छत्तीसगढ़
इंफ्रास्ट्रक्चर और एकडमिक सुधार है पहली प्राथमिकताः डॉ. राजेंद्र लाकपाले
रायपुर। छत्तीसगढ़ के संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा के कुलपति डॉ. राजेंद्र लाकपाले ने कहा कि सरगुजा विवि अभी भी विकास के मामले में काफी पिछड़ा हुआ है। जो मूलभुत सुविधाएं और माहौल पढ़ने और पढ़ाने वालों को मिलने चाहिए वह उन्हें नहीं मिल रहा है। इसके लिए विवि के इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी सुधार की गुंजाइश है। जिसे ठीक करना मेरी पहली प्राथमिकता होगी। क्योंकि सुविधाएं अच्छी होगी तो एकडमिक सुधार अपने आप होगा। बतादें कि डॉ. राजेंद्र लाकपाले ने 11 नवंबर को विवि के कुलपति के पद पर ज्वाइन किया है।
डॉ.लाकपाले को 33 वर्षों का अनुसंधान एवं अध्यापन कार्य का अनुभव है। इनके 129 शोधपत्र विभिन्न अनुसंधान पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए है तथा 120 से अधिक शोध पत्र राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों में प्रस्तुत किए गए है। मिलेट पर डॉ.लाकपाले ने एक पुस्तक भी प्रकाशित की है। इन्हें अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। वे कई सोसाइटियो के फैलो भी है डॉ.लाकपाले को चीफ ट्रेनिंग आर्गेनाइजर कृषि विज्ञान केन्द्र बड़गांव, उपलेखा नियंत्रक, एसोसिएट डायरेक्टर रिसर्च, अधिष्ठाता भाटापारा कृषि महाविद्यालय, विभागाध्यक्ष, निदेशक विस्तार एवं निदेशक प्रक्षेत्र जैसे पदों पर कार्य करने का प्रशासनिक अनुभव भी है। डॉ.लाकपाले को देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में एक विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किया जाता है। लोक सेवा आयोग उत्तराखण्ड, उत्तरप्रदेश व बिहार की परीक्षाओं में आप विशेषज्ञ के रूप में आमंत्रित किए जाते है। विभिन्न अकादमिक उद्देश्यों से आपने अमरीका, इटली व थाइलैंड की यात्राऐं की है।
डॉ. राजेंद्र लाकपाले की सरगुजा विवि का कुलपति बनाए जाने पर महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले, सचिव चेतन दंडवते व कार्यकारिणी ने उन्हें बधाई दी। बतादें कि डॉ. राजेंद्र लाकपाले महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद है।
टेनीकोइट प्रतियोगिता में यशोदा व अमिता बनीं विजेती
SIR फार्म भरने के दौरान गलत जानकारी देने पर होगी एक साल की सजा
रायपुर। छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया जारी है। इसी बीच राज्य निर्वाचन आयोग ने एक जरुरी निर्देश जारी किए है। जिसके मुताबिक, SIR फार्म भरने के दौरान मतदाता गलत जानकारी देता है या दस्तावेज अटैच करता है तो उसे 1 साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
वहीं, चुनाव आयोग ने SIR को लेकर मतदाताओं को अलर्ट भी किया है कि फार्म भरने के दौरान बीएलओ OTP नहीं मांगते है और ना ही फोन के माध्यम से निर्वाचन आयोग का कोई भी कर्मचारी किसी भी मतदाता से ओटीपी पूछता है। पर्सनल जानकारी मांगने पर किसी को ना बताए। ऐसा होने पर थाने में शिकायत कर सकते है। वहीं, SIR फार्म भरने की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग भी की जा रही है।
बता दें कि राज्य निर्वाचन आयुक्त के निर्देश पर 63 हजार 439 बीएलए-बीएलओ एसआईआर प्रक्रिया को पूरा करने में लगे हुए है। बीएलए-बीएलओ फॉर्म का वितरण कर रहे है और उनको डिजिटलाइज कर रहे है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयुक्त यशवंत कुमार ने मुख्य रूप से लोगों को आगाह किया है कि गलत जानकारी देने से बचे और किसी को भी पर्सनल जानकारी या OTP ना बताए।
कोहरे में ट्रेनों की सुरक्षा के लिए शीतकालीन पैट्रोलिंग शुरू
रायपुर। ठंड और कोहरे के मौसम में रेल यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। ट्रेनों के सुरक्षित परिचालन के लिए शीतकालीन पैट्रोलिंग की विशेष व्यवस्था के साथ-साथ कोहरा स्पेशल ट्रेन भी चलाने का निर्णय लिया है।
