दिव्य महाराष्ट्र मंडल
फिजियोथेरेपी में धैर्य और निमयित अभ्यास देता है राहत डा. डीके नेताम
रायपुर। अक्सर लोग दो-चार दिन फिजियो कराने के बाद सोचते है कि फिजियोथेरेपी का असर नहीं दिख रहा है। और कई लोग बंद कर देते है। फिजियोथेरेपी एक ऐसा ट्रीटमेंट हैं, जिसमें आराम मिलने में थोड़ा समय लगता है। शुरुआत में थोड़ी परेशानी और थकान महसूस होती है, लेकिन धैर्य और नियमित अभ्यास निश्चित तौर पर आराम देता है, और इसके परिणाम भी अद्भुत होते है। उक्त विचार फिजियोथेरेपिस्ट डा. डीके नेताम ने मंडल में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में व्यक्त किए।
डा. नेताम ने कहा कि फिजियोथेरेपी जिसे भौतिक चिकित्सा भी कहा जाता है। यह एक ऐसी चिकित्सा पद्धति है जिसमें बिना सर्जरी या दवाइयों के, विशेष व्यायाम, शारीरिक गतिविधियों और विभिन्न उपकरणों की मदद से शरीर के दर्द को कम किया और अंगों की कार्यक्षमता को सुधारा जाता है। आज हमें यह समझने की जरूरत है कि स्वस्थ्य जीवन के लिए लिए यह कितनी अहम भूमिका निभाता है।
आमतौर पर हमें कोई बीमारी होती है या चोट लगती है तो हम तुरंत दवाईयों और सर्जरियों का सहारा लेते है। लेकिन फिजियोथेरेपी एक ऐसी चिकित्सा पद्धाति है जिसमें बिना किसी भारी भरकम दवाईयों के केवल सही व्यायाम मैनुअल थेरेपी और विशेष तकनीकों से इसे ठीक किया जा सकता है। यह हमारे शरीर को गतिशीलता प्रदान करता है और ताकत लाने में मदद करता है। कमर दर्द, गर्दन में दर्द, घुटनों का दर्द या जोड़ो की जकड़न को दूर करने में फिजियोथेरेपी असरदार है।
बच्चों को भी होती है फिजियोथेरेपी की आवश्यकताः डा. संगीता
रायपुर। विकास में देरी, जन्मजात बीमारियां, हड्डियों की चोट या न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को फिजियोथेरेपी की जरूरत पड़ती है। बच्चों में सबसे आम प्रकार की शारीरिक अक्षमता सेरेब्रल पाल्सी है। निगलने में कठिनाई और आँखों की मांसपेशियों में असंतुलन, जिसके कारण आँखें एक ही वस्तु पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पातीं, सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित लोगों में आम हैं। अगर आपके आसपास किसी बच्चे को इस तरह की परेशानी होती है तो कृपया उसे एक बार फिजियोथेरेपिस्ट को जरुर दिखाएं। उक्त विचार महाराष्ट्र मंडल की फिजियोथेरेपिस्ट डा. संगीता कश्यप ने विश्व फिजियोथेरपी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहीं।
डा. संगीता ने कहा कि बच्चों के फिजियोथेरेपिस्ट बच्चों की शारीरिक क्षमता विकसित करने में मदद करते हैं। वे नवजात शिशुओं से लेकर किशोरों तक के रोगियों का इलाज करते हैं और शिशु एवं बढ़ते बच्चे की गतिशीलता, विकास और उन्हें नुकसान पहुंचाने वाली स्थितियों की विशेष समझ रखते हैं।
अगर आपका बच्चा या आपके आसपास कोई बच्चो एड़ी उठाकर चलता है, तो आमतौर पर लोग इसे सामान्य मानते है। ऐसा है भी, लेकिन दो साल तक। दो-तीन साल की उम्र पार करने के बाद भी बच्चे एड़ी उठाकर चलता है तो उसकी मांसपेशियां बहुत कड़ी और सख्त हो चुकी है। ऐसे में उसे फिजियोथैरेपी ट्रीटमेंट की आवश्यकता है।
महाराष्ट्र मंडल में सामूहिक मंगलागौर उद्यापन...परिसर में उत्सव का माहौल
- 18 विवाहित महिलाएं परिवार के साथ पूजा में हुई शामिल
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में हुए सामूहिक मंगलागौर के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार ने पूरे परिसर को शिव और पार्वती मय कर दिया। सुबह मां गौरी- पार्वती की पूजा का जो भक्तिमय वातावरण बना, वह दोपहर 2 बजे तक बना रहा। सामूहिक मंगलागौर व्रत पूजन उद्यापन में 17 विवाहित महिलाएं अपने परिवार के साथ शामिल हुईं। पूजा-अर्चना, महाआरती के बाद महाप्रसाद में सभी शामिल हुए। इस वर्ष पहली बार बैंकॉक से सौ. प्रान्जली चार्वेकर पूजा में जुटी थी।
बतादें कि सामूहिक मंगलागौर उद्यापन का आयोजन महाराष्ट्र मंडल और महाराष्ट्र संस्कार केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। आचार्य चेतन गोविंद दंडवते के मार्गदर्शन में पूजा संपन्न हुई। महाराष्ट्र मंडल के सचिव और महाराष्ट्र संस्कार केंद्र के संस्थापक आचार्य चेतन गोविंद दंडवते ने बताया कि सामूहिक मंगलागौर उद्यापन का आयोजन प्रतिवर्ष सावन मास के अंतिम मंगलवार को किया जाता है। महिलाएं वैवाहिक जीवन में सुख- समृद्धि, पति- पुत्र की दीर्घायु, घर परिवार में सुख- शांति और संतान प्राप्ति की कामना करती है।
