देश-विदेश
बिहार के पूर्व CM कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न, राष्ट्रपति भवन ने किया ऐलान
नईदिल्ली। भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक, राजनीतिज्ञ और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को भारत रत्न दिया जाएगा। कर्पूरी ठाकुर को उनकी लोकप्रियता के कारण जननायक कहा जाता था। उनका जन्म बिहार के समस्तीपुर में हुआ था। उनकी जन्म शताब्दी के मौके की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति भवन की ओर से इसका ऐलान किया गया। इस पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रसन्नता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जननायक स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर ने अपना पूरा जीवन देश सेवा के लिए बिताया l सामाजिक न्याय को लेकर वे सदैव प्रतिबद्ध रहे। अंग्रेजी साम्राज्यवाद के दौर में ब्रिटिश शोषण के विरुद्ध संघर्ष एवं आजाद भारत को सकारात्मक दिशा देने में स्वर्गीय ठाकुर का बड़ा योगदान रहा।
जननायक कर्पूरी ठाकुर एक स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षक और राजनीतिक नेता के रूप में जाने जाते थे। बिहार के दूसरे उपमुख्यमंत्री और फिर दो बार मुख्यमंत्री रहे कर्पूरी ठाकुर ने राजनीतिक जीवन में अपने सिद्धांतों को नहीं छोड़ा। इसकी वजह से वह असली हीरो बन गए।’कर्पूरी ठाकुर भारत छोड़ो आन्दोलन में कूद पड़े, उन्हें 26 महीने तक जेल में रहना पड़ा। उन्होंने 22 दिसंबर 1970 से 2 जून 1971 तक और 24 जून 1977 से 21 अप्रैल 1979 तक बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया। कर्पूरी ठाकुर जैसा समाजवादी विचारधारा पर जीने वाला व्यक्ति अब बहुत कम ही देखने को मिलेंगे।
कर्पूरी ठाकुर का जन्म 24 जनवरी 1924 को बिहार के समस्तीपुर जिले में हुआ था. वह एक नाई परिवार से ताल्लुक रखते थे. उनके पिता गोकुल ठाकुर एक किसान थे. कर्पूरी ठाकुर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से स्नातक की उपाधि प्राप्त की. कर्पूरी ठाकुर छात्र जीवन से ही राष्ट्रीय आंदोलन में सक्रिय थे.
उन्होंने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया और 26 महीने जेल में बिताए. जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने राजनीति में सक्रिय रूप से भाग लिया. सन 1952 में कर्पूरी ठाकुर पहली बार बिहार विधानसभा के सदस्य चुने गए. वो सोसलिस्ट पार्टी के टिकट पर ताजपुरी विधानसभा से चुनाव लड़े और जीते. इसके बाद वह लगातार चार बार विधानसभा के सदस्य चुने गए. सन 1967 में उन्हें बिहार के उपमुख्यमंत्री बनाया गया.सन 1970 में कर्पूरी ठाकुर बिहार के मुख्यमंत्री बने. उन्होंने गरीबों और दलितों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू की. कर्पूरी ठाकुर के मुख्यमंत्री रहते हुए बिहार में पहली बार गैर-लाभकारी जमीन पर मालगुजारी टैक्स को खत्म किया गया।
केंद्र सरकार का बड़ा ऐलान... 22 जनवरी को पूरे देश में आधे दिन की छुट्टी
नईदिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने गुरुवार, 18 जनवरी को बड़ा ऐलान कर दिया। केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दिन 22 जनवरी को आधे दिन के लिए सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे। उन्होंने कहा कि जनभावनाओं को देखते हुए ये फैसला लिया गया है।
सरकार ने अपने आदेश में कहा, ”अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी 2024 को पूरे भारत में मनाई जाएगी। कर्मचारियों उत्सव में भाग ले सकें इसके लिए यह निर्णय लिया गया है कि पूरे भारत में सभी केंद्रीय सरकारी कार्यालय, केंद्रीय संस्थान और केंद्रीय औद्योगिक प्रतिष्ठान 22 जनवरी 2024 को दोपहर दो बजकर 30 मिनट तक आधे दिन के लिए बंद रहेंगे।
बता दें कि अयोध्या में राम मंदिर के गर्भगृह में राम लला की नई मूर्ति का ‘प्राण प्रतिष्ठा’ समारोह सोमवार 22 जनवरी को संपन्न होना है। यह समारोह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया जाना तय है। कार्मिक मंत्रालय ने केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों/विभागों को जारी आदेश में कहा, “अयोध्या में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का जश्न 22 जनवरी 2024 को पूरे भारत में मनाया जाएगा। इस उत्सव में कर्मचारी भाग ले सकें, इसलिए यह निर्णय लिया गया है कि पूरे भारत में केंद्र सरकार के सभी कार्यालय, केंद्रीय संस्थान और केंद्रीय औद्योगिक प्रतिष्ठान 22 जनवरी 2024 को दोपहर ढाई बजे तक आधे दिन के लिए बंद रहेंगे।”
'खादी सनातन वस्त्र' का शुभारंभ... 'रामोत्सव' के खास मौके पर 20 प्रतिशत तक की छूट