बिलासपुर जोन और मंडल में शीतकालीन पैट्रोलिंग के तहत प्रत्येक बीट की लंबाई दो किलोमीटर तय की गई है। हर बीट पर दो कर्मचारी-एक ट्रैकमेन और एक कीमैन-तैनात रहेंगे, जो रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक चार बार ट्रैक की जांच करेंगे। पैट्रोलिंग दल रोजाना करीब 16 किलोमीटर पैदल चलकर रेलवे ट्रैक का निरीक्षण करता है। रेलवे ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए पैट्रोलमैन को GPS ट्रैकर भी उपलब्ध कराए हैं, ताकि रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा सके और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत संपर्क किया जा सके।
कोहरे और ठंड के कारण रेल फ्रैक्चर की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे ट्रेन संचालन प्रभावित होता है। इसे देखते हुए संवेदनशील रूट पर पहले से ही विशेष पैट्रोलिंग शुरू कर दी है। कोहरे के चलते मुख्य ट्रेनों के प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए रेलवे ने कोहरा स्पेशल ट्रेन चलाने की भी तैयारी कर ली है। यह स्पेशल ट्रेन उन रूटों पर चलाई जाएगी जहां घना कोहरा अधिक रहता है और इससे ट्रेनें लेट होती हैं। इसका उद्देश्य यात्रियों को वैकल्पिक और सुगम यात्रा सुविधा उपलब्ध कराना है।
ट्रैकमेन की शीतकालीन पैट्रोलिंग व्यवस्था और कोहरा स्पेशल ट्रेन-दोनों पहलें मिलकर ठंड के इस मौसम में ट्रेनों के सुरक्षित और सुचारू संचालन में अहम भूमिका निभाएंगे।
गद्दे बनाने वाली फैक्ट्री में लगी भीषण आग, सारा माल जलकर राख, 3 घंटे की मशक्कत के बाद पाया गया काबू
बिलासपुर में कड़ाके की ठंड, तापमान गिरा, ठंडी हवाओं और कोहरे से शहर ठिठुरा.
शहर में रविवार की रात के बाद से कड़ाके की ठंड शुरू हो गई है। न्यूनतम तापमान सामान्य से नीचे पहुंच गया है। कई इलाकों में सुबह-सुबह हल्की धुंध और कोहरा देखने को मिला, जिससे सड़क पर वाहनों की रफ्तार भी धीमी पड़ गई। लोगों ने अब गर्म कपड़े, जैकेट और स्वेटर पहनना शुरू कर दिया है। चाय-नाश्ते की दुकानों में भीड़ बढ़ रही है और ठंड से बचने के लिए लोग अलाव जलाते नजर आ रहे हैं।
सर्दी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए डॉक्टरों ने सलाह दी है कि लोग रातेें बाहर न निकलें और बच्चों व बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। बिलासपुर में फिलहाल ठंड का दौर थमने वाला नहीं है।
स्टंटबाजी और सड़कों पर केक काटने पर हाईकोर्ट सख्त.... दिए यह निर्देश
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने प्रदेश की सडक़ों और राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्टंटबाजी व चलती गाडिय़ों में केक कटिंग जैसे खतरनाक कृत्यों पर कड़ी नाराजगी जताते हुए मामले की मॉनिटरिंग जारी रखने का निर्णय लिया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि पुलिस की कार्रवाई औपचारिकता न होकर ऐसी होनी चाहिए, जिससे दोषियों को कड़ा संदेश मिले। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि नियमों और प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाए।
शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मुख्य सचिव की ओर से प्रस्तुत शपथ पत्र में बताया गया कि 25 अक्टूबर को मंत्रालय में आईजी स्तर की प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी, जिसमें सभी जिलों के कलेक्टर और एसपी शामिल हुए। इसमें साफ निर्देश दिया गया कि ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस अपनाया जाए। पीएचक्यू ने भी इसी संबंध में आदेश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा कि जब्त वाहनों को बांड और शर्तों के आधार पर छोड़ा जा सकता है, लेकिन यदि एक वर्ष में दोबारा ऐसी हरकत पाई जाती है, तो पेनल्टी के साथ वाहन की जब्ती सुनिश्चित हो।
गौरतलब है कि प्रदेश में लगातार ऐसे मामले सामने आने पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था।