आचार्य दंडवते ने बताया कि इस वर्ष शिवांगी-संजीत लाखे, दिव्या-स्वप्निल कुशतर्पण, गीतु-कीर्ति कुमार परमानंद, आयुषी-परिमल आठले, सिया-समीर त्रिमळे, इशा-सागर पळसोदकर, प्रगति-पंकज जोशी, नेहा-आदित्य धर्माधिकारी, प्रीशा-प्रखर गनोदवाले, शुभ्रा-आदित्य आष्टिकर, हर्षिता-वैभव खड़कोदकर, स्वाती-प्रद्युम्न बक्षी, डॉ. रोहिणी-अमोल धुदे, गौरी-महेश आगलावे, प्रियल-मधुर देशपांडे, वर्षा- सिद्धार्थ टोपे और पद्मश्री-शांतनु देशमुख ने उद्यापन कराया है।
दंडवते ने आगे बताया कि आज हुए मंगलागौर उद्यापन अजय पोतदार, योगेश दंडवते, पार्थ देशपांडे, विपुला शेजवलकर, पल्लवी मुकादम, मेघा पोतदार, सृष्टि दंडवते, गौरी क्षीरसागर, आकांशा गड्रे, सृजन दंडवते, संध्या खंगन, यशस्वी दंडवते और अंकिता किरवई ने सहयोग प्रदान किया। वहीं महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले, उपाध्यक्ष गीता दलाल और अंकिता किरवई ने महिलाओं को सुंदर नृत्य कराया।
महाराष्ट्र मंडल की पर्यावरण समिति मंदिर हसौद में करेगी वृहद स्तर पर पौधारोपण
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की पर्यावरण समिति पर्यावरण संरक्षण की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। महाराष्ट्र मंडल परिसर को हरियाली सुसज्जित करने के साथ मंदिर हसौद में वृहद स्तर पर जल्द पौधरोपण किया जाएगा। जिसकी रुपरेखा तैयार करने लिए विगत दिनों मंडल परिसर में पर्यावरण समिति की आवश्यक बैठक हुई। बैठक में मंडल उपाध्यक्ष गीता दलाल ने टीम का मार्गदर्शन और उत्साहवर्धन किया। वहीं मिट्टी के गणेश की कार्यशाला में गणेश की प्रतिमा में डाले गए सीड बाल की प्रशंसा की।
पर्यावरण समिति के प्रमुख पराग दलाल ने बताया कि 5 सितंबर को मंडल परिसर में हुई समिति की बैठक में उपाध्यक्ष गीता दलाल का विशेष मार्गदर्शन मिला। बीते दिनों सत्य साईं हास्पिटल में हुए पौधरोपण अभियान के बाद मंडल परिसर को हरा-भरा किया जाएगा। वहीं बीते दिनों मंडल हुई मिट्टी के गणेश बनाने की कार्यशाला में गणेश की प्रतिमा में सीड बाल डाले गए थे। ताकि बच्चे घर के गमले में उसका विसर्जन करें और उससे नया पौधा अंकुरित हो।
महिला प्रमुख अर्चना पराड़कर ने कहा कि आगामी दिनों में मंदिर हसौद के पास वृहद स्तर पर पौधरोपण महाभियान चलाया जाएगा। इसके लिए ग्रम सरपंच ने सहमति दी है। स्थान का चयन कर लिया गया है। इस माह वहां पौधरोपण किया जाएगा। मंडल परिसर में हुआ बैठक में दिव्यांग बालिका वस्ती गृह प्रभारी मालती मिश्रा, पर्यावरण समिति की संरक्षक अनघा करकशे, अंजलि काले, दिनकर करकशे व पर्यावरण समिति प्रमुख पराग दलाल उपस्थित थे। साथ ही महिला प्रमुख अर्चना पराड़कर आनलाईन मीटिंग में जुड़ी थी।
बीमारी या बड़े आपरेशन के बाद पोस्ट केयर में फिजियोथेरेपी की भूमिका खासः शताब्दी पांडे
- महाराष्ट्र मंडल में मनाया गया विश्व फिजियोथेरेपी दिवस
- डाक्टरों ने दिए हेल्थ टिप्स, बताया किन परिस्थितियों में कराए उपचार
रायपुर। किसी बड़ी बीमारी या आपरेशन के बाद मरीजों की देखभाल या यू कहिए कि पोस्ट केयर में फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका बड़ी विशेष होती है। आपरेशन के बाद डाक्टर चला जाता है, डायटिशियन आपको डाइट प्लान समझाकर चला जाएगा। लेकिन एक फिजियोथेरेपिस्ट तब तक आपके साथ रहता है जब तक आप पहले जैसे न हो जाए। यानी सीधा तौर पर घर के सदस्य की तरह वह आपसे जुड़ते है। उक्ताशय के विचार मंडल की आजीवन सभासद शताब्दी पांडे ने मंडल परिसर में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहीं।

शताब्दी पांडे ने कहा कि कुछ समय पहले उनका एक एक्सीडेंट हुआ था, उसके बाद उन्होंने फिजियो लिया, तब उन्हें इस बात का एहसास हुआ कि पोस्ट केयर में फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका कितनी खास होती है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि मंडल समाज से सीखता है। फिजियोथेरेपी सेंटर में मरीजों को फायदा हो रहा है. यहीं हमारा उद्देश्य पूरा होता है। उन्होंने फिजियोथेरेपी सेंटर शुरू करने से लेकर अब तक डाक्टरों द्वारा मिले सहयोग के लिए उनका धन्यवाद दिया। कार्यक्रम को मंडल उपाध्यक्ष गीता दलाल ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन आस्था काले ने किया।
