देश-विदेश
नेचुरल फार्मिंग में लीडर बना, हल्दी प्रोडक्शन में बड़ी सफलता मिली
“हैदराबाद के प्रीमियम मार्केट में नेचुरल प्रोडक्ट्स की डिमांड हर साल 30 परसेंट बढ़ रही है। यह डिमांड तेज़ी से नेचुरल फार्मिंग को बढ़ावा दे रही है।” प्रो. महालक्ष्मी ने कहा कि किसान नेचुरल फर्टिलाइज़र तरीकों से ज़्यादा मसाले और सब्जियां उगा रहे हैं और इसके नतीजे अगले दो से तीन सालों में दिखने लगेंगे।
उत्तराखंड के CM धामी नैनीताल में बिड़ला इंस्टीट्यूट के सालाना फेस्टिवल में हुए शामिल
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स का चीफ सेक्रेटरी लेवल पर रेगुलर रिव्यू किया जाना चाहिए ताकि बेवजह की देरी से बचा जा सके और समय पर काम पूरा हो सके।
केदारनाथ यात्रा 2026: आज से हेलीकॉप्टर बुकिंग शुरू
शादी घर को गैस सिलेंडर के लिए नहीं जूझना पड़ेगा, आसानी से मिल रहा सिलेंडर
गांजा तस्करों की कार पलटी, भारतमाला मार्ग पर बड़ा तस्करी मामला
घटना के बाद इलाके में पुलिस ने सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है और फरार आरोपियों की तलाश की जा रही है। आसपास के क्षेत्रों में नाकाबंदी कर दी गई है और संभावित रूटों पर जांच तेज कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, भारतमाला मार्ग का उपयोग अक्सर तस्करी के लिए किया जा रहा है, जिस पर अब निगरानी और सख्त की जाएगी। इस मामले में तकनीकी जांच के साथ-साथ स्थानीय सूचना तंत्र को भी सक्रिय किया गया है। इस कार्रवाई को पुलिस के लिए एक बड़ी सफलता माना जा रहा है, हालांकि आरोपी अभी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
कोडीन कफ सिरप कांड: सपा नेता प्रदीप जायसवाल के रिश्तेदारों पर शिकंजा
यमुना नाव हादसा अपडेट; मृतकों की संख्या बढ़ी, कई अभी भी लापता, दो गिरफ्तार
23 मार्च से अब तक जरूरतमंदों को 12 लाख से अधिक 5-किलो के एलपीजी सिलेंडर बेचे गए: केंद्र
बयान में आगे कहा गया है कि सरकार ने आपूर्ति और मांग दोनों पक्षों पर कई युक्तिकरण उपाय लागू किए हैं, जिनमें रिफाइनरी उत्पादन बढ़ाना, शहरी क्षेत्रों में बुकिंग अवधि को 21 से बढ़ाकर 25 दिन और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिन तक करना तथा आपूर्ति के लिए क्षेत्रों को प्राथमिकता देना शामिल है।
सिद्धिविनायक मंदिर से चांदी के 7 मुकुट चोरी
Kanpur: घंटाघर स्थित सिद्धिविनायक गणेश मंदिर से शनिवार दिनदहाड़े चांदी के सात मुकुट चोरी हो गए। यह वारदात हेलमेट लगाए चोर ने साथी महिला के सहयोग से महज सात मिनट के अंदर की। मंदिर प्रबंधन को घटना की जानकारी शाम पांच बजे के बाद हुई। पुलिस को सूचना दी गई। चोरों की करतूत सीसीटीवी कैमरे में रिकार्ड हुई है। चांदी का अनुमानित वजन लगभग 600 ग्राम बताया जा रहा है। पुलिस ने चोरों की तलाश शुरू कर दी है। एसीपी कोतवाली आशुतोष कुमार सिंह के मुताबिक सुतरखाना के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर प्रबंधन ने शनिवार शाम लगभग पांच बजे चांदी के सात मुकुटचोरी होने की सूचना दी। हरबंशमोहाल पुलिस और क्राइम ब्रांच मौके पर पहुंची और मामले की जांच कराई।
रायसेन में उन्नत कृषि महोत्सव का आगाज़, हजारों किसानों का महासंगम
भोपाल। दशहरा मैदान, रायसेन (मध्य प्रदेश) में शनिवार से शुरू हुए तीन दिवसीय उन्नत कृषि महोत्सव, प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण का भव्य शुभारंभ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया, जहाँ मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए हजारों किसान, कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और कृषि व संबद्ध क्षेत्रों के प्रतिनिधि एक मंच पर जुटे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंच से सबसे पहले रायसेन की धरती पर उपस्थित अन्नदाता बहनों–भाइयों को सिर झुकाकर नमन करते हुए कहा कि वे स्वयं किसान परिवार से आते हैं और गाँव की मिट्टी में पले–बढ़े हैं, इसलिए किसान की मेहनत और संघर्ष को दिल से समझते हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि रायसेन में आयोजित यह उन्नत कृषि महोत्सव हमारे किसान भाइयों–बहनों के लिए केवल लाभदायक ही नहीं, बल्कि उनके जीवन की तस्वीर बदलने वाला सिद्ध होगा। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजक केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का अभिनंदन करते हुए कहा कि किसान के हित में इतना केंद्रित और विषयगत आयोजन वास्तव में सराहनीय है।
केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में विकसित, समृद्ध, गौरवशाली और आत्मनिर्भर भारत बनाने का महायज्ञ चल रहा है, जिसमें रक्षा और कृषि दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में मजबूत हुई देश की सुरक्षा व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत की स्पष्ट नीति है- हम किसी को छेड़ते नहीं, लेकिन यदि कोई हमें छेड़ेगा तो उसे छोड़ा भी नहीं जाएगा और इसी मजबूत रक्षा–नीति के साथ किसान और कृषि के विकास का बड़ा अभियान भी पूरी शिद्दत से चल रहा है।
म.प्र. के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि देश में अब शासन की कार्य–संस्कृति बदल चुकी है, विभाग अलग–थलग नहीं, बल्कि समन्वित और मिशन मोड में काम कर रहे हैं, और यह सब यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बदली हुई सोच और कार्यशैली का परिणाम है। उन्होंने मंच से जोरदार तालियों के बीच केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का अभिनंदन करते हुए कहा कि वे छह बार सांसद और छह बार विधायक रहे हैं और जिस भी काम को हाथ में लेते हैं, उसे सफलतापूर्वक आगे बढ़ाना उनकी पहचान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का यह भव्य कार्यक्रम पूरे मंच के लिए गर्व की बात है, जहाँ समय भले सीमित हो, लेकिन संकल्प असीमित है। उन्होंने इस मंच को एक ओर सीमा पर देश की रक्षा करने वाले जवानों के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दूसरी ओर खेत में देश की अर्थव्यवस्था संभालने वाले किसानों को एक साथ सम्मान देने वाला मंच बताते हुए कहा कि यह आयोजन दोनों की गरिमा बढ़ाने वाला ऐतिहासिक कार्यक्रम है, जहाँ देश सीमा पर सुरक्षित है और खेतों में मेहनतकश किसान भारत का मान–सम्मान बढ़ा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आत्मीय अगवानी
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की शनिवार को भोपाल के स्टेट हैंगर पर आत्मीय अगवानी की। केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह रायसेन में आयोजित कृषि महोत्सव प्रर्दशनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ के लिए ट्रांजिट विजिट पर स्टेट हैंगर भोपाल आये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय रक्षा मंत्री सिंह का पुष्प-गुच्छ एवं शॉल ओढ़ाकर प्रदेश में आत्मीय स्वागत-अभिनंदन किया। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय रक्षा मंत्री को स्मृति चिन्ह भी भेंट किया।
स्टेट हैंगर में अल्प-विश्राम के बाद केन्द्रीय रक्षा मंत्री सिंह, मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा केन्द्रीय किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर से रायसेन के लिए रवाना हुए।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर, भोपाल के लोकसभा सांसद आलोक शर्मा, विधायक विष्णु खत्री, महापौर मालती राय, जिलाध्यक्ष रविन्द्र यति, जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारियों ने भी केंद्रीय मंत्री सिंह को पुष्प-गुच्छ भेंट किए।
राजीव रंजन सिंह ने नई दिल्ली में समुद्री खाद्य निर्यातकों की बैठक 2026 की अध्यक्षता की