नईदिल्ली। खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने बुधवार को 20 प्रतिशत छूट के साथ 'सनातन खादी वस्त्र' की एक नई श्रेणी की शुरुआत की है। केवीआईसी के अध्यक्ष मनोज कुमार ने नई दिल्ली के कनॉट प्लेस में स्थित प्रमुख खादी भवन में खादी कपड़ों से बने 'सनातन वस्त्र' का शुभारंभ किया। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (एनआईएफटी) स्थित खादी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (सीओईके) में सनातन वस्त्र का डिजाइन तैयार किया गया है। इस मौके पर आयोजित कार्यक्रम में मीडिया को संबोधित करते हुए केवीआईसी के अध्यक्ष कुमार ने कहा कि खादी के निर्माण में किसी भी प्रकार की यांत्रिक या रासायनिक प्रक्रिया शामिल नहीं होती है। इसलिए भारतीय परंपरा के अनुसार तैयार सनातन वस्त्र अपने आप में अद्वितीय है। उन्होंने आगे कहा कि इस अवसर पर खादी भवन नई दिल्ली 17 से 25 जनवरी 2024 तक सनातन वस्त्र पर 20 प्रतिशत तक छूट दी जाएगी। इसके अलावा खादी और ग्रामोद्योग उत्पादों पर 10 प्रतिशत से 60 प्रतिशत तक की विशेष छूट दी जाएगी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुमार ने कहा कि बदलते समय के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने खादी का एक नया और बदला हुआ स्वरूप देखा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने खादी को 'राष्ट्र के लिए खादी, फैशन के लिए खादी और परिवर्तन के लिए खादी' के रूप में परिभाषित किया है। इसी सोच के आधार पर आधुनिक समय की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए खादी के सनातन वस्त्र तैयार किए गए हैं, जो अतीत के गौरवशाली इतिहास से वर्तमान को एक उपहार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सनातन वस्त्र के शुभारंभ के साथ केवीआईसी युवाओं को स्वदेशी से जोड़ना चाहता है, क्योंकि खादी का विस्तार ग्रामीण भारत में लाखों शिल्पकारों के जीवन को बेहतर बनाने का हिस्सा है।
राममय हुई नगरी, जय श्री राम के नारों से गूंज उठा पूरा शहर
भोपाल। संपूर्ण इंदौर शहर के लिए 17 जनवरी का दिन अविस्मरणीय रहा। जय श्रीराम की गूंज और मंत्रों के उच्चारण के मध्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लक्ष्मण सिंह गौड़ उद्यान में आयरन स्क्रैप से निर्मित श्रीराम मंदिर अयोध्या की प्रतिकृति का अनावरण किया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भगवान श्रीराम ने अपने जीवन काल में कई लोगों को जोड़कर उनके अंर्तऊर्जा का जागरण किया है। वे हम सभी के लिए प्रेम और स्नेह की प्रतिमूर्ति है। उन्होंने जो आदर्श जीवन जिया है वह हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है। हमें भी उनके जीवन से प्रेरणा लेकर देश के विकास में अपनी भागीदारी निभानी चाहिये। 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर प्रदेश से 5 लाख लड्डू भिजवाए जाएंगे। कई हजार वर्ष पहले मालवा के ही सम्राट विक्रमादित्य द्वारा भगवान श्री राम का मंदिर स्थापित किया गया था, उस समय भी इसी तरह पूरे देश में उत्साह का माहौल था जो हम आज देख रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर को 7वी बार स्वच्छता में नंबर वन आने पर नगर निगम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इंदौर सदैव ही अपने नए-नए नवाचारों के लिए जाना जाता रहा है और उसी क्रम में आज लोहे के स्क्रेप से बनी यह श्री राम मंदिर की प्रतिकृति हम सबके लिए एक यादगार क्षण है। जो लोग अयोध्या नही जा सकते वे यहां से ही अयोध्या का आनंद ले कर श्रीराम को प्रणाम कर सकते हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों का आह्वान करते हुए कहा कि 22 जनवरी को वह दीप जला कर दिवाली मना कर उस दिवस को यादगार बनाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर उज्जवल सोलंकी की टीम जिन्होंने तीन माह में इस मंदिर की प्रतिकृति को तैयार किया उनको सम्मानित किया। उन्होंने श्री राम मंदिर का अवलोकन भी किया।
सड़क सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता… 2030 तक सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों को 50 प्रतिशत कम करने का लक्ष्य
नईदिल्ली। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सड़क सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और 2030 तक सड़क दुर्घटना से होने वाली मौतों को 50 प्रतिशत तक कम करने का लक्ष्य है। 'सड़क सुरक्षा पर सीआईआई राष्ट्रीय सम्मेलन - भारतीय सड़कें@2030 – सुरक्षा के मापदंड को और ऊंचा करते हुए' को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि 'सड़क सुरक्षा के 4ई' – अभियांत्रिक (सड़क और वाहन अभियांत्रिक) - प्रवर्तन - शिक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सेवा को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ सामाजिक व्यवहार में बदलाव लाना बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने सड़क सुरक्षा को बेहतर बनाना के लिए सभी हितधारकों के सहयोग पर बल दिया।
