दिव्य महाराष्ट्र मंडल
महाराष्ट्र मंडल के वृद्धजन सभासदों की दीवाली की खुशियां हुई दोगुनी
- अक्टूबर माह में 17 सदस्यों का जन्मदिन... मंडल अध्यक्ष सहित पदाधारियों ने भेंट कर दी शुभकामनाएं
रायपुर। पांच हजार से अधिक सदस्यों वाला महाराष्ट्र मंडल अपने समाजसेवा के लिए अपने उन वरिष्ठ सदस्यों का मार्गदर्शन समय-समय पर लेता है जिन्होंने कहीं-कहीं समाजसेवा के विशाल वट वृक्ष रूपी महाराष्ट्र मंडल को अपने सेवाभावी कार्यों से संचित किया है। बतातें चलें कि महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले और पूरी कार्यकारिणी अपने 80 साल से अधिक वरिष्ठजनों के जन्मदिवस के दिन उनके घर पहुंचकर उनसे भेंट करती है, शुभकामनाएं देती है। तथा उनके सेवाभावी सदगुणों के संस्कार को आत्मसात करते है। माह अक्टूबर में 17 सदस्यों का जन्मदिन मनाया गया।

महाराष्ट्र मंडल के वरिष्ठजन सेवा समिति के प्रमुख और मंडल के मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि वरिष्ठों का मार्गदर्शन हमें समाजसेवा के लिए प्रेरित करता है। इस माह 4 अक्टूबर को तात्यापारा निवासी 90 वर्षीय मनोहर प्रधान से जन्मदिन पड़ा। जिसके बाद अवंती विहार निवासी 87 वर्षीय प्रभाकर श्रीधर मैराल अवंती विहार का जन्मदिन 6 अक्टूबर को पड़ा। वहीं 16 अक्टूबर को टैगोर नगर निवासी 81 वर्षीय राजा भट्ट को घर पहुंच कर जन्मदिन की शुभकामनाएं दी।

श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि इस महीने 1 अक्टूबर को वृद्धजन दिवस मनाया गया। इस दौरान इस माह जन्मदिन वाले सभी वरिष्ठजन का सम्मान किया गया था। इस माह 17 अक्टूबर को देवेद्र नगर निवासी मोहन केशव देसाई, 20 अक्टूबर को रोहिणीपुरम निवासी शशिकला किवरईवाले, 23 को रामकुंड निवासी पुष्पा हिशीकर, रोहिणीपुरम निवासी गोपाल नारायण गद्रे और बूढ़ापारा निवासी सुनीता साठे को जन्मदिन था। 25 अक्टूबर को तात्यापारा निवासी विजय मोड़क, 26 को शैलेंद्र नगर निवासी विद्या साने और सरोना निवासी कमल नारायण अवस्थी, 27 को बूढ़ापारा निवासी सविता मोघे और तात्यापारा निवासी कुमुद कान्हे का जन्मदिन पड़ता है। 28 अक्टूबर को डंगनिया की सरोज राजिमवाले का जन्मदिन आता है। माह के अंत में 31 अक्टूबर को रोहिणीपुरम निवासी मालती मोहंदीवाले और शैलेंद्र नगर निवासी संजीवनी गोखले का जन्म दिन पड़ेगा।
खंगन ने आगे बताया कि मंडल की कार्यसमिति या महिला केंद्रों की टीम सभी वरिष्ठजन के यहां उनकी सुविधा के अनुसार सहमति के आधार सम्मान करने के लिए जाती है। कई बार स्वास्थ्यगत कारणों से कई वरिष्ठजन के घर उपस्थिति नहीं दे पाते है। लेकिन मंडल की ओर से उन्हें शुभेच्छा पहुंचा दी जाती है।
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महाराष्ट्र मंडल में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का आयोजन अब दो नहीं चार नवंबर को
- एकादशी त्योहार को लेकर कार्यक्रम के समय में किया गया बदलाव
- संचालन, प्रस्तुति और भोज सभी में दिखेगी छत्तीसगढ़ की झलक
