देश-विदेश
विद्युत से सुरक्षा के लिये ग्रामीणजन सावधानियॉ जरूर बरतें
भोपाल :मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने ग्रामीणजनों को आगाह किया है कि वे अपने खेत-खलिहानों में विद्युत से सुरक्षा के लिये सावधानियां जरूर बरतें। अक्सर देखा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में असावधानीवश विद्युत से कई बार अप्रिय घटनाएं घट जाती हैं। यह दुर्घटनाएं कईं बार जान-माल का नुकसान भी कर देती हैं। इनसे बचने के लिए ग्रामीणजनों से सावधानी बरतने की अपील करते हुए कंपनी ने कहा है कि कभी भी विद्युत लाइनों, उपकरणों एवं खंभों से छेड़खानी न करें क्योंकि ऐसा करना विद्युत अधिनियम 2003 के अंतर्गत दण्डनीय अपराध है।
कंपनी ने कहा किजरा भी असावधानी या छेड़खानी से बड़े-बड़े खतरे पैदा हो सकते हैं। इसलिए ऐसी लाइनें जिनमें विद्युत शक्ति प्रवाहित होती है उन्हें आँधी तूफान या अन्य किसी कारण से टूटने वाले तारों को अकस्मात छूने का प्रयास न करें। इस दौरान जरूरी होगा कि लाइन टूटने की सूचना तत्काल निकटस्थ बिजली कंपनी के अधिकारी को अथवा विद्युत कर्मचारी को दें। संभव हो तो किसी आदमी को उस जगह अन्य यात्रियों को चेतावनी देने के लिये भी बिठा दें।
किसानों को सलाह है कि वे खेतों खलिहानों में ऊॅंची-ऊँची घास की गंजी, कटी फसल की ढेरियां, झोपड़ी, मकान अथवा तंबू आदि विद्युत लाइनों के नीचे अथवा अत्यंत समीप न बनायें। साथ ही विद्युत लाइनों के नीचे से अनाज, भूसे आदि की ऊँची भरी हुई गाड़ियॉं न निकालें, इससे आग लगने एवं जान जाने का खतरा है।
कंपनी ने कहा कि बहुत से स्थानों पर बच्चे पतंग अथवा लंगर का खेल खेलते तरह-तरह के धागे और डोर विद्युत लाइनों में फंसा देते हैं। ऐसा करने से उन्हें रोकें। लाइनों में फंसी पतंग निकालने के लिए बच्चों को कभी भी खंभे पर न चढ़ने दें। इससे एक ओर जहां दुर्घटना को टाला जा सकेगा वहीं दूसरी ओर आप होने वाली आर्थिक हानि से भी बच सकेंगे।
मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश ने कृषि उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए देश के प्रमुख उत्पादक राज्यों में अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार राज्य खाद्यान्न, दलहन तथ तिलहन फसलों के उत्पादन में शीर्ष तीन राज्यों में शामिल रहा है। मध्यप्रदेश ने कुल खाद्यान्न उत्पादन में 46.63 मिलियन टन उत्पादन के साथ देश में दूसरा स्थान प्राप्त किया, जो राष्ट्रीय उत्पादन का लगभग 13.04 प्रतिशत है। राज्य कुल दलहन फसल उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर हैं। तिलहन फसलों के उत्पादन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा कृषकों की आय को बढ़ाने एवं उनके समग्र कल्याण के उद्देश्य से वर्ष 2026 को "किसान कल्याण वर्ष" के रूप में मनाया जा रहा है।
गेहूं उत्पादन में राज्य ने 24.51 मिलियन टन उत्पादन किया और लगभग 20.78 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरा स्थान हासिल किया। राज्य मक्का उत्पादन में भी अग्रणी रहा, 6.64 मिलियन टन उत्पादन के साथ मध्यप्रदेश का राष्ट्रीय हिस्सेदारी में लगभग 15.30 प्रतिशत योगदान रहा, जिससे यह देश का प्रमुख उत्पादक राज्य बना। मोटे अनाज (न्यूट्री/कोर्स सीरियल्स) के उत्पादन में भी राज्य ने 7.78 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 12.17 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज की और देश में तृतीय स्थान हासिल किया।
दलहन क्षेत्र में मध्यप्रदेश ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल दलहन उत्पादन में 5.24 मिलियन टन उत्पादन किया और 20.40 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ देश में पहला स्थान प्राप्त किया। चना उत्पादन में राज्य 2.11 मिलियन टन उत्पादन और लगभग 19.01 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ शीर्ष तीन राज्यों में दूसरे स्थान पर रहा।
