दिव्य महाराष्ट्र मंडल
राजगुरु के बलिदान ने स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने की प्रेरणा दी: दंडवते
तीजहारिन उत्सव में रोहिणीपुरम केंद्र ने जीता सेकंड प्राइज
रायपुर। महाराज अग्रसेन इंटरनेशनल कालेज में 23 अगस्त को ‘तीजहारिन’ तीजा पर्व सांस्कृतिक मिलन 2025 का आयोजन किया गया। जिसमें सभी समाजों की महिला संगठनों ने ग्रुप और सोलो डांस प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में महाराष्ट्र मंडल की रोहिणीपुरम महिला केंद्र की टीम ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया।
महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि तीजा पर्व सांस्कृतिक मिलन समिति की ओर से आयोजित ‘तीजहारिन’ में महाराष्ट्र मंडल के साथ कई समाज की महिलाओं ने सुंदर और मनोहारी नृत्यों की प्रस्तुति दी। रोहिणीपुरम केंद्र की स्मिता बल्की, प्राची जोशी और रीतु शर्मा ने सावन के रिमिक्स गीतों पर सुंदर नृत्य की प्रस्तुति दी। प्रतियोगिता में इन्हें द्वितीय स्थान मिला। रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा और अन्य अतिथियों ने टीम को मोमेंटो और आठ हजार रुपये की नकद पुरस्कार राशि प्रदान की।
तान्हा पोलाः बच्चों ने पारंपरिक बर्तनों में परोसे व्यंजन
0- सजे- धजे लकड़ी और मिट्टी के बैलों को लेकर पहुंचे प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र के साथ आकर्षक उपहार देकर किया गया प्रोत्साहित




संत ज्ञानेश्वर स्कूल के बच्चों ने फिर बजाया जीत का डंका.. साइंस मॉडल काम्पीटिशन में जीता खिताब



डंगनिया केंद्र के हरलालिका तीज में नमिता बनीं सावन क्वीन
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के डंगनिया केंद्र की महिलाओं ने दिलचस्प खेलों के साथ हरतालिका तीज महोत्सव आयोजित किया। डंगनिया केंद्र की चुड़ी को सेफ्टी पिन से उठाने की प्रतियोगिता में भी नमिता शेष प्रतिभागी महिलाओं से आगे रहते हुए एक बार फिर विजेता रहीं और सावन क्वीन चुनी गई।
डंगनिया केंद्र का बीसी और हरतालिका तीज का प्रोग्राम चौबे कॉलोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल भवन में धूमधाम से मनाया गया। अनुभा जाऊलकर ने बताया कि कार्यक्रम में केंद्र की सभी महिलाएं ग्रीन ड्रेसकोड थीम पर सजकर आईं थीं। महिला सभासदों के बीच सावन पर आधारित सावन क्वीन सुनिश्चित करने के लिए रेंडम गेम खेला गया। इसमें सभी प्रतिभागियों को एक- एक चीट उठानी थी। इस में सखी निवास प्रभारी नमिता शेष विजेता रहीं और सावन क्वीन घोषित की गईं।
इधर चुड़ी को सेफ्टी पिन से उठाने के खेल में भी नमिता शेष विजेता रहीं। उन्हें बकायदा पुरस्कृत भी किया गया। इस प्रोग्राम में सहभागी रहीं जया भावे, अंजलि काले, माधुरी इंचुलकर, रंजना राजिमवाले, श्रद्धा मरघड़े, रश्मि डांगे, विजया भाले, अनुजा महाड़िक, अपर्णा दबड़गांव, प्रणिता इंचुलकर, संध्या अनिल, सृष्टि दंडवते, प्रियंका राजपूत, माधवी गिरहे, शैला गायधनी, अनामिका महाजन सहित बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।
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जानिए... महाराष्ट्र मंडल की सोलह श्रृंगार स्पर्धा पूछे रोचक सवालों और उसके जवाबों को
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के अवंती विहार, देवेंद्र नगर, शंकर नगर व सड्डू- मोवा केंद्र की ओर से आयोजित किए गए सावन उत्सव और सोलह श्रृंगार प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को तीन राउंड से गुजरना था। पहला राउंड कैटवाक का था। वहीं दूसरा राउंड अपना परिचय देने का था। तीसरा और रोचक राउंड जजों द्वारा पूछे गए सवाल थे। जो महिलाओं के सोलह श्रृंगार से जुड़े थे। प्रतिभागियों ने अपने-अपने स्तर पर इनके जवाब भी दिए, लेकिन आयोजन टीम ने इन उत्तरों को दिव्य महाराष्ट्र मंडल के साथ सांझा किया। ताकि दर्शक दीर्घा में बैठी महिलाएं जिनके मन में इन सवालों को जानने की इच्छा हो वह जान सके। बतादें कि प्रतियोगिता के लिए इन प्रश्नों को अवंती विहार महिला केंद्र की सदस्या जागृति भाखरे, शुभदा चौधरी और पूजा भंडारी ने मिलकर तैयार किया है।
प्रश्नः बिंदी क्यों लगाते हैं?
