दिव्य महाराष्ट्र मंडल
संचार क्रांति में टीवी की भूमिका अतुलनीयः प्राचार्य
- संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में मनाया गया विश्व टेलीविजन दिवस
रायपुर। संचार क्रांति का आधार टेलीविजन को कहा जाता है। क्योंकि इसके आने के बाद मनोरंजन और सूचनाओं के प्रसार में तेजी आई। ब्लैक-एंड-व्हाइट से लेकर रंगीन, केबल और डिजिटल स्ट्रीमिंग तक, टीवी ने एक साझा सांस्कृतिक अनुभव बनाया है, जनमत को आकार दिया है और दुनिया भर की घटनाओं को लोगों तक पहुंचाया है। आज डिजिटल युग में भी यह अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। उक्ताशय के विचार संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने शुक्रवार 21 नवंबर की असेंबली में गया विश्व टेलीविजन दिवस के अवसर पर कहीं।
शुक्रवार, 21 नवंबर को येलो हाउस की टीम ने असेंबली कंडक्टकी। हाउस कार्डिनेटर अस्मिता कुसरे और असेंबली इंचार्ज रेणुका शुक्ला ने बच्चों को बताया कि टेलीविजन में आज भी कई कार्यक्रम ऐसे आते है जिन्हें छोटे बच्चों को देखना चाहिए। जैसे जंगल बुक, ब्रेनचाइल्ड, मालगुड़ी डेज, डोरा, द एक्सप्लोरर, डा. बिनोक्स शो, स्टोरीबॉट्स से पूछें, छोटे आइंस्टीन शिक्षाप्रद कार्यक्रम है।
प्रथम बालेश्वर ने बच्चों के सामने टेलिविजन डे पर एक स्पीच दी। लव पाठक ने बच्चों को सुविचार कि चार लाइन बोलकर बच्चों को शिक्षा का महत्व बताते हुए और उसे हम टेलीविजन से कैसे ग्रहण कर सकते हैं इस बारे में बताया। पावना, सुहानी, शिवम ने असेंबली में सहभागिता दी।
शिक्षिका आराधना लाल ने बताया कि हाई और हायर सेंकडरी के बच्चों द्वारा भी वर्ल्ड टेलिविजन डे सेलिब्रेट किया गया। हाउस इंचार्ज वंदना बिसेन और आशा जैन के मार्गदर्शन में बच्चों ने असेंबली तैयार की। वर्ल्ड टेलीविजन डे पर स्पीच दिव्या पांडे ने दिया। दिया गोस्वामी तथा शिवानी गोस्वामी ने बच्चों से टेलीविजन आधारित प्रश्न पूछे, जिसका बच्चों ने उत्साह के साथ उत्तर दिया।
गीता जयंती पर गीता के भक्ति और पुरुषोत्तम योग का पाठ
- महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति आनलाइन मोड कर रही प्रतिदिन अभ्यास
- मोक्षदा एकादशी पर गीता का सामूहिक पाठ 30 नवंबर को
रायपुर। अपनी सनातन संस्कृति को संजोकर चली रही महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति मोक्षदा एकदाशी यानी गीता जयंती के उपलक्ष्य पर गीता के भक्ति योग और पुरुषोत्तम योग का पाठ करने जा रही है। छत्तीसगढ़ की संस्कृत भारती की टीम भी विशेष रुप से आयोजन में शामिल होंगी। पाठ का आयोजन 30 नवंबर को महाराष्ट्र मंडल भवन में शाम 4 से 6 बजे तक किया जाएगा। आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि महाराष्ट्र मंडल द्वारा हर वर्ष गीता जयंती मनाई जाती है।
आध्यात्मिक समिति की प्रमुख सृष्टि दंडवते ने बताया कि आध्यात्मिक समिति की ओर से अभी गीता के 12वें और 15वें अध्याय का नियमित अभ्यास आनलाइन मोड पर किया जा रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इसमें शामिल हो रहे है। सृष्टि ने आगे कहा कि भगवद गीता के अध्याय 12 (भक्ति योग) में भगवान कृष्ण बताते हैं कि वे ऐसे भक्तों को अत्यंत प्रिय हैं जो किसी को दुख नहीं देते, जो स्वयं दुख से मुक्त हैं, और जो सुख, दुःख, भय और चिंता से परे हैं। अध्याय 15 (पुरुषोत्तम योग) में श्लोक 12 में कृष्ण बताते हैं कि सूर्य, चंद्रमा और अग्नि में जो तेज है, वह उन्हीं का तेज है, और इन तीनों से ही संसार आलोकित होता है।