तिलहन क्षेत्र में भी राज्य की स्थिति मजबूत रही। कुल तिलहन उत्पादन में मध्यप्रदेश ने 8.25 मिलियन टन उत्पादन करते हुए लगभग 19.19 प्रतिशत राष्ट्रीय हिस्सेदारी दर्ज की एवं देश से दूसरा स्थान हासिल किया। विशेष रूप से सोयाबीन उत्पादन में राज्य ने 5.38 मिलियन टन उत्पादन किया, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 35.27 प्रतिशत है और इसे देश के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्यों में स्थापित करता है। राज्य में मूंगफली का उत्पादन 1.55 मिलियन टन रहा जो कि देश के कुल उत्पादन का 12.99 प्रतिशत रहा। मूंगफली उत्पादन में राज्य देश में तीसरे स्थान पर है।
मध्यप्रदेश में केंद्र एवं राज्य सरकार की कृषि विकास योजनाओं रासायनिक उर्वरकों का वितरण, पौध संरक्षण कार्यक्रम, मांग आधारित कृषि के लिए फसलों का विविधीकरण, एक जिला-एक उत्पाद योजना, मध्यप्रदेश राज्य मिलेट मिशन, कृषि उत्पादक संगठनों का गठन एवं संवर्धन, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, भावांतर भुगतान, रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना आदि का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया। परिणामस्वरूप राज्य को कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की है। कुल उत्पादन में वृद्धि हुई है। कृषि आधारित नीतियों के परिणाम स्वरूप मध्यप्रदेश देश की कृषि अर्थव्यवस्था में एक महत्वपूर्ण राज्य के रूप में स्थापित है।
क्रियान्वयन में पारदर्शिता, तत्परता और संवेदनशीलता जरूरी : राज्यपाल पटेल
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा है कि मुख्यमंत्री दुधारू पशुप्रदाय योजना सबसे गरीब के जीवन में खुशहाली लाने का उपक्रम है। योजना की प्रक्रियाओं और क्रियान्वयन में गरीब के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। उनके हितों की अनदेखी सहन नहीं की जाएगी।
राज्यपाल पटेल मंगलवार को पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग द्वारा संचालित मुख्यमंत्री दुधारू पशुप्रदाय योजना के संबंध में लोकभवन में चर्चा कर रहे थे। बैठक का आयोजन जनजातीय प्रकोष्ठ द्वारा किया गया था। इस अवसर पर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पशुपालन एवं डेयरी विकास लखन पटेल, जनजातीय प्रकोष्ठ के अध्यक्ष दीपक खांडेकर, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, प्रमुख सचिव पशुपालन एवं डेयरी विकास उमाकांत उमराव, जनजातीय प्रकोष्ठ के सदस्य एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री दुधारू पशुप्रदाय योजना अति पिछड़ी और गरीब पी.वी.टी.जी. जनजातियों बैगा, भारिया एवं सहरिया के कल्याण के लिए क्रियान्वित है। इस योजना की प्रक्रियाओं और क्रियान्वयन में पारदर्शिता, तत्परता के साथ ही संवेदनशील मनोभाव का होना भी जरूरी है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश के पी.वी.टी.जी. जनजातीय जनसंख्या वाले सभी जिलों को योजना के दायरे में लाया जाना चाहिए। राज्यपाल को बताया गया कि योजना के तहत पशु वितरण कार्य की सामुदायिक निगरानी के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। सभी दुग्ध समितियों तथा संघों के द्वारा माह में 10-10 दिन के अंतराल पर तीन निश्चित तिथियों पर भुगतान की व्यवस्था को सुनिश्चित किया गया है। दूध के मूल्य में भी 2 से साढ़े 8 रुपए तक की वृद्धि की गई है। योजना में आवश्यक संशोधन किए गए हैं। मिल्क रूट तथा परिवहन की सुगमता वाले ग्रामों