छत्तीसगढ़
मुख्यमंत्री के प्रयास से कोतबा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए 56 पदों की मिली स्वीकृति
रायपुर : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जशपुर जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। पत्थलगांव विकास खंड के कोतबा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को उन्नयन करके सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया है। मुख्यमंत्री ने कोतबा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के निर्माण करने के लिए 4 करोड़ 37 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति भी दे दी है। कोतबा में लोगों तक बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 56 पद स्वीकृत किए हैं। इनमें अस्पताल अधीक्षक, सर्जन, मेडिकल विशेषज्ञ, स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, दंत विशेषज्ञ, चिकित्सा अधिकारी, नर्सिंग सिस्टर, लैब टेक्नीशियन, ओटी टेक्नीशियन, स्टाप नर्स, लेखापाल, फार्मासिस्ट, सहायक ग्रेड 3, ड्रेसर, वार्ड बॉय, आया और भृतय के पद स्वीकृत किया गया है। शीघ्र ही उनकी पदस्थापना की जाएगी जिसमें लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराया जा सके।
सांप का कहर: एक ही रात घर में घुसकर जहरीले नाग ने दो लोगों की ली जान, युवती व बच्चे की हुई मौत
यह घटना जहां सर्पदंश की भयावहता को दर्शाती है, वहीं ग्रामीण इलाकों में जागरूकता, समय पर एंटी-स्नेक वेनम और प्राथमिक उपचार की कमी की ओर भी इशारा करती है। ग्रामीणों की मांग है कि ऐसे क्षेत्रों में सर्पदंश से बचाव व इलाज के लिए विशेष व्यवस्था की जाए।
सेवा अवधि, पात्रता और अंतिम वेतन पेंशन का आधारः ठाकुर
रायपुर। डॉ राधाबाई शासकीय नवीन कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में कार्यालयीन प्रबंधन पर दस दिवसीय एफडीपी प्रोग्राम के अंतर्गत चौथे दिन पेंशन विषय पर अर्जुन सिंह ठाकुर सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक वित्त का उदबोधन हुआ। विषय विशेषज्ञ ने बताया कि पेंशन निर्धारण नियम, सरकारी कर्मचारियों की पेंशन की गणना और पात्रता से संबंधित नियम हैं। ये नियम सरकारी कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। पेंशन के लिए पात्र होने के लिए, सरकारी कर्मचारी को एक निश्चित अवधि 10 वर्ष की नियमित सेवा पूरी करनी होती है।
ठाकुर ने आगे कहा कि पेंशन की राशि, सेवा की अवधि और अंतिम आहरित वेतन के आधार पर निर्धारित की जाती है। यदि कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है,तो उसके आश्रितों को पारिवारिक पेंशन का लाभ मिल सकता है। पेंशन नियमों में समय-समय पर संशोधन हो सकता है, जैसे कि महंगाई राहत या अन्य भत्तों में बदलाव। पेंशन के लिए आवश्यक सेवा अवधि को अर्हकारी सेवा कहा जाता है। पेंशन के लिए कर्मचारी की पात्रता,सेवा अवधि, वेतन और अन्य कारकों पर निर्भर करती है। पेंशन का भुगतान आमतौर पर बैंक खातों के माध्यम से किया जाता है।
