दिव्य महाराष्ट्र मंडल
महाराष्ट्र मंडल के फिजियोथैरेपी में निम्न शुल्क में लोगों को मिल रही राहत
रायपुर। महाराष्ट्र मंडळ में संचालित फिजियोथेरेपी सेंटर में मरीजों, जरूरतमंदों और वरिष्ठ नागरिकों का न्यूनतम शुल्क में उपचार किया जा रहा है। मंडल के फिजियोथेरेपी सेंटर में अत्याधुनिक मशीनों के साथ सिद्धहस्त डाक्टरों की देखरेख में मरीजों का उपचार किया जा रहा है। यहां आने वाले लोग काफी राहत के साथ वापस लौट रहे है। बता दें कि महाराष्ट्र मंडळ रायपुर और भारतीय जीवन बीमा निगम गोल्डन जुबली फाउंडेशन योजनांतर्गत महाराष्ट्र मंडळ के फिजियोथेरेपी सेंटर का संचालन किया जा रहा है।
महाराष्ट्र मंडळ के समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि दान स्वरूप न्यूनतम सहयोग राशि पर यहां आने वालों का उपचार किया जा रहा है। फिजियोथेरेपी सेंटर में लगातार उपचार करवाने वाले हर आयु वर्ग के लोग आ रहे हैं। एक्सपर्ट डाक्टर्स डा. संगीता कश्यप, डा. अंकिता काळे अपनी सेवाएं दे रही हैं। यहां हट पैक, टेंस, लेजर, आईएफटी, अल्ट्रासाउंड और स्ट्रीम्यूलेशन जैसी आधुनिक मशीनें लाई गई हैं। इससे लोगों का फिजियो किया जा रहा है।
मंडल के फिजियोथैरेपी में पिछले 15 दिनों से आ रहे पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी रहे 86 वर्षीय डा. एनके पुरोहित ने कहा कि उम्र के साथ मेरे मसल्स के साथ दर्द था। इसके साथ कमर में दर्ज और चलने में परेशानी होती थी। जिसके कारण वे झुककर चल रहे थे। यहां आने के बाद उन्हें काफी राहत मिली है। वे प्रतिदिन सुबह यहां आ रहे है।
अब उठ रहा हाथः माला भूरे
रोहिणीपुरम निवासी माला भूरे अपनी बड़ी सर्जरी कराकर प्रतिदिन फिजियोथैरेपी कराने यहां आ रही है। उन्होंने बताया कि वे पिछले पांच महीने से आ रही हैं। उन्हें यहां आकर 80 फीसद से अधिक राहत मिली है। अभी कुछ दिनों से उनके पति धनंजय भूरे भी यहां आकर फिजियो ले रहे है।
मुंह हो गया था टेढ़ा
बैरन बाजार निवासी 60 वर्षीय शब्बीर हुसैन पैरालिसिस की शिकायत थी। जिसके कारण उनका मुंह टेढ़ा हो गया था। शब्बीर ने बताया कि पहले के चार दिन फिजियो कराने के लिए आश्रम गए थे। फिर यहां के एक्सपर्ट डाक्टरों के बारे में पता चला तो यहां आ गए। चेहरा अब पहले से काफी ठीक है। पहले आंख भी बंद नहीं हो रही थी, अब आसानी से आंख बंद हो जाती है।
घुटने को मिली काफी राहत
सत्यम विहार निवासी कंचन ने बताया कि अप्रैल 2025 को उनके दोनों घुटनों का रिप्लेसमेंट हुआ है। पहले एक महीने घर पर फिजियोथैरेपी लेती थी। बाद में किसी ने महाराष्ट्र मंडल की अत्य़ाधुनिक फिजियोथैरेपी सुविधाओं के बारे में बताया। अब उनका घुटना 50 डिग्री तक आसानी से मुड रहा है। उन्हें काफी राहत मिली।
शिवाजी महाराज महिलाओं का करते थे सम्मानः चेतन
सप्रे को ताउम्र पत्रकारिता का दिया वचन माखनलाल ने निभाया: शशांक



18 वर्ष से अधिक सभी को नियमित बीपी जांच अनिवार्यः डा. विजया पी.
