छत्तीसगढ़
सिद्धखोल जलप्रपात में ईको-टूरिज्म प्रबंधन से संवर रही स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका
समय पर पहचान, समय पर उपचार: चिरायु टीम ने 10 वर्षीय त्रिशांत को दिया नया जीवन
यह सफलता की कहानी दर्शाती है कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) केवल स्वास्थ्य परीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में जन्मजात रोगों, बीमारियों एवं अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की समय पर पहचान, विशेषज्ञ उपचार, निःशुल्क चिकित्सा, सुरक्षित रेफरल तथा सतत फॉलो-अप के माध्यम से उनके स्वस्थ एवं सुरक्षित भविष्य का मजबूत आधार तैयार कर रहा है। धमतरी जिले में चिरायु टीम का यह समर्पित प्रयास शासन की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य सेवाओं की संवेदनशीलता, प्रभावशीलता और प्रतिबद्धता का प्रेरक उदाहरण है।
17 अगस्त को पाटन से टोलाघाट के लिए निकलेगी भव्य कांवर यात्रा, एक मुठ्ठी दान से प्राप्त अन्न से बनेगा महाप्रसाद
रायपुर। बोल बम कांवर यात्रा समिति, पाटन की महत्वपूर्ण बैठक शनिवार को रेस्ट हाउस पाटन में समिति के संयोजक जितेन्द्र वर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी सावन के तीसरे सोमवार 17 अगस्त को पाटन से टोलाघाट तक भव्य एवं विशाल कांवर यात्रा निकाली जाएगी। बैठक में यात्रा को अधिक भव्य, सुव्यवस्थित एवं श्रद्धामय स्वरूप प्रदान करने के लिए विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई एवं आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया गया। भगवान शंकर के नाम से शिवभक्तों द्वारा प्राप्त एक मुठ्ठी अन्नदान से महाप्रसाद बनाया जाएगा।
समिति के संयोजक जितेन्द्र वर्मा ने कहा कि कांवर यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन बस नहीं है यह सनातन संस्कृति, आस्था, अनुशासन, सेवा और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। प्रत्येक वर्ष हजारों शिवभक्त "बोल बम" के जयघोष के साथ भगवान भोलेनाथ के जलाभिषेक हेतु इस यात्रा में शामिल होते हैं। इस बार भी यह यात्रा पाटन ओग्गर तालाब में विराजमान भगवान भोलनाथ जी का आशीर्वाद लेकर टोलाघाट के लिए रवाना होगी। बैठक में यात्रा मार्ग, सुरक्षा व्यवस्था, चिकित्सा सहायता, पेयजल एवं भोजन व्यवस्था, विश्राम स्थल, यातायात समन्वय, स्वच्छता, प्रचार-प्रसार एवं स्वयंसेवकों की जिम्मेदारियों सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा कर संबंधित दायित्वों का निर्धारण किया गया।
बैठक के अंत में संयोजक जितेन्द्र वर्मा ने पाटन क्षेत्र के सभी सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों, युवा मंडलों, महिला समूहों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारी बंधुओं, स्वयंसेवकों एवं शिवभक्तों से अधिक से अधिक संख्या में कांवर यात्रा में शामिल होकर आयोजन को सफल बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन किसी एक व्यक्ति या समिति का नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आस्था, श्रद्धा और सामूहिक सहभागिता का महापर्व है। समिति ने सभी श्रद्धालुओं से 17 अगस्त को पाटन से टोलाघाट तक निकलने वाली इस भव्य कांवर यात्रा में शामिल होकर भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने की अपील की।
ईपीएफओ ने प्रोविडेंट फंड ट्रस्टों के लिए 'एमनेस्टी स्कीम, 2026' की लागू
रायपुर। केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उन संस्थानों के लिए 'एमनेस्टी स्कीम, 2026' (माफ़ी योजना) की शुरुआत की है, जो इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत मान्यता प्राप्त प्रोविडेंट फंड (PF) ट्रस्ट चला रहे हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ऐसे संस्थानों को अपनी स्थिति को कानूनी रूप से नियमित (regularize) करने का एक बड़ा अवसर प्रदान करना है। वित्त अधिनियम, 2026 के माध्यम से अब मान्यता प्राप्त प्रोविडेंट फंड के आयकर ढांचे को 'एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड एंड मिसलेनियस प्रोविजन्स एक्ट, 1952' के कानूनी और प्रशासनिक प्रावधानों के अनुरूप बना दिया गया है।
इस नई व्यवस्था के तहत, आयकर अधिनियम के अंतर्गत मान्यता केवल उन्हीं ट्रस्टों को दी जाएगी, जिन्हें भविष्य निधि अधिनियम, 1952 की धारा 17 के तहत औपचारिक छूट (exemption) प्राप्त है। ऐसे संस्थानों को अधिनियम की धारा 17 और 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020' की धारा 143 के तहत पिछली तारीख से (retrospectively) एमनेस्टी प्रदान की जाएगी। यह योजना उन संस्थानों पर प्रभावी होगी जिनके पास संबंधित केंद्र या राज्य सरकार से छूट का औपचारिक नोटिफिकेशन नहीं है। 29 जून, 2026 को जारी अधिसूचना के बाद से यह योजना अगले छह (6) महीनों के लिए खुली रहेगी।