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में दो नवंबर को होने वाला छत्तीसगढ़ राज्योत्सव का आयोजन अब 4 नवंबर को शाम 6 बजे होगा। 2 नवंबर को एकादशी होने के कारण तिथि में बदलवा किया गया। महाराष्ट्र मंडल में आयोजित छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना के रजत जयंती समारोह में कार्यक्रम के संचालन से लेकर प्रस्तुति और भोज तक सभी में आगंतुकों को छत्तीसगढ़िया झलक नजर आएगी। वहीं कार्यक्रम में शामिल लोग भी छत्तीसगढ़ी वेशभूषा में होंगे। महाराष्ट्र मंडल के विभिन्न प्रकल्पों, समितियों और महिला केंद्रों में इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
मंडल उपाध्यक्ष और कार्यक्रम की संयोजिका गीता श्याम दलाल ने बताया कि रविवार, दो नवंबर को महाराष्ट्रीयन परिवारों में तुलसी विवाह किया जाएगा। ऐसे में छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस कार्यक्रम की तिथि में बदलाव किया गया। अब 4 नवंबर को शाम 6 बजे से छत्तीसगढ़ राज्योत्सव मनाया जाएगा। समारोह में लगभग सभी प्रकल्पों, समितियों और महिला केंद्रों की सहभागिता होगी। समूचा कार्यक्रम ही छत्तीसगढ़ी में संचालित किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत राजगीत ‘अरपा पैरी के धार...’ से होगी। कार्यक्रम के समापन के बाद भी छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लुत्फ कलाकारों सहित दर्शक दीर्घा के लोग भी ले सकेंगे।
संत ज्ञानेश्वर विद्यालय (एसडीवी) के प्रभारी व कार्यक्रम के सह संयोजक परितोष डोनगांवकर के अनुसार छत्तीगसढ़ी में कार्यक्रम का संचालन एसडीवी की शिक्षिकाएं करेंगी। इतना ही नहीं, एसडीवी के बच्चों की स्थानीय बोली में तीन- चार शानदार प्रस्तुतियां हमें देखने को मिलेंगी। इसी तरह महिला केंद्रों की ओर से कम से कम पांच छत्तीसगढ़ी आइटम आकर्षित करेंगे। साथ ही विभिन्न समितियों की ओर से संगीतमय प्रस्तुतियों का लॉन एरिया में बैठे दर्शकों को इंतजार रहेगा। परितोष के अनुसार पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसमें न तो मराठी भाषा में कोई प्रस्तुति होगी और न ही मराठी से मंच का संचालन।
महाराष्ट्र मंडल के महिला केंद्रों में हुआ हनुमान चालीसा पाठ
रायपुर। महराष्ट्र मंडल के महिला केंद्रों में इस शनिवार 25 अक्टूबर को राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। त्योहारी खुमारी के बीच भी महिलाओं ने उत्साह के साथ पाठ किया।
आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि 25 अक्टूबर, शनिवार को महाराष्ट्र मंडल की आजीवन सभासद और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी नीता डूमरे के निवास पर मासिक बैठक में श्रीहनुमान चालीसा का सस्वर पाठ किया गया। इस अवसर पर गीता दलाल, अक्षरा भगाडे, नीता डूमरे, रेणु सिंह, प्रिया काडु, शोभा सोनाये, कामिनी पतंगीवार, रेणुका टोमे, मनीषा कस्तूरे, संध्या फुलझेले, अपराजिता शर्मा आदि उपस्थित थी।
महाराष्ट्र मंडल में राज्योत्सव दो नवंबर को.... छत्तीसगढ़ी कार्यक्रमों की होगी प्रस्तुति
- कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर अंतिम प्रस्तुति तक सभी कुछ छत्तीसगढ़ी में, समापन के बाद भी छत्तीसगढ़िया व्यंजनों को होगा आकर्षण
रायपुर। हर साल की तरह इस वर्ष भी महाराष्ट्र मंडल छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस दो नवंबर को शाम 5:30 बजे धूमधाम से मनाने जा रहा है। चूंकि इस बार छत्तीसगढ़ राज्य की 25वीं वर्षगांठ है, इसलिए हर साल की तुलना में इस बार का आयोजन अधिक भव्य और मनोरंजक होगा। महाराष्ट्र मंडल के विभिन्न प्रकल्पों, समितियों और महिला केंद्रों में इसकी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं।
