दिव्य महाराष्ट्र मंडल
महाराष्ट्र मंडल में सजीं सुरों, नृत्य और हास्य की अविस्मरणीय संध्या
- गणेशोत्सव 2026 के दौरान भिलाई के अलंकार समूह ने दी शानदार प्रस्तुति
रायपुर। महराष्ट्र मंडल में शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में 19 सितंबर को आयोजित प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। महाराष्ट्र मंडल के मंच पर प्रस्तुत यह सांस्कृतिक कार्यक्रम सुमधुर गायन, भावपूर्ण प्रस्तुति, नृत्य और हास्य से सजी एक सुंदर सांस्कृतिक मेजवानी साबित हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत अजय लोंढे द्वारा प्रस्तुत भावस्पर्शी गीत ‘सूर निरागस हो’ से हुई। इसके बाद श्रीकांत देव ने ‘गारवा’, स्नेहा जोशी ने ‘रूपेरी वाळूत’ और अजय लोंढे ने ‘मन उधाण वाऱ्याचे’ प्रस्तुत कर वातावरण को सुरमयी बना दिया। पूजा नालमवार के ‘अधीर मन झाले’, आशीष करमरकर के ‘राधा ही बावरी’ और स्नेहा जोशी के ‘अप्सरा आली’ ने दर्शकों की विशेष वाहवाही बटोरीं।
इसके बाद दिलीप पाठक ने ‘गुलाबी साडी’ और साईनाथ रमेश अय्यर ने ‘याड लागलंय’ प्रस्तुत कर कार्यक्रम में और रंग भर दिया। आशीष करमरकर और रेवती जोशी की ‘गोमू संगतीने’, श्रीकांत देव एवं स्नेहा जोशी की ‘जीव रंगला दंगला’, तथा दिलीप पाठक और पूजा नालमवार की ‘मी डोलकर’ प्रस्तुतियों ने भी रसिकों के मन पर विशेष छाप छोड़ी। अजय लोंढे एवं रेवती जोशी का ‘बहरला हा मधुमास’, साईनाथ रमेश एवं स्नेहा जोशी का ‘प्रियकरा’ और अंत में स्नेहा जोशी, पूजा नालमवार एवं रेवती जोशी द्वारा प्रस्तुत ‘दिसला ग बाई दिसला’ ने कार्यक्रम का समापन उत्साह और उमंग से भरपूर वातावरण में किया।
कार्यक्रम में प्रस्तुत दो हास्य नाटिकाओं ने इस संगीतमय मैफल में एक अलग ही रंग भर दिया। रेवती जोशी और स्मिता फडे द्वारा प्रस्तुत सास-बहू के रिश्ते पर आधारित हास्य प्रसंग ने दर्शकों को खूब हंसाया और गुदगुदाया। वहीं दूसरी हास्य नाटिका के माध्यम से हास्य के साथ सामाजिक जागरूकता का सुंदर संदेश दिया गया। मनोरंजन के साथ समाजोपयोगी संदेश देने का यह प्रयास विशेष रूप से सराहनीय रहा। सभी कलाकारों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों में स्वर की मधुरता, अभिनय की सहजता, नृत्य की स्फूर्ति और मंच पर आत्मविश्वास का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया।
इस संपूर्ण कार्यक्रम का निर्देशन श्री हर्षवर्धन वझे ने किया। विभिन्न कलाओं को एक सूत्र में पिरोते हुए तथा प्रत्येक कलाकार को अपनी प्रतिभा निखारने का अवसर देते हुए उन्होंने कार्यक्रम को एक सुंदर और प्रभावशाली रूप प्रदान किया। संगीत, नृत्य, अभिनय, हास्य और सामाजिक संदेश का यह सुंदर संगम महाराष्ट्र मंडल के रसिक दर्शकों के लिए निश्चित रूप से एक आनंददायी, यादगार और अविस्मरणीय सांस्कृतिक अनुभव रहा
महाराष्ट्र मंडल में पहली बार शिवाजी महाराज के साथ भारत मां की हुई आरती
0- बड़ी संख्या में जुटे भक्तों ने गणेश वंदना के बाद की आरती में जोश के साथ किया जयघोष
श्रवण बाधित बच्चियों ने प्रस्तुत की गणपति वंदना
- गणेशोत्सव 2026 के पांचवें दिन मंडल के प्रकल्पों ने दी सांस्कृतिक प्रस्तुति
- मराठी, हिंदी, पंजाबी व दक्षिण के गीतों पर रंगारंग प्रस्तुतियों से बना सामाजिक समरसता का माहौल
- महाराष्ट्र मंडल के प्रकल्पों के कार्यक्रम में श्रवण बाधिक बच्चियों ने खूब बटोरी वाहवाही