देलही : मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य पालन विभाग ने नई दिल्ली के अंबेडकर भवन में “सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026” का आयोजन किया। इस बैठक में मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय तथा पंचायती राज मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और पंचायती राज मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय और अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति से शोभा बढ़ाई। इस बैठक का उद्देश्य सरकार और उद्योग से जुड़े हितधारकों के बीच संवाद के लिए एक व्यवस्थित मंच प्रदान करना था, साथ ही निर्यातकों से बाजार तक पहुंच, मूल्य निर्धारण के दबाव और अनुपालन आवश्यकताओं से संबंधित वर्तमान चुनौतियों पर प्रतिक्रिया प्राप्त करना तथा द्वीपों, ईईजेड(विशेष आर्थिक क्षेत्र) और खुले समुद्र से मूल्य संवर्धन, बाज़ार विविधीकरण और समुद्री निर्यात के विस्तार के लिए आवश्यक उपायों पर विचार-विमर्श करना था।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ाने में निर्यातकों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, उन्होंने बताया कि भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका के अलावा अन्य बाजारों में बेहतर प्रदर्शन रहा है। बाजार और उत्पाद विविधीकरण की निरंतर आवश्यकता पर जोर देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कड़े नियामकीय अनुपालन के महत्व को रेखांकित किया, जिसमें एंटीबायोटिक प्रतिबंधों का पालन और ट्रेसबिलिटी प्रणाली को मजबूत करना शामिल है। विशेष आर्थिक क्षेत्र(ईईजेड) नियमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस ढांचे को एक्सेस पास के माध्यम से लागू किया जा रहा है, जिसमें सहकारी समितियों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि समावेशी विकास को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ईईजेड और खुले समुद्र से टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं को रेखांकित किया और बेहतर ऑनबोर्ड हैंडलिंग, मजबूत कोल्ड चेन अवसंरचना, बेहतर पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन तथा फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और निर्यात तंत्र को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक बाजारों की खोज पर बल दिया। निर्यातकों से ₹1 लाख करोड़ के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में कार्य करने और ओपन मार्केट दृष्टिकोण अपनाने का भी आग्रह किया गया। उन्होंने आश्वासन दिया कि ईआईसी, एनसीडीसी, नाबार्ड और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय जैसी संस्थाओं का पूरा सहयोग मिलेगा। उन्होंने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आयोजित निवेशक बैठक का भी उल्लेख किया, जिसके परिणामस्वरूप मत्स्य क्षेत्र को सुदृढ़ करने के लिए निवेश हुए हैं, विशेष रूप से समुद्री केज कल्चर, मोती की खेती और गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाजों के क्षेत्रों में निवेश में तेजी आई है।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी पहुंचे कतर... कतर के ऊर्जा मंत्री से की मुलाकात
रायपुर। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर 9 अप्रैल की दोपहर को कतर में दोहा पहुंचे। शाम को उन्होंने कतर के ऊर्जा कार्य राज्य मंत्री और कतर एनर्जी के अध्यक्ष तथा सीईओ साद शेरिदा अल-काबी से मुलाकात की। केंद्रीय मंत्री पुरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से कतर के आमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी और कतर के प्रधानमंत्री तथा विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी को शुभकामनाएं और एकजुटता एवं सहयोग का संदेश दिया।
पुरी ने युद्ध शुरू होने के बाद मार्च 2026 में प्रधानमंत्री मोदी और कतर के आमीर के बीच हुई दो टेलीफोन वार्ताओं को याद किया, जिनमें दोनों नेताओं ने संवाद और कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया था। प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय समुदाय को कतर सरकार की ओर से देखभाल और सहयोग के लिए आमीर के प्रति आभार व्यक्त किया था।