शासन द्वारा दाखिल जवाब में कहा गया कि पुलिस ने अभियान चलाते हुए स्टंट करने वाले वाहनों को कब्जे में लिया है और संबंधित चालकों के लाइसेंस निरस्तीकरण की सिफारिश भी की गई है, ताकि सडक़ सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत गाडिय़ों के मालिकों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोहराया कि सार्वजनिक सडक़ों पर खतरा पैदा करने वाले युवाओं पर कड़ी कार्रवाई आवश्यक है।
पिछली सुनवाई में अदालत ने टिप्पणी की थी कि पुलिस की कठोरता प्राय: गरीब व मध्यम वर्ग पर ही दिखाई देती है, जबकि प्रभावशाली लोगों के प्रति रवैया नरम रहता है। इसलिए बिलासपुर के लावर क्षेत्र में जब्त की गई 18 गाडिय़ों को कोर्ट की अनुमति के बिना न छोडऩे का आदेश दिया गया था। अब शासन द्वारा विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के बाद इन्हें बांड की शर्त पर छोडऩे की अनुमति दी गई है।
सरकार ने यह भी कहा कि नागरिकों में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है और थानों के स्तर पर जागरुकता अभियान चलाए जा रहे हैं। कलेक्टर व एसपी की ओर से इसके लिए अलग दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अदालत ने कहा कि लापरवाही और सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने वाले व्यक्तियों पर सख्त कार्रवाई ज़रूरी है, ताकि आम नागरिक सुरक्षित महसूस कर सकें।
छत्तीसगढ़ में सेमीकंडक्टर उद्योग की स्थापना से प्रदेश के विकास में जुड़ा नया आयाम
रायपुर। छत्तीसगढ़ में सेमीकंडक्टर उद्योग की स्थापना से प्रदेश के विकास में नया आयाम जुड़ रहा है। छत्तीसगढ़ के युवा अब दुनिया की सबसे आधुनिक तकनीक में अपनी जगह बना रहे हैं। सेमीकंडक्टर क्रांति के साथ छत्तीसगढ़ देश के उच्च-प्रौद्योगिकी मानचित्र पर उभर रहा है।
पॉलीमैटेक इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा राज्य में सेमीकंडक्टर प्लांट स्थापित करने का निर्णय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के विज़न और केंद्र सरकार की अग्रणी तकनीकी नीतियों का परिणाम है। पॉलीमैटेक इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, जो भारत की पहली सेमीकंडक्टर चिप निर्माता कंपनी है, छत्तीसगढ़ में ₹1143 करोड़ की लागत से अत्याधुनिक विनिर्माण इकाई स्थापित कर रही है। डेढ़ लाख वर्ग फीट क्षेत्र में बनने वाला यह प्लांट वर्ष 2030 तक 10 अरब चिप्स का उत्पादन करेगा, जो टेलीकॉम, 6G/7G, लैपटॉप, पावर-इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उभरती तकनीकों में उपयोग होंगे। इस प्लांट से छत्तीसगढ़ के अनेक युवाओं को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहा है।
पॉलीमैटेक इलेक्ट्रॉनिक्स ने छत्तीसगढ़ के चयनित युवाओं की पहली सूची जारी की है, जिनमें अधिकांश छत्तीसगढ़ के इंजीनियरिंग और कॉमर्स ग्रेजुएट्स शामिल हैं। चयनित युवाओं में में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से कुल 12 युवा शामिल हैं। इनमें दुर्ग से आभार मेहूंकर (B.Tech–EEE), भिलाई से अभिषेक काशी (B.Tech–E&T), बालोद से नवीन कुमार देवांगन (B.Tech–ME), रायपुर से कुणाल यादव (BE–Mechanical), बस्तर से तुषार देवांगन (B.Tech–E&T), रायपुर से अपूर्व देवांगन (B.Tech–E&T), भिलाई की धारा सरपे (B.Tech–EEE), रायपुर के अरिन सोनी (B.Tech–E&T), रायगढ़ की तरू यादव (B.Tech–E&T), भिलाई के तुषार कुमार ठाकुर (BE–Mechanical), रायपुर के भूपेंद्र यादव (B.Com) तथा बालोद के अबिश सी. थॉमस (M.Com) को प्रशिक्षण एवं नियुक्ति के लिए चयनित किया गया है।
कंपनी के अधिकारियों ने बताया है कि चयनित युवाओं को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण देने के लिए चेन्नई में ट्रेनिंग दी जाएगी। युवाओं के एयर ट्रैवल, आवास, भोजन सहित सभी खर्च कंपनी वहन करेगी। इसके बाद चयनित युवाओं को एस्टोनिया, सिंगापुर और फ्रांस स्थित पॉलीमैटेक के वैश्विक प्लांट्स में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि सभी चयनित उम्मीदवार फ्रेश इंजीनियर्स हैं। मार्च 2026 तक चयनित युवाओं की संख्या बढ़कर 200 से 250 तक हो जाएगी।
