छत्तीसगढ़
थाने में हुई गोलीबारी, पुलिसकर्मियों में मचा हड़कंप, कांग्रेस नेता गिरफ्तार
Raipur News: प्रदेश के महासमुंद थाने में गोली चलने के मामले में पुलिस ने कांग्रेस नेता को गिरफ्तार किया है। बता दें कि कांग्रेस नेता के 32 बोर पिस्टल से थाने में गोली चल गई थी। जिस पर एसपी आशुतोष सिंह के निर्देश पर कांग्रेस नेता के ऊपर आर्म्स एक्ट और बीएनएस की धारा 125 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। मामला बागबाहरा थाना क्षेत्र का है।
कांग्रेस नेता अंकित बागबाहरा को 32 बोर पिस्टल का शस्त्र लाइसेंस मिला था। निजी पिस्तौल का लाइसेंस रिन्यूअल नहीं हो पाने के चलते पुलिस ने उन्हें नोटिस भेज कर थाने में हथियार जमा करने के लिए कहा था। पुलिस के नोटिस पर कांग्रेस नेता अंकित बागबाहरा थाने में अपनी पिस्तौल जमा करने पहुंचे थे, इस दौरान भूलवश गलती से गोली चल गई। हालांकि गोली चलने से कोई हताहत नहीं हुआ।
मिली जानकारी के अनुसार, गोली गलती से चली और फर्श पर लगी। जिसके चलते कोई नुकसान या जनहानी नहीं हुई। पर एसपी आशुतोष सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कांग्रेस नेता अंकित बागबाहरा को गिरफ्तार करने के निर्देश दिए। प्रधान आरक्षक की रिपोर्ट पर बीएनएस की धारा 125 और आर्म्स एक्ट 25,27 के तहत एफ आईआर दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही हैं। पुलिस के लिए अभी जांच का विषय है कि गोली चली है अथवा चलाई गई है। मामले में पुलिस की विवेचना जारी है।
वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, अवैध सागौन की 16 बल्लियां जब्त, आरोपी पर केस दर्ज
Raipur News: गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में वन विभाग ने अवैध सागौन तस्करी के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। गौरेला रेंज के ग्राम बालधर में मुखबिर की सूचना पर छापेमारी कर वन विभाग ने 16 बड़ी सागौन की बल्लियां जब्त की हैं। यह कार्रवाई वन मंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद के नेतृत्व में की गई, जिसमें मिथलेश सूर्यवंशी के घर और बाड़ी से भारी मात्रा में अवैध सागौन लकड़ी बरामद हुई।
बता दें कि वन विभाग को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि बालधर गांव में अवैध रूप से सागौन की लकड़ी का भंडारण और तस्करी हो रही है। रविवार को मिली पुख्ता जानकारी के आधार पर वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छापा मारा। तलाशी में 21 से 30 फीट लंबी सागौन की 16 बल्लियां बरामद की गईं, जिन्हें राष्ट्रीयकृत वनोपज के तहत जब्त कर लिया गया।
जब्त सागौन को मड़ना डिपो के काष्ठागार में सुरक्षित रखवाया गया है, और इसकी कीमत का आकलन किया जा रहा है। वन विभाग ने आरोपी मिथलेश सूर्यवंशी के खिलाफ वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया है, और आगे की जांच जारी है। वन मंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद ने कहा, हम अवैध कटाई और वनोपज तस्करी पर कड़ी नजर रखे हुए हैं। ऐसी गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गौ ग्राम जन जागरण यात्रा के समापन समारोह में शामिल हुए सीएम साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अभनपुर विकासखंड के सोनपैरी गांव में आयोजित कबीर जयंती महोत्सव एवं गौ ग्राम जन जागरण यात्रा के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को कबीर जयंती की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने गुरुकुल भवन के लिए 20 लाख रुपये, प्रदेश में गौशाला का नाम ‘गौधाम’ करने तथा सोनपैरी स्कूल में बाउंड्री वाल निर्माण की घोषणाएं की। साथ ही सामुदायिक भवन निर्माण, भुताही पारा से आश्रम तक नाली निर्माण एवं सोनपैरी से खिलोरा मुख्य मार्ग से आश्रम तक सीसी रोड निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी छत्तीसगढ़ की भूमि धन्य है, जहाँ कबीर साहेब जी की वाणी का गहरा प्रभाव रहा है। संत कबीर हमेशा जीव दया का उपदेश देते थे। प्रदेश के संस्कारों के निर्माण में न केवल कबीरपंथ के अनुयायियों का योगदान है, बल्कि उन लोगों का भी, जिनके जीवन में कबीर साहेब जी की निर्मल वाणी ने