देश-विदेश
महिलाओं-बच्चों के लिए इंदौर में शुरू हुआ साइबर वेलनेस सेंटर
भोपाल : साइबर अपराध, ऑनलाइन उत्पीड़न और डिजिटल नुकसान का सामना कर रही महिलाओं और बच्चों को अब इंदौर में एक ही स्थान पर काउंसलिंग से लेकर कानूनी और
तकनीकी सहायता तक मिल सकेगी। महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बुधवार को केंद्र का उद्घाटन किया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा अहान फाउंडेशन के प्रोजेक्ट रिस्पॉन्सिबल नेटिज़्म और कोगटा फाउंडेशन के सहयोग से साइबर वेलनेस सेंटर का इंदौर में शुभारंभ किया गया है। केंद्र का उद्देश्य साइबर घटनाओं के पीड़ितों और सर्वाइवर्स को तत्काल, मुफ्त और संवेदनशील सहायता उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश में डिजिटल सुरक्षा और जिम्मेदार ऑनलाइन व्यवहार के लिए मजबूत सहायता तंत्र तैयार करना है।
केंद्र में साइबर नुकसान से प्रभावित लोगों को मुफ्त काउंसलिंग, मनो-सामाजिक एवं भावनात्मक सहायता, तकनीकी और कानूनी मार्गदर्शन तथा साइबर घटनाओं की रिपोर्ट दर्ज कराने में सहयोग मिलेगा। इसके अलावा महिलाओं, बच्चों और समुदायों के लिए साइबर वेलनेस, डिजिटल रेजिलिएंस और साइबर अधिकारों को लेकर जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे।
मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि महिलाओं और बच्चों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ने में सक्षम बनाने के लिए सरकार, सामाजिक संस्थाओं और समुदाय को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विषय नहीं है, बल्कि इससे जुड़े मामलों में पीड़ितों को मानसिक और भावनात्मक सहारे की भी जरूरत होती है।
अवैध शऱाब से लोगों की मौत पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सख्त.. दिए आवश्यक निर्देश
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सागर जिले के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में अवैध शराब से लोगों की हुई मृत्यु के प्रकरण में कठोरतापूवर्क कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाए। जिले में नशा मुक्ति अभियान भी चलाया जाए जिससे ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उन्होंने मृतकों के प्रति अपनी शोक संवेदना भी व्यक्त की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि क्षेत्र में अवैध शराब सामग्री को जब्त करने की कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आज सागर के बुन्देलखंड मेडिकल चिकित्सा महाविद्यालय के सभागार में जनप्रतिनिधियों, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रखने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य शासन अपराध और असामाजिक गतिविधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिले के साथ-साथ आस-पास और सीमावर्ती क्षेत्रों में गहन जांच अभियान चलाया जाए। उन्होंने कहा जहाँ कहीं भी शंका या संदिग्ध गतिविधि की गुंजाइश हो, वहाँ तत्परता से पड़ताल की जाए और सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को कहा कि पूरी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना अनिवार्य है। उन्होंने कहा अपराधियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि किसी निर्दोष के विरुद्ध कार्रवाई नहीं हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शांति एवं सौहार्द बिगाड़ने की मंशा से सोशल मीडिया या अन्य विभिन्न माध्यमों पर अनावश्यक अफवाह फैलाने वाले तत्वों पर पैनी नजर रखने और उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में नशा विरोधी अभियान को गति देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नशे के अवैध कारोबार को पूरी तरह ध्वस्त किया जाए। साथ ही, नशा मुक्ति के क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों को साथ लेकर जनजागरूकता और नशा मुक्ति के प्रभावी कार्यक्रम संचालित किए जाएं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारी सरकार के रहते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के समय कठोर कानून बनाया गया कि इसमें धारा 49 और बाकी 304 जोड़ते हुए हत्या से लेकर आजीवन कारावास और फांसी तक की सजा देने का प्रावधान है। इस प्रकार की घटना में लिप्त है, उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। हमने प्रशासन को फ्री हैंड दिया है कि वह उस पर कठोर से कठोर कार्रवाई करें, जिनके अवैध अतिक्रमण हैं या अलग से किसी ने इस प्रकार से अपना साम्राज्य चलाया है, उस पर भी काम करें।