गणितीय मॉडलिंग व मशीन लर्निंग पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल समापन
रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर ने एक बार फिर राज्य की अकादमिक उत्कृष्टता को राष्ट्रीय मंच पर मजबूत किया है। गणित विभाग द्वारा कंटिन्यूइंग एजुकेशन सेल (CEC) के सहयोग से 17–21 नवंबर, 2025 तक आयोजित एक सप्ताह के ऑनलाइन लघु अवधि प्रशिक्षण कार्यक्रम “नॉलेज डिस्कवरी थ्रू मैथमेटिकल मॉडलिंग, रफ सेट्स एंड मशीन लर्निंग (KDMRM-2025)” का समापन आज हुआ। इस प्रशिक्षण में देशभर के 56 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें छत्तीसगढ़ के कई शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और शोधार्थी भी शामिल थे।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. राजेश कुमार पांडे, प्रोफेसर, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी रहे, जबकि समारोह की अध्यक्षता डॉ. आर. के. त्रिपाठी, निदेशक (प्रभारी), एनआईटी रायपुर ने की। समापन कार्यक्रम में डॉ. सुभोजित घोष, चेयरमैन, CEC, और डॉ. नरेंद्र डी. लोंढे, रजिस्ट्रार, एनआईटी रायपुर भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के संचालन में डॉ. अनुप कुमार शर्मा, डॉ. शारदा नंदन राव और डॉ. अरविंद कुमार सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ की उच्च शिक्षा प्रणाली अब उभरती प्रौद्योगिकियों विशेषकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग और गणितीय मॉडलिंग—में अग्रणी भूमिका निभा रही है। एनआईटी रायपुर के गणित विभाग द्वारा आयोजित यह राष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदेश के विज्ञान एवं शोध क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
डॉ. सुजीत कुमार सामंता, विभागाध्यक्ष, गणित विभाग, एनआईटी रायपुर ने कहा कि प्रदेश की युवा वैज्ञानिक और शैक्षणिक ऊर्जा अब देशभर में पहचानी जा रही है और इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य के टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम को और मजबूत बनाते हैं। डॉ. लोंढे ने कहा कि “रफ सेट सिद्धांत जैसे विषय बड़े डेटा सेटों में अनिश्चितता को समझने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं और एनआईटी रायपुर ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में लगातार योगदान देकर राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ की पहचान मजबूत कर रहा है।”
मुख्य अतिथि डॉ. पांडे ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि सीखने का वास्तविक मूल्य तभी प्राप्त होता है जब ज्ञान को आत्मसात कर वास्तविक समस्याओं में लागू किया जाए। निदेशक (प्रभारी) डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि “देशभर के संस्थानों में गणितीय मॉडलिंग और एआई की मांग तेजी से बढ़ रही है। एनआईटी रायपुर द्वारा आयोजित यह प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक परिदृश्य में भी नई दिशा स्थापित करता है।”
आयरन कंपनी में हादसा, काम के दौरान रॉड गिरने से मजदूर की मौत
कोरोना काल में दिवंगत शिक्षक पति के पेंशन के लिए ठोकरे खा रही पत्नी, विधायक से लगाई न्याय की गुहार
कवर्धा। स्कूल में बच्चों को सीख देने वाली एक महिला शिक्षक आज खुद सरकारी सिस्टम की लापरवाही के आगे बेबस है. अपने मृत पति के मेडिकल क्लेम, अंशदान और पेंशन के लिए विभागीय दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक चुकी सीमा साहू ने पंडरिया विधायक भावना बोहरा के पास जाकर न्याय की गुहार लगाई. विधायक ने जिम्मेदार अफसरों से बात कर न्याय दिलाने का आश्वासन दिया.
