छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के नये मुख्य सचिव होंगे विकासशील... 30 सितंबर को रिटायर हो रही अमिताभ जैन
रायपुर। छत्तीसगढ़ के वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। बतादें कि उनका रिटायरमेंट 30 जून को था जिसे मुख्यमंत्री ने बढ़ाते हुए तीन माह का एक्सटेंशन देते हुए 30 सितंबर तक बढ़ाया था। तमाम अनुमानों को दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री ने अगला मुख्यसचिव 1994 बैच के विकासशील को बनाया है वे एक अक्टूबर से मुख्य सचिव का पदभार एवं कार्यभार ग्रहण करेंगे।
ज्ञात हो कि विकासशील प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में फिलिपींस की राजधानी मनीला स्थित एशियाई डेवलपमेंट बैंक के कार्यकारी निदेशक थे। वहां से उन्हें छग के लिए रिलीव कर दिया गया है। उनकी पत्नी निधि छिब्बर आईएएस है। उनकी जगह नीति आयोग में नई पोस्टिंग की गई है।
वे आयोग से रिलीव हो जाएंगी। राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया था कि विकासशील की प्रतिनियुक्ति अवधि खत्म कर उन्हें छत्तीसगढ़ में सेवाएं देने हेतु कार्यमुक्त किया जाए। केंद्र ने राज्य की मांग स्वीकार करते हुए विकासशील को डीओपीटी ने छत्तीसगढ़ वापस भेजना स्वीकार किया। विकासशील सोमवार को छत्तीसगढ़ वापस होंगे।
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दूरदर्शन ने समाज को वैचारिक रूप से समृद्ध संस्कारित किया: मुख्यमंत्री साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजधानी रायपुर स्थित दूरदर्शन केंद्र में आयोजित दूरदर्शन के 66वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल हुए और दूरदर्शन परिवार, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं दर्शकों को शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और इस ऐतिहासिक यात्रा से जुड़ी अपनी स्मृतियाँ साझा कीं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने दूरदर्शन के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, गीत तथा शास्त्रीय संगीत और नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियों का आनंद लिया। मुख्यमंत्री के समक्ष कलाकारों ने गौर नृत्य, बांस गीत, जवारा नृत्य, सुआ नृत्य और गौरी-गौरा जैसे लोकनृत्य प्रस्तुत किए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरदर्शन ने मनोरंजन के साथ-साथ हमें वैचारिक रूप से समृद्ध करने और संस्कारित करने में भी बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने 1982 में एशियाई खेलों के रंगीन प्रसारण, रामायण और महाभारत जैसे धारावाहिकों का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में दूरदर्शन का जादू ऐसा था कि प्रसारण के समय सड़कों पर सन्नाटा छा जाता था
मुख्यमंत्री ने कहा कि “मिले सुर मेरा तुम्हारा” जैसे गीतों के माध्यम से दूरदर्शन ने देश की एकता और सांस्कृतिक एकरूपता का संदेश दिया। समाचारों की गरिमा और भाषा की शुचिता बनाए रखने में दूरदर्शन की परंपरा सदैव सराहनीय रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि दर्शन, महिलाओं से जुड़े कार्यक्रमों और युवाओं के लिए प्रस्तुत विशेष सामग्री के माध्यम से दूरदर्शन ने समाज के हर वर्ग को जोड़ा है। उन्होंने अपनी मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सँभालने के बाद “अपनी बात” कार्यक्रम में दिए गए साक्षात्कार को याद करते हुए कहा कि दूरदर्शन हमेशा स्पष्टता से और विस्तारपूर्वक अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लाखों हितग्राहियों को मिल रहा है और दूरदर्शन के द्वारा समाज में आने वाले सकारात्मक बदलावों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब किसी एक व्यक्ति की सफलता की कहानी दूरदर्शन पर प्रसारित होती है, तो वह लाखों लोगों के जीवन को बदलने का सशक्त आधार बनती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दूरदर्शन परिवार को पुनः स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई देते हुए आशा व्यक्त की कि दूरदर्शन इसी प्रकार आम जनता का मनोरंजन, संस्कार और जागरूकता का प्रमुख माध्यम बना रहेगा।
