दिव्य महाराष्ट्र मंडल
महाराष्ट्र मंडल के गरबा महोत्सव में रीमिक्स बीट्स की धूम… चौकड़ी, छकड़ी पर थिरके सभासद
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में आयोजित एक दिवसीय गरबा महोत्सव में मां अंबे की स्तुति से शुरू हुए गरबा में रीमिक्स बीट्स सुनाई दी। भारत माता और राधा कृष्ण जैसे ड्रेस कोड में पहुंचे मंडल के आजीवन सभासदों ने जमकर गरबा किया।

गरबा करने पहुंचे सभासदो ने कहा कि गरबा महोत्सव में मार्डन बीट पर झूमने को मौका तो मिला ही, साथ ही मां अंबे की भक्ति का अवसर भी मिला। सबने मिलकर खूब धमाल भी किया।

मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले और मंडल उपाध्यक्ष गीता दलाल ने बताया कि मंडल के सदस्यों की मांग पर इस वर्ष एक दिवसीय गरबा महोत्सव का आयोजन किया गया।

कहीं चौकड़ी के साथ पैर की थिरकन व ताली की ताल, तो कहीं उलटा घुमकर छकड़ी ताल में पांव व हाथों का तालमेल के साथ युवतियों, महिलाओं और युवाओँ ने जमकर गरबा खेला। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे प्रतिभागी चौकड़ी, छकड़ी, डांडिया पर जमकर थिरके।

कोटा केंद्र की महिलाओं ने जोगवा, गोंधल के साथ की देवी स्तुति
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के कोटा महिला केंद्र की महिलाओं ने नवरात्रि के उपलक्ष्य में डा.वर्षा अजित वरवंडकर के ऑफिस माय अगला कदम में मां अम्बा बाई के मनमोहक भजन गया। इस दौरान सभी ने बड़े ही पारंपरिक तरीके से जोगवा, गोंधल के साथ देवी की स्तुति की।
डा. वर्षा वरवंडकर ने बताया कि जोगवा देवी की उपासना से जुड़ी एक अवधारणा है। जोगवा मांगना यानी भीख मांगना या कृपा प्रसाद मांगना। देवी, जैसे अंबा, भवानी, रेणुका आदि शक्तिदेवियों के सामने आंचल फैलाकर कृपा प्रसाद मांगा जाता है। जोगते और जोगतिणी इस प्रथा के लोकसंस्कृति के उपासक माने जाते हैं।
उन्होंने बताया कि इसके साथ गोंधळ भी किया गया। गोंधल की उत्पत्ति गोंधरने शब्द से हुई है। जिसका अर्थ है शोर मचाना, गोंधल का उद्देश्य ईश्वर को धरती पर उतरने देना और मानव आत्मा को धोना, उसे सभी भ्रष्टाचार और बुराइयों से शुद्ध करना है। इस तरह विभिन्न भजनों के माध्यम से कुलस्वामिनी अम्बा बाई की प्रार्थना की गई। इस दौरान कोटा केंद्र की तरफ से माधुरी इंगोले, मोहिनी भिडे, आरती दिवाटे, कुसुम मललेवार, सुदक्षणा शिंदे, वैशाली पुरोहित, दीप्ति पंचभाई, वंदना कालमेघ, नेहा साठे और वैशाली खांडेकर उपस्थित थीं।
नवरात्रि पर देवी भजनों के साथ अहिल्याबाई के सुंदर भजन का गायन
रायपुर। नवरात्र के उपलक्ष्य पर महाराष्ट्र मंडल के चौबे कालोनी केंद्र की महिलाओं ने केंद्र की संयोजिका अक्षता पंडित के निवास पर देवी भजन का कार्यक्रम रखा। इस दौरान महिलाओं ने देवी के सुंदर हिंदी और मराठी भजनों का गायन किया। इस दौरान पूरा माहौल पूरी तरह भक्ति मय बन गया। चौबे कालोनी केंद्र की संयोजिका अक्षता पंडित ने बताया कि इस अवसर पर मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले, चारूशीला देव और मंजुषा वैशंपायन ने रानी देवी अहिल्याबाई होल्कर के जीवन की कुछ घटनाएं बताई। उनकी न्याय प्रियता, उनका पर्यावरण के प्रति प्रेम ,उनके शिव भक्ति के बारे मे सुन्दर वर्णन किया।