दोनों मंत्रियों ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा की, जिनमें उच्च स्तरीय बैठकें, व्यापार, निवेश, ऊर्जा, संस्कृति और दोनों देशों के बीच जन-संपर्क शामिल हैं। उन्होंने क्षेत्र में शीघ्र शांति और स्थिरता की बहाली और भारत तथा कतर के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की आशा व्यक्त की। कतर के मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने एक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बने रहने के लिए कतर देश की प्रतिबद्धता की पुष्टि की और भारत के साथ ऊर्जा संबंधों और सहयोग को जारी रखने तथा उसे और मजबूत करने की उम्मीद जताई।
दोनों मंत्रियों ने अमेरिका और इरान के बीच 8 अप्रैल को हुए दो सप्ताह के युद्धविराम समझौते का स्वागत किया। उन्होंने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान को जल्द से जल्द समाप्त करने और सामान्य स्थिति बहाल करने के महत्व पर बल दिया। इस संदर्भ में, उन्होंने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को बनाए रखने के लिए निर्बाध नौवहन और वैश्विक व्यापार प्रवाह की आवश्यकता पर बल दिया। केंद्रीय मंत्री पुरी ने कतर के ऊर्जा कार्य राज्य मंत्री काबी को उनकी मेजबानी के लिए धन्यवाद दिया। दोनों मंत्रियों ने आने वाले दिनों में नियमित संपर्क में रहने पर सहमति व्यक्त की।
प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में देश में सबसे अधिक नामांकन मध्यप्रदेश में
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में प्रदेश की उपलब्धि अन्य राज्यों से बेहतर है। उन्होंने योजना से अधिक से अधिक युवाओं को लाभान्वित करने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में ऐसे नए उपयोगी कोर्स भी डिजाइन किए जाएं, जो प्रशिक्षण के बाद युवाओं को तत्काल रोजगार दिलवाने में सहायक हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह निर्देश समत्व भवन में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार विभाग के कार्यों की समीक्षा बैठक में दिये। बैठक में तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार और राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम टेटवाल उपस्थित रहे।
बैठक में जाकनारी दी गई कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर आईटीआई की ग्रेडिंग जारी की है, इसमें मध्यप्रदेश 5वें स्थान पर है। प्रदेश की 47 शासकीय आईटीआई को 10 में से 9 प्लस ग्रेडिंग स्कोर प्राप्त हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत को स्किल कैपिटल बनाने की दिशा में अनेक प्रयत्न किए हैं। देश में युवाओं की जनसंख्या के दृष्टिगत उन्हें रोजगार से जोड़ने के लिए ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के प्रयासों और डेयरी विकास कार्यक्रमों से भी युवाओं को जोड़ने के निर्देश दिए। इसके लिए कौशल विकास और रोजगार विभाग से समन्वय कर समुचित कदम उठाए। मुख्यमंत्री सीखो कमाओ योजना में लगभग 20 हजार से व्यक्तियों के प्रशिक्षण की उपलब्धि को दोगुना किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि वर्ष-2026 में विभिन्न गतिविधियों से युवाओं को जोड़ने और रोजगार उपलब्ध करवाने के लिए समुचित प्रयास करने को कहा।
बैठक में बताया गया कि प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में देश में सर्वाधिक 11 हजार 400 प्रशिक्षणार्थियों का नामांकन मध्यप्रदेश में हुआ। साथ ही युवा संगम के अंतर्गत वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 2 लाख 68 हजार से अधिक आवेदकों को लाभान्वित किया गया। मध्यप्रदेश के एक लाख 32 हजार युवाओं को स्व-रोजगार का लाभ मिला है। संत शिरोमणि रविदास ग्लोबल स्किल पार्क भोपाल द्वारा इस वर्ष 3 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थियों को लाभान्वित करने का लक्ष्य है। इनमें 1500 प्रशिक्षणार्थी लाँग टर्म और इतने ही शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग का लाभ प्राप्त करेंगे। युवाओं को पूर्व में जिन उद्योगों में प्रशिक्षण दिलवाया गया है, उनमें रिलायंस, ट्राइडेंट, जिंदल समूह के जेबीएम आदि शामिल हैं। प्रदेश में 290 शासकीय और 644 प्रायवेट आईटीआई संचालित हैं। शासकीय आईटीआई में 3484 सीटों की वृद्धि की गई, जिसके फलस्वरूप कुल सीट 52 हजार 248 हो गई हैं। प्रायवेट आईटीआई में कुल 61 हजार 32 सीट हैं।