रायपुर। कोई भी चीज न सुन पाना और न बोला पाना की स्थिति में आपके चेहरे और हाथों की भाव भंगिमा आपकी भावनाओं को संप्रेषित करने का कार्य करती है। महाराष्ट्र मंडल के दिव्यांग बालिका विकासगृह में निवासरत बच्चियों ने गणेशोत्सव में आयोजित सांस्कृतिक संध्या में सुदर प्रस्तुति दी। श्रवण बाधित बच्चियोंने शानदार गणपति वंदना प्रस्तुत किया। जिसे देखकर सभी ने खूब तालियां बजाई।

शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव के पांचवें दिन महाराष्ट्र मंडल सामाजिक समरसता का केंद्र बन गया। मंडल के प्रकल्पों संत ज्ञानेश्वर स्कूल (एसडीवी), सखी निवास (कामकाजी महिला वसती गृह) और दिव्यांग बालिका विकास गृह की बच्चियों ने हिंदी, मराठी और पंजापी के साथ दक्षिण के गीतों की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरी। मंडल के प्रकल्पों की टीमों ने एकल और समूह नृत्य के साथ गाने की शानदार प्रस्तुति दी।

महाराष्ट्र मंडल के दिव्यांग बालिका विकास गृह की प्रभारी मालती मिश्रा ने बताया कि मंडल के सभी प्रकल्पों की टीम ने सांस्कृतिक रंगारंग की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ सदस्य दीपक पात्रीकर और विनय काले थे। कार्यक्रम में विशेष रुप से युवा आईएफएस पुष्कर काले भी उपस्थित थे। कार्यक्रम की शुरूआत संत ज्ञानेश्वर की छात्रा दिव्या साहू, दिव्यांशी साहू और हेमाक्षी साहू ने मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया।

मंडल के सखी निवास में रहने वाली पूर्णिमा रात्रे अपनी सुमधुर आवाज में ‘तेरी है जमीं, तेरा आसमां’ गीत गाकर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं प्रेमा कुम्हार ने ‘हे गौरीनंदन’ गाया। वहीं दिव्यांग बालिका विकास गृह की सीमा सारथी ने ‘जब कोई बात बिगड़ जाए’ प्रस्तुत किया। वहीं महाराष्ट्र मंडल की ओर से कम्लेश्वरी साहू ने ‘सांसों की माला में सिमरू मैं शिव का नाम’ गीत गाया।

संत ज्ञानेश्वर स्कूल (एसडीवी) की ओर से कुल 9 प्रस्तुति दी गई। कक्षी तीसरी की दिव्या साहू, दिव्यांशी साहू और हेमाक्षी साहू रिमिक्स गीत में प्रस्तुति दी। वहीं हर्षिता श्रीवास, नैनसी साहू, अभिज्ञा शुक्ला और पावना लास्या ने एक नृत्य की प्रस्तुति दी। पावना और अभिज्ञा ने क्लासिकल नृत्य की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरी। खुशी त्रिपाठी, स्नेहा मथानी, रिद्धी साहू और शिवानी गोस्वामी ने भागड़ा प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति के रुप में दिव्यांग बालिका विकास गृह में निवासरत श्रवण बाधित गंगा निषाद, किरण साहू और शशि ने मनमोहक गणपति वंदना प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन संत ज्ञानेश्वर विद्यालय की शिक्षिका आराधना लाल और आभार प्रदर्शन परितोष डोनगांवकर ने किया।
जेन जी रील्स और इंटरनेट तक सीमित नहीं.... इनोवेशन और स्टार्टअप का आधार भी
रायपुर। जेन जी को हम केवल सोशल मीडिया, रील्स और इंटरनेट की पीढ़ी कहकर सीमित नहीं कर सकते। यही पीढ़ी नई तकनीक सीख रही है, नए स्टार्टअप बना रही है, देश के लिए नए अवसर पैदा कर रही है और वैश्विक मंच पर भारत का नाम रोशन कर रही है। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल की आजीवन सभासद शताब्दी पांडे ने मंडल में आयोजित नागरिक संवाद में जेन जी और संस्कार विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहीं।