गहरा असर डाला है। उन्होंने कहा कि कबीर साहेब ने अपना पूरा जीवन जनजागरण को समर्पित किया। उन्होंने अपने उपदेशों से समाज को लगातार सही राह दिखाई। कबीर जी अपने दोहों में जनजागरण की बात करते थे और यह मानते थे कि जीवन अत्यंत अमूल्य है तथा इसका सार्थक उपयोग किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में संत कबीर के मानवतावादी विचारों को आज के समय में भी प्रासंगिक बताया और गौसेवा व सामाजिक एकता पर बल दिया। उन्होंने गौ ग्राम जनजागरण रैली में शामिल गौशालाओं के प्रतिनिधियों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि यह एक अत्यंत सार्थक प्रयास है। श्री साय ने कहा कि गौ-अभयारण्य की स्थापना के लिए भूमि चिन्हित की जा रही है।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में चावल उत्पादन, स्टील, सीमेंट, एल्युमिनियम और बिजली तथा कोयला आपूर्ति के क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में जाना जाता है। डॉ. सिंह ने कहा कि आने वाले समय में मुख्यमंत्री साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।
कैबिनेट मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि कबीर, तुलसीदास जैसे संतों ने समाज को नई दिशा दिखाई। हम आर्थिक रूप से चाहे जितनी भी प्रगति कर लें, लेकिन समाज को दिशा और मूल्य संत परंपरा ही दे सकती है। चौधरी ने कहा कि कबीर के विचारों ने समाज को नई दिशा दी और आज के भौतिकवादी युग में भी उनके विचार उतने ही प्रासंगिक हैं।
राजधानी रायपुर से जबलपुर मदन महल के बीच दौड़ेगी इंटरसिटी एक्सप्रेस, 7 घंटों में पूरा होगा सफर
रायपुर। राजधानी रायपुर से गोंदिया व बालाघाट होते हुए जबलपुर तक नई इंटरसिटी ट्रेन चलेगी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के लोगों रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव के रास्ते सीधे बालाघाट व जबलपुर जाने के लिए सीधी ट्रेन की सुविधा मिलने जा रही है। रेलवे ने रायपुर से मदन महल (जबलपुर) के बीच एक नई ट्रेन सेवा शुरू करने का फैसला किया है। यात्रियों की सुविधा और लंबे समय से उठाई जा रही मांगों को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है। यह ट्रेन कुल छह स्टेशनों पर रुकेगी और करीब 6 घंटे 40 मिनट में अपना सफर पूरा करेगी।
रायपुर से जबलपुर के बीच अब यात्रियों को सीधी ट्रेन की सुविधा मिलेगी, जिससे व्यापारिक और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी। इस नई ट्रैन सेवा से छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए जबलपुर पहुंचना आसान होगा और क्षेत्रीय उत्पादों का परिवहन भी बेहतर तरीके से संभव हो सकेगा। चुंकि इस रूट पर बालाघाट व नैनपुर जैसे स्टेशन है जिसके कारण बालाघाट, शिवनी, नैनपुर के लिए भी सीधी रेल सेवा मिलेगी। इन स्टेशनों के लिए रायपुर से चलने वाली यह सीधी ट्रेन होगी। इस ट्रेन के शुरू होने से रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव व डोंगरगढ़ के यात्रियों को लाभ मिलेगा।
पहले इस रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस चलाए जाने का प्लान बना था। वंदे भारत चलाने के संबंध में दिशा निर्देश भी जारी हुए और शेड्यूल भी तैयार हो रहा था। इसके बाद यह ठंडे बस्ते में चला गया। माना जा रहा है कि इस रूट पर वंदेभारत एक्सप्रेस को उम्मीद के अनुसार यात्री मिल सकते थे इस वजह से रेलवे को आर्थिक क्षति संभव थी। इसे देखते हुए संभवत: वंदेभारत का प्लान कैंसिल किया गया। अब इस रूट पर इंटरसिटी चलेगी जिसका किराया भी कम होगा जिससे यात्रियों का उत्साह बढ़ेगा।
गाड़ी क्रमांक 11701/11702 मदन महल – रायपुर – मदन महल के बीच चलने वाली यह नियमित ट्रैन मदन महल से सुबह 6:10 बजे रवाना होकर कुछपुरा (6:25 बजे) होते हुए दोपहर 1:50 बजे रायपुर पहुंचेगी। वापसी में यह ट्रैन रायपुर से दोपहर 2:45 बजे चलकर कुछपुरा (10:10 बजे) होते हुए रात 10:30 बजे मदन महल पहुंचेगी। इसका ठहराव नैनपुर, बालाघाट, गोंदिया, डोंगरगढ़, राजनांदगांव और दुर्ग स्टेशनों पर होगा। ट्रैन में कुल 15 कोच होंगे, जिनमें 1 एसएलआरडी, 1 एसएलआरआरएम, 8 स्लीपर, 3 एसी-3 और 1 एसी-1 शामिल हैं।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय एवं मंत्रिमंडल का चिंतन शिविर 2.0 शुरू
