दिव्य महाराष्ट्र मंडल
हनुमान जयंती पर राममंदिर में हुआ नारदीय कीर्तन
‘जिंदगी कोई नाटक नहीं जिसकी लाइन हिसाब-किताब से बोली जाए’
- हिंदी नाटक टीस में दिखी रंगमंचीय कलाकार के परदे के पीछे की पीड़ा
- हिंदी रंगमंच दिवस पर महाराष्ट्र मंडल और रंगभूमि की प्रस्तुति
रायपुर। रंगमंच की दुनिया में मंच पर खड़ा कलाकार जहां दुनिया का मनोरंजन करता हैं, वहीं उस मंचीय नाट्य अभिनय के लिए परदे के पीछे की कहानी कुछ और ही होती है। इन कलाकारों के दैनिक जीवन के संघर्ष को मंच पर प्रस्तुत करने का काम किया हिंदी नाटक टीस ने। जिसमें यह दर्शाया गया कि जिंदगी कोई नाटक नहीं होती, कि वहां हर बात पहले से हिसाब-किताब करके बोले। बतादें कि हिंदी रंगमंच के दिवस पर महाराष्ट्र मंडल रायपुर और रंगभूमि के कलाकारों द्वारा स्व. डा. कुंज बिहारी शर्मा की जन्मतिथि को पुण्य स्मरण करते हुए महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में हिंदी नाटक टीस का मंचन किया गया।

नाटक “टीस” एक रंगमंच कलाकार के जीवन के संघर्षों को अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है। यह दर्शाता है कि एक कलाकार का जीवन केवल तालियों और प्रशंसा तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसके पीछे अनेक त्याग, संघर्ष और मानसिक द्वंद्व छिपे होते हैं। एक ओर उसके भीतर कला के प्रति जुनून और सपनों की आकांक्षा होती है, तो दूसरी ओर पारिवारिक जिम्मेदारियों और अपेक्षाओं का बोझ उसे भीतर ही भीतर तोड़ता रहता है।

नाटक के मुख्य पात्र रजत (आकाश वरठी) एक उत्कृष्ट रंगमंच अभिनेता हैं, जो अपनी कला की दुनिया में खोए रहते हैं, किंतु अपने ही घर में निरंतर संघर्ष करते दिखाई देते हैं। उनकी पत्नी मीना (ट्विंकल परमार) के संवादों में घर की आर्थिक स्थिति और जीवन की कठोर सच्चाइयाँ सामने आती हैं। बाबूजी (प्रांजल सिंह राजपूत) का संवेदनशील दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि कलाकारों के भीतर चल रहे भावनात्मक संघर्ष को समझना कितना आवश्यक है। वहीं बलवंत (प्रभात साहू) के संवाद समाज की उस सोच को उजागर करते हैं, जहाँ घर की प्रतिभा को अक्सर पहचान नहीं मिलती।

नाटक में एक अत्यंत भावुक प्रसंग लेखक की पत्नी रंजना ध्रुव द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें यह बताया गया कि इस नाटक की प्रेरणा उनके दिवंगत पुत्र के अधूरे सपनों से जुड़ी है। इस पृष्ठभूमि ने नाटक को और अधिक संवेदनशील एवं प्रभावशाली बना दिया। निर्देशक की भूमिका में चंचल ध्रुव को कलाकारों का कुशल मार्गदर्शन करते हुए एक निर्देशक के संघर्ष को बखूबी प्रस्तुत किया गया है। नाटक के संवाद और प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
कार्यक्रम में स्व. कुंज बिहारी शर्मा की जन्मतिथि पर पुण्य स्मरण करते हुए पत्रिका रंगकुंज का विमोचन ख्याति लब्द नाट्य लेखक अख्तर अली, वरिष्ठ कवि सुधीर कुमार सोनी, वरिष्ठ कला समीक्षक राजेश गनोदवाले, महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले, स्व, कुंज बिहारी शर्मा की पत्नी ममता शर्मा व उनके परिजनों द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के पूर्व रंग में प्रस्तुत कविताएँ, “शबरी” तथा “एक पल्ला पुरुष और दूसरा पल्ला स्त्री” के साथ डॉ. विकास अग्रवाल, भूपेंद्र साहू एवं अक्षदा मातुरकर के उत्कृष्ट अभिनय ने समां बाँध दिया। इस प्रस्तुति की परिकल्पना आचार्य रंजन मोड़क द्वारा की गई तथा निर्देशन लोकेश साहू ने किया। मंच संचालन चैतन्य मोड़क ने किया। प्रकाश व्यवस्था नीरज सिंह ठाकुर, संगीत नितीश यादव, रूप सज्जा सुषमा गायकवाड़, वेशभूषा सुमन त्यागी तथा मंच सज्जा अजय पोद्दार , प्रवीण क्षीरसागर द्वारा की गई। मंच व्यवस्था में जयप्रकाश साहू, सुकृत गनोदवाले, रिया परमार, राजेश गनोदवाले, सुमित मोडक और क्षितिज महोबिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
बाल नाट्य के कलाकारों को पुरस्कृत कर किया उनका उत्साहवर्धन
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल रायपुर द्वारा आयोजित पांच दिवसीय वाल्मिकी रामायण कथा के तीसरे दिन मंडल के बाल कलाकारों ने उत्तर रामायण प्रसंग पर 15 मिनट का बाल नाट्य प्रस्तुत किया। कथा के अंतिम दिन सभी बाल नाट्य के कलाकारों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। वहीं एक पात्रीय नाटक शबरी के कलाकारों को भी पुरस्कृत किया गया। वहीं कथा के पहले दिन गणेश वंदना प्रस्तुत करने वाली प्रचिति राजवाड़े को भी पुरस्कृत किया गया।

