देश-विदेश
यौन अपराधों से बच्चों को संरक्षण के लिये बना है पॉक्सो अधिनियम… जानिए इसके अंतर्गत आने वाले अपराध तथा दंड
भोपाल। यौन अपराधों से बच्चों को संरक्षण देने के उद्देश्य से पॉक्सो प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्राम सेक्सुअल अफेंसेस एक्ट (POCSO) अधिनियम बनाया गया है। इस अधिनियम को महिला और बाल विकास मंत्रालय ने वर्ष 2012 में पॉक्सो एक्ट-2012 के नाम से बनाया है। इस कानून के अंतर्गत नाबालिगों के प्रति यौन उत्पीडन, यौन शोषण और पोर्नोग्राफी जैसे यौन अपराध और छेड-छाड के मामलों में कार्रवाई की जाती है। इस कानून के तहत अलग-अलग अपराध के लिए अलग-अलग सजा निर्धारित है। यह अधिनियम पूरे भारत में लागू है। पॉक्सो कानून के तहत सभी अपराधों की सुनवाई एक विशेष न्यायालय द्वारा कैमरे के सामने बच्चों के माता-पिता या जिन लोगों पर बच्चा भरोसा करता है, उनकी उपस्थित में होती है।
वर्ष 2012 में पॉक्सो कानून के लागू होने के बाद वर्ष 2020 में पॉक्सो अधिनियम में कई अन्य संशोधन के साथ ऐसे अपराधों में मृत्युदंड की सजा का प्रावधान किया गया है।
पॉक्सो अंतर्गत आने वाले अपराध तथा दंड:
1. प्रवेशन लैंगिक हमला (धारा3)- कम से कम 10 वर्ष का कारावास, जिसे आजीवन कारावास तक बढ़ाया जा सकता है एवं जुर्माना (धारा 4)
2. गुरूत्तर प्रवेशन लैंगिक हमला (धारा 5)- कम से कम 20 वर्ष का कारावास, जिसे आजीवन करावास/मृत्यु दण्ड तक बढ़ाया जा सकता है एवं जुर्माना (धारा 6)
3. लैंगिक हमला (धारा 7)- कम से कम 3 वर्ष का कारावास, जिसे 5 वर्ष तक के कारावास तक बढ़ाया जा सकता है एवं जुर्माना (धारा 8)
4. गुरूत्तर लैंगिक हमला (धारा 9)- कम से कम 5 वर्ष का कारावास, जिसे 7 वर्ष तक के कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, व जुर्माना (धारा 10)
5. लैंगिक उत्पीडन (धारा 11)- 3 वर्ष का कारावास की सजा तथा जुर्माना (धारा 12)
6. बच्चों का अश्लील उद्देश्यों/पोर्नोग्राफी के लिए इस्तेमाल करना (धारा 13)- 5 वर्ष का कारावास तथा उत्तरवर्ती अपराध के मामले में 7 वर्ष का कारावास तथा जुर्माना (धारा 14-1)
7. बच्चों का अश्लील उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करते समय यौन प्रताड़ना के गंभीर मामले (धारा 14-2)- कम से कम 10 वर्ष का कारावास जिसे आजीवन कारावास/मुत्यु दंड तक बढ़ाया जा सकता है व जुर्माना।
8. बच्चे का अश्लील उद्देश्यों हेतु इस्तेमाल करते समय गुरूत्तर प्रवेशन लैंगिक हमले के अति गंभीर मामले- (धारा 14-3): सश्रम आजीवन कारावास व जुर्माना।
9. बच्चे का अश्लील उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करते समय यौन प्रताड़ना के मामले- (धारा 14-4) : कम से कम 6 वर्ष का कारावास, जिसे 8 वर्ष के कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, व जुर्माना।
10. बच्चे का अश्लील उद्देश्यों हेतु इस्तेमाल करते समय गुरूत्तर लैंगिक हमले के अति गंभीर मामले (धारा 14-5)- कम से कम 8 वर्ष का कारावास जिसे 10 वर्ष के कारावास तक बढ़ाया जा सकता है, व जुर्माना।
11. बच्चे से संबंधित किसी भी अश्लील सामग्री को व्यापारिक उद्देश्यों के लिए रखना (धारा 15): 3 वर्ष कारावास अथवा जुर्माना अथवा दोनों।
12. एक्ट के अंतर्गत अपराध के लिए उकसाने हेतु भी दंड का प्रावधान है जो कि अपराध करने के समान ही है। इसमें बच्चों की यौन उत्पीड़न हेतु अवैध खरीद-फरोख्त भी शामिल है (धारा 16)
13. किसी घटित अपराध की रिपोर्ट न दर्ज करना (धारा 21-1): 6 माह तक का कारावास अथवा जुर्माना अथवा दोनों।
एयर इंडिया विमान के इंजन में आग.. करानी पड़ी इमरजेंसी लैंडिंग
बेंगलुरु। बेंगलुरु के केंपेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शनिवार को बेंगलुरु से कोच्चि के लिए उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद एयर इंडिया एक्सप्रेस के एक विमान के इंजन में आग लग गई। इसके बाद विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। 179 यात्रियों को लेकर विमान ने उड़ान भरी थी, सभी को सकुशल बाहर निकाला गया।
देर रात हुई इस दुर्घटना पर बेंगलुरु इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने बयान जारी कर कहा कि फ्लाइट IX 1132 के एक इंजन में आग की खबर के बाद रात 11.12 बजे इसकी इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई। एक फुल स्केल इमरजेंसी घोषित कर दिया गया। लैंडिंग के बाद आग को तुरंत बुझा लिया गया। सभी 179 पैसेंजर्स और 6 क्रू मेम्बर्स को सफलतापूर्वक प्लेन से बाहर निकाल लिया गया।
एयर इंडिया एक्सप्रेस की ओर कहा कि प्लेन के दाहिने इंजन में आग का शक होने पर पायलट ने बेंगलुरु वापस लौटने का फैसला किया। इसके बाद एहतियात बरतते हुए प्लेन की लैंडिंग कराई गई। ग्राउंड सर्विस के स्टाफ ने भी प्लेन के इंजन में आग देखा। एयर इंडिया एक्सप्रेस को टाटा ग्रुप के एयर इंडिया द्वारा ऑपरेट किया जाता है। एयरलाइन ने बिना किसी नुकसान के सभी पैंसेजर्स को प्लेन से बाहर निकालने के लिए फ्लाइट क्रू की तारीफ की।
तीन जूता कारोबारियों के घर IT का छापा, इतना कैश कि हांफ गईं मशीनें, नोटों की गिनती करते-करते थकी टीम
डेस्क। आगरा में आयकर विभाग की बड़ी कार्रवाई हुई है। IT को इनकम टैक्स में हेराफेरी की जानकारी मिली थी, जिसके बाद तीन जूता व्यापारी के दुकान सहित उनके घर से 40 करोड़ों का कैश बरामद किया है। इनकम टैक्स की टीम फाइलें और इलेक्ट्रानिक डिवाइस की अभी भी जांच कर रही है। आगरा के सुभाष बाजार स्थित बीके शूज, मंशु फुटवियर और हरमिलाप ट्रेडर्स पर IT की रेड पड़ी है। इतना कैश मिला है कि मशीनें हांफ गई और टीम भी थक गई।
छापेमारी के दौरान आईटी ने कई अहम दस्तावेज को अपने कब्जे में लिया। आईटी की टीम ने अभी तक करीब 40 करोड़ का कैश बरामद किया है। आयकर विभाग ने नोटो को निगने के लिए 10 मशीनें मंगाई है। अधिकारियों को फुटवियर कंपनी के मालिक के घर से 500 रुपये के नोटों के कई बंडल मिले। इसके बाद नोटों की गिनती के लिए बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों को बुलाया गया। रकम 50 से 60 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को खबर मिली थी कि जूता कारोबारी टैक्स और जीएसटी की चोरी कर रहे हैं, जिसके बाद आयकर विभाग की टीम दोपहर में वहां पहुंचकर कार्रवाई शुरू कर दी। जिस समय आयकर विभाग की टीम दुकान में पहुंची उस समय वहां कुछ ग्राहक भी मौजूद थे। आईटी की टीम ने पहले दुकान से सभी ग्राहकों को बाहर किया और फिर अपनी कार्रवाई को आगे बढाया। आयकर विभाग की टीम को इतने नोट मिले कि देखकर अफसर भी हैरान रह गए।
आयकर विभाग की ओर से बरामद किए गए कैश में सिर्फ 500 रुपये के बंडल नजर आ रहे हैं। कमरे के पलंग, कुर्सी और मेज हर जगह 500 के नोटों का बंडल दिख रहा है। आगरा में जूता व्यापारियों के यहां इस छापेमार कार्रवाई से शहर में हड़कंप मच गया। आय से अधिक संपत्ति के मामले में इनकम टैक्स विभाग आगरा सहित कई दूसरे जगहों पर भी छापे मार रही है। कारोबारियों के पास जमीन में निवेश, सोने की खरीदी की जानकारी भी मिली है।
निर्वाचन संबंधी कदाचार को रोकने और स्वच्छ चुनाव लागू करने के लिए नागरिक निर्वाचन आयोग के साथ व्यापक तौर पर जुड़े
पिछले दो महीनों में cVigil से 4.24 लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुईं; 99.9 प्रतिशत मामलों का निपटारा किया गया