इस दौरान मनीषा वरवंडकर, अक्षता पंडित, चारुशिला देव, गौरी क्षीरसागर, अपर्णा काळेले, अल्का मराठे, सुनीता कुलकर्णी, अंजली वैद्य, उज्जवला पुराणिक, सीमा गनोदवाले, अजिता गनोदवाले, संध्या हिशीकर, सुनंदा हिशीकर, मंजूषा वैशंपायन, अवंती अग्निहोत्री, धनश्री पेंडसे, माधुरी डबली, सुनीता बक्षी, अर्चना मुकादम, अंकिता किरवई और भारती पलसोदकर प्रमुख रुप से उपस्थित थीं।
महाराष्ट्र मंडल में एक दिवसीय गरबा शुक्रवार 11 अक्टूबर को
रायपुर। चौबे कॉलोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल में अष्टमी शुक्रवार की रात 8:00 बजे एक दिवसीय गरबा समारोह का आयोजन किया गया है। उपाध्यक्ष गीता दलाल के मुताबिक मंडल के आजीवन सभासदों के भारी मांग के चलते महाराष्ट्र मंडल में गरबा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।
दिव्यांग बालिका विकास गृह की बच्चियों को रोजगार देने में संजीवनी अस्पताल ने दिखाई रुचि
- महाराष्ट्र मंडल के विभिन्न सेवाभावी कार्यों से प्रभावित दिखे श्री सत्य साईं स्वास्थ्य और शिक्षा ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीनिवास
रायपुर। श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल ट्रस्ट के अध्यक्ष सी श्रीनिवास का महाराष्ट्र मंडल ने मंगलवार को नवा रायपुर में अभिनंदन किया। संजीवनी अस्पताल बाल ह्रदय देखभाल केंद्र में महाराष्ट्र मंडल के पदाधिकारियों ने श्रीनिवास को मंडल की प्रत्येक प्रकल्पों, समितियों और महिला केद्रों की गतिविधियों से अवगत कराया। श्रीनिवास ने दिव्यांग बालिका विकास गृह के माध्यम से महाराष्ट्र मंडल द्वारा किए जा रहे कार्यों की जमकर प्रशंसा की और यहां से स्वावलंबी बनकर निकलने वाली बच्चियों को संजीवनी अस्पताल के माध्यम से रोजगार देने की बात कहीं।