महाराष्ट्र मंडल के सचिव आचार्य चेतन दंडवते ने बताया कि महाराष्ट्र मंडल रंगमंच की प्रतिभाओं को मंच देने और उन्हें आगे लाने के लिए हमेशा प्रयासरत रहता है। मंडल के बाल कलाकारों ने वाल्मिकी रामायण कथा के दौरान सुंदर नाटक की प्रस्तुति दी। बच्चों की प्रस्तुति देखकर कथावाचक आचार्य रामनाथ रामचंद्र अय्यर ने भी उस दिन की कथा उत्तर रामायण के लव-कुश प्रसंग पर ही सुनाई। उन्होंने बच्चों के आध्यात्म के प्रति प्रेम देखकर हर्ष व्यक्त किया।

मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल की टीम रंगमंचीय कार्यक्रम के लिए हमेशा तत्पर रहती है। बाल कलाकारों ने सदस्य अपर्णा कालेले के निर्देशन में सुंदर नाटक प्रस्तुत किया। वहीं एक पात्रीय नाटक शबरी ने भी सभी भक्तों को माता शबरी के करुण प्रेम में डूबो दिया। दोनों की नाटक बहुत शानदार थे। उत्तर रामायण नाटक के बाल कलाकार तनिष्क डोनगांवकर, तन्वी डोनगांवकर, प्रणीश डोनगांवकर, अनय पंडित, अक्षत पंडित, प्रथमेश पुराणिक, कियान महाजन, विहान कालेले, मायरा गुप्ते सहित सभी बाल कलाकारों को पुरस्कृत किया गया। वहीं शबरी की परिकल्पना आचार्य रंजन मोड़क ने की। जिसमें शबरी के मुख्य पात्र में चंचल ध्रुव और राम की भूमिका में भूपेंद्र साहू को पुरस्कृत किया गया।
हनुमान मंदिर में जन्मोत्सव पर महाराष्ट्र मंडल ने की महाआरती
हिंदी नाटक ‘टीस’ में नजर आएगी रंगकर्मियों की पीड़ा
- हिंदी रंचमंच दिवस पर महाराष्ट्र मंडल और रंगभूमि का आयोजन
- स्व. डा. कुंज बिहारी शर्मा जन्मतिथि के पुण्य स्मरण पर ‘रंगकुंज’ पत्रिका का विमोचन
रायपुर। हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र मंडल और रंगभूमि रायपुर की टीम द्वारा स्व. डा. कुंज बिहारी शर्मा की जन्मतिथि को पुण्य स्मरण करते हुए हिंदी नाटक ‘टीस’ का मंचन 3 अप्रैल को शाम 7.30 महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में किया जाएगा। इस अवसर पर रंगकुंज पत्रिका का विमोचन और इस प्रसंग पर अतिथियों का संबोधन होगा।
आचार्य रंजन मोड़क ने बताया कि हिंदी रंगमंच दिवस के अवसर पर महाराष्ट्र मंडल और रंगभूमि की टीम द्वारा टीस नाटक का मंचन किया जाएगा। इस नाटक में रंगकर्मी की उस पारिवारिक, सामाजिक, आर्थिक वेदना को दिखाने का प्रयास किया जाएगा जिसे वह सहजता से व्यक्त नहीं कर सकता। नाटक की परिकल्पना आचार्य रंजन मोड़क ने की है। वहीं लेखन लोकेश रंजन और निर्देशन लोकेश साहू ने किया है।
टीस नाटक की प्रस्तुति के पूर्व तीन कविता का मंचन किया जाएगा। जिसमें प्रथम वंदना ठाकुर द्वारा लिखित कविता शबरी को चंचल ध्रुव जीवंत करेगी। वहीं डा. गौरव सिंह के वाल से ली गई कविता किवाड़ को को डा. विकास अग्रवाल और भूपेंद्र साहू मंचित करेगी। वहीं कवयित्री निधि नरवाल की कविता जिंदगी को अक्षदा मातुरकर मंचित करेगी।
इसके उपरांत स्व. डा. कुंज बिहारी शर्मा की जन्मतिथि को पुण्य स्मरण को संजोई गई पत्रिका रंगकुंज का विमोचन भी किया जाएगा। रंगकुंज प्रसंग पर उद्बोधन के लिए ख्यातिलब्द नाट्य अख्तर अली, वरिष्ठ कवि सुधीर कुमार सोनी, वरिष्ठ कला समीक्षक राजेश गनोदवाले और महाराष्ट्र मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले उपस्थित रहेंगे।
स्प्रिचुअल हेल्थ से मिलती है मन को शांति: रामनाथ रामचंद्र
- महाराष्ट्र मंडल में जारी रामकथा के अंतिम दिन पुणे के आचार्य अय्यर ने जीवन जीने की आध्यात्मिक कला पर दिया जोर
रायपुर। स्प्रिचुअल हेल्थ को लेकर लोगों की बढ़ती जागरूकता उत्साहजनक है। कथा के बाद भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आध्यात्म से जुड़ी शंकाओं और दुविधाओं को दूर करने के लिए आते हैं। स्वस्फूर्त चर्चा करते हैं। यह उतना ही जरूरी है, जितना कि शारीरिक स्वास्थ्य के लिए हम सजग रहते हैं और थोड़ी से परेशानी आने पर डाक्टर के पास जाते हैं।