शताब्दी पांडे ने आगे कहा कि आज हम ऐसे समय में जी रहे हैं, जिसे जेन जी की पीढ़ी कहा जाता है। यह वह पीढ़ी है जो तकनीक के साथ बड़ी हुई है। जिसके हाथ में मोबाइल है, दुनिया उसकी हथेली पर है। सूचना की गति इतनी तेज है कि आज का युवा कुछ ही सेकंड में दुनिया के किसी भी कोने की जानकारी प्राप्त कर सकता है। लेकिन प्रश्न यह है कि क्या तकनीक की गति के साथ हमारे संस्कार भी आगे बढ़ रहे हैं? मेरे विचार से इसका उत्तर है—हाँ, बिल्कुल बढ़ सकते हैं। क्योंकि संस्कार का अर्थ पुराना होना नहीं है।
शताब्दी पांडे ने आगे कहा कि संस्कार का अर्थ है—समय चाहे कितना भी बदल जाए, हमारे भीतर मनुष्यता बनी रहे। लेकिन इस आधुनिकता के साथ हमें कुछ मूल बातें नहीं छोड़नी है। जैसे माता-पिता के प्रति सम्मान, गुरु के प्रति श्रद्धा, प्रकृति के प्रति संवेदना, समाज के प्रति उत्तरदायित्व और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य।
हमारे यहाँ कहा गया है, “मातृ देवो भव, पितृ देवो भव, आचार्य देवो भव।” आज जेन जी को इन शब्दों का अर्थ नए तरीके से समझाने की आवश्यकता है। उन्हें यह नहीं कहना है कि मोबाइल छोड़ दो, बल्कि यह सिखाना है कि मोबाइल आपका साधन बने, आपका स्वामी नहीं। उन्हें यह नहीं कहना है कि आधुनिक मत बनो, बल्कि यह कहना है कि आधुनिक बनो, लेकिन अपनी जड़ों से जुड़े रहो। क्योंकि जिस वृक्ष की शाखाएँ आकाश को छूती हैं, उसकी जड़ें धरती में उतनी ही गहरी होती हैं। आज आवश्यकता है जेन जी को संस्कारों से जोड़ने की नहीं, बल्कि संस्कारों को जेन जी की भाषा में पहुंचाने की।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर महाराष्ट्र मंडल ने जलाया ‘आशीर्वाद का दीया’
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल रायपुर ने आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संबद्ध सखी निवास, मरीन ड्राइव रायपुर और महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्वलित कर उनके स्वस्थ, सुदीर्घ और यशस्वी जीवन की मंगलकामना की। महाराष्ट्र मंडल परिवार ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रसेवा और जनकल्याण के प्रति समर्पण को स्मरण करते हुए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं।


बच्चा जितना संस्कारी, वह देश उतना समृद्ध: डा. चितरंजन कर
महाराष्ट्र मंडल में शिवाजी महाराज के साथ अब मां भारती की भी होगी आरती
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल, रायपुर की छत्रपति शिवाजी महाराज कार्यक्रम आयोजन समिति के तत्वावधान में 19 सितंबर शनिवार को शाम 7 बजे छत्रपति शिवाजी महाराज की मासिक महाआरती के साथ भारत माता आरती का शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम महाराष्ट्र मंडल की मुख्य लॉबी में आयोजित होगा। शिवाजी महाराज और मां भारती की आरती पर विशेष रुप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के छत्तीसगढ़ प्रांत संघचालक टोपलाल वर्मा और महंत श्री वेदप्रकाश श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर, रामकुंड, रायपुर उपस्थित रहेंगे।