गडकरी ने कहा कि सड़क दुर्घटना 2022 पर नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 4.6 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, इनमें 1.68 लाख लोगों की मौतें हुई हैं और 4 लाख लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि हर घंटे 53 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं और 19 मौतें होती हैं।
उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई है तथा सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप सकल घरेलू उत्पाद को 3.14 प्रतिशत की सामाजिक-आर्थिक हानि हुई है। श्री गडकरी ने कहा कि 60 प्रतिशत मौतें 18 से 35 वर्ष के युवा वर्ग में होती हैं। उन्होंने कहा कि दुर्घटना में हुई मृत्यु से एक परिवार में कमाने वाले का नुकसान, नियोक्ता के लिए पेशेवर नुकसान और अर्थव्यवस्था के लिए समग्र हानि है।
‘नई शिक्षा नीति ने युवाओं को सनातन के गूढ़ रहस्य समझाने का मार्ग किया प्रशस्त’
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में लागू नई शिक्षा नीति से युवा पीढ़ी के लिए ज्ञान विज्ञान की बातें जानने के साथ-साथ सनातन के गुण रहस्य को समझने का भी मार्ग प्रशस्त हुआ है प्रभु श्रीराम संस्कारों का ज्ञान करने के साथ-साथ पिता पुत्र और पति के कर्तव्यों का भान कराने के प्रभावी माध्यम हैं। मुख्यमंत्री डॉ यादव मीडिया समूह द्वारा समन्वय भवन में आयोजित" श्री रामोत्सव सबके राम" कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव "श्री रामोत्सव -सबके राम" कार्यक्रम में शामिल हुए। समन्वय भवन में आयोजित कार्यक्रम का मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शंख ध्वनि- मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ यादव को तुलसी का पौधा और स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका स्वागत किया गया।
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के शासन व्यवस्था के सिद्धांत और उनके विचार रामराज्य की आवधारणा के अनुरूप थे। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का क्रियान्वयन कार्यपालिका का दायित्व है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के समसामयिक वातावरण के अनुरूप रामलला का प्राण प्रतिष्ठा समारोह सनातन के प्रति आस्था को दृढ़ करेगा और जन-जन के लिए यह प्रेरणा का पाथेय सिद्ध होगा।
कार्यक्रम में पार्श्व गायिका दीपाली दुबे ने सुमधुर भजन की प्रस्तुति भी दी। कार्यक्रम में विधायक रामेश्वर शर्मा, भगवान दास सबनानी, अशोक पांडे, पीठाधीश्वर करूणाधाम श्री 1008 सुदेश शाण्डिल्य महाराज, महंत गुफा मंदिर श्री 1008 राम प्रवेश दास महाराज सहित मानस मर्मज्ञ, साहित्यकार उपस्थित थे।
श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठाप: चौकी पर कंबल बिछा सोएंगे पीएम मोदी... लेंगे केवल फलाहार
डेस्क। प्रभुश्री राम की नगरी अयोध्या में रामलला के आगमन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में है। 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होनी है। समारोह को देखते हुए मंगलवार से धार्मिक अनुष्ठान भी शुरू हो गया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंददेव महाराज ने बताया कि धार्मिक कार्यक्रम के आखिरी तीन दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चौकी पर सिर्फ कंबल बिछाकर सोएंगे।
प्रधानमंत्री 22 जनवरी को प्रभु श्रीरामलला की प्राण प्रतिष्ठा कराएंगे, ऐसे में उन्हें तमाम तरह के धार्मिक और वैदिक नियमों का पालन करना होगा। प्राण प्रतिष्ठा के अंतिम तीन दिन पीएम मोदी अपनी चौकी पर केवल कंबल बिछाकर सोएंगे। इन तीन दिनों तक भोजन में सिर्फ फल का सेवन करेंगे। पीएम ने स्वयं पूछा था कि इसके लिए उनको क्या करना चाहिए। कठिन से कठिन जो भी होगा वह सबकुछ करने को तैयार हैं। उनको विशेष मंत्रों का जाप करना है, जो उनको बता दिया गया है।
गोविंददेव महाराज के अनुसार प्रधानमंत्री की ओर से कुछ दान किया जाएगा और उपहार भी दिए जाएंगे। इनका पूजन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के लिए मुख्य यजमान अनिल मिश्रा होंगे। उन्होंने बताया कि रामलला की प्रतिमा के मुखाबिंदु पर बाल भाव के साथ देव भाव भी है। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने बताया कि जिन्होंने मंदिर के लिए बलिदान दिया है, उन सभी के प्रतीक के रूप में जटायु जी की मूर्ति बनाई गई है। उन प्रतिमाओं का पूजन स्वयं पीएम मोदी करेंगे।
श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठाः रामलला की प्रतिमा का आज होगा कर्मकुटी संस्कार... जाने उत्सव के बारे में
डेस्क। अयोध्या में श्रीराम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान आज से शुरू हो रहा है। आज राम लला की प्रतिमा का कर्मकुटी संस्कार होगा। प्रथम यजमान के रूप में डॉक्टर अनिल मिश्र और उनकी पत्नी उषा मिश्रा शामिल हो रहे हैं। जो कि 22 जनवरी तक करीब 50 वैदिक प्रक्रियाओं के सहभागी बनेंगे। अनुष्ठान का प्रारंभ यजमान के स्नान से होगा, यजमान 10 प्रकार के स्नान लेंगे।
