दिव्य महाराष्ट्र मंडल
जिस समाज की महिलाएं सक्रिय, उसे आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकताः डॉ. रमन
विट्ठल रूख्मणी मंदिर में महाराष्ट्र मंडल ने किया चालीसा पाठ
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से हर शनिवार होने वाला हनुमान चालीसा का पाठ इस सप्ताह भी उल्लास के साथ जारी रहा। चौबे कालोनी, डंगनिया केंद्र और सरोना महिला केंद्र की महिलाओं ने जहां फूलचौक स्थित विट्ठल मंदिर में पहुंच पाठ किया वहीं तात्यापारा केंद्र की महिलाओं ने तात्यापारा स्थित हनुमान मंदिर में पाठ किया। वहीं मंडल द्वारा संचालित सियानगुड़ी में भी पाठ का क्रम प्रत्येक सप्ताह की भांति जारी रहा।

आध्यात्मिक समिति की समन्वयक सृष्टी चेतन दंडवते ने बताया कि डंगनिया महिला केंद्र की सदस्यों ने मंदिर में पाठ किया। इस दौरान सभी पीले रंग के ड्रेस में आई थी। हनुमान चालीसा पाठ के दौरान केंद्र की श्रद्धा मरघडे, ज्योति डोळस, दिव्या पात्रीकर, अनुजा महाडिक, अनुभा जाऊलकर, किरण इंगळे, जया भावे, श्रद्धा देशमुख, माधवी गिरहे, रश्मि डांगे उपस्थित रहीं।
सृष्टी ने आगे बताया कि इस तरह चौबे कॉलोनी केंद्र की महिलाओं ने पाठ किया। जिसमें केंद्र से प्रमोदिनी देशमुख, अपर्णा काळेले, मनिषा वरंवडकर, अक्षता पंडित , स्वाती डबली, अनुपमा बोधनकर, संगीता निमोणकर, अंजली वैद्य, गौरी क्षीरसागर, संध्या हिशिकर, सीमा गणोदवाले, सुषमा आपटे, सुनंदा हिशिकर, धनश्री पेंडसे , रंजना काथोटे, अर्चना मुकादम और संध्या पांडे शामिल हुई।

सरोना केंद्र की महिलाओं ने भी विठ्ठल रखुमाई मंदिर में मजहनुमान चालिसा का पाठ किया। इस दौरान मीना नवरे, वैशाली जोशी, आरती ठोंबरे, शांति महाजन, मीना परदेशी, रमा धारवाडकर, डॉ अलका गोळे, जयश्री ढेकणे उपस्थित थीं।

तात्यापारा स्थित श्री हनुमान मंदिर में आषाढ़ी एकादशी के उपलक्ष्य पर भजन मंडलियों ने भजन प्रस्तुत किया। भजनों की सुंदर प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। इस दौरान सभी ने हनुमान चालीसा का भी पाठ किया। इस दौरान मंदिर के पुजारी संदीप देशपांडे, सुमित मोड़क, अंकिता किरवई, भारती पलसोदकर, सुमीत मोड़क, अस्मिता कुसरे सहित अन्य सदस्य उपस्थित थे।
महाराष्ट्र मंडल के 100 केवी सोलर प्लांट का उद्घाटन 26 जुलाई को करेंगे डॉ. रमन सिंह
महाराष्ट्र मंडल अध्यक्ष ने समितियों और प्रकल्प प्रभारियों को बताए उनके दायित्व



रिटायरमेंट के बाद हम जी रहे अपनी जिंदगीः खंगन
0- सियान गुड़ी में वृद्धजनों से मिलने पहुंचे शिक्षा विभाग के रिटायर्ड अफसर
रायपुर। बचपन में हम अपने मां- बाप की सुना करते थे, युवा हुए तो जिम्मेदारियों का दौर चला। अब रिटायरमेंट के बाद बच्चे कहते हैं, बाबा... आप ये मत करो- वो मत करो, ऐसा करो- वैसा करो। मैं कहता हूं कि रिटायरमेंट के बाद अब मैं खुद के लिए जीना चाहता हूं। अब अपना समय समाजसेवा, सियान गुड़ी में आप लोगों के साथ मनोरंजन और यह जिंदगी अपने लिए जीना चाहता हूं। महाराष्ट्र मंडल की ओर से संचालित और समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुदानित सियान गुड़ी में वृद्धजनों से मिलने आए शिक्षा विभाग के रिटायर्ड अफसरों से महाराष्ट्र मंडल के मुख्य समन्वयक और सियान गुड़ी के प्रभारी श्याम सुंदर खंगन ने कहीं।