आम की खेेती किसानों की आय बढ़ाने में मददगार: मुख्यमंत्री साय
मोदी सरकार नक्सलवाद के दंश से भारत को मुक्त करने के लिए संकल्पित
बोधघाट बांध और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना के संबंध में पीएम से चर्चा
Raipur News: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना और इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना के राष्ट्रीय परियोजना के रूप में निर्माण के संबंध में विस्तार से चर्चा की है । उन्होंने कहा कि बस्तर संभाग लंबे समय से नक्सल प्रभावित रहा है, इसी वजह से संभाग सिंचाई साधनों के विकास में पिछड़ गया है, संभाग में सिंचाई साधनों की समस्या को दूर करने और चहुमुखी विकास को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना और इंद्रावती-महानदी लिंक परियोजना पर काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि बस्तर क्षेत्र के चहुमुखी विकास के लिए बोधघाट बहुउद्देशीय बांध परियोजना निर्णायक परियोजना साबित होगी। यह परियोजना, लंबे समय से इन्द्रावती नदी पर प्रस्तावित है। इंद्रावती, गोदावरी नदी की बड़ी सहायक नदी है। गोदावरी जल विवाद अभिकरण के वर्ष 1980 के अवॉर्ड में भी अन्य योजनाओं के साथ इस परियोजना का उल्लेख है। इस अवॉर्ड में उल्लेखित अन्य परियोजनाओं का क्रियान्वयन दूसरे राज्यों द्वारा किया जा चुका है परंतु दूरस्थ अंचल में होने एवं नक्सल समस्या के कारण इस परियोजना को प्रारंभ नहीं किया जा सका।
बस्तर के विकास की रफ्तार होगी डबल: बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना से संभाग में सिंचाई साधनों का दायरा बढ़ने के साथ ही बस्तर के विकास को डबल रफ्तार मिलेगी। इस परियोजना से 125 मेगावाट का विद्युत् उत्पादन, 4824 टन वार्षिक मत्स्य उत्पादन जैसे अतिरिक्त रोजगार, खरीफ एवं रबी मिलाकर 3,78,475 हेक्टेयर में सिंचाई विस्तार एवं 49 मि.घ.मी पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगा। वही इंद्रावती- महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना से कांकेर जिले की भी 50,000 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई सहित कुल 3,00,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि में सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। बस्तर को विकसित और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में दोनों परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
क्या है बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना?: बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना, गोदावरी नदी की बड़ी सहायक इन्द्रावती नदी पर प्रस्तावित है। राज्य में इन्द्रावती नदी कुल 264 कि. मी. में प्रवाहित होती है। यह परियोजना दंतेवाड़ा जिले के विकासखंड एवं तहसील गीदम के ग्राम बारसूर से लगभग 8 कि.मी. एवं जगदलपुर शहर से लगभग 100 कि. मी. दूरी पर प्रस्तावित है।
परियोजना की विशेषताएं: दोनों परियोजनाओं की अनुमानित लागत 49000 करोड़ रूपए है। जिसमें इंद्रावती-महानदी लिंक परियोजना की लागत लगभग 20 हजार करोड़ रूपए एवं बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना में लगभग 29 हजार करोड़ रुपए की लागत संभावित है। जिसमें हाइड्रोपावर इलेक्ट्रोमैकेनिकल कार्य, सिविल कार्य (सिंचाई) भी शामिल हैं। इस परियोजना में उपयोगी जल भराव क्षमता 2009 मि.घ.मी, कुल जल भराव क्षमता 2727 मि.घ.मी, पूर्ण जल भराव स्तर पर सतह का क्षेत्रफल 10440 हेक्टेयर सम्भावित है।
इन जिलों का होगा लाभः बहुउद्देशीय बोधघाट बांध परियोजना से दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा जिले के 269 गांवों को बड़ा लाभ होगा। जबकि इंद्रावती-महानदी इंटरलिंकिंग परियोजना से कांकेर जिले के अनेकों गांवों में सिंचाई सुविधा का विस्तार हो सकेगा। बस्तर संभाग को विकसित, आत्मनिर्भर और सक्षम बनाने की दिशा में दोनों परियोजना एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
