देश-विदेश
समाज को मानसिकता में बदलाव लाए बिना स्थायी सुधार संभव नहीं
भोपाल : मध्यप्रदेश में नारी सशक्तिकरण के संकल्प को नई ऊर्जा देते हुए रेखा यादव ने सोमवार को मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण किया। उनके साथ ही नवनियुक्त सदस्य साधना स्थापक ने भी कार्यभार संभाला। पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए यादव ने कहा कि आयोग अब केवल शिकायतों के निवारण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं के वैचारिक और सामाजिक सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखेगा।
रेखा यादव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन की सराहना करते हुए कहा कि उनका संकल्प है कि मध्यप्रदेश की हर नारी आत्मनिर्भर और सुरक्षित महसूस करे। मेरा प्राथमिक दायित्व उनके इसी विजन को साकार करना है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़ी महिला तक पहुंचे।"
महिला अपराधों पर कड़ा रुख अपनाते हुए यादव ने कहा कि कानून अपनी जगह है, लेकिन समाज की मानसिकता में बदलाव लाए बिना स्थायी सुधार संभव नहीं है। कानूनों के निर्माण से अपराधों पर पूर्णतः अंकुश नहीं लगाया जा सकता, इसके लिए मानव की सोच और सामाजिक दृष्टिकोण को बदलना नितांत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक पुरुष प्रधान सोच और महिलाओं के प्रति समाज का नजरिया नहीं बदलेगा, तब तक अपराध की प्रवृत्ति में स्थायी सुधार संभव नहीं है। यादव ने महिलाओं का आह्वान किया कि वे स्वयं भी जागरूक बनें और अपने अधिकारों को पहचानें, क्योंकि एक जागरूक नारी ही अपने खिलाफ होने वाले अन्याय के विरुद्ध मजबूती से खड़ी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अधिकारों की जानकारी ही बचाव की पहली सीढ़ी है। अक्सर जानकारी के अभाव में महिलाएं शोषण सहती रहती हैं। राज्य महिला आयोग अब एक मित्र और मार्गदर्शककी भूमिका निभाएगा। हम हर जिले में महिलाओं तक पहुंचेंगे ताकि वे बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें।
इस अवसर पर आयोग के सदस्य सचिव सुरेश तोमर सहित वरिष्ठ अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
प्रसून जोशी बने प्रसार भारती के चेयरमैन — सरकार को रचनात्मक नेतृत्व से नई उम्मीद
इससे पहले प्रसून जोशी अगस्त 2017 से केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष रह चुके हैं, जहां उन्होंने फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया को संतुलित और बेहतर बनाने में योगदान दिया। इसके अलावा वे मैक्कैन वर्ल्ड ग्रुप इंडिया के CEO और एशिया पैसिफिक के चेयरमैन भी रह चुके हैं, साथ ही 2016 से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के ट्रस्टी भी हैं। ऐसे समय में जब सार्वजनिक प्रसारण तेजी से बदल रहा है और दर्शकों की अपेक्षाएं बढ़ रही हैं, प्रसून जोशी का अनुभव प्रसार भारती के लिए एक नई दिशा तय कर सकता है।
आधी रात का हादसा, गंगा में समाया पिलर—बिहार की लाइफलाइन विक्रमशिला सेतु पर थमा पहिया
इंदौर में 9 से 13 जून तक आयोजित होगा ब्रिक्स कृषि कार्य समूह का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
रायपुर। केन्द्र सरकार द्वारा आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन-2026 के अंतर्गत कृषि कार्य समूह का महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आगामी 9 से 13 जून तक इंदौर के ग्रेंड शेरेटन होटल में होगा। पांच दिवसीय इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में 21 देशों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, नीति निर्धारक एवं विशेषज्ञ शामिल होंगे। सम्मेलन को लेकर रविवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है। शहर की स्वच्छता, हरियाली और सुंदरता अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों के सामने