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि दूरदर्शन ने छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और परंपराओं को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में भी दूरदर्शन प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को और अधिक सशक्त रूप से दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा।
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योजना में बड़ा बदलाव, छत्तीगसढ़ में अब एक ही जमीन पर दर्ज परिवारों को अलग-अलग मिलेगा 6000 रुपए का लाभ
रायपुर।प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि एक ही भूमि खाता (सिंगल लैण्डहोल्डिंग) में कई किसान परिवारों के नाम दर्ज हैं, तब भी प्रत्येक पात्र परिवार को अलग-अलग प्रतिवर्ष 6000 रूपए तक का लाभ प्राप्त करने का अधिकार होगा। बशर्तें वे योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र हो। प्रत्येक परिवार को न्यूनतम 6,000 रूपए वार्षिक की वित्तीय सहायता सीधे उनके खाते में उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की पात्रता शर्तों के तहत ‘किसान परिवार’ का अर्थ पति-पत्नी और अवयस्क बच्चों से है। यदि एक ही भूमि खाते से कई परिवार जुड़े हुए हैं, तो योजना का लाभ खाता संख्या से नहीं बल्कि परिवार की इकाई के आधार पर दिया जाएगा। इस प्रकार एक भूमि खाता साझा करने वाले अलग-अलग परिवारों को भी स्वतंत्र रूप से यह सहायता राशि प्राप्त होगी।
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विधायक एवं कलेक्टर ने मंदिर परिसर में शारदीय नवरात्र पर्व हेतु तैयारियों का लिया जायजा
दंतेवाड़ा : आज विधायक चैतराम अटामी एवं कलेक्टर कुणाल दुदावत द्वारा मां दंतेश्वरी मंदिर परिसर में आगामी शारदीय नवरात्र पर्व के लिए दर्शनार्थियों के लिए आवश्यक व्यवस्था यथा साफ-सफाई, पेयजल की सुलभता,प्रसाधन कक्षों में साफ-सफाई, अतिवर्षा से हुए क्षतिग्रस्त स्थलों के मरम्मत, बैरिकेडिंग, रास्ता मरम्मत,विद्युत व्यवस्था, मंदिर प्रांगण एवं सुविधा केंद्र में चिकित्सा सुविधा, ट्रैफिक परिचालन जैसे अनेक बिन्दुओं पर दिशा-निर्देश दिए गए। इस मौके पर संबंधित विभागों के अधिकारियों को नदी तट एवं घाटों की साफ-सफाई, अति बारिश टूटे हुए रेलिंग के रिस्टोर करने, माईजी की बगिया में रेत के मलवा को हटाने,बारिश से हुए गढ़ड़ों को पटाव करने जैसे विभिन्न कार्यों को नवरात्र के पूर्व करने को कहा गया।
कलेक्टर ने यहां भी कहा कि पूर्व वर्षों के भांति मंदिर परिसर मेे लाईटिंग व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए। निरीक्षण के दौरान यहा भी कहा गया कि कॉरिडोर में दर्शनार्थियों हेतु पंखे एवं पेयजल के व्यवस्था का अधिकारी सुनियोजित प्रबंधन करे। इस दौरान कलेक्टर ने दर्शनार्थियों हेतु निर्माणाधीन नये धर्मशाला,पार्किंग हेतु आंवराभाटा एवं हाई स्कूल ग्राउंड का भी जायजा लेकर अधिकारियों को दिशा-निर्देश दिए। इस मौके पर जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा, अपर कलेक्टर राजेश पात्रे, एडिशनल एसपी आर.के.बर्मन सहित संबंधित अधिकारी गण मौजूद रहे।
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समस्याओं की पहचान कर समाधान विकसित करें जिससे लोग लाभान्वित हो -राज्यपाल
रायपुर :राज्यपाल रमेन डेका आज रूंगटा इंटरनेशलन स्कील्स यूनिवर्सिटी भिलाई में नवप्रवेशी विद्यार्थियों के विद्यारंभ समारोह में शामिल हुए। इस दौरान राज्यपाल ने यूनिवर्सिटी के ड्रोन क्लब का उद्घाटन किया। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि रूंगटा अंतर्राष्ट्रीय कौशल विश्वविद्यालय में प्रतिभाशाली लोगों को संबोधित करने में अपार प्रसन्नता हो रही है, जो हमारे छत्तीसगढ़ राज्य और हमारे राष्ट्र के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। जब आप यहाँ से स्नातक होंगे, तो आपके पास केवल एक डिग्री ही नहीं होगी, बल्कि आपके पास वैश्विक प्रौद्योगिकी परिदृश्य को परिभाषित करने वाली कंपनियों के प्रमाणपत्र भी होंगे। आपका रिज्यूमे एक ऐसी भाषा बोलेगा जिसे दुनिया भर के नियोक्ता समझते और सम्मान करते हैं। राज्यपाल ने कहा आप सभी रोज़गार की तलाश से आगे सोचे, रोज़गार सृजन के बारे में सोचें। समाज में समस्याओं की पहचान करने और ऐसे समाधान विकसित करने के बारे में सोचें जिनसे लाखों लोगों को लाभ हो सके। यहाँ की सहायता प्रणाली - मार्गदर्शन से लेकर वित्तपोषण तक - आपके सपनों को हकीकत में बदलने के लिए डिज़ाइन की गई है। राज्यपाल ने कहा कि यहाँ की ड्रोन प्रयोगशाला इस बात का एक आदर्श उदाहरण है कि कैसे तकनीक का उपयोग सामाजिक लाभ के लिए किया जा सकता है। ड्रोन केवल उड़ने वाले उपकरण नहीं हैं; वे ऐसे उपकरण हैं जो कृषि, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवा वितरण और पर्यावरण निगरानी में क्रांति ला सकते हैं। जब आप इस प्रयोगशाला में प्रयोग और नवाचार करते हैं, तो याद रखें कि प्रत्येक परियोजना में जीवन को प्रभावित करने और समुदायों को बदलने की क्षमता है।
राज्यपाल डेका ने विद्यार्थियों से कहा किं आज नियोक्ता ऐसे पेशेवरों की तलाश में हैं जो गंभीरता से सोच सकें, टीमों में काम कर सकें, प्रभावी ढंग से संवाद कर सकें और बदलाव के साथ तालमेल बिठा सकें। ये क्लब पाठ्येतर गतिविधियाँ नहीं हैं; ये आपके पेशेवर विकास का अभिन्न अंग हैं। 2,000 युवा दिमागों के एक ही छत के नीचे इकट्ठा होने से, आप बदलाव की एक शक्तिशाली ताकत का प्रतिनिधित्व करते हैं। लेकिन इस अवसर के साथ आपके अपने, आपके परिवार, आपके संस्थान, समाज और राष्ट्र के प्रति ज़िम्मेदारी भी आती है। आप जिस दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं, वह पिछली पीढ़ियों के अनुभव से बहुत अलग है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचेन, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और अनगिनत अन्य तकनीकें हर उद्योग को नया रूप दे रही हैं। आज जो नौकरियाँ मौजूद हैं, वे कल अप्रचलित हो सकती हैं, जबकि नई भूमिकाएँ उभरेंगी जिनकी हम आज कल्पना भी नहीं कर सकते। राज्यपाल डेका ने विद्यार्थियों को अवगत कराया कि छत्तीसगढ़ राज्य के राज्यपाल के रूप में, उन्हें कई सफल पेशेवरों, उद्यमियों और अन्य लोगों से मिलने का सौभाग्य मिला है। उन्हें सिर्फ़ उनका तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि समस्याओं को सुलझाने की उनकी क्षमता, जोखिम उठाने की उनकी इच्छाशक्ति, दूसरों का नेतृत्व करने की उनकी क्षमता और बदलाव लाने की उनकी प्रतिबद्धता भी अलग बनाती है।
प्रदेश की 3 करोड़ जनता के आरोग्य के साथ विकसित छत्तीसगढ़ का सपना करेंगे पूरा : मुख्यमंत्री
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश की 3 करोड़ जनता के आरोग्य के साथ हम विकसित छत्तीसगढ़ का सपना साकार करेंगे। पिछले 20 महीनों में प्रदेश की स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करते हुए दुर्गम अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने का कार्य हमारी सरकार ने किया है।मुख्यमंत्री साय आज राजधानी रायपुर के एक निजी होटल में आयोजित तीन दिवसीय डेंटल कॉन्फ्रेंस 2025 का शुभारंभ कर कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने दंत चिकित्सा और दांतों की देखभाल से जुड़े उपयोगी उपकरणों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया तथा डेंटल एसोसिएशन की वार्षिक स्मारिका का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि सरकार बनने के पहले दिन से ही हमने प्रदेशवासियों के स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। प्रदेश में पांच नए मेडिकल कॉलेजों की स्वीकृति दी गई है, साथ ही फिजियोथैरेपी, नर्सिंग और मदर-चाइल्ड हॉस्पिटल जैसे संस्थानों की स्थापना की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ छत्तीसगढ़ के साथ ही हम प्रगति की भी बात कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2000 में जहां केवल एक मेडिकल कॉलेज था, वहीं आज 15 मेडिकल कॉलेज स्थापित हो चुके हैं। आयुष्मान भारत योजना और प्रधानमंत्री वय वंदना योजना से मरीजों और बुजुर्गों को निःशुल्क इलाज की सुविधा मिल रही है। वहीं, सस्ती जेनेरिक दवाइयां आम जनता को राहत प्रदान कर रही हैं। मुख्यमंत्री ने कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पान मसाला, गुटखा और तंबाकू की वजह से मुँह के कैंसर के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।