छत्तीसगढ़
महतारी वंदन योजना अंतर्गत महिलाओं के खाते में 642 करोड़ रूपए की राशि का किया अंतरण
रायपुर। सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय राजनांदगांव जिले के मोतीपुर में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने जनकल्याण और सुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए महतारी वंदन योजना के तहत 27वीं किस्त के रूप में 68 लाख 52 हजार से अधिक महिलाओं के खातों में 642 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरण किया। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं अधिकारीगण उपस्थित थे।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने राजनांदगांव एवं आसपास के क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए कई महत्वपूर्ण अधोसंरचनात्मक परियोजनाओं की घोषणा की। इनमें राजनांदगांव-खैरागढ़ राजमार्ग के लिए 200 करोड़ रुपये की लागत से नवीन बाईपास निर्माण, टेड़ेसरा-घुमका-बाकल मार्ग (35 किमी) के चौड़ीकरण हेतु 75 करोड़ रुपयेnतथा धनगांव-इंदामरा-बांकल मार्ग के लिए 30 करोड़ रुपये की स्वीकृति प्रमुख हैं। इसके साथ ही शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्रमांक 1, 2, 3 और 8 में विकास कार्यों के लिए प्रत्येक वार्ड को 25-25 लाख रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। डोंगरगढ़ में माँ बम्लेश्वरी मंदिर के समीप 15 कमरों के सर्किट हाउस, जनपद पंचायत राजनांदगांव के नवीन भवन के लिए 1 करोड़ रुपये, हॉकी प्रशिक्षण हेतु नए खेल मैदान तथा महिला स्व-सहायता समूहों को पुनः रेडी-टू-ईट निर्माण की जिम्मेदारी देने की भी घोषणा की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सुशासन तिहार सरकार की “जनता तक सीधी पहुँच” की कार्यशैली का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि 1 मई से प्रारंभ हुआ सुशासन तिहार 10 जून तक संचालित होगा, जिसके माध्यम से प्रदेशभर में जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना के प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक मजबूती में योगदान दे रही हैं, बल्कि स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने पीएम जनमन एवं प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों से संवाद कर योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की जानकारी भी प्राप्त की।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री की जनसमर्पित कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि वे प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचकर जनता से सीधे संवाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अत्यधिक तापमान के बावजूद मुख्यमंत्री का यह सतत प्रवास सुशासन के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने राजनांदगांव जिले में चल रहे औद्योगिक विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि ग्राम पटेवा में लगभग 345 करोड़ रुपये की लागत से इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर तथा ग्राम बिजेतला में 25 करोड़ रुपये की लागत से स्पेस मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर स्थापित किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।
सुशासन तिहार: मुख्यमंत्री साय ने पीएम जनमन के हितग्राही को सौंपी खुशियों की चाबी
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सुशासन तिहार के अंतर्गत जारी राज्यव्यापी दौरे में आज खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के छुईखदान विकासखंड के ग्राम सरोधी में प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत सुभान सिंह मेरावी को उनके नवनिर्मित आवास की चाबी सौंपकर गृह प्रवेश कराया।