पेसा मोबिलाइज़र्स के प्रति हमारी सद्भावना, समाधान जरूर निकालेंगे: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के सभी पेसा मोबिलाइज़र्स के प्रति सरकार संवेदनशील है। इनके प्रति सरकार सद्भावनापूर्वक प्रयास कर रही है। पेसा मोबिलाइज़र्स के रोजगार और इनकी मदद के लिए हम विचार कर रहे हैं। शीघ्र ही कोई न कोई समाधान जरूर निकलकर सामने आएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को मुख्यमंत्री निवास में मंडला-डिण्डौरी और अन्य जिलों से आईं पेसा मोबिलाइज़र्स बहनों को संबोधित कर रहे थे। इन बहनों ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को राखी बांध कर अपना स्नेह और अपनत्व व्यक्त किया।
बहनों ने मुख्यमंत्री को रूमाल ओढ़ाया, फूल-श्रीफल दिया, राखी बांधी, मिठाई खिलाई और बड़े अपनत्व से कहा कि वे सब अपने बड़े भाई से मिलने ही मुख्यमंत्री निवास आई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राखी बंधवाकर राखी के नेग स्वरूप सभी बहनों को अपनी ओर से स्नेह राशि दी। मुख्यमंत्री ने सभी बहनों का मुख्यमंत्री निवास में अभिनंदन कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने बहनों से पूछा - लाड़ली बहना योजना की राशि मिलती है ? बहनों ने कहा - हां। मुख्यमंत्री ने कहा कि बहनों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकार हर स्तर पर प्रयास कर रही है। सबकी आर्थिक सुरक्षा के लिए हम कटिबद्ध हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव से पेसा मोबिलाज़र्स रहीं इन बहनों ने उन्हें फिर से इसी पद पर नियुक्ति देने की मांग की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पेसा कानून के तहत चलाई गई यह केंद्र सरकार की योजना थी। जिसे केंद्र सरकार ने ही बंद किया है। परंतु प्रदेश के सभी पेसा मोबिलाइज़र्स के प्रति संवेदना और सद्भावना रखते हुए मध्यप्रदेश सरकार ने केंद्र सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्रालय को पत्र प्रेषित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन बहनों को आश्वस्त किया कि मध्यप्रदेश सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, जनजातीय कार्य विभाग, सामाजिक न्याय विभाग और वित्त विभाग मिलकर पेसा मोबिलाइज़र्स की बेहतरी के लिए संवेदनशीलतापूर्वक विचार कर समस्या निवारण का काम कर रहे हैं। शीघ्र ही कोई न कोई सकारात्मक समाधान निकलकर सामने आएगा।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय श्री नीरज मंडलोई, मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. सुदाम खाड़े, संचालक जनसम्पर्क अरविंद दुबे, अन्य अधिकारी, भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी, पेसा मोबिलाइज़र्स संघ के अध्यक्ष उपेंद्र कुमार कोड़ापे एवं पेसा मोबिलाइज़र्स बहनें उपस्थित थीं।
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग और एफसीआई ने खाद्यान्न प्रबंधन में दक्षता, प्रौद्योगिकी और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
देलही : खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने नई दिल्ली में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। समझौता ज्ञापन भारतीय खाद्य निगम के लिए एक व्यापक निष्पादन ढांचा स्थापित करता है, जिसका उद्देश्य संचालन दक्षता में सुधार, जवाबदेही को मजबूत करना और खाद्यान्न प्रबंधन में आधुनिकीकरण में तेजी लाना है।
समझौता ज्ञापन भंडारण घाटे में कमी, भंडारण क्षमता का मनोनुकूल उपयोग, लॉजिस्टिक और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में सुधार के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को मजबूत करने सहित प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है। यह एफसीआई के संचालन की दक्षता, पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने के लिए व्यावसायिक प्रक्रियाओं के अधिक डिजिटलीकरण और आधुनिक सूचना प्रौद्योगिकी समाधानों को अपनाने पर भी जोर देता है।
आधुनिकीकरण के एजेंडे के हिस्से के रूप में, समझौता ज्ञापन एफसीआई कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण और कौशल विकास पहल प्रदान करता है, जिससे संगठन उभरती प्रौद्योगिकियों और खाद्यान्न प्रबंधन की समकालीन प्रणालियों को प्रभावी ढंग से अपनाने में सक्षम बनाता है।
खाद्य निगम अधिनियम, 1964 के तहत 1965 में स्थापित, एफसीआई भारत सरकार की ओर से खाद्यान्नों की खरीद, भंडारण, आवाजाही और वितरण करके देश की खाद्य सुरक्षा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके संचालन में शामिल सार्वजनिक संसाधनों की व्यापकता को देखते हुए, खाद्य सब्सिडी का कुशल उपयोग और संचालन प्रक्रियाओं में निरंतर सुधार प्रमुख प्राथमिकताएं हैं।
वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (एफआरआई] ने 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी लेनदेन को रोका