स्टेट बेवरेजेस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास मद्दी के पदभार ग्रहण समारोह में हुए शामिल सीएम साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ स्टेट बेवरेजेस कॉर्पोरेशन के नव नियुक्त अध्यक्ष श्रीनिवास मद्दी के पदभार ग्रहण एवं अभिनंदन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने मद्दी को नई जिम्मेदारी के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मद्दी सामाजिक रूप से लंबे समय से सक्रिय हैं और उनके पास विभिन्न पदों पर कार्य करने का गहरा अनुभव है। मुझे विश्वास है कि उनका यह अनुभव स्टेट बेवरेजेस कॉर्पोरेशन के कार्यों को सुदृढ़ करने में उपयोगी सिद्ध होगा। साय ने कहा कि हमारी सरकार अनेक नवाचारों के माध्यम से शासकीय कार्यों में पारदर्शिता ला रही है।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बस्तर में शांति स्थापना और विकास के लिए हमारी सरकार पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। नक्सल उन्मूलन के साथ-साथ हम बस्तर में अधोसंरचना और पर्यटन विकास के कार्यों को गति दे रहे हैं, ताकि स्थानीय लोगों को स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हो सकें। हमने हाल ही में दुधारू पशु योजना के माध्यम से आदिवासी परिवार को दो अच्छी नस्ल की गाय प्रदान करने की शुरुआत की है, जिससे प्रदेश में दूध का उत्पादन बढ़ेगा और किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री साय ने अपने दिल्ली प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से हुई मुलाकात में प्रदेश के विकास को लेकर हुई महत्वपूर्ण चर्चाओं का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री से बस्तर में सिंचाई परियोजनाओं और इंद्रावती एवं महानदी को जोड़ने की महत्वाकांक्षी पहल के बारे में सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि बस्तर के विकास के साथ-साथ यह विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में एक निर्णायक कदम सिद्ध होगा।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि श्रीनिवास के सामाजिक जीवन के लंबे अनुभव का लाभ निश्चित ही बेवरेजेस कॉर्पोरेशन को मिलेगा। उन्हें पहले भी वन विकास निगम के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने का मौका मिला था और उन्होंने बेहतर ढंग से दायित्व का निर्वहन किया। इस अवसर पर नई जिम्मेदारियों के लिए उन्होंने मद्दी को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर जगदलपुर विधायक किरण देव ने भी संबोधित किया एवं शुभकामनाएं दीं।
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बच्चा गोद लेने वाली महिलाओं को भी मिलेगा मातृत्व अवकाश का लाभ
बिलासपुर। हाईकोर्ट ने महिला कर्मचारियों के हक़ में बड़ा फैसला लिया है। कोर्ट एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बच्चों को गोद लेने वाली महिला कर्मचारी भी चाइल्ड केयर, गोद लेने की छुट्टी या मातृत्व अवकाश की हकदार है। यह संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रत्येक मां का मौलिक अधिकार है कि वह अपने नवजात शिशु को मातृत्वपूर्ण देखभाल और स्नेह प्रदान कर सके, चाहे मातृत्व किसी भी प्रकार से प्राप्त हुआ हो। जस्टिस विभु दत्ता गुरु की बेंच ने स्पष्ट किया कि जैविक और गोद लेने वाली या सरोगेट माताओं के बीच मातृत्व लाभों को लेकर कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि दत्तक ग्रहण, संतान पालन अवकाश केवल लाभ नहीं है, बल्कि एक ऐसा अधिकार है जो किसी महिला को उसके परिवार की देखभाल करने की मूलभूत आवश्यकता को पूर्ण करता है।
कोर्ट ने कहा कि, याचिकाकर्ता 1972 नियमों के तहत 180 दिन की गोद लेने की छुट्टी की अधिकारी हैं। चूंकि उन्हें मातृत्व लाभ अधिनियम, 2017 के तहत पहले ही 84 दिन की छुट्टी मिल चुकी थी, इसलिए शेष को समायोजित किया जाए। याचिका के मुताबिक वर्ष 2013 में याचिकाकर्ता की आईआईएम, रायपुर में नियुक्ति हुई है। वर्तमान में सहायक प्रशासनिक अधिकारी हैं। उनका 2006 में विवाह हुआ है। 20 नवंबर 2023 को दो दिन की बच्ची को गोद लिया और 180 दिनों के लिए अवकाश के लिए आवेदन किया। संस्थान ने छुट्टी को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि एचआर नीति में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। दायर याचिका के बाद कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मां बनना एक महिला के जीवन की सबसे स्वाभाविक घटना है। महिला के लिए बच्चे के जन्म को सुविधाजनक बनाने हेतु जो कुछ भी आवश्यक है, नियोक्ता को उसके प्रति विचारशील और सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए और शारीरिक कठिनाइयों का एहसास होना चाहिए जो एक कामकाजी महिला को होती हैं