वे शुद्धोदक (सरयू जल) के साथ गाय के दूध, दही, घी, गोबर, गोमूत्र, भस्म कुशोदक (कुश मिश्रित जल) पंचगव्य से स्नान करेंगे। पंचगव्य के प्राशन (चखने) से उनका व्रत आरंभ हो जाएगा। 22 जनवरी तक उनका आहार-व्यवहार सब बदला रहेगा। यजमान का खान-पान, वस्त्र आदि भी शास्त्र सम्मत होगा।
इसके अलावा मूर्तिकार अरुण योगीराज रामलला की प्रतिमा समर्पित करने से पहले आचार्यों से प्रतिमा को दिखाकर आग्रह करेंगे कि यदि कोई कमी हो तो वह बताएं, ताकि अभी उसे दूर किया जा सके। यह प्रक्रिया शास्त्रों में निहित है, इसलिए इसका पालन किया जाएगा।
इसके बाद भगवान को सरयू के पावन जल से स्नान कराया जाएगा। फिर यजमान और आचार्य गण भगवान की मूर्ति के नेत्रों पर पट्टी बांधेंगे, जिसे 22 जनवरी को पीएम मोदी खोलेंगे। 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान का फाइनल कार्यक्रम होगा। अनुष्ठान आरंभ होने के साथ यजमानों की संख्या और बढ़ेगी. जिस मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होने जा रही है, उसका वजन लगभग 150-200 किलोग्राम है.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का कहना है कि धार्मिक अनुष्ठान मंगलवार (आज) से शुरू होगा. राम लला की मूर्ति 18 जनवरी को 'गर्भ गृह' में स्थापित की जाएगी. ये अनुष्ठान 21 जनवरी तक जारी रहेंगे. मैसूर के अरुण योगीराज द्वारा बनाई गई राम लला की मूर्ति को राम मंदिर में स्थापना के लिए चुना गया है.
राय ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा 22 जनवरी को दोपहर 12.20 बजे होगी. मुहूर्त (शुभ समय) वाराणसी के गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ द्वारा तय किया गया है. 20 और 21 जनवरी को जनता के लिए दर्शन बंद रहेंगे. राम मंदिर 23 जनवरी से आम जनता के लिए दर्शन के लिए खुला रहेगा।
सिंहस्थ 2028 से पहले क्षिप्रा नदी की शुद्धि के लिए कार्य योजना तैयार करेः मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सिंहस्थ 2028 के मददेनजर क्षिप्रा नदी का पानी स्वच्छ निर्मल एवं आचमन योग्य बनाने के लिये इंदौर, उज्जैन एवं देवास के संबंधित अधिकारियों को क्षिप्रा नदी को साफ रखने की कार्य योजना तैयार करें। गंदे पानी को रोकने के लिए जगह-जगह स्टॉप डैम बनाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव उज्जैन में आयोजित होने वाले सिंहस्थ 2028 के विकास कार्य एवं क्षिप्रा शुद्धिकरण के संबंध में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होने इंदौर एवं उज्जैन संभाग के संभागायुक्तों एवं कलेक्टर्स को कार्ययोजनाएं बनाने के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर महाकाल लोक फेस-3 के कार्यों की भी शुरूआत की जायेगी। उन्होंने क्षिप्रा के उद्गम से लेकर समाप्ति स्थल तक घाटों पर सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की विस्तृत कार्ययोजनाएं बनाने का निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव ने कहा कि देश का सबसे बड़ा कुंभ मेला सिहस्थ 12 वर्ष में एक बार उज्जैन में आयोजित होता है जब सिंह राशि में बृहस्पति प्रवेश करते हैं। मेले में साधु, संत, महामंडलेश्वर, गणमान्य नागरिक एवं आम श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। सिंहस्थ का आयोजन न केवल उज्जैन बल्कि देश के लिए एक गौरवशाली क्षण होता है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन के अलावा सिंहस्थ मेले का इंदौर, देवास, ओंकारेश्वर दादा धुनी वाले, पशुपतिनाथ मंदिर, बगलामुखी मंदिर में भी सिंहस्थ मेले का विस्तार रहता है। सभी जगह आम जनता की सहभागिता रहती है । जब श्रद्धालु आए तो मेले में गौरव का अनुभव करें। सिहस्थ 2028 की प्लानिंग साधु संतों की सलाह पर करने और उनके परामर्श से ही कार्ययोजनाएं बनाने के निर्देश दिये।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कान्ह नदी का गंदा पानी क्षिप्रा में रोकने के लिए बनाई गई 99 करोड़ रुपए की डायवर्जन प्लानिंग पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि एक बार में ही ऐसी योजना बनायें कि क्षिप्रा का जल पीने और आचमन योग्य बन जाए। गलत प्लानिंग के लिये अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत केंद्र सरकार से क्षिप्रा शुद्धिकरण के लिए आवश्यक बजट की मांग की जाएगी । उन्होंने अधिकारियों को केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से संपर्क कर मार्गदर्शन प्राप्त करने को कहा।
मुख्यमंत्री डॉक्टर यादव ने कहा कि हमेशा की तरह इस बार भी सिंहस्थ मेला गौरवशाली सनातन परंपरा के अनुसार आयोजित किया जायेगा। इसके लिए क्षिप्रा नदी शुद्धिकरण के साथ ही उज्जैन के महाकाल मंदिर तक जाने के लिए सड़क मार्ग चौड़ीकरण, मंदिर तक जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग की प्लानिंग, पावर स्टेशन, हवाई पट्टी विस्तार, संग्रहालय, यात्रियों के ठहरने की व्यवस्था, वाहन पार्किंग आदि के भी विकास कार्य पूरा किये जायेंगे।