योजना का लाभ उठाने के लिए पात्र संस्थानों को दो श्रेणियों में बांटा गया है। श्रेणी-I में वे संस्थान शामिल हैं जो अपने ट्रस्ट को पिछली तारीख से नियमित कराना चाहते हैं और जिन्होंने बिना छूट वाले संस्थान (un-exempted) के रूप में नियमों का पालन शुरू कर दिया है या भविष्य में ऐसा करने का विकल्प चुन रहे हैं। वहीं श्रेणी-II में वे संस्थान आते हैं जो ट्रस्ट को पिछली तारीख से नियमित कराने के साथ-साथ 'कोड ऑन सोशल सिक्योरिटी, 2020' के तहत एक छूट प्राप्त संस्थान (exempted establishment) के तौर पर अपनी गतिविधियों को आगे भी जारी रखना चाहते हैं।
इस योजना के तहत नियोक्ताओं को कई प्रमुख राहतें और लाभ दिए जा रहे हैं। इसके तहत ट्रस्ट की स्थापना से लेकर एक निश्चित कट-ऑफ तारीख तक छूट की स्थिति और मान्यता को पिछली तारीख से नियमित किया जाएगा। इसके अलावा, सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत कर्मचारियों की न्यूनतम संख्या और कॉर्पस के आकार से जुड़े नियमों में ढील दी गई है, तथा 3 साल पहले के नियमों के अनुपालन की शर्त को भी पूरा माना जाएगा। सबसे बड़ी राहत के रूप में, बकाया राशि, हर्जाने और ब्याज के लिए चल रही सभी कानूनी व असेसमेंट कार्यवाहियां वापस ले ली जाएंगी, बशर्ते सदस्यों के खातों में कानूनी दरों के समान या उससे बेहतर ब्याज और योगदान जमा किया गया हो।
योजना का लाभ उठाने के लिए नियोक्ताओं को कुछ अनिवार्य जिम्मेदारियों को पूरा करना होगा। योग्य संस्थानों को केंद्र सरकार को संबोधित एक औपचारिक आवेदन संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को ईमेल के माध्यम से भेजना होगा। इसके साथ ही, इस योजना से जुड़ने की इच्छा जताते हुए एक 'एक्सप्रेशन ऑफ़ इंटरेस्ट' (EoI) ईमेल आईडी rc.exemption@epfindia.gov.in पर भी भेजा जा सकता है। नियोक्ताओं के लिए अपने वित्तीय खातों का ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) से कराना अनिवार्य होगा और भविष्य निधि कार्यालय के अधिकारियों के निर्देशानुसार विशेष या अनुपालन ऑडिट को आवेदन के 3 महीने के भीतर पूरा करना होगा।
विस्तृत प्रक्रिया और दिशा-निर्देशों के लिए हितधारक 29 जून, 2026 की राजपत्र अधिसूचना GSR 525(E) के तहत जारी 'कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 2026' के अनुबंध (Annexure) के भाग C को देख सकते हैं। इसके अतिरिक्त, ईपीएफओ (EPFO) की आधिकारिक वेबसाइट पर परिपत्र और एसओपी (SoP) भी उपलब्ध हैं। क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त श्री जयवदन इंगले ने सभी संबंधित ट्रस्टों और नियोक्ताओं से आग्रह किया है कि वे इस सीमित अवधि की योजना का लाभ उठाने के लिए जल्द से जल्द आवेदन करें और अपनी कानूनी स्थिति को सुदृढ़ करें।
बस्तर गोंचा महापर्व 2026 का निमंत्रण लेकर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मिले प्रतिनिधि
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से उनके निवास कार्यालय में बस्तर गोंचा महापर्व आयोजन समिति के प्रतिनिधियों ने सौजन्य मुलाकात कर उन्हें गोंचा महापर्व-2026 में शामिल होने का आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने आमंत्रण के लिए आभार व्यक्त करते हुए महापर्व के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने भगवान श्री जगन्नाथ को पारंपरिक रूप से दी जाने वाली सलामी तुपकी चलाकर महापर्व की सांस्कृतिक परंपरा का सम्मान किया।
प्रतिनिधिमंडल ने जगदलपुर शहर में विद्युत तारों को अंडरग्राउंड किए जाने के निर्णय के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इससे शहर में विद्युत संबंधी समस्याओं का समाधान हुआ है तथा भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के सुचारु संचालन में आने वाली बाधाएँ भी समाप्त हो गई हैं।
360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष वेदप्रकाश पाण्डे ने बताया कि समाज अपनी 619 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा का निर्वहन करते हुए इस वर्ष 29 जून से 25 जुलाई 2026 तक बस्तर के ऐतिहासिक गोंचा महापर्व का आयोजन कर रहा है। भगवान श्री 1008 जगन्नाथ महाप्रभु की भव्य रथयात्रा 16 जुलाई को श्री जगन्नाथ मंदिर से प्रारंभ होकर सिरहासार भवन (जनकपुरी) में संपन्न होगी, जहाँ महाप्रभु विराजमान होंगे। इस अवसर पर वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक किरण सिंह देव, महापर्व आयोजन समिति के अध्यक्ष मुक्तेश पाण्डे सहित समिति के अन्य प्रतिनिधि उपस्थित थे।
