अहिल्या बाई में थी दूरदर्शिता... पर्यावरण के साथ जीव जंतु की भी थी चिंता
- देवपुरी स्कूल में मनाई गई अहिल्या बाई की 300वीं वर्षगांठ
रायपुर। रानी अहिल्या बाई होल्कर की शौर्य गाथा जितनी प्रेरणादायी है उनकी दूरदर्शिता भी आत्मसात करने योग्य है। रानी अहिल्या भगवान शिव की बड़ी भक्त थीं। पार्थिव शिवलिंग निर्माण और तालाब और नदियों में विर्सजन में भी उनका विजन नजर आता है। शिवलिंग में चढ़े चावल व अन्य के अन्य दानें तालाब में प्रवाहित करने पर तालाब में रहने वाले जीव जंतु उसे अपना आहार बनाते। वहीं अगर दाने तालाब के किनारे पहुंच गए और पेड़ उठ गए तो पेड पौधे के पत्ते झड़कर जमीन में गिरेंगे और यह मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ाएंगे। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने प्राथमिक और माध्यमिक शाला देवपुरी में शनिवार 5 अक्टूबर को आयोजित अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती के दौरान कहीं।
माध्यमिक शाला देवपुरी और प्राथमिक शाला देवपुरी में 5 अक्टूबर को अहिल्याबाई होलकर की 300 वी वर्षगांठ मनाई गई। जिसमें अहिल्याबाई होलकर के जीवनी के बारे मे कुछ प्रेरणादाई बातें महाराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताई। उन्होंने कहा कि रानी अहिल्या बाई होल्कर ने अपने राज्य में कई तीर्थ स्थानों के साथ ही कई मंदिर, घाट, कुएं, बावडियों, भूखे लोगों के लिए अन्नसत्र और प्याऊ का निर्माण भी कराया। अहिल्याबाई महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। कार्यक्रम में प्रधान पाठक साहू सर, शिक्षिका रिचा देवांगन, ममता देवांगन, जीवनलता मिंज, मंजू दुबे, सहित 250 से अधिक बच्चे उपस्थित थे।
