उपाध्यक्ष और कार्यक्रम की संयोजिका गीता श्याम दलाल ने बताया कि रविवार, दो नवंबर को महाराष्ट्र मंडल के खुला मंच एरिया में होने वाले आकर्षक छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस समारोह में लगभग सभी प्रकल्पों, समितियों और महिला केंद्रों की सहभागिता होगी। समूचा कार्यक्रम ही छत्तीसगढ़ी में संचालित किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरुआत राजगीत ‘अरपा पैरी के धार...’ से होगी। कार्यक्रम के समापन के बाद भी छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लुत्फ कलाकारों सहित दर्शक दीर्घा के लोग भी ले सकेंगे।
संत ज्ञानेश्वर विद्यालय (एसडीवी) के प्रभारी व कार्यक्रम के सह संयोजक परितोष डोनगांवकर के अनुसार छत्तीगसढ़ी में कार्यक्रम का संचालन एसडीवी की शिक्षिकाएं करेंगी। इतना ही नहीं, एसडीवी के बच्चों की स्थानीय बोली में तीन- चार शानदार प्रस्तुतियां हमें देखने को मिलेंगी। इसी तरह महिला केंद्रों की ओर से कम से कम पांच छत्तीसगढ़ी आइटम आकर्षित करेंगे। साथ ही विभिन्न समितियों की ओर से संगीतमय प्रस्तुतियों का लॉन एरिया में बैठे दर्शकों को इंतजार रहेगा। परितोष के अनुसार पूरे कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसमें न तो मराठी भाषा में कोई प्रस्तुति होगी और न ही मराठी से मंच का संचालन।
परिवार का एक सदस्य लें नेत्रदान की जिम्मेदारीः विक्रम हिशीकर
रायपुर। नेत्रदान को महादान कहा गया है, क्योंकि एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो नेत्रहीन लोग इस दुनिया को देख सकते है। आपके परिजनों की आंखों और 30-40 सालों तक इस दुनिया को देख सकेगी। लेकिन किसी शोक संतप्त परिवार के बीच पहुंचकर नेत्रदान की अपील करना एक बड़ी जिम्मेदारी होती है। हमें इसकी जिम्मेदारी लेनी होगी। उक्त बातें महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद और नेत्रदान प्रकल्प प्रभारी विक्रम हिशीकर ने कहीं।
विक्रम हिशीकर कहा कि नेत्रदान के लिए लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। घर पर शोक होने एक नियति है। ईश्वर की इस इच्छा के सामने हमसब नतमस्तक है। लेकिन किसी की मृत्यु के उपरांत उनके नेत्रदान से दो लोग इस दुनिया को देख सकते है। गम वाले माहौल के बीच हम यानी परिवारजन मुक्तिधाम में लकड़ी, पानी, वहां तक जाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था की जिम्मा खुद से लेते है। ऐसे में परिवार के एक सदस्य को नेत्रदान कराने की जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। परिवार का एक सदस्य भी इसकी जिम्मेदारी लेता हैं तो यह अपनी मृत परिजन को सच्ची श्रद्धांजलि देंगे।
विक्रम हिशीकर ने बताया कि अब तक वे 50 से अधिक लोगों के घर पहुंच तक मरणोपरांत नेत्रदान करा चुका है। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि नेत्रदान और रक्तदान आज से समय में सबसे बड़ा दान है। ऐसे में इसे लेकर हमें स्वतः आगे आना होगा। हमारी छोटी सी पहल दो नेत्रहीन को रोशनी देगी।
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0 महाराष्ट्र मंडल में राज्योत्सव पर होने वाले कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए लिया मार्गदर्शन भी