कार्तिक माह में गोपाल काला उत्सह मना की कृष्ण की पूजा
रायपुर। कार्तिक का महीना हो और मराठी परिवार में गोपाल काला उत्सव न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। कार्तिक माह में गोपाल काला उत्सव एक धार्मिक उत्सव है जो भगवान कृष्ण की पूजा से जुड़ा है। खासकर उनके बाल स्वरूप 'लड्डू गोपाल' या 'दामोदर' के रूप में। महाराष्ट्र मंडल की डंगनिया महिला केंद्र की महिलाओं ने कार्तिक मास के पावन अवसर पर विगत दिनों गोपाल काला उत्सव मनाया। बाल कृष्ण और राधा बनकर पहुंचे बच्चे आकर्षण का केंद्र रहे और केंद्र की सभी महिलाओं ने उनके समक्ष रास किया और सुंदर भजनों का गायन किया।

महाराष्ट्र मंडल की सखी निवास प्रभारी नमिता शेष ने बताया कि गोपाल काला का आयोजन केंद्र की सदस्या श्रद्धा देशमुख के घर पर किया गया। गोपाल काला में हम भगवान कृष्ण की पूजा और उनकी बाल लीलाओं का स्मरण करते है। यह उत्सव भगवान कृष्ण से जुड़े विभिन्न अनुष्ठानों और उनके आध्यात्मिक महत्व को दर्शाता है। गोपाल काला उत्सव में सभी बाल गोपाल की पूजा अर्चना कर दीपक जलाए और सभी उनके समक्ष रास किया। उत्सव में राधा-कृष्ण बने श्रीनिता विशाल बक्षी और साहिता विधान बक्षी ने सभी का दिल जीत लिया।
इस अवसर पर श्रद्धा देशमुख, ज्योति डोळस, नमिता शेष, अनुभा जाउलकर, अंजली काळे, रंजना राजिमवाले, शैला गायधनी, रश्मि डांगे, प्रिया जोगलेकर, रश्मि दलाल, श्रद्धा मरघड़े, सरोजनी पराड़कर, माधुरी इंचुलकर, जया भावे, अर्चना टेंबे, अर्चना कुलकर्णी, श्रृष्टि दंडवते, अनुजा महाड़िक, संध्या विजया भाले, सौम्या इंगले उपस्थित थीं।
महाराष्ट्र मंडल ने शिवाजी की आरती संग मनाई गई रानी लक्ष्मी बाई की जयंती
रायपुर। खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी... बुंलेदे हर बोले के मुंह हमने सुनी कहानी थी.... शुभद्रा कुमारी चौहान की यह कविता सभी ने अपने बचपन में पढ़ी। यह कविता आज भी उतनी ही प्रासंगिक और अंर्तमन में देश प्रेम जागृत करने में सक्षम है। शुभद्रा कुमारी चौहान की यह कविता 1857 के भारतीय विद्रोह के दौरान झांसी की रानी लक्ष्मीबाई के असाधारण साहस और बहादुरी को दर्शाती है। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने रानी लक्ष्मी बाई की जयंती कार्यक्रम के अवसर पर कहीं। वहीं इससे पूर्व महाराष्ट्र मंडल की युवा समिति ने माह के प्रत्येक 19 तारीख को होने वाली शिवाजी महाराज की आरती की।
शिवाजी महाराज और रानी लक्ष्मी बाई के रोचक प्रसंगों पर चर्चा करते हुए महाराष्ट्र मंडल के सचिव चेतन दंडवते ने कहा कि शिवाजी महाराज और रानी लक्ष्मीबाई में कई समानताएं थीं, जैसे कि दोनों मराठा साम्राज्य से संबंधित थे, अपने राज्य के प्रति गहरी निष्ठा रखते थे और युद्ध और नेतृत्व कौशल में कुशल थे। दोनों ही भारत के महान नायकों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी बहादुरी और कौशल से राष्ट्र के इतिहास में एक विशेष स्थान बनाया है।
इस अवसर पर मंडल के वरिष्ठ सभासद अनिल श्रीराम कालेले ने कहा कि शिवाजी महाराज मराठा साम्राज्य के संस्थापक थे, जबकि रानी लक्ष्मीबाई बाद के दौर में झांसी पर शासन करने वाली एक मराठी रानी थीं। दोनों ने अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए संघर्ष किया। शिवाजी ने स्वराज्य की स्थापना की और लक्ष्मीबाई ने 'झांसी नहीं दूंगी' कहकर ब्रिटिश साम्राज्यवाद का विरोध किया।