श्याम सुंदर खंगन ने कहा कि हम खुद को वृद्ध न समझें, जीवन का काफी लंबा समय नौकरी करने के बाद अब हमने नए जीवन की शुरूआत की है। जीवन का यह समय मेरी तरह सभी को समाज को देना चाहिए। हमने समाज से बहुत कुछ लिया है। हमारा पद और प्रतिष्ठा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से इसी समाज की देन है। महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ सभासद विनोद कुमार शेष और रमेश भास्कर राव पालकर ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ की। इस अवसर पर पालकर ने सरस्वती वंदना की प्रस्तुति दी। इसके बाद सभी वृद्धजनों का स्वागत- सत्कार किया गया। इस दौरान सभी वरिष्ठजनों ने अपने विचार रखे और एक- दूसरे को समाजसेवा और सियान गुड़ी में आने के लिए प्रेरित किया।

विनोद शेष ने कहा कि तात्यापारा का निवासी होने के कारण मैं तो बचपन से महाराष्ट्र मंडल से जुड़ा रहा। मंडल की सारी योजनाएं जनकल्याणकारी हैं। बात संत ज्ञानेश्वर स्कूल की हो या दिव्यांग बालिका विकास गृह की। मंडल से जुड़ा हर एक सदस्य समय- समय पर अपनी सेवाएं देता है। निःसंदेह सियान गुड़ी बुजुर्गों के लिए एक अच्छी योजना है। आप सभी लोगों को यहां आकर अपना समय व्यतीत करना चाहिए। मैं उम्र के इस पड़ाव में भी सप्ताह में चार दिन अपने गांव जाकर खेती- किसानी का काम देखता हूं। वहां भी सिर्फ कुर्सी पर नहीं बैठता, जरूरत पड़ने पर खेतों में भी उतरता हूं।

छत्तीसगढ़ में भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) की प्रमुख नेत्री और सामाजिक कार्यकर्ता लीना मोहन एंटी ने कहा कि महाराष्ट्र मंडल से मेरा बरसों पुराना नाता है। मैं रायपुर आने पर मंडल के कामकाजी महिला वसती गृह में निवास करती थी। उस समय भी वह लड़कियों और महिलाओं के लिए जितना सुरक्षित था, उतना ही सुरक्षित आज भी है। महाराष्ट्र मंडल अब अपने सेवाभावी कार्यों का विस्तार तो कर ही रहा है, साथ ही पुराने कार्यों को भी अपग्रेड करते हुए उसे विस्तार भी दे रहा है।

इस अवसर पर महाराष्ट्र मंडल की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल, सियान गुड़ी के सह प्रभारी प्रवीण क्षीरसागर, साधु राम साहू, केके पाठक, नंदकिशोर अग्रवाल, गोपाल प्रसाद अग्रवाल, अलका पटवा, लखनलाल साहू, डा. ओसी बिसेन, चित्रा बल्की, डा. कमल वर्मा, डा. ओपी बिसेन, श्यामल जोशी, सुशील कुमार श्रीवास्तव, मदन तोपखानेवाले, विवेक राहटगांवकर, रमेश कुमार शर्मा, नीलिमा साठे, कुमुद लाड, मालती मिश्रा, नमिता शेष, रेखा जोशी, अजीत शर्मा, विमला मिश्रा, मोहन एंटी, सरिता नासरे, शैल दुलारी, संध्या खंगन, श्याम दलाल, ओपी कटारिया, मुकुंद सगवई, रामराव सेंदरे, अनिल पांडे, हेमंत मार्डीकर, सुधा शर्मा, ज्योत्सना श्रवणे, दीपांजलि भालेराव, पद्मजा तिवारी, जेएस उरकुरकर प्रमुख वरिष्ठ जन विशेष रूप से उपस्थित रहे।