विश्व फिजियोथेरेपी दिवसः चिकित्सकों का प्रेरक उद्बोधन 8 सितंबर को
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल रायपुर के फिजियोथेरेपी और पुनर्वास केंद्र द्वारा विश्व फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर फिजियोथेरेपी के महत्व, स्वास्थ्य एवं सक्रिय जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए कार्यशाला और चिकित्सकों का प्रेरक उद्बोधन कार्यक्रम का आयोजन मंगलवार 8 सितंबर को सुबह 12 बजे से मंडल परिसर में किया गया है।
महाराष्ट्र मंडल के मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि मंडल द्वारा संचालित स्व. कृष्ण कुमार शंकर दयाल वर्मा स्मृति फिजियोथेरेपी और पुनर्वास केंद्र में विश्व फिजियोथेरेपी दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। कार्यक्रम में डा. संगीता कश्यप, डा. अंकिता काळे ,डा. डीके नेताम का उद्बोधन होगा और वहां चिकित्सीय परामर्श भी देंगे।
संस्कार शाला में शोभा मोहता ने बच्चों को बताए यातायात नियम
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में हर शनिवार को लगने वाले संस्कार शाल में इस शनिवार बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी दी गई। संस्कार शाला में आने वाले निचली बस्ती के बच्चों को बताया कि कि सड़क पर पैदल चलने और रोड क्रास करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
संस्कार शाला में बच्चों को पढ़ा रही मंडल की सभासद शोभा मोहता ने सबसे पहले बच्चों से मां सरस्वती की वंदना कराई। इसके बाद ब्लैक बोर्ड में ‘सड़क सुरक्षा’ लिखा गया। इस वाक्स को बच्चों को पढ़ने बोला गया। उसके बाद शोभा मोहता ने बच्चों को सड़क पर चलने के नियम बताएं। उन्होंने बच्चों को बताया कि लाल बत्ती के समय क्या करना है? हरा लाइट दिखे तब क्या करना है? साथ ही ज़ेबरा क्रॉसिंग पार कैसे करना है।
शोभा मोहता ने इस तरह बच्चों को पोस्टर दिखा सड़क पर चलने के लिए नियम बताएं। बच्चों को सिखाया कि सुरक्षित होकर सड़क कैसे पार करना है। उसके बाद बच्चों से प्रश्न पूछें ताकि यह पता चल सकते कि जो पढ़ाया वह बच्चों को समझ में आया की नहीं। वहीं सही जवाब देने वाले बच्चों को पुरस्कृत भी किया गया।
श्रीकृष्ण लघु नाटिका में बालकृष्ण और गोपियों के संवादों ने किया मंत्रमुग्ध
- महाराष्ट्र मंडल में मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, मटकी फोड़ का भी हुआ आयोजन
रायपुऱ। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से रविवार 6 सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर छोटे-छोटे बच्चों द्वारा मनमोहक लघु नाटिका प्रस्तुत की गई। जिसमें श्रीकृष्ण, उनके बालसखा और गोपियों की टूटे-फूटे संवादों ने सभी का मन मोह लिया। आकर्षक वेशभूषा के साथ हाथों में बासुंरी और माथे पर मोरपंख लिए जब कान्हा मंच पर उतरे तो दर्शकदीर्घा में बैठे लोग अपने मोबाइल पर उनकी तस्वीरें निकालने में लग गए। कोई भी इस पल को मिस नहीं करना चाहता था, इसलिए सभी फोटो खींचने में आतुर नजर आए।

आध्यात्मिक समिति की समन्वयक सृष्टि दंडवते ने बताया कि कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इस अवसर पर सुंदर भजनों की प्रस्तुति दी दई। वरिष्ठ सभासद कल्याण देशपांडे, साक्षी परमानंद, सुमीत मोड़क, अभिश्री जोशी और अर्णव कुसरे ने सुंदर भजन प्रस्तुत किया। ढोलक पर मनीष यादव ने संगत किया। भजनों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को पूरी तरह भक्तिमय कर दिया। मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले और सचिव चेतन दंडवते ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया।

आध्यात्मिक समिति के प्रमुख आलोक शेंडे ने बताया कि फैंसी ड्रेस में बच्चों ने एक से बढ़कर एक मनोहारी रुप धरा था। वहीं लघु नाटिका में बच्चों के संवादों ने सभी मन मोह लिया। लघु नाटिका में कृष्ण जन्म से लेकर गीता ज्ञान तक को दर्शाया गया। जिसमें अलग-अलग बाल पात्रों ने अभियन किया। लघु नाटिका का निर्देशन आनंद कुसरे ने किया। नाटिका की प्रारंभ भगवान के जन्म के साथ हुआ। जिसमें दिखाया गया कि कैसे भगवान देवकी के घर जन्म लिया और वासुदेव जी उन्हें यमुना पार कर नंदबाबा के घर ले गए। वहीं उनकी बाल लीलाएं और रास की मंचन भी बच्चों ने खूब अच्छे ढंग से किया। जिसके बाद कंश वध और गीता ज्ञान भी मंचित किया गया।