देलही : दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने डिजिटल अर्थव्यवस्था में नागरिक सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए अपने वित्तीय धोखाधड़ी जोखिम संकेतक (एफआरआई) के माध्यम से 22 मई 2025 को इसके लॉन्च होने के पंद्रह महीनों के भीतर ही 5,000 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध साइबर धोखाधड़ी के नुकसान को रोकने में सहायता की है। इस धन का पता लगाने, उसका लेनदेन रोकने या उसे वापस पाने की कोई आवश्यकता नहीं पड़ी क्योंकि यह धन तो नागरिकों के खाते से निकला ही नहीं।
यह उपलब्धि उस पहल के निर्णायक रूप से विस्तार का प्रतीक है जिसने संचालन के पहले छह महीनों में 660 करोड़ रुपये के नुकसान को रोका था। यह डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी से नागरिकों को बचाने में दूरसंचार विभाग की खुफिया जानकारी की बढ़ती भूमिका और दूरसंचार, बैंकिंग, फिनटेक, प्रतिभूति, बीमा और कानून प्रवर्तन प्रणालियों के बीच समन्वित कार्रवाई की शक्ति को दर्शाता है।
5,000 करोड़ रुपये के आंकड़े के पीछे व्यक्तिगत सुरक्षा के लाखों मामले छिपे हैं: एक पेंशनभोगी जिसने फर्जी केवाईसी कॉल के कारण अपनी जीवन भर की बचत नहीं खोई; एक छोटा व्यापारी जिसका "धोखाधड़ी करने वाले आपूर्तिकर्ता" को किया गया भुगतान भेजने से कुछ सेकंड पहले रोक दिया गया; पहली बार डिजिटल उपयोग करने वाला एक व्यक्ति जिसने स्क्रीन पर चेतावनी देखकर भुगतान का काम रोक दिया। हर मामले में नागरिक को नुकसान होने से पहले ही सुरक्षा प्रदान की गई न कि बाद में जांच-पड़ताल की परेशानी में पड़ने दिया गया।
कुल मिलाकर सुरक्षा उपायों की गति में तीव्र वृद्धि हुई है। एफआरआई के उपयोग से कुल मिलाकर हुई बचत अगस्त 2025 में 139.16 करोड़ रुपये थी जो बढ़कर अगस्त 2026 तक 5,043.73 करोड़ रुपये हो गई जिसमें केवल अप्रैल 2026 से शुरू हुए चार महीनों में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई क्योंकि बैंकों और भुगतान प्लेटफार्मों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ा है।
केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने भारतीय कोयला कंपनियों के लिए पहली क्षेत्रव्यापी सीएसआर रूपरेखा का शुभारंभ किया
देलही : कोयला मंत्रालय ने कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के साथ मिलकर आज नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में अपनी प्रमुख कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) पहलों—थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (टीबीएसवाई) और नन्हा सा दिल—के अंतर्गत महत्वपूर्ण उपलब्धियों का उत्सव मनाया तथा भारतीय कोयला कंपनियों के लिए व्यापक सीएसआर रूपरेखा का शुभारंभ किया।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी, कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे तथा भारत सरकार के कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त के साथ वरिष्ठ अधिकारी, चिकित्सा विशेषज्ञ, कार्यान्वयन भागीदार और लाभार्थी परिवार उपस्थित थे।
थैलेसीमिया बाल सेवा योजना (टीबीएसवाई)
थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया—दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों—से पीड़ित बच्चों की उपचार संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए शुरू की गई टीबीएसवाई देशभर में 4 अस्पतालों के प्रारंभिक नेटवर्क से बढ़कर 21 सूचीबद्ध अस्पतालों तक पहुंच गई है। सीआईएल भारत का एकमात्र केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई) है जिसने थैलेसीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया जैसे दुर्लभ आनुवंशिक रक्त विकारों के लिए इस स्तर की स्वास्थ्य सेवा पहल शुरू की है।
इस योजना के अंतर्गत चार चरणों में कुल 130 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) के लिए प्रति मरीज 10 लाख रुपये तक की सहायता राशि सीधे सूचीबद्ध अस्पतालों को प्रदान की जाती है। अब तक 1,050 से अधिक बीएमटी पूरे किए जा चुके हैं और उपचार प्राप्त करने वाले बच्चों में से भारी बहुमत अब सामान्य एवं स्वस्थ जीवन जी रहा है। इस योजना का कार्यान्वयन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के निगरानी मार्गदर्शन में थैलेसीमिक्स इंडिया के समन्वय से किया जा रहा है।
नन्हा सा दिल
जन्मजात हृदय दोष (सीएचडी) की समस्या से निपटने के लिए नन्हा सा दिल पहल शुरू की गई है। भारत में प्रतिवर्ष अनुमानित 2.4 लाख नवजात बच्चे जन्मजात हृदय दोष से प्रभावित होते हैं, जिनमें से केवल लगभग 5 प्रतिशत को समय पर उपचार मिल पाता है।
सीआईएल द्वारा मार्च 2024 में झारखंड के चार जिलों से श्री सत्य साईं हेल्थ एंड एजुकेशन ट्रस्ट के साथ साझेदारी में शुरू की गई इस पहल का विस्तार बाद में सीआईएल की सहायक कंपनियों—एसईसीएल, सीसीएल, एनसीएल और डब्ल्यूसीएल—के माध्यम से किया गया। आधुनिक नैदानिक उपकरणों का उपयोग कर 2 लाख से अधिक बच्चों की जांच की जा चुकी है और 1,500 से अधिक सुधारात्मक सर्जरी की गई हैं। मरीजों के परिवारों के लिए यह उपचार पूरी तरह निःशुल्क है, जिसमें यात्रा और अस्पताल में भर्ती होने का खर्च भी शामिल है।