सुभान सिंह ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि मुख्यमंत्री स्वयं उनके गांव आकर उन्हें यह सौभाग्य देंगे। उनके लिए यह केवल घर नहीं, बल्कि सम्मान और विश्वास का प्रतीक है।बउन्होंने बताया कि उन्हें वन अधिकार पट्टा के तहत 3 एकड़ 2 डिसमिल भूमि मिली है, जिस पर खेती कर वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। साथ ही उनकी पत्नी को महतारी वंदन योजना के तहत नियमित आर्थिक सहायता भी मिल रही है, जिससे घरेलू जरूरतों में सहयोग मिल रहा है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ग्रामीणों से संवाद करते हुए कहा कि शासन का लक्ष्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।
एक माह के नवजात का मुख्यमंत्री ने किया नामकरण, “रविशंकर” नाम से गूंजा आंगन
रायपुर। सुशासन तिहार के अंतर्गत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का कबीरधाम जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा बाहुल्य ग्राम कमराखोल (ग्राम पंचायत लोखान) में आगमन एक आत्मीय और भावनात्मक प्रसंग का साक्षी बना। आम के पेड़ की छांव में खाट पर बैठकर जब मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ चौपाल लगाई, तो वहां का वातावरण पूरी तरह से अपनत्व और विश्वास से भर गया। शासन और जनता के बीच की दूरी इस सहज संवाद में पूरी तरह समाप्त होती नजर आई।
इसी दौरान ग्राम की निवासी ऋषि बघेल अपने एक माह के नवजात शिशु को गोद में लेकर मुख्यमंत्री के पास पहुंचीं और अत्यंत विनम्रता से अपने पुत्र का नामकरण करने का आग्रह किया। यह एक साधारण निवेदन था, लेकिन उसमें ग्रामीण जीवन की सादगी, विश्वास और आत्मीय जुड़ाव की गहराई साफ झलक रही थी।
मुख्यमंत्री ने भी पूरे स्नेह और संवेदनशीलता के साथ इस आग्रह को स्वीकार किया और बच्चे के जन्म दिवस के बारे में जानकारी ली।जब श्रीमती बघेल ने बताया कि बालक का जन्म रविवार के दिन हुआ है, तो मुख्यमंत्री ने मुस्कुराते हुए उस नवजात का नाम “रविशंकर” रखा। नामकरण के इस क्षण ने वहां उपस्थित सभी ग्रामीणों के चेहरे पर खुशी की चमक बिखेर दी। जैसे ही यह नाम घोषित हुआ, पूरा चौपाल स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा और एक उत्सव जैसा माहौल बन गया।
इस आत्मीय क्षण ने सुशासन तिहार की मूल भावना को और अधिक सशक्त रूप से प्रस्तुत किया, जहां शासन केवल योजनाओं के क्रियान्वयन तक सीमित नहीं, बल्कि लोगों के जीवन के सुख-दुख में सहभागी बनकर उनके साथ खड़ा होता है। मुख्यमंत्री का यह सहज और मानवीय व्यवहार यह दर्शाता है कि सुशासन का वास्तविक अर्थ लोगों के जीवन से जुड़कर उनकी भावनाओं को समझना और उन्हें सम्मान देना है।
'मेरा गांव मेरा गौरव' के तहत रायपुर में विज्ञान आधारित पोषक तत्व प्रबंधन पर जागरूकता अभियान
रायपुर। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान (ICAR-NIBSM), रायपुर द्वारा आज तिल्दा ब्लॉक के बिठिया गांव में 'विज्ञान आधारित पोषक तत्व प्रबंधन (उर्वरकों का संतुलित उपयोग) अपनाने' पर राष्ट्रीय जागरूकता अभियान के तहत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
'मेरा गांव मेरा गौरव' पहल और अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत आयोजित यह कार्यक्रम, देश भर में टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की अनुमोदित कार्य योजना के अनुरूप है। सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग एवं महानिदेशक (भा.कृ.अनु.प.) द्वारा अनुमोदित इस राष्ट्रीय अभियान की निगरानी सीधे कैबिनेट सचिवालय, भारत सरकार द्वारा की जा रही है, ताकि जमीनी स्तर पर वैज्ञानिक खेती की तकनीकों का प्रभावी प्रसार सुनिश्चित किया जा सके।