में प्राथमिकता के आधार पर हितग्राहियों के चयन के साथ ही आवश्यकतानुसार अन्य ग्रामों में भी हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा सकेगा। चयनित हितग्राहियों को प्रदाय पूर्व तीन दिवस प्रशिक्षण दिया जाता है। वितरण के बाद 21 दिवस, तीन माह एवं छ माह पर हितग्राही-वार समीक्षा की जाएगी और हितग्राही को परिचयात्मक दौरा भी कराया जाएगा। प्रथमतः एक ही पशु की अंशदान राशि जमा कराकर हितग्राही को एक ही पशु वितरित किया जाएगा। पहले पशु का रखरखाव संतोषजनक पाए जाने पर ही उसे दूसरा पशु 3 माह बाद प्रदाय किये जाने की व्यवस्था की गई है।
एनआईएम और जिम एंड डब्ल्यूएस के संयुक्त दल ने अर्जेंटीना में माउंट एकांकागुआ पर सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की
देलही : नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम), उत्तरकाशी और जवाहर पर्वतारोहण और शीतकालीन खेल संस्थान (जेआईएम एंड डब्ल्यूएस), पहलगाम के छह सदस्यीय दल ने भारतीय पर्वतारोहण के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। इस संयुक्त दल ने दक्षिण अमेरिका के सबसे ऊंचे शिखर और एशिया के बाहर दुनिया की दूसरी सबसे ऊंची चोटी माउंट एकांकागुआ पर 22 फरवरी 2026 को दोपहर 2:10 बजे सफलतापूर्वक चढ़ाई पूरी की।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कर्नल हेम चंद्र सिंह (प्रधानाचार्य, एनआईएम और जेआईएम एंड डब्ल्यूएस) के नेतृत्व में इस दल को 5 फरवरी 2026 को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। प्रस्थान के बाद यह दल 8 फरवरी 2026 को अर्जेंटीना पहुंचा और वहां से अपनी चढ़ाई शुरू की।
इस दल ने माउंट एकांकागुआ की बेहद कठिन परिस्थितियों का सामना करने से पहले वातावरण के अनुकूल ढलने के लिए बोनेट पीक (5,050 मीटर) पर विजय प्राप्त की। कैप्टन जी संतोष कुमार, दीप बहादुर साही, विनोद गुसाई, नायब सिपाही भूपिंदर सिंह और हवलदार रमेश कुमार सहित दल के सदस्यों ने तेज हवाओं और -20 डिग्री सेंटीग्रेड से -30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करते हुए असाधारण साहस, आपसी सहयोग और तालमेल के साथ पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन किया।
यह उपलब्धि अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोहण के क्षेत्र में भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा और विश्व स्तरीय मानकों पर हमारे प्रमुख पर्वतारोहण संस्थानों के प्रशिक्षण को रेखांकित करती है।
महाराष्ट्र के शेगांव में चार दिन तक चलेगा राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026
नईदिल्ली। केंद्रीय आयुष मंत्रालय, अखिल भारतीय आयुर्वेदिक कांग्रेस के सहयोग से महाराष्ट्र के बुलढाणा जिले के पवित्र नगर शेगांव में 25 से 28 फरवरी 2026 तक चार दिवसीय "राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026" का आयोजन कर रहा है। इस मेले का उद्देश्य आम जनता के बीच आयुष चिकित्सा प्रणाली को बढ़ावा देना, व्यापक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना और औषधीय पौधों की खेती और कृषि वानिकी के माध्यम से किसानों के लिए आजीविका के नए अवसर पैदा करना है।
राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 का उद्घाटन 25 फरवरी 2026 को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू करेंगी। उद्घाटन समारोह संत गजानन महाराज संस्थान के विसावा मैदान में होगा। इसमें महाराष्ट्र के राज्यपाल, महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, आयुष मंत्री श्री प्रतापराव जाधव और कई अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहेंगे।