उत्तरः बिंदी दोनों भौंहो के बीच आज्ञाचक्र को सक्रिय करती है। बिंदी प्रेम, सौभाग्य और शुभता का प्रतीक है जो देवी शक्ति से जुडी है। यह ऊर्जा को केंद्रित करने में मदद करती है। यह विवाहित महिलाओं की पहचान है और पति की लंबी आयु की कामना से जुड़ी है। महिलाओं के सोलह श्रृंगार का प्रमुख अंग है।
प्रश्नः गजरा श्रृंगार में क्या महत्व रखता है?
उत्तरः गजरे की खुशबू से मन को ताजगी और ऊर्जा मिलती है। मन प्रसन्न और शांत रहता है। यह दुल्हन के श्रृंगार का अभिन्न अंग है जो सुंदरता में वृद्धि करता है। यह शुभता का प्रतीक है और पूजा एवं उत्सवों में पहना जाता है। यह भारतीय संस्कृति एवं परंपरा में विशेष महत्व रखता है।
प्रश्नः मंगलसूत्र का क्या महत्व हैं और इसे क्यों पहना जाता है?
उत्तरः मंगलसूत्र स्त्री के सौभाग्य का प्रतीक है, इसका हिंदू विवाद में बहुत महत्व है। मंगलसूत्र पहनना हिंदू विवाह विधि का प्रमुख चरण है। यह वैवाहिक जीवन के प्रेम, समर्पण को दर्शाता है। यह विवाहित महिलाओं के लिए एक सुरक्षात्मक आवरण है और प्रेम बंधन का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रश्नः करधनी या कमरबंध क्यों पहनते है?
उत्तरः करधनी या कमरबंध महिलाओं द्वारा कमर की सुंदरता बढ़ाने और पारंपरिक श्रृंगार हेतु पहना जाता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी इसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यह रीढ़ की हड्डी और कमर दर्द से राहत देती है। नाभि खिसकने से बचाती है। यह नकारात्मक ऊर्जा को सोखकर सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है। ऐसी मान्यता है कि यह राहू और केतु के अशुभ प्रभावों को कम करती है।
प्रश्नः पायल क्यों पहनी जातीहै, इसका क्या महत्व है?
उत्तरः पायल सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक है। पाल में लगी घुंघुरूओं की आवास एक सुखद ध्वनि पैदा करती है जो सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। पायल पहनने से पैरों के कुछ बिंदूओं पर दवाब पड़ता है जो एक्यूप्रेशर के सिद्धांत पर कार्य करते है। चांदी धातु में शीतलता का गुण होता है जो शरीर के तापमान को नियंत्रित करता है।
प्रश्नः नथ पहनने के फायदे और महत्व बताइए?
उत्तरः नथ के श्रृंगार से महिलाओं के मुख का सौंदर्य बढ़ता है। नथ सौभाग्य का प्रतीक है, इसे पहनने से एक्यूपंचर का फायदा भी मिलता है जिससे कफ, सिरदर्द और हार्मोनल असंतुलन से राहत मिलती है। नाक छिदवाने से रक्त संचार बेहतर होता है। नाक का छल्ला विशेष रुप से बायीं ओर की जीवन शक्ति ऊर्जा को बढ़ाता है।
प्रश्नः पैरों में बिछिया क्यों पहनी जाती हैं?
उत्तरः बिछिया महिलाओं के सौभाग्य का प्रतीक है, इसे पहनने से मां लक्ष्मी प्रसन्न होती है और घर में समृद्धि आती है। पैर की दूसरी अंगुली में बिछिया पहनने से रक्त संचार में सुधार होता है और शरीर के निचले अंगों की नसों और मांसपेशियों को मजबूती मिलती है। चांदी की बिछिया शरीर को शीतलता प्रदान करती है और शरीर के तापमान को नियंत्रित करती है।
प्रश्नः कान छिदवाने का क्या महत्व है और कानों में बाली क्यों पहनी जाती है?