नई दिल्ली | लोकसभा चुनाव 2024 में, भारत निर्वाचन आयोग का cVIGIL ऐप लोगों के हाथों में चुनाव संहिता के उल्लंघन को चिह्नित करने के लिए एक अत्यधिक प्रभावी उपकरण के रूप में उभरा है। आम चुनाव 2024 की घोषणा के बाद से, 15 मई, 2024 तक इस ऐप के माध्यम से 4.24 लाख से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं। इनमें से 4,23,908 शिकायतों का निपटारा किया जा चुका है और शेष 409 मामले प्रक्रियाधीन हैं। लगभग 89% शिकायतों का समाधान 100 मिनट की समयसीमा के भीतर कर दिया गया, जैसा कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने दृढ़ता से वादा किया था।
नागरिकों ने निर्धारित समय या शोर स्तर से परे लाउडस्पीकरों के उपयोग, प्रतिबंध अवधि के दौरान प्रचार, बिना अनुमति के बैनर या पोस्टर लगाने, अनुमति सीमा से परे वाहनों की तैनाती, संपत्ति विरूपण, आग्नेयास्त्रों / धमकी का प्रदर्शन और प्रलोभनों की जांच करने में चुनावी कदाचार की जांच के लिए इस ऐप का उपयोग किया है।
cVIGIL एक उपयोगकर्ता के अनुकूल और संचालित करने में आसान एप्लिकेशन है, जो सतर्क नागरिकों को जिला नियंत्रण कक्ष, रिटर्निंग अधिकारी और फ्लाइंग स्क्वाड टीमों से जोड़ता है। इस ऐप का उपयोग करके, नागरिक राजनीतिक कदाचार की घटनाओं पर तुरंत मिनटों के भीतर रिपोर्ट कर सकते हैं और उन्हें रिटर्निंग अधिकारी के कार्यालय में जाने की आवश्यकता नहीं है। जैसे ही शिकायत cVIGIL ऐप पर भेजी जाएगी, शिकायतकर्ता को एक यूनिक आईडी प्राप्त होगी जिसके माध्यम से व्यक्ति अपने मोबाइल पर शिकायत को ट्रैक कर सकेगा |
एक साथ काम करने वाले कारकों की त्रिमूर्ति cVIGIL को सफल बनाती है। उपयोगकर्ता तत्काल ऑडियो, फोटो या वीडियो कैप्चर करते हैं, और शिकायतों पर समयबद्ध प्रतिक्रिया के लिए "100 मिनट" की उलटी गिनती सुनिश्चित की जाती है। जैसे ही उपयोगकर्ता उल्लंघन की रिपोर्ट करने के लिए cVIGIL में अपना कैमरा चालू करता है, ऐप स्वचालित रूप से एक जियो-टैगिंग सुविधा सक्षम कर देता है। इसका मतलब यह है कि फ्लाइंग स्क्वाड रिपोर्ट किए गए, उल्लंघन का सटीक स्थान जान सकते हैं, और नागरिकों द्वारा ली गई तस्वीर को अदालत में सबूत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। नागरिक गुमनाम रूप से भी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। दुरुपयोग को रोकने के लिए, cVIGIL ऐप में सुरक्षा संबंधी कई उपाय शामिल हैं, जिनमें भौगोलिक प्रतिबंध, रिपोर्टिंग पर समय की कमी और डुप्लिकेट या तुच्छ शिकायतों को फिल्टर करने के लिए प्रणाली शामिल हैं। यह ऐप प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने और मतदाताओं और राजनीतिक दलों की सुविधा के लिए आयोग द्वारा बनाए गए ऐप में से एक है |
बाबा रामदेव को मिली राहत….पतंजलि की दवाओं के निर्माण को निलंबित करने के आदेश पर रोक
डेस्क। पतंजलि की 14 दवाओं के निर्माण को निलंबित करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी गई है। सचिव आयुष डा. पंकज पांडेय ने शुक्रवार को आदेश किए। पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और दिव्य फार्मेसी की एक दर्जन से अधिक दवाओं के विनिर्माण लाइसेंस को निलंबित कर दिया गया था।
अब इस आदेश को लागू करने पर शुक्रवार को अंतरिम रोक लगाई गई। सचिव आयुष पंकज कुमार पांडे ने कहा कि एक उच्च स्तरीय समिति की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर तत्काल प्रभाव से अंतरिम रोक लगाई जा रही है।
रिपोर्ट में कहा गया कि निलंबन का आदेश सही नहीं है। लाइसेंस जारी करने वाले अधिकारियों ने आदेश को सही तरीके से जारी नहीं किया है। कंपनियों ने उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण के पिछले महीने के निलंबन आदेश को चुनौती दी थी। कंपनियों ने अपील में कहा है कि कानून प्रक्रिया का पालन किए बिना लाइसेंस निलंबित किया गया है।
राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण, आयुर्वेदिक और यूनानी सेवाओं ने पिछले महीने ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स ऐक्ट 1945 और ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम 1954 के तहत 14 पतंजलि उत्पादों के विनिर्माण लाइसेंस को निलंबित कर दिया था।
इन दवाओं का लाइसेंस हुआ था निलंबित
स्वासारि गोल्ड, स्वासारि वटी, ब्रोंकोम, स्वासारि प्रवाही, स्वासारि अवलेह, मुक्ता वटी एक्स्ट्रा पावर, लिपिडोम, बीपी ग्रिट, मधुग्रिट, मधुनाशिनी वटी एक्स्ट्रा पावर, लिवामृत एडवांस, लिवोग्रिट, आईग्रिट गोल्ड, पतंजलि दृष्टि।
वायु सेना परिवार कल्याण संघ की अध्यक्ष द्वारा उम्मीद निकेतन का उद्घाटन किया गया
नई दिल्ली | वायु सेना परिवार कल्याण संघ की अध्यक्ष नीता चौधरी ने 17 मई, 2024 को वायु सेना के पालम स्थित बेस रिपेयर डिपो का दौरा किया। उन्होंने इस अवसर पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए एक उन्नत चिकित्सा उपचार केंद्र के रूप में उम्मीद निकेतन का उद्घाटन किया। बेस रिपेयर डिपो के एयर ऑफिसर कमांडिंग एयर कमोडोर हर्ष बहल और वायु सेना परिवार कल्याण संघ (स्थानीय) अध्यक्ष विंग कमांडर रीना बहल (सेवानिवृत्त) ने नीता चौधरी तथा अन्य सम्मानित गणमान्य महिलाओं का स्वागत किया। उम्मीद निकेतन की कल्पना एवं अवधारणा एक ऐसा पालन पोषण वाला वातावरण तैयार करने के लिए की गई है, जहां पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चे अपनी अद्वितीय क्षमताओं के अनुरूप मनोरंजक गतिविधियों के माध्यम से सोच सकते हैं, आगे बढ़ सकते हैं और जीवन कौशल विकसित करना सीख सकते हैं। यह केंद्र संवेदी अन्वेषण, भाषण चिकित्सा के साथ अनुकूली खेल और इंटरैक्टिव इमर्सिव अनुभव तक प्रदान करता है। यह केंद्र विशेष बच्चों के शारीरिक, भावनात्मक तथा सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने के लिए तैयार किए गए कार्यक्रमों की विविध श्रृंखला प्रस्तुत करता है। उम्मीद निकेतन अपनी तरह के विशेष लगभग 55 बच्चों की मदद करेगा, जिन्हें प्रशिक्षित योग्य शिक्षकों की एक समर्पित टीम द्वारा सहायता प्रदान की जाती है। इस केंद्र का उद्घाटन समारोह भव्य तरीके से आयोजित किया गया और इसमें देश भर से वायु सेना परिवार कल्याण संघों के सभी क्षेत्रीय अध्यक्षों ने भाग लिया। इसके अलावा, दिल्ली क्षेत्र के सभी वरिष्ठ एयर मार्शलों की पत्नियां भी इस हृदयस्पर्शी उद्घाटन का साक्षी बनने के लिए वहां पर उपस्थित थीं। यह विशेष कार्यक्रम वायु सेना परिवारों के कल्याण के उद्देश्य से सुविधाओं में बढ़ोतरी के लिए भारतीय वायुसेना की वर्तमान में संचालित की जा रही गतिविधियों को उजागर करता है।

उपभोक्ता मामले विभाग ने कर्तव्य पथ पर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2024 के लिए काउंटडाउन कार्यक्रम का आयोजन किया