हाईटेक आंगनबाड़ी में बच्चों के स्वास्थ्य जांच करने 28 को आएगी एम्स की टीम
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा टाटीबंध में संचालित हाईटेक आंगनबाड़ी में पढ़ने वाले नौनिहालों के स्वास्थ्य जांच और उनके डाइट प्लान पर अभिभावकों को जागरूक करने के लिए मंगलवार 28 जुलाई को रायपुर एम्स के कम्युनिटी हेल्थ नर्सिंग डिपार्टमेंट की टीम पहुंचेगी।
हाईटेक आंगनबाड़ी की प्रभारी डा. शुचिता देशमुख ने बताया कि रायपुर एम्स के कालेज आफ नर्सिंग के प्रोफेसर कम प्रिसिपल डा. बीनू मेथ्यू ने इस संबंध में पत्राचार किया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि कम्युनिटी हेल्थ नर्सिंग डिपार्टमेंट की टीम 28 जुलाई को सुबह 10 बजे हाइटेक आंगनबाड़ी आएगी। यहां वे करीब 12 बजे तक रहेंगे। इस दौरान वे बच्चों के स्वास्थ्य की जांच, उनकी हाइट, वजन का माप लेंगे। बारिश के मौसम में बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति रखने वाली सजगता के बारे में अभिभावकों को बताएगी। बच्चों को हाइजिन का विशेष ख्याल रखना, न्यूट्रीशियन गाइडेंस के साथ अन्य एक्टिविटी भी कराई जाएगी।
बारिश में बढ़ता है वात दोष.... पाचन शक्ति कमजोर होने पर पंचकर्म उपयुक्तः डॉ. पपीता
मराठी सिखाने के लिए क्लासेस महाराष्ट्र मंडल की विशेषता: डॉ. रुईकर
सियान गुड़ी में वृद्धजनों की भेंटवार्ता 23 जुलाई को
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित और समाज कल्याण विभाग द्वारा अनुदानित सियान गुड़ी में गुरुवार 23 जुलाई को वृद्धजनों की भेंटवार्ता कार्यक्रम का आयोजन किया गया है, जिसमें विभिन्न विभागों से रिटायर बुजुर्ग सियान गुड़ी पहुंचेगे। इस दौरान उपस्थित वृद्धजनों को अपनी रूचि और भावना के प्रदर्शन के लिए खुला मंच प्रदान किया जाएगा।
महराष्ट्र मंडल की महिला प्रमुख विशाखा तोपखानेवाले ने बताया कि शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त हुए सीनियर सिटीजन्स गुरुवार 23 जुलाई को महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित सियान गुड़ी पहुंचेगे। इस दौरान सभी के मनोरंजन के लिए भजन का आयोजन किया गया है। इस दौरान सभी वरिष्ठजनों को उनकी अभिरूचि के अनुरुप खुला मंच दिया जाएगा। जिसमें वे अपनी रूचि के अनुरुप, भजन, गायन, किसी विषय पर स्पीच आदि देंगे।
महाराष्ट्र मंडल के मुख्य समन्वयक और सियान गुड़ी के प्रभारी श्याम सुंदर खंगन ने बताया कि समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित सियान गुड़ी में आने वाले वृद्धजनों के लिए नियमित रुप से योग और व्यायाम होता है। वहीं कई मनोरंजक एक्टिविटी के साथ भोजन और बुजुर्गों के आराम की सुविधा भी उपलब्ध है।
महाराष्ट्र मंडल में कांदे नवमी उत्सव 23 को, गीत-गजल की प्रस्तुतियों के साथ भरपूर मनोरंजन
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में गुरुवार, 23 जुलाई को कांदे नवमी का उत्सव आयोजित किया गया है। शाम छह बजे शुरू होने वाले संस्कृति समिति के इस उत्सव में पहले 26 जुलाई को होने वाले शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों को लेकर पदाधिकारियों की बैठक होगी। उसके तत्काल बाद कार्यकारिणी सदस्यों, पदाधिकारियों सहित सभासदों की व्यक्तिगत संगीतमय प्रस्तुतियां होंगी। साथ ही अन्य कुछ सभासद स्टैंडअप कामेडी भी करेंगे। उत्सव का समापन प्याज से बने सुस्वाद व्यंजनयुक्त रात्रिभोज से होगा।
वेदा क्लीनिक के शुभारंभ पर लगा निःशुल्क स्वास्थ्य कैंप
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आजीवन सभासद और डॉ. पपीता ब्राह्मणे ने रविवार, 19 जुलाई को अपने वेदा क्लीनिक का शुभारंभ किया। इस अवसर पर वेदा क्लीनिक द्वारा निःशुल्क स्वास्थ्य कैंप का आयोजन किया गया। जिसमें 35 से अधिक लोगों ने अपने स्वास्थ्य की जांच कराई। मरीजों के शुगर और बीपी जांच के साथ अन्य जांच भी की गई और उन्हें आवश्यक डाक्टरी सलाह दी गई। स्वास्थ्य कैंप का शुभारंभ करने महाराष्ट्र मंडल की उपाध्यक्ष गीता दलाल पहुंची थी। उन्होंने शिविर का शुभारंभ कर इस अच्छे समाजसेवी कार्य की सराहना की।

