छत्तीसगढ़
राज्य सरकार पर्यटन और ऐतिहासिक महत्व के स्थलों को चिन्हांकित कर : पर्यटन स्थल के रूप में कर रहे हैं विकसित
रोमांच से भरपूर सरायपाली स्थित शिशुपाल पर्वत नए
रोमांच से भरपूर सरायपाली स्थित शिशुपाल पर्वत नए पर्यटन स्थल के रूप में उभर कर आया सामने
मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि पर लगता है विशाल मेला
ऐतिहासिक लोककथाओं से जुड़ा है पर्वत का नाम
समुद्र तल से 900 फीट की ऊंचाई पर स्थित है यह पर्वत, वर्षा ऋतु के दौरान पानी 1100 फीट नीचे गिरकर बनाता है घोड़ाधार जलप्रपात
ट्रैकिंग और एडवेंचर के शौकीन युवाओं के लिए है शानदार डेस्टिनेशन
रोमांच से भरपूर सरायपाली स्थित शिशुपाल पर्वत नए पर्यटन स्थल के रूप में उभर कर आया सामने

रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार पर्यटन और ऐतिहासिक, धार्मिक व पौराणिक महत्व के स्थलों को चिन्हांकित कर धार्मिक एवं पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर रहा है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के अंतर्गत पर्यटन और रोमांच से भरपूर सरायपाली स्थित शिशुपाल पर्वत नए पर्यटन डेस्टिनेशन के रूप में उभर कर सामने आया है। इस पर्वत का ऐतिहासिक, धार्मिक और पौराणिक महत्व भी है। मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेला का आयोजन भी होता है।
महासमुंद जिले के सरायपाली स्थित शिशुपाल पर्वत ट्रैकिंग और एडवेंचर के शौकीन युवाओं के लिए एक शानदान डेस्टिनेशन है। यह स्थान अपनी अद्वितीय प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्त्व के लिए जाना जाता है। राजधानी रायपुर से 157 किमी और सरायपाली से लगभग 20 किमी की दूरी पर स्थित यह पर्वत पर्यटकों को प्रकृति के करीब लाने का एक शानदार अवसर प्रदान करता है।
शिशुपाल पर्वत (बूढ़ा डोंगर) समुद्र तल से 900 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए रोमांचक ट्रैकिंग मार्ग है, जो रोमांचक ट्रैकिंग का नया अनुभव कराता है। यह पर्यटन स्थल साहसिक गतिविधियों के प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करता है। ट्रैकिंग मार्ग घने जंगलों, चट्टानों और प्राकृतिक पगडंडियों से होकर गुजरता है। पहाड़ के ऊपर एक विशाल मैदान है, जहां से वर्षा ऋतु के दौरान पानी 1100 फीट नीचे गिरकर घोड़ाधार जलप्रपात का निर्माण करता है। यह झरना और उसके चारों ओर हरियाली एक अद्वितीय दृश्य प्रस्तुत करता है। पर्यटन की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए, दो साल पहले पर्यटन मंडल ने इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की पहल की। यहां पहुंचने वाले सैलानियों के लिए आधारभूत सुविधाओं का निर्माण किया गया, जिससे उनकी यात्रा सुखद और आरामदायक हो सके।
शिशुपाल पर्वत की प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण इसे एक आदर्श पर्यटन स्थल के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। यहां का वातावरण, झरने की आवाज, ठंडी हवा एवं प्राकृतिक सुंदरता व शांति का संगम पर्यटकों को मानसिक शांति और सुकून का अनुभव कराती है। यह स्थान फोटोग्राफी और प्रकृति के अद्भुत दृश्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। शिशुपाल पर्वत न केवल रोमांचक ट्रैकिंग स्थल है, बल्कि इतिहास और प्रकृति का अद्भुत संगम भी है। यह स्थान ट्रैकिंग, फोटोग्राफी और प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने के लिए एक बेहतरीन विकल्प है। यदि आप प्राकृतिक सुंदरता, रोमांच और इतिहास का अनुभव करना चाहते हैं, तो शिशुपाल पर्वत आपकी सूची में होना चाहिए। अपनी ऐतिहासिक महत्व और प्राकृतिक आकर्षण के साथ, शिशुपाल पर्वत आज के दौर में पर्यटन का नया केंद्र बनता जा रहा है।
शिशुपाल पर्वत पर्यटन स्थल में हर वर्ष मकर संक्रांति और महाशिवरात्रि के अवसर पर भारी संख्या में भक्त दर्शन और पूजन के लिए आते हैं। इस दौरान मंदिर के आसपास भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें लोग धार्मिक अनुष्ठानों के साथ-साथ मेले की चहल-पहल का आनंद लेते हैं। मकर संक्रांति पर लगने वाला यह मेला इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का संगम है। धार्मिक आस्था, ऐतिहासिकता, साहसिक पर्यटन का अद्भुत अनुभव इसे एक संपूर्ण पर्यटन स्थल बनाता है। यह मेला न केवल स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। यहां रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहा है।
शिशुपाल पर्वत का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्त्व है। इसे लेकर स्थानीय नागरिकों का कहना है कि शिशुपाल पर्वत (बूढ़ा डोंगर) का नाम स्थानीय लोककथाओं से जुड़ा हुआ है। इस संदर्भ में किंवदंती है कि इस पहाड़ पर कभी राजा शिशुपाल का महल हुआ करता था। यहां का गौरवशाली इतिहास रहा है पर्वत के उपर ही अभेद्य दुर्ग, सुरंग एवं शिवमंदिर का निर्माण किया गया है, जिसका भग्नावशेष आज भी अतीत की गौरवगाथा सुनाती है। जब अंग्रेजों ने राजा को घेर लिया, तो उन्होंने वीरता का प्रदर्शन करते हुए अपने घोड़े की आंखों पर पट्टी बांधकर पहाड़ से छलांग लगा दी। इस घटना के कारण इस पर्वत का नाम शिशुपाल पर्वत और यहां स्थित झरने का नाम घोड़ाधार जलप्रपात पड़ा। यह बारहमासी झरना अत्यधिक ऊँचाई से गिरने के कारण अद्भुत सौंदर्य का अप्रतिम उदाहरण है।
इस क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित किए जाने की पहल शासन द्वारा विश्ेाष प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले दिनों वन विभाग द्वारा पर्यटन और रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए स्थल का निरीक्षण किया गया। चूंकि आसपास के क्षेत्र में बंसोड़ जाति बहुतायत संख्या में पाए जाते हैं, जो बांस की कलाकृति बनाते हैं। उन्हें भी रोजगार से जोड़ा जा सके। साथ ही एक पर्यटन परिपथ के रूप में भी विकसित किया जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि यहां से चंद्रहासिनी देवी मंदिर, गोमर्डा अभ्यारण, सिंघोड़ा मंदिर, देवदरहा जलप्रपात एवं पर्यटन स्थल नरसिंहनाथ को जोड़ा जा सकता है।
छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं और संस्कृति को प्रदर्शित करने का माध्यम बनेगा राजिम कुंभ कल्प : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजिम कुंभ कल्प की तैयारियों के सम्बन्ध में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर दिए जरूरी निर्देश
राजिम कुंभ कल्प 2025: अध्यात्म और संस्कृति का भव्य आयोजन
12 से 26 फरवरी तक आयोजित होगा राजिम कुंभ कल्प
रायपुर | छत्तीसगढ़ के प्रयाग के रूप में प्रसिद्ध राजिम में 12 फरवरी से 26 फरवरी 2025 तक कुंभ कल्प का भव्य आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष यह अद्भुत धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन 52 एकड़ के नए प्रस्तावित मेला स्थल में संपन्न होगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन स्थित बैठक कक्ष में आज राजिम कुंभ कल्प के तैयारियों के संबंध में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने शाही स्नान, गंगा आरती, संत समागम समेत कुंभ कल्प के प्रमुख आयोजनों और श्रद्धालुओं के लिए सुविधाजनक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने को कहा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राजिम कुंभ कल्प 2025 धर्म, आस्था और संस्कृति का अद्भुत समागम होगा और यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं और संस्कृति को प्रदर्शित करने का भी सुंदर माध्यम है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि श्रद्धालुओं को यहां अविस्मरणीय अनुभव प्राप्त हो और यह आयोजन हमारी गौरवशाली विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाएं।
मुख्यमंत्री साय ने राजिम कुंभ कल्प के आयोजन में शामिल समस्त विभागों और प्रशासनिक अमले को आपस में समन्वय स्थापित कर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने श्रद्धालुओं के आवागमन की व्यवस्था, सुरक्षा संबंधी उपाय और स्वच्छता के लिए विशेष ध्यान देने को कहा। साय ने कहा कि “हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस आयोजन को सफल बनाएं और छत्तीसगढ़ की पहचान के रूप में इसे स्थापित करें। उन्होंने 12 फरवरी को आयोजित माघी पुन्नी स्नान, 21 फरवरी जानकी जयंती के अवसर पर संत समागम और 26 फरवरी को होने वाले शाही स्नान की तैयारी पर विशेष ध्यान देने को कहा।
मुख्यमंत्री साय को अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू ने राजिम कुंभ कल्प 2025 के आयोजन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने पीपीटी के माध्यम से आयोजन स्थल में विभिन्न गतिविधियों के लिए निर्धारित स्थानों के बारे में बताया। कुंभ कल्प में नागरिक सुविधाओं, साधु संतों के आवागमन, शाही स्नान और गंगा आरती को लेकर विभाग के तैयारियों के बारे में जानकारी दी।
उल्लेखनीय है कि 12 फरवरी को माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर राजिम कुंभ कल्प का शुभारंभ होगा और 26 फरवरी महाशिवरात्रि को इसका समापन होगा। राजिम कुंभ कल्प पैरी, महानदी और सोंढूर नदी के संगम पर आयोजित होगा। श्रद्धालु इन पवित्र नदियों में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।
राजिम कुंभ कल्प के संपूर्ण आयोजन के लिए पर्यटन विभाग को नोडल बनाया गया है। 15 दिनों तक चलने वाले इस कुंभ कल्प में पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी साधु संतों का विराट समागम होगा। माघी पुन्नी स्नान, शाही स्नान, जानकी जयंती के अवसर पर संत समागम विशेष रूप से आयोजित होगा। प्रतिदिन सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन, मेला, मड़ई, मीना बाजार और विभागीय प्रदर्शनी भी कुंभ कल्प का विशेष आकर्षण के रूप में शामिल हैं।
बैठक में विधायक रोहित साहू, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, सचिव धर्मस्व अन्बलगन पी., संचालक संस्कृति विवेक आचार्य, आईजी रायपुर अमरेश मिश्रा, कलेक्टर गरियाबंद दीपक अग्रवाल सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री ने दिव्यांग कनक बाई को मोटराईज्ड ट्रायसायकिल प्रदान की
कनक बाई ने कहा मुख्यमंत्री ने मोटराईज्ड ट्रायसायकिल नहीं मेरे दोनों पैर दे दिये उनका आभार
रायपुर | जिले में प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बांदापारा चितापुर निवासी दिव्यांग कनक नाग को मोटराईज्ड ट्रायसायकिल प्रदान की। मोटराईज्ड ट्रायसायकिल पाकर कनक नाग ने बताया कि बचपन से ही उसके दोनो पैरों में दिक्कत होने के कारण उसे चलने-फिरने व अपने निजी कार्यों को करने में काफी परेषानियों का सामना करना पड़ता था। घर से बाहर जाने के लिए उसे किसी का सहारे की जरूरत होती थी।

लेकिन अब प्रदेष के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उसे मोटराईज्ड ट्रायसायकिल दे दी है, जिसकी मदद से वह अब अपने कार्यों आसानी से पूरा कर सकेगी। कहीं जाने के लिए उसे किसी सहारे की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। कनक नाग ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मुझे स्वचलित ट्रायसायकिल नहीं मेरे दोनों पैर दे दिये है। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री जी को धन्यवाद देती हूं। बता दें कि समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग सहायक उपकरण योजनांतर्गत सहायक उपकरण निःशुल्क प्रदान किये जाते है।
राज्य सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए प्रतिबद्ध : मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े
सक्ती जिले के जैजैपुर में 3.30 करोड़ रूपए के विकास व निर्माण कार्यों का हुआ भूमिपूजन
रायपुर | महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण विभाग मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने सक्ती जिले के नगर पंचायत जैजैपुर को 3.30 करोड़ रूपए से अधिक की लागत के 29 विकास व निर्माण कार्यों का सौगात दी है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा आगामी समय में मुख्यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना में परित्यक्ता और विधवा महिलाओं को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने नगर पंचायत जैजैपुर सहित जिलेवासियों को विकास कार्यों के लिए शुभकामनाएं दी।