गुजरात के वडोदरा में ^नमो फॉर विकसित भारत* कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री के सम्बोधन का मूल पाठ
देलही : भारत माता की जय।
भारत माता की जय।
गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल, इस कार्यक्रम में ऑनलाइन हमारे साथ अनेक राज्यों के महानुभाव जुड़े हैं। महाराष्ट्र के गवर्नर जिष्णु देव वर्मा , मुख्यमंत्री देवेंद्र फ़डणवीस , डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे , डिप्टी सीएम सुनेत्र पवार , अन्य मंत्रीगण, सांसदगण, विधायकगण और वहां पर भी इकट्ठे हुए लाखों नागरिक भाई-बहन। यहां मंच पर उपस्थित केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी अश्विनी वैष्णव, उपमुख्यमंत्री, युवा नेता हर्ष संघवी, गुजरात सरकार के मंत्रीगण, उपस्थित अन्य जनप्रतिनिधिगण, गुजरात के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।
और खास इसलिए के मेरे ब़डौदा के महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी का ये मैदान अलग-अलग फील्ड में काम करने वाले सभी साथियों का साथ और विकास का ये उत्सव, यहां सबकुछ एक साथ हो रहा है।
आज मैं विकसित भारत की यात्रा को और गति देने के लिए आपके बीच आया हूं। थोड़ी देर पहले यहां देश के विकास से जुड़े हज़ारों करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। मैं देश की जनता को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। इस विकास पर्व पर आप सभी ने जिस सेवा भाव से और सेवा भाव के साथ पूरे वडोदरा शहर में स्वच्छता से स्वागत अभियान चलाया है, इसके लिए मैं वड़ोदरा के हर एक नागरिक को ह्दय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, उनकी सराहना करता हूं। और ये जो आपने रंग दिखाया ना, मैं कल एक वीडियो देख रहा था, सीना चौड़ा हो गया, वाह! क्या ये मेरा वडोदरा है? और अब तो गणेशोत्सव की तैयारी, बाद में नवरात्रि। और गणेशोत्सव और नवरात्रि पूरा गुजरात का ध्यान वडोदरा पर होता है। और आज आपने, मैं देख रहा था पिछले एक सप्ताह से हर परिवार में वातावरण बन गया है स्वच्छता का। मुझे लगता है कि इस बार जब गणेश जी पधारेंगे ना, सारे आशीर्वाद वड़ोदरा पर बरसने वाले हैं।
इस वर्ष लाल किले से मैंने विकसित भारत के लिए संकल्प की सप्तधारा का आह्वान किया है। इस सप्तधारा में एक धारा गतिशक्ति की भी है। विकसित भारत के लिए हमें ऐसी कनेक्टिविटी चाहिए, जो सुगम भी हो और जमाने के हिसाब से जरा तेज भी हो। वड़ोदरा तो गतिशक्ति यूनिवर्सिटी का शहर है। आज यहां से डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की आखिरी कड़ियां भी जुड़ गई हैं। आज 2800 किलोमीटर से अधिक का डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर प्रोजेक्ट पूरा हो गया। ये 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत ऐतिहासिक कार्य संपन्न हुआ है।
साथियों,
ये डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, इस बात का साक्षी है कि बीते 12 साल में देश की काम करने की संस्कृति कैसे बदली है। इस डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 2004 में विचार शुरू हुआ था। यानी, यहां मैं सारे नौजवान देख रहा हूं, जब इसका विचार शुरू हुआ, आप में से बहुत लोग होंगे जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा, उस समय शुरू हुआ था। 2006 में एक विशेष कंपनी बनाई गई इस काम को करने के लिए और फिर 2014 तक फाइलें ही यहां से वहां होती रहीं। फाइलें टेबल पर यात्रा कर रही थी और दुर्भाग्य देखिए, इन फाइलों को भी कोई डेडिकेटेड कॉरिडोर नसीब नहीं हुआ, फाइल को भी नहीं नसीब हुआ। फाइलें अटकती थीं, लटकती थीं, भटकती थीं। और 2014 में वड़ोदरा के और गुजरात के और देश के लोगों ने मुझे गुजरात से निकाल करके दिल्ली भेज दिया। पहले वाली सरकार 2000 तक रही। आपने मुझे भेजा और उनकी विदाई हुई, और सच्चाई ये थी कि सात-आठ वर्ष में, जरा मेरे नौजवान सुन लीजिए, ये याद रखिए, सात-आठ वर्ष में एक किलोमीटर फ्रेट कॉरिडोर पर भी काम पूरा नहीं हो पाया था। अगर उनके हिसाब से देश चलाते, तो पता नहीं आपके बाद तीन-चार पीढ़ियां आती, तो भी नहीं होता। भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को ट्रांसफॉर्म करने वाले प्रोजेक्ट की ये हालत करके रखी थी।
हमारी ज्ञान परंपरा में व्यावहारिकता, गहनता और जीवन का दर्शन : राज्यपाल पटेल