बैठक में जानकारी दी गई कि परम फाउंडेशन द्वारा धार जिले में सरदारपुर आईटीआई में मैन्युफैक्चरिंग टेक्नीशियन कोर्स में प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। पीएम सेतु के अंतर्गत मध्यप्रदेश में 20 हब और 81 स्पोक आईटीआई उन्नयन का कार्य हुआ है। इंडिया स्किल्स प्रतियोगिता 2025-26 में मध्यप्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन रहा।
कतार से लेकर क्यू आर कोड तक : भारत की भुगतान क्रांति
देलही : कुछ समय पहले तक, एक साधारण वित्तीय लेन-देन के लिए समय, मेहनत और धैर्य जरूरी होता था। बिलों का भुगतान करने के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था। पैसे भेजने के लिए बैंक जाना, फॉर्म भरना और पुष्टि के लिए कई दिनों तक इंतज़ार करना पड़ता था। भारत में उन लाखों लोगों के लिए जिनके पास बैंकिंग सुविधा नहीं थी, इसका मतलब था वित्तीय प्रणाली से बाहर रहना। हालांकि, ऐसा भारत अब अतीत बन चुका है।
भारत की वित्तीय यात्रा सदियों में विकसित हुई है—वस्तु विनिमय प्रणाली और कौड़ी सीप से लेकर सिक्कों, कागज़ी मुद्रा और चेक तक। अपने आधुनिक इतिहास के अधिकांश समय, लेन-देन का प्रमुख माध्यम नकदी बना रहा। हालांकि चेक और डिमांड ड्राफ्ट ने भुगतान को औपचारिक रूप दिया, वे धीमे थे और केवल सीमित वर्ग तक ही सुलभ थे। बैंकिंग ढांचा मुख्यतः शहरी क्षेत्रों तक सीमित थी, जिससे ग्रामीण और दूरदराज़ की आबादी वंचित रह गई।
2000 के शुरुआती दशक ने भुगतान प्रणाली में डिजिटल परिवर्तन की शुरुआत की। भारतीय रिजर्व बैंक ने 2004 में रियल-टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) और 2010 में इमीडिएट पेमेंट सर्विस (आईएमपीएस) जैसी प्रणालियाँ शुरू कीं, जिससे तेज़ और चौबीस घंटे धन का हस्तांतरण संभव हुआ। ये महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ थीं, लेकिन इनकी पहुँच मुख्यतः उन्हीं लोगों तक सीमित रही जो पहले से ही बैंकिंग प्रणाली का हिस्सा थे, और अभी भी अनेक लोगों के लिए औपचारिक वित्तीय सेवाओं की पहुंच सीमित रही।
भारत की एक बड़ी आबादी औपचारिक वित्तीय प्रणाली से बाहर रही—उनकी ऋण, बीमा या सुरक्षित बचत जैसी सुविधाओं तक पहुंच नहीं थी। एक स्केलेबल, समावेशी और रियल-टाइम डिजिटल ढांचे की कमी का मतलब था कि आर्थिक विकास के लाभ सभी तक पूरी तरह नहीं पहुंच पा रहे थे। एक परिवर्तनकारी बदलाव की आवश्यकता स्पष्ट थी, और इसी आवश्यकता ने भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति की नींव रखी।
भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति एक मजबूत आधारभूत संरचना पर टिकी है, जिसमें तीन प्रमुख स्तंभ शामिल हैं—प्रधान मंत्री जन-धन योजना (जन धन), आधार, और मोबाइल कनेक्टिविटी। इन्हें सामूहिक रूप से जेएएम ट्रिनिटी कहा जाता है। प्रत्येक स्तंभ का अपना अलग उद्देश्य है, लेकिन साथ मिलकर इन्होंने लीकेज को कम करके, औपचारिक बैंकिंग में भरोसा बढ़ाकर, और नागरिकों को डिजिटल सेवाओं से जुड़ने के लिए तैयार करके वित्तीय इकोसिस्टम को मजबूत किया है।
प्रधान मंत्री जन-धन योजना ने बड़े पैमाने पर शून्य-बैलेंस खाते खुलवाने के माध्यम से लाखों लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ा है, जिससे सबसे वंचित वर्ग भी वित्तीय रूप से जुड़ सका है। आधार ने एक विश्वसनीय डिजिटल पहचान प्रदान करके इस बुनियाद को और मजबूत किया है, जिससे बेरोकटोक सेवाएं प्रदान करने का सटीक लक्ष्य और निर्बाध वितरण संभव हुआ है। इन दोनों के पूरक के रूप में, मोबाइल कनेक्टिविटी और इंटरनेट पहुंच के तेज़ी से विस्तार ने नागरिकों को संचार, प्रमाणीकरण और लेन-देन के लिए एक सुविधाजनक और रियल-टाइम माध्यम प्रदान किया है।