उत्तरः कान छिदवाने से सुनने की क्षमता में सुधार होता है, आंख की रोशनी बढ़ती है। मस्तिष्क का विकास होता है और मानसिक शांति मिलती है। कान की बाली न केवल महिलाओं का सौन्दर्य बढ़ाती है बल्कि उन्हें एक्यूपंचर का फायदा भी प्रदान करती है। कान छिदवाना और बाली पहनना हमारी संस्कृति में बहुत महत्व रखता है।
प्रश्नः चूड़ियां पहनने का महत्व और फायदा क्या है?
उत्तरः चूड़िया सोलह श्रृंगार का अभिन्न अंग है। चूड़ियों की खनक सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। चूड़ियां कलाई पर धर्षण करके एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स पर दवाब डालती है, जिससे रक्त संचार बढ़ता है और शरीर स्वस्थ एवं ऊर्जावान रहता है। चूड़ियों की मधुर खनक घर के वातावरण में प्रसन्नता लाती है।
प्रश्नः अंगूठी का क्या महत्व है?
उत्तरः अंगूंठी प्रेम, प्रतिबद्धता और सुरक्षा का प्रतीक मानी जाती है। अंगूठी का गोलाकार विवाहित जोड़े के अटूट बंधन को दर्शाता है। ज्योतिष एवं कुछ धार्मिक परंपराओं में अंगूठी को विशेष महत्व दिया गया है। चांदी की अंगूठी शरीर के तापमान को संतुलित और सोने की अंगूठी रक्त संचार को बेहतर करती है।
प्रश्नः महादेव को चातुर्मास शिरोमणि क्यों कहा जाता है?
उत्तरः आषाढ़ी एकादशी से कार्तिक एकादशी का समय चार्तुमास कहलाता है। इस अवधि में भगवान विष्णु के योग निद्रा में जाने के बाद भगवान शिव ही सृष्टि का संचालन करते है। इसलिए उन्हें चातुर्मास शिरोमणि कहा जाताहै। इस दौरान शिव की पूजा अराधना का विशेष महत्व है।
प्रश्नः शिव धनुष का नाम क्या है, इसे किसने और कब तोड़ा।
उत्तरः शिव धनुष का नाम पिनाक है, इसे सीता स्वयंवर में प्रभुश्रीराम ने तोड़ा था।
प्रश्नः हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है?
उत्तरः हरियाली तीज भगवान शिव और देवी पार्वती के पुर्नमिलन के उपलक्ष्य पर मनाई जाती है।
प्रश्नः हरियाली तीज कब आती है और इसमें हरे रंग का क्या महत्व है?
उत्तरः हरियाली तीज श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आती है। यह पर्व जीवन में ऊर्जा और ताजगी लाने का प्रतीक है। और हरा रंग जीवन में ताजगी, ऊर्जा, शांति, प्रेम, उर्वरता, सौभाग्य और समृद्धि का रंग माना जाता है। इस महीने में प्रकृति चारों और हरियाली से भर जाती है, हरा रंग स्वस्थ्य वर्धक और शिव को प्रिय है।
प्रश्नः मृत्युंजय मंत्र के रचियता कौन है?
उत्तरः मृत्युंजय मंत्र के रचियता महर्षि मार्कंडेय है।
प्रश्नः श्रावण मास में आने वाले व्रत और त्योहारों के नाम?
उत्तरः हरियाली तीज, मंगलागौर, नागपंचमी, खमरछठ, रक्षाबंधन, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, सावन सोमवार, गणेश चतुर्थी, भाई पांचे, कमिका एकादशी, मौना पंचमी और शिवरात्रि शामिल है।
प्रश्नः शिवजी के 10 नाम बताइए?
उत्तरः महादेव, शंकर, महेश, नटराज, भोलनाथ, रूद्र, नीलकंठ, महाकाल, बैद्यनाथ, गंगाधर, आशुतोष, गौरी पति, जटाधर, त्र्यंबक, भूतनाथ और सदाशिव।
प्रश्नः माता पार्वती के 10 नाम बताइए?