तकनीकी सत्रों के दौरान, संस्थान की वैज्ञानिक डॉ. श्रावणी सान्याल और प्रधान वैज्ञानिक एवं टीम लीडर डॉ. के.सी. शर्मा ने किसान समुदाय को उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के महत्व के बारे में जागरूक किया। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि पोषक तत्वों का संतुलित उपयोग न केवल फसल उत्पादकता बढ़ाने के लिए बल्कि मिट्टी के दीर्घकालिक स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए भी अनिवार्य है। कार्यक्रम में रासायनिक निर्भरता को कम करने और स्थानीय खेती के पारिस्थितिक पदचिह्न (ecological footprint) को सुधारने के लिए डिज़ाइन किए गए विभिन्न पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों और टिकाऊ पोषक तत्व प्रबंधन प्रथाओं पर प्रकाश डाला गया।
इस कार्यक्रम में स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी देखी गई, जिसमें कुल 40 किसान शामिल हुए। इनमें 18 महिला किसानों की उपस्थिति कृषि विस्तार के प्रति एक समावेशी दृष्टिकोण को दर्शाती है। बिठिया गांव के सरपंच दुष्यंत साहू ने भी कार्यक्रम में शिरकत की और उपस्थित किसानों से अपनी आजीविका सुधारने के लिए इन विज्ञान आधारित हस्तक्षेपों को अपनाने का आग्रह किया। ऐसी 'MGMG' पहलों के माध्यम से, भाकृअनुप-एनआईबीएसएम वैज्ञानिक दृष्टिकोण और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन के जरिए भारतीय कृषि को बदलने के राष्ट्रीय मिशन में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के 10वीं-12वीं के मेधावी विद्यार्थियों का किया सम्मान
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए हौसला बुलंद रखना सबसे आवश्यक है। बलरामपुर स्थित सर्किट हाउस में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने विद्यार्थियों से आत्मीय संवाद किया और उनके भविष्य के लक्ष्यों के बारे में जानकारी ली। अधिकांश विद्यार्थियों ने डॉक्टर और इंजीनियर बनने की इच्छा व्यक्त की, वहीं कुछ ने भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और न्यायिक सेवा में जाने का संकल्प व्यक्त किया।
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के सपनों की सराहना करते हुए कहा कि सपना देखना और उसे लक्ष्य में बदलकर निरंतर प्रयास करना ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि समर्पण, अनुशासन और आत्मविश्वास के साथ मेहनत की जाए, तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर जिले के कक्षा 12वीं के मेधावी विद्यार्थियों में वाड्रफनगर विकासखंड के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय करमडीहा की कुमारी प्रतिभा गुप्ता, रामचंद्रपुर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर की कुमारी स्नेहा कुशवाहा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय सनवाल के सोनू, वाड्रफनगर के श्री कृष्णा, आदर्श हायर सेकंडरी विद्यालय बलंगी की कुमारी प्रिया लता कश्यप तथा शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बर्तीकला के अजय गुप्ता, कक्षा 10वीं के मेधावी विद्यार्थियों में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जामवंतपुर के आर्यन गुप्ता, नेशनल पब्लिक इंग्लिश मीडियम हायर सेकेंडरी स्कूल रजखेता की कुमारी आराधना पटेल, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रघुनाथनगर की कुमारी रोशनी कांशी, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय सेमरा कुसमी की आलिया परवीन तथा स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय रामानुजगंज की आरजू परवीन को मुख्यमंत्री से मिलने और मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।