पेंशनभोगियों के लिए समय-समय पर दिशानिर्देश जारी किए जाते हैं,जैसे कि जीवन प्रमाण पत्र जमा करने के तरीके आदि। यदि पेंशनभोगियों को कोई समस्या आती है,तो वे शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 17 वर्ष के सेवा के बाद स्वेच्छिक सेवानिवृत्त हो सकतें हैं। गोद लिए बच्चे को भी पारिवारिक पेंशन मिल सकती है, लेकिन इसके कुछ नियम और शर्तें हैं। यदि सरकारी कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है, तो गोद लिया हुआ बच्चा भी पारिवारिक पेंशन का हकदार होगा, जैसे कि उसका अपना बच्चा होता है। बच्चों को पारिवारिक पेंशन उनके जन्म के क्रम में दी जाती है। इसका मतलब है कि सबसे छोटा बच्चा तभी पात्र होगा जब उससे बड़ा बच्चा पेंशन के लिए अयोग्य हो जाए। अविवाहित बच्चे को 25 वर्ष की आयु तक या शादी होने तक या जब तक वह अपनी आजीविका कमाना शुरू नहीं कर देता,जो भी पहले हो, पारिवारिक पेंशन मिलती है। यदि बच्चा विकलांग है और कमा नहीं पाता है,तो वह अपनी मृत्यु तक पारिवारिक पेंशन प्राप्त कर सकता है। यदि बच्चा नाबालिग है,तो उसके कानूनी अभिभावक उसकी ओर से पेंशन प्राप्त करेंगे। विधवा या विधुर द्वारा गोद लिया गया बच्चा परिवार का सदस्य नहीं माना जाएगा और इसलिए वह पारिवारिक पेंशन का हकदार नहीं होगा।
विषय विशेषज्ञ ने प्रतिभागियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उनके जिज्ञासाओं को शांत किया। प्रारंभ में श्रीमती मौसमी लहरें सहायक प्राध्यापक रसायन शास्त्र ने अतिथि परिचय दिया एवं डॉ श्राद्ध मिश्रा सहायक प्राध्यापक अर्थशास्त्र ने कार्यक्रम का सफल संचालन किया तथा फूल सिंह भारती,छात्रावास अधीक्षक ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उक्त एफडीपी प्रोग्राम में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष,वरिष्ठ प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक, क्रीड़ाधिकारी, ग्रंथपाल,कार्यालयीन अधिकारी एवं कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में अन्य संस्थाओं के प्रतिभागी उपस्थित रहे। 21 जुलाई सोमवार को स्थापना विषय पर डॉ तपेश गुप्ता, अपर संचालक क्षेत्रीय कार्यालय उच्च शिक्षा एवं प्राचार्य छत्तीसगढ़ महाविद्यालय रायपुर का उदबोधन होगा।
पति नहीं मांग सकता पत्नी के फोन का पासवर्ड, उसकी भी प्राइवेसी है: हाईकोर्ट
रायपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति अपनी पत्नी को उसकी निजी जानकारी, संचार माध्यमों, मोबाइल फोन या बैंक खातों के पासवर्ड साझा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। ऐसा करना निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा, जो परिस्थितियों के अनुसार घरेलू हिंसा की श्रेणी में भी आ सकता है। यह फैसला न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडे की एकलपीठ ने उस मामले में सुनाया, जिसमें पति ने पत्नी की काल डिटेल रिकार्ड (CDR) मांगते हुए उसे चरित्रहीन ठहराने की कोशिश की थी।
याचिकाकर्ता पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13(1) (आई-ए) के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक की याचिका फैमिली कोर्ट में दायर की थी। सुनवाई के दौरान पति ने दुर्ग के एसएसपी के पास आवेदन देकर पत्नी की काल डिटेल्स मांगीं और एक समान मांग फैमिली कोर्ट में भी की गई, जिसे निचली अदालत ने खारिज कर दिया। मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि जब तलाक क्रूरता के आधार पर मांगा गया है, न कि व्यभिचार के आधार पर, तो कॉल डिटेल्स जैसी गोपनीय जानकारी की मांग संविधान के अनुच्छेद 21 में निहित निजता के अधिकार का उल्लंघन मानी जाएगी।