भोरमदेव में इको-टूरिज्म को मिली नई पहचान, उप मुख्यमंत्री ने वन महोत्सव और 6 किमी लंबे इको ट्रेल का किया शुभारंभ
रायपुर। कबीरधाम जिले के भोरमदेव अभ्यारण्य में प्रकृति संरक्षण और इको-टूरिज्म को नई पहचान देते हुए उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने आज जंगल सफारी में वन महोत्सव और भोरमदेव इको ट्रेल का शुभारंभ किया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री ने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, वन विभाग के कर्मचारियों और ग्रामीणों के साथ लगभग 6 किलोमीटर लंबी भोरमदेव इको ट्रेल का भ्रमण कर जंगल की प्राकृतिक सुंदरता, जैव विविधता और रोमांचक वन यात्रा का अनुभव लिया। प्राकृतिक पर्यावरण में की जाने वाली एक जिम्मेदार यात्रा है। इसका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना वहां के प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों का संरक्षण करना, और स्थानीय समुदायों को आर्थिक रूप से लाभ पहुँचाना है।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव अभ्यारण्य में जंगल सफारी शुरू होने के बाद पर्यटक अब जंगल के अंदर जाकर प्रकृति का करीब से आनंद ले रहे हैं। अब आज से शुरू हुई भोरमदेव इको ट्रेल भी पर्यटकों को घने जंगल, प्राकृतिक सुंदरता और वन्य जीवों के बीच एक नया और यादगार अनुभव देगी। उन्होंने कहा कि प्रकृति ने भोरमदेव क्षेत्र को अनमोल प्राकृतिक सौंदर्य से समृद्ध किया है। उन्होंने कहा कि पर्यटन दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाला और सबसे अधिक रोजगार देने वाला क्षेत्र है। भोरमदेव में पर्यटन सुविधाओं के बढ़ने से यहां अधिक पर्यटक आएंगे। इससे होटल, वाहन, खान-पान, हस्तशिल्प और अन्य छोटे-बड़े व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
उप मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा कि पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। अभी भी कई युवा जंगल सफारी में नेचर गाइड बनकर पर्यटकों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। आने वाले समय में ऐसे अवसर और बढ़ेंगे, जिससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि साल भर यहां पर्यटन गतिविधियां तेजी से चलने की संभावना है, जिसका सीधा लाभ क्षेत्र के लोगों को मिलेगा। श्री शर्मा ने कहा कि भोरमदेव का विकास तभी सफल होगा, जब स्थानीय लोग इसे अपनी धरोहर मानकर इसकी सुरक्षा करेंगे। उन्होंने सभी से पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि इस प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखना और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है। वन विभाग द्वारा विकसित भोरमदेव इको ट्रेल लगभग 6 किलोमीटर लंबी है, जिसे पूरा करने में करीब 3 से 4 घंटे का समय लगता है। ट्रेल के दौरान पर्यटक प्राकृतिक वन, मनमोहक दृश्य, पक्षियों और तितलियों का अवलोकन, औषधीय वनस्पतियों की जानकारी तथा प्रशिक्षित नेचर गाइड के साथ सुरक्षित वन भ्रमण का आनंद ले सकेंगे।
भोरमदेव ईको ट्रेल का संचालन करियाआमा गेट स्थित भोरमदेव ईको कैंप से प्रत्येक शनिवार और रविवार को किया जाएगा। वन मंडलाधिकारी श्री निखिल अग्रवाल ने बताया कि अनुभवी नेचर गाइड के साथ प्रतिभागियों को जंगल भ्रमण कराया जाएगा। इस दौरान वे पेड़-पौधों, औषधीय वनस्पतियों, पक्षियों, तितलियों, वन्यजीवों, स्थानीय भोजन, भोरमदेव मंदिर विरासत परिसर के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। ईको ट्रेल में भाग लेने के लिए 1 हजार रुपए प्रति व्यक्ति शुल्क निर्धारित किया गया है।
शाला प्रवेश उत्सव में गूंजा शिक्षा का उत्साह.... मंत्री राजेश अग्रवाल ने बच्चों का किया स्वागत
रायपुर। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वामी आत्मानंद गवर्नमेंट अंग्रेजी माध्यम स्कूल, उदयपुर में आयोजित विकासखंड स्तरीय 'शाला प्रवेश उत्सव' में सहभागिता कर नवप्रवेशी विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने बच्चों को मिठाई खिलाकर नवीन शैक्षणिक जीवन की शुभ शुरुआत कराई तथा अध्ययन सामग्री भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामनाएं की।
इस अवसर पर मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि "हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आगे बढ़ने के समान अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षा केवल ज्ञान अर्जित करने का माध्यम नहीं, बल्कि एक सशक्त, आत्मनिर्भर और संस्कारित समाज के निर्माण की आधारशिला है। हमें ऐसा वातावरण तैयार करना होगा, जहां प्रत्येक विद्यार्थी अपनी प्रतिभा को निखारते हुए अपने सपनों को साकार कर सके।"
उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व निर्माण की पाठशाला भी है। उन्होंने विद्यार्थियों से मन लगाकर अध्ययन करने, नियमित विद्यालय आने तथा जीवन में उच्च लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री राजेश अग्रवाल ने विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अवलोकन किया और उनकी प्रतिभा की सराहना की। इस अवसर पर मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की प्रशंसा करते हुए उन्हें निरंतर उत्कृष्टता की ओर अग्रसर रहने के लिए प्रेरित किया।
मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवीन शैक्षणिक सत्र के अवसर पर सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं शिक्षकगण को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में परिवार और शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके सामूहिक प्रयासों से ही शिक्षित, जागरूक और सशक्त समाज का निर्माण संभव है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधिगण, शिक्षकगण, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ ओलम्पिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने की सीएम साय से मुलाकात
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से उनके निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ ओलम्पिक एसोसिएशन के महासचिव विक्रम सिंह सिसोदिया के नेतृत्व में एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने राज्य सरकार द्वारा उत्कृष्ट खिलाड़ियों के हित में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।
एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने विशेष रूप से 20 विभिन्न खेलों के 156 खिलाड़ियों को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित किए जाने तथा उन्हें शासकीय सेवा में लाभ का अवसर प्रदान करने के राज्य सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे खिलाड़ियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रदेश में खेलों के प्रति युवाओं का रुझान और अधिक सशक्त होगा। उन्होंने इसे खेल प्रतिभाओं के सम्मान और उनके उज्ज्वल भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राज्य सरकार खिलाड़ियों को उनकी प्रतिभा और उपलब्धियों के अनुरूप बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। हमारी सरकार का उद्देश्य ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपनी क्षमता का सर्वोत्तम प्रदर्शन करने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन, संसाधन और सम्मान मिल सके। उन्होंने कहा कि उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में अवसर प्रदान करने का निर्णय युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित करेगा तथा प्रदेश में खेल संस्कृति को नई ऊर्जा देगा।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य के खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का गौरव निरंतर बढ़ाएंगे। उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतियोगिता का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण की भावना विकसित करने का सशक्त आधार हैं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ओलम्पिक एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रदेश में खेल अधोसंरचना के विकास तथा खिलाड़ियों के हित में राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।
भव्य कांवर यात्रा महोत्सव की तैयारियां प्रारंभ, 11 जुलाई को पाटन रेस्ट हाउस में होगी महत्वपूर्ण बैठक
शिक्षकों की कमी पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, तीन स्कूलों में जड़ा ताला
रायपुर। छत्तीसगढ़ के बालोद ब्लॉक के लिमोरा गांव में शिक्षकों की कमी से नाराज ग्रामीणों ने उग्र कदम उठाते हुए स्कूल में ताला जड़ दिया है। ग्रामीणों ने गांव के प्राइमरी, मिडिल और हायर सेकेंडरी तीनों स्कूलों के मुख्य गेट पर ताला लगाकर प्रदर्शन किया।
ग्रामीणों का कहना है कि प्राइमरी से लेकर हायर सेकेंडरी स्कूल तक कुल 200 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए सिर्फ 12 शिक्षक ही हैं। शिक्षकों की इस भारी कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने कई बार प्रशासन से शिक्षकों की कमी को दूर करने की मांग की थी। शिकायतों के बाद भी जब प्रशासन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया, तो थक-हारकर ग्रामीणों को तालाबंदी जैसा कड़ा कदम उठाना पड़ा।
