दिव्य महाराष्ट्र मंडल
महाराष्ट्र मंडल में मंगलवार को धूमधाम से मनाई गई दिवाली

दिवाली पहाट: भक्ति- भाव गीतों की रसधारा में सुबह सराबोर हुए संगीतप्रेमी


दीपावली के पूर्व महाराष्ट्र मंडल में हुई शिवाजी की आरती
रायपुर। दीपावली की पूर्व 19 अक्टूबर को महाराष्ट्र मंडल में छत्रपति शिवाजी महाराज की आरती की गई। इस अवसर पर मंडल के अध्यक्ष, सचिव, कार्यकारिणी और युवा समिति के पदाधिकारियों ने शिवाजी महाराज के प्रेरक प्रसंगों पर चर्चा की।
महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने शिवाजी महाराज के रोचक प्रसंगों पर चर्चा करते हुए कहा कि औरंगजेब ने शिवाजी को आगरा में कैद किया, लेकिन शिवाजी ने मिठाई के टोकरे में छिपकर चतुराई से अपनी जान बचाई और वहां से निकल आए थे। शिवाजी एक धर्मनिरपेक्ष शासक थे और उन्होंने सभी धर्मों का सम्मान किया। उन्होंने अपनी सेना में मुस्लिम अधिकारियों को रखा और मस्जिदों के निर्माण में भी सहायता की।
महाराष्ट्र मंडल के सचिव चेतन दंडवते ने कहा कि शिवाजी महाराज के रोचक प्रसंगों की चर्चा करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज का युद्ध कौशल के क्या कहने थे, आज नौसेना उनकी सोच की ही देन है। वहीं युवा समिति के समन्वयक विनोद राखुंड़े ने कहा कि शिवाजी महाराज ने बहुत कम उम्र में 1645 में तोरना किले पर हमला कर बीजापुर के सुल्तान को पहला बड़ा झटका दिया। अफजल खान ने शिवाजी को धोखे से मारने की योजना बनाई थी, लेकिन शिवाजी के एक मुस्लिम मित्र ने उन्हें आगाह कर दिया। शिवाजी ने योजना को नाकाम करते हुए अफजल खान का पेट चीर दिया। इस अवसर पर परितोष डोनगांवकर, सचिंद्र देशमुख, भगीरथ काळेले, प्रवीण क्षीरसागर, सचेतक रविंद्र ठेंगड़ी उपस्थित थे।
संत ज्ञानेश्वर स्कूल ने मनाया पैरेट्स दिवाली मिलन
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में दीपावली के पूर्व पैरेट्स दिवाली मिलन समारोह का आयोजन किया गया। शाला के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने इस अवसर पर पैरेट्स को संबोधित किया। प्राचार्य ने सभी से दिवाली के व्यस्तम दिनचर्या के बीच समय निकालने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि स्कूल में होने वाले ऐसे आयोजन स्कूल प्रबंधन और पैरेट्स को समीप लाते है। जो बच्चों के अच्छे भविष्य का निर्माण में सहायक होते है।
कार्यक्रम की शुरूआत शिक्षिका श्वेता चौधरी और प्रीति तिवारी ने पैरेट्स का स्वागत तिलक लगाकर किया। नन्हें बालक राम-सीता बनकर आए क्रमशः शिवम, ऋषभ, सोनल, प्रथम और माताओं का दिल जीता। सभी ने उनका स्वागत पुष्प वर्षा कर किया। माताओं के द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया और शिक्षिकाओं द्वारा सरस्वती वंदना गाई गई।
कक्षा पांचवीं की छात्रा - पावना लासिया द्वारा स्वागत नृत्य की प्रस्तुति दी गई। शिक्षिकाओं द्वारा "दीपावाली मनाई सुहानी" गायन की प्रस्तुति दी। शाला के म्यूजिक टीचर - विवेक सिंह राजपूत के द्वारा सुंदर गीत गाया गया। माताओं के लिए बीच-बीच में प्रश्नोत्तरी की गई जिसमें भाग्यश्री शुक्ला, दुर्गा शर्मा, गीता बर्वे, पुष्प साहू, नमिता साहू, शबनम बानो, कालेश्वरी वर्मा, सुशीला निहाल, बिजली दुर्गा, बासमती सोना, मुकेश्वरी साहू, मानवी सेन ने सही उत्तर देकर प्राइजेस जीते।
माताओं के मनोरंजन के एक और गेम "हैप्पी दिवाली 2025" का आयोजन किया गया जिसमें द्रौपदी साहू को पहला, गायत्री साहू को दूसरा और सरस्वती निषाद को तीसरा पुरस्कार मिला। इन दोनों गेम का आयोजन श्वेता चौधरी और विनीता सुंदरानी मैडम के द्वारा बहुत ही सुंदर गति से किया गया। शाला की शिक्षिका किरण तिवस्कर के द्वारा अपनी स्वरचित कविता "न जाने हम कब बड़े हो गए "के द्वारा माताओं को बचपन याद दिला दिया।
मिडिल की इंचार्ज सुनिधि रोकड़े ने माताओं को दिवाली उत्सव के बारे में बताकर संबोधित किया। इस उपलक्ष्य पर कक्षा पहली की छात्रा अभिज्ञा शुक्ला ने सुंदर नृत्य की प्रस्तुति दी। इस उपलक्ष्य पर मनीषा दास ने अपने विचार व्यक्त किए जिसमें उन्होंने कहा कि रोज की दिनचर्या से हटकर कार्यक्रम में आकर उन्हें बहुत अच्छा लगा और उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम आयोजित होने चाहिए। इसी कड़ी में भाग्यश्री शुक्ला द्वारा ने भी विचार व्यक्त किए और कहा कि हमे अपने बच्चे को इस शाला में डालकर बहुत गौरव महसूस होता हैं। प्राइमरी इंचार्ज अपर्णा मैडम कहा गया कि "एक दिया सारा अंधकार मिटा सकता हैं"इसी प्रकार अगर हम बच्चों के साथ समय बिताए तो उनके जीवन में नई रोशनी ला सकते हैं।
इस उपलक्ष्य पर मिट्टी के दिए अंजलि गुप्ता, स्नेहा महाजन, वंदना यादव ,रेणुका शुक्ला,ज्योति साहू द्वारा बांटे गए। कार्यक्रम का संचालन तृप्ति अग्निहोत्री द्वारा किया गया और आभार प्रदर्शन सुदेवी बिस्वास मैडम के द्वारा किया गया।
सुआ नृत्य में नजर आई छत्तीसगढ़ की संस्कृति
रायपुर। दीपावली का त्योहार हो और घर-घर जाकर एक समाज विशेष की महिलाएं सुआ नृत्य न करें ऐसा हो ही नहीं सकता। सुआ नृत्य छत्तीसगढ़ की परंपरा से जुड़ा विशेष नृत्य है जो दीपावली पर किया जाता है। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में दीपावली के पूर्व सुआ नृत्य, लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी के साथ दीप सजाओ स्पर्धा सभी वर्ग के बच्चों के लिए आयोजित की गई।