समिति प्रमुख गणेशा जाधव पाटिल ने बताया कि जेन जी और जेन अल्फा सहित नई पीढ़ी को संस्कार, संस्कृति, सामाजिक दायित्व और राष्ट्रभाव से जोड़ने के उद्देश्य से यह पहल की गई है। पाटिल ने बताया कि उनके द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले एवं सचिव चेतन दंडवते का सकारात्मक मार्गदर्शन एवं अनुमोदन प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा, “युवा केवल देश का भविष्य नहीं, वर्तमान की शक्ति भी हैं। संस्कार उनकी पहचान, कर्तव्य उनका संकल्प और राष्ट्रहित उनकी प्राथमिकता बने—इसी उद्देश्य से यह पहल की जा रही है।”
मासिक भारत माता आरती के माध्यम से मातृभूमि के प्रति श्रद्धा, राष्ट्रीय एकता, कर्तव्यबोध एवं राष्ट्रगौरव की भावना को नई पीढ़ी तथा सर्व समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, छत्रपति शिवाजी महाराज की महाआरती के साथ भारत माता की आरती का यह क्रम नियमित रूप से जारी रखने की योजना है।
आयोजन समिति के समन्वयक अभिषेक बक्षी, समिति प्रमुख गणेशा जाधव पाटिल एवं महिला प्रमुख रीना बाबर ने महाराष्ट्र मंडल के पदाधिकारियों एवं सदस्यों, विभिन्न समितियों के प्रमुखों, महिला केंद्र की संयोजिकाओं, शिवप्रेमियों तथा सर्व समाज से 19 सितंबर को शाम 7 बजे महाराष्ट्र मंडल की मुख्य लॉबी में सपरिवार उपस्थित होकर मासिक महाआरती एवं भारत माता आरती के शुभारंभ में सहभागी बनने का आग्रह किया है।
क्रेयॉन और स्केचिंग कर बच्चों ने किया ‘बप्पा’ को साकार

‘सूचना तो जल्दी मिल रही लेकिन आत्मीयता हो रही दूर’
- वाद-विवाद स्पर्धाः सोशल मीडिया ने मानव संचार को बेहतर बनाया

वाद-विवाद स्पर्धा में संत ज्ञानेश्वर विद्यालय, लक्ष्मी नारायण विद्यालय, गुजराती स्कूल के बच्चों ने उत्साह के साथ भाग लिया। स्पर्धा की शुरुआत प्राची नाईक ने पक्ष में अपना विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज सारी चीजें सोशल मीडिया में सरलता से हमें मिल रही है। सोशल मीडिया के माध्यम से हमें बिहार के खान सर के बारे में पता चला। इसी सोशल मिडाय ने उन्हें जन-जन तक पहुंचाया। आज हजारों बच्चे उनकी क्लास अटैंड कर रहे है। प्राची की बात का खंडन करते हुए संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के उज्ज्वल द्विवेदी ने कहा कि इंटरनेट मीडिया और सोशल मीडिया में बड़ा फर्क है। खान सर की पठन सामग्री इंटरनेट मीडिया में उपलब्ध है। जहां जानकारी का खजाना है,लेकिन बात हो रही है सोशल मीडिया इसका सही ढंग से इस्तेमाल न करना काफी हद तक हमारे लिए नुकसानदायक है। बीते दिनों फिल्मस्टार धर्मेंद्र के मौत की खबर सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हुई। फिर इंटरनेट मीडिया यानी प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से इसके सत्यता की पुष्टि हुई। गुजराती स्कूल की पायल साहू ने का कि सोशल मीडिया सूचना का सशक्त माध्यम है। यह आम आदमी का अधिकार है। जो देश को तरक्की कर रहा है उसमें सोशल मीडिया का भी बड़ा सहयोग है। पायल साहू की बातों का खंडन करते हुए डिंपल अवधिया ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से देश तरक्की कर रहा है लेकिन आज हर घर में आपसी दूरी बढ़ती जा रही है।