उत्तरः उमा, गौरी, भवानी, गिरजा, शैलजा, अंबिका, रूद्राणी, शिवानी, शांभवी,आद्या, दुर्गा, चित्रा, भगवती, कल्याणी और प्रियंवदा।
प्रश्नः शिवजी के गणों के नाम बताइए?
उत्तरः नंदी, भैरव, वीरभद्र, मणिभद्र, श्रृंगी, जय, विजय, गौकर्ण, घंटाकर्ण, शैल, पिशाच, दैत्य और नाग-नागिन।
प्रश्नः भैरव के बारे में क्या जानते है।
उत्तरः भैरव को शिव का उग्र रूप माना जाता है। उन्हें शिव मंदिरों का रक्षक भी कहा जाता है।
प्रश्नः सोलह श्रृंगार की सामग्री के नाम बताइए?
उत्तरः मांगटीका, बिंदी, सिंदूर, काजल, झूमके, मंगलसूत्र, गजरा, नथ, बाजूबंद, कमरबंद, चूड़ियां, अंगूठी, बिछिया, पायल, मेहंदी और वस्त्र।
प्रश्नः पंचोपचार पूजा की सामग्री क्या-क्या है।
उत्तरः गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवैद्य।
महाराष्ट्र मंडल में तीज महोत्सव का जोशीला आयोजन... रिमिक्स गीतों पर थिरकीं महिलाएं, सोनल बनीं सावन साम्राज्ञी







बेरोजगारी शब्द संस्कृत के डिक्शनरी में नहीं पाई जातीः डॉ मंजरी बक्षी
संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में मनाया गया विश्व उद्यमिता दिवस
रायपुर। बेरोजगारी शब्द संस्कृत के डिक्शनरी में नहीं पाई जाती है। नौकरी शब्द की सही समझ हमें नहीं है। सरकार नौकरी देगी तभी हम नौकरी करेंगे, इस समझ से बाहर आना होगा। उद्यमिता स्वरोजगार स्वावलंबन औद्योगीकरण को अपनाना होगा। अपने आसपास की समस्याओं को देखकर उसको हल करने की सोच स्टार्टअप में रूपांतरित होती है। उक्ताशय के विचार स्वदेशी जागरण मंच की प्रांत विचार विभाग प्रमुख डॉ मंजरी बक्षी ने विश्व उद्यमिता दिवस पर 21 अगस्त को संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम का आयोजन संत ज्ञानेश्वर विद्यालय, स्वदेशी जागरण मंच एवं स्वावलंबी भारत अभियान की ओर से किया गया।
डॉ बक्षी ने देश के विकास में युवा शक्ति की भागीदारी पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि बेरोजगारी एक विकराल समस्या बनते जा रही है। स्वावलंबी भारत अभियान का उद्देश्य वर्ष 2030 तक बेरोजगारी मुक्त, गरीबी मुक्त एवं समृद्धि युक्त भारत का निर्माण 2030 तक करना है।
डॉ बक्षी ने आगे कहा कि भारत की आर्थिक स्थिति व रोजगार का सिंहावलोकन करना जरूरी है। पैसों की कमी से कोई भी दुखी या तनाव में ना रह जाए यह युवाओं की जिम्मेदारी है अंत में उन्होंने "स्वदेशी अपनाओ विदेशी भगाओ" का नारा एवं स्वदेशी विदेशी सामानों की लिस्ट बच्चों में और शिक्षकों में वितरित की।
कार्यक्रम में प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने सूतमाला से डॉ बक्षी और स्वदेशी जागरण मंच के चिराग यादव का सम्मान किया। प्राचार्य ने अपने संक्षिप्त उद्बोधन में बताया कि भारत एक समृद्ध शैली देश तथा उन्नत धार्मिक व प्रशासनिक आध्यात्मिक देश था। शिक्षिका आराधना लाल भी कार्यक्रम में उपस्थिति रही तथा उन्होंने विश्वास दिलाया कि हमारे विद्यालय के बच्चे स्वदेशी आंदोलन व जागरण को आगे बढ़ाने में मदद करेंगे ,कार्यक्रम का संचालन शिक्षिका 'निदा सुल्तान' ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन तृप्ति अग्निहोत्री ने दिया।
कोटा- बूढापारा केंद्र की महिलाओं ने मनाया कृष्ण जन्माष्टमी

महिलाओं के प्रति शिवाजी का सम्मान अनुकरणीय: पात्रीकर
सामूहिक मंगलागौर उद्यापन... महाराष्ट्र मंडल में उत्सव का माहौल