स्कूल में तालाबंदी की खबर मिलते ही आला अधिकारी आनन-फानन में मौके पर पहुंचे। अधिकारी लगातार पालकों और बच्चों को समझाने-बुझाने की कोशिश कर रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में अगले 4 दिन बारिश के आसार, कई जिलों में गरज-चमक और वज्रपात का अलर्ट
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले चार दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। वहीं उत्तर छत्तीसगढ़ के कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ वज्रपात की चेतावनी भी जारी की गई है। राजधानी रायपुर समेत कई शहरों में दिनभर बादल छाए रहने और रुक-रुककर बारिश होने के आसार हैं।
मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में फिलहाल बादलों की आवाजाही बनी रहेगी। कई जिलों में गरज के साथ बारिश हो सकती है, जिससे लोगों को उमस से राहत मिलने की उम्मीद है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे लगे क्षेत्रों में बना निम्न दबाव का क्षेत्र अभी सक्रिय है। इसके साथ जुड़े चक्रवाती परिसंचरण और मौसमी द्रोणिका (मानसून ट्रफ) के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में लगातार नमी बनी हुई है। इसी वजह से अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकांश इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। कई जिलों में दिनभर बादल छाए रहे, जबकि कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश हुई।
मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि उत्तर संभाग और मध्य छत्तीसगढ़ के कई जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। अगले चार से पांच दिनों तक बारिश की स्थिति बनी रहेगी। इसके बाद मौसम के मिजाज में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने लोगों से खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने और विशेष रूप से गरज-चमक के समय खुले स्थानों में जाने से बचने की सलाह दी है।
जल जीवन मिशन से बदली जशपुर के बिरहीपानी की तस्वीर, 129 घरों तक पहुंचा स्वच्छ पेयजल
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जल जीवन मिशन के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों तक शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार प्रभावी कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जशपुर जिले के जिला मुख्यालय से लगभग 100 किलोमीटर दूर स्थित सीमांत ग्राम बिरहीपानी में जल जीवन मिशन ने ग्रामीणों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। अब गांव के सभी 129 घरों में नल के माध्यम से नियमित रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है।
घने जंगलों से घिरे और भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम इस गांव में लंबे समय तक मूलभूत सुविधाओं का समुचित विकास नहीं हो पाया था। जल जीवन मिशन से पहले ग्रामीण अपनी पेयजल आवश्यकताओं के लिए हैंडपंप, कुएं और ढोढ़ी जैसे पारंपरिक जल स्रोतों पर निर्भर थे। गर्मी के मौसम में इन स्रोतों का जलस्तर घट जाने से पेयजल संकट गहरा जाता था और ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं एवं बच्चों को पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। असुरक्षित जल के उपयोग से जलजनित बीमारियों का खतरा भी बना रहता था।
इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्राम बिरहीपानी में संगठित पाइप जल प्रदाय प्रणाली विकसित की गई। योजना के तहत चार उच्च स्तरीय जलागारों का निर्माण किया गया तथा पूरे गांव में पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया गया। इसके माध्यम से गांव के सभी 129 परिवारों को क्रियाशील फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (एफएचटीसी) उपलब्ध कराए गए हैं।
आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। प्रत्येक परिवार को घर-घर नल से स्वच्छ पेयजल मिल रहा है। इससे महिलाओं के समय और श्रम की उल्लेखनीय बचत हुई है तथा वे अब परिवार की देखभाल, बच्चों की शिक्षा और आजीविका संबंधी गतिविधियों में अधिक समय दे पा रही हैं। स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से जलजनित बीमारियों में कमी आई है और बच्चों की विद्यालयों में नियमित उपस्थिति भी बढ़ी है।
योजना के दीर्घकालिक संचालन एवं रखरखाव के लिए ग्राम स्तर पर जल एवं स्वच्छता समिति का गठन किया गया है। स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी से जलापूर्ति व्यवस्था का सफल संचालन किया जा रहा है, जिससे योजना की सतत उपयोगिता सुनिश्चित हो रही है।