आईसीएआर-एनआईबीएसएम रायपुर की टीम ने विकसित कृषि संकल्प अभियान में किसानों से किया आमने-सामने संवाद
Raipur News: आईसीएआर-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (NIBSM), रायपुर के निदेशक डॉ. पी.के. राय के मार्गदर्शन एवं पर्यवेक्षण में संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिकों की एक टीम ने विकसित कृषि संकल्प अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में दौरा करते हुए किसानों से सीधा संवाद किया। इस टीम में डॉ. आर.के. मुरली बास्करन, डॉ. के.सी. शर्मा, डॉ. एस.के. जैन, डॉ. लता जैन, डॉ. श्रीधर जे., डॉ. ललित लक्ष्मण खरबिकर, डॉ. योगेश येले, डॉ. श्रावणी सान्याल और डॉ. प्रियांका मीणा शामिल थे।
वैज्ञानिकों ने रायपुर, बेमेतरा, दुर्ग, बालोद, धमतरी, बिलासपुर, महासमुंद, गरियाबंद और बलौदा बाजार जिलों के गांवों में जाकर किसानों से मिलकर उनकी मुख्य समस्याएँ जानी। किसानों ने इस अवसर पर फसल बीमा राशि न मिलना, मृदा की घटती उपज क्षमता, जल स्रोतों की कमी, कीट एवं रोग नियंत्रण में कठिनाइयाँ, महंगे बीज और खाद की उपलब्धता, मंडी में न्यूनतम समर्थन मूल्य न मिलना, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तथा तकनीकी जानकारी की कमी जैसी समस्याओं को उठाया। किसानों की इन चिंताओं पर गहराई से विचार-विमर्श करते हुए वैज्ञानिकों ने उन्हें त्वरित और व्यवहारिक समाधान प्रदान किए।
इस दौरान वैज्ञानिकों ने प्रेसिजन फार्मिंग की जरूरत पर ज़ोर देते हुए बताया कि मिट्टी की गुणवत्ता एवं नमी का सटीक आंकलन कर खेतों में ड्रोण आधारित सर्वेक्षण व पोषण प्रबंधन से उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली अपनाने की सलाह दी ताकि सीमित जल स्रोतों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित हो सके तथा आवश्यकतानुसार सिंचाई आवृत्ति और पानी की मात्रा का निर्धारण किया जा सके। स्मार्ट एग्रीकल्चर के अंतर्गत उन्होंने बताया कि मोबाइल ऐप्स और आईओटी सेंसर से खेतों में रियल टाइम मिट्टी का पोषण स्तर, कीट-रोग की स्थिति और मौसम आधारित सलाह प्राप्त की जा सकती है, जिससे किसान अपने निर्णय समय पर ले सकें।
ऐसी ही जैविक एवं प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वैज्ञानिकों ने रासायनिक उर्वरकों के बजाय जैविक खाद, बायोफर्टिलाइजर और नीम आधारित जैविक कीटनाशकों के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने का तरीका समझाया। साथ ही स्थानीय स्तर पर उपलब्ध गोबर की खाद और वर्मीकम्पोस्ट तैयार करने के लाभों पर भी विस्तृत जानकारी दी। मिट्टी परीक्षण की अनिवार्यता पर बल देते हुए उन्होंने बताया कि नियमित रूप से मिट्टी की पीएच, कार्बनिक कार्बन, फॉस्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म पोषक तत्वों का परीक्षण करवाकर संतुलित उर्वरक योजना बनाई जा सकती है, जिससे मिट्टी की उपज क्षमता दिर्घकालीन रूप से बढ़ाई जा सकती है।
फसल विविधीकरण की दिशा में किसानों को दलहन, तिलहन तथा दलहन-तिलहन मिश्रित खेती अपनाने के सुझाव दिए गए, जिससे मोनोकल्चर की बजाय भूमि की उर्वरता में सुधार और आय में स्थिरता लाई जा सके। कीट प्रबंधन के जैविक उपायों में उन्होंने ट्रैप क्रॉपिंग की तकनीक, नीम आधारित घोलों के निर्माण व उपयोग की विधि और खेत स्तर पर जैविक कीटनाशकों के निर्माण की प्रक्रिया साझा की, जिससे किसान रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता घटाकर टिकाऊ खेती अपना सकें।
अवैध गुटका-सुपारी फैक्ट्री पर पड़ी प्रशासन की रेड, 52 हजार किलो माल जब्त, कारखाना सील
