दिव्य महाराष्ट्र मंडल
हाईटेक आंगनबाड़ी व प्ले स्कूल का उद्घाटन 20 जून को
रायपुर। नगर निगम रायपुर द्वारा वार्ड क्रमांक 21 शहीद भगत सिंह वार्ड टाटीबंध में निर्माण आधुनिक आंगनबाड़ी और प्ले स्कूल का विधिवत उद्घाटन शनिवार 20 जून को सुबह 10बजे किया जाएगा। 91 वर्षीय रायपुर की प्रतिष्ठित सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक संस्था महाराष्ट्र मंडल रायपुर द्वारा इसका संचालन किया जाना है। आंगनवाड़ी में बच्चों द्वारा पंजीयन करा लिया गया है।
महाराष्ट्र मंडल के सचिव चेतन दंडवते ने बताया कि टाटीबंध में नगर निगम रायपुर द्वारा निर्मित हाईटेक आगंनबाड़ी के संचालन का जिम्मा महाराष्ट्र मंडल को सौंपा गया है। शनिवार 20 जून को उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत होंगे। वहीं कार्यक्रम में रायपुर महापौर मीनल चौबे और शहीद भगत सिंह वार्ड पार्षद गायत्री सुनील चन्द्राकर विशेष रुप से उपस्थित रहेंगी।
दंडवते ने बताया कि उद्घाटन कार्यक्रम की तैयारियां कर ली गई है। 20 जून से मोहल्ले के बच्चों को वहां पढ़ना, खेलना, खाना आदि कार्य के साथ बच्चों में संस्कार रोपित करने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। इसके लिए रुपरेखा तैयार की जा रही है।
रायपुर श्री शिव शंभू विचार मंच विचारदर्शन कार्यशाला 20 जून को
रायपुर। छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन, हिंदवी स्वराज्य, राष्ट्र निर्माण एवं समाज संगठन के प्रेरणादायी विचारों को जानने और समझने का एक विशेष अवसर राजधानी के लोगों को 20 जून को मिलने जा रहा है।
महाराष्ट्र मंडल रायपुर के सभासद और आयोजन के नगर व्यवस्था प्रमुख गणेशा जाधव पाटिल ने बताया कि श्री शिवाजी रायगढ़ स्मारक मंडल, पुणे द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन शनिवार 20 जून को सुबह 10 बजे से जागृति मंडल, संघ कार्यालय, पुराना स्टैंड,गुरुद्वारा के पास, गोविंद नगर, रायपुर में किया जा रहा है।
पाटिल ने आगे कहा कि कार्यशाला में छत्रपति शिवाजी महाराज के पूर्व के युग, उनके जीवन चरित्र, हिंदवी स्वराज्य की स्थापना, संगठन कौशल, नेतृत्व क्षमता एवं समाज जागरण जैसे विषयों पर मार्गदर्शन प्रदान किया जाएगा। कार्यशाला पूर्णतः निःशुल्क है। आगंतकों के लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी।
पाटिल ने महाराष्ट्र मंडल, रायपुर के सभी विचारशील सदस्यों और समाजजनों से निवेदन किया है कि जो सदस्य छत्रपति शिवाजी महाराज एवं मराठों के गौरवशाली इतिहास से संबंधित विषयों को और भी करीब से जानना समझना चाहते हैं वे अधिक संख्या में उपस्थित होकर इस ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायी कार्यशाला का लाभ लें।
महाराष्ट्र मंडल में माधव राव सप्रे जयंती समारोह 19 जून को, दो पुस्तकों का विमोचन भी
"ओम भवति भिक्षां देहि..." से गूंजा महाराष्ट्र मंडल का संत संत ज्ञानेश्वर सभागृह
- महाराष्ट्र मंडल और महाराष्ट्र संस्कार केंद्र ने कराया 10 बटुकों का मुंज संस्कार
- वैदिक मंत्रोच्चार और रीति रिवाजों के साथ संपन्न कराई गई पूरी प्रक्रिया

रायपुर। वैदिक परंपरा में षोडश संस्कार (सोलह संस्कार) वे महत्वपूर्ण कर्म और अनुष्ठान हैं, जो मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक उसके शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए किए जाते है। इन संस्कारों में से एक है यज्ञोपवीत संस्कार यह व्यक्ति को अनुशासन, ज्ञान और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में मंगलवार 16 जून को हुए सामूहिक मुंज संस्कार बाद जब बच्चों ने अपनी माताओं से भिक्षा मांगी तो पूरा मंडल परिसर "ओम भवति भिक्षां देहि..." की नाद से गूंज उठा।

महाराष्ट्र मंडल और महाराष्ट्र संस्कार केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मुंज संस्कार में 10 बटुकों का उपनयन संस्कार मराठी संस्कृति से संपन्न कराया गया।

महाराष्ट्र मंडल के सचिव और महाराष्ट्र संस्कार केंद्र के प्रमुख चेतन दंडवते ने बताया कि ओम भवति भिक्षां देहि मंत्र के साथ बटुक माताओं से भिक्षा मांगते हैं और अध्ययन के लिए काशी की यात्रा पर जाते है। यह मंत्र इस प्रकार है “भवति भिक्षां देहि। चतुर्वेदान् षट्शास्त्राणि अष्टादशपुराणानि पठिता भवामि॥" अर्थात् "हे माई! मुझे भिक्षा दें, ताकि मैं चारों वेद, छह शास्त्र और अट्ठारह पुराणों का अध्ययन कर सकूं।"

आचार्य चेतन दंडवते व अन्य आचार्यजनों ने विधि विधान और वेद मंत्रोच्चार के साथ इन बटुकों का आज षोडस संस्कारों में से एक उपनयन संस्कार संपन्न कराया। आचार्य चेतन दंडवते का साथ योगेश दंडवते, अजय पोतदार, पंकज सराफ, अभिषेक बक्षी और पार्थ सारथी देशपांडे ने दिया।