फैंसी ड्रेस में आरोही अलकरी (7), उर्वी रणदिवे (8), सुदीक्षा निब्ररड़ (सवा साल) अर्णव कुसरे (7), ओवी गायकवाड़ (2.5), अभिज्ञा शुक्ला (6), अंश कुसरे, केशवी राजपूत (1.5) शार्विल देशपांडे (4), प्रशस्ति आकांत (7), युक्ता रोकडे (10), यशीत काळे (3), प्रथमेश ओगले (5), दक्षा टेंबे (8) अव्यान हृषिकेश जोशी (3) स्वस्ति नाफडे (3), अव्या आदित्य कुलकर्णी (2) अनंत देसाई (5) अभिश्री जोशी (10), प्रनवी ओगले, आयुष शिरके, आरव भुजाडे (5) आरोही भुजाडे (10) अनिशा सिंह (6) और अंवय मानस सुले शामिल हुए।
महाराष्ट्र मंडल के महिला केंद्रों और सियान गुड़ी हुआ हनुमान चालीसा पाठ
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर आध्यात्म के प्रति लोगों को प्रेरित करने के लिए हर शनिवार को हनुमान चालीसा पाठ का अभियान इस शनिवार भी उत्साह के साथ जारी रही। मंडल के चौबे कॉलोनी, डंगनिया, अमलडीही महिला केंद्र के साथ सियान गुड़ी में आने वाले बुजुर्गों ने उत्साह के साथ हनुमान चालीसा पाठ किया।
आध्यात्मिक समिति की समन्वयक सृष्टि दंडवते ने बताया कि चौबे कॉलोनी महिला केंद्र द्वारा हनुमान चालिसा पाठ चौबे कॉलोनी स्थित महाराष्ट्र मंडळ भवन में किया गया। इस दौरान अपर्णा काळेले, मनीषा वरंवडकर, अक्षता पंडित, अंजली वैद्य, चारुशीला देव, रोहिणी नेने, अल्का मराठे, प्राची डोनगांवकर, स्वाती डबली, अनुपमा बोधनकर, गौरी क्षीरसागर, स्वाती डोनगावकर, नीलिमा डोनगांवकर, सुनंदा बेंद्रे, अवंती अग्निहोत्री, रंजना काथोटे, धनश्री पेंडसे, अर्चना मुकादम, सीमा गणोदवाले उपस्थित थीं।

सृष्टि दंडवते ने आगे बताया कि इसी तरह डंगनिया महिला केंद्र की तरफ से हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ मंडल परिसर में किया। इस दौरान रश्मि डांगे, अनुभा जाऊरकर, सृष्टि दंडवते, दीपांजली भालेराव, अंजली काळे, प्रीति रणदिवे, प्रियंका राजपूत, माधवी गिरहे, सीमा देव, अनामिका महाजन, पूर्णिमा भावे, संध्या अनिल, श्रद्धा देशमुख, अर्चना कुलकर्णी, मिसेज तैलंग, श्रद्धा मरधडे, अनुजा महाडिक, शैला गायधनी, अर्चना टेम्बे, प्रिया जोगळेकर, माधुरी इंचुरकर और जया भावे उपस्थित थी।

कार्यकारिणी सदस्य व मंडल की आध्यात्मिक व स्वास्थ्य समितियों की प्रभारी आस्था काले ने बताया कि अमलीडीह केंद्र की महिलाओं ने अपनी मासिक बैठक सदस्य अल्का बापट के घर पर की। इसकी शुरूआत हनुमान चालीसा पाठ के साथ की गई। वहीं महिलाओं ने सावन सेलिब्रेशन औऱ जन्माष्टमी उत्सव भी मनाया। इस अवसर पर अंजली चरपे, प्रीति गजबे, ज्योति बनकर, सरिता लुलु, साधना धागमवार, स्मिता कायंदे, तृप्ति करमरकर, मैथिली ठोके, नीलिमा लखपाले, सुखदा लाखे और अल्का बापट शामिल रही।

महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित और समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुदानित सियान गुड़ी में भी प्रतिदिन आने वाले बुजुर्गों ने इस शनिवार उत्साह के साथ पाठ किया। श्री हनुमान जी की आरती और राम भजनों की प्रस्तुति ने सियान गुड़ी को भक्तिमय कर दिया। इस अवसर पर डॉ ओसी बिसेन, लखन लाल साहू, साधु राम साहू, डॉ ओपी सोनी, कैलाश कुमार अग्रवाल और हिमांचल परगनिहा उपस्थित थे।
महाराष्ट्र मंडल शहर की झुग्गी बस्तियों में लगाएगा स्वास्थ्य शिविर
- स्कूलों में चलेगा कैंसर जागरूकता अभियान
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित समस्त स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को लेकर 6 सितंबर को महाराष्ट्र मंडल की स्वास्थ्य सेवा समिति की बैठक आयोजित की गई। जिसमें स्वास्थ्य समिति के सदस्यों के साथ मंडल में संचालित फिजियोथैरेपी सेंटर के डाक्टर मौजूद थे। बैठक की अध्यक्षता महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने की। इस बैठक में मंडल के मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन और स्वास्थ्य प्रकल्पों की प्रभारी कार्यकारिणी सदस्य आस्था काले विशेष रुप से मौजूद थीं। बैठक में शहर की झुग्गी बस्तियों स्वास्थ्य शिविर लगाने पर चर्चा की गई। जिसकी रूपरेखा जल्द तैयार कर लिया जाएगा।