ग्रामवासियों ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित जल जीवन मिशन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि घर-घर नल से जल उपलब्ध होने से उनका जीवन अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और सम्मानजनक बन गया है। ग्राम बिरहीपानी की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रभावी क्रियान्वयन, जनसहभागिता और सुशासन के माध्यम से प्रदेश के दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों में भी विकास की नई इबारत लिखी जा सकती है।
चलती स्कूल वैन से सड़क पर गिरा मासूम, CCTV में कैद हुई लापरवाही
रायपुर। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के भिलाई से स्कूल वैन चालक की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आई है, जहां एक मासूम बच्चा चलती स्कूल वैन से सड़क पर गिर गया। गनीमत रही कि वैन के पीछे कोई वाहन नहीं था। वरना कोई बड़ा हादसा हो सकता था। पूरी घटना पास में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। यह मामला छावनी थाना क्षेत्र का है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना 8 जुलाई की दोपहर करीब डेढ़ बजे की है। खुर्सीपार स्थित फॉरबेल्स स्कूल की वैन बच्चों को उनके घर छोड़ने निकली थी। नंदिनी रोड पर वैन एक बच्चे को उतारकर आगे बढ़ रही थी इसी दौरान पीछे बैठा एक मासूम का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे सड़क पर गिर पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वैन के पीछे का गेट ठीक से बंद नहीं था। ड्राइवर ने जल्दबाजी में बच्चे को उतारने के बाद गेट लॉक नहीं किया। जैसे ही उसने वाहन की रफ्तार बढ़ाई, खुले गेट से बच्चा बाहर गिर गया।
बच्चे के सड़क पर गिरने के बाद आसपास के दुकानदारों ने वैन चालक को रोकने के लिए आवाज लगाई, लेकिन वह करीब 300 मीटर आगे निकल चुका था। इसके बाद पीछे चल रहे कुछ बाइक सवारों ने वैन का पीछा कर उसे रोका। बाद में वहां मौजूद एक महिला ने घायल बच्चे को फिर से स्कूल वैन में बैठाकर आगे भेजा।
बताया जा रहा है कि घटना के समय स्कूल वैन में केवल ड्राइवर मौजूद था। उसमें कोई कंडक्टर या सहायक नहीं था, जो बच्चों पर नजर रख सके। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्कूल वैन की सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों के परिवहन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
डॉ. प्रीता के नेतृत्व में रोटरी टीम ने ली शपथ... समाज सेवा के लिए तैयार की गई रूपरेखा
रायपुर। रोटरी क्लब ऑफ रायपुर के 71वें स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ प्रारंभ हुआ। इसके पश्चात पर्यावरण का संदेश देते हुए सभी अतिथियों को पौधे , श्रीफल शाल देकर सम्मानित किया गया। रोटरी क्लब की नवनिर्वाचित अध्यक्ष डॉ प्रीता लाल ने अपनी टीम के साथ कार्यभार संभाला। इस अवसर पर उनकी टीम के सदस्य आईपीपी उतम गर्ग , सचिव अरविंद जोशी, उपाध्यक्ष डॉ राकेश पांडे, कोषाध्यक्ष समीर सिंग, सह सचिव योगेश अग्रवाल, उज्ज्वल बत्रा, जयंत थोराट, गिरिश वोरा, इंदिरा मिश्र, प्रदीप गोविंद शितूत, समीर रक्षित, जयंत अग्रवाल, अनिश नरनोलिया, जयंत अग्रवाल ने भी अपना कार्यभार संभाला।
खचाखच भरे हाल में मुख्य अतिथि प्रांतपाल आलम सिंग रूपरा ने नवगठित कार्यकारिणी को सामाजिक हित के लिए ऐसे नए नए प्रॉजेक्ट प्रारंभ करने की सलाह दी, जिसके दीर्घगामी प्रभाव हों और अपने उत्कृष्ट सेवा कार्यों से समाज की सेवा करने के लिए उत्प्रेरित किया। निवर्तमान अध्यक्ष उत्तम गर्ग द्वारा अपने कार्यकाल में किये गए कार्यों की जानकारी प्रदान की गई।
नवनिर्वाचित अध्यक्ष ने अपने कार्यकाल में अनेक प्रोजेक्ट के माध्यम से समाज सेवा के लिए तैयार की गई रूपरेखा की जानकारी प्रदान की जिसमें मुख्य रूप से निशुल्क संचालित कंप्यूटर कौशल प्रशिक्षण केंद्र का विस्तार कर दानी स्कूल में भी इसे शीघ्र संचालित करने और सिलाई कौशल प्रशिक्षण केंद्र पुनः प्रारंभ करने के साथ ही छोटे बच्चों, बुजुर्गों, ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों के लिये कान से कम सुनाई देने संबंधित समस्याओं के डायग्नोसिस एवं निदान के लिये सतत रूप से चलने वाले प्रोजेक्ट के बारे मे बताया। साथ ही समाज सेवा , पर्यावरण , मेडिकल कैम्प , युवाओं की जागरूकता, रोजगार आदि के द्वारा समाज सेवा को पूर्ण करने हेतु अपने फोकस पर बात की। सहायक प्रांतपाल मोनिका जग्गी ने नई टीम को बधाई देते हुए एकजुटता और सेवा भाव से कार्य करने के लिए आव्हान किया।