Raipur News: :छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के ग्राम कनारी में चल रही एक अवैध गुटखा-सुपारी फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ है। कलेक्टर को मिली शिकायत के बाद खाद एवं औषधि प्रशासन विभाग ने कार्रवाई करते हुए फैक्ट्री में दबिश दी।
जांच में पहुंचे अधिकारियों को इस दौरान 52,500 किलो सुपारी जब्त की गई, जिसकी कीमत डेढ़ करोड़ से भी ज्यादा बताई जा रही है। फैक्ट्री संचालक गुरमुख जुमनानी के पास वैध लाइसेंस नहीं मिला, जिसके चलते विभाग ने फैक्ट्री को सील कर दिया है।
आईआईटी भिलाई और आईएमटी नॉर्ड यूरोप (फ्रांस) के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूती देने समझौता
Raipur News: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई (आईआईटी भिलाई) ने फ्रांस के इंस्टीट्यूट माइन टेलेकॉम (आईएमटी) नॉर्ड यूरोप के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता भारत और फ्रांस के बीच शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आईआईटी भिलाई की ओर से संस्थान के निदेशक प्रो. राजीव प्रकाश ने इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में आईआईटी भिलाई के अंतरराष्ट्रीय मामलों के कार्यालय ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य दोनों संस्थानों के बीच आपसी हित के क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों को बढ़ावा देना है। यह समझौता शिक्षा, अनुसंधान और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से दोनों संस्थानों के सर्वांगीण विकास की दिशा में सहकारिता को मजबूत करेगा।
समझौते के अंतर्गत, आईआईटी भिलाई के स्नातक और स्नातकोत्तर छात्र फ्रांस में अध्ययन करने और संयुक्त डिग्री प्राप्त करने का अवसर प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय अनुभव और वैश्विक शैक्षणिक दृष्टिकोण मिलेगा।
यह सहयोग विशेष रूप से यांत्रिक अभियांत्रिकी, पॉलिमर और कंपोजिट सामग्री, मेकाट्रॉनिक्स तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से युक्त कंप्यूटर विज्ञान जैसे प्रमुख क्षेत्रों में केंद्रित रहेगा, जिनमें दोनों संस्थानों की विशेषज्ञता और नवाचार की अपार संभावनाएं हैं।
यह समझौता आईआईटी भिलाई के उस विजन के अनुरूप है, जिसमें वह एक जीवंत और समावेशी अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक वातावरण को बढ़ावा देने की दिशा में कार्यरत है। साथ ही, यह भारत और फ्रांस के शैक्षणिक संस्थानों के बीच बढ़ती सहयोग की भावना को भी दर्शाता है।
यह साझेदारी न केवल दोनों संस्थानों के शैक्षणिक और अनुसंधान विकास को सशक्त बनाएगी, बल्कि संबंधित क्षेत्रों के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
बस्तर अब डर से नहीं, डिजिटल बदलाव से पहचाना जा रहा है: विष्णुदेव साय
Raipur News: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात की। इस दौरान उन्होंने बस्तर में शांति व्यवस्था, विभिन्न योजनाओं एवं उपलब्धियों पर चर्चा की। इसके साथ ही हाल ही में छत्तीसगढ़ में आयोजित सुशासन तिहार की प्रधानमंत्री को जानकारी दी। दिल्ली प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह से भी उनके आवास पर मुलाकात की। जहां राज्य के विकास, नक्सल ऑपरेशन सहित अन्य प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री ने बताया कि अब बस्तर का चेहरा बदल रहा है, जो कभी बंदूक और बारूदी सुरंगों के लिए जाना जाता था, आज वहाँ मोबाइल टावर खड़े हो रहे हैं, जो सिर्फ संचार का माध्यम नहीं बल्कि विकास और विश्वास के प्रतीक बन चुके हैं।
मुख्यमंत्री साय ने बताया कि सरकार द्वारा विगत डेढ़ वर्ष में 64 नए फॉरवर्ड सुरक्षा कैंपों की स्थापना की गई है। इन सुरक्षा चौकियों के आसपास गांवों में न केवल पुलिस की उपस्थिति से सुरक्षा की भावना बनी है, बल्कि इन इलाकों में अब नेटवर्क भी पहुंच गया है। सरकार ने अब तक कुल 671 मोबाइल टावर चालू कर दिए हैं, जिनमें से 365 टावरों में 4G सेवा उपलब्ध है। यह न सिर्फ तकनीकी बदलाव है, बल्कि यह संकेत है कि अब आदिवासी क्षेत्रों में संचार क्रांति की शुरुआत हो चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब बस्तर में सिर्फ मोबाइल टावर नहीं लग रहे हैं, बल्कि ये टावर इस बात का सबूत हैं कि वहां के बच्चे और युवा भी अब डिजिटल दुनिया से जुड़ रहे हैं। पहले जहां बच्चों को पढ़ाई या नौकरी की तैयारी के लिए शहर जाना पड़ता था, अब वही काम वे अपने गांव में मोबाइल नेटवर्क के ज़रिए ऑनलाइन कर पा रहे हैं। अब बस्तर का युवा भी स्मार्टफोन से अपनी दुनिया खुद बना रहा है।