कार्यकारिणी सदस्य आस्था काले ने बताया कि बैठक में अध्यक्ष अजय मधुकर काले की उपस्थिति में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। स्वास्थ्य सेवा समिति द्वारा कैंसर जागरूकता को लेकर बड़ा अभियान चलाया जाएगा। वहीं वैक्सीनेशन को लेकर भी प्रचार किया जाएगा। इसके लिए स्कूलों में जाकर अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा।
आस्था ने आगे बताया कि इसके साथ शहर की झुग्गी बस्तियों में जाकर स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया जाएगा। झुग्गी बस्तियों में जागरूकता का कार्यक्रम सितंबर से दिसंबर तक चार महीने चलेगा। जिसकी रूपरेखा और दिन व तिथि समिति प्रमुख जल्द जारी करेंगे। इसके साथ बैठक में यह फैसला लिया गया कि महाराष्ट्र मंडल वो सभासद जो पेशे से डाक्टर वे मंडल परिसर में स सप्ताह में दो घंटे अपने निःशुल्क सेवाएं देगें। फिर वो हैम्योपैथी के डाक्टर को या एलोपैथी थे। इस बैठख में समिति की समन्वयक डा. कमल वर्मा, डा. श्रद्धा उत्तरवार, डा. डीके नेताम, डा. अंकिता काले, डा. संगीता कश्यप, डा. राखी सोनी, समिति प्रमुख प्रशांत बक्षी सह प्रमुख विक्रम हिशीकर, और स्नेहल खेर उपस्थित थीं।
100 से अधिक बच्चों ने बनाए मिट्टी के गणेश... पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
- महाराष्ट्र मंडल में हुई सीड बाल वाले गणेश जी बनाने की कार्यशाला
रायपुर। स्कूलों में बच्चे मार्केट में मिलने वाले क्ले से खेलते है और तरह तरह के डिजाइन बनाते है, ऐसे में अगर उन्हें मिट्टी से मूर्तियां बनाने का मौका मिले तो वे कहां पीछे रहने वाले है। महाराष्ट्र मंडल आयोजित ‘मिट्टी के गणेश’ की कार्याशाला में पहुंचे 100 से अदिक बच्चों ने अपनी-अपनी प्रतिभा के अनुरुप गणेश की प्रतिमा को आकार दिया। जैसे जैसे प्रतिमा आकार लेती गई बच्चों का उत्साह बढ़ता है। बच्चों के उत्साहवर्धन के लिए मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने सभी बच्चों से मुलाकात की और उनसे बात भी की।

मंडल द्वारा 13 वर्षों से चली आ रही परंपरा में इस वर्ष भी बच्चों के साथ बड़ों में खासा उत्साह नजर आया। बच्चों ने जहां बाल गणेश को आकार दिया वहीं बड़े बुजुर्गों ने भगवान की अभय मुद्रा और बाल कृष्ण जैसे रूपों को साकार किया। बच्चों का मार्गदर्शन आर्टिसन अजय पोतदार ने किया। उनका साथ सोनल फडणवीश और शेखर क्षीरसागर ने किया।

महाराष्ट्र मंडळ ने 6 सितंबर को बच्चों को मिट्टी के श्रीगणेश की प्रतिमा बनाने की एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। लगातार 13 वर्षों से चल रहे इस काम में इस वर्ष भी 100 से अधिक बच्चों ने अपनी भागीदारी निभाई। बच्चों ने मिट्टी से श्री गणेश को आकर्षक स्वरूप प्रदान किया। खुद से मिट्टी के गणेश बनाकर बच्चों में अच्छी खासी खुशी देखी गई।

अजय ने बताया कि मिट्टी मंडळ की ओर से उपलब्ध कराई गई थी। उन्होंने बताया कि मिट्टी से श्रीगणेश की प्रतिमा बनाने के लिए सर्वप्रथम कुल मिट्टी को पांच बराबर भागों में बांटा गया। पहले भाग से प्रतिमा के लिए बेस तैयार किया गया। दूसरे भाग से भगवान का पेट वाला हिस्सा तैयार किया गया। तीसरे भाग से भगवान का सिर और शूड तैयार किया गया। चौथे भाग के दो हिस्से कर दोनों पैर बनाए गए। पांचवें भाग के चार हिस्से कर श्रीगणेश के चारों हाथ तैयार किए गए। मिट्टी को पांच बराबर हिस्सों में इसलिए बांटा गया ताकि प्रतिमा के सारे अंग बराबर बने कोई मोटा पतला न हो।

‘कला की कोई भाषा नहीं होती…भावों को समझकर हाथों ने उकेरे गणपति बप्पा
- महराष्ट्र मंडल में मिट्टी के गणेश निर्माण की कार्यशाला संपन्न
- दिव्यांग बालिका में निवासरत मूकबधिर बच्चियों ने बनाएं सुंदर प्रतिमाएं