इस मेले के दौरान, आम लोगों को आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा रिग्पा, होम्योपैथी और अन्य पारंपरिक स्वास्थ्य देखभाल पद्धतियों सहित विभिन्न आयुष प्रणालियों के तहत मुफ्त स्वास्थ्य जांच, चिकित्सा परामर्श और दवाएं प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
इस कार्यक्रम में विषयगत प्रदर्शनियां, विशेषज्ञों के व्याख्यान, योग प्रदर्शन, लाइव थेरेपी काउंटर और निवारक एवं प्रोत्साहक स्वास्थ्य देखभाल पर संवादात्मक सत्र भी शामिल होंगे।
आयुष क्षेत्र में अच्छी विनिर्माण प्रथाओं, गुणवत्ता मानकों और नवीनतम शोधों को प्रदर्शित करने के लिए कई प्रतिष्ठित आयुष दवा और स्वास्थ्य कंपनियां भाग लेंगी। साथ ही, औषधीय पौधों और रोजमर्रा की स्वास्थ्य आवश्यकताओं के लिए सरल घरेलू उपचारों की एक समर्पित प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।
मंत्रालय के अंतर्गत आने वाली आयुष की सभी धाराओं के लिए अलग-अलग स्टॉल लगाए जाएंगे, जिससे आगंतुकों को एक ही मंच पर भारतीय पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों की समृद्ध विविधता का अनुभव करने में मदद मिलेगी।
राष्ट्रीय आरोग्य मेले 2026 का एक प्रमुख आकर्षण बुलढाणा जिले और आसपास के क्षेत्रों के किसानों के लिए एक विशेष पहल है, जिसका उद्देश्य उन्हें कृषि वानिकी और औषधीय पौधों की खेती को आय के एक स्थायी और लाभदायक स्रोत के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है। "आयुर्वेदिक खेती, उत्पादन और विपणन" पर एक विशेष कार्यक्रम 27 फरवरी 2026 को दोपहर 3.00 बजे शेगांव स्थित विसावा परिसर में आयोजित किया जाएगा।
इस विशाल मेले में किसानों को वन-आधारित और औषधीय फसलों की खेती, प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विपणन पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त होगा, ताकि पारंपरिक कृषि करने वाले किसान आयुर्वेदिक खेती भी शुरू कर सकें और अपनी आय बढ़ा सकें।
केंद्रीय आयुष मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने किसानों से आयुर्वेदिक कृषि और उत्पादन कार्यक्रम में सक्रिय रूप से भाग लेने और पारंपरिक फसलों के साथ-साथ औषधीय पौधों की खेती के लाभ की संभावनाओं का पता लगाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि अपनी भूमि के कुछ हिस्से पर औषधीय पौधों की खेती करने से किसानों को स्थायी और लाभकारी आय प्राप्त करने में मदद मिलेगी, साथ ही नागरिकों को उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक उपचार के विकल्प मिलेंगे और इस तरह आयुष मूल्य श्रृंखला मजबूत होगी।
शेगांव की पवित्र भूमि में आयोजित होने वाला राष्ट्रीय आरोग्य मेला 2026 केंद्रीय आयुष मंत्री श्री प्रतापराव जाधव की परिकल्पना है जिसके दोहरे उद्देश्य हैं: औषधीय पौधों पर आधारित कृषि के माध्यम से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार करना और आम जनता को गुणवत्तापूर्ण आयुष-आधारित स्वास्थ्य सेवाएं और जागरूकता प्रदान करना।
महाराष्ट्र और पड़ोसी राज्यों के नागरिकों, किसानों, स्वयं सहायता समूहों, छात्रों, स्वास्थ्य स्वयंसेवकों और आयुष हितधारकों को शेगांव आने और राष्ट्रीय आरोग्य मेले 2026 का अधिकतम लाभ उठाने तथा इस राष्ट्रीय आयोजन को भव्य सफलता दिलाने में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
रेडीमेड गारमेंट फैक्ट्री में लगी भीषण आग, मचा हड़कंप
हालांकि जांच के दौरान यह पाया गया कि फैक्ट्री में मानकों के अनुरूप अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था स्थापित नहीं थी, जो भविष्य में बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती थी। आग बुझाने के बाद दमकल कर्मियों ने कपड़ों के रोल्स में सुलग रही दबी हुई आग को भी बाहर निकलवाकर उलट-पलट कर पानी डालकर पूरी तरह बुझाया। लगभग 12:30 बजे तक अग्निशमन और बचाव कार्य समाप्त कर फायर सर्विस यूनिट्स ने आवश्यक दिशा-निर्देश देते हुए घटनास्थल से वापसी की। इस दौरान स्थानीय पुलिस टीम भी मौके पर मौजूद रही और राहत एवं बचाव कार्य में सहयोग करती रही।