नई दिल्ली | अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रत्येक वर्ष 21 जून को मनाया जाता है। उपभोक्ता मामले विभाग (डीओसीए) ने आज नई दिल्ली में कर्तव्य पथ पर काउंटडाउन कार्यक्रम (योग पूर्व सत्र) का आयोजन किया। इसमें विभाग की सचिव निधि खरे सहित अधिकारियों और कर्मियों ने मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) के योग प्रशिक्षक और प्रदर्शक के मार्गदर्शन में उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षक ने समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में उनकी भूमिका पर बल देते हुए विभिन्न योग मुद्राओं (आसन), श्वास व्यायाम (प्राणायाम) और ध्यान तकनीकों पर फोकस किया। कर्तव्य पथ के शांत वातावरण ने इस आयोजन के लिए एकदम अनुकूल पृष्ठभूमि प्रदान की, जिससे प्रतिभागियों के बीच शांति की भावना पैदा हुई। यह काउंटडाउन (उलटी गिनती) पहल योग को दैनिक जीवन में शामिल करने के महत्व का विस्तार करने, व्यापक विकास और कल्याण के लिए सभी को इसमें शामिल करने के लिए डिज़ाइन की गई है।
इस कार्यक्रम में समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देने पर केंद्रित योग की कुशल प्रथाओं का प्रदर्शन किया गया। इसमें योग के सार्वभौमिक आकर्षण तथा आधुनिक चुनौतियों से निपटने में इसके निरंतर महत्व पर प्रकाश डाला गया। प्राचीन भारतीय परंपरा में उत्पत्ति के साथ, योग को शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य पर इसके लाभकारी प्रभावों के लिए स्वीकार किया जाता है।
इस विभाग की सचिव ने अपनी समापन टिप्पणी में एमडीएनआईवाई के योग प्रशिक्षक और प्रदर्शक को उनके अमूल्य मार्गदर्शन एवं विशेषज्ञता के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने संतुलित और स्वस्थ जीवनशैली प्राप्त करने के साधन के रूप में योग को बढ़ावा देने के लिए विभाग के समर्पण को दोहराया और सभी से योग को अपने दैनिक जीवन में शामिल करने का आग्रह किया।

भारत-ऑस्ट्रेलिया-इंडोनेशिया त्रिपक्षीय समुद्री सुरक्षा कार्यशाला (टीएमएसडब्ल्यू) के दूसरे संस्करण का आयोजन 15 से 17 मई, 2024 तक कोच्चि में किया गया
नई दिल्ली | भारत-ऑस्ट्रेलिया-इंडोनेशिया त्रिपक्षीय समुद्री सुरक्षा कार्यशाला (टीएमएसडब्ल्यू) के दूसरे संस्करण का आयोजन 15 से 17 मई, 2024 तक कोच्चि में आईएनएस द्रोणाचार्य पर किया गया था। इस कार्यशाला का मुख्य विषय 'हिंद महासागर क्षेत्र: क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए सहयोगात्मक प्रयास' पर केंद्रित था, जिसे इस समुद्री क्षेत्र में तीन समुद्री पड़ोसी देशों के बीच वर्तमान में चल रही समुद्री सुरक्षा गतिविधियों से संबंधित चुनौतियों एवं सहयोग के अवसरों पर चर्चा करने के लिए चुना गया था। यह महत्वपूर्ण कार्यशाला दक्षिणी नौसेना कमान मुख्यालय के मार्गदर्शन में आयोजित की गई थी और इसमें भाग लेने वाली तीन देशों की नौसेनाओं के प्रतिनिधियों की व्यापक भागीदारी देखी गई।
त्रिपक्षीय समुद्री सुरक्षा कार्यशाला की अध्यक्षता नौसेना स्टाफ के सहायक प्रमुख (एफसीआई) रियर एडमिरल निर्भय बापना ने की। आयोजन की सह-अध्यक्षता रॉयल ऑस्ट्रेलियन नेवी के कमोडोर फ्लोटिलास, कमोडोर पॉल ओ'ग्राडी, टीएनआई (एएल) से सीआईसी इंडोनेशियाई फ्लीट कमांड के संचालन के लिए सहायक एफएडीएम हेरी ट्रिविबोवो और भारतीय नौसेना के कमोडोर (विदेशी सहयोग) कमोडोर मनमीत एस खुराना द्वारा की गई। इस कार्यशाला के दौरान, होने वाली सभी चर्चाएं हिंद महासागर क्षेत्र में वर्तमान अवसरों और चुनौतियों पर बातचीत करते हुए विभिन्न विषयों पर केंद्रित थीं। जिसमें आईएफसी-आईओआर की सूचना विनिमय तंत्र व क्षमताएं, समुद्री डोमेन जागरूकता, गैर-पारंपरिक एवं अवैध समुद्री गतिविधियां, समुद्री कानून प्रवर्तन, क्षमता वृद्धि और क्षमता निर्माण, पारस्परिक सहभागिता तथा सहयोग बढ़ाने के मार्ग आदि शामिल हैं।
इस कार्यशाला के दौरान, मुख्यालय दक्षिणी नौसेना कमान के चीफ ऑफ स्टाफ, रियर एडमिरल उपल कुंडू और फ्लैग ऑफिसर समुद्री प्रशिक्षण, रियर एडमिरल सुशील मेनन द्वारा भी अपने विचार प्रस्तुत किये गए।
कार्यशाला के अवसर पर मुख्य कार्यक्रम से इतर ऑस्ट्रेलिया तथा इंडोनेशिया की नौसेनाओं के प्रतिनिधियों के लिए कोच्चि और मेसर्स कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में भारतीय नौसेना प्रशिक्षण स्थल पर उपलब्ध सुविधाओं को देखने हेतु विशेष दौरे का आयोजन भी किया गया था।
आईआईसीए ने 'भारत में शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा अनुसंधान एवं विकास पर व्यय' के संबंध में गोलमेज परामर्श का आयोजन किया
नई दिल्ली | स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (आईआईसीए) ने भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के सहयोग से आज नई दिल्ली में 'भारत में शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध कंपनियों द्वारा अनुसंधान एवं विकास पर व्यय' के संबंध में गोलमेज परामर्श का आयोजन किया।
इस गोलमेज़ परामर्श का आयोजन अनुसंधान एवं विकास पर व्यय के संबंध में कॉर्पोरेट विचारों को समेकित करने, कंपनी की प्रगति और लंबे समय तक स्थिरता के लिए अनुसंधान एवं विकास में निवेश की आवश्यकता से अवगत कराने और अनुसंधान एवं विकास से संबंधित प्रकटीकरण की आवश्यकता से अवगत कराने के लिए वर्तमान में जारी शोध के अंर्तगत किया गया। इस गोलमेज परामर्श का उद्देश्य देश के अनुसंधान एवं विकास परिदृश्य के बारे में आईआईसीए द्वारा किए गए शोध अध्ययन के अनंतिम निष्कर्षों पर इनपुट और कॉर्पोरेट जगत की अग्रणी हस्तियों की प्रतिक्रिया प्राप्त करना है।
भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने इस अवसर पर अपने मुख्य भाषण में इस बात पर बल दिया कि अनुसंधान एवं विकास डेटा हासिल करने के लिए एक मजबूत और मानकीकृत मानदंड अपनाया जाना चाहिए। प्रोफेसर सूद ने भारत के - सेवा-संचालित अर्थव्यवस्था से उत्पाद-संचालित अर्थव्यवस्था में परिवर्तन की परिकल्पना की। प्रोफेसर सूद ने कहा कि सेवाओं द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाए जाने के बावजूद, नवाचार और उत्पाद विकास के माध्यम से ही हम प्रगति कर वैश्विक स्तर पर प्रमुख स्थान हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कंपनियों से रचनात्मकता और जोखिम लेने की संस्कृति को बढ़ावा देते हुए अनुसंधान एवं विकास में रणनीतिक रूप से निवेश करने का आग्रह किया। प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए भारत को इस विकसित अर्थव्यवस्था के विजन को साकार करने के लिए सार्वजनिक-निजी फंडिंग मॉडल को सेतु के रूप में अपनाना होगा। प्रोफेसर सूद के संबोधन ने भारत के अनुसंधान एवं विकास एजेंडे की तात्कालिकता को रेखांकित किया। प्रोफेसर सूद ने कहा कि यह केवल संख्याओं के बारे में ही नहीं, बल्कि हमारे भाग्य को आकार देने, नवाचार को बढ़ावा देने और आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत छोड़ने के बारे में भी है।
इस अवसर पर डॉ. अजय भूषण पांडे, महानिदेशक और सीईओ, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स और अध्यक्ष राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (एनएफआरए) ने अपने संबोधन में अनुसंधान एवं विकास क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के विभिन्न उदाहरणों का उल्लेख किया और देश में अनुसंधान एवं विकास पहल पर कर छूट के इतिहास के बारे में जानकारी साझा की। उन्होंने कॉर्पोरेट क्षेत्र को ईएसजी (पर्यावरण, सामाजिक और शासन) और अनुसंधान एवं विकास के महत्व से अवगत कराने की आवश्यकता और महत्व पर भी प्रकाश डाला और इस बात का उल्लेख किया कि भारत ने डिजिटल अवसंरचना में अग्रणी बनकर सफलतापूर्वक उदाहरण स्थापित किए हैं। दक्षिण कोरिया, जापान, चीन, सिंगापुर, अमेरिका, इज़राइल और जर्मनी जैसे देशों की केस स्टडीज का हवाला देते हुए डॉ. पांडे ने कहा कि इन देशों ने अपने अनुसंधान एवं विकास क्षेत्र को बढ़ावा दिया और विकसित अर्थव्यवस्था बन गए। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि ईएसजी रिपोर्टिंग ढांचे को अपनाने से ईएसजी के नेतृत्व वाली निवेश प्रथाओं को बढ़ावा देने के प्रति कंपनियों का दृष्टिकोण बदल रहा है। डॉ. पांडे ने कहा कि इसी तरह, यह भारत के अनुसंधान एवं विकास परिदृश्य में समान विकास को प्रेरित कर सकता है।