शादी में जा रहे युवकों की कार हादसे का शिकार... चार की मौत, दो गंभीर
रायपुर। छत्तीसगढ़ में रविवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। शादी समारोह में शामिल होने जा रहे छह युवक कार दुर्घटना का शिकार हो गए, जिसमें चार युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
बिरगांव पार्षद इकराम के अनुसार, यह हादसा शाम करीब 6 से 7 बजे के बीच हुआ। युवक बिरगांव से पंडरिया जा रहे थे। पांडातराई के गंड़ईकला नदी के पास स्थित पुल के निकट कार का ब्रेक फेल हो गया, जिससे वाहन अनियंत्रित होकर पुल के नीचे जा गिरा।
मृतकों की पहचान अरमान अली (20), मोहम्मद सैफ (19), अनस अली (21) और कौनैन (19) के रूप में हुई है। वहीं, जुनेद रजा (21) और आरजु खान (19) गंभीर रूप से घायल हैं और उनका इलाज जारी है।
पहले भी हो चुका है हादसा
कुछ दिन पहले नेशनल हाईवे पर एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर पलट गई थी, जिसमें एक ही परिवार के 10 लोग घायल हो गए थे। यह परिवार शादी समारोह से लौट रहा था। प्रशासन ने लोगों से वाहन चलाते समय सावधानी बरतने और गति नियंत्रित रखने की अपील की है।
“शादी का भोज बना मुसीबत: फूड पॉइजनिंग से 46 लोग बीमार, 2 की हालत गंभीर
भारतीय जैन संघटना का “वस्त्र संगम एवं विद्यादान” संपन्न
रायपुर। भारतीय जैन संघटना, छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में 3 मई को पूरे राज्य के 50 से अधिक केंद्रों पर “वस्त्र संगम एवं विद्यादान” कार्यक्रम अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस सेवा अभियान के अंतर्गत लगभग एक लाख से अधिक वस्त्र एवं बड़ी मात्रा में पुस्तकें जरूरतमंद छात्रों एवं परिवारों को वितरित की गईं, जिससे हजारों लोगों ने प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त किया।
प्रदेश अध्यक्ष विजय गंगवाल एवं महासचिव विकास गोलछा ने बताया कि यह कार्यक्रम संगठन के नेशनल हेड मनोज लूँकड़ के नेतृत्व एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री संजय सिंघी और प्रमोद लूणावत जी के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सीए विजय मालू, अमरेश जैन, चिरंजीव जैन, अनीता सखलेचा एवं श्रीमती सुधन पिंचा का विशेष संयोजन रहा। इस आयोजन में सकल जैन समाज एवं सभी स्थानीय मंडलों का सराहनीय सहयोग प्राप्त हुआ। कार्यक्रम रायपुर, बिलासपुर, मुंगेली, राजनांदगांव, डोंगरगांव, पंडरिया, अकलतरा, महासमुंद, बागबाहरा, खड़ियार रोड, तिल्दा, नारायणपुर, धमतरी, नगरी, खैरागढ़,जगदलपुरसहित विभिन्न केंद्रों पर संपन्न हुआ।
अकलतरा केंद्र में इस कार्यक्रम के साथ स्वास्थ्य शिविर एवं विशेष सेवा देने वालों का सम्मान समारोह भी आयोजित किया गया इस कार्यक्रम में विशेष रूप से संजय सिंगी, मनोज लुंकड़, प्रमोद लूणावत राज्य अध्यक्ष विजय गंगवाल तथा विशेष अतिथि में नीलम सँखला रिटायर्ड जज जितेन्द्र जैन डिस्ट्रिक्ट जज रायगढ़, पंकज जैन रजिस्ट्रार छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय, प्रकाश मोदी संचालक पारस चैनल, विनोद जैन सकल जैन समाज के अध्यक्ष बिलासपुर एवम बीजेएस स्टेट के संरक्षक विमल चोपड़ा जी आदि की उपस्थिति रही। कार्यक्रम में शहरों के जनप्रतिनिधियों की भी सक्रिय सहभागिता रही, साथ ही जैन समाज के अनेक गणमान्य एवं प्रतिष्ठित नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही। यह सेवा कार्य समाज की एकता, सहयोग एवं सेवा भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है।
भोरमदेव जंगल सफारी शुरू... वन्यजीव, पहाड़ और झरनों के बीच पर्यटकों को मिलेगा अनोखा अनुभव