Mumbai के तटीय इलाकों में 70 हेक्टेयर में 'हरित क्षेत्र' बनेगा
कोस्टल रोड गार्डन के 28 पेज के ड्राफ्ट कॉन्सेप्ट प्लान में इस प्रोजेक्ट को मुंबई के लिए एक नया आइकॉनिक पब्लिक एरिया बताया गया है और कहा गया है कि मास्टर प्लान जंगल जैसे एरिया को ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करता है, जिसमें 55% रिक्लेम्ड ज़मीन जंगलों, वुडलैंड्स और गार्डन्स के लिए है, जो दूसरे वर्ल्ड क्लास वाटर फ्रंट पार्क्स के बराबर और कुछ मामलों में उनसे भी बेहतर है। कोस्टल रोड गार्डन्स में सात एक्सेस पॉइंट होंगे- नेपियन सी रोड, ब्रीच कैंडी, हाजी अली, महालक्ष्मी, वर्ली साउथ और वर्ली नॉर्थ। इसमें मैदान/फ्लेक्स फील्ड, स्पोर्ट्स कोर्ट (पिकलबॉल, पैडल, बास्केटबॉल, बैडमिंटन), आउटडोर जिम और फिटनेस पॉड, सोशल गार्डन (गेम टेबल और बैठने की जगह) और बच्चों के खेलने की जगह जैसी सुविधाएं होंगी।
जनवरी 2026 के लिए 'सचिवालय सुधार' मासिक रिपोर्ट का 27वां संस्करण जारी
नईदिल्ली। कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के अधीन प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने जनवरी 2026 के लिए अपनी मासिक 'सचिवालय सुधार' रिपोर्ट का 27वां संस्करण जारी किया है। यह रिपोर्ट शासन एवं प्रशासन में परिवर्तन लाने के उद्देश्य से जारी पहलों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है, जिनमें (i) स्वच्छता और लंबित मामलों को न्यूनतम स्तर तक कम करना (ii) निर्णय लेने में दक्षता बढ़ाना, (iii) ई-कार्यालय कार्यान्वयन और विश्लेषण शामिल हैं।
1. स्वच्छता और लंबित मामलों में कमी:
देशभर में 5,188 स्थलों पर स्वच्छता अभियान सफलतापूर्वक संचालित किए गए। लगभग 4.34 लाख वर्ग फुट कार्यालय स्थल खाली किया गया है, जिसमें कोयला मंत्रालय (1,88,687 वर्ग फुट), भारी उद्योग मंत्रालय (62,129 वर्ग फुट) आदि का सबसे अधिक योगदान रहा है। स्क्रैप निपटान से 115.85 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ, जिसमें रेल मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और कोयला मंत्रालय जैसे मंत्रालयों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रभावी रिकॉर्ड प्रबंधन के अंतर्गत 1,82,000 भौतिक फाइलों की समीक्षा की गई, जिनमें से 81,322 फाइलों को अनावश्यक घोषित कर दिया गया। 5,57,852 जन शिकायतों का निपटारा (कुल शिकायतों का 90.41 प्रतिशत निपटाया गया), साथ ही 1,032 सांसद संबंधी मामले और 375 राज्य सरकार संबंधी मामले निपटाए गए।
2. सर्वोत्तम पद्धतियां: अपशिष्ट से धन:
मंत्रालयों और विभागों ने अपने उपयोग रहित सामान को उपयोगी फर्नीचर और कलाकृतियों में परिवर्तित किया। उदाहरणों में शामिल हैं: राष्ट्रीय जैविक विज्ञान केंद्र, बैंगलोर में अपशिष्ट पैकिंग सामग्री को बेंचों में परिवर्तित करना; परमाणु ऊर्जा विभाग रेल मंत्रालय द्वारा विभिन्न स्थानों पर अभिनव "कचरे से कला" कृतियां;
3. निर्णय लेने और ई-ऑफिस कार्यान्वयन एवं विश्लेषण में दक्षता बढ़ाना:
डीलेयरिंग पहलों को अपनाने से सक्रिय फाइलों के लिए औसत विशिष्ट लेनदेन स्तर में उल्लेखनीय कमी आई है, जो वर्ष 2021 में 7.19 से घटकर जनवरी 2026 तक 4.31 हो गया है। जनवरी 2026 में बनाई गई कुल फाइलों में से 93.81 प्रतिशत ई-फाइलें हैं। प्राप्त रसीदों में से 95.29 प्रतिशत ई-रसीदें थीं, और 65 मंत्रालयों/विभागों ने उल्लेखनीय स्तर पर कम से कम 90 प्रतिशत ई-फाइलों को अपनाया। 26 जनवरी के लिए 15 मंत्रालयों/विभागों की ई-रसीदों में शत-प्रतिशत हिस्सेदारी थी। जनवरी 2026 के महीने में अंतर-मंत्रालयी फाइल आवागमन की संख्या 4,752 रही है, यह सुव्यवस्थित प्रशासनिक प्रक्रियाओं को इंगित करती है। ये पहलें भारत सरकार की डिजिटल रूप से सक्षम, पारदर्शी, कुशल और नागरिक-केंद्रित शासन के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती हैं, जो प्रशासनिक उत्कृष्टता और उत्तरदायी सार्वजनिक प्रशासन के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है।
सिलेंडर ब्लास्ट से तीन पुलिसकर्मी समेत 14 लोग घायल, इलाके में हड़कंप
काशी में गौरा के गौने की हल्दी का मंगल उत्सव
24 फरवरी की संध्या जब दुर्गा मंदिर से पूजित हल्दी टेढ़ीनीम पहुंचेगी और माता गौरा के अंग-अंग पर अर्पित होगी, तब काशी एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक विरासत का साक्ष्य प्रस्तुत करेगी। रंगभरी एकादशी तक चलने वाला यह मंगलमय क्रम श्रद्धालुओं को भक्ति, उल्लास और लोकसंस्कृति के रंगों से सराबोर कर देगा।
भारत और ब्राजील की डाक सेवा में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और तकनीक का आदान-प्रदान
नईदिल्ली। भारत और ब्राजील ने डाक क्षेत्र में सहयोग पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह डाक सेवाओं, डिजिटल परिवर्तन और समावेशी सेवा वितरण में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
भारत सरकार के संचार मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और ब्राजील के संचार मंत्री महामहिम श्री फ्रेडरिको डी सिकेरा फिल्हो ने ब्राजील गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम श्री लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
यह समझौता भारत के डाक विभाग और ब्राजील के संचार मंत्रालय के बीच सहयोग के लिए एक व्यापक ढांचा स्थापित करता है। इसका उद्देश्य डाक क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाना है। यह साझेदारी अधिकारियों और विशेषज्ञों के आदान-प्रदान दौरों, संयुक्त कार्यशालाओं और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन और दोनों पक्षों के बीच व्यवस्थित सूचना साझाकरण के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी।
यह समझौता ज्ञापन डाक प्रणालियों के आधुनिकीकरण और आर्थिक विकास, वित्तीय समावेशन और अंतिम छोर तक सेवा वितरण के इंजन के रूप में अपने नेटवर्क का लाभ उठाने के लिए भारत और ब्राजील की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत डाक व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने के अपने अनुभव साझा करेगा जिसमें डिजिटल सेवाएं, ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स और नागरिक-केंद्रित सार्वजनिक सेवा वितरण शामिल हैं। उम्मीद है कि यह समझौता तेजी से बदलते बाजार परिवेश में डाक संचालकों की वित्तीय स्थिरता और परिचालन दक्षता को मजबूत करने के प्रयासों में भी सहयोग देगा।
यह समझौता ज्ञापन प्रारंभ में पांच वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगा, जिसमें स्वतः नवीनीकरण का प्रावधान होगा, और इसे दोनों देशों के कानूनों और विनियमों के अनुसार कार्यान्वित किया जाएगा। यह सहयोग भारत-ब्राजील रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करता है और वैश्विक दक्षिण के प्रमुख साझेदारों के रूप में दोनों देशों के बीच गहन जुड़ाव में योगदान देता है।
वर्दी का सपना रह गया अधूरा...दौड़ रहा युवक अचानक गिरा, अस्पताल में मौत