रामलला के लिए मुख्यमंत्री ने बनाए लड्डू.... पैकिंग कर कारीगरों से की बात
भोपाल। महाकालेश्वर प्रबंध समिति की चिंतामन स्थित लड्डू प्रसाद निर्माण इकाई की ओर से अयोध्या भेजे जाने के लिए लड्डूओं का निर्माण किया जा रहा है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने पहुंचकर स्वयं रामलला के लिए लड्डू बनाए और उनकी पैकिंग भी की तथा लड्डू बना रहे कारीगरों से बातचीत भी की।
उल्लेखनीय है कि अयोध्या में रामलला की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर महाकालेश्वर प्रबंध समिति द्वारा 5 लाख लड्डू प्रसाद स्वरूप अयोध्या भेजे जा रहे हैं, इनमें से 4 लाख लड्डू बन चुके हैं तथा शेष एक लाख लड्डू बनाने का कार्य निरंतर जारी है।
प्रबंध समिति ने जानकारी दी कि लड्डू प्रसाद बेसन, रवा, शुद्ध घी और सूखे मेवों से बनाया जा रहा है। लड्डू प्रसाद निर्माण के लिए अतिरिक्त कारीगरों व कर्मचारियों को लगाया गया है। लड्डूओं को पैकेट में पैक कर अयोध्या भेजा जाएगा, एक लड्डू का वजन लगभग 50 ग्राम है।
भारतीय नौसेना में 40 वर्षों की सेवा के बाद सेवामुक्त हुए आईएनएस चीता, गुलदार और कुंभीर
नईदिल्ली। भारतीय नौसेना के युद्धपोत चीता, गुलदार और कुंभीर को राष्ट्र की चार दशकों की गौरवशाली सेवा प्रदान करने के बाद 12 जनवरी, 2024 को सेवामुक्त कर दिया गया। इन जहाजों को कार्य मुक्त करने का कार्यक्रम पोर्ट ब्लेयर में एक पारंपरिक समारोह में आयोजित किया गया था, जिसमें सूर्यास्त के समय राष्ट्रीय ध्वज, नौसेना पताका और तीन जहाजों के डीकमीशनिंग प्रतीक को अंतिम बार नीचे उतारा गया।
आईएनएस चीता, गुलदार और कुंभीर को पोलैंड के ग्डिनिया शिपयार्ड में पोल्नोक्नी श्रेणी के ऐसे जहाजों के रूप में तैयार किया गया था, जो टैंकों, वाहनों, कार्गो तथा सैनिकों को सीधे कम ढलान वाले समुद्र तट पर बिना गोदी के पहुंचा सकते थे। इन युद्धपोतों को क्रमशः 1984, 1985 और 1986 में पोलैंड में भारत के तत्कालीन राजदूत श्री एस के अरोड़ा (चीता एवं गुलदार) तथा श्री ए के दास (कुंभीर) की उपस्थिति में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था।
तीनों जहाजों के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर क्रमशः कमांडर वीबी मिश्रा, लेफ्टिनेंट कमांडर एसके सिंह और लेफ्टिनेंट कमांडर जे बनर्जी को तैनात किया था। अपने प्रारंभिक वर्षों के दौरान, आईएनएस चीता को कुछ समय के लिए कोच्चि व चेन्नई में रखा गया था और आईएनएस कुंभीर तथा गुलदार विशाखापत्तनम में सेवा दे रहे थे। बाद में इन जहाजों को अंडमान और निकोबार कमान में तैनात किया गया, जहां उन्होंने कार्यमुक्त होने तक अपनी सेवाएं दीं। ये युद्धपोत भारतीय नौसेना सेवा में लगभग 40 वर्षों तक सक्रिय रहे थे और 12,300 दिनों से अधिक समय तक समुद्र में रहते हुए सामूहिक रूप से लगभग 17 लाख समुद्री मील की दूरी तय की। अंडमान और निकोबार कमान के जल स्थलचर मंच के रूप में, इन जहाजों ने तट पर सेना के जवानों को उतारने के लिए समुद्र तट पर 1300 से अधिक अभियान संचालित किए हैं।
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार 2024 के लिए नामांकन आमंत्रित
नईदिल्ली। भारत सरकार ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में "राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार" की घोषणा की है। राष्ट्रीय पुरस्कार शोधकर्ताओं, प्रौद्योगिकीविदों और नवप्रवर्तकों के उत्कृष्ट और प्रेरक वैज्ञानिक, तकनीकी और नवाचार योगदान को मान्यता प्रदान करता है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और प्रौद्योगिकी आधारित नवाचार के विभिन्न क्षेत्रों में व्यक्तियों या टीम से राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार (आरवीपी) के लिए नामांकन/आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं।
पुरस्कार निम्नलिखित चार श्रेणियों में प्रदान किए जाएंगे।
विज्ञान रत्न (वीआर): विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में जीवनकाल की उपलब्धियों और योगदान को मान्यता देने के लिए अधिकतम तीन पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
विज्ञान श्री (वीएस): विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान को मान्यता देने के लिए अधिकतम 25 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
विज्ञान युवा: शांति स्वरूप भटनागर (वीवाई-एसएसबी) पुरस्कार: विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में असाधारण योगदान देने वाले युवा वैज्ञानिकों की प्रतिभा को पहचान दिलाने और उन्हेंव प्रोत्साहित करने के लिए अधिकतम 25 पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