रायपुर। रामकृष्ण केयर हास्पिटल रायपुर ने ‘ब्रेन स्टोक-समय है कदम उठाने का’ विषय को लेकर राजधानी के एक होटल में कार्यशाला का आयोजन किया। जिसमें इंडियन स्टोक एसोसिएशन की प्रेसिडेंट डा. विजया पी. डा. अरविंद शर्मा और डा. संजय शर्मा उपस्थित रहे। कार्यक्रम में महराष्ट्र मंडल के प्रतिनिध के रुप में मंडल समन्वयक श्याम सुंदर खंगन, मालती मिश्रा और सुधीर मिश्रा शामिल हुए।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए डा. विजया पी ने कहा कि 18 वर्ष और उससे अधिक आयु को या व्यस्कों को हाईपरटेंशन (बीपी) की जांच अनिवार्य है। भारत में हर चार में से एक व्यक्ति एचटीगुन है। केवल 50 फीसद को इसके बारे में जानकारी है, और केवल 12 फीसद लोगों को ने अच्छी तरह से नियंत्रित कर रखा है। स्टोक होने के साढ़े चार घंटे के अंदर मरीज को अस्पताल में भर्ती करना जरूरी है। उच्च रक्तचाप एक खामोश बीमारी है। इससे ब्रेन स्टोक, हार्ट अटैक, किडनी को नुकसान, दृष्टि में क्षति हो सकते है।
आईआईटी मुंबई में रूद्रांश का चयन.... आल इंडिया रैंक में 5757वां स्थान
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद डा. डॉ सुनील गोल्हानी के सुपुत्र रूद्रांश गोल्हानी का चयन आईआईटी मुंबई कोर ब्रांच में हुआ है। रूद्रांश को आल इंडिया रैंकिंग में 5757 वां स्थान प्राप्त हुआ है। महराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले, सचिव चेतन दंडवते सहित कार्यकारिणी ने रूद्रांश के उज्जवल भविष्य की कामना की है। रुद्रांश, डॉ सुनील गोल्हानी व डॉ जयश्री गोल्हानी के पुत्र है।
बतादें कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई मेन जनवरी सेशन का परिणाम में रूद्रांश ने 99.59 परसेंटाइल हासिल किया था। रूद्रांश ने बताया कि पढ़ाई के साथ रूटीन में मैने खेलने का भी समय निकाला। यानी पढ़ाई के बीच में थोड़ा रिलेक्स होने के लिए समय निकालना भी बेहद जरूरी है। सोशल मीडिया से दूरी बनाई रखी, लेकिन कुछ समय मोबाइल पर मूवी जरूर देखा। ताकि माइंड को थोड़ी रिलेक्स किया जा सके। रूद्रांश ने कहा कि सफलता के लिए अपने नोट्स से ही रिवीजन करें और टाइम मैनेजमेंट सीखे। पिछले सालों के प्रश्नपत्र का अभ्यास भी किया। इससे काफी सपोर्ट मिला।
संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में मनाया गया शाला प्रवेशोत्सव
रायपुर। महाराष्ट्र मंडळ द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर स्कूल में सोमवार, 16 जून को शाला प्रवेशोत्सव मनाया गया। शिक्षण सत्र 2025-26 के लिए शाला के प्रथम दिन बच्चों का तिलक लगाकर फूलों की वर्षा कर स्वागत किया गया। गर्मी की छुट्टी के बाद स्कूल लौटे बच्चे काफी खुश थे।
स्कूल के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने बताया कि शाला प्रवेशोत्सव को लेकर बच्चों के साथ शिक्षकों में भी उत्साह था। बच्चों को स्कूल के माहौल में ढालने के लिए आज पहले दिन बच्चों को एक्टिविटी कराई गई। नर्सरी में आए बच्चों का आज स्कूल में पहला दिन था, इसलिए शुरू में बच्चे थोड़ा रोए फिर अन्य बच्चों और शिक्षिकाओं के साथ घुल मिल गए।
हिंदी की स्वदेशी पत्रकारिता पर एक दिवसीय संगोष्ठी 19 जून को
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल रायपुर, छत्तीसगढ़ मित्र एवं छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान की ओर से पं माधवराव सप्रे जयंती समारोह के उपलक्ष्य पर एक दिवसीय संगोष्ठी का आयोजन महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में गुरूवार 19 जून को शाम चार बजे किया जा रहा है। संगोष्ठी का विषय हिंदी की स्वदेशी पत्रकारिता है।