एकादशी में आध्यात्मिक समिति ने किया विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से वर्ष भर प्रत्येक एकादशी को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया जाता है। यह क्रम मंगलवार, 19 अगस्त को भी उत्साह के साथ आनलाइन मोड में किया गया। पाठ के दौरान राजधानी रायपुर सहित अन्य जिलों और नागपुर से टीम पाठ के लिए जुड़ी थी। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ सुबह 6.15 बजे शुरू हुआ।
आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि आज अजा एकादशी पर आनलाइन मोड पर विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ किया गया। विष्णु सहस्त्रनाम, भगवान विष्णु के 1000 नामों का पाठ है। इसे "विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र" भी कहा जाता है। यह एक शक्तिशाली स्तोत्र है जिसका पाठ करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-शांति आती है।
धार्मिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और नियम से व्रत रखने तथा श्रीहरि का स्मरण करने से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस वर्ष अजा एकादशी का व्रत 19 अगस्त 2025, मंगलवार को रखा जाएगा। इस दिन उपवास और पूजन करने के साथ-साथ अजा एकादशी की कथा का पाठ करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
आज विष्णु सहस्त्रनाम पाठ में श्यामल जोशी, जयश्री ढेकने, हेमा पराड़कर, मंजरी आलोनी, रोहिणी नेने, अर्चना जटकर, अलकनंदा नारद, आस्था काले, अंजलि नलगुंड़वार, आरती ठोंबरे शामिल हुई। पाठ मंजूषा मारकले ने कराया।
संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में आज संस्कृत में हुई असेंबली.. बच्चों ने संस्कृत में सुनाई कविता
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में मंगलवार 19 अगस्त को संस्कृत दिवस मनाया गया। बतादें कि संस्कृत दिवस श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जो आमतौर पर रक्षाबंधन के दिन होता है। संत ज्ञानेश्वर स्कूल में आज संस्कृत दिवस मनाया गया। इस अवसर पर बच्चों ने संस्कृत में असेंबली कंडट किया।
इस अवसर पर ग्रीन हाउस इंचार्ज किरण तिवास्कर ने बच्चों को संस्कृत का महत्व बताया। उन्होंने बताया कि कि संस्कृत में "दिन" को "दिवसः" या "दिनम्" कहते हैं। "दिवस" शब्द का उपयोग दिन के समय को दर्शाने के लिए किया जाता है, जबकि "दिनम्" शब्द का उपयोग सामान्य रूप से दिन के लिए किया जाता है। संस्कृत में न केवल हिंदू, बौद्ध, जैन आदि के प्राचीन धार्मिक ग्रंथ लिखित हैं, बल्कि इसमें साहित्य, संस्कृति व ज्ञान-विज्ञान परक लगभग तीन करोड़ पांडुलिपियां मौजूद हैं। यह संख्या ग्रीक और लैटिन की पांडुलिपियों की कुल संख्या के सौ गुना से भी ज्यादा है। संस्कृत जिसे देववाणी भी कहते हैं, विश्व की प्राचीनतम लिखित भाषा है।
शिक्षिका किरण ने बताया कि आज असेंबली में बच्चों ने संस्कृत में प्लेज बोला। कक्षा पांचवी की छात्रा लावण्या गिरीभट्ट ने संस्कृत में अपने विचार व्यक्त किए। कक्षा पांचवी की ही छात्रा रुचि साहू ने और लावण्या गिरीभट्ट ने मिलकर संस्कृत में असेंबली कराई। उदित जैन ने संस्कृत में कविता सुनाई।
कोटा केंद्र की महिलाओं ने मनाया कृष्ण जन्माष्टमी और गोपाल काला