महाराष्ट्र मंडल के शिवाजी महाराज सभागृह में जारी रामकथा के अंतिम दिन आचार्य रामनाथ रामचंद्र अय्यर ने इस आशय के विचार व्यक्त करते हुए धर्मावलंबी के रूप में हमारी जीवनशैली कैसी होनी चाहिए पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने कहा कि हर घर में पूजा यजमान को ही करनी चाहिए। शाम को दीया बत्ती भी उनकी ही ओर से होना चाहिए। घर के संचालन सहित सभी बाहरी काम काज यजमान को करना चाहिए। घर की लक्ष्मी को प्रतिदिन तुलसी में पानी डालना, हल्दी-कुंकू लगाना चाहिए। इसी तरह दरवाजे पर आने वाले भिक्षु को दान भी उसे ही देना चाहिए। घर में आने वाले अतिथि का आत्मीय स्वागत करने से लेकर उसे सुस्वाद भोजन कराने की जिम्मेदारी घर की स्त्री की ही होती है। वैसे भी धर्म शास्त्रों में उसे अन्नपूर्णा का दर्जा प्राप्त है, जिनके हाथ में कलछी है।
आचार्य अय्यर ने जोर देकर कहा कि कभी भी पुत्र और पुत्री में भेद नहीं करना चाहिए। स्मरण रखना चाहिए कि लड़का यदि राम होता है तो उसका रामत्व सीता से ही पूरा होता है। कबीर ने कहा कि लड़का एक वंश को चलाता है, तो लड़की दो वंशों को तारती है। उन्होंने भगवान का शाब्दिक अर्थ बताते हुए कहा कि भग का अर्थ ऐश्वर्य है अर्थात जब भी आप भगवान के दर्शन करें, तो दान स्वरूप कुछ न कुछ अर्पण करें। इसी तरह आरती लेते समय भी सिर्फ हाथ घुमाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री न करें, बल्कि वहां कुछ न कुछ डाले।
रामनाथ रामचंद्र ने कहा कि शास्त्रों में लिखा है कि पांच वर्ष की आयु तक बच्चों को लाड करें। 5 से 10 वर्ष की आयु तक संस्कारवान बनाने के लिए यथासंभव प्रयत्न करें। 16 वर्ष के बाद उन्हें अपना मित्र बनाए, और बराबरी का भरोसा देने के लिए उनके कंधों पर हाथ भी रखे। अब इतना भी बराबरी का भरोसा न दें कि वह आपके कंधों पर हाथ रखे, यह अधर्म है। रामकथा के अंतिम दिन के यजमान अभय काले और अरुण पराडकर रहे। हरे रंग के ड्रेस कोड में बड़ी संख्या में भक्तजनों ने रामकथा का श्रवण किया।
कमल-विहार केंद्र की महिलाओं ने मनाया चैत्र गौरी हल्दी कुंकू
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के महिला केंद्रों में लगातार कोई न कोई सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन होते रहे है। इसी कड़ी में मंडल की नई और 17वीं महिला केंद्र न्यू राजेंद्र नगर-कमल विहार-लालपुर की महिलाओं ने चैत्र गौरी हल्दी कुंकू का आयोजन किया।
मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि यह मंडल का नया केंद्र है। केंद्र बनने के बाद से लगातार यहां की महिलाएं सामाजिक गतिविधयों में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा रही है। न्यू राजेंद्र नगर-कमलविहार, लालपुर केंद्र द्वारा बीते शनिवार को सदस्य मंगला मिश्रेकर के घर चैत्र गौरी केहल्दी कुंकु का कार्यक्रम किया। साथ ही सभी ने श्री राम रक्षा, हनुमान चालीसा का पाठ किया गया।
इस अवसर पर ज्योति बनकर, नीलिमा लकपाले, स्मिता कायंदे, मंगला मिश्रेकर, सुखदा लाखे, अंजली चरपे, सरिता लुलु, अल्का बापट और मैथिली ठोके शामिल रही।
महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले 'जैन रत्न अलंकरण’ से सम्मानित
- भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव 2026 में हुआ सम्मान