रोटरी में फाउंडेशन में आर्थिक सहयोग की अपनी एक अलग ही परंपरा है इस फंड से रोटरी द्वारा विश्व स्तर पर पोलियो मुक्त अभियान के साथ ही साथ अन्य सेवा कार्यों में इस राशि का उपयोग किया जाता है यह राशि कोई भी समाज सेवी संगठन , या व्यक्तिगत रूप से दान कर सकता है रोटरी क्लब ऑफ रायपुर ने इसके लिए ग्यारह हजार, रोटरी क्लब ऑफ रायपुर कॉस्मोपोलैटिन ने इक्कीस हजार रुपए का चेक एवं रोटेरियन राज दुबे जी ने भी चेक प्रांतपाल आलम जी को भेंट किया । प्रांत की प्रथम महिला हरपाल रूपरा ने इन सभी को धन्यवाद देते हुए भविष्य में और अधिक दान देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम का संचालन भरत डागा ने बहुत ही सहज एवं सशक्त तरीके से किया । कार्यक्रम की समाप्ति पर सचिव अरविंद जोशी द्वारा अतिथियों और उपस्थित रोटेरियनो के प्रति आभार प्रकट किया गया। इस अवसर पर रोटरी के सुभाष साहू , राकेश दवे, शशि वरवँडकर, दीपक मेहता सहित रायपुर शहर के 13 क्लबों के अध्यक्ष, सचिव व भारी संख्या में रोटेरियन उपस्थित रहे।
आईआईटी भिलाई और सेना के मध्य हुआ एमओयू, रक्षा तकनीक पर मिलकर करेंगे रिसर्च
रायपुर। भारतीय सेना के तकनीकी संस्थान 506 आर्मी बेस वर्कशॉप, जबलपुर और आईआईटी भिलाई के बीच रक्षा तकनीक, अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता 8 जुलाई 2026 को आईआईटी भिलाई परिसर में हुआ।
एमओयू पर आईआईटी भिलाई के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश और 506 आर्मी बेस वर्कशॉप के कमांडेंट एवं मैनेजिंग डायरेक्टर ब्रिगेडियर टी. ए. अरविंद की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए। समझौते का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच अकादमिक और तकनीकी सहयोग को मजबूत करना तथा संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D) गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
समझौते के तहत दोनों संस्थान उभरती हुई तकनीकों, रक्षा क्षेत्र से जुड़ी इंजीनियरिंग, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग (ML), एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, सेंसर तकनीक, मटेरियल्स, सरफेस इंजीनियरिंग, परीक्षण, मरम्मत और री-मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य करेंगे।
इसके अलावा तकनीकी कार्यशालाएं, सेमिनार, विशेषज्ञ व्याख्यान, क्षमता निर्माण कार्यक्रम, छात्रों के लिए इंटर्नशिप एवं प्रोजेक्ट कार्य, फैकल्टी सहयोग और सेना के अधिकारियों व तकनीकी कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
आईआईटी भिलाई का कहना है कि यह साझेदारी रक्षा क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों के विकास, नवाचार और संस्थागत सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ छात्रों और शोधार्थियों को व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई की उठी मांग, ग्रामीणों ने रैली निकाल किया प्रदर्शन
रायपुर। प्रदेश में नक्सल वाद के खात्मे के बाद अब बस्तर में नक्सल संबंधी मामलों में वर्षों से जेलों में बंद आदिवासी ग्रामीणों की रिहाई की मांग तेज हो गई है। मामले को लेकर परिजनों और ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक विक्रम मंडावी से मुलाकात कर पूरी स्थिति पर चर्चा की और प्रदर्शन करते हुए रैली निकाली। ग्रामीणों ने 20 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल बनाकर CM विष्णुदेव साय, गृह मंत्री विजय शर्मा और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत से मिलने का फैसला लिया है।
परिजनों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, गृह मंत्री विजय शर्मा तथा नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत से मुलाकात करने का निर्णय लिया है। इसके लिए 20 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया गया है, जो जल्द ही सभी जनप्रतिनिधियों से मिलकर अपनी बात रखेगा।
विधायक विक्रम मंडावी ने कहा कि आदिवासी समाज का बड़ा वर्ग आज भी कानूनी प्रक्रियाओं और न्यायिक व्यवस्था की जटिलताओं से पूरी तरह परिचित नहीं है। आर्थिक तंगी और कानूनी सहायता के अभाव में अनेक परिवार वर्षों तक अदालतों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते रहते हैं। कई परिवार इस कारण सामाजिक और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं।उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग में नक्सल मामलों में बंद सभी निर्दोष आदिवासियों के प्रकरणों की विशेष समीक्षा कर उनकी रिहाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। यह केवल व्यक्तिगत न्याय का विषय नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समाज के विश्वास और सम्मान से जुड़ा मुद्दा है।
