महाराष्ट्र नाट्य मंडल का चुनाव 30 जुलाई को... जल्द शुरू होगी गप्पा और प्रेक्षकांनी क्षमा करावी की तालीम
रायपुर। महाराष्ट्र नाट्य मंडल के आम चुनाव 30 जुलाई की शाम 7 बजे होंगे। महाराष्ट्र मंडल के मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन बतौर निर्वाचन अधिकारी चुनाव संपन्न कराएंगे। नाट्य मंडल के सचिव प्रसन्न विजय निमोणकर ने इस आशय की जानकारी देते हुए बताया कि पदेन अध्यक्ष अजय मधुकर काले से चुनाव तिथि की स्वीकृति ले ली गई है।
निमोणकर ने बताया कि बैठक में उपस्थित सदस्य आम सहमति से गप्पा (गपबाजी) और प्रेक्षकांनी क्षमा करावी (दर्शक हमें क्षमा करें) की रिहर्सल 11 जुलाई से चौबे कालोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल में शुरू करने के लिए तैयार हैं। इन दोनों नाटकों का मंचन गणेशोत्सव से पहले महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह के सौ. कुमुदिनी वरवंडकर मंच पर किया जाएगा। गणेशोत्सव में दोनों ही नाटकों का पुनर्मंचन संभावित है। नाट्य मंडल की अध्यक्ष डा. अभया जोगलेकर ने बैठक में शामिल सदस्यों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि सभी कलाकारों ने दोनों नाटकों के सफल मंचन का बीड़ा उठाया है, तो उन्हें अनुशासन बद्ध रिहर्सल करना चाहिए और समय का विशेष ध्यान देना चाहिए।
नाट्य मंडल के निर्देशक अनिल श्रीराम काळेले ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल के तत्वावधान में दिसंबर-जनवरी में बृहन्न महाराष्ट्र मंडल का राष्ट्रीय सम्मेलन प्रस्तावित है। इसमें देशभर के महाराष्ट्र मंडल के सैकड़ों प्रतिनिधि शामिल होंगे। हमारी कोशिश होनी चाहिए कि इस अति महत्वपूर्ण सम्मेलन में महाराष्ट्र नाट्य मंडल के नाटकों का मंचन हो। ताकि हमारे महाराष्ट्र नाट्य मंडल के साथ महाराष्ट्र मंडल ब्रांडिंग नेशनल लेवल पर हो। इसके लिए हमें मानसिक रुप से तैयारी करनी पड़ेगी। यदि गप्पा और प्रेक्षकांनी क्षमा करावी के बाद नया नाटक तैयार नहीं किया जा सका तो कम से कम इन दोनों नाटकों को और भी बेहतर तरीके से परफेक्शन के साथ मंचित किया जाए।
निमोणकर ने बैठक में संस्कार भारती की ओर से 17 मई से शुरू हुए रंग संस्कार महोत्सव में नाट्य मंडल की ओर से प्रस्तुत इंद्रधनु (इंद्रधनुष) की चर्चा की। उन्होंने बताया कि संस्कार भारती की ओर से शिकारपुरी धर्मशाला में आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में इंद्रधनु के नाटकों की चर्चा की गई। साथ ही इन नाटकों से कई बातें प्रशिक्षुओं को समझाई गई। कार्यशाला के प्रमुख प्रशिक्षक मुंबई से पधारे प्रमोद पवार ने इंद्रधनु के नाटकों रक्तदान, विसंवाद, कलावंत (कलाकार), हरवलेली (गुमी हुई), अंबुताई, तो पोरगा (वो लड़का) और पत्र लिवन्यास कारण की (पत्र लिखने का काऱण है कि) की जमकर प्रशंसा की थी और आश्चर्य व्यक्त किया था कि मुंबई से सैकड़ों किलोमीटर दूर इतनी बढ़िया मराठी के साथ ज्ञानवर्धक और मनोरंजक नाटक देखकर मन प्रफुल्लित हो गया।
निमोणकर ने 30 जुलाई को नाट्य मंडल के चुनाव में समस्त सदस्यों से उपस्थिति की अपील की है। बैठक में अर्पणा काळेले, दिलीप लांबे, वनजा भावे, रंजन मोड़क, भगीरथ काळेले, प्रिया बक्षी, गौरी क्षीरसागर, अस्मिता कुसरे, कुंतल काळेले, वंदना निमोणकर, नुपुर गुप्ते, परितोष डोनगांवकर, रविंद्र ठेंगड़ी, पवन ओगले, दिपाली लांबे, कीर्ति हिशीकर, अरूण भावे, अभिषेक बक्षी, प्रेम उपवंशी, प्रवीण क्षीरसागर समेत अनेक सदस्य उपस्थित रहे।
