पक्ष में अपना विचार रखते हुए लक्ष्मी नारायण स्कूल की वैशाली मानिकपुरी ने कहा कि कई लोग ऐसे होते है जो खुले मंच पर अपने बात नहीं रख पाते ऐसे लोगों के लिए सोशल मीडिया एक अच्छा प्लेटफार्म है। आज कई घरों की गृहणिया इन्हीं सोशल मीडिया प्लेटफार्म में अपना टैलेंट दिखाकर प्रसिद्धी पा रही है। वहीं विपक्ष पर अपने विचार रखते हुए आकांक्षा सिन्हा ने कहा कि सोशल मीडिया की लत बड़ों के साथ बच्चों को भी लग रही है। बच्चे मोबाइल पर बिना रील्स देखे खाना नहीं खा रहे, यह एडिक्शन आगे लगाकर चलकर बड़ी परेशानी बनती है। पीहू सोना ने कहा कि सोशल मीडिया ने गांवों को ग्लोबल पहचान दी। वहीं नीलू सोनकर ने कहा कि बच्चे मोबाइल स्क्राल में अपनी समय बर्बाद कर रहे है. कुछ प्रतिशत बच्चे ही ज्ञान की चीजें देखते है, बाकी फालतू के रील्स में अपना भविष्य खराब कर रहे है। कुमकुम यादव ने पक्ष पर अपना विहार रखते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर आप क्या देखने चाहते हो यह आपकी सोच पर निर्भर करता है। सोशल मीडिया आज हमारी आवश्यकता नहीं अनिवार्यता है। वहीं संत ज्ञानेश्वर ते तन्मय भगाड़े ने विपक्ष पर अपने विचार रखते हुए सोशल मीडिया से फैली असुरक्षा की भावना पर चिंता व्यक्त की। तन्मय ने कहा कि सोशल मीडिया न जाने कितने लोग हमारी निजी जानकारी का मिसयूज करने के लिए बैठे है, एक पोस्ट और हमारी निजी जानकारी उनके पास। ऐसे में हमें इसके इस्तेमाल को लेकर संजीदा होना पड़ेगा।

युवा समिति की समन्वयक डा. शुचिता देशमुख ने बताया कि वाद-विवाद प्रतियोगिता में निर्णायक के तौर पर सेवानिवृत्त प्राचार्य श्यामल जोशी, सेवानिवृत्त शिक्षिका कुमुद लाड और वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र ठेंगड़ी उपस्थित थे। स्पर्धा में प्रथम स्थान पक्ष से गुजराती स्कूल की पायल साहू और विपक्ष से संत ज्ञानेश्वर के तन्मय भगाड़े रहे। वहीं दूसरे स्थान पर संत ज्ञानेश्वर की डिंपल अवधिया और लक्ष्मी नारायण विद्यालय की पीहू सोना रही। कार्यक्रम का संचालन युवा समिति के उदित बक्षी ने किया। कार्यक्रम में महाराष्ट्र मंडल की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल, कार्यकारिणी सदस्य मालती मिश्रा, सहसचिव अजय पोतदार, प्रवीण क्षीरसागर, युवा समिति की प्रमुख श्रावणी मुकादम सहित युवा समिति की टीम उपस्थित थीं।
अनोखे शिल्पकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी को जन्मदिन पर असंख्य बधाई
अजय मधुकर काले,
आज 17 सितंबर को देवशिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती और हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी का जन्मदिन है। भगवान विश्वकर्मा को हिंदू धर्म में सृष्टि के प्रथम शिल्पकार, वास्तुकार और निर्माण कला का देवता माना जाता है। भगवान विश्वकर्मा ने सोने की लंका, भगवान कृष्ण की द्वारका नगरी, और पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ का निर्माण किया था। उन्होंने देवताओं के लिए कई अस्त्र-शस्त्र बनाए, जिनमें इंद्र का वज्र भी शामिल है। हम भारतवासी उनके जन्मदिन को श्रम दिवस के रूप में मनाते है। और संयोग यह है कि हमारे प्रधानमंत्री जी की भी जन्मदिन आज के ही दिन पड़ता है। उनकी बचपन से अब तक की यात्रा को देखेगें तो हमें अनुभव होगा कि किन विपरित स्थितियों में राज्य का फिर देश के प्रधान सेवक की महत्त्वपूर्ण जबाबदारी कर्तव्य के रूप में निभा रहे है।