रायपुर। राजधानी रायपुर के एमजी रोड स्थित दादाबाड़ी तीर्थ में आयोजित भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव 2026 में महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष और युवा समाजसेवी अजय मधुकर काले को जैन रत्न अलंकरण सम्मान से सम्मानित किया गया। काले को यह सम्मान छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के हाथों प्रदान किया गया। इस अवसर पर समाज सेवा, पत्रकारिता, शिक्षा और उच्च शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को भी “जैन रत्न अलंकरण” से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में रायपुर पश्चिम विधायक राजेश मूणत, लोकेश कावड़िया, भगवान महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रेश शाह, विकास सेठिया, आनंद जैन सहित बड़ी संख्या में जैन समाज (Jain Samaj) के सदस्य एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान महावीर स्वामी का सत्य और अहिंसा का संदेश समस्त मानवता के लिए पथ प्रदर्शक है, जो हमें त्याग, तपस्या, करुणा और आत्मसंयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने जैन समाज की सराहना करते हुए कहा कि समाज सेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और परमार्थ के क्षेत्र में जैन समाज का योगदान अनुकरणीय है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज को जोड़ने, प्रेरित करने और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अजय मधुकर काले को समाजसेवा के क्षेत्र में अतुल्नीय योगदान के लिए दिया गया। बतादें कि दूरगामी योजनाओं को सीमित संसाधनों के साथ क्रियान्वित करने में दक्ष अजय काले ने महज 17 वर्ष की उम्र में समाजसेवा के लिए खुद को संकल्पित कर लिया था। नेत्रदान- देहदान के साथ रक्तदान के संकल्प के साथ अब तक 68 बार रक्तदान कर चुके है। 91 वर्षों से समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय संस्था महाराष्ट्र मंडल में साल 1989 में दिव्यांग बालिकाओं की शिक्षा-दीक्षा, रहन-सहन और दिव्यागंता का उच्च स्तरीय उपचार करवाने जैसी जिम्मेदारियों का उन्होंने सफलतापूर्वक निर्वहन कर दिव्यांग बच्चियों को स्वावलंबी बनाया। इसके साथ ही चार दिव्यांग बच्चियों को पूर्ण शिक्षित और स्वावलंबी बनाकर विवाह कराया और महाराष्ट्र मंडल से ही उनकी विदाई करवाई। अजय काले के नेतृत्व वाले महाराष्ट्र मंडल के दिव्यांग बालिका विकास गृह को छत्तीसगढ़ शासन की ओर से वर्ष 2014 में सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग सेवा संस्था का पुरस्कार दिया गया।
अजय काले ने संत ज्ञानेश्वर विद्यालय के माध्यम से अपने नेतृत्व में निम्न और मध्यम निम्न आय वाले हजारों परिवारों के बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में बहुमुखी कार्य किए। मंडल के माध्यम से छत्तीसगढ़ में पहली बार व्हील चेयर, वाकर, हास्पिटल बेड, वाटर बेड, एयर बेड, आक्सीजन कंस्ट्रेटर जैसी कई मेडिकल इक्विपमेंट जरूरतमंद मरीजों को उपलब्ध कराने की सुविधा शुरू की गई। कोरोना काल में क्वारंटाइन सेंटर, लोगों को भोजन वितरण करवाया। फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के दौरान यूक्रेन में फंसे मराठी समाज के 3 छात्रों को सकुशल भारत लाने की दिशा में श्री अजय काले ने राजधानी रायपुर से लेकर नई दिल्ली तक के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों से सतत चर्चा की, फॉलोअप लिया और जब तक सभी बच्चे सकुशल रायपुर नहीं पहुंच गए, तब तक वे पूरी प्रक्रिया को लगातार लाइनअप करते रहे।
1989 में महाराष्ट्र मंडल की सदस्यता लेने के बाद श्री काले ने मंडल के सभी प्रकल्पों और महाराष्ट्र मंडल ट्रस्ट के विभिन्न पदों पर सेवा और समर्पण भाव से काम किया। उसी का नतीजा है कि भारत देश के सबसे बड़े महाराष्ट्र मंडल रायपुर के 2008 में ट्रस्ट कार्याध्यक्ष, 2010 से लेकर 2028 तक एक बार निर्वाचित और लगातार आठ बार निर्विरोध अध्यक्ष निर्वाचित हुए हैं।
शबरी की वेदना देख आंखें हुई नम... राम के दर्शन पाकर हुए तृप्त