इस वर्ष रायपुर से चि. उत्कर्ष पंकज जोशी, चि. संस्कार समीर वरहाड़पांडे, चि. रोहिन राहुल वरहाडपांडे, चि. अहान अतुल राहटगांवकर, चि. तनुष तुषार विंचुरकर और चि. प्रथमेश आशीष मोडक का मुंज संपन्न हुआ, वहीं दुर्ग निवासी अमित जोशी अपने दोनों पुत्रों नीरव और आरव और चि. दक्ष भुसारी बिलासपुर और जबलपुर से चि. आदीश हर्षे का भी मुंज कराया गया। महाराष्ट्र संस्कार केंद्र और महाराष्ट्र मंडल के संयुक्त तत्वावधान अब तक तकरीबन 300 से अधिक बटुकों का उपनयन संस्कार कराया जा चुका है।

आचार्य दंडवते ने बताया कि सुबह 8.30 बजे उपनयन संस्कार की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। सबसे पहले मंडप पूजन किया गया। इसके पश्चात मातृका पूजन एवं मातृभोज, फिर मंगलाष्टक संपन्न कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि संपन्न कराने के बाद सभी बटुकों ने भिक्षाटन कर काशी की यात्रा की।

आयोजन में पल्लवी मुकादम, नमिता शेष, मेघा पोतदार, शुचिता देशमुख, प्रिया बक्षी, भारती पलसोदकर, अंकिता किरवई, यशस्वी दंडवते, गीता दलाल, रेणुका पुराणिक, अक्षता पंडित, अंजली काले, सृष्टि दंडवते, गौरी क्षीरसागर, संध्या खंगन, दीपक किरवईवाले, सृजन दंडवते, श्रीमती स्मिता देशपांडे सहित अन्य कार्यकर्ताओं का विशेष सहयोग रहा।
स्कूल का पहला दिन बच्चे माता-पिता और दादा-दादी के साथ आए
संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में मनाया गया शाला प्रवेशोत्सव
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में मंगलवार 16 जून को शाला प्रवेशोत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया। प्री प्राइमरी स्कूल में बच्चों के साथ पहले दिन माता-पिता ही नहीं अपितु दादा-दादी भी स्कूल आए थे। नर्सरी में एडमिशन लेने वाले आर्या और अबीर चौधरी के दादा प्रताप सिंह चौधरी और दादी अरुणा चौधरी बच्चों को स्कूल छोड़ने आए थे। दोनों ने संत ज्ञानेश्वर महाराज और मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर पूजा अर्चना की। दोनों का स्कूल की संस्कृति के अनुरुप सूतमाला से स्वागत किया गया।

शिक्षिका आराधना लाल ने बताया कि प्राइमरी के बच्चों का स्वागत शिक्षिकाओं द्वारा तिलक व फूलों की वर्षा करके किया गया। छोटे बच्चों का स्कूल आने का उत्साह देखते ही बन रहा था। बच्चों ने भी शिक्षकों के पांव छूकर उनसे आशीर्वाद लिया। वहीं डे शिफ्ट में धूप अधिक होने के कारण बच्चों की उपस्थिति कम थी, लेकिन उत्साह बरकरार रहा। बड़े बच्चों का तिलक और पुष्प वर्षा के साथ स्वागत किया गया। वहीं शासन के निर्देशानुसार राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, राजगीत, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र बच्चों कराया गया।

आज पहले दिन प्रवेश उत्सव में प्राचार्य मनीष गोवर्धन, उपप्राचार्य राहुल वोड़ितेलवार, प्राइमरी इंचार्ज अपर्णा आठले, प्री प्राइमरी इंचार्ज अस्मिता कुसरे, हायर इंचार्ज तृप्ति अग्रिहोत्री, मीडिल इंचार्ज सुनिधि रोकड़े सहित सभी शिक्षणगण उपस्थित थे।
महाराष्ट्र मंडल में मराठी सामूहिक मुंज का 25वां वर्ष... 16 जून को होंगे संस्कार
- रायपुर और दुर्ग के साथ बिलासपुर और जबलपुर से शामिल हो रहे बटुक
महिला केंद्रों में 127 सप्ताह से लगातार जारी हनुमान चालीसा पाठ
- मंडल के महिला केंद्रों, स्कूल, सियान गुड़ी और मंडल कार्यालय में हो रहा पाठ
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से 6 जनवरी 2024 को हर शनिवार को हनुमान चालीसा और रामरक्षा स्तोत्र पाठ करने का एक महाअभियान शुरू किया गया। यह अभियन पिछले 127 सप्ताह से लगातार जारी है। मंडल के 17 महिला केंद्रों, संत ज्ञानेश्वर स्कूल, शंकर नगर बालवाचनालय, सखी निवास, सियान गुड़ी और मंडल कार्यालय की इसमें सहभागिता रहती है। शनिवार को मंडल में कोई बड़ा इवेंट होने पर सभी केंद्र की महिलाएं मंडल भवन में एकत्रित होकर हनुमान चालीसा का पाठ करती है। यह क्रम लगातार जारी है।

महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले और सचिव चेतन दंडवते के मार्गदर्शन में इस अभियान की शुरूआत की गई। जो लगातार पिछले 127 सप्ताह से जारी है। इस शनिवार 13 जून को रोहिणीपुरम, बूढ़ापारा, अमलीडीह, चौबेकालोनी केंद्र की महिलाओं के साथ महाराष्ट्र मंडल स्टाफ और सियान गुड़ी में आने वाले वरिष्ठजनों ने पाठ किया।
आध्यात्मिक समिति की संध्या खंगन ने बताया कि इस शनिवार रोहिणीपुरम केंद्र की महिलाओं ने उनके निवास पर एकत्रित होकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया। सभी महिलाओं ने कृष्ण और हनुमान जी के हिंदी और मराठी भजन भी गाए। इस दौरान अलका कुळकर्णी, अचला मोहरीकर, चित्रा बल्की, संध्या खंगन, अपर्णा वरारपांडे, अनुभा साडेगांवकर, राजेश्री वैद्य, अनिता लांगे, मंगला कुळकर्णी, विशाखा पोगड़े, छाया अंजनकर, जयश्री भूरे, साधना बहिरट, अपर्णा जोशी, मीना विभूते, श्यामल जोशी और मीरा कुपटकर उपस्थित थीं।