मंत्री राजवाड़े ने नव वर्ष 2025 की बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में सभी क्षेत्रों में विकास के कार्य लगातार किए जा रहे हैं। इसी क्रम में नगर पंचायत जैजैपुर क्षेत्र में 3 करोड़ 30 लाख रुपए से भी अधिक के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया। प्रदेश सरकार के गठन के बाद अल्प समय में ही तेजी से अनेकों कार्य कराए जा रहे है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के चहुंमुखी विकास के लिए प्रतिबद्ध है। महतारी वंदन योजना के तहत महिलाओं के खाते में प्रतिमाह 1000 रुपए की 11वीं किस्त जारी की जा चुकी है। इसी तरह किसानों से प्रति एकड़ 21 क्विंटल धान की खरीदी की जा रही है। रामलला दर्शन योजना के तहत अयोध्या धाम में प्रभु श्री राम का निःशुल्क दर्शन भी कराए जा रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत 18 लाख आवास की स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे बड़ी संख्या में प्रदेश के नागरिक लाभान्वित हो रहे हैं।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य, नगर पंचायत जैजैपुर अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, पूर्व विधायकगण सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी नारी शक्ति और आमजन बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रदेश का पहला सड़क सुरक्षा अनुभव कक्ष का किया शुभारंभ
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रदेश का पहला सड़क सुरक्षा अनुभव कक्ष का किया शुभारंभ
रायपुर | प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने परिवहन कार्यालय, कबीरधाम में राज्य का पहला सड़क सुरक्षा अनुभव कक्ष का उद्घाटन किया। उन्होंने कहा कि यह कक्ष मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए किए जा रहे प्रयासों की एक कड़ी है। उन्होंने कहा कि कबीरधाम जिला प्रदेश का पहला जिला है जहां इस प्रकार का अनुभव कक्ष स्थापित किया गया है। इस उद्घाटन समारोह में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कक्ष के सभी पहलुओं का अवलोकन किया और इसकी कार्यप्रणाली पर विस्तार से जानकारी ली। सड़क सुरक्षा अनुभव कक्ष का उद्देश्य नागरिकों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। इस कक्ष में विभिन्न प्रकार की सड़क सुरक्षा संबंधित जानकारी और सामग्री प्रस्तुत की गई है, जिसमें वाहन चालकों को दुर्घटनाओं से बचने के उपाय, ट्रैफिक नियमों के पालन और सुरक्षित ड्राइविंग के बारे में बताया गया है। कक्ष में विभिन्न वर्चुअल अनुभव, वीडियो और मॉडल्स के जरिए सड़क सुरक्षा को समझने का एक आकर्षक तरीका अपनाया गया है।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि बचपन से ही हमें सही और गलत का भेद सिखाया जाता है। माताओं की भूमिका बच्चों को जीवन के उचित और अनुचित कार्यों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण होती है। इसी प्रकार यह सत्र समाज में सुरक्षा और नियमों के प्रति एक सकारात्मक सोच विकसित करेगा। उन्होंने कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया को निरंतर जारी रखा जाए, ताकि हर व्यक्ति सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक हो सके। उपमुख्यमंत्री श्री शर्मा ने सड़क सुरक्षा अनुभव कक्ष के शुभारंभ में कहा कि अब ड्राइविंग लाइसेंस बनाने आने वाले व्यक्तियों को एक विशेष ऑडियो, वीडियो सत्र से गुजरना होगा। यह सत्र आवेदनकर्ताओं को ट्रैफिक नियमों और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से शुरू किया गया है।
उपमुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक व्यक्ति ट्रैफिक नियमों, चालान प्रक्रिया और सुरक्षित वाहन संचालन के महत्व को गहराई से समझे। ऑडियो, वीडियो सत्र पूरा करने के बाद प्रतिभागियों को एक प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। यह प्रमाण पत्र यह दर्शाएगा कि उन्होंने सड़क सुरक्षा के नियमों को समझ लिया है। यह सत्र लोगों को सड़क पर सही निर्णय लेने और सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता देने के लिए प्रेरित करेगा। इससे न केवल ट्रैफिक नियमों के पालन में सुधार होगा, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं की संख्या भी कम होगी। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि विभागीय प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जागरूकता बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया है। यह सुनिश्चित करेगा कि ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने वाला हर व्यक्ति सड़क पर जिम्मेदारी से वाहन चलाए। उन्होंने कहा कि संपूर्ण छत्तीसगढ़ में इस प्रक्रिया की शुरुआत कवर्धा से की गई है। इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोगों को लाभ मिले।
उपमुख्यमंत्री शर्मा के समक्ष उस समय कार्यालय में लाईसेंस बनवाने के लिए आए नागरिकों ने भी सड़क सुरक्षा अनुभव कक्ष का अवलोकन किया और वहां उपलब्ध जानकारी का लाभ लिया। उन्होंने कहा कि इस कक्ष की स्थापना से न केवल स्थानीय नागरिकों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता मिलेगी। इस उद्घाटन के साथ ही कबीरधाम जिला एक कदम और आगे बढ़ा है, जहां सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता के साथ-साथ सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जा रही है।
सिमट रहा बस्तर से माओवादी आतंक, बदल रही बस्तर की पहचान : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री साय ने बस्तर जिला पत्रकार संघ के शपथ ग्रहण समारोह को किया संबोधित