सियान गुड़ी में बुजुर्गों ने खेला पासिंग-पास गेम
- 31 मार्च को बैंकर्स संघ के पदाधिकारी पहुंचे सियान गुड़ी
रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुदानित और महाराष्ट्र मंडल रायपुर द्वारा संचालित सियान गुड़ी में मंगलवार 31 मार्च पहुंचे बैंकर्स ग्रुप के सदस्यों ने खूब एजाय किया। नियमित योग और स्वास्थ्य जांच के साथ सभी ने रोचक गेम्स खेले। योग एक्टिविटी के तहत योग की कलाओं का पासिंग पास गेम खेला गया। जिसे सभी ने खूब एजाय किया। वहीं खट्टी मीठी बातों के बीच सभी ने अपना परिचय दिया और मंडल की सियान गुड़ी के बारे में जाना।

महाराष्ट्र मंडल के मुख्य समन्वयक श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि मंगलवार को सियान गुड़ी में नियमित रुप से आने वाले बुजुर्गों के अलावा कालीबाड़ी का बैंकर्स ग्रुप पहुंचा था। बैंकर्स ग्रुप को महाराष्ट्र मंडल के सेवाभावी कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्हें सियान गुड़ी के रूटीन कार्यक्रमों की जानकारी दी गई। जिसके बाद बैंकर्स ग्रुप के कार्डिनेटर मोंटू बाइन ने अपने ग्रुप की जानकारी दी और सभी सदस्यों ने अपना-अपना परिचय दिया।
इस अवसर पर डा. कमल वर्मा ने सभी सदस्यों को अपने-अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरुक रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि रिटायरमेंट के बाद सभी को कुछ न कुछ स्वास्थ्यगत परेशानी आती है। ऐसे में अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। अगर हमारी कुछ दवाईया चल रही है तो उसे नियमित रुप से लेना जरूरी है। वहीं फिजियोथैरेपिस्ट डा. अंकिता काले ने कहा कि मंडल द्वारा न्यूनतम शुल्क पर फिजियोथैरेपी सेंटर चलाया जा रहा है। बैंकर्स को आमतौर पर कुर्सी में बैठे रहने के कारण सरवाइकल, आइब्रो पेन, बैक पैन की समस्या आती है। आपको या आपके किसी परिचित को फिजियोथैरेपी की आवश्यता पड़ती है तो आप मंडल आ सकते है।

महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक और योग समिति की प्रभारी आस्था काले ने कहा सभी को योग, प्राणायाम और भ्रामरी के टिप्स देते हुए फायदे बताए। उन्होंने सभी से योग का पासिंग पास गेल खिलाया। जिसे सभी ने खूब एजाय किया। उन्होंने सभी बुजुर्गों को एक लाइन से खड़ा कर दिया। जिसके बाद लाइन में खड़ी प्रथम महिला को उन्होंने योग के कुछ आसन करके दिखाए। फिर उस महिला को अपने अगले प्रतिभागी को वैसा ही करके दिखाना था। यह क्रम अंतिम तक चलता रहा। अंतिम तक पहुंचते पहुंचते योग का प्रारूप पूरी तरह बदल गया। अंत में सभी ने स्वादिष्ट व्यंजन का स्वाद लिया।

इस अवसर पर मंडल समन्वयक श्याम सुंदर खंगन, योग समिति प्रभारी आस्था काले, संध्या खंगन, डा, कमल वर्मा, डा. अंकिता काले, सियान गुड़ी प्रबंधक मनीष देसाई, स्वालंबन समिति के प्रवीण क्षीरसागर, बैंकर्स ग्रुप के मोंटू बाइन, अरण बवालीर, प्रवीण सेनशर्मा, अशीष दासगुप्ता, समीर दास, स्वपन कुमार बैनर्जी, तपन भट्टाचार्य, मनोरंजन धरामी, रंजन पाल, जयंत मुखर्जी, तपन कुमार गील, संजय भौमिक, पवित्र मुखर्जी, श्रीमती मल्लिका गील और कमल भट्टाचार्य उपस्थित थीं।
अतिथि से न पूछें आने की तिथि: रामनाथ रामचंद्र
- महाराष्ट्र मंडल में जारी रामकथा के चौथे दिन कथावाचक ने जेन जी के रिश्तेदारों से कटने पर किया कटाक्ष
रायपुर। जब भी अतिथि हमसे कहते हैं कि हम आपसे मिलने घर आ रहे हैं, तो यह हमारा उतावलापन ही होता है कि हम उनसे आने की तिथि और समय पूछते हैं। जबकि अतिथि का अर्थ होता है बिना तिथि बताए आने वाला। ऋषि मतंग ने शबरी से कहा कि तुम यहीं प्रतीक्षा करो, भगवान राम तुमसे मिलने आएंगे। शबरी ने नहीं पूछा कि कब आएंगे। यह होता है अतिथि के आगमन को लेकर धैर्य। पुणे के आचार्य रामनाथ रामचंद्र अय्यर ने महाराष्ट्र मंडल में जारी रामकथा के चौथे दिन उक्ताशय के विचार व्यक्त किए।