रायपुर। कबीरधाम जिले में प्रकृति और रोमांच के संगम के रूप में विकसित भोरमदेव जंगल सफारी का आज भव्य शुभारंभ हुआ। प्रदेश के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा एवं वन मंत्री केदार कश्यप, सांसद संतोष पाण्डेय ने फीता काटकर इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का लोकार्पण किया। लगभग 36 किलोमीटर लंबी यह जंगल सफारी घने वनों, ऊँची पहाड़ियों और समृद्ध जैव विविधता के बीच पर्यटकों को न केवल रोमांचक अनुभव देगी, बल्कि छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक सौंदर्य के बीच इको-टूरिज्म के नक्शे पर नई पहचान भी मिलेगी। करीब 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस अभ्यारण्य में 36 किलोमीटर लंबा जंगल सफारी रूट तैयार किया गया है। सफारी का मुख्य प्रवेश द्वार भोरमदेव मंदिर के समीप करियाआमा क्षेत्र में बनाया गया है, जहां से पर्यटक प्रवेश करेंगे।
शुभारंभ कार्यक्रम में अतिथियों द्वारा नेचर गाइड को जिप्सी की चाबी एवं टेंट कैंपिंग सामग्री प्रदान की गई तथा महिला स्व-सहायता समूहों को बर्तन किट वितरण किया गया। इसके बाद अतिथियों द्वारा दूरदूरी जलप्रपात तक सफारी भ्रमण किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष चंद्र प्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य राम कुमार भट्ट, वीरेंद्र साहू, पूर्व संसदीय सचिव सियाराम साहू, पूर्व संसदीय सचिव मोतीराम चंद्रवंशी, लोकचंद साहू, अध्यक्ष, संयुक्त वन प्रबंधन समिति थवरझोल जग्गू सिंह, सरपंच ग्राम पंचायत चौरा दुर्गा लांझे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सह मुख्य वन्यजीव वार्डन रायपुर अरुण कुमार पाण्डेय, मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) रायपुर गुरूनाथन एन., मुख्य वन संरक्षक दुर्ग वृत्त एम. मर्सीबेला, कलेक्टर गोपाल वर्मा, पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र कुमार छवई, डीएफओ निखिल अग्रवाल, सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि भोरमदेव जंगल सफारी घने जंगलों के बीच विकसित एक रोमांचक और अद्वितीय पर्यटन स्थल है, जहाँ पर्यटक प्राकृतिक परिवेश में खुले वातावरण में वन्यजीवों को नजदीक से देख सकेंगे। उन्होंने इस क्षेत्र के मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह स्थान प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। विशेष रूप से, स्थानीय युवक-युवतियाँ पर्यटकों के लिए गाइड के रूप में कार्य कर सकेंगे, जिससे न केवल उनकी आय बढ़ेगी बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।
सोशल मीडिया में बिजली संकट का दावा भ्रामक
रायपुर। इन दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित एक पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि कोयले की कमी के कारण भारत गंभीर बिजली संकट और ग्रिड फेल होने की स्थिति का सामना कर रहा है। ये दावा भ्रामक हैं और अनावश्यक घबराहट फैलाने का प्रयास करते हैं। केंद्र सरकार ने इसे लेकर स्थिति स्पष्ट की है।
मिला जानकारी के अनुसार 2 मई 2026 को अधिकतम पीक डिमांड 229 गीगावाट रही, जिसे पूरी तरह पूरा किया गया और किसी प्रकार की कमी नहीं रही। वर्तमान में तापीय विद्युत संयंत्रों के पास कुल कोयला भंडार 53.702 मिलियन टन है, जो आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।
देश में बिजली की उपलब्धता पर्याप्त है, और ग्रिड संचालन एवं वितरण सुव्यवस्थित योजनाओं के अनुसार प्रबंधित किए जा रहे हैं। मौजूदा फ्रीक्वेंसी कंट्रोल डिफेंस मैकेनिज्म सुरक्षित ग्रिड संचालन सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त परिचालन मार्जिन प्रदान करते हैं। यदि आपको भारत सरकार से संबंधित ऐसा कोई भ्रामक कंटेंट दिखाई दे, तो तुरंत रिपोर्ट करें।