न्यायालय ने केएस पुट्टस्वामी बनाम भारत सरकार (2017), पियूसीएल बनाम भारत सरकार (1996) और मिस्टर एक्स बनाम हॉस्पिटल जेड (1998) जैसे मामलों का हवाला देते हुए कहा कि निजता का अधिकार व्यक्ति की यौन पहचान, वैवाहिक संबंधों की गरिमा और अंतरंगता को भी सुरक्षित करता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि विवाह में पारदर्शिता और साझेदारी होनी चाहिए, लेकिन इसका यह अर्थ नहीं कि पति-पत्नी एक-दूसरे की निजता का उल्लंघन करें या संचार की आजादी में हस्तक्षेप करें। कोर्ट ने कहा, घर या आफिस में की गई मोबाइल बातचीत, जो अक्सर गोपनीय होती है, व्यक्ति के निजी जीवन का हिस्सा है। इसमें हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने पति की याचिका को बिना आधार के मानते हुए खारिज कर दिया और फैमिली कोर्ट के निर्णय को उचित और वैधानिक ठहराया।
गरियाबंद में इंसाफ़ के लिए भूख हड़ताल का सहारा, पहले मुरहा, फिर अहमद बेग और अब 70 साल की ओम बाई लगा रही न्याय की गुहार
सिंचाई जलाशयों में 50 फीसद जलभराव... खारंग डेम और खपरी जलाशय हुए लबालब
रायपुर। जल संसाधन विभाग द्वारा 19 जुलाई को जारी टैंक गेज रिपोर्ट के अनुसार राज्य के प्रमुख सिंचाई जलाशयों में अब तक 49.78 प्रतिशत जलभराव हो चुका है। बिलासपुर स्थित खारंग डेम और दुर्ग जिले का खपरी जलाशय लबालब हो गया है। राज्य के कुल 46 प्रमुख जलाशयों में से झुमका जलाशय में 98.84 प्रतिशत, मनियारी जलाशय 90 प्रतिशत से अधिक, जबकि छरपानी जलाशय में 91 प्रतिशत से अधिक जलभराव हुआ है।
मिनीमाता बांगो डेम (कोरबा) में अब तक 52.78 प्रतिशत जलभराव हुआ है, रविशंकर सागर (धमतरी) में 53.26 प्रतिशत, तांडुला डेम (बालोद) में 29.29 प्रतिशत, दुधावा डेम में 21.87 प्रतिशत, सिकासार डेम में 45.21 प्रतिशत, सोंढूर में 23 प्रतिशत, मुरूमसिल्ली डेम में 21.57 प्रतिशत, कोडार डेम में 38.11 प्रतिशत, केलो डेम में 30.96 प्रतिशत जलभराव हुआ है। राज्य के 12 वृहद सिंचाई परियोजनाओं मेें शामिल खारंग डेम (बिलासपुर) में 100 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया है, जो सर्वाधिक भराव वाले जलाशयों में शामिल है। मनियारी डेम (मुंगेली) में जल स्तर 93.17 प्रतिशत तक पहुंच गया है, छोटे जलाशयों जैसे झुमका डेम (कोरिया) और छिरपानी (कबीरधाम) में क्रमशः 98.84 प्रतिशत और 91.14 प्रतिशत जलभराव हो चुका है।
इसी तरह अरपा भैंसाझार (बिलासपुर) और मायना (कांकेर) जैसे जलाशयों में 30 प्रतिशत से भी कम, गोंदली डेम (बालोद) में 30.24 प्रतिशत और कोसारटेडा डेम (बस्तर) में 42.57 प्रतिशत जलभराव हुआ है। खरखरा डेम में 22.15 प्रतिशत, परलकोट डेम में 36.44 प्रतिशत, श्याम डेम सरगुजा में 69.38 प्रतिशत, पिपरिया नाला डेम में 77.64 प्रतिशत, बलार डेम में 23.04 प्रतिशत, सुतियापात जलाशय में 67.74 प्रतिशत, मोंगरा बैराज में 62.62 प्रतिशत, मरोदा जलाशय में 38.62 प्रतिशत, सरोदा दादर में 41.03 प्रतिशत, घोंघा जलाशय में 82.84 प्रतिशत, मटियामोती जलाशय में 28.51 प्रतिशत, झुमका जलाशय में 98.84 प्रतिशत, खमारपकुट डेम में 86.11 प्रतिशत, कर्रानाला बैराज में 72.64 प्रतिशत, किंकारी नाला में 80.31 प्रतिशत, सुखा नाला बैराज 72.95 प्रतिशत, कुम्हारी डेम रायपुर में 40.44 प्रतिशत, धारा जलाशय राजनांदगांव में 46.44 प्रतिशत तथा रूसे डेम में 54.47 प्रतिशत जल भराव हो चुका है।