भोपाल : राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने कहा कि भारतीय संस्कृति प्रकृति पूजक है। ब्रह्माण्ड के सूर्य, चन्द्रमा, ग्रह, नक्षत्र हमारी जीवन संस्कृति का अभिन्न अंग है। प्रकृति के पांचों तत्व वायु, अग्नि, जल, पृथ्वी और नभ हमारी दैनिक दिनचर्या में शामिल है। यह महान ज्ञान परंपरा अनंत काल से शाश्वत है। इसमें व्यावहारिकता, गहनता और जीवन का गूढ़ दर्शन है। जरूरी है कि इस अद्भुत और गौरवशाली परंपरा को वर्तमान और भावी पीढ़ी तक सार्थक रूप से पहुंचाया जाए। आयोजक इस दिशा में बेहतर पारस्परिक समन्वय के साथ चिंतन करें, शोध और अनुसंधान को बढ़ावा दें। भारतीय ज्ञान परंपरा का निरंतर समृद्धता में योगदान करें।
राज्यपाल पटेल मंगलवार को मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग और निजी विश्वविद्यालय संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा को आगे बढ़ाने की निजी विश्वविद्यालयों के माध्यम से की गई पहल के लिए आयोजकों को बधाई और शुभकामनाएं दी। कुशाभाऊ सभागार में आयोजित कार्यशाला का आयोजन ''भारतीय ज्ञान परंपरा के विकास में निजी विश्वविद्यालयों के योगदान'' विषय पर किया गया था। इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री इंदर परमार भी मौजूद थे।
राज्यपाल पटेल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का महान स्त्रोत हमारी वैदिक, पौराणिक और प्राचीन संस्कृति है। रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथ, ज्ञान, विज्ञान और संस्कार के अद्भुत भंडार है। इन ग्रंथों के प्रत्येक पात्र प्रेम, आदर, त्याग, स्वाभिमान, सम्मान और नैतिकता के आदर्श प्रतीक है। उन्होंने निजी विश्वविद्यालयों से अपेक्षा की है कि हमारी परंपरा और उसके ज्ञान तत्वों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने की ज़िम्मेदारी स्वीकारें। विद्यार्थियों को समाज के गरीब, पिछड़े, वंचित और कमजोर वर्गों के प्रति संवेदनशील बनाएं। उन्हें विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सक्षम और सामर्थ्यवान बनाएं। उन्होंने कहा कि आयोजक नियमित रूप से ऐसे आयोजनों की समीक्षा के द्वारा भविष्य की चुनौतियों और उनके समाधान के प्रयास करें।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने तातारस्तान के प्रमुख एच.ई. रुस्तम मिन्निखानोव से की मुलाकात
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई प्रवास के दौरान वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित 'एआईएम कांग्रेस-2026' में सहभागिता की। इस अवसर पर उन्होंने रूसी गणराज्य तातारस्तान के प्रमुख (रईस) महामहिम रुस्तम मिन्निखानोव के साथ उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक की।
बैठक का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश और तातारस्तान के बीच व्यापार एवं निवेश सहयोग को प्रगाढ़ करना, सेक्टर-विशिष्ट रणनीतिक साझेदारियों की पहचान करना तथा आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 (GIS) में तातारस्तान की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने महामहिम रुस्तम मिन्निखानोव को मध्यप्रदेश की समृद्ध औद्योगिक क्षमताओं और निवेश अनुकूल वातावरण से अवगत कराते हुए आगामी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 में सम्मिलित होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। तातारस्तान के प्रमुख ने इस निमंत्रण का स्वागत करते हुए आश्वस्त किया कि वे एक सशक्त निवेशक प्रतिनिधिमंडल (डेलिगेशन) के साथ समिट में भाग लेंगे तथा राज्य में निवेश की ठोस संभावनाओं को आगे बढ़ाएंगे।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों के बीच एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग, पेट्रोकेमिकल्स, फूड प्रोसेसिंग, इंजीनियरिंग, लॉजिस्टिक्स, कौशल विकास, कृषि एवं इनोवेशन-आधारित आधुनिक तकनीकों में सहयोग पर विस्तृत विमर्श हुआ। भारत और तातारस्तान के प्रगाढ़ होते आर्थिक संबंधों के परिप्रेक्ष्य में मध्यप्रदेश के साथ बीटूबी और जीटूजी स्तर पर दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।
तातारस्तान की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव, उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों और राज्य के व्यापारिक प्रतिनिधियों को “टाइम: रूस–भारत” फोरम तथा संबंधित प्रदर्शनी में सहभागिता के लिये आमंत्रित किया गया। बैठक में दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय बिजनेस मिशन आयोजित करने, संयुक्त परियोजनाओं की संभावनाओं को धरातल पर उतारने और त्वरित समन्वय के लिए अधिकृत नोडल ऑफिसर्स को नामित करने पर भी सहमति व्यक्त की।
‘संकट से उबरना - भारत के गिद्धों का संरक्षण’ विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला
नईदिल्ली। अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 आज हरियाणा के पंचकुला में मनाया गया। इस अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ‘संकट से उबरना - भारत के गिद्धों का संरक्षण’ विषय पर एक राष्ट्रीय स्तर की कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में हरियाणा राज्य के पर्यावरण, वन और वन्यजीव मंत्री श्री राव नरबीर सिंह के साथ-साथ केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और हरियाणा राज्य सरकार के वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित हुए।
यह कार्यक्रम वन एवं वन्यजीव संरक्षण मंत्रालय, केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, हरियाणा वन एवं वन्यजीव विभाग, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी और पिंजोर स्थित जटायु संरक्षण प्रजनन केंद्र के सहयोग से आयोजित किया गया। इसमें भारत में गिद्ध संरक्षण के लिए सहयोगात्मक प्रयासों को सुदृढ़ करने हेतु वरिष्ठ वन अधिकारी, वैज्ञानिक, पशु चिकित्सक, चिड़ियाघर विशेषज्ञ, संरक्षण कार्यकर्ता और अन्य हितधारक एक साथ आए।
सभा को संबोधित करते हुए यादव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का पर्यावरण संरक्षण दृष्टिकोण समग्र पारिस्थितिकी तंत्र-उन्मुख संरक्षण मॉडल पर आधारित है और किसी विशेष प्रजाति तक सीमित नहीं है। मंत्री जी ने कहा कि यह दृष्टिकोण विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण की पहलों में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, चाहे वह विशालकाय बिल्लियां हों, सुस्त भालू, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड, डॉल्फ़िन, घड़ियाल, जंगली जल भैंस या गिद्ध। गिद्धों के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि भारत, जो कि विभिन्न प्रकार के निवासी और प्रवासी गिद्धों का घर है उनके सफल संरक्षण के लिए प्रयासरत है जिनमें - श्वेत-पूंछ वाले, लंबी चोंच वाले, पतली चोंच वाले, लाल सिर वाले, मिस्र के, हिमालयी ग्रिफ़ॉन, यूरेशियन ग्रिफ़ॉन, सिनेरियस और दाढ़ी वाले गिद्ध शामिल हैं।
यादव ने कुशल सफाईकर्मी के रूप में गिद्धों की महत्वपूर्ण पारिस्थितिक भूमिका पर प्रकाश डाला और उन्हें प्रकृति की सफाई प्रणाली बताया। जानवरों के शवों को तेजी से खाकर, गिद्ध पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण में सहायता करते हैं और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया जलवायु परिवर्तन, मानव-पशु संघर्ष जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है और 1990 के दशक से भारतीय गिद्धों की आबादी में तेजी से गिरावट देखी गई है, जिसका मुख्य कारण उनकी खाद्य श्रृंखला में व्यवधान और गिद्धों द्वारा खाए जाने वाले जानवरों के लिए दर्द निवारक दवाओं का उपयोग है।
मंत्री जी ने गिद्ध संरक्षण के लिए नीति निर्माण में ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ के समन्वित प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने गिद्ध-सुरक्षित पशु चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से गिद्ध-सुरक्षित क्षेत्र बनाने, सुरक्षित भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने और वन्य जीवन में प्रजातियों के संरक्षण में सहायता के लिए तकनीकी क्षमता निर्माण के निरंतर प्रयासों का आह्वान किया। मंत्री जी ने पशु चिकित्सकों, पशुपालकों, स्थानीय प्रशासनों और समुदायों से भी गिद्ध संरक्षण में सक्रिय योगदान देने और सुरक्षित शव प्रबंधन प्रथाओं को बढ़ावा देने की अपील की।
100 करोड़ पार ‘हनुमान अंश’, बॉक्स ऑफिस पर मचाया तहलका, अब हुआ बड़ा ऐलान
रायपुर। छोटे बजट की फिल्म ‘हनुमान अंश’ ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए 100 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन पार कर लिया है। फिल्म की इस जबरदस्त सफलता के बीच उत्तराखंड सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फिल्म को पूरे उत्तराखंड में टैक्स-फ्री घोषित कर दिया है। करीब 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी ‘हनुमान अंश’ रिलीज के करीब एक महीने बाद भी सिनेमाघरों में मजबूती से टिकी हुई है। बड़ी फिल्मों के बीच रिलीज होने के बावजूद फिल्म की कमाई लगातार जारी है और अब यह बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हो चुकी है।
हनुमान अंश’ नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक यात्रा पर आधारित फिल्म है। फिल्म में बाबा नीम करोली महाराज की भक्ति, सेवा और आध्यात्मिक जीवन को दिखाने की कोशिश की गई है। शुक्रवार को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने थिएटर पहुंचकर फिल्म देखी। फिल्म देखने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने इसकी जमकर तारीफ की और इसे पूरे उत्तराखंड में टैक्स-फ्री करने का ऐलान किया।