उत्कृष्ट रूप में प्रदर्शित होना चाहिए। उन्होंने नगर निगम, पुलिस प्रशासन, पर्यटन, लोक निर्माण, स्वास्थ्य विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थलों, प्रमुख मार्गों एवं सार्वजनिक स्थलों पर विशेष साफ-सफाई, आकर्षक सजावट और प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि सम्मेलन के दौरान मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोक कला, पारंपरिक खान-पान और कृषि नवाचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जाए। विदेशी प्रतिनिधियों के लिए विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम, प्रदेश भ्रमण और कृषि उपलब्धियों पर आधारित प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सम्मेलन में आने वाले विदेशी मेहमानों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएं। एयरपोर्ट और होटलों पर अंग्रेजी, रूसी, तुर्की सहित विभिन्न भाषाओं के जानकार गाइड तैनात किए जाएं और उन्हें व्यवहार और आतिथ्य का पूर्व प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि मेहमानों का स्वागत पगड़ी, तिलक और फूलमालाओं के साथ भारतीय परंपरा के अनुरूप गर्मजोशी से किया जाए। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में मध्यप्रदेश की लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य एवं प्रसिद्ध सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को शामिल करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने कहा कि सम्मेलन की ब्रांडिंग में मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक पहचान स्पष्ट रूप से दिखाई देनी चाहिए।
केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, यूगांडा, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, कोलम्बिया, इंडोनेशिया सहित कुल 21 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि विश्व के लगभग 68 प्रतिशत किसान इन देशों में निवास करते हैं। उन्होंने कहा कि आयोजन की सभी व्यवस्थाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों।
बैठक में जानकारी दी गई कि सम्मेलन दो चरणों में आयोजित होगा। प्रथम चरण में 9 से 11 जून तक वरिष्ठ अधिकारियों की तीन दिवसीय बैठक आयोजित की जाएगी। इसमें कृषि नवाचार, खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन के संदर्भ में स्मार्ट कृषि, कृषि अनुसंधान, कृषि व्यापार, किसान कल्याण तथा सतत विकास रणनीतियों जैसे विषयों पर तकनीकी चर्चा होगी। इसके बाद 12 एवं 13 जून को कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें कृषि क्षेत्र में वैश्विक सहयोग और नीति संबंधी विषयों पर विचार-विमर्श होगा। इंदौर के ग्रामीण हाट बाजार में कृषि आधारित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
गंगा घाट पर मुंडन संस्कार बना मातम, चार जिंदगियां लापता
यह हादसा एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि गंगा घाटों पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं होते, ताकि ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके।
केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने किया 'सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम' का शुभारंभ
रायपुर। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज 'सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम' (सीबीएस) का शुभारंभ किया। यह एक स्वदेशी तकनीक है जिसे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में दूरसंचार विभाग (डीओटी) के सेंन्टर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डीओटी) द्वारा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और गृह मंत्रालय (एमएचए) के सहयोग से विकसित किया गया है। यह पहल भारत की आपातकालीन संचार प्रणालियों को मजबूत करने और सार्वजनिक सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मंच पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन; सचिव (दूरसंचार) अमित अग्रवाल; महानिदेशक (एनडीआरएफ) श्री पीयूष आनंद; सचिव (एनडीएमए) मनीष भारद्वाज; गृह मंत्रालय के अपर सचिव अनुज शर्मा और एनडीएमए के सदस्य कृष्ण वत्स शामिल थे।