विज्ञान टीम (वीटी) पुरस्कार: तीन या अधिक वैज्ञानिकों/शोधकर्ताओं/नवप्रवर्तकों की एक टीम को अधिकतम तीन पुरस्कार प्रदान किए जा सकते हैं, जिन्होंने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक टीम में काम करते हुए असाधारण योगदान दिया हो।
राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार निम्नलिखित 13 प्रक्षेत्र में दिए जाएंगे, जिनमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, जैविक विज्ञान, गणित और कंप्यूटर विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, चिकित्सा, इंजीनियरिंग विज्ञान, कृषि विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार, परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी, और अन्य शामिल हैं।
पुरस्कारों के इस गुलदस्ते के लिए गृह मंत्रालय के पुरस्कार पोर्टल (https://awards.gov.in/) पर 14 जनवरी 2024 से 28 फरवरी 2024 तक नामांकन आमंत्रित किए जाते हैं। सामान्य दिशानिर्देश और राष्ट्रीय विज्ञान पुरस्कार का विवरण, पुरस्कार पोर्टल पर उपलब्ध हैं। इस वर्ष पुरस्कारों का संचालन विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा किया जा रहा है।
पुरस्कारों की घोषणा 11 मई 2024 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के अवसर पर की जाएगी। सभी श्रेणियों के पुरस्कारों के लिए पुरस्कार समारोह 23 अगस्त 2024 को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस के अवसर पर आयोजित किया जाएगा।
मध्यप्रदेश न्यायाधीश संघ का 10वां वार्षिक सम्मेलन.... संघ के नवीन “लोगों और मोटो” का अनावरण
भोपाल। मध्यप्रदेश न्यायाधीश संघ के दसवें द्विवर्षीय सम्मेलन का शुभारंभ शनिवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में मुख्य अतिथि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति संजीव खन्ना, विशिष्ट अतिथि माननीय न्यायाधिपति अनिरूद्ध बोस, न्यायाधिपति जेके माहेश्वरी तथा माननीय मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रवि मलिमठ ने दीप प्रज्जवलन कर किया। इसमें संघ के नवीन “लोगों और मोटो” का अनावरण किया। माननीय न्यायाधिपति संजीव खन्ना द्वारा “बैकलॉग्स टू ब्रेकथ्रुस” किताब का विमोचन किया गया। इसमें एक “सोवेनियर” का विमोचन भी न्यायामूर्ति अनिरूद्ध बोस, न्यायाधीश संघ के संविधान के द्विभाषी संस्करण का विमोचन न्यायामूति जेके माहेश्वरी द्वारा किया गया।
सुबोध जैन, अध्यक्ष मध्यप्रदेश न्यायाधीश संघ द्वारा स्वागत उदबोधन में मध्यप्रदेश के माननीय मुख्य न्यायामूर्ति द्वारा न्यायाधीशों के उत्थान हेतु किये गये कार्यों का उल्लेख कर जिला न्यायालय के न्यायाधीशों को प्रभावित करने वाले विभिन्न मुद्दों को प्रकट किया। इस अवसर पर उन्होंने न्यायालय की कार्यवाही की लाईवस्ट्रीमिंग की शुरूआत एवं विगत वर्षों में दिवंगत हुये न्यायाधीशों के संबंध में आयोजित सभा आदि विषयों पर विचार व्यक्त करते हुये आयोजित अधिवेशन को न्यायाधीशों के लिये एक अलग पहल होना बताया।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति संजीव खन्ना ने कहा कि वे स्वयं एक जिला न्यायाधीश के पुत्र हैं। उन्होंने अपनी संपूर्ण न्यायिक यात्रा न्यायाधीशों से साझा कर प्रकट किया कि न्यायाधीशों को न सिर्फ न्यायालयों में अपितु समाज के प्रत्येक हिस्से में सम्मान मिलता है। उनके द्वारा न्यायाधीशों को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में संवेदनशील होने और समाज के प्रत्येक वर्ग के प्रति न्यायिक कार्य को और अधिक संवेदनशीलता और जिम्मेदार से करने की अपेक्षा की।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधिपति अनिरूद्ध बोस ने कहा कि न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की संख्या और उनके निराकरण में विलंब होने के संबंध में अपनी चिंता प्रकट करते हुय यह अपेक्षा की कि न्यायाधीश अधिक से अधिक प्रकरणों का निराकरण कर इसमें वैकल्पिक विवाद समाधान के तरीकों का प्रभावी उपयोग करें।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायामूर्ति जेके माहेश्वरी द्वारा न्यायाधीशों के अपने कर्म के प्रति सजग होने के लिये एवं न्यायाधीश के कार्य को पुनीत कार्य होना प्रकट कर न्यायाधीशों को उनकी नियुक्ति से समय दिलाये जाने वाली शपथ एवं संविधान के अंतर्गत न्यायालयों को नागरिकों के मूलभूत अधिकार की रक्षा के प्रति सजग किया। उनके द्वारा राग, लोभ, भय द्वेष से विमुक्त होकर कार्य करने की सलाह दी है।
माननीय मुख्य न्यायाधिपति मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय श्री रवि मलिमठ द्वारा अपने अभिभाषण में 60 वर्ष से लंबित एक प्रकरण के निराकरण का उदाहरण देते हुये बताया कि न्यायाधीश को मेहनत कर प्रकरण के अंतिम निराकरण हेतु सर्वोच्च कार्यकरना चाहिये। उनके द्वारा “25 पुराने प्रकरण” निराकरण योजना के अंतर्गत न्यायाधीशों द्वारा तेज गति से कार्य करने पर उन्हें बधाई दी साथ ही कहा कि प्रकरण विलंबन की अंतहीन प्रक्रिया को समाप्त कर न्यायाधीश अपनी मेहनत से प्रकरण को अंतिम निराकरण तक पहूँचा सकता है।