आध्यात्मिक समिति की सृष्टि दंडवते ने बताया कि इसी तरह बूढ़ापारा केंद्र की महिलाओं ने बूढ़ापारा स्थित राम मंदिर में अधिकमास के अंतिम दिन शनिवार को रामरक्षा स्तोत्र, हनुमान चालीसा, भजन व रामजी की आरती की। इस दौरान प्रणिता नलगुंडवार, अपर्णा मोघे, अनघा करकशे, दमयंती देशपांडे, संगीता नांडकर, सुनीता साठे, मोहन देसाई, प्रदीप देशपांडे और दिनकर करकशे उपस्थित थे।

इसी तरह अमलीडीह महिला केंद्र की महिलाओं ने अपनी मासिक बैठक की शुरुआत हनुमान चालीसा पाठ के साथ की। इस अवसर पर महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले, रेखा पिंपलगांवकर, शोभा सोनाये सरिता फडके, संध्या फुलझेले, मेघा जोशी, प्रेरणा सप्रे, प्रिया कडू, रेणू सिंग, रेणुका टोमे, प्रीति टोमे, शोभा सोनाये, अक्षरा भगाडे आदि उपस्थित रही। वहीं चौबे कालोनी केंद्र की महिलाओं ने मंडल भवन में हनुमान चालीसा पाठ, भजन और आरती का आयोजन किया। जिसमें मंडल के स्टाफ ने भी अपनी सहभागिता निभाई। इस दौरान मनिषा वरवंडकर, चारुशीला देव, अक्षता पंडित, प्राची डोनगांवकर, संगीता निमोणकर, अवंती अग्निहोत्री, पल्लवी मुकादम, मनिषा मुकादम, सीमा गणोदवाले, रंजना काथोटे मंडल व्यावस्थापिका बी. नंदिनी नायडू, मेस प्रभारी मंजिरी भगाड़े, श्रद्धा जोशी शामिल हुई।
रक्तदान दिवसः आपके मोबाइल पर ही आसानी से मिल जाएंगो डोनरः अजय काले
प्रदेश के पहले हाईटेक महतारी सदन का संचालन करेगा महाराष्ट्र मंडल... महिलाओं के लिए होगा योगा और जुंबा
रायपुर। रायपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में विधायक राजेश मूणतकी पहल पर प्रदेश का पहला हाईटेक महतारी सदन 14 जून से शुरू होने जा रहा है। रायपुरा के विप्र नगर में करीब 80 लाख रुपए की लागत से तैयार 'महतारी सदन', यानी महिला योग और जुंबा सेंटर का लोकार्पण 14 जून को होगा। इसका लोकार्पण रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रायपुर पश्चिम विधायक और पूर्व मंत्री राजेश मूणत करेंगे। टाटीबंध और विप्र नगर में बने महतारी सदन की जिम्मेदारी महाराष्ट्र मंडल रायपुर को सौंपी गई है।
विधायक राजेश मूणत की इस योजना के तहत पहला महतारी सदन टाटीबंध में बना है। टाटीबंध के महतारी सदन की जिम्मेदारी राजधानी की सामाजिक संस्था महाराष्ट्र मंडल को सौंपी गई है। वहीं अब विप्र नगर में बने नए महतारी सदन के संचालन और प्ले स्कूल प्रबंधन की जिम्मेदारी भी महाराष्ट्र मंडल को सौंपे जाने की तैयारी है। निगम और जनप्रतिनिधियों का मानना है कि इससे सुविधाओं का संचालन व्यवस्थित तरीके से हो सकेगा।
विधायक राजेश मूणत का कहना है कि विकास का मतलब सिर्फ भवन निर्माण नहीं, बल्कि ऐसी सुविधाएं तैयार करना होनी चाहिए जिनसे समाज के कमजोर वर्गों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आए। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बेहतर शुरुआती शिक्षा मिले और महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं उपलब्ध हों।
महतारी सदन में महिलाओं के लिए योग और फिटनेस सुविधाओं के साथ बच्चों के लिए आधुनिक प्ले स्कूल भी बनाया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे परिवारों के बच्चों को शुरुआती शिक्षा और डे-केयर जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराना है, जो महंगे निजी प्ले स्कूलों का खर्च नहीं उठा सकते। परिसर में बच्चों के लिए खेल, सीखने और बौद्धिक विकास से जुड़ी सुविधाएं विकसित की गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे आसपास के मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को फायदा मिलेगा।
भवन में महिलाओं के लिए अलग से योग भवन और जुंबा सेंटर बनाया गया है। यहां महिलाएं फिटनेस गतिविधियों में हिस्सा ले सकेंगी। अभी तक ऐसी सुविधाएं ज्यादातर निजी संस्थानों तक सीमित थीं, जहां नियमित शुल्क देना पड़ता है। स्थानीय स्तर पर इसे महिलाओं के स्वास्थ्य और फिटनेस से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या है खास?
- रायपुरा के विप्र नगर में 80 लाख रुपए से तैयार हुआ परिसर।
- महिला योग भवन और जुंबा सेंटर की सुविधा।
- गरीब और मध्यम वर्गीय बच्चों के लिए प्ले स्कूल।
स्कूलों में एक्टिविटी पर आधारित हो शिक्षण कार्यः मधु यादव
- महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर स्कूल में जारी वर्कशॉप में वरिष्ठ शिक्षिका ने नई शिक्षा पद्धति के बारे में दी व्यवहारिक जानकारी
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में वर्कशॉप लेने की अगली कड़ी में केंद्रीय विद्यालय से सेवानिवृत्त और लायंस क्लब की सदस्य मधु यादव ने शिक्षकों को नई शिक्षण पद्धति के बारे में व्यवहारिक जानकारी दी।
मधु ने सबसे पहले शिक्षकों से यह जानने का प्रयास किया कि उन्होंने शिक्षक बनना क्यों चुना? शिक्षक शिक्षण कार्य के साथ अपने परिवार और अपने ऊपर भी ध्यान दे सकती हैं? उन्होंने बताया कि एक विद्यार्थी जब पढ़ता हो, तो वह जल्दी भूल जाता है। जब आप उसे समझाते हो, तो उसे काफी कुछ ध्यान रहता है, लेकिन जब आप उसे अपने साथ इंवॉल्व करते हो, तो उसे सब कुछ याद रहता है। इसीलिए विद्यार्थियों को अपने साथ विभिन्न क्रियाकलापों के माध्यम से शिक्षण में इंवॉल्व कीजिए।