वे आज बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत बन गए है। पहले कोई निर्णय ही न लेना सबसे बड़ा निर्णय होता था, लेकिन मोदी जी ने देश के विकास में रिस्क लेते हुए धड़ाधड़ निर्णय लेकर विकास के सारे रास्ते खोल दिए। नोटबंदी हो, एक देश एक कर GST हो, कश्मीर का 370 का प्रकरण हो या महिलाओं के उत्थान के लिए ट्रिपल तलाक का मामला हो, देश में स्वच्छता का जनजागरण हो, शौचालय निर्माण हो, सिगड़ी के धुएँ से मुक्ति हेतु उज्ज्वला गैस हो या गांव गांव में विद्युत उपलब्धता हो, निर्धन को भी बैंक खाता ओपन कर के सहायता हो, कृषकों की आय बढ़ाना हो बेरोज़गारों को स्वरोजगार के लिए बैंक से सहयोग हो, महामारी कोरोना में स्वास्थ्य सुरक्षा जान बचाना हो, विश्व में भारत को इज्जत दिलाना हो, लोकल को स्वदेशी जागरण हो या राष्ट्र प्रेम जागरण करना हो, क्या लिखे क्या छोड़े, हर बड़े छोटे निर्णय के पीछे प्रॉपर प्लानिंग क्रियान्वयन रिजल्ट सफलता।
कार्य करते समय लोगों के ताने, अपेक्षित रिजल्ट न मिलने के बाद भी उत्साह में कोई कमी नहीं दोगने उत्साह से कार्य करना। यह सब सीखने अनुकरण करने के लिए है। कोई भी उम्र के है कोई भी प्रोफेशन से है कोई भी व्यवसाय से है चाहे श्रमिक हो या उद्योग जगत से हो पक्ष से हो या विपक्ष से हो सीखना चाहिए कि विपरित परिस्थितियों में धैर्य के साथ कैसे स्थिति अनुकूल हो सकती है।
विकास के लिए क्या-क्या कदम उठाने होंगे कैसे सबको अपना बनाना है और उसके लिए खुद को हमेशा अपडेट करते रहना है। राजनीति में हर निर्णय के पीछे विरोध जिन मुद्दों पर होता है उससे भी सीख लेकर विशाल भारत का नेतृत्व करना जहां कहा जाता है कि कोयले की दलाली में हाथ काला होता है से भी बेदाग छबि बनाना अनुकरणीय है। व्यक्ति कार्य करता है उसके अधीनस्थ भी पूरी ईमानदारी निष्ठा से कार्य करें, ये असंभव होता है परंतु पूरे टीम से एक विजन उद्देश की पूर्ति हेतु कार्य कराना कार्य करने की प्रेरणा देना स्वयं कार्य करना ये सिर्फ हमारे पूज्यनीय प्रधानमंत्री ही कर सकते है। आज जन्मदिन के अवसर पर असंख्य शुभकामनाएं। हमेशा आप से पूरे देशवासी प्रेरणा लेते रहे, घर समाज राष्ट्र को मजबूत करते रहे।
लेखकः महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष और मोटिवेशनल स्पीकर है।
सस्पेंस और थ्रिलर से भरे नाटक ‘जस्टिस’ ने दर्शकों को किया रोमांचित
शालेय वाद-विवाद, सुलेख, निबंध व चित्रकला स्पर्धा 17 सितबर को
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में आयोजित शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव के आयोजनों की श्रृंखला में 17 सितंबर को दोपहर 12 बजे से स्कूली बच्चों के लिए नगर स्तरीय सुलेख, निबंध, चित्रकला और वाद-विवाद प्रतियोगिता आयोजित की गई है। महाराष्ट्र मंडल की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल और युवा समिति की समन्वयक डॉ शुचिता देशमुख ने बताया कि कार्यक्रम की तैयारी को लेकर युवा समिति और खेलकूद समिति लगी हुई है।
युवा समिति के प्रमुख शुभम पुराणिक के मुताबिक इन विविध स्पर्धाओं में हर वर्ष बड़ी संख्या में बच्चे भाग लेते हैं। मंडल के संत ज्ञानेश्वर विद्यालय, छत्रपति शिवाजी इंग्लिश मीडियम स्कूल, रेडियंट वे स्कूल, राजकुमार कालेज, भारत माता स्कूल, बालाजी स्कूल जैसे कई बड़े स्कूलों के 150 से अधिक बच्चे भाग लेते हैं। इस वर्ष भी स्कूल प्रबंधन की ओर से बच्चों की सूची भेज दी गई है।