स्कूल के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने बताया कि बच्चों को हमारी संस्कृति से जोड़े रखने के लिए हम लगातार हमारे तीज त्योहारों को उत्साह के साथ स्कूल में मनाते है। इसी क्रम में अलग-अलग क्लास के बच्चों ने अलग-अलग प्रस्तुतियां दी। मीडिल क्लास के बच्चों ने असेंबली में सुआ नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। छात्रा समृद्धि मिश्रा, प्राची टांगल, हंसिका भारद्वाज और रागिनी टोंडर ने सुआ नृत्य प्रस्तुत किया।

वहीं लंका विजय के बाद भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी का मंचन भी बच्चों ने किया। जिसमें भगवान राम की वेश में आदित्य साहू , लक्ष्मण की वेश में प्रदीप साहू, सिद्धांत सिंह हनुमान की वेश में व सीता माता की वेश में पूनम पटेल ने मंचन किया।

प्री पाइमरी के बच्चों ने आकर्षक दीया के डिजाइन में बच्चों को बैठाकर अपनी प्रस्तुति दी। बच्चों के ड्रेस कोड और कलर काम्बीनेशन काफी अच्छा था। प्री प्राइमरी इंचार्ज अस्मिता कुसरे, हार्दिक बोबडे, शिखा गुप्ता व सुरेखा नायक ने बच्चों को सुंदर दिये की आकृति में बिठाकर बच्चों को दिये का महत्व समझाया।