मधु यादव ने एलएसआरडब्ल्यू और वीएआरके, दोनों ही पद्धति को बड़े विस्तार से समझाया। उन्होंने समझाया कि एलएसआरडब्ल्यू स्किल्स के माध्यम से किसी भी भाषा जैसे हिंदी, अंग्रेजी को सीखने और उसमें निपुणता हासिल करने के चार मूलभूत कौशल होते हैं। ये हैं लिसनिंग यानी सुनना, स्पीकिंग यानी भाषण, रीडिंग यानी पठन और राइटिंग यानी लेखन। भाषा को सीखने का क्रम भी यही होता है।
वीएआरके पद्धति के बारे में मधु यादव ने जानकारी दी कि यह एक प्रचलित लर्निंग मॉडल यानी अधिगम शैली है। इसमें वी यानी विजुअल (दृश्य) होता है। इस शैली के लोग चित्रों, चार्ट, रेखाचित्रों और वीडियो के माध्यम से सबसे अच्छा सीखते हैं। ए का आशय ओरल अथवा ऑडिटरी (श्रवण) होता है। ऐसे लोग सुनकर, व्याख्यान अटैंड करके और समूह चर्चाओं में भाग लेकर सबसे जल्दी सीखते हैं। आर अर्थात रीड/राइट (पढ़ना व लिखना) है। इसमें उन्हें लिखी हुई सामग्री, किताबों, नोट्स और सूचियों के माध्यम से जानकारी को समझने में आसानी होती है। मधु के मुताबिक के अर्थात काइस्थेटिक (गतिज/अनुभव): इस शैली के लोग व्यावहारिक अनुभव, छूकर और करके सीखने में विश्वास रखते हैं। वरिष्ठ शिक्षिका मधु ने शिक्षकों को समझाया कि सबसे पहले एक रीडिंग कॉर्नर बनाएं। दूसरा बिन्दू क्लास रूम की सेटिंग चेंज करके बच्चों को यू शेप में बैठाएं। इससे हर बच्चे तक वह पहुंच सके।