पीड़ित महिला का आरोप है कि चार साल पहले उसने सभी दस्तावेज जमा कर दिए थे. लेकिन न डीईओ कार्यालय और न बीईओ कार्यालय से कोई स्पष्ट जवाब मिला. कभी कहा जाता है “फाइल गायब है”, कभी कहा जाता है “जांच में है”, और वह महीने-दर-महीने दफ्तरों के चक्कर लगाती रह जाती है.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ ने लोगों से की ओटीपी धोखाधड़ी से बचने की अपील
रायपुर। राजधानी रायपुर सहित पूरे प्रदेशमें अभी एसआईआर फार्म भरे जा रहे है। इसे लेकर धोखाधड़ी की शिकायतें भी आ रहा है। कार्यालय मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, छत्तीसगढ़ ने मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत गणना फॉर्म भरने वाले मतदाताओं और नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा सूचना जारी की है। इस सूचना का उद्देश्य लोगों को उनके मोबाइल नंबर के संभावित दुरुपयोग और ओटीपी आधारित धोखाधड़ी से बचाना है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर फॉर्म भरते समय मोबाइल नंबर देना पूरी तरह से सुरक्षित है, लेकिन नागरिकों को विशेष रूप से सतर्क रहने की आवश्यकता है क्योंकि कुछ साइबर अपराधी इसी बहाने ठगी करने की कोशिश कर सकते हैं।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने जोर देकर कहा है कि बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) के माध्यम से एसआईआर फॉर्म भरने के लिए किसी भी प्रकार के ओटीपी की आवश्यकता नहीं होती है। कोई भी अधिकारी, कर्मचारी या बीएलओ आपसे ओटीपी नहीं मांगता है। यदि आपको कोई व्यक्ति फोन करे और कहे कि "आपके SIR से जुड़े मोबाइल पर जो OTP आया है, वह हमें दे दीजिए," तो उन्हें तुरंत मना कर दें। कॉल करने वाले व्यक्ति को साफ-साफ कहें कि "मैं कार्यालय जाकर बात करूँगा या अपने BLO से संपर्क करूँगा।
अगर कोई व्यक्ति OTP मांगने के लिए दबाव डाले, धमकी दे या जोर डाले, तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने में सूचना दें। विभिन्न राज्यों की पुलिस ने नागरिकों को 'SIR फॉर्म' भरने की प्रक्रिया से जुड़ी एक नई प्रकार की ऑनलाइन धोखाधड़ी (स्कैम) के प्रति आगाह किया है और लोगों से अपील की है कि वे किसी भी सूरत में अपने मोबाइल फोन में प्राप्त वन टाइम पासवर्ड (OTP) किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें।
बिलासपुर सिम्स बनेगा प्रदेश का पहला सेमीकंडक्टर आधारित स्टरलाइजेशन सिस्टमयुक्त मेडिकल कॉलेज, मिलेगा हाई-टेक संक्रमण-नियंत्रण सिस्टम
यह अत्याधुनिक प्रणाली अस्पतालों में मौजूद पारंपरिक फिल्टर या सामान्य एयर प्यूरीफिकेशन सिस्टम से कई गुना अधिक प्रभावी मानी जाती है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं कि यह अस्पताल की हवा में मौजूद वायरस, बैक्टीरिया, फंगल स्पोर्स सहित सूक्ष्मजीवों को 99% तक निष्क्रिय करने की क्षमता रखता है, ICU, OT, वार्ड व OPD में संक्रमण नियंत्रण के लिए अत्यंत प्रभावी, ऊर्जा की बचत और लंबे समय तक स्थायी रूप से संचालन योग्य, वायु गुणवत्ता को मेडिकल-ग्रेड स्तर तक शुद्ध करने की क्षमता है। इस तकनीक के लागू होने से सिम्स प्रदेश का पहला ऐसा चिकित्सा संस्थान बन जाएगा जहाँ अस्पताल परिसर की संपूर्ण हवा मेडिकल-ग्रेड स्टरलाइज्ड होगी, जिससे संक्रमण जोखिम लगभग समाप्त हो जाएगा।