वेदा क्लीनिक की संचालक डॉ. पपीता ब्राह्मणे बीएएमएस और डॉ तुषार सालवटकर एमबीबीएस ने बताया कि यह क्लीनिक अवंती विहार आशियाना फेस-2 के सामने शुरू किया गया है। इस अवसर पर निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें वार्ड पार्षद प्रभा विश्वकर्मा, मंडल उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल, समाजसेवी गीता हाटे, विनीता जोहरी, मीना अग्रवाल आदि पहुंचे थे।
डॉ. पपीता ब्राह्मणे ने आगे बताया कि आज आयोजित निःशुल्क जांच शिविर में 35 से अधिक लोगों ने अपने स्वास्थ्य की जांच कराई। डॉ आशीष नागदेव, डॉ निधीश एस, डॉ गोकुल जेआर द्वारा सभी मरीजो के स्वास्थ्य की जांच की गई। समाज के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए आगे भी समय-समय पर ऐसे शिविर का आयोजन किया जाएगा।
संत ज्ञानेश्वर स्कूल के बच्चों ने जाना हिंदवी स्वराज और साम्राज्य को


शिवाजी कार्यशाला के साथ मंडल के महिला केंद्रों में हुआ हनुमान चालीसा
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल की आध्यात्मिक समिति की ओर से हर शनिवार को होने वाला हनुमान चालीसा का पाठ मंडल में आयोजित शिवाजी महाराज की कार्यशाला के साथ महिला केंद्रों और समता कालोनी स्थित सियान गुड़ी में किया गया। मंडल के अमलीडीह, बूढ़ापारा, चौबे कालोनी, सरोना, शंकर नगर और डगनिया केंद्र की महिलाओं ने हनुमान चालीसा और रामरक्षा स्तोत्र का पाठ किया।

महाराष्ट्र मंडल कार्यकारिणी आस्था काले ने बताया कि मंडल में 18 व 19 जुलाई को ‘हिंदवी स्वराज्य से साम्राज्य तक’ विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। जिसके पहले दिन शनिवार 18 जुलाई को कार्यक्रम में शामिल प्रमुख वक्ता विक्रमसिंह मोहिते, भारतीय विद्या पारंगत, पुणे और सुधीर थोरात, कार्यवाह, श्री शिवाजी रायगढ़ स्मारक मंडल, पुणे सहित अन्य ने हनुमान चालीसा का पाठ किया।