इस अवसर पर युवा समिति के मंडल के वरिष्ठ सदस्य अतुल गद्रे, युवा समिति के प्रमुख विनोद राखुंडे, दिव्य महाराष्ट्र मंडल वेब पोर्टल प्रभारी कुणाल दत्त मिश्रा, कार्यालय सहायक मनीष देसाई प्रमुख रुप से उपस्थित थे।
रानी लक्ष्मी बाई जयंती के साथ बच्चों ने मनाया इंटरनेशनल मेन्स डे
- स्कूल के पुरूष शिक्षकों और स्टाफ को फूल और पेन देकर किया सम्मानित
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में बुधवार 19 नवंबर को इंटरनेशनल मेन्स डे मनाया गया। वहीं रानी लक्ष्मी बाई की जयंती और राष्ट्रीय एकता दिवस भी सेलिब्रेट किया गया। रानी लक्ष्मीबाई बनकर असेंबली में पहुंची 10वीं की छात्रा खुशी वारे ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। बता दें कि इंटरनेशनल मेन्स डे की शुरुआत 1992 में थॉमस ओस्टर ने की थी, लेकिन आधिकारिक तौर पर इसे 1999 में ट्रिनिडाड और टोबैगो में मनाया गया था।

असेंबली इंचार्ज शिक्षिका वंदना बिसेन और आशा जैन ने बताया कि आज येलो हाउस के बच्चों ने असेंबली में प्राचार्य मनीष गोवर्धन, उपप्राचार्य राहुल वोड़ीतेलवार, शिक्षक अखिल खरे सहित सभी पुरूष स्टाफ का पेन और क्राफ्ट पेपर से बनाए सुंदर फूलों के स्वागत किया। फूलों में बच्चों की क्रिएटिवी नजर आ रही थी।

वंदना बिसेन ने आगे बताया कि यह दिन उन पुरुषों को सम्मानित करता है जो दयालुता, ज़िम्मेदारी और नेतृत्व के माध्यम से समाज में योगदान देते हैं, और परिवारों, समुदायों, रिश्तों, बच्चों की देखभाल और पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी में उनकी भूमिकाओं पर प्रकाश डालता है।

आज 10वीं के छात्र आदित्य साहू ने असेंबली कंडट की। शिवानी ने प्ले भाषण, मुस्कान ने प्लेज कराया। इस अवसर पर बच्चों ने मनमोहक नाट्य प्ले किया। जिसमें पुरूषों की वेदना को दर्शाने का प्रयास किया। प्ले में वंदना मोटवानी, नुपूर जैन, हेमंत बघेल, रिया साहू, रोनक वर्मा और विहान साहू ने अभिनय किया।
महाराष्ट्र मंडल में शिवाजी की महाआरती और रानी लक्ष्मी बाई की जयंती बुधवार 19 नवंबर को
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में बुधवार 19 नवंबर को शाम 7 बजे छत्रपति शिवाजी महाराज की महाआरती और रानी लक्ष्मी बाई की जयंती मनाई जाएगी। महाराष्ट्र मंडल के युवा समिति के समन्वयक विनोद राखुंडे ने बताया कि महाराष्ट्र मंडल की युवा समिति द्वारा माह के प्रत्येक 19 तारीख को छत्रपति शिवाजी महाराज की महाआरती की जाती है। वहीं रानी लक्ष्मीबाई की जयंती भी मनाई जाएगी।
विनोद ने आगे बताया कि झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की जयंती हर साल 19 नवंबर को मनाई जाती है। उनका जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था और उनके बचपन का नाम मणिकर्णिका था। यह दिन उनकी वीरता और 1857 के विद्रोह में उनके योगदान को याद करने के लिए मनाया जाता है। इस अवसर पर रानी लक्ष्मीबाई और छत्रपति शिवाजी महाराज की शौर्यगाथाओं पर चर्चा होगी। मंडल द्वारा इस आयोजन का उद्देश्य है कि हमारी आने वाली पीढ़ी हमारी संस्कृति को पहचान सके और उनके बलिदानों को जान सके।
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संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के बच्चों ने मनाई संत ज्ञानेश्वर की पुण्यतिथि