महाराष्ट्र मंडल के प्रतिनिधियों के हाथों अभिनंदन से अभिभूत श्रीनिवास ने कहा कि दिव्यांग बच्चियों के लिए आप लोगों का समर्पण प्रशंसनीय है। इसी तरह संत ज्ञानेश्वर इंग्लिश मीडियम स्कूल के माध्यम से निर्धन परिवार के बच्चों को शिक्षा देने की पहल भी प्रेरक है। वाघोळीकर मेडिकल इक्यूपमेंट योजना के संदर्भ में उन्होंने कहा कि मरीजों के लिए यह प्रयास बहुत अच्छा है। और लोगों को इसकी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र मंडल के आमंत्रण को स्वीकर करते हुए कहा कि वे चौबे कालोनी स्थित महाराष्ट्र मंडल भवन और अन्य प्रकल्पों को देखना चाहेंगे। संभव हुआ तो भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर को भी मंडल में लाकर सन् 1971 का इतिहास दोहराना चाहेंगे।
आकाश दीप बनाने में बच्चों में दिखा उत्साह... बनाए कई आकर्षक दीप
- महाराष्ट्र मंडल में हुआ एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन
रायपुर। आकाशदीप दीपावली पर इसका अलग ही महत्व होता है। कुछ समय पूर्व तक लोग अपने घरों को इन्हीं आकाशदीपों से सजाया करते थे। अपनी सांस्कृतिक विरासत को संयोये रखने के लिए महाराष्ट्र मंडल की कला एवं संस्कृति समिति ने आकाशदीप बनाने के लिए प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया। शिविर में बच्चों के साथ बड़ों ने पूरे उत्साह के साथ अपनी उपस्थिति दी।
प्रशिक्षण शिविर की समन्वयक भारती पलसोदकर ने बताया कि कला एवं संस्कृति समिति के प्रमुख अजय पोतदार, शेखर क्षीरसागर और अक्षता पंडित ने उत्साही बच्चों को आकाशदीप बनाना सीखाया। इस दौरान बच्चें उनके द्वारा किए गए पेपर कटिंग और आकाशदीप बनाने के लिए तरीके को बड़े ध्यान से देख रहे थे। फिर बच्चों ने खुद से अपने लिए आकाश दीप बनाया।
प्रशिक्षण शिविर में पहुंची 11 वर्षीय वेदांती पांडे ने कहा कि स्कूल में छुट्टियां लगी हुई है। यहां आकर हमने आकाशदीप बनाने का प्रशिक्षण लिया है। घर पर जाकर और आकाशदीप बनाउंगी। और इन्हीं आकाशदीप से मैं इस दीपावली अपने घर को सजाउंगी।
अहिल्या बाई में थी दूरदर्शिता... पर्यावरण के साथ जीव जंतु की भी थी चिंता
- देवपुरी स्कूल में मनाई गई अहिल्या बाई की 300वीं वर्षगांठ
रायपुर। रानी अहिल्या बाई होल्कर की शौर्य गाथा जितनी प्रेरणादायी है उनकी दूरदर्शिता भी आत्मसात करने योग्य है। रानी अहिल्या भगवान शिव की बड़ी भक्त थीं। पार्थिव शिवलिंग निर्माण और तालाब और नदियों में विर्सजन में भी उनका विजन नजर आता है। शिवलिंग में चढ़े चावल व अन्य के अन्य दानें तालाब में प्रवाहित करने पर तालाब में रहने वाले जीव जंतु उसे अपना आहार बनाते। वहीं अगर दाने तालाब के किनारे पहुंच गए और पेड़ उठ गए तो पेड पौधे के पत्ते झड़कर जमीन में गिरेंगे और यह मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ाएंगे। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने प्राथमिक और माध्यमिक शाला देवपुरी में शनिवार 5 अक्टूबर को आयोजित अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती के दौरान कहीं।
माध्यमिक शाला देवपुरी और प्राथमिक शाला देवपुरी में 5 अक्टूबर को अहिल्याबाई होलकर की 300 वी वर्षगांठ मनाई गई। जिसमें अहिल्याबाई होलकर के जीवनी के बारे मे कुछ प्रेरणादाई बातें महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताई। उन्होंने कहा कि रानी अहिल्या बाई होल्कर ने अपने राज्य में कई तीर्थ स्थानों के साथ ही कई मंदिर, घाट, कुएं, बावडियों, भूखे लोगों के लिए अन्नसत्र और प्याऊ का निर्माण भी कराया। अहिल्याबाई महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। कार्यक्रम में प्रधान पाठक साहू सर, शिक्षिका रिचा देवांगन, ममता देवांगन, जीवनलता मिंज, मंजू दुबे, सहित 250 से अधिक बच्चे उपस्थित थे।
मंडल के पांच महिला केंद्रों में हुआ रामरक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ





रानी अहिल्या बाई की शौर्य गाथा हमें देती है धर्म और न्याय का संदेश
- अवंती विहार और डंगनिया महिला केंद्र में हुआ भजन संध्या का आयोजन
रायपुर। अहिल्या बाई होलकर एक ऐसी महारानी के रूप में जाना जाता है, जिन्होंनें भारत के अलग-अलग राज्यों में मानवता की भलाई के लिए अनेक कार्य किए थे। उनकी शौर्य गाथा हमें अपनी जीवन और धर्म और न्याय का संदेश देती है। आज पूरे देश उनकी जयंती के 300 वर्ष पूरे होने पर त्रिशताब्दी समारोह मना रहा है। देश भर में आयोजन किए जा रहे है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र मंडल रायपुर के अवंती विहार और डंगनिया महिला केंद्र की महिलाओं द्वारा नवरात्र पर भजन संध्या के साथ अहिल्या बाई होल्कर त्रिशताब्दी समारोह का आयोजन किया गया।
अवंती विहार महिला केंद्र की संयोजिता जागृति भाखरे ने बताया कि नवरात्र के अवसर पर शाम को केंद्र की महिलाओं द्वारा देवी भजन का आयोजन किया गया, साथ ही देवी स्वरूपा रानी अहिल्या बाई होल्कर का त्रिशताब्दी समारोह भी मनाया गया। कार्यक्रम में विशेष रुप में महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विखाशा तोपखानेवाले उपस्थित रहीं। उन्होंने केंद्र की महिलाओं को रानी अहिल्या बाई होल्कर की शौर्य गाथा सुनाई।
विशाखा तोपखानेवाले ने कहा कि 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के अहमदनगर के छौंड़ी ग्राम में हुआ इनका जन्म हुआ था। वर्ष 2024 को पूरे देश उनकी 300वीं जंयती पर शताब्दी समारोह मना रहा है। रानी अहिल्या बाई न्याय करते समय अपने पराये में जरा भी भेद नहीं करती थी। व्यक्ति से लेकर पशुओं तक के दर्द को समझती थी, एक बार क्रूरता के मामले में बेटे के दोषी पाये जाने पर अहिल्याबाई होलकर अपने ही बेटे को रथ के नीचे कुचलकर मारने के लिए निकल गई।