रिंग फाइट कैंप में पहले दिन खिलाड़ियों ने बहाया पसीने
रायपुर। पश्चिम बंगाल में 12 से 14 दिसंबर 2025 तक होने वाले 9वें नेशनल रिंग फाइट चैम्पियनशिप में भाग लेने के लिए छत्तीसगढ़ रिंग फाइट एसोसिएशन तैयारी में जुट गई है। छत्तीसगढ़ रिंग फाइट एसोसिएशन और महाराष्ट्र मंडल रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में 23 अक्टूबर से मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में कैंप लगाया जा रहा है। पहले दिन कैंप में पहुंचे खिलाड़ियों ने खूब पसीना बहाया।
छत्तीसगढ रिंग फाइट एसोसिएशन की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने बताया कि एक सप्ताह तक चलने वाले इस कैंप के पहले दिन खिलाड़ियों के साथ उनके परिजनों ने भी सहभागिता निभाई। कैंप में शामिल खिलाड़ियों को एसोसिएशन के सचिव और कोच ओपी कटारिया, संत ज्ञानेश्वर स्कूल की खेल शिक्षिका ज्योति साहू ट्रेनिंग दे रही है।
गीता दलाल ने आगे बताया कि पहले दिन पणवी ओगले, अवनिश जायसवाल, अभिमन्यु कुमार, वेदांत साहू, गौरव हेमने, आयुष्मान कालेले, विहान कालेले, वर्तिका क्षीरसागर कैंप में शामिल हुए और अभ्यास किया। वहीं इस अवसर पर एसोसिएशन के प्रवीण क्षीरसागर और परिजन पवन ओगले, डा रंजिता जायसवाल और भागिरथ कालेले शामिल हुए।
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नेशनल चैम्पियन शिप के लिए रिंग फाइट कैंप 23 अक्टूबर से
रायपुर। छत्तीसगढ रिंग फाइट एसोसिएशन एवं महाराष्ट्र मंडळ रायपुर के संयुक्त तत्वाधान में 9th नेशनल रिंग फाइट चॅम्पियनशिप 2025 में छत्तीसगढ की टीम भाग लेने के लिए रिंग फाइट कैंप दिनांक 23 अक्टूबर से प्रारंभ किया जा रहा है।
छत्तीसगढ रिंग फाइट एसोसिएशन की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने बताया कि इस कैंप में खिलाड़ियों को रिंग फाइट की तकनीक की बारीकियों एवं खेल की जानकारी रिंग फाइट के सचिव एवं कोच ओपी.कटारिया एवं संत ज्ञानेश्वर विद्यालय की खेल शिक्षिका ज्योति साहू कोचिंग देंगी।
बताते चले कि इस कैंप में पिछले नेशनल के 6 मेडलिस्ट खिलाड़ी भी भाग ले रहे है। यह कैंप एक सप्ताह तक चलने वाला है। जिन बच्चों को पश्चिम बंगाल में 12,13व 14 दिसंबर को होने जा रहे है 9 वे रिंग फाइट नॅशनल चॅम्पियनशिप 2025 में भाग लेना है। वे छत्तीसगढ रिंग फाइट एसोसिएशन की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल से संपर्क कर सकते है।
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दीपावली के पूर्व महाराष्ट्र मंडल में हुई शिवाजी की आरती
रायपुर। दीपावली की पूर्व 19 अक्टूबर को महाराष्ट्र मंडल में छत्रपति शिवाजी महाराज की आरती की गई। इस अवसर पर मंडल के अध्यक्ष, सचिव, कार्यकारिणी और युवा समिति के पदाधिकारियों ने शिवाजी महाराज के प्रेरक प्रसंगों पर चर्चा की।
महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने शिवाजी महाराज के रोचक प्रसंगों पर चर्चा करते हुए कहा कि औरंगजेब ने शिवाजी को आगरा में कैद किया, लेकिन शिवाजी ने मिठाई के टोकरे में छिपकर चतुराई से अपनी जान बचाई और वहां से निकल आए थे। शिवाजी एक धर्मनिरपेक्ष शासक थे और उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान किया। उन्होंने अपनी सेना में मुस्लिम अधिकारियों को रखा और मस्जिदों के निर्माण में भी सहायता की।