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में सोमवार, 17 नवंबर को संत ज्ञानेश्वर की पुण्यतिथि मनाई गई। स्कूल के जिन बच्चों जन्मदिन 17 नवंबर को था, सभी ने मिलकर संत ज्ञानेश्वर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर पूजा अर्चना की।
येलो हाउस असेंबली इंचार्ज रेणुका शुक्ला ने आज असेंबली कराई। प्री प्राइमरी इंचार्ज अस्मिता कुसरे ने बच्चों को बतायासंत ज्ञानेश्वर 13वीं सदी के एक महान मराठी संत और कवि थे, जिनका जन्म 1275 में महाराष्ट्र के आपेगांव में हुआ था। उन्होंने संस्कृत में लिखी गई भगवद्गीता पर मराठी में 'ज्ञानेश्वरी' की रचना की और इस तरह ज्ञान को आम जनता तक पहुंचाया। उन्होंने जाति-भेद का विरोध किया और भक्ति को ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग बताया। मात्र 21 वर्ष की आयु में, 1296 में, उन्होंने आळंदी में संजीवन समाधि ली।
गिलास में सिक्का डालकर डॉ अलका गोले बनीं विजेता, मीना चुनी गई क्वीन ऑफ द गेम
रायपुर। महिलाओं की बैठक हो और रोचक गेम न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। हर बार मिलने पर एक नया गेम लेकर उत्साहित महाराष्ट्र मंडल के सरोना महिला केंद्र की महिलाओं ने इस बार मीना नवरे को क्वीन ऑफ द गेम चुना। वहीं गिलास में सिक्का डालने की प्रतियोगिता में डॉ अलका गोले सबसे अधिक सिक्का डालकर विजेता चुनी गई।

महाराष्ट्र मंडल की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने बताया कि महाराष्ट्र मंडल के सभी 17 महिला केंद्रों में समाजसेवा के कार्यों के लिए नियमित बैठक होती है। सरोना केंद्र की महिलाओं ने शनिवार, 15 नवंबर को बैठक कर सेवा कार्यों की रूपरेखा तैयार की और इस अवसर पर कई रोचक खेल भी खेले। एक गेम में ए टू जेड अक्षर से शुरू होने वाले हिन्दी फिल्म गीत लिखने थे और दूसरा लकी गेम था। जिसमें पेपर गिलास की तली में नवंबर-दिसंबर लिखा हुआ था। छह ग्लास में से तीन गिलास चुनकर, डायस से 6 चांस में सिक्के डालने थे। जिसके ज्यादा सिक्के वो विनर रहा। डॉ अलका गोले प्रथम और दिप्ती शिलेदार द्वितीय रहे। वहीं गाने वाले गेम में मीना नवरे प्रथम स्थान पर रही। मीना को क्वीन ऑफ द गेम का ताज पहनाकर सम्मानित किया गया।
दलाल ने आगे बताया कि इस अवसर पर केंद्र की सदस्या रमा धारवडकर और अलका मोडक का जन्मदिन भी सेलिब्रेट किया गया। अंत में सभी हनुमान चालिसा का पाठ किया। इस अवसर पर अलका मोड़क, आरती ठोंबरे, मीना परदेशी, प्रियंका बोरवणकर, विभा पांडे, मीना नवरे, , डॉ अलका गोळे, प्रवीणा बापट, नेहा किल्लेदार, वनजा भावे, दीप्ती शिलेदार, दीपा वैद्य, शिखा चोरनेले, रमा धारवाडकर, अनुश्री मोखरीवाले, सुरेखा पाठक, शुभा गोवर्धन और अपूर्वा मोडक उपस्थित रहीं।
दिव्यांग बालिका विकास गृह में सत्यनारायण कथा के साथ राम नाम की गूंज
- अन्य महिला केंद्रों में हुए रामरक्षा स्त्रोत और हनुमान चालीसा पाठ
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित आध्यात्मिक समिति की ओर से होने वाल रामरक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ इस शनिवार भी उत्साह के साथ जारी रहा। महाराष्ट्र मंडल ने शनिवार को एकादशी तिथि पर पुनर्निमित दिव्यांग बालिका विकास गृह में भगवान सत्यनारायण की कथा और पूजन किया। जिसके बाद सभी ने मिलकर राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके साथ मंडल के वल्लभनगर और सरोना केंद्र में भी पाठ पूरे उल्लास के साथ किया गया।