दूरसंचार विभाग (डीओटी), गृह मंत्रालय, एनडीएमए और सी-डीओटी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बोलते हुए, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, “सेल ब्रॉडकास्ट सिस्टम की शुरुआत भारत के आपदा प्रबंधन ढांचे में एक बड़ा बदलाव लाने वाला कदम है। यह नागरिकों की सुरक्षा के लिए 'हादसे के बाद कदम उठाने' के बजाय 'हादसे से पहले तैयारी' के हमारे नए दृष्टिकोण को दर्शाता है। आधुनिक टेलीकॉम तकनीक का लाभ उठाकर, सीबीएस लगभग 'रियल-टाइम' और 'जियो-टारगेटेड' अलर्ट तुरंत पहुँचाने में सक्षम है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि अंतिम व्यक्ति तक मदद पहुँचे। यह स्वदेशी और वैश्विक स्तर की तकनीक हमारी तैयारियों को और मजबूत करती है तथा एक सुरक्षित और आपदाओं से लड़ने में सक्षम भारत के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराती है।”
सेल ब्रॉडकास्ट सॉल्यूशन (सीबीएस) टेलीकॉम-आधारित एक ऐसी सार्वजनिक चेतावनी प्रणाली है, जो अधिकारियों को एक निश्चित क्षेत्र के भीतर सभी मोबाइल उपकरणों पर एक साथ सटीक जियो-टारगेटेड अलर्ट भेजने की सुविधा देती है। "सचेत" प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत होने के कारण, यह बहुत तेजी से और मानक तरीके से अलर्ट प्रसारित करने में सक्षम है। यह पारंपरिक एसएमएस-आधारित प्रणालियों की कमियों को दूर करता है और यह सुनिश्चित करता है कि संकट के समय महत्वपूर्ण जानकारी लक्षित क्षेत्रों की बड़ी आबादी तक बिना किसी देरी के और कुशलता से पहुँचाई जा सके।
इस लॉन्च के हिस्से के रूप में, आज देश भर में इस प्रणाली का सफल परीक्षण (टेस्ट) किया गया। परीक्षण के दौरान, पूरे देश में मोबाइल फोन पर एक खास चेतावनी टोन के साथ आपातकालीन संदेश भेजे गए। यह प्रदर्शन आपदाओं और आपातकालीन स्थितियों के दौरान समय पर जानकारी पहुँचाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। भारत में आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में दिए गए अमूल्य योगदान और निस्वार्थ सेवा को रेखांकित करते हुए, श्री सिंधिया ने व्यक्तियों और संगठनों दोनों को 'सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार' (एससीबीएपीपी) से भी सम्मानित किया। इस अवसर पर आपदा प्रबंधन से संबंधित गाइडलाइंस और एक हैंडबुक का विमोचन भी किया गया।
सीबीएस सटीक जियो-टारगेटिंग क्षमताएँ प्रदान करता है, जिससे अलर्ट को अलग-अलग सेल टावरों या समूहों के स्तर पर भेजा जा सकता है, या फिर जरूरत पड़ने पर बड़े क्षेत्रों तक बढ़ाया जा सकता है। ये संदेश बिना किसी वेटिंग या कतार के कुछ ही सेकंड में सीधे यूजर्स तक पहुँच जाते हैं। उच्च विश्वसनीयता के लिए डिजाइन किया गया यह सिस्टम नेटवर्क जाम होने पर भी अप्रभावित रहता है, जिससे संकट के समय निर्बाध संचार बना रहता है। यह लक्षित क्षेत्र के सभी मोबाइल यूजर्स तक पहुँचता है, जिसमें रोमिंग वाले यूजर्स भी शामिल हैं। खास बात यह है कि यूजर्स इन अलर्ट्स को बंद नहीं कर सकते। इसके अलावा, ये अलर्ट प्रायोरिटी नोटिफिकेशन के रूप में एक पॉप-अप मैसेज और तेज आवाज के साथ आते हैं और कई फोन में इन संदेशों को बोलकर सुनाने की सुविधा भी दी गई है।