आज मॉर्निंग असेंबली में शिक्षिका रेणुका शुक्ला ने धनतेरस का महत्व बताते हुए कहा कि यह पर्व दिवाली के दो दिन पहले मनाया जाता हैं। इस दिन भगवान धन्वंतरी और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती हैं। कहा जाता हैं कि इस दिन सोना, चांदी या बर्तन खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है।

असेंबली का संचालन कक्षा चौथी के छात्र लव पाठक ने किया गया। सौरव राउत, ध्रुवीता प्रसाद माता लक्ष्मी बनकर आई थी। इसके साथ स्कूल में "दिया डेकोरेशन" एवं "हैंडराइटिंग" प्रतियोगिता भी आयोजित की गई और बच्चों ने बड़े उत्साह से इसमें भाग लिया।

महाराष्ट्र मंडल में दिवाली पहाट संग मिलन 19 को
घर-घर में लगाएं आकाशदीप, महाराष्ट्र मंडल का अभियान जारी
रायपुर। प्रति वर्षानुसार इस वर्ष भी महाराष्ट्र मंडल दिवाली पर दीयों की लड़ी के साथ आकाशदीप लगाने के लिए आमजनों को प्रेरित कर रहा है। मंडल के सभासद बड़ी संख्या में अपने घरों पर आकाशदीप लगाते हैं।
महाराष्ट्र मंडल में दिवाली पहाट 19 को
वरिष्ठ सभासद अनिल श्रीराम कालेले ने जानकारी दी कि दिवाली 'पहाट' का महत्व धार्मिक और प्रतीकात्मक है, जो 'अंधकार पर प्रकाश की विजय' का प्रतीक है। यह सुबह के समय का एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम है, जो दिवाली के दौरान नर्क चतुर्दशी पर आयोजित किया जाता है। मान्यता है कि नर्क चतुर्दशी पर अलसुबह लोग उठते हैं, उबटन लगाकर सूर्योदय से पहले स्नान- ध्यान करते हैं और उसके बाद दिवाली पहाट के माध्यम से एक साथ मिलकर भक्तिमय गीतों- भजनों पर सुगम संगीत का लुत्फ उठाते हैं। यह कार्यक्रम कहीं न कहीं आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व से भी जुड़ा हुआ होता है।
महाराष्ट्र मंडल और संत ज्ञानेश्वर स्कूल में लगा दीवाली व्यंजनों का स्टाल
‘मेरा महाराष्ट्र मंडल’ की सोच ही आगे बढ़ाएगी संस्था को