डॉ. शुचिता के अनुसार प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाले प्रत्येक प्रतिभागी को महाराष्ट्र मंडल की ओर से प्रमाण पत्र दिया जाएगा। वहीं विभिन्न स्पर्धाओं के विजेताओं, उप विजेताओं और तीसरा स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र के साथ आकर्षक पुरस्कार भी दिए जाएंगे।
संत ज्ञानेश्वर स्कूल के नचिकेत ने राज्य फेंसिंग स्पर्धा में जीता गोल्ड
महाराष्ट्र मंडल गणेशोत्सव में 16 सितंबर की शाम 7.30 बजे से 'नागरिक संवाद'
- 'जेन जी और संस्कार ' विषय पर कई विशेषज्ञ करेंगे संवाद
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में तीसरे दिन बुधवार, 16 सितंबर को शाम 7 बजे से छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में नागरिक संवाद का आयोजन किया गया है। महाराष्ट्र मंडल की परिवार परामर्श समिति और साहित्य समिति के इस कार्यक्रम में संवाद करने के लिए नगर की जानी- मानी हस्तियां मौजूद रहेंगी।
मंडल की साहित्य समिति की प्रभारी कुमुद लाड ने बताया कि 16 सितंबर को शाम 7 बजे महाराष्ट्र मंडल चौबे कॉलोनी, रायपुर में नागरिक संवाद ‘जेन-जी और संस्कार’ विषय पर परिचर्चा आयोजित है। कार्यक्रम में भाषाविद, चिंतक, लेखक, कवि, डॉ. चित्तरंजन कर, वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, चिंतक विचारक, शिक्षाविद राजीव कुमार, हिन्दी साहित्य परिषद के अध्यक्ष श्री शशांक शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता और प्रखर वक्ता शताब्दी पांडे उपस्थित रहेंगी।
बतादें कि महाराष्ट्र मंडल के गणेशोत्सव का 91 वर्षों का इतिहास में जितना गौरवशाली है, उतनी ही अविस्मरणीय हैं गणेशोत्सव में नागरिक संवाद की यादें। पिछले नौ दशकों में इस आयोजन में मुख्य वक्ता के रूप में पं. रविशंकर शुक्ल, ठाकुर प्यारेलाल सिंह, खूबचंद बघेल, जय नारायण पांडे, हरि ठाकुर, रणवीर सिंह शास्त्री, शारदा चरण तिवारी, यशवंत गोविंद जोगलेकर, मोहन लाल पांडे, भगवती चरण शुक्ला, सुधीर मुखर्जी, पं. श्यामा चरण शुक्ल, गजानन माधव मुक्तिबोध, विनोद कुमार शुक्ल से लेकर विद्याचरण शुक्ल तक के सुविख्यात नामों की लंबी फेहरिस्त है।
महाराष्ट्र मंडल में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रीगणेश प्रतिमा स्थापित
- 10 दिनों तक होंगे विविध आयोजन, मंगलवार को होगा नाटक जस्टिस का मंचन
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में आचार्य चेतन गोविंद दंडवते ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यजमान महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले और मंडल भवन प्रभारी दीपक किरवईवाले के साथ मिलकर प्रथम पूज्य गणपति बप्पा की प्रतिमा मंडल परिसर में प्रतिष्ठित कराई। इस तरह 91 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुरूप 10 दिवसीय विविध कार्यक्रमों वाले शहीद मेजर यशंवत गोरे स्मृति महाराष्ट्र मंडल गणेशोत्सव का शुभारंभ हो गया। इस अवसर पर मंडल की कार्यकारिणी उपस्थित रहीं।

मंडल के मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि प्रतिमा स्थापना के बाद आध्यात्मिक समिति के सदस्यों व उपस्थित श्रद्धालुओं ने सामूहिक अथर्वशीर्ष पाठ किया। महाआरती के बाद प्रसाद वितरित किया गया। उन्होंने आगे बताया कि गणेशोत्सव के दौरान अगले 10 दिनों में बहुत से ऐसे कार्यक्रम होंगे जो सभी को पसंद आएंगे। उन्होने सभी से सपरिवार कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील सभी से की। आज प्रतिमा स्थापना उत्सव के दौरान दिव्यांग बालिका विकास गृह में निवासरत श्रवण बाधित बच्चियां खास तौर पर उपस्थित रहीं।