जेलों का सतत निरीक्षण करें और बंदियों के पुर्नवास की व्यवस्था सुनिश्चित कराएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मेाहन यादव ने कलेक्टरों को निर्देश दिए कि वे जेलों का सतत निरीक्षण करें और जेलों में अच्छी व्यवस्थाएं सुनिश्चित कराएं। जेलों में बंद बंदियों के पुर्नवास की व्यवस्था कराएं तथा आवश्यक होने पर उन्हें विधिक सहायता भी मुहैया कराएं। मुख्यमंत्री ने निर्देशित किया है कि लगातार अपराध करने वाले अपराधियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई हो। मुख्यमंत्री डॉ. यादव आज संभागीय मुख्यालय शहडोल में संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक में कानून व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे।
बैठक में खुले में अवैध रूप से मांस के विक्रय पर प्रतिबंध के प्रयासों की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नगर पालिकाएं मांस बेचने वालों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं कराएं तथा माँस बेचने के लिए उन्हें सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराएं। मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि डीजे वालों का रोजगार प्रभावित न हो इसके भी प्रयास किये जाएं। बैठक में एडीजीपी श्री डी.सी. सागर ने शहडोल संभाग में बेहतर कानून व्यवस्था कायम करने के लिए किए गए नवाचारों की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी कलेक्टर विभागों का औचक निरीक्षण करें तथा विभागीय कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता लाएं। उन्होंने निर्देशित किया कि औचक निरीक्षण के दौरान किसी को अनावश्यक परेशान न करें बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों को सकारात्मक और परिणाम मूलक कार्य करने के लिए प्रेरित करें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रदेश के जनजातीय बाहुल्य दूर-दराज के क्षेत्रों में अपराधों को रोकने के प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि आम लोगों के मन से पुलिस का डर निकलना चाहिए, इस दिशा में पुलिस विभाग के अधिकारी कर्मचारी सकारात्मक प्रयास करें। युवाओं से मिलकर सकारात्मक कार्य करने के लिए प्रेरित एवं प्रोत्साहित करें।
92 वर्ष की आयु में ली मशहूर शास्त्रीय गायिका प्रभा अत्रे ने अंतिम सांस... किराना घराने का किया प्रतिनिधित्व
नईदिल्ली। 92 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से जानी मानी शास्त्रीय गायिका डॉ. प्रभा अत्रे का शनिवार को निधन हो गया हैं। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के किराना घराने का प्रतिनिधित्व करने वाली अत्रे को भारत सरकार ने तीनों पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया था। एक सूत्र ने कहा, “अत्रे को अपने घर पर सोते समय दिल का दौरा पड़ा। उन्हें शहर के कोथरुड इलाके में एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें सुबह 5.30 बजे मृत घोषित कर दिया गया।” सूत्र ने कहा, चूंकि अत्रे के परिवार के कुछ करीबी सदस्य विदेश में रहते हैं, इसलिए उनका अंतिम संस्कार उनके यहां पहुंचने के बाद किया जाएगा।
The great Vidushi Prabha Atre who singing and scholarship transformed Hindustani music, has passed. Here is her iconic tarana in Kalavati https://t.co/KnMQhQdUml pic.twitter.com/xmJ30BKPKV
— Vijayendra Rao (@bijurao) January 13, 2024
बतादें कि 13 सितंबर 1932 को जन्मे अत्रे एक वर्सेटाइल पर्सनालिटी के रूप में जानी जाती थे। एक शास्त्रीय गायिका होने के अलावा, उन्होंने एक शिक्षाविद, शोधकर्ता, संगीतकार और लेखिका के रूप में भी काम किया हैं। विज्ञान और कानून में स्नातक, उन्होंने संगीत में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की थी। जनवरी 2022 में उन्हें देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान, पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। इससे पहले उन्हें 1990 में पद्म श्री पुरस्कार और 2002 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
इतना ही नहीं बल्कि उन्होंने संगीत रचना पर किताबें भी लिखी। ‘स्वरांगिनी’ और ‘स्वरंजनी’ उनकी ही रचना है। ‘अपूर्व कल्याण’, ‘मधुर कौंस’, ‘दरबारी कौंस’, ‘पटदीप-मल्हार’, ‘शिव काली’ को भी प्रभा ने ही अपनी कलम दी है। हमेशा अपनी आवाज से लोगों को कायल करने वाली प्रभा आज हमारे बीच नहीं रहीं। उनका निधन म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए बड़ी क्षति है। उनके निधन से हर कोई दुखी है। सभी उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।
कैपिटल फूड्स और फैब इंडिया अब टाटा ग्रुप की.... 7000 करोड़ रुपये में हुई डील!