12वीं बोर्ड की परीक्षा में नकल: हाई कोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव से शपथ पत्र के साथ मांगा जवाब
रायपुर। बिलासपुर हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्कूल शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। डिवीजन बेंच ने शपथ पत्र के साथ यह जानकारी देने कहा है, मीडिया में जिन नामों का उल्लेख नकल कराने के लिए किया है, उन शिक्षकों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। स्टिंग करने वाली छात्रा की शिकायत के बाद की गई कार्रवाई के संबंध में शपथ पत्र में विस्तार के साथ जानकारी देने का निर्देश दिया है।
महासमुंद जिले के भंवरपुर केंद्र में 12वीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान, नीता नाम की एक छात्रा ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए परीक्षा हॉल में खुलेआम नकल में मदद करने की गतिविधि को रिकॉर्ड किया और सबूतों के साथ शिकायत दर्ज कराई। जिला स्तर पर सुनवाई न होने पर, वह माध्यमिक शिक्षा मंडल के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज कराने गई।
बोर्ड के अधिकारी मामले की व्यक्तिगत रूप से जांच कर रहे हैं। उन्होंने छात्रा द्वारा प्रस्तुत सबूतों की भी गहन समीक्षा की है। यह भी बताया गया है, जब छात्रा ने पूरे मामले का विरोध किया और केंद्र के अधीक्षक से शिकायत की, तो उसे चुप करा दिया गया। उसे चेतावनी दी गई, वह इस बारे में किसी से बात न करे। यहां तक कि जब उसने अपने विभाग को इस बारे में बताया तब भी उसे चुप करा दिया गया।
स्कूल के प्रिंसिपल से उसे कोई समर्थन नहीं मिला; इसके बजाय उसे डांट-फटकार ही मिली। लगातार दबाव और धमकियों के कारण नीता मानसिक तनाव में आ गई और बीमार भी पड़ गई, लेकिन उसने नकल के खिलाफ आवाज उठाना बंद नहीं किया।
मिट्टी ने अपने लाल को दी विदाई: वीर जवान कृष्ण कुमार कोमरा पंचतत्व में विलीन
रायपुर। कांकेर-नारायणपुर सीमा पर आईईडी विस्फोट के दौरान नक्सलियों द्वारा छिपाए गए बारूद को निष्क्रिय करते हुए शहीद हुए जवान कृष्ण कुमार कोमरा को आज पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। जैसे ही उनका पार्थिव शरीर भानुप्रतापपुर पहुंचा, पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया—लेकिन उस शोक में गर्व की एक गूंज भी साफ सुनाई दे रही थी। भानुप्रतापपुर के मुख्य चौक पर सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए।
हर आंख नम थी, हर हाथ सलामी में उठा हुआ… भारत माता की जय और कृष्ण कुमार कोमरा अमर रहे नारों से वातावरण गूंज उठा। लोगों ने फूल अर्पित कर अपने वीर सपूत को अंतिम प्रणाम किया।इसके बाद अंतिम यात्रा उनके पैतृक गांव के लिए रवाना हुई, जो भानुप्रतापपुर से लगभग 30 किलोमीटर दूर स्थित है लोहात्तर। गांव पहुंचते ही माहौल और भी भावुक हो गया परिवार के आंसू, ग्रामीणों की भीगी आंखें और हर दिल में अपार गर्व… सब कुछ एक साथ दिखाई दिया। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की गई।
आज शाम बिलासपुर एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए उड़ान
एलाइंस एयर द्वारा हाल ही में घोषणा की गई है कि यह फ्लाइट सप्ताह में केवल एक दिन, रविवार को शाम 6:45 बजे संचालित होगी। यह फ्लाइट तीन मई को पहली बार बिलासपुर से रवाना होगी। हालांकि यात्रियों और स्थानीय संगठनों की मांग है कि इस सेवा को सप्ताह में कम से कम दो दिन किया जाए, जिसमें रविवार के साथ बुधवार को भी उड़ान शामिल हो।बिलासपुर से दिल्ली के लिए शाम या तड़के सुबह उड़ान की मांग काफी लंबे समय से की जा रही थी। अब इस सेवा के शुरू होने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि यदि समय सारणी नियमित और सुविधाजनक रही, तो इस रूट पर यात्रियों की संख्या और बढ़ सकती है।