सेमीकंडक्टर एवं स्टरलाइजेशन सिस्टम की स्थापना के बाद सिम्स प्रदेश का पहला ऐसा मेडिकल कॉलेज बन जाएगा जहाँ अस्पताल परिसर पूर्णतः उच्च-स्तरीय, स्टरलाइज्ड एवं सुरक्षित वातावरण से सुसज्जित होगा—जो भविष्य की स्वास्थ्य प्रणाली का आधार बनेगा।
राष्ट्रपति ने जनजातीय संस्कृति व शिल्प को दर्शाते स्टॉलों का किया अवलोकन
रायपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु जनजातीय गौरव दिवस 2025 के उपलक्ष्य में सरगुजा जिले में 20 नवम्बर को पीजी कॉलेज ग्राउण्ड में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कार्यक्रम स्थल में जनजातीय संस्कृति, लोक कला एवं शिल्प, आभूषण एवं वस्त्र, पूजा-पाठ, संस्कार, व्यंजन, वाद्ययंत्रों, जड़ी-बूटियों आदि को प्रदर्शित करने हेतु प्रदर्शनियां लगाई गई। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने प्रदर्शनियों का अवलोकन किया।
अखरा छत्तीसगढ़ राज्य के सरगुजा अंचल में निवासरत जनजातियों का सांस्कृतिक स्थल है, जो गाँवों के मध्य या चौराहे में स्थित होते हैं, जहाँ छायादार पेड़ों के झुण्ड भी होते हैं। ग्रामीणजन विभिन्न लोक पर्वों जैसे करमा, महादेव बायर, तीजा आठे, जीवतिया, सोहराई, दसई, फगवा के अवसरों में महिला एवं पुरूष सामुहिक रूप से इकट्ठा होकर लोकगीत गाकर पारम्परिक वाद्ययंत्रों की थाप में लोकनृत्य करके उत्साह मनाते हैं। प्रदर्शनी में जनजातीय समुदाय के लोगों ने पारंपरिक नृत्य का प्रदर्शन किया। जनजाति निवासरत ग्रामों के प्रमुख धार्मिक आस्था के केन्द्र देवगुड़ी को राज्य में क्षेत्रवार विभिन्न नामों जैसे देवाला देववल्ला, मन्दर, शीतला, सरना आदि नामों से भी जानते हैं। देवगुड़ी में ग्रामीण देवी-देवता जैसे बुढ़ादेव, बुढ़ीदाई, शीतला, सरनादेव, डीहवारीन, महादेव आदि विराजमान होते हैं। जनजातीय विभिन्न लोकपर्वों के अवसरों में सामूहिक रूप से इकट्ठा होकर ग्रामीण बैगा की अगुवाई में पूजा-पाठ कर ग्राम की सुख, शांति, समृद्धि हेतु कामना करते हैं।
कार्यक्रम स्थल में छत्तीसगढ़ में निवासरत जनजातियों के पारंपरिक आवास का मॉडल बनाया गया था। राष्ट्रपति ने आवास मॉडल का भी अवलोकन किया। जनजातियों का आवास मिट्टी, लकड़ी से निर्मित होते हैं, जिसमें एक या दो कमरे व मुख्य कमरे के सामने की ओर परछी (बराम्दा) बने होते हैं। घर के छप्पर में ढालनुमा खपरैल लगे होते हैं। एक कमरे को रसोई कक्ष के रूप में उपयोग करते हैं, जिसमें रसोई उपकरण व घरेलू सामान रखते हैं, दूसरे कक्ष को शयन कक्ष के रूप में उपयोग करते हैं। परछी (बराम्दा) में अन्य घरेलू सामान जैसे ढ़ेकी, मूसल, सील-बट्टा, जांता आदि उपकरण होते हैं।
इस दौरान राज्य के पारंपरिक आभूषणों की प्रदर्शनी लगाई गई। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर आभूषणों के संबंध में जानकारी ली। श्री कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को पैरी और गमछा भेंट किया, जिसे राष्ट्रपति ने आत्मीयता के साथ स्वीकार किया। श्री कलिंदर राम ने राष्ट्रपति को बताया कि पारम्परिक आभूषण गिलट, तांबे, चांदी, सोना आदि धातु से निर्मित हैं, जिसे विभिन्न लोकपर्वों के अवसर में धारण करते हैं। इस दौरान गले में पहने जाने वाले हसुली, बांह में बहुटा, कलाई में ऐंठी, गले में रूपया वाला चंदवा, कमर में कमरबंध, पैर में पैरी एवं पैर की अंगुलियों में बिछिया, कान में ठोठा तथा नाक में पहने जाने वाले छुछिया (फूली) का प्रदर्शन किया गया।