आध्यात्मिक समिति की सृष्टि दंडवते ने बताया कि दिव्यांग बालिका विकास गृह में सत्यनारायण पूजा के पाठ सभी ने हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ भी किया। वहीं वल्लभनगर केंद्र की महिलाओं ने शनिवार शाम संत ज्ञानेश्वर विद्यालय प्रांगण में एकत्रित होकर रामरक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान मानसी विठाळकर, शुभांगी आपटे, अर्चना जतकर, कांचन पुसदकर, सुहानी पवार, हर्षा, प्रतिमा आगलावे, वैभवी चौधरी, शुभदा अगस्ती, वंदना पाटील. अमरजीत, लीना केळकर, शोभा पाटील, सुलु हर्डीकर, श्वेता, मंजूषा चिलमवार, रोहिणी चिमोटे, उषा काकडे, सुवर्णा कस्तुरे, नंदा अगस्ती, सीमा तिघा , सुरेखा मेघावाले, आशा बरेवार , प्राजक्ता पुसदकर, अनीता उमाडे, प्रीती केसकर, विजया चौधरी और शोभा ठाडा उपस्थित रहीं।

आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि इसी तरह सरोना केंद्र की महिलाओं ने भी पाठ किया। जिसमें मीना नवरे, प्रियंका बोरवनकर, विभा पांडे, अलका मोडक, आरती ठोबरे, मीना परदेशी, प्रविणा बापट, रमा धारवडकर, दीपा वैद्य, वनजा भावे, नेहा किल्लैदार, डा. अलका गोळे, शुभा गोवर्धन, सुरेखा पाठक, अनुश्री मोखरीवाले उपस्थित थीं।
दिवाली मिलन में ताश के पत्तों के खेलों का सभी ने लिया आनंद
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के वल्लभ नगर केंद्र की महिलाओं ने शनिवार, 15 सितंबर को संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में दिवाली मिलन उत्सव का आयोजन किया। शनिवार और एकादशी होने के कारण महिलाओं ने सर्वप्रथम रामरक्षा स्त्रोत और हनुमान चालीसा का पाठ किया और ताश के पत्तों का मनोरंजक खेलों का भी आनंद लिया।
महिला सह प्रमुख अपर्णा देखमुख ने बताया कि दिवाली उत्सव हो और ताश के खेल न हो ऐसा हो ही नहीं सकता है। इसलिए इस बार केंद्र की महिलाओं ने ताश के विभिन्न खेलों का आनंद लिया। कई महिलाओं के लिए कई खेल बिल्कुल नए थे, लेकिन सभी ने इसका भरपूर आनंद उठाया। ताश के खेल में प्रथम आशा द्वितीय कंचन, व तृतीय अमरजीत रहीं। फिर सभी ने स्वादिष्ट नाश्ते का आनंद लिया।

इस अवसर पर मानसी विठाळकर, शुभांगी आपटे, अर्चना जतकर, कांचन पुसदकर, सुहानी पवार, हर्षा, प्रतिमा आगलावे, वैभवी चौधरी, शुभदा अगस्ती, वंदना पाटील. अमरजीत, लीना केळकर, शोभा पाटील, सुलु हर्डीकर, श्वेता, मंजूषा चिलमवार, रोहिणी चिमोटे, उषा काकडे, सुवर्णा कस्तुरे, नंदा अगस्ती, सीमा तिघा , सुरेखा मेघावाले, आशा बरेवार , प्राजक्ता पुसदकर, अनीता उमाडे, प्रीती केसकर, विजया चौधरी और शोभा ठाडा उपस्थित रहीं।
रावत नाचा महोत्सव : पारंपरिक वेशभूषा में राउत नाचा दलों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री साय
रायपुर। बिलासपुर के लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में 48वें रावत नाचा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। नाचा महोत्सव में शामिल होने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय लाल बहादुर शास्त्री शाला प्रांगण पहुंचे। आगमन पर महोत्सव के संरक्षक कालीचरण यादव एवं समिति के पदाधिकारियों द्वारा पुष्पहार पहनाकर मुख्यमंत्री का आत्मीय स्वागत किया गया। इसके पश्चात मुख्यमंत्री एवं अतिथियों ने भगवान श्रीकृष्ण के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। साय पारंपरिक वेशभूषा में राउत नाचा दलों के बीच पहुंचे और ढोल–नगाड़ों की गूंजती धुन पर उनके साथ झूमकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने नर्तक दलों की मनमोहक प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि रावत नाचा जैसी सांस्कृतिक धरोहर आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी और हमारी परंपराओं को सदैव जीवित रखेगी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पारंपरिक रावत नाचा वेशभूषा में मंच पर पहुंचे और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि “यदुवंशी समाज वह समाज है, जहां प्रभु श्रीकृष्ण ने जन्म लिया। छत्तीसगढ़ की नृत्य–गायन परंपरा हमारी सांस्कृतिक समृद्धि और एकता का सजीव प्रतीक है।” मुख्यमंत्री ने ‘तेल फूल में लइका बाढ़े…’ दोहा गाकर यदुवंशी समाज एवं नर्तन दलों को आशीर्वचन भी दिया।
केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने रावत नाचा को यदुवंशी समाज के शौर्य, संस्कृति और कला का अप्रतिम प्रदर्शन बताया तथा मंच से दोहे गाकर सभी को शुभकामनाएँ दीं। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि “48 वर्षों से इस गौरवशाली परंपरा को बनाए रखना समाज की एकजुटता, अनुशासन और सांस्कृतिक गर्व का प्रमाण है।” उन्होंने समस्त समाज एवं नर्तक दलों को शुभकामनाएँ दीं।
बिलासपुर विधायक अमर अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि “रावत नाचा बिलासपुर की 48 वर्षों की गौरवशाली सांस्कृतिक धरोहर है, जिसका संरक्षण समिति द्वारा निरंतर किया जा रहा है। समाज के मंगल और सद्भाव के लिए यदि कोई समाज सतत प्रयासरत है, तो वह यादव समाज है।” उन्होंने सभी को महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा कि “बिलासा की पावन धरा पर रावत नाचा महोत्सव का आयोजन होना सौभाग्य की बात है। यदुवंशी समाज के लोग घर–घर जाकर सर्व समाज की मंगलकामना करते हैं।” उन्होंने कार्यक्रम में शामिल होने हेतु मुख्यमंत्री का आभार जताया।
महोत्सव के संरक्षक डॉ. कालीचरण यादव ने स्वागत उद्बोधन देते हुए रावत नाचा की गौरवशाली परंपरा पर प्रकाश डाला और कहा कि पिछले 47 वर्षों से रावत नाचा महोत्सव यदुवंशी समाज की संस्कृति, सम्मान और सांस्कृतिक पहचान का मजबूत प्रतीक बना हुआ है।
पुनर्निमित दिव्यांग बालिका विकास गृह की विधिवत पूजा
0- महाराष्ट्र मंडल ने बहुप्रतीक्षित आपुलकी प्रकल्प की ओर बढ़ाया एक और कदम
उत्पना एकादशी पर आध्यात्मिक समिति ने किया विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से प्रत्येक एकादशी को होने वाला विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ इस उत्पना एकादशी को भी पूरे उत्साह के साथ जारी रहा। आध्यात्मिक समिति के सदस्यों ने शनिवार को सुबह 7 बजे आनलाइन मोड पर विष्ण सहस्त्रना का पाठ किया।
आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल पक्ष की उत्पन्ना एकादशी आज पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जा रही है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने मुर दानव का वध कर धर्म की स्थापना की थी. यह एकादशी व्रत मनुष्य को पापों से मुक्त करने वाली और इच्छाओं को पूर्ण करने वाली मानी जाती है. दिनभर व्रत, ध्यान, कथा-श्रवण और शाम को भगवान विष्णु की विशेष पूजा का अत्यंत शुभ फल बताया गया है। उत्पन्ना एकादशी का दूसरा नाम उत्पत्ति एकादशी है, क्योंकि इसी दिन देवी एकादशी की उत्पत्ति हुई थी। इसे मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष एकादशी भी कहा जाता है, क्योंकि यह इसी महीने और पक्ष में आती है।