प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का है आधार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रकृति अनुकूल स्थापत्य हमारे वास्तु का आधार है। वर्तमान समय की बड़ी चुनौती यह है कि हम कंक्रीट के बढ़ते जंगलों और सिमटते प्राकृतिक संसाधनों के बीच खड़े हैं। पर्यावरण अनुकूल निर्माण को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। हमें गर्व होना चाहिए कि हम उस परंपरा के उत्तराधिकारी हैं जिन्होंने स्वस्थ नगर नियोजन के साथ जल संरक्षण के लिए विशाल इकोलॉजिकल सिस्टम बनाये। विद्वान, वास्तुकार राजा भोज द्वारा विकसित भोपाल इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है।
सौभाग्य का विषय है कि सस्टेनेबल फ्यूचर इनोवेशंस इन ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिसेस जैसे विषय पर भोपाल में राष्ट्रीय सेमिनार हो रहा है। प्रदेश के ऐतिहासिक स्थल मांडव के जल प्रबंधन और नगर नियोजन को देखते हुए वहां भी इस प्रकार के आयोजन होने चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर अखिल भारतीय सेमिनार और इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113 गवर्निंग कॉउंसिल मीटिंग के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। लोक निर्माण विभाग तथा इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस, कार्यक्रम के आयोजक हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने शॉल-श्रीफल और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। कार्यक्रम वंदे-मातरम के गान के साथ आरंभ हुआ। इस अवसर पर आईबीसी इनोग्रल सॉन्ग और लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई की गतिविधियों पर लघु फिल्म की प्रस्तुति हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लोक निर्माण विभाग की स्मारिका, न्यूज लेटर और आईबीसी की बिल्ट इन्वायरमेंट पत्रिका का विमोचन किया। उनकी उपस्थिति में आईआईटी इंदौर और लोक निर्माण विभाग के बीच निर्माण तकनीक पर केंद्रित एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। दूसरा एमओयू लोक निर्माण विभाग तथा गृहा संस्था के साथ किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि राजा भोज ने भोज पत्रों पर लेख और निर्माण कार्यों के माध्यम से हमें प्राचीन भारतीय निर्माण परंपरा की अद्भुत सौगात दी है। राजा भोज ने प्रकृति के साथ प्रगतिकी बात समरांगण सूत्रधार में स्पष्ट की थी। हमारे ग्रंथों में कहा गया है 'यत् पिण्डे तत् ब्रह्माण्डे' अर्थात् जो शरीर में है वही ब्रह्मांड में है। ग्रीन बिल्डिंग, पृथ्वी-जल-अग्नि-वायु-आकाश तत्वों के समावेश से हमारे घरों को उसी ब्रह्मंडीय संतुलन में वापस लाने की एक प्रक्रिया है। हमारे प्राचीन ग्रंथ यह मानते हैं कि एक भवन में इन सब तत्वों का समावेश आवश्यक है। वर्तमान दौर में जीपीएस एक नई तकनीक है, लेकिन पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र उज्जैन के पास डोंगला में है। यह प्राचीन काल से समय गणना का मुख्य केंद्र माना जाता है। तत्कालीन गणना की सटीकता इससे सिद्ध होती है कि वर्तमान में भी निश्चित तिथियों पर मौसम में बदलाव का अनुभव किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तुंगभद्रा नदी के किनारे श्रृंगेरी में भी स्थापत्य कला का अद्भुद उदाहरण देखने को मिलते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने प्राचीन ज्ञान और परंपरा को मौजूदा दौर में विज्ञान के साथ जोड़ा है। आज आवश्यकता है कि हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्राचीन वास्तुकला की विशेषताओं पर चर्चा करते हुए भोपाल के बड़े तालाब और उज्जैन में शिप्रा नदी के आस-पास की संरचनाओं का उल्लेख किया।
केदारनाथ यात्रा...73 साल की दादी सुर्खियों में
सोशल मीडिया पर उनकी इस यात्रा का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखने के बाद लोग उनकी जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई लोग उन्हें सच्ची प्रेरणा और हौसले की मिसाल बता रहे हैं. यह कहानी हमें यह सिखाती है कि अगर इंसान के अंदर सच्ची श्रद्धा और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो कोई भी लक्ष्य मुश्किल नहीं होता.