रायपुऱ। महाराष्ट्र मंडल परिसर में आयोजित गणेश की मूर्ति बनाने की कार्यशाला में अद्भुत नजारा देखने को मिला। जहां एक तरफ आम बच्चों का शोर था, वहीं दूसरी तरफ मूकबधिर बच्चों की ऐसी अद्भुत शांति और रचनात्मकता थी कि सभी अचंभित हो उठे। मंडल परिसर में आयोजित मिट्टी के गणेश बनाने की कार्यशाला में मंडल के दिव्यांग बालिका विकास गृह में निवासरत मूकबधिर बच्चियों ने बिना एक शब्द बोले, सिर्फ अपने हाथों के भावों (साइन लैंग्वेज) और बोलने में समझ गुरु के इशारों को समझकर मिट्टी से भगवान गणेश की अत्यंत सुंदर मूर्तियाँ बनाई। मंडल अध्यक्ष अजय काले ने सभी बच्चों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यशाला के ट्रेनर और मंडल के सहसचिव अजय पोतदार ने बच्चों को मिट्टी को आकार देने की कला सिखाई। उन्होंने जैसे ही अपने हाथों से बप्पा की सूंड, कान और मुकुट बनाने का इशारा किया, बच्चों की आँखों में एक चमक सी आ गई। बच्चों ने प्रशिक्षक के हाथों की हर हरकत को इतनी बारीकी से देखा और समझा कि कुछ ही देर में उनके नन्हें-नन्हें हाथों ने मिट्टी के ढेरों को सुंदर मूर्तियों में बदल दिया।
मूर्ति निर्माण के लिए पूरी तरह से प्राकृतिक मिट्टी का उपयोग किया गया। इन बच्चों ने न केवल मूर्ति बनाना सीखा, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण (Eco-Friendly) का एक बड़ा संदेश भी दिया। सभी मूर्तियों में मंडल की पर्यावरण समिति की ओर से शीड बाल डाले गए। ताकि विसर्जन के बाद उस मिट्टी से एक पौधा जन्म लें।
जब इन बच्चों की बनाई मूर्तियाँ पूरी तरह तैयार हो गईं, तो उनके चेहरों की खुशी देखने लायक थी। भले ही वे बोल नहीं सकते थे, लेकिन उनकी आँखों की चमक, चेहरे की मुस्कान और बप्पा के सामने जुड़े उनके हाथ यह बता रहे थे कि वे मन ही मन कितने उत्साहित और गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। इस अवसर पर मंडल उपाध्यक्ष गीता दलाल, कार्यकारिणी सदस्य मालती मिश्रा, प्रवीण क्षीरसागर, आर्टिस्ट शेखर क्षीरसागर सहित बड़ी संख्या में सभासद उपस्थित थे।
शिक्षक श्रद्धा से युक्त हो और विद्यार्थी श्रद्धालु होः पुष्पा पाध्ये
- महाराष्ट्र मंडल ने किया संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के शिक्षकों का सम्मान
- अध्यक्ष काले बोले- शिक्षक कभी रिटायर नहीं होते
रायपुर। शिक्षक धैर्यवान होने के साथ अपनी पूरी शक्तिस विद्यार्थियों के कल्याण में लगानी चाहिए। विद्यार्थियों की ग्रहण शक्ति के अनुसार उन्हें शिक्षा प्रदान करें। बदलते परिवेश के अनुसार खुद को बदलकर आधुनिक ज्ञान से अपडेट करें और बच्चों को उसका ज्ञान दें। अर्थात् एक शिक्षक को श्रद्धा से युक्त होना चाहिए। वहीं विद्यार्थियों में श्रद्धालु की भांति समर्पण का भाव होना चाहिए। उक्ताशय के विचार महाराष्ट्र मंडल द्वारा टाटीबंध स्थित महतारी सदन में शिक्षक दिवस पर आयोजित सम्मान समारोह में संस्कार भारती स्कूल की पूर्व प्राचार्या 82 वर्षीय पुष्पा पाध्ये ने व्यक्त किए।

शिक्षकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षकों हर वक्त इस बात का ध्यान रखना होगा कि शिक्षण कार्य एक वृत्ति अर्थात काम नहीं अपितु एक व्रत है। बच्चों के प्रथम गुरु उनके मां-बाप होते है। इसलिए औपचारिक शिक्षा व्यवस्था में हम शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थियों को समन्वित करते हुए गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करनी होगी। तभी एक विद्यालय संस्था से आगे बढ़कर राष्ट्र निर्माता की भूमिका में आता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि शिक्षक कभी रिटायर नहीं होता है। वह अपने जीवन के अंतिम पड़ाव तक अपने ज्ञान कुंज के प्रकाश से अपने विद्यार्थियों को प्रकाशमान बनाता है। वह कभी थकता नहीं, इसलिए वह शिक्षक कहलाता है। शिक्षक यानी शि से शिखर पर ले जाने वाला, क्ष से क्षमा करने वाला और क से कमजोरी को मजबूत करने वाला।

इस अवसर पर मंडल उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल, मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन, संत ज्ञानेश्वर स्कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर, सहप्रभारी नवीन देशमुख, महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले, कार्यकारिणी सदस्य मालती मिश्रा, आस्था काले, प्रवीण क्षीरसागर, प्राचार्य मनीष गोवर्धन, उपप्राचार्य राहुल वोड़ितेलवार सहित संत ज्ञानेश्र स्कूल के शिक्षक और आंगनबाड़ी की शिक्षिकाएं उपस्थित थीं।

जेएनयू दिल्ली में रायपुर की जाधव दंपती ने पढ़ा शिवाजी पर अपना शोध पत्र