डंगनिया केंद्र में आयोजित भजन संध्या के दौरान कामकाजी महिला वसती गृह प्रभारी नमिता शेष ने अहिल्या बाई होल्कर की वीर गाथा को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई होल्कर भगवान में विश्वास रखने वाली औरत थी और वह प्रतिदिन शिवजी के मंदिर पूजन आदि करने आती थी। उन्होंने कई तीर्थ स्थानों के साथ ही कई मंदिर, घाट, कुएं, बावडियों, भूखे लोगों के लिए अन्नसत्र और प्याऊ का निर्माण भी कराया।
अहिल्याबाई के मराठा प्रांत का शासन संभालने से पहले यह कानून था कि, अगर कोई महिला विधवा हो जाए और उसका पुत्र न हो, तो उसकी पूरी संपत्ति सरकारी खजाना या फिर राजकोष में जमा कर दी जाती थी, लेकिन अहिल्याबाई ने इस कानून को बदलकर विधवा महिला को अपनी पति की संपत्ति लेने का हकदार बनाया। इसके अलावा उन्होंने महिला शिक्षा पर भी खासा जोर दिया। अहिल्याबाई महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं।
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स्वच्छता अभियान: सीएम ने महाराष्ट्र मंडल का किया सम्मान
महाराष्ट्र मंडल ने सफाई अभियान चलाकर दिया स्वच्छ रायपुर का संदेश
- अनुपम गार्डन के पास चलाया अभियान... लोगों को किया जागरूक
रायपुर। गांधी जयंती के अवसर पर बुधवार, 2 अक्टूबर को महाराष्ट्र मंडल की टीम ने व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाकर स्वच्छ रायपुर का संदेश सभी को दिया। सभी ने अनुपम गार्डन के प्रवेश द्वार के पास सफाई अभियान चलाया। हाथों में झाड़ू लेकर मुख्य द्वार के पास फैले कचरों की सफाई की।

महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने कहा कि हमें सिर्फ एक दिन ही नहीं अपितु प्रतिदिन स्वच्छता को लेकर सजग रहना चाहिए। निगम के सफाई कर्मचारियों को हमें सलाम करना चाहिए, वे प्रतिदिन लोगों के घरों से कचरों को लेकर उसका निष्पादन करते है। महाराष्ट्र मंडल की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने स्वच्छता संदेश देते हुए कहा कि आज हम संकल्प लें कि हम कचरा नहीं फैलाएंगे। चलती गाड़ी से कचरा बाहर फेंकने वालों को टोकेंगे।

कामकाजी महिला वसती गृह की प्रभारी नमिता शेष ने कहा कि कोरोना जैसी भयावह बीमारी हमें बहुत कुछ सीखा गई। अपने साथ अपने आसपास की साफ-सफाई रखने बेहद जरूरी है। कला एवं संस्कृति समिति की प्रमुख भारती पलसोदकर ने मंडल के सफाई अभियान में जुटने वाले सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह सफाई अभियान हमें प्रतिदिन चलाना चाहिए। कोई जरूरी नहीं कि हम आयोजन और एक साथ एकत्र होकर ही सफाई करें। घर और अपने मोहल्ले को स्वच्छ रखने का बीड़ा हमें उठाना होगा।

इस अवसर पर मंडल के मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन, दिव्यांग बालिका विकास गृह प्रभारी प्रसन्न निमोणकर, सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी, भालचंद्र पलसोदकर, दीपक पात्रीकर, शेखर क्षीरसागर, अपर्णा देशमुख, दिव्या पात्रीकर, अर्चना मुकादम, किशोर साहू, अविनाश बल्लाल, प्रमुख रुप से उपस्थित थे।

महाराष्ट्र मंडल का विशेष आयोजन.... वरिष्ठजन दिवस पर रामलला दर्शन के अनुभव बांटे बुजुर्गों ने


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