वैज्ञानिक सचिव, पीएसए कार्यालय डॉ. परविंदर मैनी ने देश में अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देने की दिशा में भारत सरकार की विभिन्न पहलों को लागू करने के बारे में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने दोहराया कि अनुसंधान एवं विकास नवाचार को बढ़ावा देता है। डॉ. मैनी ने अनुसंधान एवं विकास निवेश में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि तकनीकी उन्नति और सतत विकास की दिशा में हमारी यात्रा में निजी क्षेत्र को भागीदार के रूप में आगे आना चाहिए। उन्होंने अनुसंधान एवं विकास उत्कृष्टता के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता पर बल देते हुए सहयोगात्मक प्रयासों की बात कही।
अपर सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सुनील कुमार ने देश में अनुसंधान एवं विकास डेटा हासिल करने में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की पहल पर प्रकाश डाला। कुमार द्वारा किया गया तर्कसंगत नीति-निर्माण और भारतीय नीतियों के साथ बेहतर तालमेल का आह्वान दर्शकों को पसंद आया और उन्होंने विशेष रूप से अनुसंधान एवं विकास क्षेत्र के लिए सार्वजनिक-निजी कंपनियों के डेटाबेस को दो शाखाओं में बांटने का प्रस्ताव रखा, जिससे लक्षित हस्तक्षेप और सुविचारित निर्णय लेने में सक्षम बना जा सके।
इस अवसर पर कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) के संयुक्त सचिव, इंद्र दीप सिंह धारीवाल ने अपने संबोधन में हमारे पुरातन काल से अनुसंधान एवं विकास के सार को ग्रहण करते हुए कहा, “पंचतंत्र की कालातीत कहानियों में हमें वह ज्ञान मिलता है, जो सदियों की सीमाओं से परे है। हमारे पूर्वजों ने ज्ञान के मूल्य को समझा, और इस बात को जाना कि वास्तविक प्रगति उत्तर खोजने, सीमाओं को पार करने और रचनात्मकता को बढ़ावा देने में निहित है।” धारीवाल ने कॉर्पोरेट समुदाय से केवल दायित्व के रूप में ही नहीं, बल्कि हमारे देश के भविष्य के लिए एक पवित्र कर्तव्य के रूप में अनुसंधान एवं विकास में निवेश करके इस विरासत का सम्मान करने का आग्रह किया ।
बी.एन. सत्पथी, पीएसए फेलो, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार का कार्यालय, ने बाजार पूंजीकरण द्वारा शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध कंपनियों के बीच अनुसंधान एवं विकास संबंधी व्यय के रुझान सहित आईआईसीए द्वारा किए गए शोध अध्ययन के निष्कर्षों का मसौदा प्रस्तुत किया। यह शोध अध्ययन कंपनियों, क्षेत्रों और भौगोलिक क्षेत्रों में व्यय के आकार; उच्चतम अनुसंधान एवं विकास निवेश वाले उद्योग और क्षेत्र, और स्थिरता संबंधी पहलों में क्षेत्र विशिष्ट अनुसंधान एवं विकास व्यय, साथ ही साथ अनुसंधान एवं विकास में निवेश रणनीतियों को अनुकूलित करने संबंधी सिफारिशों की तुलना करता है।
डॉ. गरिमा दाधीच, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रमुख, स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरमेंट, आईआईसीए ने कहा कि, “हम नवाचार और स्थिरता के चौराहे पर खड़े हैं। अनुसंधान एवं विकास के प्रति प्रतिबद्धता हमारे भाग्य को आकार देगी, जिसका प्रभाव न केवल हमारे व्यवसायों पर बल्कि हमारे पर्यावरण, समाज और भावी पीढ़ियों पर भी पड़ेगा।” डॉ. दाधीच ने बढ़ी हुई प्रतिबद्धता, बेहतर रिपोर्टिंग प्रथाओं, सहयोग और दीर्घकालिक प्रभाव की आवश्यकता पर जोर देते हुए गोलमेज परामर्श के विशिष्ट उद्देश्यों को रेखांकित किया।
डॉ. रवि राज अत्रे, चीफ प्रोग्राम एक्जीक्यूटिव, स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट, आईआईसीए ने गोलमेज़ परामर्श में सहायता की। इस कार्यक्रम में विभिन्न सार्वजनिक और निजी कॉर्पोरेट घरानों के अनुसंधान एवं विकास/स्थिरता प्रभागों के लगभग 50 वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
परामर्श से कुछ प्रमुख सिफारिशें वास्तविक समय के आधार पर आर एंड डी डेटा को प्रबंधित और ट्रैक करने के लिए एक समर्पित वेब-पोर्टल के साथ आने, आर एंड डी के महत्व से कॉर्पोरेट पदाधिकारियों को अवगत कराने की थीं। आर एंड डी की एक मानकीकृत परिभाषा, मानक प्रारूपों में अनिवार्य आर एंड डी प्रकटीकरण की संभावना, गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के लिए भी ऐसे शोध की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
इस बात का उल्लेख करना उचित होगा कि प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय ने भारत में बाजार पूंजीकरण के आधार पर शीर्ष 1,000 सूचीबद्ध कंपनियों के अनुसंधान एवं विकास व्यय पर एक शोध अध्ययन का दायित्व स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट, आईआईसीए को सौंपा था।
दूरसंचार विभाग ने विश्व दूरसंचार एवं सूचना समाज दिवस 2024 मनाया
एआई द्वारा संचालित सतत डिजिटल विकास पर गोलमेज चर्चा में 30 से अधिक उद्योग जगत के प्रमुख लोगों, ओईएम और स्टार्ट-अप ने भाग लिया
दूरसंचार विभाग ने अपनी 5जी के इस्तेमाल से जुड़ी 100 प्रयोगशालाओं (5जी यूज केस लैब) के लिए एक महीने के 5जी पाठ्यक्रम में लगभग 350 संकाय सदस्यों और छात्रों को प्रशिक्षित किया
नई दिल्ली | दूरसंचार सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने कहा कि सतत विकास के लिए संपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं, अर्थव्यवस्थाओं और सामाजिक क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी को लागू करना होगा। उन्होंने कहा कि दूरसंचार इसका एक अभिन्न अंग है और 2025-26 तक भारत में डिजिटल अर्थव्यवस्था लगभग 1.5 बिलियन डॉलर की हो जाएगी, जिसकी सकल घरेलू उत्पाद में हिस्सेदारी 15% होगी। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि ऐसा किसी अन्य तरीके से हो सकता है, सिवाय इसके कि हमारे पास एक बहुत मजबूत दूरसंचार नेटवर्क प्रणाली हो।”
सचिव (टी) विश्व दूरसंचार एवं सूचना समाज दिवस (डब्ल्यूटीआईएसडी) पर दूरसंचार विभाग (डीओटी) द्वारा आयोजित गोलमेज चर्चा के प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। इसका आयोजन दूरसंचार विभाग मुख्यालय में किया गया था।
सचिव (टी) ने डिजिटल कम्युनिकेशन इनोवेशन स्क्वायर (डीसीआईएस) और दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास निधि (टीटीडीएफ) जैसी योजनाओं के साथ विभाग के प्रयासों पर प्रकाश डाला, जिसके माध्यम से यह बहुत सारे उद्यमियों को समर्थन देने में सक्षम हुआ है जो अब अपने क्षेत्र में व्यक्तिगत रूप से छोटी या बड़ी समस्याओं को हल करने के लिए प्रौद्योगिकियों का उपयोग कर रहे हैं।