सरल सावधानियों से बचा जा सकता है भीषण गर्मी के प्रभाव सेः डॉ. जितेंद्र सिंह
नईदिल्ली। केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज आम जनता को आश्वस्त किया कि मई महीने के दौरान अनुमानित या अपेक्षित गर्मी की स्थिति को लेकर घबराने की कोई बात नहीं है और मौसम पूर्वानुमान को सही ढंग से समझकर और दिन-प्रतिदिन की सरल सावधानियों का पालन करके किसी भी अनावश्यक प्रतिक्रिया से बचा जा सकता है।
अपने कार्यालय में मीडिया को जानकारी देते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यद्यपि कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक तापमान और लू की स्थिति देखी जा सकती है लेकिन यह स्थिति पूरे देश में एक समान नहीं है और समय पर तैयारी और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली सलाहों का पालन करके इसे प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
आईएमडी द्वारा जारी नवीनतम मासिक पूर्वानुमान और आगे की अवधि के पूर्वानुमान का उल्लेख करते हुए मंत्री जी ने कहा कि दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत, उत्तर-पूर्वी और उत्तर-पश्चिमी भारत के कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है जबकि देश के बड़े हिस्से में इस महीने तापमान सामान्य से कम रहने का अनुमान है। कई क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।
उन्होंने आगे कहा कि पूर्वानुमान के अनुसार हिमालय की तलहटी, ओडिशा सहित पूर्वी तट के कुछ हिस्सों, तटीय आंध्र प्रदेश और उससे सटे तमिलनाडु, साथ ही गुजरात और महाराष्ट्र में लू चलने की संभावना है, जिससे इन क्षेत्रों में सामान्य से लगभग 2-4 दिन अधिक लू चलने की आशंका है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बढ़े पूर्वानुमान के अनुसार बताया कि मई के दूसरे (8-14 मई) और चौथे (22-28 मई) सप्ताह में तापमान अपेक्षाकृत अधिक रहने की संभावना है, जिससे उत्तर-पश्चिम, मध्य और पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों के साथ-साथ पूर्वी तट में लू चल सकती है। पहले और तीसरे सप्ताह (1-7 मई और 15-21 मई) के दौरान, पश्चिमी विक्षोभ और गरज के साथ होने वाली बारिश और बादलों के कारण देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से कम रहने की संभावना है।
मंत्री जी ने कहा कि कुछ समय के दौरान रात के तापमान में वृद्धि से उमस बढ़ सकती है, खासकर शहरी और तटीय क्षेत्रों में। पूर्वी तट, गुजरात और महाराष्ट्र में भी गर्म और उमस भरा मौसम रहने की संभावना है। उन्होंने वैश्विक जलवायु परिस्थितियों पर कहा कि वर्तमान में ईएनएसओ-तटस्थ स्थितियां बनी हुई हैं और दक्षिण-पश्चिम मानसून के मौसम के दौरान अल नीनो की स्थिति होने की संभावना है।
मंत्री ने कहा कि सरकार गर्मी से उत्पन्न स्थितियों से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है और उन्होंने पेयजल की उपलब्धता, सुचारू शीतलन व्यवस्था और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए राज्य और जिला स्तर पर समन्वित प्रयासों पर जोर दिया। शिशुओं, बुजुर्गों और बाहरी कार्यों में लगे श्रमिकों सहित संवेदनशील समूहों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मई में फरवरी जैसा मौसम: काशी में ठंडी हवाओं का असर, पारा 33.8 डिग्री पर ठहरा
इंदौर-पीथमपुर कॉरिडोर का भूमिपूजन 3 मई को
फोन पर अचानक आया इमरजेंसी अलर्ट? घबराएं नहीं, जानिए सरकार क्यों भेज रही है यह मैसेज