Chhattisgarh Corona Update: रायपुर में 11, प्रदेश में 17 नए संक्रमित... एक्टिव केस हुए 50 पार
Raipur News: प्रदेश में कोरोना संक्रमण एक बार फिर अपने पैर पसारने लग गया है। प्रदेश में पिछले 24 घंटे में 17 नए कोरोना संक्रमित मिले हैं, जिससे अब राज्य में एक्टिव केस की संख्या बढ़कर 50 हो गई है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार सबसे ज्यादा मामले रायपुर से सामने आए हैं, जहां 11 मरीजों की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है।
बुलेटिन के अनुसार, रायपुर जिले में आज सबसे ज्यादा 11 केस, बिलासपुर में 5 और बालोद में 1 केस की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अब तक की गई कुल 1183 कोरोना जांच में से 50 लोगों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।
जिलावार स्थिति
रायपुर – 31 संक्रमित
बिलासपुर – 12 संक्रमित
दुर्ग – 5 संक्रमित
बालोद और बस्तर – 1-1 संक्रमित
स्वास्थ्य विभाग सतर्क, RTPCR और RAT जांच जारी
छत्तीसगढ़ सरकार ने कोरोना की इस वापसी को लेकर सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। RTPCR और RAT जांच (Covid Testing) की संख्या बढ़ाई जा रही है और निगरानी व्यवस्था को भी और बेहतर किया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में कोरोना की निगरानी के लिए रैपिड रिस्पॉन्स टीम को अलर्ट पर रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से मास्क पहनने, भीड़भाड़ से बचने, और सामान्य लक्षणों पर तुरंत जांच कराने की अपील की है।
राजनांदगांव जिला चिकित्सालय के सामने लगे ठेला, झोपड़ी को निगम के अतिक्रमण दस्ता ने हटाया
रायपुर। राजनांदगांव शहर में अतिक्रमण कर ठेला खोमचा एवं पसरा लगाने वालों को समझाईस देने व हटाने निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा द्वारा गठित दस्ता निरीक्षण कर समझाईस देकर हटाने की कार्यवाही कर रही है। अतिक्रमण दस्ता द्वारा आज बसंतपुर जिला चिकित्सालय के सामने से 5 ठेला एवं 2 झोपडी हटाया गया।
शहर के चौक चौराहा एवं रोड में अतिक्रमण कर अनाधिकृत रूप से पसरा एवं ठेला खोमचा लगाकर व्यवसाय किया जाता है, जिससे यातायात बाधित होती है और दुर्घटना की संभावना बनी रहती है। जिसे ध्यान में रखकर निगम आयुक्त अतुल विश्वकर्मा ने निगम के भवन अधिकारी एवं अतिक्रमण दस्ता को अनाधिकृत पसरा हटाने तथा ठेला खोमचा वालों को व्यवस्थित लगाने समझाईस देने के निर्देश दिये। निर्देश के अनुक्रम में निगम का दस्ता कार्यवाही कर रही है। बसंतपुर जिला चिकित्सालय के सामने ठेला एवं झोपडी शेड बनाकर होटल, फल, पान आदि व्यवसाय किया जा रहा था, जिसे हटाने समझाईस दी गयी थी। समझाईस उपरांत भी नही हटाने पर आज निगम का अमला द्वारा 5 ठेला एवं 2 झोपडी शेड हटाया गया और 3 ठेला स्वयं हटाने कहा गया। इसी प्रकार शहर के अन्य क्षेत्रों में यातायात बाधित करने वाले तथा नाली के उपर रखे ठेला खोमचा समझाईस उपरांत हटाया जा रहा है।
आयुक्त विश्वकर्मा ने अपील करते हुये कहा है कि शहर के चौक चौराहो एवं रोड में पसरा व ठेला खोमचा न लगावे। रोड में पसरा आदि लगाने से यातायात बाधित होने के साथ साथ दुर्घटना होने की संभावना बनी रहती है। इसी प्रकार नाली के उपर अतिक्रणम करने से बारिश के मौसम में पानी भरान की स्थिति निर्मित होती है। उन्हांेंने कहा कि निगम का अतिक्रमण दस्ता हटाने की कार्यवाही करेगी उससे पूर्व हटा लेवे अन्यथा बिना सूचना के हटाने की कार्यवाही की जावेगी।
विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुल को देश को समर्पित... सेल ने की 16 हजार टन स्टील की आपूर्ति
भिलाई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज 6 जून 2025 को चिनाब नदी पर बने विश्व के सबसे ऊंचे रेलवे पुल को देश को समर्पित किया है। छत्तीसगढ़ के भिलाई इस्पात संयंत्र सहित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के इस्पात संयंत्रों ने इस पुल निर्माण के लिए 16,000 टन स्टील (लोहा) की आपूर्ति की है, जिसमें प्लेट्स, टीएमटी बार और स्ट्रक्चरल्स शामिल हैं। यह उपलब्धि सेल और भिलाई बिरादरी के गर्व का विषय है।
