं है। ऐसे में आर्थिक बाधाएँ अक्सर बेटियों की इस जरूरी सुरक्षा में रुकावट बन जाती हैं। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट और संवेदनशील रुख अपनाया है। सरकार का दृढ़ संकल्प है कि कोई भी बेटी केवल आर्थिक कारणों से इस जीवनरक्षक टीके से वंचित न रहे, और इसी उद्देश्य से पात्र किशोरियों को यह टीका पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
यह टीकाकरण राज्य के सभी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालयों, जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में उपलब्ध है तथा शीघ्र ही यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी उपलब्ध होगा। प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों और यू विन डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए हर लाभार्थी तक इस सेवा की पारदर्शी और प्रभावी पहुँच सुनिश्चित की गई है।
स्वास्थ्य विभाग सभी अभिभावकों और जागरूक नागरिकों से अपील करता है कि वे इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं। यह केवल एक टीकाकरण नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है-अपनी बेटियों को एक ऐसे खतरे से बचाने की, जिसे रोका जा सकता है।
ज्ञानभारतम् सर्वे को मिली रफ्तार : 31 मई तक हर हाल में पूरा करने के निर्देश
रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील ने कहा कि शासकीय संस्थानों, मंदिरों, मठों, पुस्तकालयों, महाविद्यालयों एवं निजी संस्थानों में संरक्षित पांडुलिपियों के सर्वेक्षण के लिए सक्रिय प्रयास करें। उन्होंने कहा कि परंपरागत समुदायों और पुरातात्विक क्षेत्रों में महत्वपूर्ण पांडुलिपियां और ज्ञान-संपदा मिल सकती है, इसलिए इन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने जनभागीदारी बढ़ाने के लिए “पांडुलिपि ट्रेजर हंट” जैसे नवाचारों के आयोजन का सुझाव दिया गया, जिससे आम नागरिक भी इस अभियान से जुड़ सकें।
मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में ‘ज्ञानभारतम्’ राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में सर्वेक्षण अभियान समिति के सदस्य तथा सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े। इस दौरान अभियान की प्रगति की समीक्षा करते हुए मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सर्वेक्षण कार्य 31 मई तक हर हाल में पूर्ण किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि यह सर्वे केवल प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण का महत्वपूर्ण अभियान है। उन्होंने कहा कि जिलों में उपलब्ध पांडुलिपियों की पहचान, दस्तावेजीकरण, डिजिटलीकरण और संरक्षण को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए है। साथ ही प्रत्येक जिले में जिला स्तरीय समिति का गठन, नोडल अधिकारी की नियुक्ति तथा सर्वेक्षण दलों के प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया।
बैठक में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित करने तथा स्थानीय पत्रकारों, साहित्यकारों, इतिहासकारों और जनप्रतिनिधियों को अभियान से जोड़ने पर बल दिया गया। यह अभियान पूरे देश के लिए ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और उसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। सर्वेक्षण कार्य के दौरान पांडुलिपियों के स्वामित्व अधिकारों का सम्मान, बिना अनुमति स्थानांतरण न करने और सभी गतिविधियों में पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया गया।
बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति एवं जनसम्पर्क विभाग के सचिव डॉ. रोहित यादव ने प्रस्तुतिकरण के माध्यम से ज्ञानभारतम् पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत रूपरेखा, उद्देश्य और महत्व की जानकारी दी। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि शोधकर्ताओं के सहयोग से सुदूर अंचलों से भी पांडुलिपियों की महत्वपूर्ण जानकारी एकत्रित की जा सकती है, जिससे इस अभियान को और अधिक सशक्त और प्रभावी बनाया जा सकेगा। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव डॉ. फरिहा आलम सिद्दीकी, संचालक संस्कृति विवेक आचार्य सहित अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