डेस्क। रतन टाटा की टाटा ग्रुप में अब दो और कंपनियां जुड़ने जा रही है। टाटा कंज्यूमर प्रोडक्टस लिमिटेड ने कैपिटल फूड्स और फैब इंडिया को खरीद रही है। इसके लिए कंपनी ने दोनों फर्मों से डील पर हस्ताक्षर किए हैं। ये डील पूरा होने के बाद ये दोनों कंपनियां टाटा ग्रुप का हिस्सा बन जाएंगी।
टाटा ने ऐलान किया है कि वह 5,100 करोड़ रुपये में 'चिंग्स सीक्रेट' और 'स्मिथ एंड जोन्स' जैसे ब्रांड के मालिक कैपिटल फूड्स कंपनी को खरीदने जा रही है। टाटा इसमें 100 फीसदी हिस्सेदारी खरीदेगी, जिसके लिए एक डील पर हस्ताक्षर हुए हैं। इसके अलावा 1,900 करोड़ रुपये में फैबइंडिया ब्रांड की ऑर्गेनिक इंडिया कंपनी को भी खरीदेने जा रही है। यह कंपनी पैकेज्ड ऑर्गेनिक चाय, हर्बल उत्पाद और हेल्थ संबंधी अन्य उत्पाद बेचती है।
टाटा की कंपनी ने कहा कि बाजार में बढ़ती मांग और अपने बिजनेस को एक नया मुकाम देने के लिए कैपिटल फूड्स का अधिग्रहण किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2024 के लिए कैपिटल फूड्स का अनुमानित कारोबार 750 से 770 करोड़ रुपये है, जबकि वित्त वर्ष 2024 के लिए ऑर्गेनिक इंडिया का अनुमानित कारोबार 360 से 370 करोड़ रुपये है।
आकस्मिक भुगतान वाले श्रमिकों को मिलेगा 10 लाख का बीमा.... रक्षामंत्री ने दी प्रस्ताव को मंजूरी
नईदिल्ली। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सीमा सड़क संगठन/जनरल रिजर्व इंजीनियर फोर्स द्वारा विभिन्न जारी परियोजना कार्यों के लिए नियोजित आकस्मिक भुगतान वाले श्रमिकों (सीपीएल) के लिए एक समूह (टर्म) बीमा योजना शुरू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत आकस्मिक भुगतान वाले श्रमिकों (सीपीएल) की किसी भी प्रकार की मृत्यु पर उनके परिवार/निकट संबंधियों को बीमा के रूप में 10 लाख रुपये मूल्य की बीमा राशि प्रदान की जायेगी।
खतरनाक कार्य स्थलों, खराब मौसम वाले, दुर्गम इलाकों और पेशे की वजह से उत्पन्न होने वाले स्वास्थ्य संबंधी खतरे वाली स्थितियों में तैनात सीपीएल के जीवन के गंभीर जोखिम को ध्यान में रखते हुए और उनके नियोजन काल के दौरान हुई/रिपोर्ट की गई मौतों पर विचार करते हुए, मानवीय आधार पर बीमा कवरेज का प्रावधान सीपीएल के लिए मनोबल बढ़ाने वाला एक ठोस कदम साबित होगा। यह योजना देश के अंदरूनी और दूर-दराज के इलाकों में काम करने वाले सीपीएल के लिए सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याण से जुड़े एक उपाय के रूप में काम करेगी। इससे उनके परिवारों की आजीविका सुरक्षित करने में काफी मदद मिलेगी।
इस तथ्य को याद रखा जा सकता है कि रक्षा मंत्री ने हाल ही में सीपीएल की बेहतरी के लिए कई कल्याणकारी उपायों को मंजूरी दी थी। इसमे पार्थिव शरीर का संरक्षण एवं परिवहन तथा सहायक (अटेंडेंट) के परिवहन भत्ते की पात्रता। अंत्येष्टि संबंधी सहायता को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया और मृत्यु आदि की स्थिति में तत्काल सहायता के रूप में 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि का अग्रिम भुगतान शामिल है।