सचिव (टी) ने बताया कि भारत में 5G को लागू करने की गति दुनिया में सबसे तेज बनी हुई है। इसके अलावा, देश भर में स्थापित की गईं 5जी के इस्तेमाल से जुड़ी केस लैब्स 5जी अनुप्रयोगों के विकास को प्रोत्साहित करके 5जी तकनीक से जुड़े अवसर प्रदान कर रही हैं। इसके लिए दिल्ली और उसके आसपास के विभिन्न कॉलेजों के लगभग 350 संकाय सदस्यों को एक महीने के 5जी पाठ्यक्रम में प्रशिक्षित किया गया है। इस पाठ्यक्रम को इन-हाउस विकसित किया गया है।
इस अवसर पर दूरसंचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग प्रमुख, स्टार्ट-अप, एसोसिएशन और संगठन तथा मीडिया से जुड़े लोग मौजूद थे।
विश्व दूरसंचार एवं सूचना समाज दिवस (डब्ल्यूटीआईएसडी), 17 मई को मनाया जाता है। यह दूरसंचार विभाग द्वारा वैश्विक स्तर पर आर्थिक एवं सामाजिक विकास में दूरसंचार की महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करने के लिए मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय दिवसों में से एक है।
डब्ल्यूटीआईएसडी को अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की स्थापना के उपलक्ष्य में वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है और इंटरनेट तथा अन्य सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकियों (आईसीटी) के उपयोग से समाज और अर्थव्यवस्थाओं में पैदा होने वाली संभावनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ डिजिटल विभाजन को पाटने के तरीकों के बारे में भी जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। हर साल, डब्ल्यूटीआईएसडी दूरसंचार और सूचना समाज के मुद्दों से संबंधित एक विशिष्ट थीम पर ध्यान केंद्रित करता है और इस साल का फोकस "सतत विकास के लिए डिजिटल नवाचार" पर है।
इस अवसर पर, इस वर्ष दूरसंचार विभाग ने सचिव (टी) की अध्यक्षता में उद्योग जगत के प्रतिभागियों के साथ “एआई द्वारा संचालित सतत डिजिटल विकास” पर एक गोलमेज चर्चा का आयोजन किया।
विभिन्न उद्योग, स्टार्ट-अप, संगठनों और संगठनों ने गोलमेज चर्चा में भाग लिया, जिसमें तेजस नेटवर्क, वीवीडीएन, निवेट्टी, सिस्को, नोकिया, सेंसराइज, लेखा, स्पर्श, एचएफसीएल, एक्सएस इंफोसोल, टेमा, एमएआईटी, सीओएआई, वॉयस शामिल थे। इस चर्चा का उद्देश्य सतत विकास के लिए एआई की परिवर्तनकारी क्षमता का पता लगाना और इस पर चर्चा करना था कि एसडीजी के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हितधारकों की तरफ से और क्या प्रयास करने की आवश्यकता है।
इसके अतिरिक्त, इस कार्यक्रम में दूरसंचार विभाग की अन्य पहलों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया, जो एआई की क्षमता का उपयोग कर रही हैं, जिसमें ‘संगम: डिजिटल ट्विन’ और नागरिक-केंद्रित पोर्टल संचार साथी शामिल हैं।
बुनियादी ढांचा योजना और डिजाइन के लिए व्यावहारिक उपयोग के मामलों को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से, दूरसंचार विभाग ने 15 फरवरी, 2024 को एआई-संचालित इनसाइट्स पहल के साथ संगम डिजिटल ट्विन की पेशकश की थी। इस पहल ने उद्योग के दिग्गजों, तकनीकी कंपनियों, स्टार्टअप्स, शिक्षाविदों और व्यक्तिगत नवप्रवर्तकों सहित हितधारकों के विविध पूल से रुचि की अभिव्यक्ति (ईओआई) के लिए आह्वान किया। इसका लक्ष्य डिजिटल ट्विन, दूरसंचार डेटा और एआई का उपयोग करके बुनियादी ढांचा योजना और डिजाइनिंग में संभावित लाभों को प्रदर्शित करने के लिए वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों और उपयोग के मामलों के प्रदर्शन के माध्यम से पुष्ट करना है।
मार्च 2024 में तीन आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में 40 से अधिक प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया और इन्हें बहुत अच्छी प्रतिक्रिया मिली। स्टेज-I ईओआई पर प्रतिक्रिया उल्लेखनीय रहीं, जिसमें 199 प्रस्तुतियां प्राप्त हुईं। इनमें से 144 आवेदकों को पीओसी (चयनित प्रतिभागियों की सूची https://sangam.sancharsaathi.gov.in/selected-participants) में भाग लेने के लिए चुना गया है। इन चयनित प्रतिभागियों में अच्छी तरह से स्थापित दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) और बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों से लेकर गतिशील स्टार्टअप और प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थानों तक के प्रतिभागी शामिल हैं।
इसके अलावा, DoT चयनित प्रतिभागियों के लिए नेटवर्किंग इवेंट आयोजित करने की योजना बना रहा है, ताकि विस्तृत और विशिष्ट तरीके से उपयोग के मामलों (यूज केस) का विकास किया जा सके, अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए उपयोग के मामलों के मूल्य और महत्व का आकलन करने के लिए हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया जा सके और अपेक्षित डेटा की व्यवहार्यता और उपलब्धता का मूल्यांकन किया जा सके। इन कार्यक्रमों से घटकों या मॉड्यूल को विकसित करने और बुनियादी ढांचा योजना और डिजाइनिंग के लिए उपयोग के मामलों को प्रदर्शित करने के लिए सक्षम और इच्छुक भागीदारों की पहचान करने में भी मदद मिलेगी।
टूट रहीं बेड़ियां : इंडियास्किल्स 2024 में महिलाओं ने बाजी मारी
इंडियास्किल्स 2024 में पुरुष-प्रधान व्यवसायों में 170 से अधिक महिलाएं भाग ले रही हैं
इसमें 30 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 900 से अधिक उम्मीदवार भाग ले रहे हैं
नई दिल्ली | यशोभूमि, द्वारका में 15 से 19 मई 2024 तक चलने वाली इंडियास्किल्स प्रतियोगिता 2024 के दौरान उन व्यवसायों में महिलाओं की भागीदारी में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिन पर पहले पुरुषों का वर्चस्व था। महिला प्रतिभागी अपने पुरुष समकक्षों के साथ सीधे मुकाबले में भाग ले रही हैं, बहुत जोश और उत्साह का प्रदर्शन कर रही हैं। साथ ही, यह साबित कर रही हैं कि कौशल और प्रतिभा किसी भी रूप में लैंगिक वजहों से बाधित नहीं होती।
इस वर्ष, इंडियास्किल्स में 30 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 61 कौशलों से जुड़े 900 से अधिक उम्मीदवार और 400 से अधिक उद्योग विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। लॉजिस्टिक्स और फ्रेट फॉरवर्डिंग, वेब टेक्नोलॉजीज, विजुअल मर्चेंडाइजिंग, फैशन तकनीक, ग्राफिक डिजाइन तकनीक, पेंटिंग और डेकोरेटिंग, इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन, औद्योगिक डिजाइन प्रौद्योगिकी व नवीकरणीय ऊर्जा जैसे व्यवसायों में 170 से अधिक महिलाएं भाग ले रही हैं। यह प्रतियोगिता समान अवसर प्रदान करने के लिए एक मंच भी प्रदान कर रही है। पिछले वर्षों में, प्लंबिंग और हीटिंग कौशल में एक महिला उम्मीदवार ने भाग लिया था। परिदृश्य (लैंडस्केप) बागवानी कौशल में दो महिला टीमें थीं। विजुअल मर्चेंडाइजिंग में भी महिलाओं का वर्चस्व था। मोबाइल रोबोटिक्स में भी दो लड़कियों की टीम ने हिस्सा लिया।
इंडियास्किल्स 2024 के निर्णायक मंडल के सदस्य और इंडियास्किल्स 2022 के विजेता सोनू लाठेर ने कहा, “इंडियास्किल्स 2024 में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जिससे उनकी अपार प्रतिभा और लचीलेपन का पता चलता है। यह बढ़ता प्रतिनिधित्व न केवल उनके कौशल का प्रमाण है, बल्कि हमारे देश के लिए अधिक समावेशी और न्यायसंगत भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।"