कथावाचक ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी जिन्हें हम जेन जी कहते हैं, उन्हें रिश्तेदार पसंद नहीं। वे बुर्के में रहते हैं, यानी रिश्तेदारों के आने पर अंदर अपने कमरे में कैद हो जाते हैं। मां उन्हें रिश्तेदारों से मिलाने के लिए लगातार कोशिश करती है, लेकिन वे बाहर नहीं आते। यही जेन जी डब्लूडब्लूडब्लू डाट काम में जीवनसाथी तलाशती है। लड़के के माता-पिता को डस्टबीन समझने और कहने वाली लड़कियों से कोई उनके माता-पिता के बारे में पूछे। ऐसी लड़कियां आमतौर अविवाहित और बढ़ती उम्र के साथ अवसाद में चली जाती हैं।
आचार्य अय्यर ने पूजा की विधि के संदर्भ में कहा कि भगवान की आरती घी के दीये से की जाती है। जबकि अपने परिजन अथवा रिश्तेदार की तेल की दीये से। जन्मदिन हो या रक्षाबंधन, वैवाहिक रस्में हो या किसी के स्वागत का क्षण, हमें तेल के दीये का ही उपयोग करना चाहिए। इसी तरह मंगल कार्य में शहनाई से मंगलवाद्य और कोई दूसरा नहीं होता। शहनाई की धुन मिल जाए, तो सर्वश्रेष्ठ।
कथावाचक रामनाथ रामचंद्र ने कहा कि प्रवचन सुनते समय हमारा ध्यान देह पर नही देहि पर होना चाहिए। देहि अर्थात् भगवान। भक्ति में भक्त का अस्तित्व नहीं रहना चाहिए। भक्ति राममय होनी चाहिए। यही वजह है कि हम आरती के समय कपूर जलाते हैं, जो पूरी तरह जल जाता है और अपने पीछे कुछ भी नहीं छोड़ता। छूटती है तो सिर्फ श्वांस। रामकथा के चौथे दिन के यजमान संध्या श्यामसुंदर खंगन और कल्याण देशपांडे थे, जिन्होंने गुरु पूजा की। तत्पश्चात प्रवचन शुरू हुआ। मंगलवार को गुलाबी ड्रेस कोड में बड़ी संख्या में पहुंचे भक्तजनों ने रामकथा का श्रवण किया।
हिंदू को आचरण से होना चाहिए पक्का: रामनाथ रामचंद्र
- महाराष्ट्र मंडल में जारी वाल्मिकी रामायण कथा में कथावाचक ने कहा रामकथा को उतारें चरित्र में
रायपुर। किसी भव्य सभा में मंच से कहना कि गर्व से कहो हम हिंदू हैं और इसे जयघोष के रूप में दोहराना अलग बात है। जबकि हिंदू होने के लिए हमें वैसा आचरण भी करना चाहिए। केवल नारेबाजी से हिंदू नहीं बना जा सकता। महाराष्ट्र मंडल के शिवाजी महाराज सभागृह में जारी रामकथा के तीसरे दिन आचार्य रामनाथ रामचंद्र अय्यर ने इस आशय का संदेश दिया।

आचार्य ने कहा रामकथा को जीवन में, व्यक्तित्व में लाना होगा। तब हमें न धर्म ग्रंथ पढ़ने की जरुरत होगी, न ही प्रवचन सुनने की। आप सिर्फ राम चरित्र का पाठ कीजिए और अपने चरित्र में प्रभु श्रीराम को उतारिए। कथावाचक ने कहा कि कहीं भी प्रवचन अथवा कथा सुनने जाने के लिए खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। प्रसाद, दान स्वरूप कुछ न कुछ ले जाना चाहिए। कुछ न हो तो कम से कम फूल तो ले ही जाना चाहिए।