बतादें कि मधु यादव संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के कई जरूरतमंद बच्चों की फीस देकर सामाजिक कार्य में भी सहयोग करती है। उन्होंने महाराष्ट्र मंडल भवन का उदाहरण देकर समझाया की किस तरीके से सिर्फ प्रबल इच्छा शक्ति से किए गए प्रयासों के द्वारा महाराष्ट्र मंडल भवन का जीणोद्धार किया गया यह सभी के लिए अनुकरणीय है। वर्कशॉप में अतिथि वक्ता मधु यादव का स्वागत वरिष्ठ शिक्षिका चित्रा जाउलेकर ने और स्मृति चिन्ह सुदेवी बिस्वास ने दिया। कार्यक्रम का संचालन अपर्णा आठले ने किया।
विज्ञान को याद कराने के बजाए समझने पर देना चाहिए जोरः डॉ चंद्रकांत वाघ
- डॉ चंद्रकांत वाघ ने संत ज्ञानेश्वर स्कूल को भेंट किया सूक्ष्मदर्शी यंत्र
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में स्कूल खुलने के पहले शिक्षकों के लिए आवश्यक मार्गदर्शन क्लासेस का आयोजन किया जा रहा है। इसी श्रृंखला में गुरुवार को संत ज्ञानेश्वर विद्यालय पहुंचे अभनपुर के चिकित्सक और महाराष्ट्र मंडल के आजीवन सभासद डॉ चंद्रकांत वाघ। उन्होंने विज्ञान की पढ़ाई के लिए शिक्षकों का मार्गदर्शन किया और बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल को सूक्ष्मदर्शी यंत्र भेंट किया।
स्कूल के उपप्राचार्य राहुल वोड़ितेलवार ने बताया कि डॉ चंद्रकांत वाघ ने शिक्षकों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए उनका मार्गदर्शन किया। विज्ञान की अध्यापिका सेन मैडम के प्रश्न विज्ञान को पढ़ने में रोचक कैसे बनाएं का उत्तर देते हुए चंद्रकांत बाघ ने कहा हमें विज्ञान याद ना करते हुए समझाने पर जोर देना चाहिए। बच्चे इसे समझेंगे तो ज्यादा अच्छे से उत्तर लिख पाएंगे।
शिक्षिका आराधना लाल के प्रश्न सामाजिक मूल्यों का अवमूल्यन हो रहा है इसे कैसे रोका जाए पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि हमें अपने आसपास का वातावरण और व्यवहार में शालीनता लानी चाहिए जिसे देखकर विद्यार्थी सामाजिक मूल्यों को सीखें। शिक्षिका मेघा जैन के प्रश्न सही संतुलित भोजन विद्यार्थियों कैसा होना चाहिए के उत्तर में डॉक्टर वाघ ने संतुलित भोजन का संपूर्ण चार्ट सबको समझाया। शिक्षिका वंदना व प्रतीक्षा मैडम के प्रश्नों का भी उत्तर देते हुए बच्चों को समझाने पर जोर देना चाहिए ना कि उनको याद करने की प्रवृत्ति डालनी चाहिए।
इस अवसर पर डॉ वाघ ने विद्यालय को सूक्ष्मदर्शी यंत्र भेट किया, जिससे विज्ञान के छात्रों व शिक्षकों दोनों का ही लाभ होगा तथा उन्हें प्रयोग विज्ञान की शिक्षा देने में सहयोग मिलेगा। इससे पूर्व कार्यक्रम के प्रारंभ में विद्यालय के प्राचार्य मनीष गोवर्धन, उप प्राचार्य राहुल वोड़ितेलवार ने डॉक्टर साहब का सूत माला के द्वारा स्वागत करते हुए विद्यालय की ओर से उन्हें स्मृति चिन्ह दिया।
महाराष्ट्र मंडल में हिंदी नाटक ‘कथा’ का मंचन 14 जून को
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल रायपुर और उसकी सहयोगी संस्था रंगभूमि के सहयोग से युवा निर्देशक किशोर वैभव द्वारा निर्देशित हिंदी नाटक ‘कथा’ का मंचन रविवार, 14 जून को संत ज्ञानेश्वर सभागृह में किया जाएगा। महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह के स्व. कुमुदिनी वरवंडकर रंचमंच पर मंचित होने वाला 70 मिनट का यह नाटक शाम 7 बजे शुरू होगा।
आचार्य रंजन मोड़क ने बताया कि किशोर वैभव की ओर से निर्देशित और हमारी सांस्कृतिक टीम ‘रंगभूमि’ के सहयोग से हिंदी नाटक ‘कथा’ कथासरित्सागर पर आधारित है। किशोर नाट्य जगत में वर्ष 2009 से सक्रिय है। कथासरित्सागर संस्कृत कथा साहित्य का उत्कृष्ट और शिरोमणि ग्रंथ है। कश्मीरी पंडित सोमदेव भट्ट की यह अमर कृति 11वीं शताब्दी में रची गई और यह कहानियों का एक विशाल सागर है। जो भारतीय इतिहास की गौरवशाली धरोहर है। इसमें 124 तरंगों में 21,388 पद द्वारा मिथक, इतिहास, यथार्थ, सच्चाई और इंद्रजाल का ऐसा अनूठा संगम किया गया हैं जो दूसरी जगह दुर्लभ है।
आचार्य मोड़क ने बताया कि इस नाटक में सूत्रधार हेमंत यादव होंगे। वहीं निलेश पटेल, अक्षदा मातुरकर, सुमन आरोही, आदित्य दास, आस्था जांगड़े, विजय शर्मा सहित अन्य कई कलाकार मंच पर नजर आएंगे। वहीं विन्यास संयोजन की भूमिका लोकेश साहू, स्वपनिल हुद्दार और संत फरिकार ने निभाई है। नाटक के मंचन के लिए दर्शकों से सहयोग राशि ली जाएगी। छात्र और सीनियर सिटीजन्स से प्रति व्यक्ति 150 रुपये, सामान्य 200 रुपये और विशेष आरक्षित यानी वीआईपी सीट के लिए 300 रुपये की सहयोग राशि तय की गई है। आचार्य मोड़क ने सभी से आग्रह किया है कि इस सांस्कृतिक अवसर पर सक्रिय भागीदारी देकर रंगमंच के रंगसाधकों को प्रोत्साहित करें और परिवार व मित्रों को भी अपने साथ जरूर लाएं।
एकादशी पर विष्णु सहस्त्रनाम पाठ और रामनाम का लेखन
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति द्वारा हर एकादशी को होने वाला विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ इस एकादशी भी आनलाइन मोड पर समिति के सदस्यों द्वारा पूरे उत्साह के साथ किया गया। वहीं मंडल द्वारा संचालित सियान गुड़ी में वरिष्ठजनों ने श्रीराम नाम का लेखन किया।
आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति द्वारा प्रत्येक एकादशी पर आनलाइन मोड पर होने वाले विष्णु सहस्त्रनाम पाठ को इस एकादशी पर सभासद मंजूषा मारकले ने करवाया। जिसके बाद दीपांजली भालेराव, प्रणिता नलगुंडवार, चारूशीला देव और मानिक मेराल ने कृष्ण के सुंदर भजन प्रस्तुत कर सभी आध्यात्म की गंगा में डुबकी लगाने का अवसर प्रदान किया। इस अवसर पर अंजली नलगुंडवार, अनुजा महाणिक, अर्चना जतकर, वर्षा करंजगांवकर, सोनल फडनविश, संजय मैरा, संध्या खंगन, राजेश्वरी पाध्ये, प्राची पराडकर शामिल हुई।

आस्था काले ने आगे बताया कि इस क्रम में समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुदानित और महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित सियान गुड़ी में आने वाले वरिष्ठजनों ने हनुमान चालीसा पाठ और राम नाम का लेखन कार्य किया। यह लेखन कार्य वहां हर एकादशी को किया जा रहा है। इस अवसर पर लखन लाल साहू, डा. ओपी बिसेन ने लेखन कार्य किया।
भारत रत्न अब्दुल कलाम की पांच बातों को जीवन में उतारेः हरीश जोशी
- संत ज्ञानेश्वर स्कूल में शिक्षकों के लिए परिचर्चा का आयोजन
रायपुर। भारत के मिसाइल मैन पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम हमेशा पांच बातें कहा करते थे। वो कहते थे, आई एम द बेस्ट, गॉड इस ऑलवेज विथ मी, आई कैन दो एवरीथिंग, आई एम द विनर और टुडे इस माय डे। इन बातों को सभी को अपने जीवन में उतारना चाहिए। उक्त बातें समाजसेवी, गोसेवक हरीश जोशी ने महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय में वाणिज्य विभाग द्वारा शिक्षकों के लिए आयोजित एक चर्चा के दौरान कहीं।
हरीश जोशी ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षकों को अपना शिक्षण कार्य धारदार बनाना चाहिए। शिक्षकों को क्लासरूम में हमेशा खड़े होकर पढ़ाना चाहिए, ताकि पीछे तक बैठे सभी विद्यार्थियों पर आपकी नजर ज सके। वहीं शिक्षक बच्चों के लिए आदर्श होते है, इसलिए शिक्षकों को अपनी वेशभूषा का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। शिक्षक को अपना कार्य समर्पण और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए।