ओडिशा से इंडियास्किल्स 2024 में भाग लेने वाली कीर्तिपर्णा सदांगी ने कहा कि उन्हें पिछले साल की प्रतियोगी रिंकी महतो से प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा, “अगर मुझे फ्रांस जाने का मौका मिलता है, तो मैं वैश्विक मंच पर हमारे तिरंगे को गौरवान्वित करने के लिए दृढ़ संकल्पित हूं।”
ऑटोनॉमस मोबाइल रोबोटिक्स, ऑटोमोबाइल रिपेयरिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग और मेक्ट्रोनिक्स जैसे नए युग के कौशल भी इंडियास्किल्स 2024 के इस संस्करण में काफी लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं। उम्मीदवार इन उभरते क्षेत्रों में बहुत उत्साह और दृढ़ संकल्प के साथ भाग ले रहे हैं। नए जमाने के कौशल नवाचार को बढ़ावा देकर, उत्पादकता बढ़ाकर और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देकर देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। ये कौशल एक जीवंत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को बढ़ावा दे रहे हैं, नई भूमिकाओं का सृजन बना रहे हैं और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को आकर्षित कर रहे हैं, जो सभी आर्थिक विकास में योगदान करते हैं। इसके अलावा, डिजिटल और तकनीकी कौशल में दक्षता देश की निर्यात क्षमताओं को बढ़ाती है, हरित प्रौद्योगिकियों के माध्यम से सतत विकास का समर्थन करती है, और स्मार्ट बुनियादी ढांचे के माध्यम से समग्र जीवन स्तर में सुधार करती है।
ऑटोनॉमस मोबाइल रोबोटिक्स के जूरी, महाराष्ट्र के अक्षत मराठी ने कहा, “इंडियास्किल्स 2024 हमारे भविष्य को आकार देने में नए युग के कौशल की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डालता है, जिसमें प्रतिभागी अत्याधुनिक तकनीकों में विशेषज्ञता का प्रदर्शन करते हैं। ये कौशल नवाचार को बढ़ावा दे रहे हैं, उत्पादकता बढ़ा रहे हैं और भारत को डिजिटल अर्थव्यवस्था में वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित कर रहे हैं।”
इंडियास्किल्स 2024 के विजेता, सर्वश्रेष्ठ उद्योग प्रशिक्षकों की मदद से, सितंबर 2024 में फ्रांस के लियोन में होने वाली वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता के लिए तैयारी करेंगे और इसमें 70 से अधिक देशों के 1,500 प्रतियोगी भाग लेंगे। इस साल, शुरुआती रुझानों से यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि भारत वर्ल्डस्किल्स में ऑटोमोबाइल, हॉस्पिटैलिटी, मेक्ट्रोनिक्स और जल प्रौद्योगिकी में पदक जीतेगा।
प्रशिक्षकों के साथ-साथ, प्रतियोगियों को पिछले वर्ल्डस्किल्स के विजेताओं द्वारा निर्देशित किया जा रहा है। इससे न केवल उन्हें व्यवसाय की बारीकियों को समझने में मदद मिल रही है, बल्कि उन्हें अतिरिक्त बढ़त हासिल करने में भी मदद मिल रही है। एमएसडीई के तहत काम कर रहा राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) इस कार्यक्रम को क्रियान्वित कर रहा है और यह 19 मई को एक भव्य समापन समारोह के साथ समाप्त होगा।
इस वर्ष प्रतिभागियों को राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क के अंतर्गत साख (क्रेडिट) हासिल करने का अवसर मिलेगा। वर्ल्डस्किल्स और इंडियास्किल्स दोनों प्रतियोगिताओं में प्रदर्शित सभी कौशल राष्ट्रीय कौशल योग्यता फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) के साथ कुशलतापूर्वक जुड़े हैं, जिससे प्रतिभागियों को अपने सीखने के परिणामों में सुधार और अपने चुने हुए क्षेत्रों में एक संपन्न कैरियर बनाने का अधिकार मिलता है। यह पहली बार है कि इंडियास्किल्स ने क्यूरेंसिया नामक एक प्रतियोगिता सूचना प्रणाली को शामिल किया है।
स्किल इंडिया डिजिटल हब (एसआईडीएच) पोर्टल पर प्रतियोगिता के लिए लगभग 2.5 लाख उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 26,000 को प्री-स्क्रीनिंग की प्रक्रिया के माध्यम से छांटा गया था। यह डेटा राज्य और जिला स्तरीय प्रतियोगिता के आयोजन के लिए राज्यों के साथ साझा किया गया था, जिसमें से 900 से अधिक छात्रों को इंडिया स्किल्स राष्ट्रीय प्रतियोगिता के लिए चुना गया था।
इस वर्ष, इंडियास्किल्स को 400 से अधिक उद्योग और शैक्षणिक साझेदारों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें टोयोटा किर्लोस्कर, ऑटोडेस्क, जेके सीमेंट, मारुति सुजुकी, लिंकन इलेक्ट्रिक, एनएएमटेक, वेगा, लॉरियल, श्नाइडर इलेक्ट्रिक, फेस्टो इंडिया, आर्टेमिस, मेदांता और सिगनिया हेल्थकेयर आदि शामिल हैं।
EPFO ने दी छह करोड़ लोगों को Good News, अब सिर्फ तीन दिनों में एकाउंट में आ जाएगा पैसा
नईदिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने छह करोड़ ग्राहकों को बड़ी खुशखबरी दी है। अब मेडिकल, शिक्षा, एजुकेशन, मैरिज और आउसिंग के एडवांस के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। क्योंकि क्लेम करने के नियमों में बदलाव कर दिया गया है। अब सिर्फ क्लेम के तीन दिनों में अकाउंट में पैसा आ जाएगा।
लेबर मिनिस्ट्री ने एक बयान में कहा कि ईपीएफ योजना, 1952 के पैरा 68 के और 68बी के तहत सभी दावों को ऑटो क्लेम सेटलमेंट फैसिलिटी के अंतर्गत लाया गया है। इस तरह के क्लेम अब बिना मानव हस्तक्षेत्र के आईटी सिस्टम ऑटोमैटिकली प्रोसेस कर देगा। पहले इसमें 10 दिन का समय लगता था अब ये समय सिर्फ तीन दिनों का ही होगा। इसके तहत आप किसी भी इमरजेंसी के लिए पीएफ अकाउंट से एडवांस फंड निकाल सकते हैं।
मालूम हो कि इमरजेंसी में फंड के क्लेम सेटलमेंट के लिए ऑटो मोड की शुरूआत अप्रैल 2020 में हुई थी। उस समय सिर्फ बीमारी पर ही पैसा निकाल सकते थे। अब ये दायरा बढ़ा दिया गया है। अब बीमारी, एजुकेशन, शादी और घर खरीदने के लिए भी ईपीएफ से पैसा निकाल सकते है।
पहले इसकी लिमिट सिर्फ 50 हजार ही थी। अब इसे बढ़ाकर 1 लाख कर दिया गया है। मालूम हो कि बीते वित्त वर्ष के दौरान 4.45 करोड़ दावों का निपटान किया गया है। इनमें से 2.84 करोड़ दावे इपीएफ खाते से पैसा निकालने को लेकर थे। वहीं, एडवांस निकालने का काम ऑटो सेटलमेंट मोड कम्प्यूटर के जरिए हो जाएगा। अब किसी से अप्रूवल की जरूरत नहीं होगी। और अप्रूवल होते ही तीन दिनों के अंदर आपके अकाउंट में पैसे आ जाएंगे।
Nepal ने भारतीय मसाला कंपनी पर की कार्रवाई, MDH और Everest के मसालों पर लगाया बैन
डेस्क। नेपाल के खाद्य प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता नियंत्रण विभाग ने MDH और Everest जैसी मसाला कंपनियों के कुछ प्रोडक्ट में कीटनाशक, एथिलीन ऑक्साइड होने की आशंका के कारण उस पर प्रतिबंध लगा दिया है। नेपाल ने खाद्य प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता नियंत्रण विभाग ने इन दोनों कंपनियों के मसालों में संदिग्ध केमिकल व एथिलीन ऑक्साइड की जांच भी शुरू की है।
बतादें कि कुछ समय पहले ही हांगकांग के खाद्य नियामक सेंटर फार फूड सेफ्टी (CFS) ने भी कहा था कि इन दोनों कंपनियों के प्रोडक्ट में एथिलीन ऑक्साइड है, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ता है। हांगकांग ने MDH और Everest के चार मसाला उत्पादों पर बैन कर दिया था। इस बीच ब्रिटेन की खाद्य मानक एजेंसी (FSA) ने गुरुवार को जानकारी दी कि एथिलीन ऑक्साइड के अधिकतम स्तर के लिए प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (ईडब्ल्यूएस) है। ब्रिटेन में एथिलीन ऑक्साइड पर प्रतिबंध है।