नटवर गोपीकृष्ण अवॉर्ड से नवाजी गई प्रांजल बक्षी
रायपुर। रंग मंदिर में हुए 18वें नटवर गोपीकृष्ण नेशनल अवार्ड्स समारोह में प्रांजल बक्षी ने भरतनाट्यम में अपनी शानदार प्रस्तुति दी। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में दो राउंड के शानदार प्रदर्शन पर प्रांजल बक्षी को नटवर गोपीकृष्ण अवॉर्ड से नवाजा गया। बतादें कि प्रांजल बक्षी महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद प्रशांत और प्रिया बक्षी की बेटी है। प्रांजल डा. जी. रतीश बाबू की शिष्या है। प्रांजल की इस उपलब्धि पर महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले और पूरी कार्यकारिणी ने ढेर सारी शुभकामनाएं दी।
मां प्रिया बक्षी ने बताया कि प्रांजल विगत 8 वर्षों से भरतनाट्यम का प्रशिक्षण ले रही है। नटवर गोपीकृष्ण अवॉर्ड जीवन में एक बार ही मिलता है। यह पुरस्कार शास्त्रीय नृत्य की विधा जैसे कथक, भरतनाट्यम, कुचीपुडी, मोहिनीअट्टम आदि में सर्वश्रेष्ठ नर्तक को दिया जाता है। प्रांजल को भरतनाट्यम में यह अवार्ड दिया गया। 2 अक्टूबर से 12 अक्टूबर तक 11 दिवसीय यह उत्सव देशभर के संगीत और नृत्य कलाकारों के लिए अच्छा मंच साबित हुआ। इन 11 दिनों में अब तक 3 हजार से अधिक शौकिया कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
प्रांजल ने बताया कि स्पर्धा दो राउंड में हुई। पहला राउंड 8 अक्टूबर को हुआ। जिसमें पांच मिनट डांस के बाद थ्योरी प्रश्न पूछे गए। जिसमें मैंने प्रथम स्थान प्राप्त किया। जिसके बाद मुझे दूसरे राउंड के लिए सलेक्ट किया गया। दूसरे राउंड में मेरे साथ कुल 30 प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियां दी। दूसरे राउंड में भी डांस के बाद सवाल पूछे गए। सही उत्तर देने के बाद मुझे यह अवार्ड मिला। प्रांजल ने बताया कि जजों ने मुझसे त्रिकाल जति का ताल, नृत्य के रस और भाव के बारे में पूछा था। जिसका मैंने उत्साह के साथ उत्तर दिया। वहीं जीवात्म और परमात्मा का नृत्य से संबंध, श्रृंगार रस के प्रकार और नायिकाओं के बारे में भी पूछा था।
‘रात का समा झूमे चंद्रमा’….की मनमोहक प्रस्तुति ने मोहा मन
महाराष्ट्र मंडल के शंकर नगर केंद्र ने मनाया कोजागिरी पूर्णिमा उत्सव
रायपुर। सन् 1964 में आई फिल्म 'जिद्दी' का गीत ‘रात का समा, झूमे चंद्रमा तन मोरा नाचे रे, जैसे बिजुरियाँ’.... एक सदाबहार क्लासिक गीत है। जो आज भी उतने ही उत्साह के साथ गाया और सुना जाता है। इस गीत को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी थी। महाराष्ट्र मंडल के शंकर नगर महिला केंद्र की सदस्या शेफाली फडणवीस ने इस सदाबहार गीत पर मनमोहक नृत्य की प्रस्तुति देकर शंकर नगर बाल वाचलनालय में आयोजित कोजागिरी पूर्णिमा उत्सव को यादगार बना दिया।
शंकर नगर केंद्र की संयोजिका मधुरा भागवत ने बताया कि रविवार, 12 अक्टूबर को शंकर नगर केंद्र द्वारा कोजागिरी पूर्णिमा उत्सव धूमधाम से मनाया गया। पूरा कार्यक्रम बहुत ही उल्लास और आनंद के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन तथा गणेश वंदना के साथ की गई। जिसके बाद निर्मला पिंपले ने कोजागिरी पूर्णिमा के बारे बताते हुए कहा कि कोजागिरी पूर्णिमा अश्विन मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन मां लक्ष्मी की पूजा और चंद्रमा के 16 कलाओं से परिपूर्ण होने के कारण महत्वपूर्ण है। इस दिन 'को जाग्रत' यानी 'कौन जाग रहा है' की परंपरा का पालन करते हुए लोग रात भर जागते हैं और माँ लक्ष्मी का स्वागत करते हैं।

मधुरा भागवत ने आगे बताया कि इस अवसर पर नन्ही बालिका मानुषी फडणवीस ने ‘शुभं करोति कल्याणं, आरोग्यं धनसंपदा। शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तुते’ का पाठ किया। नेहा फडणवीस के द्वारा सुंदर मराठी गीत प्रस्तुत किया गया। विनया करदले और श्रद्धा विठालकर ने भूलाबाई के गीत प्रस्तुत किए। मधुरा भागवत ने "गली में आज चांद निकला" गीत गाया।
कार्यक्रम में बहुत ही रोचक खेल हुआ, जिसमें आंखों पर पट्टी बांधकर एक ट्रे में सफेद पदार्थ भर कर रखी कटोरियों के सामान को सिर्फ छू कर पहचानना था। इस खेल का संचालन अनुराधा शिवलकर तथा स्मिता करदले ने किया। खेल में प्रथम मधुरा भागवत, द्वितीय अदिति जोशी तथा सांत्वना पुरस्कार अरुंधति नांदेडकर को प्राप्त हुआ। कार्यक्रम का संचालन हर्षदा टिचकुले और शेफाली फडनवीस ने किया। संयोजिका मधुरा भागवत ने केंद्र के कार्यक्रमों की रूपरेखा के बारे में सभी सदस्यों से चर्चा की । इसके अलावा एक सरप्राइज खेल था, जिसमें कविता लांजेवार को पुरस्कार मिला। हर्षदा टिचकुले, स्मिता करदले और शेफाली फडणवीस ने बहुत सुंदर सजावट की थी।