वाटर फिल्टर प्लांट में भीषण आग — दमकल टीम ने समय रहते पाया काबू, बड़ा हादसा टला
तीन जवान शहीद: एंटी नक्सल अभियान के दौरान हादसा, DRG प्रभारी सहित तीन जवान शहीद
इस हादसे के बाद बस्तर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। शहीद जवानों के परिवारों में मातम पसरा हुआ है, वहीं पुलिस विभाग और प्रशासन ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की है।
LPG गैस की कालाबाजारी से जुड़ा बड़ा घोटाला उजागर
डिजिटल जनगणना: बस्तर ने रचा इतिहास, रायपुर में ड्यूटी से गायब 44 कर्मचारियों को नोटिस जारी
रायपुर। भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण—मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना (Houselisting and Housing Census)—का फील्ड कार्य छत्तीसगढ़ राज्य के सभी जिलों में शुक्रवार से आधिकारिक रूप से प्रारंभ हो गया है। इस राष्ट्रव्यापी महाभियान के सफल संचालन हेतु राज्य में 51,300 प्रगणक (Enumerators) एवं 9,000 पर्यवेक्षक (Supervisors) नियुक्त किए गये हैं, जो 30 मई तक घर-घर जाकर डेटा संकलन का कार्य संपन्न करेंगे।
जनगणना कार्य के प्रथम दिवस ही बस्तर जिले के तोकापाल तहसील स्थित अत्यंत दुर्गम क्षेत्र के ग्राम 'गाटम' से एक उत्साहजनक खबर आई। यहाँ के प्रगणक ने अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण से विषम परिस्थितियों के बावजूद पहले ही दिन ग्राम का कार्य पूर्ण कर लिया। प्रगणक की इस उपलब्धि ने प्रशासनिक स्तर पर न केवल प्रशंसा बटोरी है, बल्कि पूरे राज्य के फील्ड कार्यकर्ताओं के बीच भारी उत्साह का संचार किया है। जनगणना निदेशालय ने इसे राष्ट्र सेवा के प्रति एक उत्कृष्ट मिसाल बताया है।
एक ओर जहाँ निष्ठा की मिसाल पेश की जा रही है, वहीं दूसरी ओर लापरवाही बरतने वालों पर प्रशासन सख्त है। रायपुर नगर निगम क्षेत्र में जनगणना ड्यूटी में लगाए गए 44 कर्मचारी कार्यस्थल पर अनुपस्थित पाए गए, जिन्हें नगर निगम आयुक्त द्वारा तत्काल कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। संबंधित प्रशासन द्वारा इन कर्मियों के विरुद्ध 'जनगणना अधिनियम 1948' एवं 'छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम' के तहत दंडात्मक कार्यवाही की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनगणना कार्य में बाधा डालना या इंकार करना इस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध है।
देश में पहली बार जनगणना पूर्णतः डिजिटल माध्यम से की जा रही है, जिसमें प्रगणक मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से 33 प्रश्नों की जानकारी एकत्रित कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में आम नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल तक उपलब्ध 'स्व-गणना' (Self-Enumeration) विकल्प के माध्यम से 1,49,862 परिवारों ने वेब पोर्टल पर अपनी जानकारी स्वयं दर्ज कर अपनी सीधी भागीदारी सुनिश्चित की है।
निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों द्वारा दी गई सभी व्यक्तिगत जानकारियां 'जनगणना अधिनियम 1948' के प्रावधानों के अंतर्गत पूर्णतः गोपनीय रखी जाएंगी। इस जानकारी का उपयोग किसी भी प्रकार की पुलिस जांच, टैक्स निर्धारण या कानूनी साक्ष्य के रूप में नहीं किया जा सकता और न ही यह RTI के माध्यम से प्राप्त की जा सकती है। इसका एकमात्र उद्देश्य भविष्य की जनकल्याणकारी योजनाओं और नीति निर्माण में सहयोग करना है। अतः नागरिकों से अपील है कि वे प्रगणकों को सही-सही जानकारी देकर राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य सहयोग प्रदान करें।