हरीश जोशी ने आगे कहा कि एक शिक्षक को हमेशा लोगों को धन्यवाद देते रहना चाहिए। दूसरों की प्रशंसा करिए, विद्यार्थियों की प्रशंसा करिए, उनका उत्साहवर्धन कीजिए। गलतियों पर बच्चों से किसी प्रकार का द्वेश नहीं रखना चाहिए। उन्हें माफ कीजिए सही रास्ता दिखाए।
कार्यक्रम के दौरान वाणिज्य संकाय के निभा रानी दास, रंजना ठाकुर, शांतनु मुखर्जी तथा विवेक उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य मनीष गोवर्धन ने की। प्राचार्य ने सूतमाला से अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर उपप्राचार्य राहुल वोड़ितेलवार, आराधना लाल, अपर्णा आठले, सुनिधि रोकड़े, अस्मित कुसरे, रचना तिवारी, सरिता पांडे, वर्षा गिरीभट्ट, चित्रा जावलेकर सहित सभी शिक्षिकाएं उपस्थित थीं।
मोटापा कम करना हैं तो खाएं मल्टीग्रेन रोटी, ब्राउन राइस, रागी और मिलेट्स
- डायटिशियन आस्था काले ने दिए हेल्थ टिप्स
रायपुर। आज हम सभी अपने हेल्थ को लेकर केयर फूल है, लेकिन कहीं न कहीं हमारी डाइट इस काम में रोड़ा बनकर खड़ी हो जाती है। चाहकर भी कम इससे जीत नहीं पाते। हमें खाने में रोटी और चावल को चाहिए ही चाहिए। फिर ऐसे में मोटापा कम करना भी एक बड़ा टास्क हो जाता है। ऐसे में हमें मल्टीग्रेन आटा, ब्राउन राइस, रागी, मिलेट्स जैसे उत्पादों का प्रयोग करना चाहिए, ताकि हमें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन मिल सके। उक्त बातें महाराष्ट्र मंडल की आजीवन सभासद, योग और व्यायाम की शिक्षिका व डायटिशियन आस्था काले ने कहीं।
आमतौर पर लोग जरूरी फाइबर और कैलोरी की जानकारी रखे बिना गेहूं की रोटी को सफेद चावल से हेल्दी मानने लगते हैं। सही मात्रा और सही तरीके से सेवन किया जाए तो चावल और रोटी भी बैलेंस्ड डाइट में शामिल होता है। मोटापा बढ़ने की वजह खराब भोजन प्रणाली, अनहेल्दी लाइफ स्टाइल होती है। चावल और रोटी की ओवरईटिंग मोटापा बढ़ा सकती है। गेंहू की रोटी में चावल के मुकाबले ज्यागा फाइबर होता है। भूख को कम करने में यही फाइबर आपकी मदद करता है।
कई लोग रोटी को अत्यधिक घी, मक्खन, तेल या कैलोरी से भरी साइड डिश के साथ खाते हैं, जिससे टोटल कैलोरी बढ़ जाता है। इस वजह से ज्यादा मात्रा में रोटी खाने से भी मोटापा बढ़ता है या फिर अगर आपने रोटी को व्होल व्हीट की जगह रिफाइंड फ्लोर से बनाया हो तो भी। ओवरईटिंग में चाहे गेहूं की रोटी हो या फिर सफेद चावल, वो चर्बी बढ़ा सकता है। अक्सर लोग किसी एक फूड को इसका जिम्मेदार ठहरा देते हैं, लेकिन आमतौर पर मोटापा अत्यधिक कैलोरी, लो फिजिकल एक्टिविटी, खराब नींद, तनाव और खाने की अस्वस्थ आदतों की वजह से होता है।
शिवाजी महाराज ने रायगढ़, सिंहगढ़ और पुरंदर जैसे अभेद्य किलो को जीता
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल रायपुर में शनिवार 6 जून का मंडल परिसर पर छत्रपति शिवाजी महाराज की सिहासनस्थ प्रतिमा की स्थापना की। इस अवसर पर शिवाजी महाराज द्वारा जीते गए किलो की जानकारी पर आधारित भव्य प्रदर्शनी मंडल की युवा समिति द्वारा लगाई गई। युवा समिति की समन्वयक डा. शुचिता देशमुख ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यपाल रमेन डेका जी ने मंडल परिसर पर प्रतिमा अनावरण के बाद प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने सभी किलो की जानकारी को रुचि लेकर पढ़ा और आयोजन को लेकर युवा समिति की बधाई दी। इस अवसर पर युवा समिति की ओर से शुचिता देशमुख और शुभम पुराणिक ने राज्यपाल को पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका स्वागत भी किया।
युवा समिति के शुभम पुराणिक ने बताया कि छत्रपति शिवाजी महाराज (1630-1680) मराठा साम्राज्य के संस्थापक और एक महान दूरदर्शी शासक थे। उन्होंने अपनी वीरता, छापामार युद्ध नीति और कुशल प्रशासन के बल पर शक्तिशाली मुगल साम्राज्य को कड़ी चुनौती दी और 'हिंदवी स्वराज्य' की स्थापना की। मात्र 16 वर्ष की आयु में उन्होंने तोरण का किला जीतकर अपने सैन्य अभियानों की शुरुआत की। उन्होंने पहाड़ी इलाकों और जंगलों का लाभ उठाते हुए मुगलों और बीजापुर के सुल्तानों के खिलाफ छापामार युद्ध प्रणाली अपनाई।