राज्य के कई जलाशयों से नहरों तथा स्लूइस के माध्यम से जल निकासी भी जारी है। खारंग, मनियारी, केलो और सीतानदी बेसिन के जलाशयों से जल छोड़ा गया है। जल संसाधन विभाग ने सभी संबंधित अधिकारियों को जलाशयों की सतत निगरानी के निर्देश दिए हैं।
लोकल ट्रेन में बर्थ को लेकर बवाल: मोबाइल से हमला कर युवती का सिर फोड़ा
शराब दुकान में ढाई लाख कैश की चोरी, सुरक्षा कर्मियों को भनक तक नहीं लगी
कोतवाली थाना प्रभारी प्रवीण द्विवेदी ने बताया कि बोडसरा गांव के शराब दुकान में चोरी की सूचना मिलने के बाद पुलिस की टीम मौके पर पहुंची. जांच के दौरान शराब दुकान के सीसीटीवी कैमरा का तार कटा मिला. शराब दुकान में शुक्रवार की बिक्री की राशि ढाई लाख रुपए की चोरी हुई है. साथ ही लाकर भी ले गए हैं. इस मामले में शराब दुकान के सुरक्षा कर्मियों से पूछताछ की जा रही है, साथ ही अन्य सीसीटीवी कैमरे भी खंगाले जा रहे हैं.
जमीन खरीदी-बिक्री के नाम पर 45 लाख की ठगी, चार आरोपी गिरफ्तार
इसके बाद आरोपियों ने दस्तावेजी बहानेबाजी करते हुए 12 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री कराई, लेकिन असल में खसरा नंबर 345/14 की भूमि की रजिस्ट्री की गई, जो भारतमाला प्रोजेक्ट के अंतर्गत अधिगृहित हो चुकी थी। इस छलपूर्वक कार्रवाई से 36.50 लाख की ठगी हुई, जिसमें 12.60 लाख बाद में लौटाए गए। शेष राशि को लेकर आरोपी टालमटोल कर रहे थे। पुलिस जांच में सामने आया कि रजिस्ट्री की गई जमीन पहले ही किसी अन्य को बेची जा चुकी थी। वहीं भारतमाला प्रोजेक्ट में अधिग्रहित ज़मीन के 21 लाख के मुआवजे को भी आरोपियों ने हड़प लिया। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
‘कनेक्टकॉन–2025’ में जनसंपर्क की नई चुनौतियों और अवसरों पर राष्ट्रीय मंथन
रायपुर। सेल–भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के जनसंपर्क विभाग ने विश्व जनसंपर्क दिवस के अवसर पर शुक्रवार को भिलाई निवास में राष्ट्र स्तरीय पीआर कॉन्क्लेव ‘कनेक्टकॉन–2025’ का आयोजन किया। ‘कनेक्ट. कम्युनिकेट. क्रिएट.’ थीम पर आधारित इस एकदिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन संयंत्र के निदेशक प्रभारी चितरंजन महापात्र ने कार्यपालक निदेशकों के साथ दीप प्रज्वलन कर किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जनसंपर्क अब केवल प्रेस ब्रीफिंग तक सीमित न रहकर संस्थागत विकास का रणनीतिक आधार बन चुका है। उन्होंने भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के संकल्प और इस्पात उद्योग की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में राउरकेला, बोकारो, कॉर्पोरेट कार्यालय, वीआईएसएल, सीएफपी सहित भारतीय स्टेट बैंक और एनटीपीसी-सेल पावर कंपनी लिमिटेड से प्रतिनिधियों ने भाग लिया। महाप्रबंधक (जनसंपर्क) अमूल्य प्रियदर्शी ने स्वागत भाषण में आयोजन का उद्देश्य और सत्रों का परिचय दिया।
पहले सत्र में विभिन्न इकाइयों के प्रतिनिधियों ने जनसंपर्क की रणनीतियों, गतिविधियों और नवाचारों पर प्रस्तुतियां दीं। वक्ताओं में एसएस.पटनायक (राउरकेला), एल. प्रवीण कुमार (वीआईएसएल), श्यामली लोखंडे (सीएफपी), अभिनव शंकर (बीएसएल), मानिक भार्गव और समन्विता घोष (कॉर्पोरेट) तथा अपर्णा चंद्रा (बीएसपी) शामिल रहे। सत्र की अध्यक्षता अनुप कुमार दत्ता ने की।