आचार्य अय्यर ने समाज में बढ़ती नकारात्मकता को लेकर कहा कि लोगों की नकारात्मक प्रतिक्रिया से निराश होने की जरुरत नहीं है और न ही उस पर ध्यान देने की। बिना वास्तविक स्थिति जाने या विषय का समग्र अध्ययन किए बिना ऐसी टिप्पणी करने वाले लोग आमतौर पर ज्ञानचंद होते हैं। वे अपनी बड़ी बड़ी बातों से आपको रास्ता बताने का दावा तो करते हैं, लेकिन यदि आपने साथ चलने को कहा तो वे बिदक जाते हैं। हमारे समाज में रामायण से लेकर प्रभु श्रीराम तक नकारात्मक टिप्पणी करने वालों की कमी नहीं है। फिर भी हमारे धर्म में रामायण श्रेष्ठतम धर्मग्रंथ है और प्रभु श्रीरामचंद्र मर्यादा पुरूषोत्तम और पूज्यनीय हैं।
रामकथा में उपस्थित भक्तजनों का मार्गदर्शन करते हुए आचार्य अय्यर ने कहा कि भगवान शिव को जलधारा अतिप्रिय है। उसी तरह प्रथम पूज्य गणेशजी को उबला हुआ मोदक। होटल से मंगाए गए रेडिमेड मोदक से वे प्रसन्न नहीं होते। वहीं यथासंभव भगवान को स्वयं के तोड़े हुए फूल चढ़ाने से जो पुण्य की प्राप्ति होती है, वह अन्य किसी माध्यम से नहीं। उन्होंने गंध (चंदन) घिसने की विधि भी श्रद्धालुओं को बताई। उन्होंने कहा कि गुरु का स्मरण करते अथवा नाम लेते समय कर्णपाली (कान का निचला हिस्सा) को पकड़ना चाहिए, यह धर्म है। राजा श्रीराम भी यही करते थे। आज की कथा का यजमान मंजूषा वैशंपायन परिवार था। कथा उपरांत महाआरती की गई। तत्पश्चात महाप्रसाद वितरित किया गया।
शुभ मुहूर्त का जीवन में बड़ा महत्वः रामनाथ रामचंद्र
"मंडळ गान" ‘धन्य धन्य धन्य आहे हा आपला संस्थान’ गीत रिलीज
- 91 वर्षीय महाराष्ट्र मंडल ने जारी किया अपना "मंडळ गान"
- मंडल के सभी आयोजनों में इसी गीत को गाया जाएगा
रायपुर। 91 वर्षीय महाराष्ट्र मंडल रायपुर अब प्रदेश के साथ देश में भी अपनी अलग पहचान बन चुका है। रविवार 29 मार्च को पहली बार महाराष्ट्र मंडल रायपुर ने अपने "मंडळ गान" ‘धन्य धन्य धन्य आहे हा आपला संस्थान’ को रिलीज किया। मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने कहा कि मंडल के सदस्य विवेक रहाटगांवकर द्वारा लिखित इस गीत को आज संगीतबद्ध और स्वरबद्ध किया गया। इस गीत को गायिका साधना रहाटगांवकर ने अपना स्वर दिया है। मंडल के आगामी सभी आयोजनों में इस गीत के गायन किया जाएगा।

गीत के लेखक विवेक रहाटगांवकर ने कहा कि 91 वर्षीय महाराष्ट्र मंडल की सेवा का यह अवसर उन्हें प्राप्त हुआ यह उनके और पूरे परिवार के लिए बड़ी उपलब्धि है। लगभग चार मिनट के इस गीत को मराठी में लिखा गया है।
विवेक ने बताया कि गीत को कंपोज करने के लिए गायिका साधना रहाटगांवकर के साथ राकेश दास, नरेंद्र कुमार ळोणारे और छोटी बच्ची संतृप्ति केसकर ने अपनी आवाज दी। वहीं कंपोजिंग के लिए भिलाई के कलाकारों की टीम यहां आई है। जिसमें यश यदु कीपेड, आशुथोष लांजेवार गिटार, मनोज नायक पेड और राजेश कुमार समुद्र ढोलक पर संगत दिया। आज इस गीत की लांचिंग के साथ रिकार्डिग भी की गई।
बच्चों की प्रस्तुति दे गई संदेश... हर बात को जानने का होता है उचित समय
- 15 मिनट के ‘उत्तर रामायण प्रसंग’ का मंचन ने बटोरी तालियां
रायपुर। डायलॉग डिलीवरी अभिनय का वह हुनर है जिसके जरिए रंगमंच का कलाकार अपनी भावनाओं और आवाज़ को उतार-चढ़ाव के साथ दर्शकों के सामने प्रस्तुत करता है। ऐसी रोचक डायलॉग डिलीवरी अगर बच्चों द्वारा की जाए तो तालियां तो बजनी ही है। ऐसा ही नजारा रविवार की शाम महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में देखने को मिला। जब मंडल में चल रहे वाल्मिकी रामायण कथा के दौरान बाल कलाकारों द्वारा ‘उत्तर रामायण प्रसंग’ का मंचन किया गया।

नाट्य अभिनय के दौरान गुप्तचर की सूचना पर राम की प्रतिक्रिया, हनुमान की स्वामी भक्ति, राम से प्रश्न पूछने के लिए लव-कुश की जीजीविशा, माता सीता का दुखी भाव, उत्साह और जिज्ञासा बच्चों के चेहरे में देखने को मिली। उत्तर रामायण के इस प्रसंग में के दौरान बाल कलाकारों ने यह संदेश दिया कि हर बात को जानने का एक सही समय होता है। जिस तरह लव-कुश को अपनी सच्चाई पता चली। उसी तरह हर बात का को जानने का एक सही समय होता है।