प्रमुख उपलब्धियां: उन्होंने शाहिस्ता खान को परास्त किया, आगरा से औरंगजेब की कैद से चतुराई से भाग निकले और कई अभेद्य किलों (जैसे रायगढ़, सिंहगढ़ और पुरंदर) पर कब्जा किया।
छत्रपति की उपाधि: 1674 में रायगढ़ में उनका भव्य राज्याभिषेक हुआ और उन्हें 'छत्रपति' की उपाधि से सम्मानित किया गया।
अष्टप्रधान मंडल: उन्होंने शासन को सुचारू रूप से चलाने के लिए आठ मंत्रियों की एक परिषद (अष्टप्रधान) का गठन किया।
धार्मिक सहिष्णुता: शिवाजी जन्म और व्यवहार से पक्के हिंदू थे, लेकिन उनके राज्य में सभी धर्मों के लोगों का सम्मान था। उनकी सेना और प्रशासन में कई मुस्लिम अधिकारी भी उच्च पदों पर नियुक्त थे।
Raigad Fort
रायगढ़ किलाः (Raigad Fort) महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में महाड के पास स्थित एक ऐतिहासिक पहाड़ी किला है। समुद्र तल से लगभग 820 मीटर (2,700 फीट) की ऊँचाई पर स्थित यह किला मराठा साम्राज्य के गौरव और छत्रपति शिवाजी महाराज की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध है।
निर्माण और नाम: मूल रूप से इस किले का निर्माण 12वीं सदी में चंद्रराव मोरे परिवार द्वारा किया गया था और इसे 'रायरी' कहा जाता था।
शिवाजी महाराज का अधिकार: 1656 ईस्वी में छत्रपति शिवाजी महाराज ने आदिलशाह से यह किला जीतकर अपने अधीन कर लिया और इसका नाम बदलकर 'रायगढ़' रखा।
राजधानी: 1674 में, शिवाजी महाराज ने रायगढ़ किले को अपने मराठा साम्राज्य की राजधानी बनाया और यहीं उनका भव्य राज्याभिषेक हुआ।
Shivneri fort
शिवनेरी का किला महाराष्ट्र के पुणे जिले के जुन्नार कस्बे के पास स्थित एक ऐतिहासिक और सामरिक महत्व का सैन्य दुर्ग है। यह मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की जन्मस्थली है, जिनका जन्म यहीं 19 फरवरी 1630 को हुआ था।
निर्माण: इस किले का निर्माण 16वीं शताब्दी में हुआ था। शिवाजी महाराज के पिता शाहजी राजे भोसले को यह किला मुगलों से पट्टे पर मिला था, जहाँ शिवाजी महाराज का बचपन बीता और उन्होंने युद्ध कलाएं सीखीं।