महाराष्ट्र मंडल की साहित्य एवं भाषा प्रचार समिति प्रभारी सुश्री कुमुद लाड ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ साहित्य अकादमी रायपुर के अध्यक्ष शशांक शर्मा होंगे। अध्यक्षता वरिष्ठ भाषाविद् डा. चितरंजन कर करेंगे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रुप में वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज और महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले उपस्थित रहेंगे।
कुमुद लाड ने आगे बताया कि इस अवसर इंदौर से प्रकाशित वीणा के संपादक राकेश शर्मा को छत्तीसगढ़ मित्र पं. माधवराव सप्रे साहित्यिक पत्रकारिता सम्मान से नवाजा जाएगा। वहीं छत्तीसगढ़ मित्र के जून अंक को विमोचन भी होगा। इसके साथ डा. सीमा अवस्थी और डा. सीमा निगम द्वारा लिखित आपरेशन सिंदूर, डा. सुरेंद्र कुमार तिवारी द्वारा लिखित KABUI GRAMMAR AND VOCABULARY, डा ऋचा यादव द्वारा लिखित पर्यावरणीय मुद्दे और सामाजिक परिपेक्ष्य और दीप्ती श्रीवास्तव द्वारा लिखित मां उदास क्यूं है का विमोचन भी किया जाएगा।
पं. माधव राव सप्रे शोध केंद्र के सचिव डा, सुधीर शर्मा और छत्तीसगढ़ साहित्य एवं संस्कृति संस्थान के कोषाध्यक्ष डा. सुरेश शुक्ला ने बताया कि इस अवसर पर मराठी और हिंदी लेखक प्रो. आरडी हेलोडे, प्रो. अनिल काळेले, भाउराम ढोमने, शशि वरवंडकर रायपुर से और अनिता करडेकर व त्र्यंबक राव साटकर भिलाई का सम्मान किया जाएगा।
आज भी प्रासंगिक हैं समर्थ रामदास स्वामी की ‘दासबोध’

महिलाओं ने रामरक्षा और हनुमान चालीसा पाठ के साथ किया अथर्वशीर्ष का पाठ
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से प्रति शनिवार होने वाला राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा पाठ अभियान इस शनिवार 14 जून को संकष्टी चतुर्थी पर भी जारी रहा। मंडल के चौबेकालोनी, रोहिणीपुरम, सरोना, देवेंद्रनगर, टाटीबंध और कोटा केंद्र में महिलाओं ने रामरक्षा और हनुमान चालीसा पाठ के साथ अथर्वशीर्ष का पाठ किया।

आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि चौबे कालोनी महिला केंद्र की टीम ने केंद्र की सदस्या श्रुति बर्वे के घर राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया। चौबे कालोनी केंद्र की महिलाओं द्वारा गत 40 सालों से हर महीने संकष्टी चतुर्थी पर अथर्वशीर्ष का पाठ किया जा रहा है। चतुर्थी शनिवार को होने के कारण महिलाओं ने हनुमान चालीसा का पाठ भी किया। इस दौरान श्रुति बर्वे, मनीषा वरवंडकर, अक्षता पंडित, प्राची डोंनगावकर, अपर्णा कालेले, सुषमा आप्टे, शीतल आर्विकर, अवंती अग्निहोत्री, कीर्ति हिशिकर, आरती करांडे, गौरी क्षीरसागर, पुष्पा गोवर्धन, मालविका राजिमवाले और सुनीति परांजपे उपस्थित रही।

आस्था काले ने आगे बताया कि इसी तरह देवेंद्र नगर महिला केंद्र द्वारा हुए पाट के दौरान सविता भागड़ीकर, स्नेहलता दुबे, साक्षी टोले, शताब्दी पांडेय और माधवी पांडे उपस्थित रहीं। टाटीबंध केंद्र में शिल्पा भोपापुरकर, लीना साठे, मंजू मरकले, विनोद गोवर्धन, विद्या डेंगे, मोहन परमानंद उपस्थित रहे। सरोना केंद्र की महिलाओं ने सहसंयोजिका विभा पांडे के निवास पर गणपति अथर्वशीर्ष एवं हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान विभा पांडे, डॉ अलका गोळे, जयश्री ढेकणे, दीप्ती शिलेदार, आरती ठोंबरे उपस्थित रही।

आस्था काले ने आगे बताया कि रोहिणीपुरम महिला केंद्र की महिलाओं ने रोहिणीपुरम स्थित गौरीशंकर मंदिर में रामरक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा पाठ के साथ अथर्वशीर्ष का पाठ किया। इसके साथ गणपति, शिव और हनुमान जी के भजन का गायन भी महिलाओं ने किया। इस दौरान श्यामल जोशी, राजेश्री वैद्य, अनुभा साड़ेगांवकर, रचना ठेंगड़ी, अल्का कुलकर्णी, चित्रा बल्की, मीना विभुते, साधना बहिरट और श्रीदेवी उपस्थित रहीं।