काले ने आगे बताया कि आज हुए पाठ में रायपुर सहित नागपुर से भी लोग पाठ के लिए जुड़े थे। विष्णु सहस्त्रनाम, भगवान विष्णु के 1000 नामों का पाठ है। आज हुए पाठ में अभिषेक शुक्ला, अलखनंदा, अनघा करकशे, अंजली खेर, अंजली नलगुंडवार, अनुपमा नलगुंडवार, अर्चना जतकर, चारूशीला देव, दीपाली अलोनी, दीपांजलि भालेराव, मंजरी अलोनी, रोहिनी नेने, संध्या खंगन, शुभदा अगस्ती, श्यामल जोशी जुड़े थे।
नि:स्वार्थ लोक कल्याण के कार्य ही समाजसेवाः सुनील


किसानों की मेहनत का सम्मान हमारा संकल्पः मुख्यमंत्री
आज बदला बदला रहा संत ज्ञानेश्वर स्कूल की असेंबली का नजारा
- छोटे बच्चे फैंसी ड्रेस में पहुंचे तो बड़े बच्चों की असेंबली शिक्षकों ने कराई
रायपुर। 14 नवंबर यानी बाल दिवस यह दिन पूरी तरह बच्चों को समर्पित रहता है। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में आज बाल दिवस धूमधाम के साथ मनाया गया। छोटे-छोटे बच्चों के लिए जहां फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता कराई गई वहीं दूसरी ओर प्राइमरी के बच्चों के लिए शिक्षिकाओं ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं दूसरी ओर हाई और हायर सेकंडरी के बच्चों की असेंबली शिक्षिकों ने संचालित की। इस अवसर पर स्कूल के वरिष्ठ शिक्षक अखिल खरे, सुनिधि रोकड़े और तृप्ति अग्रिहोत्री ने चाचा नेहरू के छायाचित्र पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम की शुरूआत की।

प्री प्राइमरी की इंचार्ज अस्मिता कुसरे ने छोटे-छोटे बच्चों के लिए फैंसी ड्रेस का आयोजन किया। कार्यक्रम का संचालन सुरेखा नायक मैडम ने किया। स्पर्धा में जज की भूमिका में शिक्षिका श्वेता चौधरी और स्नेहा महाजन नजर आई। बच्चे विभिन्न प्रकार की वेशभूषा में आए थे। परिधि पटेल और तोषित साहू ने जंक फूड बनकर बहुत अच्छा संदेश दिया कि हमे जंक फूड छोड़कर हेल्थी फूड खाना चाहिए। कक्षा पीपी - 2 की आरुषि सेन छत्तीसगढ़ महतारी बनकर आई। मोबाइल फोन, रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह, तितली सभी मनमोहक वेशभूषा में बच्चे पहुंचे थे। हार्दिका बोबर्डे और शिखा गुप्ता मैडम ने बच्चों के लिए सुंदर डांस प्रस्तुत किया।

प्राइमरी की शिक्षिकाओं ने बाल दिवस पर असेंबली का आयोजन किया। जिसका संचालन विनीता सुंदरानी और स्नेहा महाजन ने किया। प्रीति मैडम ने बच्चों को बाल दिवस की जानकारी दी। सुदेवी बिस्वास ने सामान्य ज्ञान के प्रश्न पूछे और उत्तर देने पर बच्चों को पुरस्कृत किया। वंदना यादव और श्वेता चौधरी मैडम ने बच्चों के लिए गीत गाए। शिक्षक विवेक सिंग राजपूत ने "ये हौसला " गीत गाया। शिक्षिका ज्योति साहू, किरण तिवस्कर, विजयलक्ष्मी सिन्हा, अंजलि मैडम, प्रीति तिवारी, विनीता सुंदरानी, स्नेहा महाजन, श्वेता चौधरी और रेणुका शुक्ला ने नृत्य पेश किया गया।

मीडिल और हाई स्कूल के बच्चों के लिए असेंबली का संचालन रेड हाउस की शिक्षिकाओं द्वारा किया गया। सभी टीचर्स लाल रंग की साड़ी में पहुंची थी। प्रार्थना सभा का संचालन निदा सुल्तान मैडम ने किया। बच्चों को शपथ शेफाली ठाकुर मैडम ने दिलाई। समाचार और सुविचार दीपांविता सेन और आशा जैन मैडम ने किया। आराधना लाल मैडम के द्वारा बाल दिवस पर सुंदर भाषण की प्रस्तुति की गई। इसके बाद अभिजीत सर ने सुंदर कविता पाठ किया। अंत में सभी शिक्षिकाओं के द्वारा बच्चे मन के सच्चे गीत गाया गया। ।नेहरू जी की वेशभूषा में रोशन सिंह राजपूत पहुंचे थे।