इस एकीकृत ढांचे को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) प्रणाली के माध्यम से पूर्ण रूप मिला, जिसने सरकारी लाभों को सीधे बैंक खातों में पहुँचाने की प्रक्रिया को सरल बना दिया है। बिचौलियों को कम करके और पारदर्शिता बढ़ाकर, डीबीटी ने दक्षता में सुधार किया है और साथ ही डिजिटल प्रणालियों में विश्वास भी मजबूत किया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि यह परिवर्तन केवल पहुंच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सहभागिता को भी सक्षम बनाया है। जैसे-जैसे नागरिक डीबीटी से जुड़े, वे डिजिटल वित्तीय लेन-देन के प्रति अधिक परिचित होते गए, जिससे यूनीफाइट पेमेन्ट्स इंटरफेस (यूपीआई) जैसे प्लेटफॉर्म व्यापक रूप से अपनाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
2016 में, भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम ने यूनीफाइट पेमेन्ट्स इंटरफेस (यूपीआई) की शुरूआत की—एक ऐसी प्रणाली जिसने भारत में पैसे के लेन-देन के तरीके को मूल रूप से सरल बना दिया। अपने मूल में, यूपीआई किसी भी बैंक खाते को एक वर्चुअल पेमेंट एड्रेस के माध्यम से दूसरे खाते से जोड़ने की सुविधा देता है, जिससे विस्तृत बैंकिंग जानकारी साझा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
यूपीआई का विचार अपनी विलक्षण था। अब न तो खाता नंबर याद रखने की जरूरत है और न ही जटिल विवरण भरने की। यह प्रणाली खाता संख्या और आईएफएससी कोड जैसे जटिल इनपुट को एक आसान इंटरफ़ेस से बदल देती है। उपयोगकर्ताओं को केवल एक मोबाइल नंबर, एक यूपीआई आईडी और सुरक्षित प्रमाणीकरण की आवश्यकता होती है, जिससे वे तुरंत धन हस्तांतरण कर सकते हैं। लेन-देन रियल-टाइम में होते हैं, 24×7 उपलब्ध रहते हैं, और विभिन्न बैंकों व ऐप्स के बीच सहज रूप से काम करते हैं।
यह पारस्परिकता ही यूपीआई के तेज़ विस्तार का मुख्य कारण रही है। 2021 में 216 बैंकों से बढ़कर जनवरी 2026 तक 691 बैंकों तक पहुँचते हुए, यह एक एकीकृत भुगतान संरचना बन गई है, जहाँ उपयोगकर्ता अपने किसी भी बैंक या प्लेटफॉर्म से आसानी से लेन-देन कर सकते हैं। इसके साथ ही, इसकी कम लागत वाली संरचना ने व्यक्तियों और व्यापारियों दोनों के लिए बाधाओं को कम किया है और बैंकों व फिनटेक कंपनियों के बीच नवाचार को बढ़ावा दिया है।
होर्मुज में भारतीय जहाजों की रफ्तार पर लगा ब्रेक, 16 कंटेनर को है नौसेना के ‘ग्रीन सिग्नल’ का इंतजार ; सुरक्षा का दिया गया हवाला
वृंदावन में बड़ा हादसा.... यमुना में पलटा स्टीमर.... 10 पर्यटकों की मौत
डेस्क। वृंदावन में शुक्रवार दोपहर बड़ा हादसा हो गया, जब यमुना नदी में 30 पर्यटकों से भरा स्टीमर अचानक पलट गया। इस हादसे में 10 पर्यटकों की डूबने से मौत हो गई, जिनमें 6 महिलाएं और 4 पुरुष शामिल हैं। सभी पर्यटक पंजाब से घूमने के लिए आए थे।
हादसा दोपहर करीब 3 बजे केसी घाट के पास हुआ, जो बांके बिहारी मंदिर से करीब ढाई किलोमीटर दूर है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यमुना नदी के बीच तेज हवा के कारण स्टीमर अचानक डगमगाने लगा और उसकी स्पीड भी बढ़ गई। इसी दौरान स्टीमर पीपा पुल से टकराकर पलट गया, जिससे बड़ा हादसा हो गया।
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया। स्थानीय 50 गोताखोरों को सर्च ऑपरेशन में लगाया गया है, जबकि गाजियाबाद से NDRF की टीम भी मौके के लिए रवाना हो गई है। जरूरत पड़ने पर सेना की मदद भी मांगी गई है। घायलों को रामकृष्ण मिशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका मुफ्त इलाज किया जा रहा है।
मौसम विभाग के अनुसार हादसे के समय वृंदावन में करीब 31 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल रही थी, जिससे नदी में लहरें तेज हो गईं। यही वजह मानी जा रही है कि स्टीमर संतुलन खो बैठा और हादसा हो गया।