काले ने आगे बताया कि कोटा केंद्र की महिलाओं ने प्रीति यादव (मलेवार) के निवास में रामरक्षा और हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान मोहिनी भिड़े, शुभांगी शेडें, कुसुम मलेवार, वैजयंती शेडें, शुदक्षणा शेडें, जया देशमुख, माधुरी इंगोले, विदुला चिखलीकर, वंदना कालमेघ, गौरी शेडें, श्वेता खरे, पूर्वा खरे, वर्षा चोपकर, साक्षी परमानंद, वैशाली पुरोहित सम्मिलित रही।
पांच दिवसीय 'टीचर्स डेवलपमेंट वर्कशॉप' के समापन समारोह में पहुंचे मंडल अध्यक्ष काले... बोले- कमजोर बच्चों पर शुरू से हो फोकस


‘अपने मोबाइल पर सेव नंबर को पहले करें फोन, फिर ले सोशल मीडिया का सहारा’
रक्तदाता दिवसः रक्तदाता दिवस पर महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष ने की लोगों से अपील
रायपुर। आज मेडिकल इमरजेंसी होने पर हर चौथे मरीज को ब्लड की आवश्यकता पड़ ही जाती है। ऐसे में हमारे अपने लोग तत्काल सोशल मीडिया में मैसेज फावर्ड करने लग जाते है। ताकि कोई आए और उनके काम आ सके। 67 बार रक्तदान कर चुके महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि जब भी किसी को रक्त की आवश्यकता हो तो उन्हें पहले अपने मोबाइल पर सेव नंबरों पर काल करना चाहिए। आजकल सभी के मोबाइल में हजार से अधिक लोगों के नंबर सेव होते है, ऐसे में कोई न कोई आपकी मदद के लिए आगे जरूर आएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग सिर्फ शादी पार्टी में न्यौता देने के लिए नहीं है। यह आपके अपने लोग है, जो जरूरत पड़ने पर आपके काम आएंगे।
काले ने कहा कि 14 जून को प्रतिवर्ष विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाता है। यह दिन उन स्वैच्छिक और अवैतनिक रक्तदाताओं को समर्पित होता है जो अपने रक्तदान के माध्यम से अनगिनत जीवन बचाते हैं। यह न केवल आभार व्यक्त करने का अवसर है, बल्कि सुरक्षित और नियमित रक्तदान की निरंतर आवश्यकता को उजागर करने का भी समय है। आज की युवा पीढ़ी को रक्तदान के लिए प्रेरित करना जरूरी है। मेडिकल इमरजेंसी होने पर हम तत्काल समाजसेवी संगठनों के वाट्सएप ग्रुप से आस लगा बैठते है, जबकि आप सभी के पास अपने-अपने मोबाइल नंबर पर न जाने कितने रक्तदाताओं के नाम होंगे। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया है कि मेडिकल इमरजेंसी पर रक्त की आवश्यकता होने पर अपने मोबाइल में सेव नंबरों पर पहले काले करें, यह काम एक-दो घंटें में आसानी से हो सकता है। फिर भी आपूर्ति नहीं होती है तो समाजसेवी संगठनों के वाट्सएप ग्रुप में मैसेज शेयर करें।
भीमराव मेडिकल कालेज में पैथोलाजी विभाग के अध्यक्ष और अब तक 43 वर्षों में 126 से अधिक बार रक्तदान कर चुके डा. अरविंद नेरल ने कहा कि सेवा का संकल्प लिया जाए तो उसकी कोई सीमा नहीं होती है। उन्होंने बताया कि नया साल पर, अपने जन्मदिन 2 जून पर और राष्ट्रीय रक्तदान दिवस 1 अक्टूबर को वें नियमित रुप से रक्तदान करते आ रहा है। डा नेरल इस माह जून 2025 65 वर्ष की हो गए। मेडिकली रुप से वे अब रक्तदान नहीं कर सकते, लेकिन लोगों को जागरूक करने के लिए उनका अभियान जारी रहेगा। अब वे रक्तदान को आयोजित कार्यशाला, स्कूल और कालेजों में सेमिनार पर अपनी सहभागिता बढ़ाएंगे ताकि इसके प्रति युवा पीढ़ी का रूझान बढ़ सके।
महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद और 100 बार रक्तदान और 5 बार एसडीपी (सिंगल डोनर प्लेटलेट्स) कर चुके अरविंद जोशी ने कहा कि आज से समय में युवाओं को एसडीपी करना चाहिए। एसडीपी का मतलब सिंगल डोनर प्लेटलेट्स (Single Donor Platelets) है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें एक ही रक्तदाता से प्लेटलेट्स को एक विशेष मशीन (एफेरेसिस मशीन) द्वारा अलग करके इकट्ठा किया जाता है, और फिर वह प्लेटलेट्स, बाकी रक्त के साथ, दाता को वापस कर दी जाती है। यह उन रोगियों के लिए उपयोगी है जिन्हें प्लेटलेट्स की आवश्यकता होती है, जैसे कि डेंगू, मलेरिया, या ब्लड कैंसर जैसी बीमारियों में। एसडीपी का उपयोग करने से, संक्रामक रोगों का खतरा कम होता है, और यह सुनिश्चित किया जाता है कि मरीज को एक ही दाता से पर्याप्त मात्रा में प्लेटलेट्स मिलें, जिससे अन्य दाताओं से प्लेटलेट्स को मिलाने की आवश्यकता नहीं होती है।
टीचिंग को धारदार बनाने स्वयं का अपडेटशन बेहद जरूरीः नीपा चौहान
संपूर्ण व्यक्ति विकास पर शिक्षकों को ध्यान देना होगा: अर्पिता
संस्कार सीखें ही नहीं, आत्मसात भी करें: काले
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति के ऑनलाइन शिविर की सफलता में जितने बधाई के पात्र शिविरार्थी बच्चे हैं, उससे कहीं ज्यादा उनके अभिभावक प्रशंसा के पात्र हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को एकदम सही उम्र में संस्कार सीखने के लिए प्रेरित किया और उनका प्रतिदिन ऑनलाइन क्लास के समय साथ भी दिया। साथ ही शिविर में बच्चों को विभिन्न विधाओं में पारंगत करने वाली प्रशिक्षिका भी अभिनंदनीय हैं। काले ने कहा कि बच्चों ने शिविर में जो संस्कार सीखें हैं, उसे जीवन में आत्मसात करना है और इसे अपनी दिनचर्या भी बनाना है।
मुख्यमंत्री साय से मुलाकात में महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष काले ने रखी मांग... बच्चों को सेल्यूलर जेल की प्रेरक यात्रा कराए सरकार
अनुपयोगी सामग्रियों का रचनात्मक प्रयोग... सजे घर के आंगन
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ योजना अंतर्गत समुदाय प्रबिंधत प्रशिक्षण केंद्र में लाभार्थी महिलाओं को संत ज्ञानेश्वर हायर सेकेंडरी स्कूल की शिक्षिका अस्मिता कुसरे ने अनुपयोगी सामग्रियों का रचनात्मक प्रयोग पर घर सजाने के टिप्स दिए। अभियान की लाभार्थी महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना था।
प्रशिक्षण के दौरान अस्मिता कुसरे ने प्रतिभागियों को घर में अनुपयोगी पड़ी सामग्रियों का रचनात्मक उपयोग करते हुए सजावटी और दैनिक उपयोग की वस्तुएं तैयार करना सीखाया। खासकर महिलाओं ने आसानी से और खूबसूरती से कारपेट रंगोली, फ्लावर रंगोली बनाना सीखा। उन्हें फूलों की पंखुड़ियों, गुलाल, रंगोली, सुपारी, मास्किटो क्वाइल सहित विभिन्न डिजाइनों और तकनीकों का उपयोग करते हुए रंगोली बनाना सिखाया गया। जो व्यावहारिकता का सुंदर संगम प्रस्तुत करती है।
महाराष्ट्रीयन महिलाओं ने पति के लिए की वट सावित्री की पूजा
रायपुर। राजधानी में मंगलवार को ज्येष्ठ मास के पूर्णिमा के दिन महाराष्ट्रीयन समाज की महिलाओं ने वट सावित्री की पूजा कर अपने पति की लंबी आयु की कामना की।
इस दौरान शहर के अलग-अलग कॉलोनी-मोहल्ले में बरगद पेड़ की पूजा कर समाज की महिलाओं फेरे लिए। उत्तर भारत के अधिकतर क्षेत्र में ज्येष्ठ मास के अमावस्या के दिन वट सावित्री की पूजा की जाती है। शहर में डीडीनगर, डंगनिया, रोहिणीपुरम, रायपुरा, फाफाडीह, प्रोफेसर कॉलोनी, सुंदर नगर, कुशालपुर समेत शहर के अन्य कॉलोनियों में मराठी समाज की महिलाएं मनाते हुए दिखाई दी।
महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि महाराष्ट्रीयन समाज के लोग हर साल ज्येष्ठ पूर्णिमा को वट सावित्री की पूजा करते हैं। वट सावित्री व्रत हिंदू धर्म में विवाहित महिलाओं द्वारा अपने पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि के लिए किया जाने वाला एक विशेष व्रत है। यह व्रत विशेष रूप से उत्तर भारत, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश सहित महाराष्ट्र में मनाया जाता है।