संचार क्रांति में टीवी की भूमिका अतुलनीयः प्राचार्य
- संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में मनाया गया विश्व टेलीविजन दिवस
रायपुर। संचार क्रांति का आधार टेलीविजन को कहा जाता है। क्योंकि इसके आने के बाद मनोरंजन और सूचनाओं के प्रसार में तेजी आई। ब्लैक-एंड-व्हाइट से लेकर रंगीन, केबल और डिजिटल स्ट्रीमिंग तक, टीवी ने एक साझा सांस्कृतिक अनुभव बनाया है, जनमत को आकार दिया है और दुनिया भर की घटनाओं को लोगों तक पहुंचाया है। आज डिजिटल युग में भी यह अपनी प्रासंगिकता बनाए हुए है। उक्ताशय के विचार संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने शुक्रवार 21 नवंबर की असेंबली में गया विश्व टेलीविजन दिवस के अवसर पर कहीं।
शुक्रवार, 21 नवंबर को येलो हाउस की टीम ने असेंबली कंडक्टकी। हाउस कार्डिनेटर अस्मिता कुसरे और असेंबली इंचार्ज रेणुका शुक्ला ने बच्चों को बताया कि टेलीविजन में आज भी कई कार्यक्रम ऐसे आते है जिन्हें छोटे बच्चों को देखना चाहिए। जैसे जंगल बुक, ब्रेनचाइल्ड, मालगुड़ी डेज, डोरा, द एक्सप्लोरर, डा. बिनोक्स शो, स्टोरीबॉट्स से पूछें, छोटे आइंस्टीन शिक्षाप्रद कार्यक्रम है।
प्रथम बालेश्वर ने बच्चों के सामने टेलिविजन डे पर एक स्पीच दी। लव पाठक ने बच्चों को सुविचार कि चार लाइन बोलकर बच्चों को शिक्षा का महत्व बताते हुए और उसे हम टेलीविजन से कैसे ग्रहण कर सकते हैं इस बारे में बताया। पावना, सुहानी, शिवम ने असेंबली में सहभागिता दी।
शिक्षिका आराधना लाल ने बताया कि हाई और हायर सेंकडरी के बच्चों द्वारा भी वर्ल्ड टेलिविजन डे सेलिब्रेट किया गया। हाउस इंचार्ज वंदना बिसेन और आशा जैन के मार्गदर्शन में बच्चों ने असेंबली तैयार की। वर्ल्ड टेलीविजन डे पर स्पीच दिव्या पांडे ने दिया। दिया गोस्वामी तथा शिवानी गोस्वामी ने बच्चों से टेलीविजन आधारित प्रश्न पूछे, जिसका बच्चों ने उत्साह के साथ उत्तर दिया।