रंगोली वर्कशाप में सबने मिलकर बनाई हैंड फ्री रंगोली
- प्रतिभागियों ने सीखा हाथों का सही इस्तेमाल
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की कला एवं संस्कृति समिति की ओर से आयोजित एक दिवसीय रंगोली वर्कशाप में शामिल होकर प्रतिभागियों ने रंगोली बनाने के समय हाथों के सही इस्तेमाल को सीखा और सबने मिलकर एक आकर्षक हैंड फ्री रंगोली भी बनाई।
कला एवं संस्कृति समिति के सदस्य और रंगोली आर्टिस्ट शेखर क्षीरसागर ने बताया कि वर्कशाप में शामिल प्रतिभागियों को सबसे पहले लाइन खींचना और डाट बनाना बताया गया। इसके लिए सभी ने पेपर पर डाट बनाने का अभ्यास भी किया। आमतौर पर लोगों से छोटे-बड़े डाट बन जाते है, जिसके कारण उन्हें कहीं न कहीं रंगोली में एकरुपता नजर नहीं आती। इसलिए सभी ने उसका अभ्यास किया।। अंत में सभी ने मिलकर आकर्षक रंगोली बनाई। इस दौरान प्रतिभागियों को संस्कार रंगोली और रंगोली में शेडिंग डालने के बारे में भी बताया गया और अभ्यास भी कराया गया।
महाराष्ट्र मंडल ने जरूरतमंदों को किया पुराने कपड़ों का वितरण
- अरिहंत नगर अटल आवास बस्ती में पहुंचे लोगों के दिए कपड़े
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की युवा समिति ने प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी दीपावली के पूर्व शहर की निचली बस्ती में जाकर जरुरतमंदों को कपड़ों का वितरण किया। इस दौरान कपड़ा लेने के लिए लोगों की खासी भीड़ उमड़ पड़ी।
युवा समिति के समन्वयक विनोद राखुंडे ने बताया कि दीपावली के पूर्व आर्थिक रुप से संपन्न लोग अपने लिए नये कपड़े खरीदते है, वहीं एक-दो बार पहनने के बाद पुराने कपड़ों को पहनना छोड़ देते है। फैशन का दौर इनती तेजी से बदल रहा है कि आज की पीढ़ी को अपने फैशन के अनुरुप कुछ महीनों में कपड़े बदलने पड़ते है। और पुराने कपड़े यूं ही रखे रहते है। जिसे हम दीवाली की सफाई के दौरान निकालते है। ऐसे ही साफ सुथरे कपड़ों को महाराष्ट्र मंडल में एकत्र तक निचली और स्लम बस्तियों में जाकर लोगों को वितरण किया जाता है।

युवा समिति की प्रमुख डा. शुचिता देशमुख ने कहा कि पिछले कई सालों से युवा समिति यह प्रयास कर रही है। हमारा छोटा सा प्रयास कई लोगों के चेहरे पर खुशिया लेकर आता है। रविवार, 12 अक्टूबर को अरिहंत नगर सरोना के समीम अटल आवास बस्ती में जरूरतमंदों को कपड़ों का वितऱण किया गया। इस दौरान मंडल के सहसचिव सुकृत गनोदवाले विशेष रुप से उपस्थित थे। आज के इस अभियान में युवा समिति की सह प्रमुख रीना बाबर, सह प्रमुख शुभम पुराणिक. मेघा पोतदार , श्रावणी मुकादम, उदित बक्षी भी उपस्थित थे।
रोहिणीपुरम, बूढ़ापारा, वल्लभनगर और सरोना केंद्र में हुआ रामरक्षा स्त्रोत का पाठ
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से जारी रामरक्षा स्त्रोत और हनुमान चालीसा का पाठ इस सप्ताह शनिवार, 11 अक्टूबर को भी उत्साह के साथ जारी रहा। त्योहारी व्यवस्ता के बीच रोहिणीपुरम, बूढ़ापारा, वल्लभनगर और सरोना केंद्र की महिलाओं ने स्थानीय मंदिरों और सदस्यों के घर पर एकत्र होकर रामरक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया।

आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि बूढ़ापारा केंद्र की महिलाओं ने बूढ़ापारा स्थित हनुमान मंदिरम रामरक्षा स्त्रोत और हनुमान चालीसा के बाद भूलाबाई के गीत गाए। भूलाबाई के गीत महाराष्ट्रीयन परिवार में भाद्रपद पूर्णिमा से कोजागिरी पूर्णिमा तक घर-घर गाए जाने वाले पारंपरिक गीत हैं। ये गीत शंकर-पार्वती और भूलाबाई (भुवनेश्वरी/जगनमाता) के इर्द-गिर्द घूमते हैं और इन्हें लड़कियां और महिलाएं एक साथ ताली बजाकर और थाप देकर गाती हैं। ये गीत विदर्भ की लोककथाओं, परंपराओं और त्योहारों को दर्शाते हैं। इस दौरान सरिता साठे, सविता मोघे, जयश्री केलकर, हेमा पराड़कर, संगीता नन्देडकर, अपर्णा मोघे, अनुपमा नलगुंडवार, सुचिता काले, संध्या चौधरी, अनघा करकशे, अपर्णा काले, कीर्ति करकरे, वंदना जोशी, प्रणिता नलगुंडवार, दीपाली बर्वे, अर्चना मोघे, सुहासिनी पट्टलवार, कुमारी पट्टलवार और रीता लोखंडे उपस्थित थीं।

वहीं रोहिणीपुरम केंद्र की महिलाओं ने केंद्र की सदस्या संध्या खंगन के निवास पर एकत्रित होकर रामरक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान साधना बहिरट, रितु बहिरट, अपर्णा जोशी, अचला मोहरीकर, अलका कुळकर्णी, प्राची गनोदवाले, सुनिता रामटेके, अनुभा साडेगांवकर , अपर्णा वरारपांडे, चित्रा बल्कि, स्मिता बल्कि, मीना विभूते, सीमा बक्शी, श्रेया टल्लू, रश्मि तनखीवाले, मंगला कुळकर्णी, अनिता लांगे, सोनाली कुळकर्णी, वीणा वंडलकर, जयश्री भूरे और रचना ठेंगड़ी उपस्थित रही।

इसी तरह सरोना केंद्र की महिलाओं ने सदस्या दीपा वैद्य के घर पर पाठ किया। इस दौरान मीना नवरे, विभा पांडे, जयश्री ढेकणे, शिखा चोरनेले, आरती ठोंबरे, डॉ अलका गोळे, नेहा किल्लेदार, अलका मोडक, दिप्ती शिलेदार, दीपा वैद्य, मीना परदेशी, शांती महाजन, रमा धारवाडकर एवं प्रवीणा बापट उपस्थित थी।
वल्लभनगर केंद्र की महिलाओं ने संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में एकत्रित होकर पाठ किया। इस दौरान सुलभा विठ्ठालकर, शुभांगी आप्टे, अपर्णा पेंडसे, अपर्णा देशमुख, रोहिणी चिमाटे, स्मिता चांदोकर, चित्रा कोहले, विजया चौधरी, वंदना पाटिल, प्रीति केसकर उपस्थित थीं।
महाराष्ट्र मंडल में फ्री रंगोली वर्कशाप 12 अक्टूबर को
रायपुर। इस दीपावली आप भी अपने घर पर बनाना चाहते है मनमोहक संस्कार भारती और फ्री हैंड रंगोली तो महाराष्ट्र मंडल में आयोजित यह एक दिवसीय वर्कशाप आपके लिए ही है। जी. हां... कला एवं संस्कृति समिति की ओर से इस वर्कशाप का आयोजन रविवार, 12 अक्टूबर को दोपहर 3 से 5 बजे तक किया जा रहा है।
कला एवं संस्कृति समिति के प्रमुख अजय पोतदार ने बताया इस एक दिवसीय वर्कशाप में समिति के सदस्य और रंगोली आर्टिस्ट शेखर क्षीरसागर प्रतिभागोयं को संस्कार भारती रंगोली और हैंड फ्री रंगोली बनाना सिखाएंगे। इसके साथ ही कलर सेडिंग के बारे में बताते हुए प्रतिभागियों को रंगोली बनाना भी सिखाएंगे। यह वर्कशाप सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए बिल्कुल निःशुल्क है। अधिक जानकारी के लिए शेखर क्षीरसागर से 98264 15954 और 8839547341 नंबर पर संपर्क किया जा सकता है।