विकास, नवाचार और किसान समृद्धि का रोल मॉडल बन रहा दतिया : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि दतिया वीरता और भक्ति का अद्भुत संगम है। यहां आस्था और प्रगति का उत्कृष्ट संगम है। हमारी सरकार दतिया के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है। विगत वर्ष बुंदेला काल के दतिया महल और गुज्जरा लघु शिलालेख को यूनेस्को की टेंटेटिव सूची में स्थान मिल गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दतिया जिले की विकास यात्रा अब रूकने वाली नहीं है। आज दतिया विकास, नवाचार, महिला सशक्तिकरण और किसान समृद्धि का एक रोल मॉडल बन गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दतिया में एयरपोर्ट के शुभारंभ के साथ दतिया से भोपाल फ्लाईट भी शुरू हो गई है। खजुराहो से नई दिल्ली तक वंदे भारत ट्रेन के जरिए दिल्ली अब दतिया से चंद घंटों की दूरी पर आ गया है। उन्होंने कहा कि दतिया में मां पीताम्बरा लोक का निर्माण तेजी से प्रगति पर है। इससे जिले के पर्यटन को नए पंख लगेंगे और दतिया को एक नई धार्मिक एवं आध्यात्मिक पहचान भी मिलेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को दतिया जिले के सेवढ़ा तहसील मुख्यालय में 529 करोड़ लागत के 71 विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमि-पूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घोषणा करते हुए कहा कि करीब सवा 2 हजार करोड़ रूपए की लागत वाली रतनगढ़ सिंचाई परियोजना से इस क्षेत्र के 40 हजार से अधिक किसानों को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दतिया जिले के नशामुक्ति कार्यक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस पुनीत कार्य के लिए जिलेवासियों को बधाई दी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कभी पेयजल संकट से जूझने वाला दतिया में आज हर घर में नल से जल पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन-बेतवा राष्ट्रीय नदी जोड़ो परियोजना पर काम चल रहा है। इसका भरपूर लाभ दतिया जिले के किसानों को भी मिलेगा। अब किसानों को सिंचाई के लिए पानी की चिंता करने की जरूरत नहीं है। दतिया जिले में 1.48 लाख हैक्टेयर से अधिक भू-रकबे में सिंचाई सुविधा का विस्तार होने से यहां कृषि उत्पादन में तेजी से वृद्धि हुई है। विगत दो सालों में यहां 7 लघु सिंचाई परियोजनाओं का निर्माण हुआ है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ जिले के 1.37 लाख से अधिक किसानों को मिल रहा है। फसल बीमा योजना यहां के 1.26 लाख से अधिक किसानों का सुरक्षा कवच बनी है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य सरकार किसानों की समृद्धि और सम्मान के लिए दृढ़-संकल्पित है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने किसान भाइयों के खाते में सम्मान निधि भेजने की शुरुआत की है। हमारे लिए सीमा पर जवान और खेतों में किसान, दोनों बराबर हैं। दोनों समाज की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहकर हर मौसम में काम करते हैं। प्रदेश में वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश में किसानों को पर्याप्त बिजली और सिंचाई की सुविधा मिल रही है। किसानों को सोलर पंप देकर बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 तक प्रदेश में सिंचित रकबा मात्र 7 लाख हैक्टेयर था जो हमारी सरकार आने पर बढ़कर 44 लाख हैक्टेयर हुआ और पिछले डेढ़-दो साल में यह बढ़कर 55 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है।
राष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजा पर 1 अप्रैल से बदलेगी पेमेंट की व्यवस्था
नआईईएलआईटी अमरावती में भारत का पहला समर्पित क्वांटम और एआई विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करेगा।