उन्होंने कहा कि दाँतों की देखभाल और सुंदर मुस्कान देने में दंत चिकित्सकों की अहम भूमिका है।उन्होंने चिकित्सकों से आह्वान किया कि इस दिशा में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएँ।
उन्होंने भावुक होकर अपने संसदीय कार्यकाल की स्मृतियाँ साझा कीं। उन्होंने बताया कि 1999 में जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, उस समय एम्स दिल्ली पर पूरे देश के मरीजों का दबाव था। तब हमने संसद में निवेदन किया था कि छत्तीसगढ़ में भी एम्स की स्थापना हो। सौभाग्य से 1 नवम्बर 2000 को राज्य गठन के बाद पहली किस्त में छह राज्यों को एम्स की सौगात मिली और छत्तीसगढ़ को भी यह ऐतिहासिक उपलब्धि प्राप्त हुई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प लिया है। इसी दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने ‘छत्तीसगढ़ विजन 2047’ डॉक्यूमेंट तैयार किया और 10 मिशन बनाकर प्रदेश को आगे बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
साय ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश का जीएसडीपी 5 लाख करोड़ है, जिसे वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य है। इस दिशा में हम पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज और वन संपदा से समृद्ध है, मेहनतकश किसान और परिश्रमी जनता इसकी असली ताकत हैं। “छत्तीसगढ़िया सबसे बढ़िया” की कहावत को दोहराते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि प्रदेश 2047 तक अपने लक्ष्यों को अवश्य प्राप्त करेगा।
निजी और अनुदान प्राप्त स्कूल भी आएंगे ESI के दायरे में.. हाईकोर्ट
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का एक फैसला प्रदेश के लाखों निजी और अनुदान प्राप्त स्कूलों के कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत और सामाजिक सुरक्षा की संभावना लेकर आया है। कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम, 1948 (ईएसआई अधिनियम) के तहत अब निजी और सरकारी अनुदान प्राप्त स्कूल भी ‘प्रतिष्ठान’ माने जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि स्कूल अपने कर्मचारियों की सहायता से समुदाय को व्यवस्थित और नियमित रूप से सेवाएं प्रदान करते हैं, इसलिए वे अधिनियम के अंतर्गत आते हैं। इस निर्देश के साथ ही कोर्ट ने राज्यभर के निजी और सहायता प्राप्त स्कूलों की सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।
जस्टिस रजनी दुबे और जस्टिस एके प्रसाद की डिवीजन बेंच ने यह निर्णय सुनाते हुए कहा कि स्कूलों में कार्यरत कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। प्रदेश के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव समेत कई जिलों के अनेक प्रतिष्ठित निजी स्कूलों ने 27 अक्टूबर 2005 की अधिसूचना को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें ईएसआई एक्ट के दायरे में लाकर बीमा अंशदान अनिवार्य किया गया था।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि शिक्षा कोई वाणिज्यिक गतिविधि या विनिर्माण प्रक्रिया नहीं है, बल्कि ज्ञान और मूल्यों के विकास की प्रक्रिया है। इसलिए शैक्षणिक संस्थानों को अधिनियम के दायरे में नहीं लाया जा सकता। उन्होंने कहा कि वसूली नोटिस और बाद के आदेश वैध अधिकार के बिना हैं और इन्हें निरस्त किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्णयों में पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि स्कूल भी स्थापना की श्रेणी में आते हैं। इसलिए याचिकाएं योग्यता से रहित हैं और किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।