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की कोटा महिला केंद्र की महिलाओं ने कृष्ण जन्माष्टमी उत्सव धूमधाम से मनाया। इस अवसर पर कोटा निवास कुसुम वसंत मालेवर के निवास पर उत्सव सेलिब्रेट किया। इस अवसर पर हिंदी, मराठी भजनों के साथ गोपियों के नृत्य और विभिन्न खेल खेले गए। अंत में सभी को महाप्रसाद वितरित किया गया।
युवा समिति की प्रमुख डा. शुचिता देशमुख ने बताया कि गोपाल कला एक ऐसा त्योहार है जो भगवान कृष्ण के बचपन के चंचल और शरारती स्वभाव का जश्न मनाता है। उस कीर्तन के बाद गोपालकला का भोग लगाया जाता है। आज हुए कार्यक्रम में माधुरी इंगोले, वैशाली पुरोहित, वंदना कालमेघ, कुसुम मालेवर. तेजल चोपकर, प्रीति यादव, सुलक्षणा शेंडे, मोना भिड़े, आरती दीवाते और साक्षी परमानंद उपस्थित रहीं।
महाराष्ट्र मंडळ में सामूहिक मंगळागौरी व्रत का उद्यापन 19 अगस्त को
महाराष्ट्र मंडल के शंकर नगर केंद्र ने मनाया तीज आवरण.... श्वेता बनी सावन क्वीन
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के शंकर नगर महिला केंद्र की सदस्यों ने रविवार 17 अगस्त को तीज आवरण का आयोजन किया। कार्यक्रम में पहुंची सभी महिलाओं का स्वागत हल्दी-कूंकू और फूलों की वर्षा के साथ किया गया। आवरण का शुभारंभ केंद्र की वरिष्ठ सदस्या दीप पुष्पा जावळेकर, लता नांदेड़कर, पुष्पा पिंपले, शुभदा गिझरे और आशा पवार ने दीप प्रज्जवलन के साथ किया। इसके उपरांत आवरण ग्रुप की रेणुका पुराणिक, अर्चना भंडारकर, आरती पोतदार, विशाखा दुबे, अदिती जोशी, आशा पवार और लता नांदेड़कर ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत किया।

शंकर नगर स्थित बाल वाचनालय की प्रभारी रेणुका पुराणिक ने बताया कि इस अवसर पर महिलाओं ने सुंदर नृत्य भी प्रस्तुत किए। आरती और रेणुका के नृत्य को सभी ने सराहा। जिसके बाद सावन क्वीन के चयन के लिए मजेदार गेम खेला गया। जिसमें पांच-पांच महिलाओं के अलग-अलग ग्रुप बनाए गए। सबको हाउजी के काउंटर वितरित किए गए। जिनके नंबर एक से 10 थे, उनको पहले पांच को बुलाया गया। इस तरह हर ग्रुप से एक सावन क्वीन सलेक्ट हुई। अब हमारे पास सात सावन क्वीन थी जो सेमी फाइनल में पहुंची। जिसमें श्वेता डब्ली, प्रतिमा ठाकुर, विनया कर्दळे, पुष्पा जावळेकर, हर्षदा चिटुकले, मनीषा भंडारकर और सपना शामिल थी।

रेणुका पुराणिक ने आगे बताया कि इन सात सावन क्वीन से प्रत्येक से श्रावण मास, कृष्ण जन्माष्टमी, नागपंचमी, नारळी पौर्णिमा और पोळा से संबंधित तीन-तीन प्रश्न पूछे गए। जिसने ज्यादा प्रश्न के उत्तर दिए उन तीन महिलाओं ने फायनल में अपना स्थान निश्चित किया। फिर तीनों फायनलिस्ट विनया कर्दळे, पुष्पा जावळेकर और श्वेता डबली से सिर्फ एक प्रश्न पूछा गया। जिसने उस प्रश्न का सही उत्तर सबसे पहले दिया उसे सावन क्वीन घोषित किया गया। जिसमें श्वेता डबली विजेता रही और सावन क्वीन चुनी गई। इस गेम को छोटे से लेकर वरिष्ठ ने आनंद लिया।

इसके बाद एक और गेम खेला गया। जिसमें सभी महिलाओं को पारंपरिक गहनों को मराठी भाषा में लिखना था, जिसमे माधुरी हुद्दार 16 नाम लिखकर प्रथम स्थान पर रही। पुष्पा जावडेकर 13 नाम लिखकर द्वितीय स्थान पर रही। इस अवसर पर अर्चना भंडारकर ने एक सुंदर गीत प्रस्तुत किया। रेणुका पुराणिक और आरती पोतदार के नृत्य ने सभी का मन मोह लिया। अंत में सभी ने महाराष्ट्र मंडल से आये हुए लजीज व्यंजन का स्वाद लिया। सभी गतिविधियों को विशाखा दुबे ने अपने कैमरे में कैद किया।