वरिष्ठ रंगकर्मी अपर्णा कालेले के निर्देशन में तैयार हुए बाल नाटक ‘उत्तर रामायण प्रसंग’ में सभी बच्चों ने अपने अपने पात्र के साथ इंसाफ किया। नाटक में तनिष्क डोनगांवकर, तन्वी डोनगांवकर, प्रणीश डोनगांवकर, अनय पंडित, अक्षत पंडित, प्रथमेश पुराणिक, कियान महाजन, विहान कालेले, मायरा गुप्ते सहित कई बाल कलाकारों ने भाग लिया। नाटक में तकनीकी पक्ष परितोष डोनगांवकर और प्रवीण क्षीरसागर ने संभाला था।
शंकर नगर बालवाचनालय और संत ज्ञानेश्वर स्कूल में हुआ चालीसा पाठ
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित शंकर नगर बाल वाचनालय, संत ज्ञानेश्वर स्कूल प्रांगण और वाघली पुणे में शनिवार 28 मार्च को श्री राम रक्षा स्तोत्र और हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। उक्त पाठ मंडल की आध्यात्मिक समिति द्वारा हर शनिवार को होने वाले पाठ की श्रृंखला के अंतर्गत किया गया। मंडल के 17 केंद्रों से भिन्न पहली बार वाघळी पुणे में महिलाओं द्वारा पाठ किया गया। बतादें कि मंडल की सदस्या प्रणिता नलगुंडवार वर्तमान में पुणे में निवासरत है। उनके मार्गदर्शन में पुणे में पाठ संपन्न हुआ।

महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की समन्वयक आस्था काले ने बताया कि शनिवार को वल्लभनगर केंद्र की महिलाओं ने प्रियदर्शनी नगर स्थित संत ज्ञानेश्वर विद्यालय प्रांगण में रामरक्षा स्त्रोत व हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले, सह प्रमुख अपर्णा देशमुख, अपर्णा आठले, मानसी विठाळकर, मनीषा सदन, सुहानी पवार, शुभदा अगस्ती, सुरेखा मेघावाले, अपर्णा पेंडसे, तोषी देवस्थले, चित्रा कोल्हे, रोहिणी पेंडसे, अर्चना जतकर, शोभा पाटिल, नूतन दामले, स्मिता चांदोळकर, सुलु हर्डीकर, प्राजक्ता पुसदकर, सुलभा विठ्ठलकर, माधुरी गाडगीळ, प्रतिभा पाध्ये, हर्षा अडू, रोहिणी चिमोटे, शुभांगी आपटे, उषा काकडे, कंचन पुसदकर और प्रीति केसकर शामिल हुई।

आस्था ने आने बताया कि इसी तरह अवंती विहार केंद्र की सह संयोजिका सुदेशना नेने की अगुवाई में शंकर नगर स्थित बाल वाचनालय में पाठ किया गया। इस पाठ में भारतीय योग संस्थान शंकर नगर शाखा की सदस्य भी शामिल हुए। इस अवसर पर हेमंत साहू, बजरंग प्रजापति, राजमन वर्मा, सीमी घाटक, कुसुम तिवारी, पूजा अग्रवाल, लक्ष्मी अग्रवाल, उषा शर्मा, प्रतिभा साहू और ज्योति गुप्ता शामिल थीं।
इसी तरह मंडल की सदस्या प्रणिता नलगुंडवार वर्तमान में पुणे में निवासरत है। ऐसे में उन्होंने पुणे से पाठ का क्रम प्रारंभ किया। उन्होंने पुणे में रहने वाले मंडल सदस्यों के साथ अपने घर पर एकत्रित होकर पाठ किया। इस दौरान कल्पना शुक्ला, रानी रोलानी, ज्योति जैन, शोभा चौहान, सुनीता सिंह, निर्मला खानेरिया, ज्योत्सना धामचा, इंदु ढांगे प्रमुख रुप से उपस्थित थीं।
‘महाराष्ट्र मंडल गीत’ का लाइव मंचन और बाल्य नाट्य ‘उत्तर रामायण प्रसंग’ की प्रस्तुति आज शाम
रायपुर। अपने स्वर्णिम 91 वर्ष में प्रवेश कर चुके महाराष्ट्र मंडल में पहली बार संस्था के गीत का मंचन किया जा रहा है। गीत का मंचन महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में रविवार, 29 मार्च को शाम 6:30 बजे किया जाएगा। इस गीत को विवेक रहाटगांवकर ने लिखा और संगीतबद्ध व स्वरबद्ध साधना रहाटगांवकर ने किया है। साधना इस गीत की लाइव प्रस्तुति भी करेंगी। वहीं साथ ही बाल नाटक ‘उत्तर रामायण प्रसंग’ का मंचन किया जाएगा।
अपर्णा कालेले निर्देशित 15 मिनट के बाल नाटक में तनीष डोनगांवकर, तन्वी डोनगांवकर, प्रणीश डोनगांवकर, अनय पंडित, अक्षत पंडित, प्रथमेश पुराणिक, कियान महाजन, विहान कालेले, मायरा गुप्ते जैसे बाल प्रतिभाएं भाग ले रही हैं। अपर्णा ने ही ‘उत्तर रामायण प्रसंग’ का लेखन भी किया है। अध्यक्ष अजय मधुकर काले व सचिव चेतन गोविंद दंडवते ने बड़ी संख्या में श्रीराम भक्तों से राम कथा सुनने के लिए यहां आने का आग्रह किया है।