रायपुर | इस वर्ष जब मैं नये साल में अखबार पढ़ रहा था तो समाचारपत्रों के मुख्य पृष्ठ में बस्तर सुर्खियों में था। यह सुर्खियां किसी माओवादी हिंसा को लेकर नहीं थी, यह सुर्खियां बस्तर में पहुंचे विकास के उजाले को लेकर थी। बस्तर से माओवादी आतंक अब सिमट गया है। बस्तर की पहचान अब बदल गई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बस्तर जिला पत्रकार संघ के नव निर्वाचित पदाधिकारियों के शपथ ग्रहण समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा कि बस्तर की अपनी चुनौतियां है और इस चुनौती भरे माहौल में पत्रकारिता करना भी चुनौतीपूर्ण कार्य है। बस्तर में आम जनता के उम्मीदों, विचारों और समस्याओं का आइना बनकर शासन-प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत करने के आप सभी के प्रयासों को नमन है।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में पत्रकारिता के उच्च आदर्शों का पालन कर सरकार के अच्छे काम की जानकारी जनता को दें तथा कमियों को भी बताएं। वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित करने में बस्तर के पत्रकारों कीे महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने बस्तर जिला पत्रकार संघ के नव निर्वाचित पदाधिकारियों को शपथ दिलाई और पदाधिकारियों को नये दायित्व के निर्वहन के साथ ही नववर्ष के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम में बस्तर जिला पत्रकार संघ के अध्यक्ष मनीष गुप्ता ने स्वागत उद्बोधन दिया। इस अवसर पर खेल मंत्री टंकराम वर्मा सहित बड़ी संख्या में पत्रकारगण उपस्थित थे।
ईडी ने पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को किया तलब, 3 जनवरी को होगी पूछताछ
रायपुर।छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा शुक्रवार को ईडी दफ्तर में पेश होंगे। शराब घोटाला मामले में ईडी ने कवासी लखमा को तलब किया है। मामले को लेकर लखमा ने कहा कि, मैं कानून को मानता हूं, मैं पूरी जानकारी दूंगा। जो आरोप लगाए गए हैं उनका कल ईडी को जवाब देंगे। जो दस्तावेज मांगे गए हैं वह भी ED को देंगे।

बता दें कि, ईडी की टीम ने शनिवार को कोंटा विधायक कवासी लखमा और उनके बेटे हरीश कवासी के घर दबिश दी थी। इस दौरान सुकमा-कोंटा और रायपुर स्थित छापा मारा था। जिसको लेकर कवासी लखमा ने कहा था कि, मैं अनपढ़ हूं अधिकारियों ने गड़बड़ी की है। मुझको अंधेरे में रखा गया मुझे इस घोटाले के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।
पूर्व मंत्री कवासी लखमा ने ईडी के एक्शन को बदले की कार्रवाई कहा था। उन्होंने था कहा कि, उनका और उनके बेटे का मोबाइल ईडी के अफसर अपने साथ ले गए थे। शनिवार रात आठ बजे तक ईडी की टीम घर पर थी, मेरे घर से एक कागज का टुकड़ा तक नहीं मिला है। बेड बिस्तर, चूल्हा सभी जगह जांच किए। आगे कहा कि, पूरा घर चेक किए लेकिन 100 रुपए भी नहीं मिला। कितना संपत्ति है पूछ रहे थे।
तेज रफ्तार हाइवा ने बाइक सवारों को लिया चपेट में... तीन की मौत
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में बीती रात सड़क हादसा हो गया। जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई। यह हादसा कसडोल थाना क्षेत्र के कलमीडीह गांव में हुआ, जहां तेज रफ्तार हाईवा ने बाइक सवार तीन युवकों को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में तीनों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलने पर कसडोल पुलिस मौके पर पहुंची और मर्ग कायम कर तीनों के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए रवाना कर आगे की कार्रवाई में जुट हुई है।
जानकारी के मुताबिक, तीनों युवक महराजी अर्जुन गांव के निवासी हैं. वे नए साल के मौके पर तुरतुरिया गए हुए थे, वहां से एक ही बाइक पर सवार होकर वे गांव लौट रहे थे। इसी दौरान रात लगभग 12 बजे यह भीषण हादसा हो गया, जिसमें तीनों की दर्दनाक मौत हो गई। फिलहाल मामले में पुलिस की जांच जारी है।
जल्द टैक्स अदा करे नहीं तो कार्रवाही के लिए रहें तैयार रहे : बड़े बकायादरों के यहाँ पहुँचे कमिश्नर
कर दाता समय पर करें कर का भुगतान, राजस्व वसूली टीम दे रही घरों में दस्तक, सख्ती के साथ होगी वसूली
रायपुर | नगर पालिक निगम कमिश्नर सुमित अग्रवाल अधिकारी / कर्मचारियो के संग स्वरूप टॉकीज का आकस्मिक निरीक्षण करने मौके पर पहुँचे। उन्होंने टॉकीज के मैनेजर को बकाया टैक्स जल्द से जल्द भुगतान करने की बात कही। उन्होंने 4th सिजन होटल का भी निरीक्षण किया। उन्हें भी बकाया टैक्स जल्द भुगतान करने निर्देश दिए।इस मौके पर सहायक राजस्व अधिकारी शुभम गोइर,संजय मिश्रा, जलकार्य निरीक्षक राजू चन्द्राकर, अनिल करिहार व वार्ड के सहायक राजस्व निरीक्षक सहित टीम अमला मौजूद रहें।
बड़े बकायेदार समेत सभी पटा रहे टैक्स. कमिश्नर के निर्देश पर चल रहा अभियान, रोजाना हो रही समीक्षा नगर निगम की सख्ती का असर दिखने लगा है, अब तक सालों से संपत्ति समेत अन्य टैक्स नहीं पटाने वाले बड़े बकायादार भी अपना टैक्स नगर निगम दुर्ग में आकर जमा कर रहे हैं। नगर निगम के आय का एक बड़ा स्त्रोत राजस्व है, जिसकी धीमी वसूली और करदाताओं द्वारा नहीं देने पर निगम पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था।
निगम कमिश्नर सुमित अग्रवाल ने राजस्व वसूली को प्राथमिकता में रखने के निर्देश देते हुए सभी जोन को वृहद स्तर पर लगातार अभियान चलाने के निर्देश दिए। इसके तहत ऐसे बड़े बकायादार जिन्होंने सालों से टैक्स नहीं दिया है और राशि भी बड़ी है उनसे सख्ती के साथ वसूलने के भी निर्देश दिए गए थे। जिसके बाद राजस्व वसूली में तेजी आई है,निगम कमिश्नर द्वारा राजस्व वसूली की रोजाना समीक्षा की जा रही है।
अपील की जा रही है कि वह अपना टैक्स जमा कर दें बावजूद इसके निगम के करदाता टैक्स जमा करने को लेकर निगम प्रशासन के आदेशों को हल्के में लेते हुए दिखाई दे रहे हैं और निगम का टैक्स जमा नहीं कर रहे। मजबूरन नगर निगम को ऐसे करदाताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने को मजबूर होना पड़ रहा है ।
गन्ना किसानों के एक अध्ययन दल को महाराष्ट्र के लिए आज : रवाना किया उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने
रायपुर | छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज गन्ना किसानों के एक अध्ययन दल को महाराष्ट्र के लिए रवाना किया | इस दल में भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना और सरदार पटेल सहकारी शक्कर कारखाना के कार्यक्षेत्र के शतक से अधिक किसान शामिल हैं | यह यात्रा किसानों को गन्ने की आधुनिक खेती की उन्नत तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से आयोजित की गई है।
इस दौरान डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने अपने संबोधन में किसानों को कृषि के क्षेत्र में नई जानकारियों और तकनीकों के महत्व को बताया | उनके साथ प्राधिकृत अधिकारी और कलेक्टर गोपाल वर्मा भी उपस्थित थे, जिन्होंने बताया कि यह यात्रा किसानों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके माध्यम से वे गन्ने की खेती में नवीनतम अनुसंधान और तकनीकी जानकारी हासिल करेंगे।
यह अध्ययन दल 1 जनवरी की सुबह कवर्धा से प्रस्थान कर महाराष्ट्र के पुणे स्थित वसंत दादा पाटिल शुगर इंस्टीट्यूट पहुंचेगा, जहां किसानों को एक दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा | इस प्रशिक्षण में गन्ने की आधुनिक किस्मों, अधिक उत्पादन और उच्च रिकवरी प्राप्त करने की तकनीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी | इसके बाद किसान महाराष्ट्र के पड़ेगांव गन्ना रिसर्च सेंटर और बारामती कृषि विज्ञान केंद्र का दौरा करेंगे, जहां उन्हें गन्ने की खेती में अनुसंधान आधारित नवीनतम तकनीकों की जानकारी मिलेगी।
यात्रा के दौरान किसान पंढरपुर स्थित शक्कर कारखाने का भी भ्रमण करेंगे और शक्कर उत्पादन की प्रक्रिया को गहराई से समझेंगे | इसके बाद, सतारा में किसानों के साथ एक विशेष बैठक का आयोजन किया जाएगा, जिसमें गन्ने की खेती से जुड़े व्यावहारिक अनुभवों का आदान-प्रदान किया जाएगा।
इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य किसानों को गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीकों के बारे में जानकारी देना है, ताकि वे अपनी फसल में अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित कर सकें | इससे न केवल किसानों की आय में वृद्धि होगी, बल्कि जिले में गन्ना उत्पादन को एक नई दिशा भी मिलेगी।
इस अवसर पर दोनों शक्कर कारखानों के प्रबंधसंचालक, कैलाश चंद्रवंशी, भारतीय किसान संघ के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
महतारी वंदन की राशि से पुष्पा कर रही है अपने पति की मदद
पति के कारोबार को मिली नई गति
रायपुर | महासमुंद अंतर्गत वार्ड नम्बर 04 की निवासी पुष्पा यादव को महतारी वंदना योजना का नियमित लाभ मिल रहा है। प्रतिमाह एक हजार रुपए मिलने वाली राशि से न केवल उनके दैनिक जीवन की जरूरतें पूरा हो रही है, बल्कि मासिक राशन खर्च के लिए भी मददगार साबित हो रहा है। पुष्पा ने बताया कि वे इस राशि का उपयोग अपने पति के बढाई व्यवसाय में उपयोग होने वाले सामग्रियों की खरीद के लिए भी कर रही है। इससे उनके मन सुकून के साथ एक नए आत्मविश्वास जागृत हुआ है। साथ ही अब उनके पति का व्यवसाय आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रहा है।
पुष्पा ने बताया कि जब भी वे अपने पति को परिश्रम करते देखती थी उनके मन में सहयोग की भावना जागृत होती थी लेकिन हाथ में पैसे नहीं होने के कारण वे सीधे मदद नहीं कर पा रही थी। महतारी वंदन की राशि मिलने से उन्होंने अपने पति के व्यवसाय के लिए कटर और रेंदा मशीन खरीदी जिससे उनके पति के बढ़ाई काम में गति आई। अब उनके पति गुणवत्तापूर्ण और तेज गति से कार्य करने में सक्षम हो गया है। उनके पति संतोष यादव ने बताया कि महतारी वंदन योजना की राशि से मेरे व्यवसाय में गति आई है। अब मैं उसी सामग्री को कम समय में और सफाई के साथ बना लेता हूं। बेहतर काम करने के कारण अब मुझे काम की भी कमी नहीं रहती है। पुष्पा और उनके पति ने इस महत्वपूर्ण योजना के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित शासन-प्रशासन को धन्यवाद ज्ञापित किया है।
गौरतलब है कि राज्य शासन द्वारा महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने और स्वास्थ्य तथा पोषण स्तर में सुधार लाने के लिए महतारी वंदन योजना की शुरूआत की गई है। इस योजना के तहत प्रतिमाह 01 हजार रूपए महिलाओं के बैंक खाते में अंतरित की जाती है। योजना से महिलाओं में आत्मविश्वास जागृत हुआ है। जिले के लगभग 3 लाख 26 हजार महिलाएं इस योजना से लाभान्वित हो रही हैं। योजना अंतर्गत महतारी वंदन योजना की 10 किस्त की राशि जारी हो चुकी है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर नए वर्ष में मरीजों को मिलेगी बेहतर सुविधाएं
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर रायगढ़ मेडिकल कालेज चिकित्सालय के सुविधाओं में किया गया विस्तार
आयुष्मान योजना कक्ष का विस्तार, आईपीडी मरीजों के लिए अलग से पर्ची कटवाने की आवश्यकता नहीं, फीडबैक के लिए लगाई गयी सुझाव पेटी
रायपुर | रायगढ़ मेडिकल कालेज 35 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर शासकीय अस्पतालों में आम नागरिकों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधाओं में लगातार विस्तार किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के निर्देश पर नए वर्ष की शुरूआत में ही चिकित्सा सुविधाओं की सभी लोगों को सुगम एवं सहज उपलब्धता सुनिश्चित हो सके, यह प्रयास किया जा रहा है। स्व. लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय रायगढ़ में शहीद वीर नारायण सिंह आयुष्मान स्वास्थ्य योजना की सुविधा हेतु सभी तलों (फ़्लोर ) में कक्ष का शुभारंभ 1 जनवरी 2025 को किया गया है। वित्त मंत्री और रायगढ़ के स्थानीय विधायक ओ. पी. चौधरी ने स्वास्थ्य सेवाओं की सुगम उपलब्धता हेतु किया जा रहे इस पहल का स्वागत किया है।