इसके बाद ‘जनसंपर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग’ पर पैनल चर्चा हुई, जिसका नेतृत्व योगेश शास्त्री और सौरभ सिन्हा ने किया। ‘सोशल मीडिया में नैतिकता और चुनौतियां’ विषय पर दूसरे पैनल सत्र का संचालन एसपीएस जग्गी और अमूल्य प्रियदर्शी ने किया। इस दौरान भिलाई इस्पात संयंत्र की लघु फिल्मों का प्रदर्शन और क्विज़ का आयोजन भी हुआ।
‘मेक एन एड’ रचनात्मक विज्ञापन प्रतियोगिता में अभिनव शंकर प्रथम, एल. प्रवीण कुमार द्वितीय और नितिन अग्निहोत्री तृतीय रहे। समापन समारोह में कार्यपालक निदेशक (मानव संसाधन) पवन कुमार ने कहा कि रचनात्मक आलोचना और सकारात्मक कहानियों के माध्यम से संस्थान की छवि सशक्त होती है। धन्यवाद ज्ञापन प्रशांत तिवारी ने दिया और संचालन अपर्णा चंद्रा ने किया। प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम को ज्ञानवर्धक बताते हुए संयंत्र प्रबंधन का आभार व्यक्त किया।
ट्रैफिक मैन के नाम से मशहूर आरक्षक को स्वतंत्रता दिवस पर मिलेगा राष्ट्रपति पदक
रायपुर। बैकुंठपुर कोरिया नगर सेना में नायक के पद पर कार्यरत महेश मिश्रा को 15 अगस्त 2025 को रायपुर में राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस मुख्य समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के हाथों पदक मिलेगा।
ट्रैफिक मैन महेश मिश्रा को अवार्ड के साथ ही आउट ऑफ टर्न प्रमोशन का लाभ भी मिलेगा। छत्तीसगढ़ नगर सेना से इस साल एक मात्र नायक का राष्ट्रपति पदक के लिए चयन हुआ है। वे पिछले 18 साल से ड्यूटी के साथ ही ट्रैफिक मैन के नाम से प्रसिद्ध हैं। स्कूल-कॉलेजों में स्वयं के खर्च पर 500 से अधिक ट्रैफिक जागरुकता कैंप लगाकर प्रशिक्षित कर चुके हैं। साथ ही इस दौरान जिला-संभाग एवं प्रदेश स्तर पर लगभग 4 लाख आम जनता को ट्रैफिक पाठ पढ़ा चुके हैं. वाहन चालकों को नि:शुल्क चश्मा वितरण, सड़क के गड्ढों को भरने से लेकर कई सामाजिक कार्य करते हैं।
महेश मिश्रा स्नातकोत्तर में संस्कृत, राजनीति विज्ञान एवं समाजशास्त्र विषय में गोल्ड मेडलिस्ट हैं। वर्तमान में यातायात नियमों के परिपालन संबंधी जागरुकता का अध्ययन: छत्तीसगढ़ राज्य के कोरिया जिले के विशेष परिपेक्ष्य में विषय पर PHD स्कॉलर भी हैं। वर्ष 2022 में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में भी नाम दर्ज हो चुका है।
मौसमी बिमारियों की रोकथाम हेतु मैलाथियान एवं टेमिफास का छिड़काव लगातार जारी
वार्ड क्रं. 44 लक्ष्मी नारायण नगर के गोकुल नगर लाईन में मौसमी बिमारियों की रोकथाम के लिए टेमिफास का छिड़काव लगातार जारी है। बरसात का पानी घर के बाहर रखे पात्रों में भर जाने के कारण मच्छर पनपने लगते हैं। जिससे बिमारियां होने की संभावना ज्यादा बनी रहती है। समस्या को दृष्टिगत करते हुए आयुक्त राजीव कुमार पाण्डेय ने जोन स्वास्थ्य अधिकारी हेमंत मांझी को दवाई छिड़काव कराने निर्देशित किए हैं। जोन क्रं. 4 के स्वास्थ्य विभाग की टीम डोर-टू-डोर वार्डो में जाकर घरो के अंदर कुलर, पुराने टायर, पानी की टंकियों एवं अन्य जल भराव वाले सामग्रियों की जांच कर टेमिफास दवाई का छिड़काव कर रहे है, जिससे मौसमी बिमारी न फैले।
छत्तीसगढ़ में पहली बार श्रीनगर डल झील की तरह चलेगा हाउस बोट, पानी के बीच मिलेगा स्वादिस्ट व्यंजन का मजा