महाराष्ट्र मंडल के सचिव चेतन दंडवते ने कहा कि शिवाजी महाराज के रोचक प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज का युद्ध कौशल के क्या कहने थे, आज नौसेना उनकी सोच की ही देन है। वहीं युवा समिति के समन्वयक विनोद राखुंड़े ने कहा कि शिवाजी महाराज ने बहुत कम उम्र में 1645 में तोरना किले पर हमला कर बीजापुर के सुल्तान को पहला बड़ा झटका दिया। अफजल खान ने शिवाजी को धोखे से मारने की योजना बनाई थी, लेकिन शिवाजी के एक मुस्लिम मित्र ने उन्हें आगाह कर दिया। शिवाजी ने योजना को नाकाम करते हुए अफजल खान का पेट चीर दिया। इस अवसर पर परितोष डोनगांवकर, सचिंद्र देशमुख, भगीरथ काळेले, प्रवीण क्षीरसागर, सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी उपस्थित थे।
संत ज्ञानेश्वर स्कूल ने मनाया पैरेट्स दिवाली मिलन
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में दीपावली के पूर्व पैरेट्स दिवाली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। शाला के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने इस अवसर पर पैरेट्स को संबोधित किया। प्राचार्य ने सभी से दिवाली के व्यस्तम दिनचर्या के बीच समय निकालने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि स्कूल में होने वाले ऐसे आयोजन स्कूल प्रबंधन और पैरेट्स को समीप लाते है। जो बच्चों के अच्छे भविष्य का निर्माण में सहायक होते है।
कार्यक्रम की शुरूआत शिक्षिका श्वेता चौधरी और प्रीति तिवारी ने पैरेट्स का स्वागत तिलक लगाकर किया। नन्हें बालक राम-सीता बनकर आए क्रमशः शिवम, ऋषभ, सोनल, प्रथम और माताओं का दिल जीता। सभी ने उनका स्वागत पुष्प वर्षा कर किया। माताओं के द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया और शिक्षिकाओं द्वारा सरस्वती वंदना गाई गई।
कक्षा पांचवीं की छात्रा - पावना लासिया द्वारा स्वागत नृत्य की प्रस्तुति दी गई। शिक्षिकाओं द्वारा "दीपावाली मनाई सुहानी" गायन की प्रस्तुति दी। शाला के म्यूजिक टीचर - विवेक सिंह राजपूत के द्वारा सुंदर गीत गाया गया। माताओं के लिए बीच-बीच में प्रश्नोत्तरी की गई जिसमें भाग्यश्री शुक्ला, दुर्गा शर्मा, गीता बर्वे, पुष्प साहू, नमिता साहू, शबनम बानो, कालेश्वरी वर्मा, सुशीला निहाल, बिजली दुर्गा, बासमती सोना, मुकेश्वरी साहू, मानवी सेन ने सही उत्तर देकर प्राइजेस जीते।
माताओं के मनोरंजन के एक और गेम "हैप्पी दिवाली 2025" का आयोजन किया गया जिसमें द्रौपदी साहू को पहला, गायत्री साहू को दूसरा और सरस्वती निषाद को तीसरा पुरस्कार मिला। इन दोनों गेम का आयोजन श्वेता चौधरी और विनीता सुंदरानी मैडम के द्वारा बहुत ही सुंदर गति से किया गया। शाला की शिक्षिका किरण तिवस्कर के द्वारा अपनी स्वरचित कविता "न जाने हम कब बड़े हो गए "के द्वारा माताओं को बचपन याद दिला दिया।
मिडिल की इंचार्ज सुनिधि रोकड़े ने माताओं को दिवाली उत्सव के बारे में बताकर संबोधित किया। इस उपलक्ष्य पर कक्षा पहली की छात्रा अभिज्ञा शुक्ला ने सुंदर नृत्य की प्रस्तुति दी। इस उपलक्ष्य पर मनीषा दास ने अपने विचार व्यक्त किए जिसमें उन्होंने कहा कि रोज की दिनचर्या से हटकर कार्यक्रम में आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा और उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए। इसी कड़ी में भाग्यश्री शुक्ला द्वारा ने भी विचार व्यक्त किए और कहा कि हमे अपने बच्चे को इस शाला में डालकर बहुत गौरव महसूस होता हैं। प्राइमरी इंचार्ज अपर्णा मैडम कहा गया कि "एक दिया सारा अंधकार मिटा सकता हैं"इसी प्रकार अगर हम बच्चों के साथ समय बिताए तो उनके जीवन में नई रोशनी ला सकते हैं।