सीएसईबी दर्री प्लांट में बड़ा हादसा, स्टाप डैम का तटबंध टूटने से प्लांट में घुसा पानी, प्रोडक्शन हुआ ठप…
यात्रा करने से पहले पढ़ ले ये खबर, रेलवे ने इन ट्रेनों को किया रद्द
रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर–झारसुगुड़ा रेलवे सेक्शन में तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी कड़ी में चक्रधरनगर ब्लॉक कैबिन को चौथी रेल लाइन से जोड़ने का कार्य 21 नवंबर से 11 दिसंबर के बीच विभिन्न तिथियों में किया जाएगा। इस कार्य की वजह से कई यात्री गाड़ियों का परिचालन अस्थायी रूप से प्रभावित रहेगा।
बिलासपुर रेल मंडल इन दिनों बड़े पैमाने पर अधोसंरचना विस्तार में जुटा हुआ है। बिलासपुर–झारसुगुड़ा के बीच 206 किलोमीटर लंबी चौथी रेल लाइन का निर्माण जारी है, जिसमें 150 किलोमीटर से अधिक हिस्सा पूरा किया जा चुका है। यह मार्ग उत्तर और दक्षिण भारत को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कॉरिडोर है। नई लाइनों के जुड़ने से यात्री सुविधाओं के साथ ट्रेनों की समयबद्धता और गति में भी बढ़ोतरी होगी।
इसी क्रम में चक्रधरनगर ब्लॉक कैबिन को चौथी लाइन से जोड़ने का काम अब शुरू किया जा रहा है। इसके साथ ही रायगढ़–कोतरलिया सेक्शन में ऑटो सिग्नलिंग और तीसरी रेल लाइन के विद्युतीकरण का कार्य भी किया जाएगा। रेलवे का दावा है कि इन कार्यों को इस तरह प्लान किया गया है कि यात्रियों को न्यूनतम असुविधा हो, लेकिन तकनीकी कारणों से कुछ ट्रेनें प्रभावित रहेंगी।
प्रभावित यात्री गाड़ियाँ –
रद्द रहने वाली मेमू गाड़ियाँ:
1. 23 नवंबर से 03 दिसंबर तक – 68737 रायगढ़–बिलासपुर मेमू
2. 23 नवंबर से 03 दिसंबर तक – 68738 बिलासपुर–रायगढ़ मेमू
3. 23 नवंबर से 03 दिसंबर तक – 68735 रायगढ़–बिलासपुर मेमू
4. 22 नवंबर से 02 दिसंबर तक – 68736 बिलासपुर–रायगढ़ मेमू
बीच में समाप्त होने वाली गाड़ियाँ:
– 68861/68862 गोंदिया–झारसुगुड़ा पैसेंजर, 23 नवंबर से 03 दिसंबर तक बिलासपुर और झारसुगुड़ा के बीच रद्द रहेगी।
छत्तीसगढ़ में कड़ाके की ठंड, पांच जिलों में शीतलहर, अंबिकापुर में टूटा 10 साल का रिकॉर्ड
रायपुर। अंबिकापुर में 7.3 प्रतिशत तक गिरा तापमान, जो 10 साल में सबसे कम है। सरगुजा-बिलासपुर संभाग के 5 जिलों में शीतलहर का यलो अलर्ट जारी है। रायगढ़ में अलाव की व्यवस्था की गई है।
छत्तीसगढ़ में बीते तीन दिनों से ठंड लगातार बढ़ रही है। प्रदेश का मौसम शुष्क होने के बावजूद उत्तर भारत से आ रहीं बर्फीली हवाओं ने रात के तापमान में बड़ी गिरावट ला दी है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 5 दिनों में न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री तक क्रमिक वृद्धि संभव है, हालांकि फिलहाल उत्तर और मध्य क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड जारी रहेगी।
छत्तीसगढ़ में लोगों को ठंड से हल्की राहत मिलने वाली है। मौसम विभाग ने अगले 5 दिनों में न्यून्तम तापमान में तीन से पांच डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि की संभावना जताई है। फिलहाल सरगुजा संभाग के एक दो जिलों में शीतलहर के हालत बने हुए हैं, जिसका असर आने वाले दिनों में कम हो सकता है। राज्य में आने वाली हवा की दिशा पूर्वी हो गई है, जो नमी लिए हुए है। इसका सीधा असर राज्य के न्यूनतम यानी रात के तापमान में हुआ है।