रायपुर। पंडित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नईदिल्ली के राष्ट्रीय अकादमिक मंच पर महाराष्ट्र मंडल, रायपुर के इतिहास शोधकर्ता गणेशा जाधव पाटिल एवं श्रीमती मंगल गणेशा जाधव पाटिल ने छत्रपति शिवाजी महाराज के राष्ट्रनिर्माण, सुशासन, सामरिक चिंतन एवं ऐतिहासिक विरासत पर अपने शोध-पत्र प्रस्तुत कर महाराष्ट्र मंडल, रायपुर का गौरव राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ाया। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, कृतित्व, राष्ट्रनिर्माण दृष्टि तथा प्रशासनिक एवं सामरिक चिंतन पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में जेएनयू के प्रतिष्ठित विद्वत् मंच पर जाधव दंपती की शोधपरक सहभागिता विशेष आकर्षण रही। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने इस उपलब्धि पर जाधव दंपती को इस सफलता के लिए शुभकामनाएं दी है। बतादें कि कार्यक्रम का आयोजन सांस्कृतिक कार्य निदेशालय, महाराष्ट्र शासन, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली तथा श्री शिवाजी रायगढ़ स्मारक समिति, पुणे के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था।
गणेशा जाधव पाटिल ने “इक्कीसवीं सदी में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रासंगिकता” तथा मंगल गणेशा जाधव पाटिल ने “छत्रपति शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक : नवयुग का आरंभ” विषय पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए। दोनों शोध-पत्रों में स्वराज्य, सुशासन, सामरिक दूरदर्शिता, सांस्कृतिक चेतना, राज्यनिर्माण तथा आधुनिक भारत में शिवाजी महाराज की प्रासंगिकता का शोधपरक विश्लेषण किया गया। महाराष्ट्र मंडल, रायपुर से जुड़े जाधव दंपती द्वारा एक ही राष्ट्रीय मंच पर दो स्वतंत्र विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किया जाना इस सहभागिता की विशिष्ट उपलब्धि रही।
2 एवं 3 सितंबर 2026 को जेएनयू में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में देशभर के इतिहासकारों, विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों ने सहभागिता की। इस राष्ट्रीय मंच पर महाराष्ट्र मंडल, रायपुर की ओर से जाधव दंपती सहित अंशुमन गनोडवाले, सुमिता रायजादा एवं कुमारी अदिति रायजादा ने सहभागिता की। कार्यक्रम में तंजावुर संस्थान के महाराजा बाबाजी राजे भोसले, जेएनयू की कुलपति प्रो. शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित, राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी, श्री शिवाजी रायगढ़ स्मारक समिति के अध्यक्ष रघुजी राजे आंग्रे, सचिव श्री सुधीर थोरात तथा राष्ट्रीय विचारक मुकुल कानिटकर सहित अनेक विद्वान एवं गणमान्य उपस्थित रहे।
आयोजकों द्वारा विद्वत् परिषद के पश्चात प्रतिभागियों के लिए ऐतिहासिक अध्ययन यात्राओं का आयोजन किया गया। इसके अंतर्गत 4 सितंबर को पानीपत के ऐतिहासिक “काला आम” का अध्ययन-दौरा किया गया, जहां प्रतिभागियों ने मराठा शौर्य, संघर्ष एवं बलिदान के इतिहास को निकट से समझा। इसके पश्चात 5 सितंबर को छत्रपति शिवाजी महाराज संग्रहालय, नई दिल्ली का अध्ययन-दौरा किया गया, जहां शिवाजी महाराज के जीवन, सैन्य परंपरा एवं ऐतिहासिक विरासत से संबंधित सामग्री का अवलोकन किया गया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी के अवसर पर जाधव दंपती सहित प्रतिभागियों को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय की ओर से प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। साथ ही संगोष्ठी में प्रस्तुत शोध-विषयों के संक्षिप्त एवं सारगर्भित सारांशों का सारांश-संग्रह पुस्तिका के रूप में प्रकाशन किया गया, जिसमें गणेशा जाधव पाटिल एवं मंगल गणेशा जाधव पाटिल के शोध-पत्र भी सम्मिलित किए गए।
यह उपलब्धि जाधव दंपती के शोध-कार्य के साथ-साथ महाराष्ट्र मंडल, रायपुर की बौद्धिक एवं सांस्कृतिक सक्रियता के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। JNU जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय अकादमिक मंच पर उनकी सहभागिता से रायपुर की शोधपरंपरा और महाराष्ट्र मंडल की राष्ट्रीय उपस्थिति को नई पहचान मिली है।
जाधव दंपती ने कहा कि “छत्रपति शिवाजी महाराज केवल इतिहास के महानायक नहीं, बल्कि सुशासन, सामरिक आत्मनिर्भरता, सांस्कृति क स्वाभिमान और राष्ट्रनिर्माण की आज भी जीवंत प्रेरणा हैं।”»
‘दुनिया का सबसे कठिन कार्य है शिक्षक बनना’