इस उपलक्ष्य पर मिट्टी के दिए अंजलि गुप्ता, स्नेहा महाजन, वंदना यादव ,रेणुका शुक्ला,ज्योति साहू द्वारा बांटे गए। कार्यक्रम का संचालन तृप्ति अग्निहोत्री द्वारा किया गया और आभार प्रदर्शन सुदेवी बिस्वास मैडम के द्वारा किया गया।
सुआ नृत्य में नजर आई छत्तीसगढ़ की संस्कृति
रायपुर। दीपावली का त्योहार हो और घर-घर जाकर एक समाज विशेष की महिलाएं सुआ नृत्य न करें ऐसा हो ही नहीं सकता। सुआ नृत्य छत्तीसगढ़ की परंपरा से जुड़ा विशेष नृत्य है जो दीपावली पर किया जाता है। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में दीपावली के पूर्व सुआ नृत्य, लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी के साथ दीप सजाओ स्पर्धा सभी वर्ग के बच्चों के लिए आयोजित की गई।

स्कूल के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने बताया कि बच्चों को हमारी संस्कृति से जोड़े रखने के लिए हम लगातार हमारे तीज त्योहारों को उत्साह के साथ स्कूल में मनाते है। इसी क्रम में अलग-अलग क्लास के बच्चों ने अलग-अलग प्रस्तुतियां दी। मीडिल क्लास के बच्चों ने असेंबली में सुआ नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। छात्रा समृद्धि मिश्रा, प्राची टांगल, हंसिका भारद्वाज और रागिनी टोंडर ने सुआ नृत्य प्रस्तुत किया।

वहीं लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी का मंचन भी बच्चों ने किया। जिसमें भगवान राम की वेश में आदित्य साहू , लक्ष्मण की वेश में प्रदीप साहू, सिद्धांत सिंह हनुमान की वेश में व सीता माता की वेश में पूनम पटेल ने मंचन किया।

प्री पाइमरी के बच्चों ने आकर्षक दीया के डिजाइन में बच्चों को बैठाकर अपनी प्रस्तुति दी। बच्चों के ड्रेस कोड और कलर काम्बीनेशन काफी अच्छा था। प्री प्राइमरी इंचार्ज अस्मिता कुसरे, हार्दिक बोबडे, शिखा गुप्ता व सुरेखा नायक ने बच्चों को सुंदर दिये की आकृति में बिठाकर बच्चों को दिये का महत्व समझाया।

आज मॉर्निंग असेंबली में शिक्षिका रेणुका शुक्ला ने धनतेरस का महत्व बताते हुए कहा कि यह पर्व दिवाली के दो दिन पहले मनाया जाता हैं। इस दिन भगवान धन्वंतरी और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती हैं। कहा जाता हैं कि इस दिन सोना, चांदी या बर्तन खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

असेंबली का संचालन कक्षा चौथी के छात्र लव पाठक ने किया गया। सौरव राउत, ध्रुवीता प्रसाद माता लक्ष्मी बनकर आई थी। इसके साथ स्कूल में "दिया डेकोरेशन" एवं "हैंडराइटिंग" प्रतियोगिता भी आयोजित की गई और बच्चों ने बड़े उत्साह से इसमें भाग लिया।

महाराष्ट्र मंडल में दिवाली पहाट संग मिलन 19 को
घर-घर में लगाएं आकाशदीप, महाराष्ट्र मंडल का अभियान जारी
रायपुर। प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी महाराष्ट्र मंडल दिवाली पर दीयों की लड़ी के साथ आकाशदीप लगाने के लिए आमजनों को प्रेरित कर रहा है। मंडल के सभासद बड़ी संख्या में अपने घरों पर आकाशदीप लगाते हैं।