डीएमएफ मद से 3 करोड़ की लागत से बोट हाउस और शिकारा बोट चलाने प्रोजेक्ट बनाया गया है. हालांकि, जम्मू के श्रीनगर डल झील की तर्ज पर झुमका में पांच शिकारा बोट चलाने की शुरुआत हो चुकी है. लेकिन बारिश मानसून आगमन के साथ ही शिकारा बोट को सुरक्षित रखवाया गया है. छत्तीसगढ़ में पहली बार जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर डल झील में शिकारा बोट झुमका जलाशय में चलाया जा रहा है.
पटवारी की कार पुल से सीधे नीचे नदी में गिरी, आफिस से वापस लौटने के दौरान हुआ हादसा
उनका घर चंपा में है। घटना सन्ना थाना क्षेत्र के नन्हेसर हर्रामोड़ की घटना है। कार के गिरने के बाद किसी तरह से पटवारी सुरक्षित कार से बाहर निकले। हालांकि जिस तरह से हादसा हुआ है, उसके बाद किसी बच पाना संभव नहीं था। इस घटना में पटवारी को चोटे आई है। जिसका उपचार स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में किया जा रहा है।
बिलासपुर में डायल-112 बनी जीवनदायिनी, महिला ने पुलिस वाहन में दिया बच्चे को जन्म
खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 1619 नग अवैध गैस सिलेंडर किया जब्त
केंद्र सरकार का बड़ा निर्णय.. धान खरीदी का अनुमान 70 से बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन
रायपुर। प्रदेश के किसानों के लिए आज एक अत्यंत हर्ष और गर्व का दिन है। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए छत्तीसगढ़ में धान खरीदी के अनुमान को 70 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 78 लाख मीट्रिक टन करने की ऐतिहासिक स्वीकृति प्रदान की है। यह निर्णय प्रदेश के लाखों अन्नदाताओं की मेहनत को नई पहचान और उनकी आर्थिक समृद्धि को नई दिशा देगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी जी के प्रति आभार प्रकट किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केंद्र और राज्य सरकार की "डबल इंजन" प्रतिबद्धता का सजीव प्रमाण है, जिसमें किसान कल्याण सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा सोशल मीडिया 'एक्स' में पोस्ट करते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 8 लाख मीट्रिक टन अतिरिक्त धान खरीदने की स्वीकृति, हमारे किसानों के परिश्रम को मान्यता देने वाला कदम है। यह न केवल उनकी आय में वृद्धि करेगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार किसानों के हित में काम कर रही है और केंद्र सरकार से समन्वय करते हुए उनके लिए हरसंभव सुविधा सुनिश्चित कर रही है। राज्य के धान उत्पादक किसानों को बेहतर मूल्य, समय पर भुगतान और सुगम खरीदी प्रक्रिया के लिए ठोस रणनीति बनाई जा रही है। धान खरीदी सीमा में यह वृद्धि प्रदेश के किसानों के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली है। यह उनके परिश्रम और उत्पादन क्षमता में केंद्र की आस्था का संकेत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगठित बनाए रखने के लिए पूरी तैयारी कर चुकी है। प्रदेश के अन्नदाताओं की समृद्धि के लिए सरकार लगातार नई योजनाएँ और उपाय लागू कर रही है। किसानों के जीवन में खुशहाली और सम्मान लाना ही हमारी सरकार की प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के अन्नदाता नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ेंगे।