विधायक ने कहा कि वे स्वयं भी इस विषय पर मुख्यमंत्री और गृह मंत्री से मुलाकात कर ग्रामीणों की मांग को प्रमुखता से उठाएंगे।बैठक के बाद ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर बीजापुर को ज्ञापन सौंपकर निर्दोष आदिवासी ग्रामीणों की शीघ्र रिहाई की मांग की। इस दौरान जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष लालू राठौर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शंकर कुड़ियम सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद रहे।
बैठक के बाद ग्रामीणों ने रैली निकाली और निर्दोष आदिवासियों को रिहा करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर बीजापुर को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने 20 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल बनाकर आने वाले दिनों में प्रदेश के शीर्ष नेताओं से मिलकर रिहाई के लिए प्रयास करने की बात कही है।
हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, हाईवे पर नहीं खुलेगा ग्रामीण पेट्रोल पंप
रायपुर। छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट के जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है, ऑयल कंपनियों के नीतिगत नियमों के अनुसार राष्ट्रीय या राजकीय राजमार्गों National, State Highways पर ग्रामीण श्रेणी के रिटेल आउटलेट नहीं खोले जा सकते। कोर्ट ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड HPCL द्वारा एक महिला आवेदक का आशय पत्र LOI रद्द करने के फैसले को सही ठहराया है। अधिकारियों की शुरुआती लापरवाही और देरी से की गई जांच के कारण महिला को हुई मानसिक व आर्थिक परेशानी के लिए कोर्ट ने कंपनी पर 1 लाख रुपये का हर्जाना भी ठोका है।
HPCL ने 14 दिसंबर 2018 को छत्तीसगढ़ में ग्रामीण रिटेल आउटलेट डीलरशिप के लिए विज्ञापन जारी किया था। याचिकाकर्ता अनंता चौधरी ने सरायपाली-पदमपुर रोड स्थित ग्राम नवागांव के खसरा नंबर 339/1 की जमीन का प्रस्ताव देकर ‘ओपन’ कैटेगरी में आवेदन किया था। शुरुआती स्क्रूटनी और मौका मुआयना के बाद कंपनी ने 29 दिसंबर 2020 को उनके पक्ष में लेटर ऑफ इंटेंट LOI जारी कर दिया।
LOI आशय पत्र मिलने के बाद महिला ने सुरक्षा निधि के रूप में 5 लाख और 3.60 लाख रुपये के डिमांड ड्राफ्ट जमा किए। इसके अलावा जिला कलेक्टर से एनओसी NOC ली, जमीन का सीमांकन कराया, बैंक से लोन लेकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया और बिजली का ट्रांसफार्मर भी लगवा लिया।
जब पेट्रोल पंप शुरू होने ही वाला था, तब 31 दिसंबर 2021 को कंपनी ने उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा कि उनकी जमीन स्टेट हाईवे नंबर 16 पर स्थित है। महिला ने जवाब में कहा कि जमीन ग्रामीण क्षेत्र के भीतर ही आती है। लेकिन कंपनी ने उनके जवाब को अमान्य करते हुए 1 फरवरी 2022 को उनका आशय पत्र LOI निरस्त कर दिया और उनके ड्राफ्ट वापस कर दिए। इसके खिलाफ महिला ने छत्तीसगढ़ बिलासपुर हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी।
याचिका की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच में हुई। HPCL की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि ‘डीलर सिलेक्शन गाइडलाइंस’ के अनुसार, ग्रामीण पेट्रोल पंप कभी भी नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे, एक्सप्रेस वे या नगर पालिका सीमा के भीतर नहीं खोले जा सकते। तेल कंपनी ने कहा, याचिकाकर्ता की जमीन स्टेट हाईवे-16 पर पाई गई, इसलिए वह अनिवार्य पात्रता शर्तों का उल्लंघन करती है। शुरुआती दौर में यह तथ्य सामने नहीं आ पाया था, इसलिए एलओआई रद्द करना पड़ा।
हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद माना कि नियमों के खिलाफ जाकर पेट्रोल पंप बहाल करने का आदेश नहीं दिया जा सकता, इसलिए एलओआई रद्द करने का फैसला कानूनी रूप से सही है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद के सिंगल बेंच ने कंपनी की लेटलतीफी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, याचिकाकर्ता ने कंपनी के आशय पत्र पर भरोसा करके कदम आगे बढ़ाए थे। उन्होंने सीमांकन में ₹40,000 खर्च किए, लोन लिया और निर्माण भी शुरू कर दिया। कंपनी के अधिकारियों ने एलओआई जारी करने से पहले खुद साइट का निरीक्षण किया था। अगर जमीन अयोग्य थी, तो यह बात पहले क्यों नहीं जांची गई? इस लेटलतीफी के कारण महिला को भारी आर्थिक नुकसान, मानसिक पीड़ा और असुविधा का सामना करना पड़ा है।
कोर्ट ने याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए HPCL को आदेश दिया है कि वह याचिकाकर्ता महिला को 60 दिनों के भीतर ₹1,00,000 का एकमुश्त मुआवजा भुगतान करे। इसमें ₹40,000 सीमांकन खर्च की भरपाई और ₹60,000 मानसिक व आर्थिक प्रताड़ना के एवज में शामिल हैं।