किसी भी निर्माण प्रक्रिया और औद्योगिक गतिविधि के लिए स्टील सबसे महत्वपूर्ण घटकों में से एक है। जानकारी के अनुसार इस पुल के निर्माण में लगभग 29,000 मीट्रिक टन स्टील, 10 लाख क्यूबिक मीटर अर्थवर्क, 66,000 क्यूबिक मीटर से अधिक कांक्रीट तथा 84 किलोमीटर रॉक बोल्ट और केबल एंकर का प्रयोग किया गया है।
जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी के ऊपर बना 1.3 किलोमीटर लंबा यह पुल नदी तल से 359 मीटर की ऊंचाई पर है और पेरिस के प्रतिष्ठित एफिल टॉवर से 35 मीटर ऊंचा है। अभियांत्रिकी की अभिनव कृति यह पुल 266 किमी प्रति घंटे हवा की तेज रफ्तार और उच्चतम तीव्रता के भूकंपीय तरंगों का सामना करने में सक्षम है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामुल्ला रेल लिंक परियोजना (यूएसबीआरएल) के अंतर्गत यह पुल जो कटरा से बनिहाल तक 111 किलोमीटर लंबे घुमावदार खंड का हिस्सा है, इस क्षेत्र में आवागमन को सुलभ करेगा।
सेल के इस्पात संयंत्रों ने जम्मू-कश्मीर में निर्मित दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे पुल में उपयोग हेतु 6690 टन टीएमटी उत्पाद, 1793 टन स्ट्रक्चरल स्टील और 7511 टन स्टील प्लेट्स, हॉट स्ट्रिप मिल प्रोडक्ट और चेकर्ड प्लेटों सहित कुल 16,000 टन इस्पात की आपूर्ति की है। पुल के निर्माण हेतु सेल द्वारा आपूर्ति की गई इस्पात में से, भिलाई इस्पात संयंत्र ने 5922 टन टीएमटी स्टील, 6454 टन प्लेट्स और 56 टन स्ट्रक्चरल स्टील सहित कुल 12,432 टन इस्पात की आपूर्ति की है। सेल के बर्नपुर स्थित इस्को स्टील प्लांट, दुर्गापुर स्टील प्लांट, राउरकेला स्टील प्लांट और बोकारो स्टील लिमिटेड ने भी स्टील की आपूर्ति की है।
यह पुल उक्त क्षेत्र में तेज और कुशलतम परिवहन की सुविधा प्रदान करेगा तथा सभी मौसम में उपयोग किया जा सकेगा। चेनाब रेल पुल वस्तुतः देश के लिए महत्वपूर्ण परियोजना है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने राष्ट्रीय महत्व की कई ऐसी महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं जैसे बांधों, पुलों, सुरंगों, फ्लाईओवरों और एक्सप्रेसवे सहित ऊर्जा क्षेत्र व रक्षा क्षेत्र में प्रयोग हेतु वांछित ग्रेड के इस्पात की आपूर्ति की है।
सेल-बीएसपी में उत्पादित इस्पात का उपयोग ऊर्जा और बिजली क्षेत्र के साथ ही कंस्ट्रक्शन और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स जैसे पुलों, राजमार्गों, सुरंगों, फ्लाईओवर सहित भूकंपीय और संक्षारण संभावित क्षेत्रों में ऊंची इमारतों और औद्योगिक संरचनाओं में, भारी मशीनरी, तेल और गैस क्षेत्र, अंतरिक्ष क्षेत्र, परमाणु ऊर्जा प्रतिष्ठानों आदि में किया जाता है।
भारतीय रेलवे के लिए वांछित ग्रेड के रेल्स उत्पादन के अलावा सेल-बीएसपी चौड़ी, मोटी और हेवी प्लेटों की विविध श्रृंखला का उत्पादन तथा विभिन्न अनुप्रयोगों हेतु वैल्यू एडेड स्पेशल स्टील ग्रेड की रोलिंग करता है। संयंत्र द्वारा उत्पादित टीएमटी उत्पादों की पूरी श्रृंखला भूकंपरोधी और जंगरोधी गुणों के साथ उच्च गुणवत्ता की है। इसके अतिरिक्त संयंत्र चैनल्स, एंगल्स और बीम्स सहित स्ट्रक्चरल ग्रेड स्टील का भी उत्पादन करता है।
उल्लेखनीय है कि भिलाई द्वारा उत्पादित स्टील का उपयोग बांद्रा-वर्ली सी-लिंक के साथ ही मुंबई में अटल सेतु, अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग, हिमाचल प्रदेश में अटल सुरंग और राष्ट्रीय महत्व की कई अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के निर्माण में किया गया है। सेल-भिलाई द्वारा उत्पादित स्टील का उपयोग युद्धपोतों और आईएनएस विक्रांत के निर्माण में भी किया गया है। बुलेट ट्रेन परियोजना हेतु सेल-बीएसपी द्वारा बड़ी मात्रा में टीएमटी बार्स की आपूर्ति की गई है। सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र ने देश की राजधानी में निर्मित सेंट्रल विस्टा परियोजना में उपयोग हेतु भी टीएमटी उत्पादों की आपूर्ति की है।