डेस्क। आज सुबह कई लोगों के स्मार्टफोन अचानक तेज आवाज के साथ बज उठे. स्क्रीन पर “इमरजेंसी सीवियर अलर्ट” लिखा देखकर कई यूजर्स घबरा गए। कुछ लोगों को लगा कि उनके फोन में कोई समस्या आ गई है, तो कुछ ने इसे स्कैम समझ लिया। असल में यह भारत सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण यानी NDMA द्वारा भेजा गया एक आधिकारिक टेस्ट मैसेज है. NDMA देशभर में नए वायरलेस इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम की जांच कर रहा है. इसका मकसद आपदा या किसी आपात स्थिति में लोगों तक तुरंत सूचना पहुंचाना है। ऐसे में यदि आपका फोन भी जोर से अलर्ट के साथ बजता है तो आपको घबराने की जरूरत नहीं है।
भारत सरकार के दूरसंचार विभाग की ओर से भेजे जा रहे इस मैसेज में साफ लिखा है, “भारत ने स्वदेशी तकनीक का उपयोग करते हुए सेल ब्रॉडकास्ट सेवा शुरू की है, जिससे नागरिकों को आपदा की तत्काल सूचना मिल सकेगी. सतर्क नागरिक, सुरक्षित राष्ट्र. इस संदेश को प्राप्त करने पर जनता को कोई कार्रवाई करने की आवश्यकता नहीं है. यह एक परीक्षण संदेश है. – भारत सरकार”
यानी यह सेल ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम के जरिए भेजा गया एक सेंपल टेस्ट मैसेज है. इस पर यूजर्स को किसी तरह की कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है. यह टेस्टिंग राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा विकसित अखिल भारतीय आपात अलर्ट सिस्टम की जांच के लिए किया जा रहा है. इसका मुख्य उद्देश्य आपात स्थिति के दौरान लोगों को समय रहते चेतावनी देना है. जब भी बाढ़, भूकंप, सुनामी, चक्रवात या अन्य प्राकृतिक आपदा आएगी, तब यही तकनीक लाखों लोगों तक कुछ ही सेकंड में महत्वपूर्ण सूचना पहुंचाएगी.
वायरलेस इमरजेंसी अलर्ट एक आधुनिक सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक पर आधारित है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी मोबाइल नंबर पर निर्भर नहीं करता. संबंधित क्षेत्र में मौजूद सभी स्मार्टफोन पर एक साथ अलर्ट भेजा जा सकता है। इसका उपयोग केवल प्राकृतिक आपदाओं तक सीमित नहीं रहेगा. युद्ध, आतंकी खतरे या अन्य राष्ट्रीय आपात स्थितियों में भी सरकार इसका इस्तेमाल कर सकेगी। आज के समय में स्मार्टफोन लगभग हर व्यक्ति के पास है, इसलिए यह टीवी और रेडियो से कहीं ज्यादा प्रभावी माध्यम बन चुका है। यही कारण है कि भारत सरकार इस तकनीक को तेजी से लागू करने में जुटी हुई है।
सतरेंगा पर्यटन स्थल जाने से बचे, लाइफ जैकेट की सुविधा नहीं बोट में
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि जहां सरकारी स्तर पर सुविधाएं ठप हैं, वहीं स्थानीय ग्रामीण अपने निजी मोटर बोट से सैलानियों को बांगो बांध के डूबान क्षेत्र में नौकायन करा रहे हैं। इन नावों में न तो लाइफ जैकेट की अनिवार्यता है, न ही कोई प्रशिक्षित सुरक्षा व्यवस्था। खुद नाविकों का कहना है कि “सब कुछ भगवान भरोसे चल रहा है।” हर सप्ताह सतरेंगा में रायगढ़, बिलासपुर और आसपास के जिलों से सैकड़ों सैलानी पहुंचते हैं, जबकि रविवार और छुट्टियों के दिन यह संख्या हजारों में पहुंच जाती है।
अब सड़कों पर गूंजेगी मराठी: ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए सरकार का बड़ा भाषा अभियान
‘चला मराठी बोलूया’ अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव की एक पहल के रूप में देखा जा रहा है। यह न केवल भाषा को सशक्त करेगा, बल्कि अलग-अलग पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों के बीच समझ और जुड़ाव को भी मजबूत बनाएगा। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह पहल कितनी सफल होती है और क्या सच में महाराष्ट्र की सड़कों पर मराठी की मधुरता पहले से अधिक सुनाई देने लगती है।
जबलपुर क्रूज हादसा में 9 शव बरामद 22 लोगों की बची जान, रेस्क्यू जारी
जबलपुर। मध्य प्रदेश की संस्कारधानी जबलपुर में गुरुवार की शाम दर्दनाक हादसा हो गया। जहां बरगी डैम में एक क्रूज तेज हवा और आंधी तूफान के चलते पलट गया। देखते ही देखते क्रूज पर सवार सभी सैलानी पानी में डूब गए। यह खौफनाक मंजर देख वहां मौजूद लोगों ने मदद की। जैसे-तैसे कुछ लोगों की जान को बचाया गया। ताजा जानकारी के मुताबिक, अब तक 9 लोगों के शव निकाले जा चुके है, जिसमें सात महिलाएं, एक बच्चा भी शामिल हैं। कल शाम से आज दूसरे दिन भी लापता लोगों की तलाश जारी है।