नेपाल के खाद्य प्रौद्योगिकी और गुणवत्ता नियंत्रण विभाग के प्रवक्ता मोहन कृष्ण महाराजन ने जानकारी दी है कि MDH और Everest कंपनी के मसालों को नेपाल में आयात में फिलहाल 7 दिनों के लिए बैन किया गया है। इन दोनों कंपनियों के मसालों की बिक्री पर भी बैन लगा दिया गया है। इन दोनों कंपनी के मसालों में एथिलीन ऑक्साइड की जांच की जा रही है।
विश्व हाइड्रोजन शिखर सम्मेलन 2024: ऊर्जा सचिव ने हरित हाइड्रोजन में भारत के विजन पर डाला प्रकाश
नईदिल्ली। भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव, भूपिंदर सिंह भल्ला ने 15 मई, 2024 को नीदरलैंड के रॉटरडैम में विश्व हाइड्रोजन शिखर सम्मेलन 2024 को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन उत्पादन के क्षेत्र में भारत के रणनीतिक विजन और क्षमताओं पर प्रकाश डाला।
भल्ला ने राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन की व्यापक प्रकृति को रेखांकित किया, जिसमें पायलट परियोजनाएं, अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) पहलें और कौशल विकास कार्यक्रम जैसे घटक शामिल हैं। "यह समग्र दृष्टिकोण हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखला में नवाचार, सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इसके अलावा, परियोजनाओं के संचालन और अनुसंधान एवं विकास को आगे बढ़ाने पर मिशन का ध्यान हरित हाइड्रोजन प्रौद्योगिकियों के लिए एक जीवंत इको-सिस्टम को प्रोत्साहित करने, अत्याधुनिक समाधानों और सर्वोत्तम प्रथाओं के उद्भव को बढ़ावा देने की भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।"
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव ने नवीकरणीय ऊर्जा सामर्थ्य में वैश्विक नेतृत्वकर्ता के रूप में भारत की स्थिति और देश की नवीकरणीय ऊर्जा की कम लागत पर बल दिया। "प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण के साथ, भारत नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेश के लिए एक आकर्षक परिदृश्य प्रस्तुत करता है, जो टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की ओर परिवर्तन की देश की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।" भल्ला ने राष्ट्रीय ऊर्जा मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के निर्बाध एकीकरण के लिए एक प्रमुख प्रवर्तक के रूप में भारत के एकीकृत ग्रिड बुनियादी ढांचे पर प्रकाश डाला। उन्होंने शिखर सम्मेलन के दर्शकों को बताया कि यह एकीकृत ग्रिड न केवल ग्रिड स्थिरता और विश्वसनीयता को बढ़ाता है, बल्कि यह नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों की रणनीतिक जगह, दक्षता को इष्टतम करने और लंबी दूरी के परिवहन और हाइड्रोजन के भंडारण की आवश्यकता को कम करने में भी सक्षम बनाता है।
सचिव ने कहा, भारत में कुशल इंजीनियरों का प्रचुर समूह नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन परियोजनाओं के सफल कार्यान्वयन के लिए आधारशिला के रूप में कार्य करता है। “इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) सेवाओं में विश्व स्तरीय विशेषज्ञता के साथ, भारत एक मजबूत प्रतिभा पूल प्रदान करता है, जो दक्षता और सटीकता के साथ परियोजनाओं को क्रियान्वित करने में सक्षम है। उचित लागत पर कुशल कर्मियों की यह उपलब्धता हरित हाइड्रोजन उत्पादन के वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को और बढ़ाती है।''
फ्रांस में 77वें कान फिल्म महोत्सव में भारत मंडप का उद्घाटन…
नईदिल्ली। फ्रांस में 77वें कान फिल्म महोत्सव के विभिन्न खंडों में कई आधिकारिक चयनों के साथ भारत के लिए यह साल जादुई प्रभाव समेटे है। 77वें कान फिल्म महोत्सव में भारत मंडप का उद्घाटन किया गया। प्रतिष्ठित कान फिल्म महोत्सव में प्रत्येक वर्ष इस मंडप का आयोजन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा किया जाता है। भारत की भागीदारी का नेतृत्व राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) द्वारा नोडल एजेंसी के रूप में और फिक्की उद्योग साझेदार के रूप में करेगा। यह मंडप अपनी समृद्ध सिनेमाई विरासत प्रदर्शित करने और वैश्विक फिल्म बिरादरी के साथ अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के प्रति भारत की निरंतर संकल्पबद्धता को दर्शाता है। इस मंडप के भव्य उद्घाटन समारोह का नेतृत्व सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सचिव संजय जाजू के साथ फ्रांस में भारत के राजदूत जावेद अशरफ ने किया।
इस गौरवपूर्ण उद्घाटन के अवसर पर सम्मानित गणमान्य व्यक्ति, प्रसिद्ध फिल्म निर्माता और उद्योग जगत की हस्तियां भी मौजूद रहीं, जो भारतीय सिनेमा की मूल भावना का जश्न मनाने के लिए यहां एकत्र हुईं। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों में सुश्री थोलोआना रोज नचेके, अध्यक्ष, नेशनल फिल्म एंड वीडियो फाउंडेशन, दक्षिण अफ्रीका, श्री क्रिश्चियन ज्यून, डायरेक्टर ऑफ फिल्म डिपार्टमेंट, डिप्टी जनरल डेलिगेट, कान फिल्म महोत्सव और फिल्म निर्माता रिची मेहता आदि शामिल थे।
इस मंडप के उद्घाटन के अवसर पर अपने संबोधन में संजय जाजू ने कहा, “इस वर्ष कान के आधिकारिक चयन में अधिक भारतीय प्रोजेक्ट को शामिल किया जाना खुशी की बात है, प्रतिस्पर्धा और अन्सर्टेन रिगार्ड प्रत्येक श्रेणी में एक –एक, और मैं यह भी स्वीकार करता हूं कि ये दोनों प्रोजेक्ट प्रोत्साहन के साथ-साथ आधिकारिक मुख्य निर्माण के संदर्भ में भी सरकारी सहायता के लाभार्थी रहे हैं।”सचिव ने कहा “यह भारत मंडप वैश्विक मंच पर भारतीय सिनेमा की नेटवर्किंग, सहयोग और प्रचार के केंद्र के रूप में काम करेगा।
हम भारतीय ऑडियो विजुअल उद्योग और उसके अंतरराष्ट्रीय समकक्षों के बीच अधिक सहयोग को बढ़ावा देना चाहते हैं, जिससे दुनिया भर में भारतीय सिनेमा की ख्याति और पहुंच बढ़े तथा देश के सॉफ्ट टच को बढ़ाने के लिए सिनेमा की शक्ति का उपयोग करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को हासिल किया जा सके।”
इस अवसर पर महामहिम जावेद अशरफ ने कहा, “भारत अपने दार्शनिक योगदान, चिंतन और विचारों के कारण, भू-राजनीतिक और आर्थिक रूप से दुनिया भर का ध्यान आकर्षित कर रहा है। व्यापक अनिश्चितताओं से घिरी इस बहुध्रुवीय दुनिया में इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है, क्योंकि हम मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से एक नई व्यवस्था की ओर रुख कर रहे हैं। ये सभी पहलू परस्पर जुड़े हुए हैं, जिससे विदेश, विशेषकर सिनेमा में, हमारे लिए अधिक से अधिक उपस्थिति महत्वपूर्ण हो गई है।''
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में टैगोर की स्थायी विरासत पर प्रकाश डालती एक प्रदर्शनी
यह प्रदर्शनी 19 मई 2024 तक जारी रहेगी