सीएम धामी ने कहा कि वह चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस फिल्म को देखें। उनके मुताबिक, फिल्म में उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत और संस्कृति को शानदार तरीके से प्रस्तुत किया गया है। पुष्कर सिंह धामी ने फिल्म की टीम को सफलता की बधाई देते हुए कहा कि ‘हनुमान अंश’ के जरिए लोगों को बाबा नीम करोली महाराज की तपस्या, त्याग, सेवा और भगवान हनुमान के प्रति उनकी अटूट आस्था को जानने और समझने का अवसर मिला है।
उन्होंने कहा कि बाबा नीम करोली महाराज ने अपना जीवन मानव सेवा, आध्यात्मिक साधना और समाज के कल्याण के लिए समर्पित किया। उनका जीवन यह संदेश देता है कि भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, समर्पण और मानव कल्याण का मार्ग भी है।
‘हनुमान अंश’ की बॉक्स ऑफिस कमाई की बात करें तो फिल्म ने अपने 30वें दिन 100 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन पार कर लिया है। वहीं फिल्म का नेट कलेक्शन करीब 89 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। खास बात यह है कि रिलीज के पांचवें हफ्ते में भी फिल्म की कमाई की रफ्तार बनी हुई है। महज 2 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म का 100 करोड़ के क्लब में पहुंचना बॉक्स ऑफिस पर किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं है।
डॉ. विनय प्रकाश सिंह लगातार दूसरी बार चुने गए एपीपीयू के महासचिव
नईदिल्ली। भारतीय डाक सेवा के 1988 बैच के अधिकारी डॉ. विनय प्रकाश सिंह को एशियाई-प्रशांत डाक संघ (एपीपीयू) के महासचिव के रूप में लगातार दूसरी बार चार वर्षीय कार्यकाल के लिए पुनः चुने गए। 4 सितंबर, 2026 को बैंकॉक में आयोजित 14वें एपीपीयू सम्मेलन में उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया। उनका पुनः चुनाव एशिया-प्रशांत क्षेत्र के डाक प्रशासनों के उनके नेतृत्व में विश्वास और सर्वसम्मति को दर्शाता है और अंतर्राष्ट्रीय डाक सहयोग में भारत के योगदान की एक महत्वपूर्ण मान्यता है। उनका दूसरा कार्यकाल जनवरी 2027 से शुरू होकर दिसंबर 2030 तक चलेगा।
डॉ. सिंह का पुनर्निर्वाचन ऐसे समय में हुआ है जब एपीपीयू एशिया-प्रशांत क्षेत्र में डाक सहयोग को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बैंकॉक में मुख्यालय वाला यह संघ 32 सदस्य देशों का एक अंतर-सरकारी संगठन है और संयुक्त राष्ट्र की डाक क्षेत्र के लिए विशेष एजेंसी, यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन (यूपीयू) के क्षेत्रीय संघ के रूप में कार्य करता है। 2022 में 13वें एपीपीयू कांग्रेस में अपने पहले चुनाव के बाद जनवरी 2023 में पदभार संभालने के बाद से, डॉ. सिंह ने डाक प्रशासनों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और पूरे क्षेत्र में डाक सेवाओं के विकास और आधुनिकीकरण में योगदान दिया है। उनका दूसरा कार्यकाल क्षेत्रीय सहयोग को सुदृढ़ करने और डाक क्षेत्र में साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का और अवसर प्रदान करेगा।
तीन दशकों से अधिक के अपने करियर में, डॉ. सिंह ने भारत सरकार में कई वरिष्ठ पदों पर कार्य किया है, जिनमें डाक सेवा बोर्ड के सदस्य, डाक विभाग में वरिष्ठ उप महानिदेशक और मुख्य सतर्कता अधिकारी, उत्तर प्रदेश सर्कल के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल और इंडिया पोस्ट मुख्यालय में मुख्य महाप्रबंधक शामिल हैं। उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग, अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम और सेना डाक सेवा कोर में भी कार्य किया है। एक प्रख्यात शिक्षाविद के रूप में, उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आधुनिक इतिहास में स्वर्ण पदक प्राप्त किया है और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से प्रबंधन में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। डाक विभाग डॉ. विनय प्रकाश सिंह को उनके पुनः निर्वाचित होने पर बधाई देता है और एशियाई-प्रशांत डाक संघ के महासचिव के रूप में उनके सफल और प्रभावशाली दूसरे कार्यकाल की कामना करता है।
महानंदा एक्सप्रेस हुई डिरेल, यात्रियों में मचा हड़कंप
सुबह-सुबह हुई घटना से ट्रेन में सवार यात्रियों के बीच कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि, हादसे में किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, घटना के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। फिलहाल तकनीकी टीम ट्रैक, सिग्नल और परिचालन व्यवस्था से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
बदलते मौसम के बीच मां वैष्णो देवी की यात्रा जारी, बारिश में भी नहीं डिगा श्रद्धालुओं का उत्साह