मेडिकल कालेज रायगढ़ के अधिष्ठाता डॉ. विनित कुमार जैन एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ. एम. के. मिंज के अनुसार इस सुविधा विस्तार से भर्ती मरीजों एवं उनके परिजनों को काफी सुविधा होगी।इससे अनावश्यक भीड़ एवं कतार का सामना नहीं करना पड़ेगा और समय की बचत होगी। पूर्व में यह सुविधा सिर्फ एमआरडी के रजिस्ट्रेशन ओपीडी काऊंटर के समीप ही उपलब्ध थी। अस्पताल अधीक्षक डॉ. एम के मिंज के अनुसार आयुष्मान योजना कक्ष के विस्तार के साथ ही चिकित्सालय में अब ओपीडी , आईपीडी मरीज़ के जाँच के लिये अलग से जाँच पर्ची कटवाने की आवश्यकता नहीं हैं। सभी जांच पूर्णतः निःशुल्क है। ओपीडी की 10 रुपये की पंजीयन पर्ची एवं आईपीडी मरीज के लिये 85 रुपये की पर्ची के अलावा अलग से पर्ची कटवाने की आवश्यकता नहीं हैं। इसके संबंध में आदेश भी जारी कर दिया गया है।
इसके साथ ही एक नई पहल करते हुए चिकित्सालय में सुझाव एवं शिकायत पेटी (बॉक्स) की व्यवस्था की गई है । साथ ही वार्ड में भर्ती मरीज के इलाज के सम्बन्ध में प्रतिदिन चिकित्सा सामाजिक कार्यकर्ता और व्यावसायिक सलाहकार द्वारा फीडबैक लिया जा रहा है। सुझाव एवं शिकायत पेटी में प्राप्त पत्र एवं फीडबैक को अस्पताल प्रबंधन द्वारा समिति में रख कर उसका निराकरण सुनिश्चित किया जाएगा।
छत्तीसगढ़ के शहरों को साफ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाएं : उप मुख्यमंत्री अरुण साव
उप मुख्यमंत्री ने नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा की
अनुकम्पा नियुक्ति की प्रक्रियाएं 10 जनवरी तक पूर्ण करने के दिए निर्देश
आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को रोजाना वार्डों का भ्रमण कर निर्माण कार्यों, सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने कहा
अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के काम में तेजी लाने और उत्कृष्ट निर्माण के निर्देश
रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने मंगलवार को वरिष्ठ विभागीय अधिकारियों के साथ नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने मंत्रालय में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से आयोजित समीक्षा बैठक में सभी नगरीय निकायों को अनुकम्पा नियुक्ति की प्रक्रियाएं 10 जनवरी तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा अनुकम्पा नियुक्ति के लिए प्रदेशभर के नगरीय निकायों में 353 नए पद मंजूर किए गए हैं।
उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक में नगर निगमों के आयुक्तों तथा नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को रोजाना वार्डों का भ्रमण कर निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने नगरीय निकायों में बन रहे अटल परिसरों और नालंदा परिसरों के काम में तेजी लाने और इनके उत्कृष्ट निर्माण के निर्देश दिए। साव ने अधिकारियों को गंभीरता और सक्रियता से काम करते हुए राज्य के शहरों को साफ, सुंदर और सुविधापूर्ण बनाने को कहा। नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., विशेष सचिव आर. एक्का और संचालक कुंदन कुमार भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।
उप मुख्यमंत्री साव ने समीक्षा बैठक में सभी नगरीय निकायों में अटल परिसर के निर्माण कार्यों में तेजी लाते हुए अच्छी गुणवत्ता की उत्कृष्ट मूर्ति स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अटल परिसर का इस तरह निर्माण करें कि शहर में इसकी विशेष पहचान और दर्शनीय स्थल बनें। उन्होंने प्रदेश के 12 शहरों में बनाए जा रहे नालंदा परिसर के लिए निविदा की प्रक्रिया पूरी कर शीघ्र काम प्रारंभ करने को कहा। साव ने अधिकारियों से कहा कि नालंदा परिसर का शानदार और आइकॉनिक निर्माण होना चाहिए। नालंदा परिसर और अटल परिसर का निर्माण सरकार के महत्वाकांक्षी कार्य हैं। उन्होंने आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को खुद इनकी मॉनिटरिंग करने और प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए।
उप मुख्यमंत्री साव ने बैठक में अधोसंरचना मद और 15वें वित्त आयोग के तहत स्वीकृत कार्यों के साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी), अमृत मिशन 2.0, एसटीपी निर्माण और आकांक्षी शौचालयों के कार्यों में भी तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्माण कार्यों में सामग्री और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने सभी नगरीय निकायों के अधिकारियों को रोजाना प्रातः भ्रमण कर निर्माण कार्यों, साफ-सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने 01 जनवरी से ही इसकी शुरूआत कर शहरों में प्रकाश और सफाई की व्यवस्था दुरूस्त करने को कहा। साव ने इसमें किसी भी तरह की कोताही न बरतते हुए गंभीरता और सक्रियता से प्रतिदिन कार्यों की मॉनिटरिंग करने को कहा। इसमें किसी तरह का हीला-हवाला पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
साव ने समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के निर्माणाधीन आवासों को आगामी मार्च महीने तक पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने गरीबों का आशियाना तैयार करने का काम संवेदनशीलता से करते हुए इनका निर्माण प्राथमिकता से पूर्ण करने को कहा। उन्होंने किफायती आवास परियोजनाओं के तहत निर्मित आवासों का आबंटन हितग्राहियों को तत्काल करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री साव ने जनसमस्या निवारण पखवाड़ा के दौरान अनिराकृत प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर इन्हें जल्द से जल्द निराकृत करने को कहा।
साव ने नगरीय निकायों में नियमित और प्लेसमेंट कर्मचारियों के समय पर वेतन भुगतान सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने ऊर्जा की अनावश्यक खपत पर रोक लगाते हुए विद्युत देयकों का भुगतान समय पर करने के निर्देश दिए। लंबित भुगतान के कारण विद्युत देयकों पर सरचार्ज लगने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। साव ने नगरीय निकायों में सेट-अप के पुनरीक्षण के लिए आवश्यक जानकारी संचालनालय को भेजने को कहा। उन्होंने आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को सभी कार्यों की साप्ताहिक समीक्षा करने के निर्देश दिए। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की संयुक्त सचिव डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) के सीईओ शशांक पाण्डेय और नगरीय प्रशासन विभाग के अपर संचालक पुलक भट्टाचार्य सहित सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के संयुक्त संचालक एवं नगरीय निकायों के अभियंता भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।