लेखकः अजय मधुकर काले
वर्तमान समय में डॉक्टर, चार्टर्ड अकाऊंटंट, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, कलेक्टर बनना सब चाहते हैं पर टीचर बनना कोई नहीं चाहता, क्योंकि वो सम्मान, वो वेतन, वो सुविधाएं टीचर को नहीं मिलती जो अन्य प्रोफेशन को मिलती है, जबकि ये प्रोफेशन बनाने का कार्य टीचर के माध्यम से ही तो संभव होता है। इस बात को समझना सबसे ज्यादा जरूरी है। किसी को कुछ अच्छी मन मुताबिक सर्विस नहीं मिल रहीं तो उसे कहते है टीचर बन जाओ। अरे इतने महत्त्वपूर्ण सेवा को यदि महत्व नहीं देंगे तो भविष्य कैसा होगा, ये भी विचार करना आवश्यक होगा।
सफलता के शिखर पर ले जाने वाला, क्षमा करने वाला और कमजोरी को मजबूत करने वाला अर्थात शिक्षक को पढ़ाई के अतिरिक्त सभी कार्य करने है। उसे जनगणना भी करना है, कुत्तों को भी गिनना है, निर्वाचन भी कराना है और समय मिले तो पढ़ाना भी है। शासकीय स्कूलों में बहुत अच्छी पढ़ाई हो सकती है, सारी सुविधाएं उपलब्ध कर सकते है एक मापदंड बनाया जा सकता है। शिक्षकों को अच्छा वेतन सुविधाएं दी जा सकती है। लोग कहते है कि प्राइवेट स्कूलों की संख्या बढ़ गई है तो उसके पीछे कारण शासकीय स्कूलों में सुविधाओं का अभाव है। शिक्षक आज भी बहुत मेहनत करते है। आप पाएंगे कि 80 प्रतिशत वर्तमान अधिकारी नेता समाज में प्रतिष्ठित कार्य करने वाले बुद्धिजीवी पद्मश्री व अनेक पुरस्कार से सम्मानित लोग शासकीय स्कूलों के विद्यार्थी रहे है। कारण हमारी नींव बनाने वाले शिक्षक थे जो प्रेरणा देते थे, उत्साहित रहते थे, छड़ी भी मारते थे और मोटिवेशन भी देते थे।
आज स्थिति विपरित है। बड़े अधिकारियों के बच्चे प्राइवेट स्कूल में है। जहां शिक्षकों का वेतन 10 से 25 हजार के बीच है और फिर भी वहां के शिक्षक पूरी मेहनत के साथ बच्चों को पढ़ाने में जी जान से लगे है। 8-8 घंटे की ड्यूटी कर रहे हैं बच्चों के सपने पूरे करने अच्छा नागरिक बनाने के लिए।
मेरा विनम्र निवेदन हर शासकीय अधिकारी प्रशासन सरकार के सभी सम्मानित मंत्रियों विधायकों से है कि ऐसी शासकीय विद्यालय का भवन, सुविधाएं, शिक्षक ट्रेनिंग, सन्मान, क्रिएटकराए की बच्चे ये कहे कि बड़े होकर टीचर बनना है। तभी भविष्य में बेहतरीन समाज का निर्माण होगा। टीचर का वेतन सुविधाएं अन्य शासकीय सेवा के बराबर कर दिया जाए। ससम्मान बढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाये. हालाकि समाज राष्ट्र में अभी भी ऐसे अनेक प्रतिभाएं है जो विपरित परिस्थिति के बावजूद शिक्षक सेवा कार्य निरंतर कर रहीं है।
समस्त गुरुजनों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं......
महाराष्ट्र मंडल का शिक्षक दिवस सम्मान समारोह 5 सितंबर को
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा 5 सितंबर को दोपहर 3 बजे शिक्षक दिवस सम्मान समारोह का आयोजन दोपहर 3 बजे से मंडल द्वारा संचालित हाईटेक आंगनबाड़ी (महतारी सदन) में किया जा रहा है। संत ज्ञानेश्वर स्कूल के प्रभारी परितोष डोनगांवकर ने बताया कि प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के शिक्षकों का सम्मान किया जा रहा है। इस वर्ष कार्यक्रम का आयोजन मंडल द्वारा टाटीबंध में संचालित हाईटेक आंगनबाड़ी में किया जा रहा है। कार्यक्रम में विशेष रुप से महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले और सचिव चेतन दंडवते सहित पूरी कार्यकारिणी उपस्थित रहेगी।
संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया जन्माष्टमी
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में गुरुवार 3 सितंबर को कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव मनाया गया। आयोजन के मुख्य अतिथि स्कूल इंचार्ज परितोष डोनगांवकर ने कार्यक्रम का शुभारंभ द्वीप प्रज्वलन के साथ किया। इस अवसर पर स्कूल के प्राचार्य मनीष गोवर्धन व उपप्राचार्य राहुल वोडीतेलवार उपस्थित थे। अतिथियों ने बच्चों का उत्साह बढ़ाया, बच्चों ने नृत्य संगीत के माध्यम से विभिन्न रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का स्वागत भाषण शिक्षिका मेघा जैन ने व शिक्षिका निकिता यादव ने दिया। रंगारंग एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन आयुषी तिवारी एवं दिव्या पांडेय ने कुशलतापूर्वक किया।