अमलीडीह केंद्र की महिलाओं ने सदस्या मनीषा सरोदे के निवास पर हनुमान चालीसा पाठ किया। आषाढी एकदशी होने के कारण महिलाओं ने सुंदर भजनों का गायन भी किया। इस अवसर पर संयोजिका सरिता फडके, सहसंयोजिका अर्चना धर्माधिकारी, संध्या फुलझेले, शोभा सोनाय, प्रिया कडू, प्रेरणा सप्रे, प्रेरणा मोरे, कामिनी पतंगीवार, मनीषा कस्तुरे, रेणु सिंग उपस्थित रहीं। वहीं बूढ़ापारा केंद्र द्वारा बूढ़ापारा स्थित हनुमान मंदिर में पाठ किया गया। इस अवसर पर प्रणिता नलगुंडवार, डॉ सुहासिनी पत्तलवार, कु. शिवानी पत्तलवार, साधना गायकवाड़, जयश्री केलकर, भाग्यश्री शुक्ला, सुनीता साठे, सविता मोघे, आस्था काले और कु अभिज्ञा शुक्ला शामिल हुई।

आध्यात्मिक समिति की प्रमुख सृष्टि दंडवते ने बताया कि इसी तरह चौबे कॉलोनी केंद्र की महिलाओं द्वारा हनुमान चालीसा पाठ चौबे कॉलोनी स्थित दशहरा मैदान में किया गया। इस अवसर पर मनीषा वरंवडकर, अंजली वैद्य, अल्का मराठे, आरती करंडे, संगीता निमोणकर, प्राची डोंनगांवकर और अक्षता पंडित उपस्थित रहीं। वहीं सरोना केंद्र की की सदस्यों और सालासर ग्रीन्स सोसायटी के सदस्यों द्वारा कालोनी में स्थित हनुमान मंदिर में हनुमान चालीसा पाठ किया गया। इस दौरान विभा पांडे, मीना परदेशी, आरती ठोंबरे, संध्या गुप्ता, इंदू साहू, अनुराधा मुखर्जी, प्रिया चौहान, रश्मी सक्सेना उपस्थित रहीं।

आध्यात्मिक समिति की संध्या खंगन ने बताया कि शंकर नगर केंद्र की महिलाओं द्वारा एक सदस्य के निवास पर पाठ किया गया। इस दौरान विजया गोरे, कांचन केळकर, निर्मला पिंपळे, माधवी मोघे सहित अन्य कई महिलाएं उपस्थित रहीं। वहीं डंगनिया केंद्र की महिलाओं ने मंडल परिसर में हनुमान चालीसा का पाठ किया। इस दौरान प्रीति काले, अनुभा जाउलकर, प्रीति रणदिवे, प्रियंका राजपूत, दिपांजली भालेराव, नमिता शेष, शैला गायधनी, श्रद्धा देशमुख, ज्योति डोळस, अपर्णा दबडधगाव, मिनाक्षी तारे, रश्मि डांगे, जया भाले, श्रद्धा मरघड़े, अनुजा महाड़िक, शुभांगी रूद्रजवार, वंदना तेलंग, सीमा देव, वर्षा नारखेड़कर और माधवी गिरहें शामिल हुई।