छत्तीसगढ़ बना देश का पहला राज्य : ग्रीन जीडीपी के लिए पारिस्थितिकी तंत्र का मूल्यांकन शुरू करने वाला
रायपुर | वन पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को ग्रीन जीडीपी के साथ जोड़ने की पहल शुरू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है। इस पहल के द्वारा पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के व्यापक मूल्य को मापकर छत्तीसगढ़ के सतत विकास में रेखांकित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत 2047 विज़न और सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप विज़न डॉक्यूमेंट तैयार कर रही है, जिसमें वन विभाग द्वारा संचालित पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं के मूल्यांकन की अवधारणा सम्मिलित की गई है। यह समग्र दृष्टिकोण राज्य में पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए सतत और समृद्ध भविष्य सुनिश्चित हो सके। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का मूल्यांकन न केवल बजटीय योजना को अधिक सुव्यवस्थित बनाएगा, बल्कि भविष्य की रणनीतियों को दिशा प्रदान करेगा, धन आवंटन को अधिक प्रभावी बनाएगा और वानिकी विकास के प्रयासों को सशक्त करेगा। यह प्रक्रिया सतत विकास और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य मे संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम ने स्थानीय समुदायों को और अधिक सशक्त बनाया है। गुरु घासीदास, कांगेर घाटी और इंद्रावती जैसे राष्ट्रीय उद्यानों के साथ, छत्तीसगढ़ में प्रकृति आधारित पर्यटन के लिए असीम संभावनाएं हैं। स्थानीय निवासियों को जंगल सफारी, नेचर ट्रेल्स और इको-कैंपिंग जैसी सुविधाओं के प्रबंधन में सक्रिय रूप से शामिल किया जा रहा है, जिससे न केवल सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा मिला है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी सशक्त किया गया है। छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत भू-भाग वन क्षेत्र से आच्छादित है। यह राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार हैं और लाखों लोगों की आजीविका में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये वन विभिन्न प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ प्रदान करते हैं। वनों से प्राप्त होने वाले अन्य महत्वपूर्ण अमूर्त लाभ अक्सर उपेक्षित रहते हैं और उनका उचित मूल्यांकन नहीं हो पाता। इनमें जलवायु संतुलन बनाए रखने के लिए कार्बन अवशोषण, कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण परागण, पोषक तत्वों का चक्रण, मृदा उर्वरता में सुधार और जैव विविधता संरक्षण जैसी सेवाएं शामिल हैं। वनों का बाढ़ और रोग नियंत्रण, जल प्रवाह का प्रबंधन और वेक्टर जनित रोगों के जोखिम को कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका है।
इसके अतिरिक्त, वनों से जल पुनर्भरण और शुद्धिकरण होता है, शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान कर वायु गुणवत्ता में सुधार होता है, और सुंदर प्राकृतिक दृश्य तथा जैव विविधता-समृद्ध क्षेत्रों के माध्यम से मनोरंजन के साथ-साथ भावनात्मक संतुष्टि भी प्रदान होती है। इन वनों का गहरा आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व भी है, क्योंकि पवित्र स्थलों और देवगुड़ी जैसे क्षेत्रों के माध्यम से ये आदिवासी विरासत और परंपराओं को संरक्षित रखते हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़ के वन अनेक नदियों का उद्गम स्थल हैं, जो सतत जल प्रवाह, जलग्रहण क्षेत्र संरक्षण और कृषि तथा आजीविका के लिए आवश्यक जैविक पदार्थ से मृदा को समृद्ध करने में सहायक हैं। इन प्रत्यक्ष लाभों का राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) पर व्यापक आर्थिक प्रभाव पड़ता है। ये सभी लाभ ग्रामीण उद्योगों और आजीविका को प्रोत्साहित करते हैं और राज्य के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं।
बंद खदानों में केज कल्चर तकनीक से मछली पालन : बना रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया जरिया
राजनांदगांव जिले में 9.72 करोड़ से 324 केज इकाइयां स्थापित
150 युवाओं और महिलाओं को मिला रोजगार
रायपुर | राजनांदगांव जिले के बंद पड़ी खदानों को आजीविका के लिए उपयोगी बनाते हुए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत केज कल्चर तकनीक से मछली पालन का कार्य तेजी से लोकप्रिय और फायदेमंद साबित हो रहा है। यह नवाचार न केवल मत्स्य पालकों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हुआ है, बल्कि 150 से अधिक स्थानीय बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार का नया जरिया भी बन गया है।
जिले के ग्राम जोरातराई में बंद पड़ी खदानों को जलस्रोत के रूप में उपयोग करते हुए 9.72 करोड़ रुपए की लागत से 18 इकाइयों में कुल 324 केज लगाए गए हैं। प्रत्येक केज इकाई की लागत 3 लाख रुपए है, जिसमें से 60 प्रतिशत अनुदान के रूप में 5.83 करोड़ रुपए की राशि प्रदान की गई है। केज कल्चर, जिसे नेट पेन कल्चर भी कहा जाता है, जलाशय में फ्लोटिंग केज यूनिट स्थापित करने की एक आधुनिक तकनीक है। इसमें एक केज यूनिट में चार बाड़े होते हैं, जहां उंगली के आकार की मछलियों को पाला जाता है, जो पांच माह में लगभग एक से सवा किलो वजन की हो जाती है। इस तकनीक में तिलापिया और पंगेसियस जैसी मछलियों का पालन किया जा रहा है। प्रत्येक केज से 2.5 से 3 टन तक मछली उत्पादन होता है, जिससे 6 से 8 हजार रुपए की मासिक आमदनी होती है।