नई दिल्ली | इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), नई दिल्ली के संरक्षण और सांस्कृतिक अभिलेखागार प्रभाग ने हाल ही में रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती मनाने के लिए एक प्रदर्शनी और व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया। 'द रेयर फोटोग्राफ्स ऑफ रवीन्द्रनाथ टैगोर' शीर्षक वाली प्रदर्शनी का आयोजन गणेश नारायण सिंह द्वारा किया गया। इस अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सचिदानंद जोशी मुख्य अतिथि थे। सेमिनार में डॉ. फैबियन चार्टियर, नीलकमल अदक और बसु आचार्य सहित प्रतिष्ठित वक्ताओं ने भाग लिया, जिन्होंने टैगोर की विरासत पर विभिन्न दृष्टिकोण प्रस्तुत किए। संरक्षण एवं अभिलेखागार निदेशक प्रोफेसर अचल पांडे और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के कार्यकारी निदेशक डॉ. संजय झा भी उपस्थित थे। यह प्रदर्शनी 19 मई 2024 तक चलेगी

डॉ. फैबियन चार्टियर ने रवींद्रनाथ टैगोर के अध्ययन के प्रति उनके 27 वर्षों के समर्पण पर प्रकाश डालते हुए 'टैगोर के फ्रेंच कनेक्शन' विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने फ्रांस में टैगोर के स्वागत पर जोर दिया और धीरे-धीरे उनकी प्रसिद्धि और अंततः घरेलू मान्यता में वृद्धि पर प्रकाश डाला। चार्टियर फ्रांस में टैगोर की यात्राओं के बारे में उपयोगी जानकारी प्रदान करते हैं, जिसमें प्रथम विश्व युद्ध के दौरान युद्ध के मैदान का दौरा करने पर उनकी भावनात्मक प्रतिक्रिया भी शामिल है, जो मानवता के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने एलेक्जेंड्रा डेविड नील के अनुशंसा पत्रों का हवाला देते हुए पश्चिम में टैगोर के भव्य स्वागत की भी चर्चा की। चार्टियर ने टैगोर के यूरोपीय दौरे पर भी प्रकाश डाला और खुलासा किया कि जब उन्हें व्यापक रूप से स्वीकार किया गया, तो बहस और चर्चाएं हुईं जिन्होंने उनके बारे में धारणाओं को आकार दिया। बाद में, चार्टियर ने टैगोर को फ्रेंच सिखाने के विक्टोरिया ओकाम्पो के प्रयासों का भी उल्लेख किया। अन्य वक्ताओं में, नील कमल अदक और बसु आचार्या ने क्रमशः 'रवींद्रनाथ टैगोर: द अल्टीमेट फ्लावरिंग ऑफ एन आर्टिस्ट' और 'टैगोर की फ्रांस यात्रा और उसके प्रभाव' पर बात की।
दर्शकों को अपने संबोधन में, डॉ. सचिदानंद जोशी ने टैगोर के अद्वितीय चरित्र पर प्रकाश डाला और जलियांवाला बाग नरसंहार के बाद उनकी आधिकारिक उपाधि 'नाइटहुड' लौटाने के उनके उल्लेखनीय कार्य पर प्रकाश डाला, जो उनकी भारतीय पहचान को दर्शाता है। टैगोर के अंतर्राष्ट्रीय संबंधों पर जोर देते हुए, उन्होंने आगामी प्रदर्शनी पर चर्चा की और कहा कि इस प्रदर्शनी में आईजीएनसीए के अभिलेखीय खजाने के साथ-साथ एलिजाबेथ ब्रूनर, आनंद कुमारस्वामी, शंभू साहा, डीआरडी वाडिया और कपिला वात्स्यायन के संग्रह से दुर्लभ पेंटिंग और तस्वीरें शामिल होंगी। डॉ. जोशी ने टैगोर की कविता 'प्राण' का अनुवादित हिन्दी गीत भी प्रस्तुत किया।

चल रही प्रदर्शनी में एलिजाबेथ ब्रूनर, आनंद कुमारस्वामी, शंभू साहा, डीआरडी वाडिया और कपिला वत्सना के दुर्लभ संग्रहों की तस्वीरें प्रदर्शित की गई हैं। इसमें विभिन्न विषयों को भी शामिल किया गया है, जिनमें 'शांतिनिकेतन : शांति का घर', इसके उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्य पर ध्यान केंद्रित करना, 'टैगोर के पारिस्थितिक आवास और कृषि संबंधी गतिविधियाँ', उनके पर्यावरणीय प्रयासों की खोज, 'टैगोर और गांधी', उनके संबंधों में रुचि, और ' गुरुदेव 'रवींद्रनाथ टैगोर और उनका फ्रेंच ओडिसी', जो उनके फ्रांसीसी संबंधों पर प्रकाश डालता है। सुलग्ना बनर्जी की मनमोहक आवाज ने रवीन्द्र संगीत के मधुर सार को जीवंत कर दिया। कार्यक्रम का संचालन संरक्षण और अभिलेखागार प्रभाग के सुधीश शर्मा ने किया और अरिजीत दत्ता ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
रक्षा सचिव एमडीएल के 250 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित समारोह में शामिल हुए और स्मारक सिक्का जारी किया
नई दिल्ली | मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) आज ढाई शताब्दियों से अधिक की अपनी असाधारण यात्रा को याद करते हुए 250 साल पूरे होने का उत्सव मना रहा है। वर्ष 1774 में एक छोटी सूखी गोदी (ड्राई डॉक) के रूप में एक मामूली शुरुआत करके, 1934 में इसके निगमन होने तक और बाद में, 1960 से भारत सरकार के अधीन इसके प्रबंधन तक, एमडीएल द्वारा 250 वर्ष पूरे करना एक असाधारण उपलब्धि है जो उसकी सुदृढ़ता, विकास और दीर्घकालिक विरासत का एक प्रमाण है।”
अत्यधिक महत्व के इस अवसर को मनाने के लिए एमडीएल ने आज कई कार्यक्रमों का आयोजन किया। इन कार्यक्रमों के तहत एमपीए से प्राप्त निकटवर्ती भूमि का उद्घाटन, स्वदेशी मिडगेट पनडुब्बी ‘अरोवाना’ के प्रोटोटाइप का लॉन्च, सोलर इलेक्ट्रिक हाइब्रिड नाव का जलावतरण, एमडीएल के 250 वर्ष पूरे होने के प्रतीक के रूप में स्मारक सिक्के का विमोचन और एक तकनीकी सेमिनार का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर रक्षा सचिव गिरिधर अरमने मुख्य अतिथि थे। रक्षा सचिव ने मुंबई बंदरगाह प्राधिकरण से प्राप्त भूमि के निकटवर्ती टुकड़े का औपचारिक उद्घाटन किया। इस सुविधा को विभिन्न प्रकार के जहाजों के नए निर्माण, मरम्मत/रीफिट के एक साथ निर्माण और साज-सज्जा के लिए विकसित किया जाएगा। यह नया बुनियादी ढांचा एमडीएल को विभिन्न परियोजनाओं के एक साथ कार्यान्वित करने हेतु पर्याप्त सुविधा प्रदान करेगा।

एमडीएल ने ‘अरोवाना’ नाम की एक मिडगेट पनडुब्बी का प्लेटफॉर्म डिजाइन और पतवार सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिसे आज रक्षा सचिव ने लॉन्च किया। एमडीएल 1984 से विदेशी डिजाइन वाली पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है। एमडीएल ने एक स्वदेशी पारंपरिक पनडुब्बी का डिजाइन और विकास भी शुरू कर दिया है। मिडगेट पनडुब्बी को अवधारणा के प्रमाण के रूप में विकसित किया जा रहा है। टीम 2028 तक एक पूर्ण पैमाने की पारंपरिक पनडुब्बी के डिजाइन के विकास पर समानांतर रूप से काम कर रही है।
रक्षा सचिव ने स्वदेशी प्रौद्योगिकी भागीदार के साथ डिजाइन और सह-विकसित की गई 11 नॉट की अधिकतम गति वाली सोलर इलेक्ट्रिक हाइब्रिड नाव का जलावतरण भी किया। इसकी संचालन लागत एक डीजल नाव की संचालन लागत का लगभग 1/10वां हिस्सा है और रखरखाव की लागत भी बहुत कम है।
इसके अलावा, एमडीएल द्वारा संकल्पित और स्वदेशी प्रौद्योगिकी भागीदार के साथ सह-विकसित “सुची” नाम के 24 पैक्स ईंधन सेल इलेक्ट्रिक फेरी का भी रक्षा सचिव द्वारा शुभारंभ किया गया। इसकी उन्नत तकनीक में शून्य उत्सर्जन व कम ध्वनिक जैसी विशेषताएं शामिल हैं, जिससे जलमार्ग स्वच्छ रहते हैं और पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिलता है।

अरमने ने “उभरती प्रौद्योगिकियां और जहाज निर्माण का भविष्य” विषय पर तकनीकी संगोष्ठी का भी उद्घाटन किया। एमडीएल के अस्तित्व के 250 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में, रक्षा सचिव ने आरबीआई द्वारा जारी एक सिक्के का विमोचन भी किया, जिसे एमडीएल के समृद्ध इतिहास एवं विरासत के सम्मान में तैयार किया गया है। एमडीएल को बधाई देते हुए रक्षा सचिव ने कहा कि एमडीएल भारत के मुकुट का एक अनमोल रत्न है और इसने नौसेना एवं वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए क्षमता निर्माण में बहुत योगदान दिया है। उन्होंने आगे कहा कि एमडीएल देश का सबसे बड़ा शिपयार्ड है जो भारतीय नौसेना की परिसंपत्तियों में सबसे अधिक योगदान देता है। यह अवसर न केवल एमडीएल की असाधारण यात्रा का प्रतीक है बल्कि समुद्री गतिविधियों में उत्कृष्टता के प्रति इसकी प्रतिबद्धता का प्रमाण भी है।