स्व-सहायता समूह से जुड़कर बदली जिंदगी की तस्वीर
रायपुर : मुंगेली जिले के जनपद पंचायत लोरमी के ग्राम खपरीकला की निवासी सम्पत्ति प्रजापति ने सीमित संसाधनों के बावजूद स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाली सम्पत्ति दीदी आज “लखपति दीदी” के रूप में पहचानी जा रही हैं और अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। समूह से जुड़ने से पहले उनके परिवार की आय का मुख्य साधन एक छोटा सा होटल व्यवसाय था, जिससे मुश्किल से घर का खर्च चल पाता था। परिवार की आवश्यकताएं पूरी करना भी चुनौतीपूर्ण था। लेकिन एनआरएलएम (बिहान) योजना के अंतर्गत “जय शनिदेव महिला स्व-सहायता समूह” से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया।
समूह के माध्यम से उन्हें रिवॉल्विंग फंड, कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड एवं बैंक लिंकेज के तहत ऋण सुविधाएं प्राप्त हुईं। इन संसाधनों का सदुपयोग करते हुए उन्होंने अपने होटल व्यवसाय का विस्तार किया और साथ ही सुहाग भंडार एवं किओस्क बैंकिंग का कार्य भी शुरू किया। उनकी मेहनत और लगन का परिणाम यह रहा कि उनकी मासिक आय, जो पहले मात्र 10 हजार रुपये थी, बढ़कर अब लगभग 25 हजार रुपये तक पहुंच गई है, जबकि वार्षिक आय करीब 03 लाख रुपये हो गई है। इसके साथ ही कृषि कार्य से भी उन्हें सालाना लगभग 01 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है।
आर्थिक सशक्तिकरण के इस सफर ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाए हैं। परिवार का जीवन स्तर बेहतर हुआ है, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार हुआ है और वे आज आत्मनिर्भर बनकर सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। सम्पत्ति दीदी अब अपने व्यवसाय को और विस्तार देने के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी यह सफलता की कहानी यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, योजनाओं का लाभ और दृढ़ संकल्प से कोई भी महिला अपने जीवन को बदल सकती है।
मनुष्य खुशी को बाहरी वस्तुओं में ढूंढ रहे हैं- ब्रह्माकुमारी अदिति दीदी
उसी प्रकार आत्मा के गुणों का अनुभव करके उसकी उपस्थिति का अहसास होता है। आत्मा का स्वरूप अतिसूक्ष्म ज्योतिबिन्दु के समान है। उसे न तो नष्टï कर सकते हैं और न ही उत्पन्न कर सकते हैं। वह अविनाशी है। आत्मा के शरीर से निकल जाने पर न तो शरीर कोई इच्छा करता हैं और न ही किसी तरह का कोई प्रयास करता है। मृत शरीर के पास ऑंख, मुख, नाक आदि सब कुछ होता है लेकिन वह न तो देख सकता है, न ही बोल अथवा सुन सकता है।
रायपुर निगम का अभियान तेज: आवारा मवेशियों की धरपकड़, कुत्तों की नसबंदी-टीकाकरण जारी
संबंधित जोन स्वास्थ्य अधिकारियों को क्षेत्रवार जिम्मेदारी निर्धारित कर दैनिक मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए है। संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष अभियान चलाया जाकर स्थिति में सुधार किया जा रहा है। उक्त कार्यवाही के फलस्वरूप सड़कों पर आवारा मवेशियों की संख्या में कमी लाई जा रही है तथा दुर्घटनाओं की रोकथाम हेतु सतत प्रयास जारी है
यातायात व्यवस्था को सुधारने और विकास कार्यों को गति देने सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने ली उच्च स्तरीय बैठक
अग्रवाल ने कहा कि, "रायपुर की जनता को ट्रैफिक जाम से मुक्ति दिलाना और शहर का आधुनिक बुनियादी ढांचा तैयार करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों को स्पष्ट कर दिया गया है कि बजट 2025-26 के सभी स्वीकृत कार्य और वर्तमान में जारी प्रोजेक्ट्स तय समय पर पूरे हों, ताकि आम नागरिकों को शीघ्र राहत मिल सके।" बैठक में NHAI प्रोजेक्ट डायरेक्टर दिग्विजय सिंह, नगर निगम कमिश्नर विश्वदीप, डीसीपी यातायात विवेक शुक्ला, सीएसपीडीसीएल, एसई एम विश्वकर्मा, सीई पीडब्ल्यूडी पी एम कश्यप, राजीव नशीने, विशाल त्रिवेदी, शंभू गुप्ता उपस्थित रहे।