बदलते मौसम के बीच भी भक्तों की आवाजाही लगातार बनी हुई है। हालांकि पहाड़ी क्षेत्र में मौसम के अचानक बदलने की संभावना को देखते हुए श्रद्धालुओं को सतर्क रहने और प्रशासन तथा श्राइन बोर्ड के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जाती है। फिलहाल मां वैष्णो देवी की यात्रा सामान्य रूप से जारी है और श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ भवन पहुंचकर माता के दर्शन कर रहे हैं। शनिवार रात हुई तेज बारिश भी भक्तों की आस्था को नहीं रोक सकी। मौसम की चुनौती के बीच मां के जयकारों के साथ आगे बढ़ते श्रद्धालुओं की तस्वीर एक बार फिर वैष्णो देवी यात्रा के प्रति लोगों की गहरी श्रद्धा को दर्शाती है।
छात्रों को नशे की बुराई के प्रति जागरूक करें शिक्षक : प्रधानमंत्री मोदी
नईदिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शिक्षकों से छात्रों को नशे की बुराई के प्रति जागरूक करने और उनके ‘स्क्रीन टाइम’ को कम करने में मदद करने की अपील की है। पीएम मोदी ने शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों से बातचीत के दौरान कहा कि समाज के सभी लोगों को छात्रों को रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करना चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षकों को छात्रों के शैक्षणिक प्रदर्शन से आगे बढ़कर उनके व्यवहार और रोजमर्रा के जीवन पर भी ध्यान देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त परिवारों की संख्या में कमी आने के कारण बच्चों के जीवन में शिक्षकों की भूमिका अब और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
उन्होंने नशे की समस्या का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ बड़े शहरों और विश्वविद्यालयों में यह पता लगाना मुश्किल होता है कि कोई इसकी चपेट में आ गया है या नहीं, क्योंकि यह पता ही नहीं चलता कि कौन किसे क्या दे रहा है। पीएम मोदी ने कहा, ‘‘ऐसी परिस्थितियों में शिक्षकों को जागरूकता फैलाने की पहल करनी चाहिए और यदि किसी बच्चे के व्यवहार में कोई बदलाव दिखाई दे तो उस पर भी बारीकी से नजर रखनी चाहिए।’’
पीएम मोदी ने कहा, ‘‘आपको किसी छात्र के बचपन को खत्म नहीं होने देना चाहिए। छात्रों के जीवन में बचपन को जीवंत बनाए रखने में शिक्षक सबसे बड़ा योगदान दे सकते हैं।’’ इस बातचीत का वीडियो आज शनिवार को जारी किया गया।
ईटानगर में सीसीआरएएस की 106वीं आंतरिक वित्त समिति की हुई बैठक
नईदिल्ली। आयुर्वेदिक विज्ञान में अनुसंधान के लिए केंद्रीय परिषद (सीसीआरएएस) की आंतरिक वित्त समिति (आईएफसी) की 106वीं बैठक आज ईटानगर स्थित क्षेत्रीय आयुर्वेद अनुसंधान संस्थान (आरएआरआई) में आयोजित की गई। बैठक में सीसीआरएएस के विभिन्न चल रहे अनुसंधान और विकास कार्यक्रमों, संस्थागत पहलों, बुनियादी ढांचे के विकास और भविष्य की प्राथमिकताओं की समीक्षा की गई, जिनका उद्देश्य आयुर्वेद और संबंधित विज्ञानों में वैज्ञानिक अनुसंधान को और मजबूत करना है।
बैठक की अध्यक्षता आयुष मंत्रालय के वरिष्ठ सांख्यिकीय सलाहकार श्री सत्यजीत पॉल ने की। सीसीआरएएस के महानिदेशक और समिति के सदस्य सचिव प्रो. (वैद्य) रबी नारायण आचार्य ने एजेंडा के विषयों को प्रस्तुत किया और समिति को परिषद की प्रमुख उपलब्धियों, मुख्य पहलों और महत्वपूर्ण सफलताओं के बारे में जानकारी दी।
बैठक में शोध एवं विकास गतिविधियों, संस्थागत क्षमता, इंफ्रास्ट्रक्चर और अलग-अलग कार्यक्रमों को असरदार ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया। समिति ने इस बात पर भी जोर दिया कि आयुर्वेद शोध में हुई प्रगति का फायदा बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और लोगों तक आयुष-आधारित स्वास्थ्य सेवाओँ की बेहतर पहुंच के रूप में मिलना चाहिए।
इस बैठक में सलाहकार, आयुष मंत्रालय डॉ. ए. रघु; अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान में प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार भट्टेड; इंडियन फार्माकोपिया आयोग में सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. विवेकानंदन कलाईसेल्वन; आईएफडी में निदेशक श्री अमरेंद्र सिंह; आयुष मंत्रालय में निदेशक श्रीमती विजयलक्ष्मी भारद्वाज; सीसीआरएएस में उप निदेशक (प्रशासन) श्री दीपक कोचर; और सीसीआरएएस में निदेशक (इंस्टीट्यूट) डॉ. प्रताप मखीजा के साथ-साथ आयुष मंत्रालय और सीसीआरएएस के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
समिति के अध्यक्ष और सदस्यों ने खासकर शोध और विकास के क्षेत्रों में सीसीआरएएस की प्रगति और पिछले वित्त वर्ष के दौरान कोष के 100 प्रतिशत इस्तेमाल के लिए सराहना की।
बैठक का समापन वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाने, संस्थागत सहयोग को मजबूत करने, कार्यक्रमों को समय पर लागू करने और आयुष सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर देने के साथ हुआ। समिति ने शोध के नतीजों को सार्वजनिक स्वास्थ्य और समाज के लिए सार्थक फायदों में बदलने के महत्व को फिर से दोहराया।
जन्माष्टमी पर उम्मीद की जीत नौ दिन बाद सुरंग से जिंदा निकले दो लोग