सचिव चेतन गोविंद दंडवते ने बताया कि मंगलवार को शाम 7.30 बजे नाट्य समिति की ओर से हिंदी नाटक जस्टिस का मंचन किया जाएगा। जिसे आचार्य रंजन मोड़क ने निर्देशित किया है। जिसके लेखक पवन ओगले है। वहीं उसके बाद प्रतिदिन कुछ न कुछ कार्यक्रम आयोजित किए गए है। इस बार भोपाल और नागपुर से आने वाला नाटक खास होगा।

अपने हाथों से बनाए गणपति को बच्चों ने किया घरों में स्थापित
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा बीते 6 सितंबर को बच्चों को मिट्टी के गणेश बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। बच्चों ने जितने उत्साह के साथ प्रतिमा बनाई उतने ही उत्साह के साथ उसमें रंग भी भरा। और फिर 14 सितंबर को सुबह विधि-विधान से साथ प्रतिमा की स्थापना भी की।
महाराष्ट्र मंडल के सहसचिव अजय पोतदार ने बताया कि मूर्ति निर्माण कार्यशाला में 100 से अधिक बच्चों ने भाग लिया। ज्यादातर बच्चे प्रतिमा को अपने साथ घर लेकर गए। फिर उसे सूखाकर उसमें पेंट किया। उसे आकर्षक ढंग से सजाया और आज उसकी स्थापना की। सार्वी गनोदवाले ने मूर्ति में सुंदर रंग लगाए और उसे सजाधजा कर तैयार कर स्थापना की। इसी तरह सनाया श्रवने, स्वस्ति नाफड़े और विवेक टल्लू ने भी मूर्ति को रंग किया।
महाराष्ट्र मंडल में रहस्यमी हिंदी नाटक ‘जस्टिस’ का मंचन 15 सितंबर को
रायपुर। पुरानी हवेली के बाहर मूसलधार बारिश और तेज बिजली कड़कने की आवाज के बीच जज की अतृप्त आत्मा का आकाशवाणी नुमा ऐलान ‘जब तक असली कातिल का पता नहीं चल जाता, तब तक न तो मेरी आत्मा को मुक्ति मिलेगी और न ही इस हवेली से कोई बाहर जा पाएगा।जबर्दस्त डायलॉग के बीच गिरते- संभलते किसी तरह डॉक्टर, फॉरेंसिक एक्सपर्ट, पुलिस इंस्पेक्टर, वकील से लेकर मंत्री जी तक हवेली के हॉल में पहुंचते हैं। जहां आराम कुर्सी पर मृत रिटायर्ड जज माथुर को देखकर वो सभी कांप जाते हैं है।
बात हो रही है हिंदी नाटक ‘जस्टिस’ की, जिसका मंचन मंगलवार, 15 सितंबर को शाम 07:30 बजे महाराष्ट्र मंडल में संत ज्ञानेश्वर सभागृह के कुमुदिनी वरवंडकर स्मृति रंगमंच पर किया जाएगा। मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव के दूसरे दिन पवन ओगले लिखित और रंजन मोड़क निर्देशित हिंदी नाटक ‘जस्टिस’ की केंद्रीय भूमिका में आचार्य चेतन गोविंद दंडवते प्रभावशाली अभिनय करते दिखेंगे। पवन ओगले, रविंद्र ठेंगड़ी, भारती पलोसकर, समीर टल्लू, विनाद राखुंडे और अक्षदा मातुरकर के कसे हुए संवादों के साथ रंगप्रेमी दर्शक एक कत्ल की तफ्तीश को करीब से होते हुए देख सकेंगे। साथ ही हर पल इस बात में उलझे रहेंगे कि अनुराधा का खून आखिर इनमें से किसने किया है।
बैकग्राउंड म्यूजिक के माध्यम से नाटक को और भी भूतहा और रोमांचक बनाने के लिए अस्मि जैन के साथ चैतन्य मोडक ने खासी मेहतन की है। गौरव वर्मा व लोकेश साहू का प्रकाश संयोजन और प्रकाश गुरव व नानक गहलोत का मंच सज्जा ‘जस्टिस’ और भी यादगार बनाएगा। मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने रंगप्रेमी दर्शकों को नाटक ‘जस्टिस’ को देखने के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया है, ताकि नाटकों के कलाकारों को भावी नाटकों के लिए भी प्रोत्साहन मिल सके।