बिंबाजी भोंसले छत्तीसगढ़ के पहले मराठा शासक.... शिवाजी मराठों के नहीं हिंदूओं के राजा थेः सुधीर
- ‘हिंदवी स्वराज्य से साम्राज्य तक’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन वक्ता सुधीर थोराट ने रखे विचार
रायपुर। हिंदवी स्वराज की स्थापना शिवाजी महाराज ने 1645 में रखी, लेकिन इसका विस्तार 1674 से 1818 तक माना जाता है। वहीं छत्तीसगढ़ में मराठा साम्राज्य का आगमन 1741 में नागपुर के भोंसला शासकों के सेनापति भास्कर पंत के आक्रमण के साथ हुआ। उन्होंने रतनपुर के कलचुरी शासक रघुनाथ सिंह को हराकर मराठा सत्ता की नींव रखी। 1758 में बिंबाजी भोंसला ने प्रत्यक्ष मराठा शासन स्थापित किया। जिसके बाद यह क्षेत्र 1854 तक भोंसला राज्य का हिस्सा रहा। पेशवाओं के शासन के दौरान अंग्रेजों के साथ हुए तीसरे आंग्ल-मराठा युद्ध में हार के बाद इस साम्राज्य का अंत हुआ। जिसके बाद छत्तीसगढ़ सीपी बरार कहलाया। उक्त विचार महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में ‘हिंदवी स्वराज्य से साम्राज्य तक’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन श्री शिवाजी रायगढ़ स्मारक मंडल पुणे के कार्यवाह सुधीर थोराट ने इस आशय की जानकारी दी।
सुधीर थोराट ने कार्यशाला के दूसरे दिन 18वीं सदी में मराठा और मुगल शासकों के इतिहास के बारे में बताया। संभाजी महाराज के बेटे छत्रपति शाहू महाराज ने मराठा साम्राज्य के पुनरुत्थान और पेशवा प्रणाली की नींव रखी थी। उनका जीवन बेहद संघर्षपूर्ण और साहसी रहा है। संभाजी महाराज की मृत्यु के बाद शाहू जी महाराज और महारानी येशूबाई मुगलों के पास कैद था। इस दौरान संभाजी महाराज के छोटे भाई राजाराम जी महाराज और उनकी पत्नी तारा बाई ने जिंजी से सत्ता संभाली और मुगलों को काफी परेशान किया। 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद मुगलों ने मराठों में फूट डालने के लिए शाहू महाराज को रिहा कर दिया। उस समय मराठा गद्दी पर उनकी चाची ताराबाई और उनके बेटे का शासन था। शाहू महाराज ने अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया और 1707 में कोरेगांव की लड़ाई में विजय प्राप्त कर सतारा में अपना शासन स्थापित किया। इससे मराठा साम्राज्य दो भागों (सतारा और कोल्हापुर) में बंट गया।
सुधीर थोराट ने आगे कहा कि शाहू महाराज के शासनकाल में मराठा साम्राज्य का बहुत विस्तार हुआ। उन्होंने प्रशासन को सुव्यवस्थित किया और 'पेशवा' पद की शुरुआत की। उन्होंने बालाजी विश्वनाथ और बाद में बाजीराव प्रथम को अपना पेशवा नियुक्त किया, जिनके नेतृत्व में मराठा साम्राज्य ने पूरे भारत में अपनी विजय पताका फहराई। शाहू महाराज एक बेहद न्यायप्रिय, दयालु और दूरदर्शी शासक थे। (स्वराज) के विस्तार के दौरान मालवा और बुंदेलखंड क्षेत्र रणनीतिक और भौगोलिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण थे। पेशवा बाजीराव के नेतृत्व में मराठों ने इन क्षेत्रों में मुगल आधिपत्य को समाप्त कर 'स्वराज' का विस्तार किया, जिससे मराठा साम्राज्य उत्तर भारत में एक प्रमुख शक्ति बन गया पेशवा बाजीराव ने 1728 में पालखेड़ की लड़ाई जीतने के बाद मालवा में मराठा प्रभाव बढ़ाना शुरू किया। 1732 में पेशवा के भाई चिमाजी अप्पा ने मालवा की यात्रा कर प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ किया।
मराठा योद्धाओं की थी दोहरी भूमिका, चार माह किसान और आठ माह योद्धा
- शिवाजी महाराज की गोरिल्ला युद्ध नीति से मुगलों को किया था पस्त
रायपुर। छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने राज्याभिषेक के बाद रायगढ़ के किले से अपने हिंदवी स्वराज के स्वप्न की शुरुआत की। 1676 से 1678 के बीच उन्होंने सामरिक गहराई नीति के तहत तुंगभद्रा से कावेरी तक कई किले जीता। उनकी इस युद्ध नीति के आधार पर आगे चलकर संभाजी महाराज, राजाराम महाराज और रानी तारा देवी ने मुगलों की कमर तोड़कर रख दी। मराठा योद्धाओं की दोहरी भूमिका इतिहास के पन्नों में देखने को मिलती है। मराठा योद्धा चार माह किसान की भूमिका में होते और खेती किसानी का कार्य करते। वहीं आठ माह पर्याप्त मात्रा में रसद किसे में भंडारित कर युद्ध के लिए सज्ज रहते। महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज सभागृह में ‘हिंदवी स्वराज्य से साम्राज्य तक’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन श्री शिवाजी रायगढ़ स्मारक मंडल पुणे के कार्यवाह सुधीर थोराट ने इस आशय की जानकारी दी।