यमुना की लहरों पर नई रफ्तार: ‘नमो यमुना’ क्रूज से दिल्ली को मिलेगा पर्यटन का नया आयाम
इस तरह ‘नमो यमुना’ क्रूज केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि दिल्ली के विकास और बदलती तस्वीर का प्रतीक बनने जा रहा है।
किसानों के हित में समर्पित होकर कार्य करें कृषि कर्मयोगी : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में कृषक कल्याण वर्ष के दौरान सोलह विभाग समन्वित रूप से किसानों के हित में कार्य कर रहे हैं। यह एक समग्र पहल है, जिसमें कृषि, उद्यानिकी, सहकारिता, पशुपालन, मत्स्य पालन सहित अन्य विभागों को जोड़कर किसानों के विकास के लिए कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला से प्रदेश में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारी किसानों के समर्पण भाव के साथ नई तकनीकों और नवाचारों को अपनाते हुए कार्य करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में किसानों की समृद्धि के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2026 कृषक कल्याण के लिए समर्पित किया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रवींद्र भवन, भोपाल में कृषक कल्याण वर्ष में किसानों के सशक्तिकरण और उनकी आय वृद्धि के उद्देश्य से कृषि कर्मयोगी उन्मुखीकरण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर सूचना प्रौद्योगिकी आधारित प्रणालियों की शुरूआत की गई, जिनमें मुख्यमंत्री किसान कल्याण डैशबोर्ड, पैक्स समितियों में सदस्यता वृद्धि महाअभियान और सीएम किसान हेल्पलाइन शामिल हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हेल्पलाइन से जुड़कर कृषि संबंधी जानकारी प्राप्त की और इसकी उपयोगिता का अवलोकन किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की सेवा के लिए सीएम किसान हेल्पलाइन प्रारंभ की गई है। किसान भाई टोल फ्री नम्बर 155253 के माध्यम से इस नवाचारी पहल का लाभ ले सकेंगे। इस हेल्पलाइन से किसानों को त्वरित मार्गदर्शन और सहायता उपलब्ध होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उन्मुखीकरण कार्यशाला में उपस्थित सभी कृषि कर्मयोगियों से किसान हितैषी योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए पवित्र और समर्पण भाव से कार्य करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों के लिए कार्य करते हुए नए प्रयोगों के साथ अपने मन के नए अंकुरण और कोमलता को जीवंत रखने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में कृषि एवं पशुपालन क्षेत्र में हुए सकारात्मक बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता के बल पर अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से पशुपालन क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है, जिससे प्रदेश में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हुई है और किसानों को बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है। राज्य सरकार ने कई असंभव कार्यों को लक्ष्य तक पहुंचाया है। प्रदेश में दुग्ध क्रांति हो रही है। वर्तमान में किसानों को प्रति लीटर दूध पर पहले की तुलना में 7 से 8 रुपए तक अधिक मूल्य मिल रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि क्षेत्र में अब व्यापक परिवर्तन देखने को मिल रहे है। पहले रबी फसल वर्षा पर निर्भर रहती थी, लेकिन अब समय बदल रहा है। नहरों और विद्युत सुविधाओं के विस्तार से खेत-खेत तक सिंचाई पहुंच गई है। इसके परिणामस्वरूप किसान अब वर्ष में 2 के स्थान पर 3 फसलें लेने लगे हैं।