ग्राम मुढ़ीपार स्टेशन पारा की पूर्णिमा साहू ने बताया कि जय मां संतोष महिला स्वसहायता समूह के माध्यम से केज कल्चर तकनीक से जुड़ने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। समूह की महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का आभार प्रकट किया है। जोरातराई की खदानों में 8 लाख से अधिक मछलियां पाली जा रही हैं। यह तकनीक न केवल मछलियों की तेज वृद्धि और स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त है, बल्कि संक्रमण का खतरा भी कम रहता है। मत्स्यपालक अपनी जरूरत के अनुसार केज से मछलियां निकाल सकते हैं।
राज्य सरकार की इस पहल ने बेरोजगार युवाओं और महिलाओं को रोजगार के साधन उपलब्ध कराए हैं। मत्स्य पालन की इस नवीन तकनीक से अब ताजी और स्थानीय मछलियां बाजार में उपलब्ध हो रही हैं। केज कल्चर तकनीक ने जिले में मछली उत्पादन के नए आयाम स्थापित किए हैं। जलाशयों और बंद खदानों के जलस्रोतों का यह उपयोग स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
कंपकंपाती ठंड से होगी शुरुआत : नए साल से छत्तीसगढ़ में
रायपुर | छत्तीसगढ़ में ठंड अब लोगों को सताने वाली है | अगले 5 दिनों तक मौसम शुष्क (ड्राय) रहेगा | तापमान में सोमवार से गिरावट देखने को मिलेगी | दो जनवरी तक न्यूनतम तापमान में 6 से 8 डिग्री तक गिरावट आएगी | रविवार को मनेन्द्रगढ़ भरतपुर जिले में बारिश हुई | सबसे अधिकतम 31.2 डिग्री में दर्ज किया गया | वहीं बलरामपुर एक बार फिर सबसे ज्यादा ठंडा रहा, यहां 12.6 डिग्री दर्ज किया गया है।
मौसम वैज्ञानिक एचपी चंद्रा के अनुसार, 31 दिसंबर यानी नए साल की शुरुआत में उत्तरी शेत्र में शीतलहर रहने की संभावना है | राजधानी रायपुर में मौसम साफ रहेगा | मौसम में ठंडक बढऩे के साथ कोहरे की स्थिति बनी रहती है | ऐसे में वन क्षेत्र में कोहरा छाए रहेगा |
राजधानी रायपुर में अधिकतम तापमान 28 डिग्री तो न्यूनतम तापमान 18 डिग्री रहने की संभावना जताई गई है |
छत्तीसगढ़ में कृषि और पशुपालन को नई दिशा देने वाला उपकरण : फोल्डस्कोप
राज्य के 20 जिलों के किसान कर रहे हैं फोल्डस्कोप का उपयोग
उन्नत तकनीक के जरिए किसान मिट्टी की गुणवत्ता और पौधों की बीमारियों का पता लगाने में हो रहे सक्षम
रायपुर | मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की विशेष पहल पर छत्तीसगढ़ में खेती को उन्नत और लाभकारी बनाने के लिए लगातार नित नए नवाचार किए जा रहे हैं। किसानों को उन्नत कृषि उपकरणों के उपयोग और वैज्ञानिक पद्धति को अपनाने के लिए लगातार प्रोत्साहित किए जा रहा है, जिसके सार्थक परिणाम भी सामने आने लगे है। छत्तीसगढ़ राज्य कृषि प्रधान राज्य है। यहां की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी खेती किसानी पर निर्भर है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था की धुरी भी कृषि है। छत्तीसगढ़ को खुशहाल और समृद्ध बनाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को हर संभव मदद दे रही है।
छत्तीसगढ़ में फसलों के कीट प्रकोप प्रबंधन और उन्नत नस्ल के पशुपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किसानों को फोल्डस्कोप माइक्रोस्कोप के उपयोग के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित किया जा रहा है। राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान के सहयोग से राज्य के 20 जिलों के किसानों को ’’फोल्डस्कोप’’ नामक पोर्टेबल माइक्रोस्कोप वितरित किया गया है, जिसका उद्देश्य किसानों को खेती और पशुपालन में वैज्ञानिक तकनीकों से सशक्त बनाना है। रायगढ़, जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार-भाटापारा, रायपुर, धमतरी, दुर्ग, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, कोरिया, सरगुजा, जशपुर, कोरबा, सक्ती, महासमुंद, बिलासपुर, मुंगेली, कबीरधाम, बेमेतरा, कांकेर और बस्तर जिलों के 30 से अधिक गांवों में फैले इस कार्यक्रम को आईसीएआर - राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
फोल्डस्कोप एक किफायती और पोर्टेबल माइक्रोस्कोप है, जिसे स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक प्रोफेसर मनु प्रकाश और उनकी टीम ने विकसित किया है। इसे 2014 में लॉन्च किया गया था और तब से इसका उपयोग शिक्षा, शोध और निदान के लिए किया जा रहा है। यह उपकरण खेती और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में बेहद उपयोगी और किफायती है। फोल्डस्कोप का उपयोग किसान कीट और रोग का पता लगाने, मिट्टी की गुणवत्ता की जांच और पानी के विश्लेषण के लिए कर रहे हैं। इसकी मदद से फसलों में पाउडरी फफूंदी, पत्ती झुलसा, पत्ती धब्बा और कटाई के बाद होने वाली बीमारियों की पहचान की जा रही है। अब तक, फोल्डस्कोप की मदद से 16 प्रकार के फफूंद रोगों और उनके कारक जीवों की पहचान हो चुकी है। उदाहरण के लिए, गोलोविनोमाइसेस सिचोर-एसेरम और एरीसिफे पॉलीगोनी जैसे रोगजनकों का पता लगाया गया है। फोल्डस्कोप केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे पशुपालन में भी इस्तेमाल किया जा रहा है। मवेशियों के कृत्रिम गर्भाधान के लिए वीर्य की गुणवत्ता का आकलन करने में इसका प्रयोग किया गया है। इससे गर्भधारण दर में सुधार हुआ है और देशी मवेशियों की नस्लों की ग्रेडिंग बेहतर हो रही है।
फोल्डस्कोप का उपयोग पांच जैविक कीटनाशकों और दो जैव एजेंटों का परीक्षण करने के लिए भी किया गया है। इससे रसायनों पर निर्भरता घटाने और पर्यावरण-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने में मदद मिल रही है। फोल्डस्कोप को बनाने का विचार तब आया जब प्रोफेसर मनु प्रकाश ने खेतों का दौरा किया और पाया कि वैज्ञानिक उपकरणों की अनुपलब्धता किसानों के लिए एक बड़ी बाधा है। उन्होंने एक ऐसा उपकरण विकसित किया जो सस्ता, टिकाऊ और ग्रामीण क्षेत्रों में उपयोग के लिए आदर्श हो। फोल्डस्कोप ने छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए कृषि और पशुपालन को सरल और वैज्ञानिक बना दिया है। यह उपकरण न केवल खेती में लागत कम कर रहा है, बल्कि फसल और मवेशियों की गुणवत्ता में सुधार कर उनकी आय बढ़ाने में मदद कर रहा है।