सुधीर थोराट ने आगे कहा कि मराठा साम्राज्य के दूसरे छत्रपति और शिवाजी महाराज के ज्येष्ठ पुत्र संभाजी महाराज ने करीब 8 साल शासन किया। अपने पिता की तरह ही, संभाजी महाराज एक अजेय योद्धा थे। उन्होंने अपने पराक्रम से मुगलों, जंजीरा के सिद्धियों, पुर्तगालियों और अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी। 1681 में औरंगजेब के दक्षिण भारत में आने के बाद, संभाजी महाराज ने लगातार 8 वर्षों तक गोरिल्ला युद्ध नीति (छापामार युद्ध) अपनाकर मुगल सम्राट के दक्षिण विजय के सपनों को धूल में मिला दिया। संगमेश्वर में धोखे से उन्हें मुगल सैनिकों ने पकड़ लिया। औरंगजेब ने उन पर धर्म परिवर्तन करने और मराठा किलों को सौंपने का दबाव डाला, लेकिन संभाजी महाराज ने अपना धर्म नहीं छोड़ा।

सुधीर थोराट आगे बताते है कि जिसके बाद 1689 से 1700 तक शिवाजी महाराज के छोटे बेटे राजाराम जी महाराज ने हिंदवी स्वराज की कमान संभाली। मुगलों द्वारा रायगढ़ को घेर लिए जाने के बाद, राजाराम महाराज तमिलनाडु के जिंजी किले में चले गए। वहाँ से उन्होंने लगभग 8 वर्षों तक संताजी घोरपड़े और धनाजी जाधव जैसे वीर सेनापतियों के माध्यम से मुगलों के खिलाफ सफल युद्ध का संचालन किया। जिंजी के पतन से पहले ही 1698 में वे सुरक्षित महाराष्ट्र लौट आए और सातारा को मराठा साम्राज्य की नई राजधानी बनाया।
सुधीर थोराट ने आगे बताया कि महज 30 वर्ष की आयु में राजाराम महाराज के निधन हो गया। इसकी सूचना पर मुगलों ने यह मान लिया कि अब हिंदवी स्वराज टूट जाएगा। लेकिन राजाराम की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी महारानी ताराबाई ने मुगलों के खिलाफ मराठा प्रतिरोध का नेतृत्व संभाला। उन्होंने 1700 से 1707 तक मुगलों को कई युद्धों में परास्त किया।
महाराष्ट्र मंडल में हुई छत्रपति शिवाजी महाराज की महाआरती
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल में ‘हिंदवी स्वराज्य से साम्राज्य तक’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन 19 जुलाई को मंडल परिसर में स्थापित छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा के समक्ष महाआरती की गई। आरती कार्यक्रम में मुख्त वक्ता के रुप में पहुंचे विक्रमसिंह मोहिते, भारतीय विद्या पारंगत, पुणे और सुधीर थोरात, कार्यवाह, श्री शिवाजी रायगढ़ स्मारक मंडल, पुणे और महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले व कार्यकारिणी की उपस्थिति में किया गया।

महाराष्ट्र मंडल के छत्रपति शिवाजी महाराज कार्यक्रम आयोजन समिति के समन्वयक अभिषेक बक्षी ने बताया कि मंडल भवन में प्रतिमा स्थापना के बाद नई प्रतिमा के समक्ष आरती का यह दूसरा अवसर था। ‘हिंदवी स्वराज्य से साम्राज्य तक’ विषय पर आयोजित कार्यशाला के दौरान उपस्थित दर्शकों ने भी इस आरती में भाग लिया।
इस अवसर पर मंडल अध्यक्ष ने कहा कि यह हमारा सौभाग्य है कि हम महीने की हर 19 तारीख को शिवाजी महाराज की महाआरती करते है। 6 जून को मंडल परिसर में शिवाजी महाराज की सिंहासनस्थ प्रतिमा स्थापित होने के बाद दूसरे महीने महाआरती धूमधाम के साथ की जा रही है। दो दिवसीय कार्यशाला में आने वाले सभासदों ने भी इसमें सहभागिता निभाई। यह आरती प्रतिमाह मंडल की युवा समिति द्वारा की जाती है।
शिवाजी महाराज ने दक्षिण दिग्विजय की सामरिक गहराई से जीते 360 किले