देलही : इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में, भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (एमईआईटीवाई) के अधीन राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) ने 20 फरवरी, 2026 को आंध्र प्रदेश सरकार के साथ अमरावती में भारत का पहला समर्पित क्वांटम और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्वविद्यालय परिसर स्थापित करने के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।
यह ऐतिहासिक सहयोग भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और आंध्र प्रदेश के प्रस्तावित आंध्र क्वांटम मिशन के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्वांटम नवाचार केंद्र बनाने के आंध्र प्रदेश के दृष्टिकोण के अनुरूप है। अमरावती राज्य की महत्वाकांक्षी क्वांटम वैली पहल के केंद्र के रूप में उभरने के लिए तैयार है।
यह समझौता ज्ञापन आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, भारत सरकार के एमईआईटीवाई के सचिव एस. कृष्णन, एनआईईएलआईटी के महानिदेशक डॉ. एम.एम. त्रिपाठी और अमरावती क्वांटम वैली के एपीएसक्यूएम के मिशन निदेशक सी.वी. श्रीधर की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया।
भारत में समावेशी वॉइस टेक्नोलॉजी को बढ़ावा: नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स
देलही : वॉइस टेक्नोलॉजी भारत में डिजिटल समावेशन का मूलभूत आधार बन रही है, जो लाखों लोगों के सार्वजनिक सेवाओं, सूचनाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक पहुंचने के तरीके को आकार दे रही है। इसी पृष्ठभूमि में, 20 फरवरी, 2026 को इंडिया एआई समिट एक्सपो 2026 में वॉइस टेक्नोलॉजी पर एक नई नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट लॉन्च की गई, जिसका उद्देश्य खुली, समावेशी और जिम्मेदार वॉइस टेक्नोलॉजी को समर्थन देने के लिए एक नीति और व्यवहारिक ढांचा तैयार करना है।
नीति रिपोर्ट और डेवलपर्स टूलकिट को आर्टपार्क @आईआईएससी, डिजिटल फ्यूचर्स लैब और ट्राइलीगल ने संयुक्त रूप से विकसित किया था, जिसमें भाषिनी और फेयर फॉरवर्ड - एआई फॉर ऑल पहल का सहयोग था। इसे जीआईजेड (जर्मन विकास सहयोग) ने कार्यान्वित किया था और जर्मन संघीय आर्थिक सहयोग और विकास मंत्रालय (बीएमजेड) ने फंड मुहैया कराया था , जो भारत में जिम्मेदार स्पीच टेक्नोलॉजी को आगे बढ़ाने के लिए अनुसंधान, तकनीकी विशेषज्ञता और परितंत्र सहयोग को एक साथ लाता है।
भारत जैसे भाषाई विविधता वाले देश में, वॉइस टेक्नोलॉजीज डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं, जो वाक्-आधारित अनुप्रयोगों के माध्यम से डिजिटल पहुंच की बाधाओं को कम करती हैं। हालांकि, वॉइस टेक्नोलॉजीज के विकास और उपयोग से डेटा प्रबंधन, समावेशन, पारदर्शिता, गुणवत्ता और ज़िम्मेदार उपयोग से संबंधित जटिल प्रश्न भी उठते हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए नीतिगत ढांचों, तकनीकी प्रक्रियाओं और परितंत्र स्तर पर समन्वय की आवश्यकता है।
नीति रिपोर्ट में भारत में खुले और ज़िम्मेदार वाक् प्रणालियों के निर्माण में डेटा संग्रहण और मॉडल विकास से लेकर बुनियादी ढांचे और शासन प्रथाओं तक आने वाली प्रमुख बाधाओं का विश्लेषण किया गया है। इस रिपोर्ट में वॉइस-टेक्नोलॉजी परितंत्र को मजबूत करने के लिए लक्षित नीतिगत सिफारिशें की गईं हैं। इनमें मूलभूत वाक् डेटासेट को डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं के रूप में मानना, मॉडलों की पारदर्शिता और प्रतिनिधित्व में सुधार करना, टिकाऊ सार्वजनिक बुनियादी ढांचे में निवेश करना और नवाचार को सक्षम बनाते हुए दुरुपयोग को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों को शामिल करना शामिल है।