Panhala fort
पन्हाला किला (Panhala Fort) महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और विशाल पहाड़ी किला है। इसे 'पन्हालगढ़' और 'सांपों का घर' भी कहा जाता है। समुद्र तल से लगभग 3200 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह किला मराठा साम्राज्य और छत्रपति शिवाजी महाराज के स्वर्णिम इतिहास से जुड़ा हुआ है।
निर्माण: यह किला लगभग 850 साल पुराना है। इसका निर्माण 1178 से 1209 ईस्वी के बीच शिलाहार शासक राजा भोज द्वितीय द्वारा करवाया गया था। पन्हाला किला कोल्हापुर शहर से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित है।
Purander fort
पुरंदर किला महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण पर्वतीय किला है। समुद्र तल से लगभग 4,472 फीट की ऊंचाई पर स्थित यह किला मराठा साम्राज्य की वीरता, विशेष रूप से छत्रपति शिवाजी महाराज के इतिहास का एक प्रमुख प्रतीक है।
सन 1646 में युवा छत्रपति शिवाजी महाराज ने आदिलशाह से पुरंदर किले को जीत लिया। यह शिवाजी महाराज की पहली बड़ी जीतों में से एक थी। वर्ष 1670 में शिवाजी महाराज ने मुगलों को हराकर इस किले पर पुनः अपना अधिकार जमा लिया।
पेशवा और ब्रिटिश काल:18वीं शताब्दी में यह किला मराठा पेशवाओं के नियंत्रण में रहा। 1776 में मराठाओं और अंग्रेजों के बीच पुरंदर की दूसरी संधि हुई। 1818 में अंग्रेजों ने इस पर कब्जा कर लिया और इसका इस्तेमाल जेल तथा अस्पताल के रूप में करने लगे।
Vijaydurg fort
महाराष्ट्र के कोंकण तट पर स्थित विजयदुर्ग भारत के सबसे मजबूत और पुराने समुद्री किलों में से एक है। 'घेरिया' के नाम से मशहूर यह किला अपनी अभेद्य सुरक्षा प्रणाली के लिए जाना जाता है, जिसे कभी मराठा साम्राज्य के महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज ने और बाद में कान्होजी आंग्रे ने समुद्री सैन्य अड्डे के रूप में इस्तेमाल किया था
निर्माण: इस किले का निर्माण 12वीं शताब्दी में शिलाहार वंश के राजा भोज द्वितीय (1193-1205) द्वारा कराया गया था।
पुनर्निर्माण: छत्रपति शिवाजी महाराज ने इस पर विजय प्राप्त कर इसका जीर्णोद्धार कराया और इसका नाम बदलकर 'विजयदुर्ग' रखा।
स्थान: यह किला महाराष्ट्र के देवगढ़-विजयदुर्ग ज़िले में, रत्नागिरी से लगभग 48 किलोमीटर दक्षिण में स्थित हैय़
Sindhudurg fort
सिंधुदुर्ग किला, महाराष्ट्र के कोंकण क्षेत्र में मालवन तट के पास अरब सागर में स्थित एक ऐतिहासिक समुद्री किला है। छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा 1664-1667 के बीच निर्मित यह किला अपनी उत्कृष्ट इंजीनियरिंग, विशाल दीवारों और नौसैनिक रणनीतियों के लिए प्रसिद्ध है।
निर्माण वर्ष: (1664 से 1667) समुद्र की लहरों और दुश्मनों से बचाव के लिए किले की दीवारें 30 फीट ऊंची और 12 फीट मोटी हैं। किले का मुख्य प्रवेश द्वार इस तरह छुपाया गया है कि बाहर से देखने पर इसका पता नहीं चलता। इस किले का निर्माण डच, फ्रांसीसी और पुर्तगाली व्यापारियों के बढ़ते प्रभाव को रोकने और मराठा नौसेना (आरमारी दल) को मजबूत करने के लिए किया गया था।
Sinhagad fort
सिंहगढ़ किला (Sinhagad Fort) महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्री पर्वतमाला की एक खड़ी पहाड़ी पर स्थित एक ऐतिहासिक दुर्ग है। इसे पहले 'कोंढाणा' के नाम से जाना जाता था यह किला लगभग 2000 वर्ष पुराना है। वर्ष 1670 में, छत्रपति शिवाजी महाराज के वीर सेनापति तानाजी मालुसरे ने मुगलों को हराकर इस किले पर जीत हासिल की थी।
यह किला महाराष्ट्र के हवेली तालुका के दोनाजे गांव में, पुणे से लगभग 30 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। यह समुद्र तल से लगभग 1312 मीटर (4320 फीट) की ऊंचाई पर है।
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Pratapgarh fort –
प्रतापगढ़ या प्रतापगढ़ किला (Pratapgad) महाराष्ट्र के सतारा जिले में महाबलेश्वर के पास स्थित एक ऐतिहासिक पहाड़ी दुर्ग है। इसे छत्रपति शिवाजी महाराज ने 1656 में बनवाया था। यह मराठा साम्राज्य के स्वर्णिम इतिहास का प्रमुख साक्षी और अफजल खान के वध (1659) के लिए प्रसिद्ध है।
निर्माण: छत्रपति शिवाजी महाराज ने आदिलशाही के खिलाफ अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने के लिए 1656 ईस्वी में इस किले का निर्माण कराया था।
प्रतापगढ़ का युद्ध: 10 नवंबर 1659 को इसी किले की तलहटी में शिवाजी महाराज और बीजापुर के आदिलशाही जनरल 'अफजल खान' के बीच ऐतिहासिक युद्ध हुआ था। शिवाजी ने अपनी कूटनीति और 'वाघ नख' (बाघ के पंजे जैसे हथियार) से अफजल खान का वध कर दिया था
यह किला समुद्र तल से करीब 3,500 फीट (1,080 मीटर) की ऊंचाई पर सह्याद्री पर्वतमाला में स्थित है। यह महाबलेश्वर से लगभग 24 किलोमीटर की दूरी पर है।
दो भाग: यह किला दो भागों में बंटा है - ऊपरी किला और निचला किला। ऊपरी भाग में शिव मंदिर और भवानी माता का मंदिर है
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Torna fort
तोरणा किला , जिसे प्रचंडगढ़ के नाम से भी जाना जाता है , महाराष्ट्र राज्य के पुणे जिले में स्थित एक विशाल किला है | यह छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा 1646 में 16 वर्ष की आयु में जीता गया पहला किला था । यह पहाड़ी समुद्र तल से 1,403 मीटर (4,603 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है, जो इसे जिले का सबसे ऊंचा पहाड़ी किला बनाता है।
इस किले का निर्माण 13वीं शताब्दी में शिव पंथ द्वारा किया गया था। किले के प्रवेश द्वार के पास ही मेनघाई देवी मंदिर स्थित है, जिसे तोरनाजी मंदिर भी कहा जाता है।
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Rajgad Fort
राजगढ़ किला (Rajgad Fort) महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित एक ऐतिहासिक पहाड़ी किला है, जिसे 'मुरुमदेव' के नाम से भी जाना जाता है। समुद्र तल से 1,376 मीटर ऊँचा यह किला लगभग 26 वर्षों तक मराठा साम्राज्य की राजधानी रहा और छत्रपति शिवाजी महाराज के शासनकाल का मुख्य केंद्र था।
राजधानी: शिवाजी महाराज ने इस रणनीतिक रूप से मजबूत और दुर्गम किले को अपनी पहली राजधानी बनाया था। बाद में उन्होंने अपनी राजधानी रायगढ़ स्थानांतरित कर दी थी।
वास्तुकला और रक्षा: इस किले का आधार व्यास लगभग 40 किलोमीटर है। इसे अभेद्य बनाने के लिए चार अलग-अलग माची (Machis) या रणनीतिक परकोटे बनाए गए थे - पद्मवती माची, संजीवनी माची, सुवेला माची, आळू माची:
वरिष्ठों ने लिया एक दिन मोबाइल उपवास का संकल्प
- वरिष्ठजन की संस्था सहयोग की भगिनी मंडल में हुई बैठक
रायपुर। आज के युग में मोबाइल के बिना जीवन की कल्पना असंभव प्रतीत होती है, लेकिन ऐसा नहीं है। हम उस युग के लोग हैं, जिन्होंने अपने युवावस्था में मोबाइल जैसी चीजें नहीं देखी। जब मोबाइल आया तो हम लोग युवावस्था के अंतिम पड़ाव पर हुआ करते थे, ऐसे में बिना मोबाइल के भी हमारा कार्य चलता था, फिर आज हम इसके एडिक्ट क्यों हो रहे है, और कहीं न कहीं हमें देखकर हमारे नाती पोते भी मोबाइल देखते है। ज्यादातर घरों पर बच्चे अपने दादा-दादी का मोबाइल ही देखते है। उक्ताशय के विचार वरिष्ठजन की संस्था सहयोग की मासिक बैठक में अध्यक्ष अपर्णा काळेले ने व्यक्त किए। इस अवसर सभी ने एक दिन मोबाइल उपवास करने का संकल्प लिया।
सहयोग के सचिव श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि सहयोग की प्रतिमाह में निर्धारित बैठक भगिनी मंडल चौबे कालोनी में हुई। सबसे पहले सदस्यों का स्वागत किया गया। बैठक का प्रारंभ गणेश वंदना से किया गया। वहीं संस्था के नवीन सदस्यों का अन्य सदस्यों से परिचय कराया गया। जिसके बाद संस्था के कोषाध्यक्ष दीपक पात्रीकर ने संस्था के वार्षिक सदस्यता शुल्क एवं आय-व्यय की जानकारी दी। जिन सदस्यों का जन्मदिन इस माह होता है उन्हें शुभकामना, कार्ड और श्रीफल देकर सम्मानित किया गया। डाक्टर नलिनी राजिमवाले ने इस भीषण गर्मी में वरिष्ठ जनों को ली जाने वाली सावधानियां बताई।
वरिष्ठ सदस्य संजय आपटे ने पुणे महाराष्ट्र में तैयार हो रहे शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित स्मारक की जानकारी दी। गई। संस्था के सचिव श्याम सुंदर खंगन ने बैठक को आनंददायक कैसे बनाया जावे इस पर अपने विचार रखें। सभी सदस्यों ने अंत में "जगत में कोई न परमानेन्ट" का पाठ किया। आभार प्रदर्शन उपाध्यक्ष भाटे द्वारा किया गया।