पिछले चौबीस घंटे के दौरान, प्रदेश में सबसे ज्यादा तापमान दुर्ग में 30 डिग्री सेल्सियस, जबकि सबसे कम न्यून्तम तापमान अंबिकापुर में 8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है। साथ ही न्यूनतम तापमान माना में 12.2 डिग्री, बिलासपुर में 13.3 डिग्री, पेंड्रा में 10.8 डिग्री, जगदलपुर में 10.9 डिग्री और दुर्ग मे 11 डिग्री दर्ज किया गया। दो दिन बाद भी मौसम शुष्क रह सकता है।
छत्तीसगढ़ में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इस बीच स्कूली बच्चों को शीतलहर से बचाव के लिए लोक शिक्षण संचालनालय ने सभी संभागीय संयुक्त संचालक और जिला शिक्षा अधिकारी को दिशा निर्देश जारी किए हैं। स्कूल शिक्षा विभाग, नगरीय निकाय, मौसम विभाग, लोक निर्माण विभाग, श्रम विभाग, पर्यटन विभाग और लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए अलग-अलग निर्देश दिए गए हैं। जारी पत्र में शिक्षा विभाग के लिए कहा गया है कि भारतीय मौसम विज्ञान द्वारा शीतलहर से संबंधित दी गई चेतावनी अनुसार विधिवत स्कूल एवं शैक्षणिक संस्थानों को खोलने के समय में परिवर्तन करने के लिए आवश्यक आदेश जारी किया जाए।
छत्तीसगढ़ में बीते तीन दिनों से ठंड लगातार बढ़ रही है। प्रदेश का मौसम शुष्क होने के बावजूद उत्तर भारत से आ रहीं बर्फीली हवाओं ने रात के तापमान में बड़ी गिरावट ला दी है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले 5 दिनों में न्यूनतम तापमान में 3 से 5 डिग्री तक क्रमिक वृद्धि संभव है, हालांकि फिलहाल उत्तर और मध्य क्षेत्रों में कड़ाके की ठंड जारी रहेगी।
सरगुजा, बिलासपुर और दुर्ग संभाग के कई पॉकेट्स में शीतलहर चल रही है। कोरिया, सूरजपुर, मनेंद्रगढ़, जशपुर और बिलासपुर जिलों के लिए मौसम विभाग ने विशेष कोल्ड वेव अलर्ट जारी किया है। सुबह और देर शाम बर्फीली हवाओं के कारण बाजारों में गर्म कपड़ों की मांग अचानक बढ़ गई है। रायगढ़ में भी सुबह-शाम कड़ाके की ठंड पड़ रही है। शहर में लोगों को राहत देने के लिए निगम ने 9 स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की है, जिनमें मेडिकल कॉलेज, रेलवे स्टेशन, रामनिवास टॉकीज चौक और केवड़ा बाड़ी बस स्टैंड शामिल हैं।
पिछले 24 घंटों में अंबिकापुर का न्यूनतम तापमान 7.3एष्ट रिकॉर्ड किया गया, जो नवंबर के पिछले 10 वर्षों में सबसे कम है। 1970 में यहां 4.2एष्ट दर्ज हुआ था, जो अब तक का सबसे कम नवंबर तापमान है।
दुर्ग इस समय मैदान क्षेत्रों में सबसे ठंडा है, जहां रात का तापमान 10.8एष्ट रहा। यह सामान्य से लगभग 7 डिग्री कम है। रायपुर में भी मौसम का असर साफ दिखा और नौ साल में नवंबर में दूसरी बार रात का तापमान 13 प्रतिशत तक पहुंच गया।
मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल प्रदेश में बारिश की संभावना नहीं है। कल भी पूरा प्रदेश शुष्क मौसम का अनुभव करेगा। रायपुर शहर के लिए 20 नवंबर को आकाश साफ रहने का अनुमान है, जहां अधिकतम तापमान लगभग 29 प्रतिशत और न्यूनतम 14 प्रतिशत रह सकता है।
लैलूंगा, छाल, कापू और धरमजयगढ़ जैसे क्षेत्रों में ठंड शहर से कहीं ज्यादा है। शाम ढलते ही लोग घरों में दुबकने लगे हैं और अलाव तथा गर्म कपड़ों का सहारा ले रहे हैं। कई स्थानों पर ग्रामीण स्तर पर भी लोग लकड़ी जलाकर ठंड से बचने की कोशिश कर रहे हैं।